गर्भावस्था के छठे महीने की सम्पूर्ण जानकारी

All about 6 month of pregnancy in hindi

6 mahine ke bare mein saari jankari in hindi


एक नज़र

  • सामान्य तौर पर कुछ गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के छठे महीने में कब्ज़ और अपच की शिकायत बनी रहती है।
  • गर्भावस्था के छठे महीने का लक्षण कमर में दर्द का तेज़ होना भी आम माना जाता है।
  • गर्भवस्था के छठे महीने में पेट में दर्द रहित मरोड़ उठना भी एक सामान्य लक्षण माना जाता है।
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Introduction

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गर्भकाल का समय धीरे-धीरे बीतता हुआ जब आधा पड़ाव पार कर लेता है तब महिला, कुछ संतुष्ट तो कुछ उत्साही हो जाती है।

लेकिन, इस उत्साह के साथ ही गर्भावस्था के छठे महीने (sixth month of pregnancy in hindi) की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने की उत्कंठा भी मन में रहती है।

आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं, गर्भावस्था के 6 महीने के शारीरिक लक्षण क्या होते हैं, इस दौरान सेक्स करना सुरक्षित होता है या नहीं और इस वक़्त महिला को क्या खाना-पीने चाहिए।

इसके साथ ही जानिये प्रेगनेंसी के 6 वीक में होने वाले पिता को गर्भवती महिला का किस तरह साथ देना चाहिए।

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इस लेख़ में

  1. 1.गर्भावस्था के छठे महीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?
  2. 2.गर्भावस्था के छठे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?
  3. 3.गर्भावस्था के छठे महीने में महिला में शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन क्या हो सक
  4. 4.गर्भावस्था के छठे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?
  5. 5.गर्भावस्था के छठे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?
  6. 6.गर्भावस्था के छठे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं?
  7. 7.गर्भावस्था के छठे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?
  8. 8.गर्भावस्था के छठे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?
  9. 9.गर्भावस्था के छठे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से होत
  10. 10.गर्भावस्था के छठे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?
  11. 11.गर्भावस्था के छठे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?
  12. 12.प्रेग्नेंसी के छठे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?
 

गर्भावस्था के छठे महीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?

What are the symptoms of pregnancy in the sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Chathey mahine ke Lakshan kya ho sakte hain in hindi

गर्भावस्था का छठा महीना गर्भकाल का अंतिम महीना होता है, जो 21वें हफ्ते से शुरू होती है और 24वें हफ्ते में खत्म होती है।

प्रेगनेंसी के 6 महीने से दूसरी तिमाही आरम्भ होती है।

इस समय तक गर्भवती महिला के शरीर में विभिन्न प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें अधिकतर महिलायें पहचान नहीं पाती हैं।

सामान्य तौर पर गर्भावस्था के छठे महीने के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं : -

1. पैरों में सूजन (Swelling and pain in ankles in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला के शरीर के विभिन्न हिस्से जिनमें मुख्य रूप से पैर होते हैं, उनमें सूजन आ जाती है।

इसके कारण कभी-कभी महिला को दर्द भी महसूस हो सकता है।

यह सूजन कभी-कभी हाथों में भी दिखाई दे सकती है।

इस सूजन और दर्द को गर्भावस्था के छठे महीने के लक्षण में मुख्य माना जाता है।

इसका मुख्य कारण यह माना जाता है कि गर्भवती महिला का शरीर, इस समय प्रसव के लिए तैयार होने लगता है।

इसके लिए शरीर की कोशिकाएँ और उत्तक तरल पदार्थ से भर जाते हैं, जो गर्भवती महिला और उसके गर्भ के शिशु के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं।

इस समय पैरों की सूजन और दर्द से आराम के लिए, महिला को अधिक देर तक खड़े होकर काम न करके, बैठते समय पैरों के नीचे आरामदायक सहारा लेना चाहिए।

2. कब्ज़ और अपच की अधिकता (Constipation and digestion issues in sixth month of pregnancy in hindi)

सामान्य तौर पर कुछ गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के छठे महीने में कब्ज़ और अपच की शिकायत बनी रहती है।

इसका मुख्य कारण तो गर्भकाल में शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन हैं, जिनके कारण पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है।

इसके अतिरिक्त छठे माह में गर्भाशय का आकार काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण मलाशय पर भार पड़ता है।

इसके साथ ही पूरे गर्भकाल में महिला द्वारा ली जाने वाली दवाइयों और सपलीमेंट्स के कारण भी पेट में मल सूखने की शिकायत हो जाती है।

इसलिए प्रेग्नेंसी डॉक्टर इस समय महिलाओं को अधिक से अधिक पानी पीने और फाइबर युक्त भोजन करने की हिदायत देते हैं।

3. खाने की लालसा और बढ़ी हुई भूख (Increased appetite and food cravings in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के छठे महीने का लक्षण, खाने की लालसा और बढ़ी हुई भूख को भी माना जाता है।

इसका कारण है कि इस समय गर्भ के शिशु का पूर्ण विकास हो चुका होता है और वह अपने पोषण का भाग गर्भवती माँ के पोषण से ही प्राप्त करता है।

इसलिए कहा जाता है कि गर्भवस्था के छठे माह में महिला दो व्यक्तियों के लिए भोजन करती है।

4. कमर में दर्द (Severe backache in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के छठे महीने का लक्षण कमर में दर्द का तेज़ होना भी आम माना जाता है।

इसका मुख्य कारण गर्भ के बढ़े हुए आकार का रीढ़ की हड्डी और पेल्विक एरिया पर भार पड़ना माना जाता है।

गर्भाशय के भार अधिक होने के कारण रीढ़ की हड्डी में नीचे की ओर झुकाव आ जाता है, जिस कारण कमर में दर्द बना रहता है।

सामान्य रूप में यह लक्षण प्रसव के बाद दूर भी हो जाता है।

5. खर्राटों की समस्या (Snoring and other nasal congestion in sixth month of pregnancy in hindi)

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के छठे महीने में ख़र्राटों की समस्या खड़ी हो जाती है।

प्रेग्नेंसी में हार्मोनल परिवर्तनों और गर्भावस्था के भार के कारण नाक पर दबाव पड़ने से यह समस्या उत्पन्न हो जाती है।

इस लक्षण में आराम देने के लिए रात को सोते समय भाप लें या फिर डॉक्टर की सलाह से कोई अच्छी नेज़ल ड्रॉप ड़ाल कर सोएँ।

6. शारीरिक वज़न में वृद्धि (Increased body weight in sixth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से गर्भावस्था के छठे महीने का लक्षण शारीरिक वज़न में वृद्धि का होना भी प्रमुख माना जाता है।

इस समय महिला का आमतौर पर 1-2 किलो तक बढ़ जाता है।

इसके कारण छह माह की गर्भवती महिला का चलते समय सांस फूलने की शिकायत भी हो सकती है।

7. शारीरिक थकान में अधिकता (High fatigue in sixth month of pregnancy in hindi)

शारीरिक वजन और गर्भ के भार के कारण गर्भवस्था के छठे महीने में शारीरिक थकान में अधिकता भी एक मुख्य लक्षण माना जाता है।

इसके अलावा इस अवस्था में महिला का अधिकतर पोषण गर्भ के शिशु को पहुँच जाता है।

इस कारण भी गर्भवती महिला को छठे महीने में थकान अधिक महसूस होती है।

8. नकसीर (Nose Bleeding in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भ के छठे महीने में नकसीर के आने का मुख्य कारण एस्ट्रोजेन हार्मोन का अधिक बनना है।

इस हार्मोन की अधिकता के कारण नाक में सूजन हो जाती है और हवा आने-जाने का रास्ता संकरा होने के कारण नक्सीर अधिक छूटती है।

9. योनि से सफ़ेद स्त्राव (White discharge from vagina in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के छठे महीने में योनि से सफ़ेद स्त्राव होना एक सामान्य लक्षण माना जाता है।

इसका मुख्य कारण इस समय योनि के किनारों का मुलायम होना माना जाता है।

इस स्त्राव के कारण छह महीने की गर्भवती महिला का योनि में होने वाले बैक्टीरिया इन्फेक्शन से बचाव हो जाता है।

10 . नींद न आना (Insomnia in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को छठे महीने में नींद न आना भी एक आम लक्षण माना जाता है।

गर्भभार और कमर के दर्द के के कारण महिला को नींद आने में परेशानी होती है।

11. पेट में दर्द रहित मरोड़ उठना (Painless contraction in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के छठे महीने में पेट में दर्द रहित मरोड़ उठना भी एक सामान्य लक्षण माना जाता है।

इस रूप में कह सकते हैं कि गर्भवती महिला का शरीर प्रसव के लिए तैयार हो रहा होता है।

इसे आमतौर पर कभी-कभी महिलाएं छठे माह की गर्भवस्था में होने वाला सामान्य पेट दर्द भी मान लेती हैं।

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गर्भावस्था के छठे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?

How does baby grow during sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Chathey mahine mein baby ka vikas kaise hota hai in hindi

गर्भवस्था के छठे महीने में बच्चे का विकास लगभग सम्पूर्ण हो जाती है।

इस माह के अंत तक भ्रूण एक सम्पूर्ण मानव आकार ले लेता है।

प्रेग्नेंसी के छठे माह में बच्चे का विकास निम्न प्रकार से देखा जा सकता है : -

  • शारीरिक वजन (Body weight in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था की छठे माह में शिशु का वजन 600 ग्राम से थोड़ा अधिक हो जाता है।

  • बेबी स्किन (Baby’s skin in sixth month of pregnancy in hindi)

छह माह की गर्भवस्था में शिशु की स्किन में काफी सुधार आने लगता है।

इस समय शिशु की स्किन के नीचे फैट बनना शुरू हो जाती है, जिसके कारण जन्म के समय शिशु की स्किन थोड़ी झुर्रीदार लेकिन चिकनी और मजबूत होती है।

इसके अतिरिक्त स्किन के नीचे बनने वाली रक्त वाहिकाओं का निर्माण भी हो जाता है और इसी कारण नवजात शिशु की त्वचा का रंग गुलाबी होता है।

  • मस्तिष्क विकास (Brain development in sixth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से गर्भवस्था के छह महीने तक शिशु के मस्तिष्क का विकास काफी हद तक पूरा हो जाता है।

इसका भार पहले की तुलना में 400-500% बढ़ जाता है।

इस समय तक शिशु अपनी गतिविधियों में अपने मस्तिष्क का प्रयोग करने लगता है।

  • श्वसन तंत्र (Respiratory system in sixth month of pregnancy in hindi)

छह माह की गर्भावस्था में शिशु के श्वसन तंत्र का निर्माण पूरा हो जाता है।

इस समय शिशु के श्वास छिद्र (nostrils) और फेफड़ों की बनावट शुरू हो जाती है।

इस समय फेफड़ों में एक परत का निर्माण हो जाता है, जो शिशु को श्वास लेते समय, उसके फेफड़ों को आंतरिक रूप से चिपकने से बचाती है।

  • इंद्रियबोध (Senses in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के छठे महीने से शिशु को इंद्रियबोथ होने के कारण वह कुछ विशेष प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगता है, जो किसी स्वाद, स्पर्श , ध्वनि या आवाज़ के प्रतिउत्तर में हो सकती हैं।

जैसे प्रकाश महसूस होने पर वह अपना चेहरा हाथों से ढ़क लेता है।

किसी तेज़ आवाज़ के आने पर वह कभी-कभी उसे नापसंद भी कर सकता है।

इसके साथ ही उसकी स्वाद ग्रंथियां भी पूरी तरह से जागरूक हो चुकी होती हैं।

  • आँखें (Eyes in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के छठे महीने से शिशु की आँखें खुलने लगती हैं और वह अपनी पलकें झपकाने लगता है।

इसके साथ ही महीने के अंत तक आँखों की रेटिना भी पूरी तरह से बन जाती हैं।

  • कान (Ears in sixth month of pregnancy in hindi)

शिशु के छह माह की गर्भावस्था में कान का महत्वपूर्ण भाग उसकी बीच की हड्डी होती है, का निर्माण होने लगता है, जिससे उसकी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है।

  • रीढ़ की हड्डी (Spine in sixth month of pregnancy in hindi)

छह माह की गर्भावस्था में शिशु के रीढ़ की हड्डी में मांसपेशियों और जोड़ों का निर्माण पूरा हो जाता है।

  • जननांग (Genitals in sixth month of pregnancy in hindi)

शिशु के जननांग का निर्माण छह माह की गर्भावस्था में लगभग पूरा हो जाता है।

कन्या शिशु के संबंध में सभी जननांग सम्पूर्ण रूप से निर्मित होकर अपनी सही जगह पर स्थापित हो जाते हैं।

इसी प्रकार नर शिशु की स्थिति में उसके वृषण का निर्माण पूरा हो जाता है और वह पूरा नीचे लटक जाते हैं।

  • मांसपेशियाँ (Muscles in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के छठे माह में शिशु के हाथ-पैरों की मांसपेशियां पूरी तरह से निर्मित होकर मज़बूती हासिल कर लेती हैं।

इनके कारण ही छह माह की गर्भवती महिला गर्भस्थ शिशु के हाथ-पैर के चलने की हरकत का एहसास करती है।

  • दिनचर्या (Routine in sixth month of pregnancy in hindi)

छठे माह की गर्भावस्था में शिशु की दिनचर्या पांचवे महीने की गर्भावस्था की ही भांति स्थिर हो जाता है।

इस माह भी वह अपने दिनचर्या के अनुसार जब जागता है, तब अपने आपको गर्भ में एडजस्ट करने की कोशिश करता है।

अगर यह कहें कि छठे माह की गर्भावस्था के अंत तक शिशु एक सामान्य जीवन जीने की प्रक्रिया में आ जाता है।

 

गर्भावस्था के छठे महीने में महिला में शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन क्या हो सकते हैं?

What would be physical and emotional changes in the female in sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth month female mein kyaa physical aur emotional changes ho sakte hain in hindi

साधारण रूप से गर्भावस्था के छठे महीने में होने वाले शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन महिला को प्रत्यक्ष रूप से गर्भवती, घोषित कर देते हैं।

गर्भवस्था के छठे महीने में होने वाले शारीरिक परिवर्तन निम्न हैं : -

1. पेट पर उभर आने वाले स्ट्रेच मार्क्स (Stretch marks in sixth month of pregnancy in hindi)

महिला के शरीर पर इस समय गर्भवस्था की अग्रिम अवस्था के विभिन्न चिन्ह उभरने लगते हैं।

इनमें प्रमुख और स्पष्ट रूप से देखे जाने वाला चिन्ह है, पेट पर उभर आने वाले स्ट्रेच मार्क्स जो सामान्य रूप से प्रसव के बाद अधिकतर अपने आप ही दूर हो जाते हैं।

कभी-कभी इनमें स्किन की खिंचाव के कारण खुजली होती है, तब इसपर घरेलू उपाय के रूप में नारियल तेल लगाया जा सकता है।

2. पेट पर काली लकीर (Linea nigra in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला के पेट पर उभरने वाली काली लकीर गर्भावस्था के छठे महीने में और अधिक गहरी हो जाती है।

इस लाइन को लिनिया निग्रा (linea nigra) कहा जाता है।

यह लाइन गर्भ के ऊपरी भाग से लेकर नीचे योनि तक आती है।

3. स्तनों से रिस्ता पीला लिक्विड (Yellowish liquid from breast in Sixth month of Pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला के छठे महीने में स्तनों से पीला लिक्विड रिसना शुरू हो जाता है, जिसे कोलोस्ट्रोम (colostrum) कहा जाता है।

यह प्रसव के बाद शिशु के द्वारा लिया जाने वाला सबसे पहला स्तन दूध होता है।

4. शरीर के ऊपरी भाग पर निशान (Pigmentation marks on upper body in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के छठे महीने में शरीर के ऊपरी भागों पर पिग्मेंटेशन के निशान बन जाते हैं।

यह निशान गर्भवस्था के आगे बढ़ने के साथ और अधिक गहरे होते जाते हैं और अधिकतर माथे, गालों और गर्दन पर बनते हैं, जिन्हें मेलेज्मा (melasma) भी कहा जाता है।

ये निशान भी प्रसव के साथ अधिकतर रूप से ठीक हो जाते हैं।

गर्भवस्था के छठे महीने में होने वाले भावनात्मक परिवर्तन (Emotional changes in the female in sixth month of pregnancy in hindi)

जब महिला गर्भवस्था के छठे महीने में पहुँचती है तब उसके अंदर सबसे बड़ा और मुख्य भावनात्मक परिवर्तन अत्यधिक मूड स्विंग्स के रूप में देखा जाता है।

इसके अतिरिक्त गर्भ भार के कारण महिला में चिड़चिड़ापन और भूलने की परेशानी भी बढ़ जाती है।

हालाँकि, यह परेशानी भी प्रसव के बाद ठीक हो जाती है।

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गर्भावस्था के छठे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?

Diet plan in sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Chathey mahine mein lady ko kya khana chahiye in hindi

गर्भावस्था के छठे महीने में गर्भ का शिशु पूर्ण रूप से विकसित हो चुका है और इसलिए उसे अपना पोषण माँ के पोषण से ही प्राप्त करना पड़ता है।

यही वह समय है, जब महिला सामान्य से कुछ अधिक खाती है।

लेकिन छठे माह की गर्भावस्था में भोजन करते समय अपनी इच्छा के साथ पर्याप्त पोषण का भी ध्यान रखना चाहिए।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि गर्भावस्था के छठे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए, यहाँ कुछ सुझाव दिये जा रहे हैं।

इन सुझाव का पालन आप आप अपनी सुविधा और प्रेग्नेंसी डॉक्टर कि सलाह के अनुसार ही कर सकती हैं।

1. फोलिक एसिड से भरपूर भोजन (Folic acid in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के छठे महीने में फोलिक एसिड युक्त भोजन से गर्भ के शिशु के मस्तिष्क विकास में बहुत लाभ होता है।

इसके साथ ही इसका शिशु की रीढ़ की हड्डी के निर्माण और विकास में भी मदद मिलती है।

इसके लिए आप अपने भोजन में निम्न को शामिल कर सकती हैं : -

  • साबुत अनाज से बनी ब्रेड (Whole-grain bread)
  • फोरटिफाइड अनाज (Fortified Cereals)
  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ (Green vegetables)
  • स्ट्रोबेरी, संतरा, एवोकाडो, अंगूर, केला आदि जैसे फल
  • सब्जियों में प्रमुख रूप से भिंडी, फूलगोभी, चुकंदर, मटर, मक्का और फलियाँ
  • सभी प्रकार की दालें (lentils),
  • मूँगफली और बादाम जैसे मेवे (nuts)
  • अलसी, सूरजमुखी, पपीते और तिल आदि के बीज (seeds)

2. प्रोटीन (Proteins in sixth month of pregnancy in hindi)

प्रोटीन को हर व्यक्ति के लिए आवश्यक माना जाता है।

गर्भवस्था के छठे महीने में प्रोटीन बहुत ज़रूरी माना जाता है।

लेकिन इसके लिए शाकाहारी भोजन अधिक अच्छा माना जाता है।

आप प्रोटीन के सेवन के लिए निम्न खाद्य पदार्थ भोजन को शामिल कर सकती हैं : -

  • काले राजमा (Black beans)
  • टोफू (Tofu)
  • अंडे (Eggs)

यदि आप मांसाहारी भोजन करना चाहती हैं, तब लीन मीट (lean meat) जिसमें पॉल्ट्री और फिश जैसे व्हाइट फिश (white fish) आदि को शामिल किया जाता है।

3. अधिक से अधिक तरल पदर्थों का सेवन (Increase the intake of fluids in sixth

month of pregnancy in hindi)

सामान्य जीवन में अधिक से अधिक पानी पीने की आदत को गर्भवस्था में भी नहीं छोड़ना चाहिए।

इसलिए गर्भावस्था के छठे महीने में भी अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन इस काम में आपकी मदद कर सकता है।

इसके लिए अच्छा होता है कि कम से कम आठ गिलास पानी और ताज़ी फलों का जूस प्रतिदिन पिएँ।

तरल पदार्थों के अधिकतम सेवन से न केवल शरीर को खनिज मिलते हैं बल्कि सभी ज़रूरी पोषक पदार्थों के साथ गर्भावस्था में कब्ज़ को दूर करने में भी आसानी होती है।

4. कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था में आमतौर पर प्रतिदिन एक या दो पोर्शन कार्बोहाइड्रेट्स लेने की सलाह दी जाती है।

गर्भावस्था के छठे माह में काबोहाइड्रेट्स लेने से पहले महिला को अपने प्रेग्नेंसी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, जो महिला के शारीरिक वजन के अनुसार ही इसकी मात्रा के सेवन की सलाह दे सकते हैं।

पोषण के इस तत्व के लिए आप निम्न को अपने नियमित भोजन में शामिल कर सकती हैं : -

  • आलू (Potatoes)
  • ओट्स (Oats)
  • स्वीट कॉर्न (Sweet corn )
  • सूखे मेवे ( Nuts)

5. डेयरी प्रोडक्ट्स (Dairy products in sixth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से सभी डेयरी प्रोडक्ट्स कैल्शियम से भरपूर होते हैं।

गर्भवती स्त्री और शिशु की हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छी मात्रा में कैल्शियम का सेवन बहुत जरूरी होता है।

इनके सेवन से शरीर पर अतिरिक्त फैट न बढ़े, इसके लिए आप चिकनाई रहित या कम चिकनाई वाले डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कर सकती हैं।

प्रतिदिन लिया जाने वाला एक गिलास दूध आपको एक-एक तिहाई कैल्शियम या प्रोटीन की पूर्ति कर सकता है।

इसके अतिरिक्त आप निम्न का भी सेवन कर सकती हैं : -

  • लो-फैट दही (Low-fat yogurt)
  • सामान्य दही (Curd)
  • चीज़ (Cheese)
  • पनीर (Paneer)

6. सब्जियाँ (Vegetables in sixth month of pregnancy in hindi)

बाज़ार में मिलने वाली सभी ताज़ी सब्जियाँ किसी न किसी पोषक तत्व से भरपूर होती हैं।

इनमें फाइबर, सभी प्रकार के विटामिन और खनिज आदि भरपूर होते हैं।

इसलिए आप सभी सब्जियों विशेषकर निम्न को अपनी भोजन की थाली में जरूर जगह दें : -

1. ब्रसेल्स स्प्राउट या गांठ गोभी जो विटामिन ए, के, सी, मेग्नीशियम और पोटेशियम से भरपूर होती है।

2. विटामिन सी और फोलिक एसिड के लिए फूल गोभी ली जा सकती है।

3. चुकंदर में एंटीऑक्सीडेंट, फोलिक एसिड, कैल्शियम, सिलिका और आयरन तत्व होते हैं।

4. गाजर में विटामिन सी, ए और फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है।

5. टर्निप में विटामिन सी, प्रोटीन और आयरन की मात्रा का प्रभाव होता है।

6. शतावरी को अँग्रेजी में एस्परैगस (asparagus) कहा जाता है, इसमें विटामिन बी9, बी कॉम्प्लेक्स, के, ए, सी के अलावा फाइबर, फोलिक एसिड और आयरन भी होते हैं।

7. बैंगन को फ़ोलेट्स, विटामिन सी, ए, बी कॉम्प्लेक्स और ई से भरपूर माना जाता है;

8. आलू में कार्बोहाइड्रेट के अलावा पोटेशियम, कैल्शियम, फाइबर और फोलेट भी होते हैं।

9. कद्दू या सीताफल में प्रोटीन के साथ ज़िंक, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, फैट, आयरन, विटामिन, फाइबर, कैल्शियम, फोस्फोरस और नियासीन की मात्रा काफी होती है।

10. लाल टमाटर, विटामिन ए और सी के अच्छे स्त्रोत माने जाते हैं।

इन सब्जियों के सेवन से गर्भवती महिला के साथ गर्भ के शिशु को भी भरपूर पोषण मिलता है।

7. फल (Fruits in sixth month of pregnancy in hindi)

प्रतिदिन ताज़े फलों का सेवन प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।

इनके सेवन से जरूरी विटामिन, खनिज मिलते हैं, जो किसी भी व्यक्ति के विकास व वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं।

गर्भवस्था के छठे महीने में फलों का सेवन निम्न रूप से किया जा सकता है :-

1. अमरूद को विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, फाइबर और कॉपर के साथ फोस्फोरस और फोलेट का भी अच्छा स्त्रोत माना जाता है।

2. संतरों को हमेशा से विटामिन सी का स्त्रोत तो माना ही जाता है, साथ ही इसे फोलेट, पोटेशियम और एंटीओक्सीडेंट से भरपूर भी माना जाता है।

3. एवोकाडो भी फोलिक एसिड से भरपूर तो होते ही हैं, साथ ही इनमें कैल्शियम, विटामिन बी की मुख्य श्रेणी जैसे बी1, बी2, बी6, के साथ के के और सी से भी भरपूर माना जाता है।

4. सेब में एंटीओक्सीडेंट की प्रचुर मात्रा के साथ ही बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन, आयरन, फाइटोन्यूटींट्स और फाइबर की मात्रा काफी अधिक होती है।

5. अंगूर में आयरन, एंटीओक्सीडेंट, शुगर और विटामिन कॉम्प्लेक्स जैसे ए, सी, के और बी पाये जाते हैं।

6. केले स्वाद से भरपूर होने के साथ ही पोटेशियम युक्त और फाइबर, विटामिन सी और बी 6 से भी भरे होते हैं।

7. हालांकि, भारत में आम, हर मौसम में नहीं मिलता है, लेकिन अगर मिले तो इसे जरूर खाएं क्योंकि इसमें विटामिन सी, ए बी6, पोटेशियम, आयरन और फोलिक एसिड की मात्रा भरपूर होती है।

8. कीवी में भी फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ई, के साथ विभिन्न खनिज भी होते हैं।

इसलिए कभी-कभी छोटे स्नैक के लिए आप फल भी ले सकती हैं।

 

गर्भावस्था के छठे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?

What foods to avoid in sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth month mein kyaa nahin khana chahiye in hindi

जैसे-जैसे गर्भकाल आगे बढ़ता है, गर्भवती महिला को हर प्रकार की सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

यह सावधानी महिला को अपनी जीवनशैली के साथ खान-पान में रखनी बहुत जरूरी होती है।

प्रेग्नेंसी डॉक्टर की सलाह से उन्हें यह जानना चाहिए कि गर्भावस्था के छठे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें? ।

आपकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ सावधानियाँ निम्न हैं : -

1. अगर आप मांसाहारी भोजन पसंद करती हैं, तब कभी भी अधपका या कच्चा मांसाहारी भोजन न करें।

इससे फूड पोयजनिंग (food poisoning) होने का डर रहता है।

2. कुछ महिलाओं को ग्लूटन हजम नहीं होता है, ऐसे में उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ग्लूटन युक्त भोजन के स्थान पर फल, सब्जी और पॉल्ट्री को अधिक महत्व देना चाहिए।

3. समुद्री भोजन पसंद करने वाली गर्भवती महिलाओं को छठे महीने की गर्भावस्था में स्वोर्ड्फ़िश, शार्क, टाईलफिश, और अधिक मरकरी वाली मछ्ली नहीं खाने चाहिए।

4. चाय-काफी पसंद होने पर भी इसका सेवन एक कप-एक दिन से अधिक नहीं होना चाहिए।

5. अधिक तले और मसाले वाले भोजन से बदहजमी हो सकती है, इसलिए इन्हें नहीं खाना चाहिए।

6. अनपाइश्चराइज्ड दूध और चीज़ का सेवन न करें।

7. धूम्रपान और मदिरापन का सेवन तो बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।

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गर्भावस्था के छठे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं?

Does sex allowed in sixth month of pregnancy or not in hindi

kya pregnancy ke Sixth month mein sex kar sakte hain in hindi

अगर महिला गर्भवस्था के छठे महीने के पड़ाव पर है और वह सोचती है कि गर्भावस्था के छठे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं तब इस बात का निर्णय प्रेग्नेंसी डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।

साधारण तौर पर अगर पिछली गर्भावस्था में या वर्तमान में कोई गंभीर परेशानी नहीं है, तब थोड़ी सावधानी बरतते हुए इस समय सेक्स किया जा सकता है।

गर्भावस्था के छठे महीने में निम्न सेक्स पोजीशन अपनाएं जा सकते हैं : -

1. वुमन ऑन टॉप की पोजीशन (Women on top in sex in sixth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था की छठे महीने में अच्छी रहती है।

इस पोजीशन में गर्भवती महिला के पेट पर वज़न नहीं पड़ता है।

2. साइड पोजीशन - स्पून पोजीशन (Spoon position in sex in sixth month of pregnancy in hindi)

साइड पोजीशन जिसे स्पून पोजीशन भी कहते हैं, गर्भावस्था के 6 महीने में सेक्स करने के लिए अच्छी रहती है।

इसमें महिला के पेट को बेड का सहारा मिल जाता है, जिससे उसपर भार नहीं आता है।

3. मिशनरी पोजीशन (Missionary position in sex in sixth month of pregnancy in hindi)

मिशनरी पोजीशन को सेक्स के लिए अपनाने पर पेट पर आने वाले अतिरिक्त वजन का ध्यान रखा जाये तो इसे सफलता पूर्वक अपनाया जा सकता है।

 

गर्भावस्था के छठे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?

When should I seek an appointment with a doctor in the Sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth mahine mein doctor se kab milna chahiye in hindi

प्रेगनेंसी के 22वें से 25वें हफ्ते के बीच प्रेग्नेंट महिला की चौथी एंटीनेटल विज़िट (प्रसव पूर्व यात्रा) होती है।

अगर आपको प्रीटर्म लेबर या प्रीटर्म बर्थ से जुड़ा जोखिम है, तो आपकी डॉक्टर इस सप्ताह कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन (corticosteroids injection) दे सकती हैं।

कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन बच्चे के फेफड़े, पाचन तंत्र और मस्तिष्क के विकास को गति देने में मदद करते हैं।

आमतौर पर यह इंजेक्शन प्रेगनेंसी के 24वें और 34वें सप्ताह के बीच दिया जाता है।

डॉक्टर के यहां इस समय आपके वज़न, ब्लड प्रेशर और फंडल हाइट की जाँच की जाएगी।

इसके अलावा आपके खान-पान और सप्लीमेंट्स को लेकर भी सलाह दे सकती हैं।

 

गर्भावस्था के छठे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?

Appointment with doctor in sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth mahine mein kin situations mein doctor se turant milna chahiye in hindi

गर्भावस्था की छठे महीने में में निम्न परेशानी हो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए : -

1. गर्भावस्था के छठे महीने में आँखों के आसपास सूजन अगर असामान्य प्रतीत होती है तब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

यह प्रिक्लंप्सिया (preeclampsia in hindi) का संकेत हो सकता है।

इस अवस्था में रक्तचाप एकदम ऊंचा हो जाता है।

2. अगर प्रति घंटे में पाँच से अधिक बार प्रसव पीड़ा जैसी ऐंठन हो रही है।

3. योनि से लाल चटक रंग के रक्त का स्त्राव हो रहा है।

4. पेशाब करते समय दर्द हो रहा है।

5. पेट में तीखा और देर तक रहने वाला दर्द हो रहा है।

6. बहुत अधिक और लगातार उल्टियाँ हो रही हैं।

7. अचानक योनि से साफ और पानी जैसे फ़्ल्युड निकल रहा है।

8. थोड़ा-थोड़ा कमर में दर्द हो रहा है।

9. पेल्विक क्षेत्र में बहुत अधिक दबाव महसूस हो रहा है।

10. बहुत तेज़ उठने वाला सिर दर्द जो किसी दवाई से भी काबू नहीं आ रहा है ।

11. अनियंत्रित होने वाली नकसीर छूटना।

इनमें से किसी भी स्थिति के होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 

गर्भावस्था के छठे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से होते हैं?

Ultrasound and other tests in Sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth month mein kis tarah ke tests aur ultrasound ho sakte hain in hindi

गर्भावस्था के छठे महीने में डॉक्टर सामान्य रूप से वही टेस्ट और जांच करते हैं, जो उन्होनें आपके पांचवे महीने की गर्भावस्था की थी।

गर्भवस्था के 6 महीने में निम्न जांच की जा सकती हैं : -

1. गर्भवती महिला का शारीरिक वज़न (Physical weight in sixth month of pregnancy in hindi)

2. महिला का रक्तचाप की जांच (Blood pressure in sixth month of pregnancy in hindi)

3. प्रोटीन और शुगर के लिए पेशाब की जांच (Urine test in sixth month of pregnancy in hindi)

4. गर्भस्थ शिशु के हृदय के धड़कनों की जांच (To look into the fetal heartbeat in sixth month of pregnancy in hindi)

5. गर्भाशय के आकार और बनावट की जांच (To check the size and shape of uterus in sixth month of pregnancy in hindi)

6. गर्भाशय की ऊंचाई की जांच (To check the fundus in sixth month of pregnancy in hindi)

7. गर्भ के शिशु की वास्तविक स्थिति (To check the position of the baby in sixth month of pregnancy in hindi)

इन सामान्य गर्भावस्था के छठे महीने में इन जाँचों के अलावा गर्भकाल में होने वाली मधुमेह के होने की संभावना की जांच भी की जाती है।

इसके लिए टेस्ट से पहले गर्भवती महिला को कुछ मीठा खाने या पीने को दिया जाता है।

उसके थोड़ी देर बाद महिला के ब्लड सेंपल से जांच करके महिला के रक्त में शुगर की उपस्थिति की जांच की जाती है।

यदि इस जांच में परिणाम शुगर होने की संभावना का शक होता है, तब इस टेस्ट को दोबारा किया जाता है।

 

गर्भावस्था के छठे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?

Tips for father in sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth month mein father ke liye kya tips ho sakte hain in hindi

गर्भावस्था का 6 महीना न केवल महिला के लिए बल्कि भावी पिता के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।

इस समय महिला के पेट का बढ़ा हुआ आकार, पिता को शिशु के होने का एहसास करवाता है, जो उनके लिए अलग-अलग भावनाओं का मिश्रण जैसा होता है।

ऐसे में भावी पिता को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जो इनमें से कुछ हो सकती हैं : -

1. गर्भवती महिला के कामों में अधिक से अधिक सहायता करें।

2. गर्भस्थ शिशु से बातें करें क्योंकि अब वो आपकी आवाज़ सुन कर पहचान सकता है।

3. प्रसव का समय अब अधिक दूर नहीं है, इसलिए शिशु के भावी माता-पिता प्रसव पूर्व घर की तैयारी में एक दूसरे का हाथ बंटा सकते हैं।

4. प्रसव के समय महिला का साथ देने के लिए व्यावसायिक तैयारियों को अब शुरू करने का समय आ चुका है।

5. अब से गर्भवती महिला जब भी डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाये भावी पिता को भी उसके साथ जाना चाहिए।

 

गर्भावस्था के छठे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?

What you can do in sixth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth month mein main kya kar sakti hoon in hindi

गर्भावस्था का छठा महीना अन्य समय से थोड़ा अलग होता है।

इस समय गर्भवती महिला को निम्न कामों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए : -

1. हर स्थिति में अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें;

2. स्वयं के लिए प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम का समय निकालें और विशेष रूप से कीगल व्यायाम जरूर करें।

इससे पेल्विक क्षेत्र मजबूत होता है और प्रसव के समय आसानी होती है।

3. प्रतिदिन कम से कम आठ घंटे की नींद अवश्य लें।

4. रात को सोते समय बाईं ओर की करवट लेकर ही सोएँ, जिससे एक तो बढ़े हुए पेट को सहारा मिलता है और इसके साथ पाचन तंत्र को भी काम करने में आसानी होती है।

5. बैठते समय आरामदायक मुद्रा में ही बैठें और जहां तक संभव हो अपने पैर ऊपर करके ही रखें जिससे पैरों में सूजन नहीं आने पाएगी।

6. इस समय बिना किसी तनाव और चिंता के समय व्यतीत करें और आने वाले समय का प्र्सन्नता से स्वागत करें।

 

प्रेग्नेंसी के छठे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?

What you should not do in sixth month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke Sixth month mein mujhe kya nahi karna chahiye in hindi

गर्भावस्था का छठा महीना कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण होता है।

इसलिए इस समय गर्भवती महिला को विशेष रूप से निम्न सावधानियाँ रखनी चाहिए : -

1. तनावमुक्त रहने के लिए प्राणायाम जैसे व्यायाम करें।

2. आरामदायक कपड़े और फुटवियर पहनें।

3. दांतों के स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान दें।

4. किसी भी भारी वस्तु को न उठाएँ।

5. अगर आपके घर में बिल्ली के रूप में पालतू जानवर है तो उसके मल मूत्र के बर्तन को आप न साफ़ करें, नहीं तो इससे टोक्सोप्लास्मोसिस (toxoplasmosis) इन्फेक्शन होने का डर हो सकता है।

6. बिना अपने डॉक्टर की सलाह के कभी कोई दवा या उपचार न लें।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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