भारतीय कानून में पी.सी.पी.एन.डी.टी ऐक्ट (प्री-कांसेप्शन एंड प्री-नैटल डायगनोस्टिक टेकनिक्स), 1994 के तहत जन्म से पहले लिंग परीक्षण क़ानूनन अपराध है - इसके लिए पूछने वाले पर भी कार्रवाई की जाएगी। हम (zealthy) ऐसी किसी भी तकनीक का समर्थन नहीं करते हैं।

डिलीवरी तिथि कैलकुलेटर

एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी का अनुमान लगाने के लिए नीचे दिए गए किसी भी विकल्प का उपयोग करें:

  1. अंतिम मासिक धर्म का पहले दिन
  2. गर्भाधान की तारीख
  3. पहले अल्ट्रासाउंड स्कैन की तारीख

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हमारा कैलकुलेटर आपको गर्भकालीन आयु, पहली तिमाही के अंत, दूसरी तिमाही के अंत और निश्चित रूप से नियत तारीख जिस दिन बच्चे का जन्म होगा सहित सभी महत्वपूर्ण गर्भावस्था की तारीखों का अनुमान लगाने में मदद करता है।

कैलकुलेट करें

डिलीवरी डेट कैलकुलेटर से जुड़े प्रश्न

एक सामान्य गर्भ कितने समय तक रहता है?Show

एक सामान्य गर्भ कितने समय तक रहता है?

एक सामान्य गर्भ कितने समय तक रहता है?

सामान्य रूप में, गर्भ अधिकतर 38 से 42 हफ़्तों तक रहता है। यदि किसी बच्चे का जन्म 37 हफ़्तों से पहले हो जाता है तो उसे समय से पहले (premature) बच्चा कहा जाता है।

कितने बच्चों का जन्म उनकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी पर होता है?Show

कितने बच्चों का जन्म उनकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी पर होता है?

कितने बच्चों का जन्म उनकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी पर होता है?

किये गए शोध के अनुसार, 20 में से सिर्फ 1 महिला (5%) ही नियत या अनुमानित दिन पर बच्चे को जन्म देती है।

आपकी प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है?Show

आपकी प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है?

आपकी प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है?

आपकी डिलीवरी डेट का पता लगाने के लिए आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख में 280 जोड़ कर नियत दिनांक पता लगायी जाती है। अनुमानित देय तिथि की गणना कैलकुलेट करने का तरीका: आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख (20-45 दिन संभावित पीरियड्स अवधि) + 280 दिन लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि इस विधि में यह माना जाता है कि हर महिला का मासिक चक्र 28 दिन का ही होता है। इसलिए इस विधि का बिलकुल सही होना महिला के माहवारी के नियमित होने पर निर्भर करता है।

क्या मेरी डिलीवरी की तारीख बदल भी सकती है?Show

क्या मेरी डिलीवरी की तारीख बदल भी सकती है?

क्या मेरी डिलीवरी की तारीख बदल भी सकती है?

जी हाँ, आपकी अनुमानित देय तिथि या एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी बदल सकती है लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं है। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जैसे अनियमित माहवारी,प्रथम अल्ट्रासाउंड करवाने की तारीख निकल गयी या पहला अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही में किया गया आदि।

क्या मेरी प्रसव की नियत तिथि अल्ट्रासाउंड स्कैन के बाद बदल सकती है?Show

क्या मेरी प्रसव की नियत तिथि अल्ट्रासाउंड स्कैन के बाद बदल सकती है?

क्या मेरी प्रसव की नियत तिथि अल्ट्रासाउंड स्कैन के बाद बदल सकती है?

हाँ ऐसा हो सकता है। आपका पहला स्कैन आपके गर्भावस्था के 10-14 हफ्ते के बीच होगा जिसे डेटिंग स्कैन (dating scan) कहते हैं । स्कैन के माध्यम से आपके बच्चे के विकास के अनुसार आपकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी और सटीक रूप से बताई जा सकती है।

क्या होती है गर्भकालीन आयु?Show

क्या होती है गर्भकालीन आयु?

क्या होती है गर्भकालीन आयु?

गर्भधारण की तारीख और जन्म के बीच का समय या आप कितने महीनों की गर्भवती हैं गर्भकाल कहलाता है। गर्भकालीन आयु की गणना आखिरी मासिक धर्म से वर्तमान तिथि तक हफ्तों में की जाती है। सामान्य रूप में, गर्भ अधिकतर 38 से 42 हफ़्तों तक रहता है।

प्रेगनेंसी में LMP (Last Menstrual Period) का क्या अर्थ होता है?Show

प्रेगनेंसी में LMP (Last Menstrual Period) का क्या अर्थ होता है?

प्रेगनेंसी में LMP (Last Menstrual Period) का क्या अर्थ होता है?

LMP का अर्थ है आखिरी मासिक धर्म की पहली तारीख़। LMP का इस्तेमाल आम तौर पर डिलीवरी की संभावित तारीख़ का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। गर्भवती महिला के गर्भकाल को पता करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। गर्भकाल को हफ़्तों में मापा जाता है जिसकी शुरुआत आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन से की जाती है।

एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी क्या होती है और कैसे पता करें की आप कितने हफ्ते प्रेग्नेंट हैं

What is delivery date calculation: How many weeks am I pregnant in hindi

Delivery date ya due date kya hoti hai aur main kaise pata kare ki main kitne din pregnant huin in hindi

बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ (expected date of delivery) वह तारीख़ है जिसके आस-पास महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है। इस तारीख़ के आस-पास के दो हफ्ते पहले या दो हफ्ते बाद बच्चे के जन्म होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है।

हालांकि यह सिर्फ एक अनुमान होता है और आंकड़ों की मानें तो 20 में से सिर्फ 1 महिला (5%) ही नियत तारीख पर बच्चे को जन्म देती है।

 

1.बच्चे के जन्म की नियत तारीख जानना क्यों है ज़रूरी

Important of due date of pregnancy or delivery date in hindi

Bacche ke janam ki sambhavit tareekh jaan lena kyon hai zaroori in hindi

बच्चे के जन्म की नियत तारीख जानना क्यों है ज़रूरी

आप डिलीवरी डेट कैलकुलेटर (Pregnancy date calculator) से आने वाले नन्हें मेहमान के आगमन की नियत तारीख़ को जान सकते हैं और उसी के अनुसार अपने व आस-पास के वातावरण को तैयार कर सकते हैं।

इस तारीख़ को पता करना कुछ कारणों से महत्वपूर्ण है:

  1. बच्चे के जन्म का संभावित समय जान लेने से चिकित्सक को यह जानने में मदद मिलती है कि माँ और बच्चे का विकास और स्वास्थ्य सही है या नहीं।

  2. इस तारीख़ को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर सही समय पर सही चिकित्सीय परीक्षण करवा सकते हैं और दवाई दे सकते हैं ताकि जच्चा-बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहें।

  3. तारीख़ का पता करने से आपके साथ-साथ आपका परिवार और आपके चिकित्सक भी अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार रहते हैं।

जैसा कि कहा जाता है कि बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ के दो हफ्ते पहले एवं बाद में बच्चे का जन्म लेना सामान्य है, लेकिन बच्चे का जन्म काफी पहले या समय के बाद होने कि संभावना लगती है तो चिकित्सक पहले ही तैयारी कर सकते हैं।

 

2.क्या होती है गर्भकालीन आयु

What is Gestational Age in hindi

gestational age ya garbh ki umar kya hoti hai in hindi

क्या होती है गर्भकालीन आयु

गर्भधारण की तारीख़ और जन्म के बीच का समय या आप कितने महीनों की गर्भवती हैं गर्भकाल कहलाता है। गर्भकालीन आयु की गणना आखिरी मासिक धर्म से वर्तमान तिथि तक हफ्तों में की जाती है।

सामान्य रूप में, गर्भ अधिकतर 38 से 42 हफ़्तों तक रहता है। यदि किसी बच्चे का जन्म 37 हफ़्तों से पहले हो जाता है तो उसे समय से पहले (premature) बच्चा कहा जाता है।

 

3.बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ का अनुमान आखिरी माहवारी के पहले दिन से कैसे लगाया जाता है

How is due date of pregnancy calculated from first day of last month period (LMP) in hindi

Due date ka anumaan periods ke akhri mahine se kaise lagaya jata hai in hindi

बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख का अनुमान आखिरी माहवारी के पहले दिन से कैसे लगाया जाता है

एक सामान्य गर्भ को 38 (या 266 दिन) – 40 (या 280 दिन) हफ़्तों बाद पूर्ण रूप से स्वस्थ माना जाता है। इसलिए प्रसव पीड़ा या बच्चे के जन्म की दिनांक का अनुमान लगाने का सबसे अच्छा तरीका है गर्भवती होने से पहले आखिरी बार माहवारी आने के पहले दिन से 40 हफ्ते (280 दिन) गिन लेना।

स्त्री रोग विशेषज्ञ भी इसी तरह से अनुमान लगाते हैं और उसी अनुसार दवाएं और परीक्षणों के बारे में बताते हैं। आखिरी माहवारी के पहले दिन से डिलीवरी डेट का अनुमान लगाने की कई अनेक विधियाँ हैं:

  1. नैगेले सूत्र (Naegele Rule)

    अपने आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख में 280 जोड़ कर नियत दिनांक निकालने की इस विधि को नेगेले सूत्र (Naegele rule) कहा जाता है।

    अनुमानित देय तिथि की गणना कैलकुलेट करने का तरीका:

    आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख (20-45 दिन संभावित पीरियड्स अवधि) + 280 दिन

    लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि इस विधि में यह माना जाता है कि हर महिला का मासिक चक्र 28 दिन का ही होता है। इसलिए इस विधि का बिलकुल सही होना महिला के माहवारी के नियमित होने पर निर्भर करता है।

    इसी को ध्यान में रखते हुए नेगेले सूत्र के अलावा कुछ और तरीकों का भी प्रयोग किया जाता है:

  2. मिटनडोर्फ़-विलियम सूत्र (Mittendorf-Wiiliam rule)

    जो महिला पहली बार माँ बन रही हैं उनके लिए अनुमानित दिनांक के लिए आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख में से 3 महीनों को घटा कर उसमें 15 दिन जोड़ें और दूसरी बार मातृत्व का सुख ले रही महिला 15 की जगह 10 जोडें।

  3. पारिख सूत्र (Parikh rule)

    पारिख सूत्र का इस्तेमाल उन महिलाओं की डिलीवरी की संभावित तिथि का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है जिनको अनियमित पीरियड्स होते हैं। इस सूत्र के अनुसार, आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख़ में 9 महीने जोडें, फिर इसमें से 21 दिन घटाकर उसमें पहले के माहवारी चक्र की औसत अवधि को जोड़ें। इससे डिलीवरी की संभावित तारीख़ निकाली जा सकती है।

आपका नन्हा मेहमान इस दुनिया में कब पहली सांस लेगा यह जानने के और भी तरीके हैं लेकिन कोई भी तरीका 100 प्रतिशत सही नहीं होता है।

 

4.बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ का अनुमान गर्भधारण करने की तारीख़ से कैसे लगाया जाता है

How is due date of pregnancy calculated from the date of conception in hindi

delivery ki date ka anumaan conception date se kaise lagaya jata hai in hindi

बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख का अनुमान गर्भधारण करने की तारीख से कैसे लगाया जाता है

कई महिलाओं को यह याद होता है कि गर्भवती होने से पहले उन्होंने आखिरी बार सेक्स (sex) कब किया था, इसलिए गर्भाधान कैलकुलेटर का उपयोग कर उसी दिन को गर्भधारण की तारीख़ मान कर वह आसानी से अपने गर्भ पूरा होने का दिन अनुमानित कर सकती हैं।

लेकिन यह इतना सरल नहीं होता क्योंकि विज्ञान के अनुसार पुरुष का शुक्राणु (male sperm) एक स्त्री के शरीर में पाँच दिनों तक रह सकता है और अंडाशय (ovary) से निकला अंडाणु (ovum) 24 घंटों तक शरीर में बना रहता है।

इसलिए इसकी संभावना काफी ज्यादा होती है कि आपके यौन क्रिया के कई दिनों बाद आपने गर्भधारण किया हो।

 

5.बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ का अनुमान अल्ट्रासाउंड के माध्यम से कैसे लगाया जाता है

How is delivery date of pregnancy calculated ultrasound in hindi

delivery ki date ka anumaan ultrasound ki madad se kaise lagaya jata hai in hindi

बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख का अनुमान अल्ट्रासाउंड के माध्यम से कैसे लगाया जाता है

अल्ट्रासाउंड (ultrasound) या सोनोग्राम (or sonogram) स्कैन शरीर के अंदर के किसी भी हिस्से की एक छवि प्राप्त करने का पूरी तरह से दर्द रहित और सुरक्षित तरीका है। गर्भवती महिला में इस प्रक्रिया से भ्रूण के विकास (fetal development) और गर्भावस्था की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।

सामान्य स्थिति में गर्भावस्था के 6-10 हफ्ते के बीच पहला अल्ट्रासाउंड किया जाता है जिसे आपके बच्चे के जन्म की तारीख़ का अनुमान लगाने का सबसे सटीक तरीका माना जाता है।

गर्भावस्था के आगे के समय में किये गये अल्ट्रासाउंड सटीक रूप से अनुमानित देय तिथि की गणना नहीं कर पाते हैं, इसलिए यदि आपकी डिलीवरी डेट पहली तिमाही में अनुमानित कर दी गयी है तो उसे बदलना सही नहीं है।

यदि आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन और अल्ट्रासाउंड से पता किए गए दिनों में फर्क होता है तो चिकित्सक अल्ट्रासाउंड से निकाली गयी तारीख को ही सही मानते हैं।

 

6.क्या आपकी प्रसव की नियत तिथि बदल सकती है

Can your delivery date change in hindi

kya meri delivery date badal sakti hai in hindi

क्या आपकी प्रसव की नियत तिथि बदल सकती है

जी हाँ, आपकी अनुमानित देय तिथि या एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी बदल सकती है लेकिन यह आपके लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए।

यह कई कारणों की वजह से हो सकता है जैसे आपके पीरियड्स अनियमित थे, प्रथम अल्ट्रासाउंड करवाने की तारीख़ निकल गयी या पहला अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही में करवाया गया।

डिलीवरी डेट कैलकुलेटर का प्रयोग कर अपनी डिलीवरी की तारीख़ का पता करके माँ बनने वाली महिलाएं अपने जीवन में आने वाले बदलावों और नए मेहमान के लिए खुद को समय से तैयार कर सकती हैं।

इस बात का ध्यान रखें कि आपकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी आपके गर्भावस्था समय के साथ बदल सकती है जो चिकित्सीय परीक्षणों (medical checkups) के दौरान देखे गये बदलावों पर निर्भर करती है। लेकिन, zealthy के डिलीवरी डेट कैलकुलेटर से आपको यह अनुमान ज़रूर लग सकता है कि आपको प्रसव पीड़ा कब होगी।

 

7.निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

हम कह सकते हैं कि बच्चे के जन्म की सटीक डेट किसी भी विधि से नहीं जान सकते हैं पर संभावित तारीख़ अवश्य जानी जा सकती है जिसे जानना माँ ही नहीं परिवार के लिए भी जरूरी होता है ताकि वे उसके अनुसार अवश्य तैयारी कर सकें ताकि माँ व नवजात शिशु की देखभाल ठीक से हो सके।

इसलिए हर माँ को अपना गर्भावस्था कैलेंडर ज़रूर बनाना चाहिए ताकि वह अनुमानित देय तिथि की गणना कर सके