डिलीवरी तिथि कैलकुलेटर

एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी का अनुमान लगाने के लिए नीचे दिए गए किसी भी विकल्प का उपयोग करें:

  1. अंतिम मासिक धर्म का पहले दिन
  2. गर्भाधान की तारीख
  3. पहले अल्ट्रासाउंड स्कैन की तारीख

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15/12/2019calender

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हमारा कैलकुलेटर आपको गर्भकालीन आयु, पहली तिमाही के अंत, दूसरी तिमाही के अंत और निश्चित रूप से नियत तारीख जिस दिन बच्चे का जन्म होगा सहित सभी महत्वपूर्ण गर्भावस्था की तारीखों का अनुमान लगाने में मदद करता है।

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डिलीवरी डेट कैलकुलेटर से जुड़े प्रश्न

एक सामान्य गर्भ कितने समय तक रहता है?Show

एक सामान्य गर्भ कितने समय तक रहता है?

एक सामान्य गर्भ कितने समय तक रहता है?

सामान्य रूप में, गर्भ अधिकतर 38 से 42 हफ़्तों तक रहता है। यदि किसी बच्चे का जन्म 37 हफ़्तों से पहले हो जाता है तो उसे समय से पहले (premature) बच्चा कहा जाता है।

कितने बच्चों का जन्म उनकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी पर होता है?Show

कितने बच्चों का जन्म उनकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी पर होता है?

कितने बच्चों का जन्म उनकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी पर होता है?

किये गए शोध के अनुसार, 20 में से सिर्फ 1 महिला (5%) ही नियत या अनुमानित दिन पर बच्चे को जन्म देती है।

आपकी प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है?Show

आपकी प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है?

आपकी प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है?

आपकी डिलीवरी डेट का पता लगाने के लिए आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख में 280 जोड़ कर नियत दिनांक पता लगायी जाती है। अनुमानित देय तिथि की गणना कैलकुलेट करने का तरीका: आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख (20-45 दिन संभावित पीरियड्स अवधि) + 280 दिन लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि इस विधि में यह माना जाता है कि हर महिला का मासिक चक्र 28 दिन का ही होता है। इसलिए इस विधि का बिलकुल सही होना महिला के माहवारी के नियमित होने पर निर्भर करता है।

क्या मेरी डिलीवरी की तारीख बदल भी सकती है?Show

क्या मेरी डिलीवरी की तारीख बदल भी सकती है?

क्या मेरी डिलीवरी की तारीख बदल भी सकती है?

जी हाँ, आपकी अनुमानित देय तिथि या एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी बदल सकती है लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं है। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जैसे अनियमित माहवारी,प्रथम अल्ट्रासाउंड करवाने की तारीख निकल गयी या पहला अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही में किया गया आदि।

एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी क्या होती है और कैसे पता करें की आप कितने हफ्ते प्रेग्नेंट हैं?

What is expected date of delivery : How to calculate pregnancy : how many weeks am I pregnant? in hindi

Delivery date ya due date kya hoti hai aur main kaise pata kare ki main kitne din pregnant huin in hindi

बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ (expected date of delivery) वह तारीख़ है जिसके आस-पास महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है। इस तारीख़ के आस-पास के दो हफ्ते पहले या दो हफ्ते बाद बच्चे के जन्म होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है।

हालांकि यह सिर्फ एक अनुमान होता है और आंकड़ों की मानें तो 20 में से सिर्फ 1 महिला (5%) ही नियत तारीख पर बच्चे को जन्म देती है। मगर होने वाली माँ प्रसव की अनुमानित तिथि जानने की हमेशा कोशिश करती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भले ही गर्भावस्था कैलकुलेटर का सप्ताह आपके बच्चे की निश्चित डिलीवरी डेट ना बता पाएँ मगर प्रसव की अनुमानित तिथि बताने में जरूर मददगार है। बच्चे की एक्सपेक्टेड डिलीवरी जानने के दौरान महिला के मन में कई तरह के सवाल आ सकते हैं जैसे - डिलीवरी डेट कैसे निकालते हैं, गर्भावस्था की गणना कैसे करें आदि। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं डिलीवरी डेट कैसे निकालते हैं।

 

1.बच्चे के जन्म की नियत तारीख जानना क्यों ज़रूरी है?

Why it is necessary to know due date for pregnancy or delivery date? in hindi

Bacche ke janam ki sambhavit tareekh jaan lena kyon hai zarooriin hindi

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आप डिलीवरी डेट कैलकुलेटर (Pregnancy date calculator) से आने वाले नन्हें मेहमान के आगमन की नियत तारीख़ को जान सकते हैं और उसी के अनुसार अपने व आस-पास के वातावरण को तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आप प्रेगनेंसी डे डेट कैलकुलेटर या प्रेगनेंसी मंथ कैलकुलेटर की मदद ले सकती हैं।

इस तारीख़ को पता करना कुछ कारणों से महत्वपूर्ण है:

  1. बच्चे के जन्म का संभावित समय जान लेने से चिकित्सक को यह जानने में मदद मिलती है कि माँ और बच्चे का विकास और स्वास्थ्य सही है या नहीं।
  2. इस तारीख़ को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर सही समय पर गर्भावस्था के दौरान सही चिकित्सीय परीक्षण करवा सकते हैं और दवाई दे सकते हैं ताकि जच्चा-बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहें।
  3. तारीख़ का पता करने से आपके साथ-साथ आपका परिवार और आपके चिकित्सक भी अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार रहते हैं।

जैसा कि कहा जाता है कि बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ के दो हफ्ते पहले एवं बाद में बच्चे का जन्म लेना सामान्य है, लेकिन बच्चे का जन्म काफी पहले या समय के बाद होने कि संभावना लगती है तो चिकित्सक पहले ही तैयारी कर सकते हैं।

 

2.गर्भकालीन आयु क्या होती है?

What is gestational age? in hindi

gestational age ya garbh ki umar kya hoti haiin hindi

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गर्भधारण की तारीख़ और जन्म के बीच का समय या आप कितने महीनों की गर्भवती हैं गर्भकाल कहलाता है। गर्भकालीन आयु की गणना आखिरी मासिक धर्म से वर्तमान तिथि तक हफ्तों में की जाती है।

सामान्य रूप में, गर्भ अधिकतर गर्भावस्था के 38वें हफ्ते से 42वें सप्ताह तक रहता है। 38वें से 42वें हफ्ते में ही बच्चे की डिलीवरी एक्सपेक्टेड होती है। यदि किसी बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37वे हफ़्ते से पहले हो जाता है तो उसे समय से पहले (premature) बच्चा कहा जाता है।

 

3.बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ का अनुमान आखिरी माहवारी के पहले दिन से कैसे लगाया जाता है?

How do due date of pregnancy calculates from first day of last month period (LMP)? in hindi

Due date ka anumaan periods ke akhri mahine se kaise lagaya jata haiin hindi

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एक सामान्य गर्भ को 38 (या 266 दिन) – 40 (या 280 दिन) हफ़्तों बाद पूर्ण रूप से स्वस्थ माना जाता है।

इसलिए प्रसव पीड़ा या बच्चे के जन्म की दिनांक का अनुमान लगाने का सबसे अच्छा तरीका है गर्भवती होने से पहले आखिरी बार माहवारी आने के पहले दिन से 40 हफ्ते (280 दिन) गिन लेना।

स्त्री रोग विशेषज्ञ भी इसी तरह से अनुमान लगाते हैं और उसी अनुसार दवाएं और परीक्षणों के बारे में बताते हैं।

आखिरी माहवारी के पहले दिन से डिलीवरी डेट या डिलीवरी की अनुमानित तिथि का अंदाज़ा लगाने की कई अनेक विधियाँ हैं:

  1. नैगेले सूत्र (Naegele Rule)
    अपने आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख में 280 जोड़ कर नियत दिनांक निकालने की इस विधि को नेगेले सूत्र (Naegele rule) कहा जाता है।
    अनुमानित देय तिथि की गणना कैलकुलेट करने का तरीका:
    आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख (20-45 दिन संभावित पीरियड्स अवधि) + 280 दिन
    लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि इस विधि में यह माना जाता है कि हर महिला का मासिक चक्र 28 दिन का ही होता है।
    इसलिए इस विधि का बिलकुल सही होना महिला के नियमित माहवारी के होने पर निर्भर करता है।
    इसी को ध्यान में रखते हुए नेगेले सूत्र के अलावा कुछ और तरीकों का भी प्रयोग किया जाता है।
  2. मिटनडोर्फ़-विलियम सूत्र (Mittendorf-Wiiliam rule)
    जो महिला पहली बार माँ बन रही हैं उनके लिए अनुमानित दिनांक के लिए आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख में से 3 महीनों को घटा कर उसमें 15 दिन जोड़ें और दूसरी बार मातृत्व का सुख ले रही महिला 15 की जगह 10 जोडें।
  3. पारिख सूत्र (Parikh rule)
    पारिख सूत्र का इस्तेमाल उन महिलाओं की डिलीवरी की संभावित तिथि का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है जिनको अनियमित पीरियड्स होते हैं।
    इस सूत्र के अनुसार, आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन की तारीख़ में 9 महीने जोडें, फिर इसमें से 21 दिन घटाकर उसमें पहले के माहवारी चक्र की औसत अवधि को जोड़ें। इससे डिलीवरी की संभावित तारीख़ निकाली जा सकती है।

आपका नन्हा मेहमान इस दुनिया में कब पहली सांस लेगा या बच्चे की डिलीवरी कितने दिन में होती है यह जानने के और भी तरीके हैं लेकिन कोई भी तरीका 100 प्रतिशत सही नहीं होता है।

 

4.बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ का अनुमान गर्भधारण करने की तारीख़ से कैसे लगाया जाता है

How do due date of pregnancy calculates from the date of conception? in hindi

delivery ki date ka anumaan conception date se kaise lagaya jata haiin hindi

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कई महिलाओं को यह याद होता है कि गर्भवती होने से पहले उन्होंने आखिरी बार सेक्स (sex) कब किया था, इसलिए गर्भाधान कैलकुलेटर या डिलीवरी डेट कैलकुलेटर का उपयोग कर उसी दिन को गर्भधारण की तारीख़ मान कर वह आसानी से अपने गर्भ पूरा होने का दिन अनुमानित कर सकती हैं।

लेकिन यह इतना सरल नहीं होता क्योंकि विज्ञान के अनुसार पुरुष का शुक्राणु (male sperm) एक स्त्री के शरीर में पाँच दिनों तक रह सकता है और अंडाशय (ovary) से निकला अंडाणु (ovum) 24 घंटों तक शरीर में बना रहता है।

इसलिए इसकी संभावना काफी ज्यादा होती है कि आपके यौन क्रिया के कई दिनों बाद आपने गर्भधारण किया हो।

 

5.बच्चे के जन्म लेने की संभावित तारीख़ का अनुमान अल्ट्रासाउंड के माध्यम से कैसे लगाया जाता है?

How do ultrasound calculate delivery due date in pregnancy? in hindi

delivery ki date ka anumaan ultrasound ki madad se kaise lagaya jata haiin hindi

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अल्ट्रासाउंड (ultrasound) या सोनोग्राम (or sonogram) स्कैन शरीर के अंदर के किसी भी हिस्से की एक छवि प्राप्त करने का पूरी तरह से दर्द रहित और सुरक्षित तरीका है। गर्भवती महिला में इस प्रक्रिया से भ्रूण के विकास (fetal development) और गर्भावस्था की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।

सामान्य स्थिति में गर्भावस्था के 6 हफ्ते से प्रेगनेंसी के 10वें हफ्ते के बीच पहला अल्ट्रासाउंड किया जाता है जिसे आपके बच्चे के जन्म की तारीख़ का अनुमान लगाने का सबसे सटीक तरीका माना जाता है।

गर्भावस्था के आगे के समय में किये गये अल्ट्रासाउंड सटीक रूप से अनुमानित देय तिथि की गणना नहीं कर पाते हैं, इसलिए यदि आपकी डिलीवरी डेट पहली तिमाही में अनुमानित कर दी गयी है तो उसे बदलना सही नहीं है।

यदि आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन और अल्ट्रासाउंड से पता किए गए दिनों में फर्क होता है तो चिकित्सक अल्ट्रासाउंड से निकाली गयी तारीख को ही सही मानते हैं।

 

6.क्या आपकी प्रसव की नियत तिथि बदल सकती है?

Can your due or delivery date may vary or change? in hindi

kya meri delivery date badal sakti haiin hindi

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जी हाँ, आपकी अनुमानित देय तिथि या एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी बदल सकती है लेकिन यह आपके लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए।

यह कई कारणों की वजह से हो सकता है जैसे आपके पीरियड्स अनियमित थे, प्रथम अल्ट्रासाउंड करवाने की तारीख़ निकल गयी या पहला अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही में करवाया गया।

डिलीवरी डेट कैलकुलेटर का प्रयोग कर अपनी डिलीवरी की तारीख़ का पता करके माँ बनने वाली महिलाएं अपने जीवन में आने वाले बदलावों और नए मेहमान के लिए खुद को समय से तैयार कर सकती हैं।

इस बात का ध्यान रखें कि आपकी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी आपके गर्भावस्था समय के साथ बदल सकती है जो चिकित्सीय परीक्षणों (medical checkups) के दौरान देखे गये बदलावों पर निर्भर करती है। लेकिन, Zealthy के डिलीवरी डेट कैलकुलेटर से आपको यह अनुमान ज़रूर लग सकता है कि आपको प्रसव पीड़ा कब होगी।

 

7.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarshin hindi

हम कह सकते हैं कि बच्चे के जन्म की सटीक डेट किसी भी विधि से नहीं जान सकते हैं पर संभावित तारीख़ अवश्य जानी जा सकती है जिसे जानना माँ ही नहीं परिवार के लिए भी जरूरी होता है ताकि वे उसके अनुसार अवश्य तैयारी कर सकें ताकि माँ व नवजात शिशु की देखभाल ठीक से हो सके।

इसलिए हर माँ को अपना गर्भावस्था कैलेंडर ज़रूर बनाना चाहिए ताकि वह अनुमानित देय तिथि की गणना कर सके।