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नार्मल डिलीवरी या सामान्य प्रसव क्या है? What is normal delivery? in hindi Samanya prasav kya hai in hindi

नार्मल डिलीवरी को वेजाइनल डिलीवरी (vaginal delivery) भी कहा जाता है। यह डिलीवरी की एक प्रक्रिया है जिसमें प्राकृतिक रूप से बच्चे का योनि से जन्म होता है। नार्मल डिलीवरी में आमतौर पर किसी भी तरह की सर्जिकल या मेडिकल प्रक्रिया शामिल नहीं होती है।

सी-सेक्शन (c-section) डिलीवरी की तुलना में नार्मल डिलीवरी में जोखिम कम होता है और प्रसव के बाद माँ का शरीर जल्दी ही सामान्य हो जाता है। हालांकि, नार्मल डिलीवरी में बच्चा पैदा करने के लिए माँ को प्रसव के दर्द से गुज़रना पड़ता है।

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नार्मल डिलीवरी या सामान्य प्रसव के संकेत और लक्षण क्या हैं? Hide

What are the signs and symptoms of normal delivery? in hindi

Samanya delivery ke sanket or lakshan kya hain in hindi

प्रेगनेंसी के आखिरी हफ्ते के दौरान कुछ ख़ास लक्षणों के आधार पर डिलीवरी नॉर्मल होने का अनुमान लगाया जा सकता है। अधिकांश तौर पर प्रेग्नेंट स्त्री को प्रसव (labor) के चार हफ्ते पहले ही लक्षणों का अनुभव होना शुरू होने जाता है।

नार्मल डिलीवरी या सामान्य प्रसव के संकेत और लक्षण इस प्रकार हैं :

  • प्रेगनेंसी के 30वें सप्ताह - गर्भावस्था के 34वें सप्ताह के बीच बच्चे का सिर नीचे की ओर आना
  • समय के साथ अधिक और लगातार संकुचन (contraction) का अनुभव करना
  • पेट और पैरों के निचले हिस्से में ऐंठन और दर्द होना
  • वेजाइनल डिस्चार्ज अधिक और गाढ़ा होना
  • संकुचन के कारण लगभग 40 से 60 सेकंड तक गंभीर दर्द होना
  • अधिक कमर दर्द (back pain) होना

नॉर्मल डिलीवरी या सामान्य प्रसव के लिए सही विशेषज्ञ कौन हैं ? Show

Who are the right specialists for normal delivery? in hindi

Samanya yoni prasav ke liye sabse sahi visheshagya kaun hote hain in hindi

प्रसूति चिकित्सक (obstetrician) नॉर्मल डिलीवरी के लिए सबसे बेहतर होते हैं। प्रसूति चिकित्सक एमबीबीएस होते हैं और साथ ही 3-4 साल की सर्जरी ट्रेनिंग भी ली होती है। डिलीवरी के लिए इन्हें उपयुक्त इसलिए माना जाता क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान इन्हें गर्भावस्था से संबंधित समस्या और जोखिम के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है।

नॉर्मल डिलीवरी या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में कौन-कौन से चरण होते है? Show

What are the stages of normal delivery? in hindi

Samanya prasav ki prakriya ke charan in hindi (बच्चा कैसे निकलता है)

सामान्य प्रसव के तीन चरण इस प्रकार है :

1. सामान्य डिलीवरी का पहला चरण (First stage of normal delivery)

सामान्य डिलीवरी के पहले चरण के तीन फेज़ निम्न हैं :

  • अर्लि या लेटेंट फेज़ (Early and latent phase)

पहली गर्भावस्था में लेटेंट फेज़ छह से दस घंटे तक रहता है। कुछ मामलों में, यह अधिक लंबा या कम समय का भी हो सकता है। इस चरण में सर्विक्स (cervix) 3-4 सेंटीमीटर तक खुल सकता है। ये फेज़ प्रसव के हफ्ते भर पहले या फिर बच्चे के जन्म से कुछ घंटे पहले शुरू होता है। इस समय प्रेग्नेंट महिला को बीच-बीच में संकुचन का अनुभव हो सकता है।

  • एक्टिव फेज़ (Active phase)

एक्टिव फेज़ में सर्विक्स 4-7 सेंटीमीटर तक खुलता है। सर्विक्स पर प्रेशर बढ़ने के कारण यह फेज़ आपको असहज कर सकता है। इस दौरान होने वाला दर्द, पीरियड्स के दर्द या कमर के निचले हिस्से के दर्द की तरह महसूस हो सकता है। एक्टिव फेज में वॉटर बैग ब्रेक होने की संभावना भी होती है।

  • ट्रांज़िशन फेज़ (Transition phase)

इस फेज़ के दौरान सर्विक्स 8 सेंटीमीटर तक खुल चुका होता है। यह ओपनिंग तब तक जारी रहती है जब तक यह 10 सेंटीमीटर तक नहीं खुल जाती। इस फेज़ में आपको नियमित रूप से कम अंतराल पर निचले पेलविक एरिया में तेज़ दर्द हो सकता है।

2.सामान्य डिलीवरी का दूसरा चरण (Second stage of normal delivery)

सामान्य डिलीवरी के दूसरे चरण में सर्विक्स पूरी तरह से खुल जाता है और संकुचन भी काफ़ी बढ़ जाता है। यह स्टेज सबसे मुश्किल मगर कम समय का होता है। माँ के पुश करने पर बच्चा पेल्विक क्षेत्र और बर्थ कैनाल के माध्यम से बाहर आने का रास्ता ख़ुद बना लेता है। सबसे पहले बच्चे का सिर बाहर आता है इसके बाद बच्चे के बाकि के अंगों को पुश करना आसान हो जाता है।

3.सामान्य डिलीवरी का तीसरा चरण (Third stage of normal delivery)

शिशु के जन्म के ठीक बाद, तीसरे चरण में प्लेसेन्टा (placenta) गर्भाशय से बाहर आ जाता है। इसे "दी आफ्टर बर्थ" (the after birth) भी कहा जाता है। बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेन्टा यूटेरिन वॉल से अलग होने लगती है। प्लेसेन्टा के अलग होने पर और माँ के पुश करने के बाद यह गर्भाशय से बाहर निकल आता है। इस दौरान भी माँ को हल्के संकुचन का अनुभव हो सकता है। ये बच्चे के जन्म के 5-6 मिनट बाद शुरू होता है और इसमें आधे घंटे का समय लग सकता है।

नॉर्मल डिलीवरी या सामान्य प्रसव में कितना समय लगता है ? Show

How long does normal delivery last in hindi

Samanya prasav mein kitna samay lagta hai in hindi (बच्चा कैसे पैदा किया जाता है)

सामान्य प्रसव में आमतौर पर लगभग 12 से 14 घंटे लगते हैं। ऐसा तब होता है जब गर्भवती महिला की ये पहली नार्मल डिलीवरी होने जा रही हो। दूसरी या तीसरी डिलीवरी में पहली नॉर्मल डिलीवरी के अपेक्षा कम समय लगता है।

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भारतमेंनॉर्मल डिलीवरीका खर्च

मूल्य दर

Rs20000-Rs50000

सामान्य प्रसव खर्च बेबी डिलीवरी के लिए चुनी गई सुविधा और माता-पिता की बीमा योजना पर निर्भर करती है। इसके साथ ही नॉर्मल डिलीवरी लागत अस्पताल के चयन, ट्रीटमेंट का चुनाव, माँ व बच्चे की सेहत जैसे अन्य कारणों पर निर्भर करती है। हालांकि, अमूमन सामान्य डिलीवरी की लागत 20,000 से 50,000 तक आ सकती है।


भारतमेंनॉर्मल डिलीवरीके डॉक्टर्स

जो महिलाएं पहली बार प्रेग्नेंट होती हैं उनके मन में गर्भावस्था के लिए बेहतर डॉक्टर के चुनाव को लेकर संशय बरक़रार रहता है। सामान्य प्रसव के लिए चिकित्सक का चुनाव करते वक़्त महिला को काफ़ी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यह ना सिर्फ़ आपके लिए बल्कि आपके होने वाले बच्चे के लिए भी बेहद ज़रूरी है।

ध्यान दें कि, अनुभवी प्रसूति विशेषज्ञ या गायनी डॉक्टर का ही चुनाव करें। अनुभवी डॉक्टर आपकी परेशानी को बेहतर रूप से समझ सकेंगी और आपके मेडिकल इतिहास को समझते हुए आपको उचित सलाह दे पाएँगी।


भारतमेंनॉर्मल डिलीवरीका हॉस्पिटल

अगर आप गर्भवती हैं, तो नॉर्मल डिलीवरी अस्पताल की तलाश को लेकर स्वाभाविक रूप से आप चिंतित हो सकती हैं। अस्पताल का चुनाव करते वक़्त प्रसूति हॉस्पिटल की जानकारी अवश्य इकट्ठी करें। नार्मल डिलीवरी के लिए सबसे अच्छे अस्पताल का चयन करते वक़्त ध्यान दें कि आपकी डॉक्टर उस अस्पताल में काम कर रही हों, प्रसूति अस्पताल सारी मेडिकल सुविधाओं से लैस हो और आपके नज़दीक हो। इससे आपको चेकअप के दौरान कोई परेशानी नहीं होगी और साथ ही किसी तरह की इमरजेंसी की स्थिति में अस्पताल पहुँचना और सही समय पर सही ट्रीटमेंट मिलना आसान होगा।


भारतमेंनॉर्मल डिलीवरीसे जुड़े प्रश्न

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प्रेग्नेंसी डिलीवरी क्या है और डिलीवरी की विभिन्न तकनीकें क्या हैं ?

प्रेग्नेंसी डिलीवरी क्या है और डिलीवरी की विभिन्न तकनीकें क्या हैं ?

माँ के गर्भ में पल रहे शिशु के जन्म की प्रक्रिया को प्रेग्नेंसी डिलीवरी कहते हैं। डिलीवरी की विभिन्न तकनीकों में वेजाइनल या नॉर्मल डिलीवरी (normal or vaginal delivery), सिजेरियन डिलीवरी (caesarean delivery), वैक्युम एक्सट्रैकशन (vaccum extraction) और फोरसेप्स डिलीवरी (forceps delivery) शामिल हैं। चिकित्सक, माँ और बच्चे की सेहत और स्थिति को ध्यान में रखते हुए डिलीवरी की तकनीक चुनते हैं।

किन परिस्थितियों में नॉर्मल डिलीवरी की जाती है ?Show

किन परिस्थितियों में नॉर्मल डिलीवरी की जाती है ?

किन परिस्थितियों में नॉर्मल डिलीवरी की जाती है ?

  • जब बच्चे का वज़न 2 किलो से कम हो।
  • जब माँ डायबिटीज़ जैसी किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त ना हो।
  • जब डॉक्टर बच्चे के प्राकृतिक जन्म के लिए सकारात्मक जवाब दें।
  • जब माँ डिलीवरी में किसी मेडिकल प्रक्रिया का हस्तक्षेप नहीं चाहती हो।


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