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आईवीएफ क्या है? What is IVF/ In vitro fertilisation in hindi IVF/In vitro fertilisation kya hain in hindi

आईवीएफ ट्रीटमेंट यानि इन-विट्रो-फर्टिलाइज़ेशन, गर्भधारण की एक आर्टिफिशयल (artificial) सहायक प्रजनन प्रकिया है। आईवीएफ प्रक्रिया को फर्टिलिटी ट्रीटमेंट (fertility treatment) के नाम से भी जाना जाता है। जिन माता-पिता को प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में समस्या आती है उनके लिए आईवीएफ यानि टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया बेहद कारगर है। इसके अलावा ये सिंगल मदर, सिंगल फ़ादर या समलैंगिक जोड़ों (जिन्हें बच्चे की चाह है) के लिए भी सहायक है।

आईवीएफ उपचार के दौरान परिपक्व अंडे (एग), अंडाशय से एकत्र किए जाते हैं और प्रयोगशाला में शुक्राणु (स्पर्म) द्वारा फर्टिलाइज होते हैं। फिर फर्टिलाइज्ड अंडे यानि भ्रूण (embryo) को गर्भाशय में गर्भधारण के लिए ट्रांसप्लांट किया जाता है। आईवीएफ के एक साइकल में लगभग तीन सप्ताह लगते हैं। कुछ मामलों में आईवीएफ के एक चक्र में अधिक समय भी लग सकता है।आईवीएफ उपचार असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (assisted reproductive technology-ART) का सबसे प्रभावी रूप है। आईवीएफ तकनीक की मदद से कपल अपने ख़ुद के एग और स्पर्म के जरिये बच्चे को जन्म दे सकते हैं। इसके अलावा आईवीएफ की प्रक्रिया में डोनर के एग, स्पर्म या एम्ब्र्यो की मदद से भी गर्भधारण किया जा सकता है। कुछ मामलों में, एक गर्भावधि वाहक यानि सरोगेट मदर (surrogate mother) भी आईवीएफ उपचार में सहायक होती है।

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किन परिस्थितियों में पड़ती है आईवीएफ की ज़रूरत ? Hide

In what condition IVF is needed in hindi

kin dampattiyon ko hoti hai ivf ki jaroorat in hindi

आईवीएफ ट्रीटमेंट की जरूरत उन कपल्स को होती है जो बहुत प्रयासों के बाद भी सामान्य तरीके से संतान को जन्म नहीं दे पा रहे हों। इसके साथ-साथ जब सामान्य उपचार कारगर ना हो तब आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने की सलाह दी जाती है। आईवीएफ उपचार के की जरूरत कई परिस्थितियों में पड़ती है।

निम्न परिस्थितियों में पड़ती है आईवीएफ की जरूरत :

1. फैलोपियन ट्यूब डैमेज या ब्लॉकेज (Fallopian tube damage or blockage)

फैलोपियन ट्यूब डैमेज या ब्लॉकेज होने के कारण अंडे का फर्टिलाइज होना या भ्रूण का गर्भाशय में सर्वाइव (survive) करना मुश्किल हो जाता है। जिसके कारण गर्भधारण संभव नहीं हो पाता है और ऐसी परिस्थिति में आईवीएफ उपचार की जरूरत पड़ती है।

2. ओवुलेशन विकार (Ovulation disorders)

ओवुलेशन विकार उम्र से संबंधित इंफर्टिलिटी, एनोव्यूलेशन (anovulation) और पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम (polycystic ovarian syndrome) ओवरियन विकार के लक्षण हैं। इन परिस्थियों में गर्भधारण संभव नहीं हो पाता, ऐसे में आईवीएफ उपचार काफी मददगार है।

3. एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

एंडोमेट्रियोसिस एक मेडिकल कंडीशन है जब यूटेरस की लाइनिंग जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है, असामान्य तरीके से दूसरी अंगों की तरफ बढ़ने लगती है जैसे फैलोपियन ट्यूबों (fallopian tubes), ओवरी और पेलविस। एंडोमेट्रियोसिस के कारण गर्भधारण में बाधा आती है, ऐसी परिस्थिति में बांझपन के उपचार के लिए आईवीएफ की तकनीक का सहारा लेना मददगार हो सकता है।

4. गर्भाशय फाइब्रॉयड (Uterine fibroids)

यूटेरियन फाइब्रॉयड, 30 से 40 की उम्र में महिलाओं में उत्पन्न होने वाली ऐसी स्थिति है जब उनका गर्भाशय असामान्य रूप से बढ़ने लगता है। यह स्थिति आमतौर पर कैंसेरस नहीं होती है। मगर फाइब्रॉयड निषेचित अंडे (fertilized egg) के आरोपण में हस्तक्षेप कर सकता है, जिससे इंफर्टिलिटी की समस्या होती है। इस कारण से बांझपन का सामना कर रहीं महिलाओं के लिए आईवीएफ एक बेहतर विकल्प है।

5. प्रीवियस ट्यूबवेल स्टरलाइजेशन या निष्कासन (Previous tubal sterilization or removal)

यदि आपने ट्यूबल लिगेशन (tubal ligation) करवा रखा है। एक प्रकार की नसबंदी जिसमें गर्भावस्था को रोकने के लिए फैलोपियन ट्यूब को काट दिया जाता है या अवरुद्ध कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में गर्भधारण के लिए आपके पास आईवीएफ ट्यूबल लिगेशन रिवर्सल का विकल्प होता है या आप आईवीएफ का सहारा ले सकती हैं।

6. खराब शुक्राणु उत्पादन या कार्य (Impaired sperm production or function)

बिलो एवरेज स्पर्म कंसन्ट्रेशन (Below-average sperm concentration), शुक्राणु की संख्या कम होना, शुक्राणु की खराब गतिशीलता (weak movement of sperm) या शुक्राणु के आकार व आकृति में विकार शुक्राणु और अंडे के फर्टिलाइज़ेशन को मुश्किल बना सकता है। इसके कारण बांझपन की समस्या उत्पन्न हो सकती है, ऐसे में आईवीएफ का विकल्प मददगार है।

7. अस्पष्टीकृत इंफर्टिलिटी (Unexplained infertility)

अनएक्सप्लेंड इंफर्टिलिटी यानि सामान्य कारणों के मूल्यांकन के बावजूद बांझपन का कोई कारण नहीं पाया गया हो। ऐसे में इंफर्टिलिटी की समस्या हो सकती हैं, जिस स्थिति में कपल आईवीएफ उपचार का विकल्प चुन सकते हैं।

8. जेनेटिक डिसीज/प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक स्क्रीनिंग या डायग्नोसिस - पीजीएस या पीजीडी (Genetic disease / preimplantation genetic screening or diagnosis - PGS or PGD)

यदि आपको या आपके साथी के कारण आपके बच्चे के आनुवंशिक विकार से गुजरने का ख़तरा है तो आप प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (preimplantation genetic testing) के उम्मीदवार हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में आईवीएफ शामिल होता है। अंडे के फर्टिलाइज्ड होने के बाद उसमें कुछ आनुवंशिक समस्याओं की जांच की जाती है। जिस भ्रूण में आनुवंशिक समस्याएँ नहीं होती, उन्हें गर्भाशय में स्थानांतरित किया जा सकता है। हालांकि, इससे सभी आनुवंशिक समस्याओं को नहीं खोजा जा सकता है।

9. कैंसर या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिए प्रजनन संरक्षण (Fertility preservation for cancer or other health conditions)

यदि आप कैंसर उपचार शुरू करने वाले हैं - जैसे कि रेडिएशन या कीमोथेरेपी - जो आपकी प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है, तो प्रजनन संरक्षण के लिए आईवीएफ एक विकल्प हो सकता है। महिलाओं के गर्भाश्या से हार्वेस्ट अंडों को फ्रीज किया जाता है। इस भ्रूण को भविष्य में फर्टिलाइजेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

10. सरोगेसी (Surrogacy)

जिन महिलाओं के पास एक फंक्शनल यूट्रेस (functional uterus) नहीं होता है या जिन्हें गर्भावस्था में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम होता है, किसी अन्य महिला के साथ आईवीएफ चुन सकती हैं। इसे "किराए की कोख" या सरोगेसी के नाम से भी जाना जाता है। इस मामले में महिला के अंडों को शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है, लेकिन परिणामस्वरूप भ्रूण को गर्भकालीन वाहक यानि सेरोगेट मदर के गर्भाशय में रखा जाता है।

IVF ट्रीटमेंट से पहले किए जाने वाले टेस्ट और जांच क्या बताते हैं Show

What the tests or any other diagnosis will clarify that is done before IVF treatment in hindi

IVF treatment se pahle ki jaane waale test aur janch kya pata chalta hai in hindi

आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहले महिला और पुरुष दोनों की अलग-अलग जांच की जाती है और कई तरह के टेस्ट करवाए जाते हैं। बांझपन का निदान करने के लिए किए गए परीक्षणों को आमतौर पर प्री-स्क्रीनिंग परीक्षणों के रूप में जाना जाता है। इन परीक्षणों के परिणामों के साथ डॉक्टर निम्न 5 प्रश्नों का जवाब देते हैं :

  • क्या (infections) संक्रमण, आनुवंशिक समस्या (genetic issues) या ऑटोइम्यून समस्या (genetic issues) मौजूद हैं ?
  • क्या आप ओव्युलेट कर रही हैं ?
  • क्या आपके फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes) सामान्य हैं ?
  • क्या आपका गर्भाशय आरोपण के लिए तैयार है ?
  • क्या शुक्राणु संख्या और फंक्शन सामान्य हैं ?

एक बार जब आपकी समस्या के बारे में पता चल जाता है, तो एक उपचार योजना आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुरूप होगी। अनुशंसित दृष्टिकोण (recommended approach) आपकी उम्र, डायग्नोसिस, बांझपन की अवधि, किसी भी पिछले उपचार और आपकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। जबकि सभी मरीज़ों को सभी डायग्नोस्टिक टेस्ट (diagnostic test) की आवश्यकता नहीं होती है, एक आइडियल ट्रीटमेंट प्लान को निर्धारित करने और इस प्रकार गर्भावस्था के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में एक संपूर्ण नैदानिक ​​मूल्यांकन (thorough diagnostic evaluation) महत्वपूर्ण होता है।

महिलाओं के लिए IVF ट्रीटमेंट से पहले किए जाने वाले टेस्ट और जांच कौन से हैं ? Show

What are the tests for women before IVF treatment in hindi

Mahilaon ke liye IVF treatment se pahle kiye jane waale test kaun se hain in hindi

आईयूआई की प्रक्रिया की ओर रूख करने से पहले डॉक्टर की ओर से महिला को कई तरह के टेस्ट करने की सलाह दी जाती है। ये टेस्ट इसलिए किये जाते हैं ताकि प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की समस्या न हो और ट्रीटमेंट सफल हो सके।

1. सामान्य स्क्रीनिंग टेस्ट - संक्रामक, आनुवंशिक (General Screening Tests - Infectious, Genetic)

  • संक्रामक स्क्रीन (Infectious Screen)

आप और आपके साथी दोनों की, संक्रामक रोग स्क्रीनिंग की जाती है। इनमें शामिल है, क्लैमाइडिया एंटीबॉडी (chlamydia antibody), गोनोरिया (gonorrhea), हेपेटाइटिस बी (hepatitis B), हेपेटाइटिस सी (hepatitis C), सिफलिस सीरोलॉजी (syphilis serology), एचआईवी (HIV) टेस्ट आदि।

  • प्री-प्रेगनेंसी स्क्रीन (Pre-Pregnancy Screen)

इसके अंतर्गत कम्पलीट ब्लड काउंट (complete blood count), ब्लड टाइप और आरएच फैक्टर (blood type & Rh factor), रूबेला टाइटर (rubella titer) टेस्ट किए जाते हैं। ये टेस्ट गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को गंभीर जटिलताओं और एनीमिया और अन्य संभावित विकारों से बचाने के लिए किए जाते हैं।

  • पिट्यूटरी/थायरॉइड स्क्रीनिंफ (Pituitary/Thyroid Screening)

प्रोलैक्टिन (prolactin), टीएसएच (TSH), फ्री थायरोक्सिन (free thyroxine) हार्मोनल परीक्षण गर्भावस्था को प्रभावित करने वाले असामान्यताओं का पता लगाते हैं।

  • जेनेटिक स्क्रीनिंग (Genetic Screening)

टे सैक्स (tay sach’s), सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis), सिकल सेल (sickle cell) के लिए टेस्ट किए जाते हैं। अगर आपका मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार आपको आनुवंशिक (genetic), ओटो-इम्म्यून डिसीज़ (autoimmune disease) या मेडिकल डिसीज़ (medical disease) का ख़तरा हो सकता है, तो साइकिल शुरू करने से पहले अन्य टेस्ट कराने की भी सलाह दी जा सकती है।

  • पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear)

ये टेस्ट सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स से जुड़ी अन्य समस्याओं या यौन संचारित रोगों (sexually transmitted diseases) का पता लगा सकता है। इनमें से कोई भी समस्या आपके गर्भवती होने में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

2. ओवेरियन फंक्शन और ओवरयिन रिजर्व टेस्टिंग (Ovarian Reserve Screening)

लगभग 30-35 % महिला से संबंधित बाँझपन ओवेरियन डिसॉडर के कारण होता है। ऐसे में टेस्ट उद्देश्य हमें जानकारी देना है कि आप ओवुलेट कर रहे हैं या नहीं।

ओवरयिन रिजर्व टेस्टिंग के अंतर्गत निम्न टेस्ट किए जाते हैं : -

  • बेसलाइन अल्ट्रासाउंड (Baseline Ultrasound)

अल्ट्रासाउंड, पीरियड के साइकिल के दूसरे, तीसरे या चौथे दिन किया जाता है। इससे अंडाशय (ovaries) के आकार, मात्रा और फॉलिकल की संख्या (मासिक धर्म चक्र के शुरुआती समय के अपरिपक्व अंडे) की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

  • तीसरे दिन ब्लड वर्क (Day 3 Blood Work)

एफएसएच (FSH), एलएच (LH) , ई2 (E2) टेस्ट किए जाते हैं। हार्मोन के स्तर जैसे कि फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन और एस्ट्राडियोल को मासिक धर्म चक्र की शुरुआत में देखकर, डॉक्टर को एक महिला के "डिम्बग्रंथि रिजर्व" की जानकारी मिल मिलती है।

3. फॉलोपियन ट्यूब मूल्यांकन (Fallopian Tube Evaluation)

फैलोपियन ट्यूब से जुड़े मुद्दे, महिला बांझपन की लगभग 30% समस्याओं का कारण हो सकते हैं। सामान्य समस्याएं ट्यूबल ब्लॉकेज (tubal blockage) या पिछली अनजानी पेल्विक संक्रमण (undiagnosed pelvic infection) से होने वाली स्कारिंग, पेट के संक्रमण जैसे एपेंडिसाइटिस (appendicitis), पहले हुई सर्जरी, पहले हुई एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) या एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) से संबंधित होते हैं।

  • हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी (Hysterosalpingography)

हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी एक एक्स-रे परीक्षण होता है, जिसमें गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से डाई (dye) की एक छोटी मात्रा में डालकर पता लगाया जाता है कि फॉलोपियन ट्यूब खुले हैं या फिर उनमें ब्लॉकेज है।

4. गर्भाशय का मूल्यांकन (Uterine Evaluation)

गर्भाशय को एंडोमेट्रियम (endometrium) नामक कोशिकाओं की एक विशेष परत द्वारा पंक्तिबद्ध (lined) किया जाता है, जहां भ्रूण का प्रत्यारोपण (implant) होता है और गर्भावस्था में विकसित होना शुरू होता है। भ्रूण के आरोपण के संभावित दोषों या बाधाओं के लिए गर्भाशय गुहा (uterine cavity) का पूरी तरह से मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होता है।

डिफेक्ट्स के उदाहरण जैसे- यूटेरिन स्कार टिश्यू (uterine scar tissue - पिछली गर्भधारण या प्रक्रियाओं से), पोलिप्स (polyps), फ़िब्रोइद्स (fibroids) और गर्भाशय में अन्य संरचनात्मक दोष (structural defects)।

आपकी विशिष्ट स्थिति के आधार पर, मूल्यांकन में निम्नलिखित परीक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Baseline pelvic/vaginal ultrasound)

आमतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल शुरू होने के दूसरे, तीसरे या चौथे दिन पर पेल्विक अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यह चिकित्सक को गर्भाशय गुहा (uterine cavity) की दिशा और लंबाई के बारे में जानकारी देता है।

  • हिस्टेरोस्लिंग्पोग्राम - एचएसजी (Hysterosalpingogram - HSG)

एचएसजी से गर्भाशय गुहा (uterine cavity) के बनावट से संबंधित दोषों (structural defects) की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

  • सोनोहिस्ट्रोग्राफी / सोनोहिस्टोग्राम/सैलाइन सोनोग्राफी - (Sonohysterography/Sonohysterogram -saline sonography)

यूटेरस में कम मात्रा में स्टेराइल फ्लूइड डालकर यूटरिन वॉल (uterine wall) और इनर यूटरिन कैविटी (inner uterine cavity) का मूल्यांकन किया जाता है। यह परीक्षण यूटरिन वॉल और एंडोमेट्रियल कैविटी, दोनों की असामान्यताओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

  • डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी (Diagnostic Hysteroscopy)

यह परीक्षण आईवीएफ जैसे प्रजनन उपचार से गुज़रने वाली महिलाओं के लिए या जिन लोगों को सोनोहिस्ट्रोग्राफी (sonohysterography) पर संदेह है, उनके लिए सिफारिश की जाती है।

  • एंडोमेट्रियल बायोप्सी (Endometrial Biopsy)

ये टेस्ट केवल कुछ परिस्थितियों में एंडोमेट्रियम के विकास में समस्याओं का निदान करने के लिए किया जाता है, जिसे ल्यूटल फेज़ डिफेक्ट (luteal phase defect) कहा जाता है, या एंडोमेट्रियल लाइनिंग (endometrial lining) के संभावित संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है।

पुरुषों के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहले किए जाने वाले टेस्ट और जांच क्या हैं ? Show

What are the test for males before IVF treatment in hindi

Purushon ke liye IVF treatment se pahle kiye jaane waale test aur janch kaunse hain in hindi

इनफर्टिलिटी के मामलों में 40% मामले मुख्य तौर पर पुरुष से संबंधित इनफर्टिलिटी के कारण होते हैं। पुरुषों के निजी अंगों की जांच सहित एक सामान्य शारीरिक परीक्षा हो सकती है।

साथ ही कुछ निम्न विशिष्ट प्रजनन परीक्षण किए जाते हैं :

  • वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis)

यह परीक्षण एक अनुभवी एंड्रोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है, जो शुक्राणु का सूक्ष्म (microscopic) मूल्यांकन करते हैं। सीमेन एनालिसिस से प्राप्त जानकारी जैसे कि शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु का आकार, यह निर्धारित करने में मदद करता है कि अंडे को निषेचित करने के लिए, शुक्राणु की सुविधा के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जाए। इन विकल्पों में समय पर संभोग (timed intercourse), अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (intrauterine insemination), पारंपरिक आईवीएफ (conventional IVF) या आईसीएसआई (intracytoplasmic sperm injection) शामिल हैं।

  • एंटी-स्पर्म एंटीबाडीज़ (Anti-sperm antibodies)

ये परीक्षण ब्लड और सीमेन दोनों में असामान्य कणों (abnormal particles) का पता लगाता है, जिन्हें एंटीबॉडीज़ (antibodies) कहा जाता है, जो अन्यथा सामान्य शुक्राणु को हानि पंहुचा सकते हैं या नष्ट कर सकते हैं।

  • कैरियोटाइपिंग (Karyotyping)

ये एक क्रोमोसोमल एनालिसिस होता है, जो संभावित महत्वपूर्ण असामान्यताओं (abnormalities) की पहचान कर सकता है, जिससे निषेचन (fertilization) और गर्भावस्था (pregnancy) में बाधा आती है। बाद के उपचार के विकल्पों में आईवीएफ के साथ प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस (Preimplantation Genetic Diagnosis) या डोनर स्पर्म का उपयोग शामिल हो सकता है।

  • आनुवंशिक परीक्षण (Y chromosome Deletion testing - Genetic disorder testing)

जब शुक्राणु की एकाग्रता (concentrations) बहुत कम होती है, तो इसका कारण आनुवंशिक हो सकता है। रक्त परीक्षण से पता चल सकता है कि वाई क्रोमोसोम (Y chromosome) में परिवर्तन हैं जो कि एक आनुवंशिक असामान्यता का संकेत हो सकता है, यह नेचुरल प्रेगनेंसी रेट को कम करता है।

आईवीएफ के साथ, आईसीएसआई की उन्नत प्रजनन तकनीक का उपयोग करके, निषेचन प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि ये असमानताएं किसी पुरुष के संतान को हो सकती है। ऐसे में विभिन्न जन्मजात या फैमिली हिस्ट्री में मिले सिंड्रोम जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस का पता लगाने के लिए आनुवंशिक परीक्षण का आदेश दिया जा सकता है।

  • स्पर्म क्रोमैटिन स्ट्रुक्टर ऐसे (Sperm Chromatin Structure Assay - SCSA)

ये एक नई परीक्षण प्रक्रिया है, जो लगातार गर्भावस्था हानि या अप्रत्याशित, अस्पष्टीकृत और बार-बार असफल आईवीएफ चक्रों के मामलों में की जाती है। संभवतः विफल निषेचन (failed fertilization) पुरुष कारक बांझपन (male factor infertility) से संबंधित होती है। यह परीक्षण शुक्राणु में डीएनए फ्रेगमेंटेशन के दोषों का विश्लेषण करता है।

अध्ययनों से पता चला है कि इस परीक्षण में महत्वपूर्ण असामान्यताएं प्राकृतिक गर्भाधान (natural conception) की संभावना को कम करती हैं। हालांकि अच्छी बात ये है कि आईसीएसआई के साथ आईवीएफ जैसी उन्नत प्रक्रिया गर्भावस्था को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। यह परीक्षण आमतौर पर लगातार गर्भावस्था हानि से पीड़ित रोगियों के लिए किया जाता है।

  • टेस्टिकुलर बायोप्सी (Testicular biopsy)

इस परीक्षण में सुई के साथ अंडकोष से नमूने को निकालना शामिल है। टेस्टिकुलर बायोप्सी के परिणाम बताते हैं कि शुक्राणु उत्पादन सामान्य है तो आपकी स्पर्म ट्रांसपोर्ट (sperm transport) की समस्या ब्लॉकेज या किसी अन्य कारण से हो सकती है।

कुछ स्थितियों में मस्तिष्क एमआरआई और वासोग्राफी (vasography) की जाती है।

कुछ दुर्लभ मामलों में डीएनए की असामान्यताओं की जांच के लिए वीर्य के नमूने का मूल्यांकन किया जाता है।

सभी मरीज़ों को हर नैदानिक ​​परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है, आइडियल ट्रीटमेंट प्लान का निर्धारण करने में एक संपूर्ण नैदानिक ​​मूल्यांकन (thorough diagnostic evaluation) महत्वपूर्ण होता है, और इस प्रकार गर्भावस्था का अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करना है।

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भारतमेंआईवीएफका खर्च

मूल्य दर

Rs100000-Rs200000

भारत में आईवीएफ उपचार की लागत 1 से 2 लाख रूपए के बीच में है। आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया लागत जगह, दवाओं की मात्रा, आईवीएफ चक्रों की संख्या के आधार पर भिन्न हो सकता है। टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) प्रक्रिया से गर्भधारण का खर्च हमेशा महँगा नहीं होता है। यह कई चीजों पर निर्भर करता है।

IVF लागत निम्न बातों पर निर्भर करती है :

  • उम्र
  • इंफर्टिलिटी की अवधि
  • प्रक्रिया का प्रकार (IVF, IUI, donor eggs)
  • बांझपन के कारण
  • रोगी के आधार पर
  • प्रजनन उपचार और आवश्यक दवाएं (अलग-अलग होती हैं)।

भारतमेंआईवीएफके डॉक्टर्स

बांझपन के इलाज़ के लिए आपको मेल इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट या फिर फ़ीमेल इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट की जरूरत हो, एक बेस्ट इंफर्टिलिटी डॉक्टर की तलाश करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इंफर्टिलिटी की समस्या से गुज़र रहे लोगों को कई कठिन मेडिकल निर्णयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में दोस्तों, परिवार, इंटरनेट और अन्य जगहों से भी मिलने वाली जानकारी आपको कंफ्यूज कर सकती हैं।

ऐसे में ये बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि इंफर्टिलिटी की समस्या का सामना कर रहें लोग सबसे उपयुक्त बांझपन उपचार के डॉक्टर की तलाश करें। अगर आप आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए IVF गर्भावस्था स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन कर रहे हैं तो आपको कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

IVF गर्भावस्था स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चुनाव करते वक़्त निम्न बातों को रखें ध्यान :

  • शीर्ष IVF विशेषज्ञ एमबीबीएस के बाद स्पेशलाइजेशन गायनोक्लोजी में करते हैं और फिर आर्ट (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्निक्स) में आगे ट्रेनिंग लेते हैं। बांझपन उपचार चिकित्सक का चुनाव करते वक़्त डॉक्टर की डिग्री क्या-क्या हैं, इस बात का ज़रूर ख्याल रखें।
  • आईवीएफ स्पेशलिस्ट के पास फर्टिलिटी और आईवीएफ प्रक्रियाओं के उपचार में कितना अनुभव है।
  • फ़र्टिलिटी स्पेशलिस्ट के चयन से पहले जानें कि उनका सक्सेस रेट क्या है।
  • यह ज़रूर पता करें कि आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर के बारे में मरीज़ों की क्या राय है और डॉक्टर का व्यवहार कैसा है। क्योंकि यदि डॉक्टर के साथ आप सहज नहीं है तो इलाज करवाना मुश्किल हो सकता है।
  • क्या बांझपन उपचार के डॉक्टर आपके सभी शंकाओं को दूर कर रहें हैं।
  • क्या IVF गर्भावस्था स्पेशलिस्ट डॉक्टर आपसे भावनात्‍मक रूप से जुड़ रहें हैं और आपको सिर्फ पैसा कमाने का जरिए के रूप में तो नहीं देख रहें।

ये भी देखें कि आपके आईवीएफ स्पेशलिस्ट आईवीएफ ऑनलाइन परामर्श देते हैं या नहीं।


भारतमेंआईवीएफका हॉस्पिटल

आमतौर पर देखा गया है कि आईवीएफ गर्भावस्था के लिए बेस्ट हॉस्पिटल या क्लीनिक का चयन करने में कपल्स ऐसे क्लीनिक का चयन करते हैं जो उनके घर के आस-पास होता है, जिसका खर्च कम होता है या फिर उनके किसी जानकर ने वहां इलाज करवाया हो। लेकिन आपको ये याद रखना होगा सभी आईवीएफ क्लीनिक समान रूप से अच्छे नहीं होते हैं। आईवीएफ गर्भावस्था के लिए बेस्ट हॉस्पिटल के चयन के दौरान कई बातों को जानना जरूरी है।

आईवीएफ फ़र्टिलिटी सेंटर का चयन करते वक़्त निम्न बातों का रखें ध्यान :

  • आईवीएफ (IVF) फ़र्टिलिटी सेंटर की सुविधाएं कैसी हैं।
  • सुनिश्चित करें कि IVF केंद्र में आईवीएफ उपचार की एक विस्तृत श्रृंखला है और नवीनतम तकनीक हैं या नहीं।
  • हॉस्पिटल में मान्यता प्राप्त डॉक्टर है या नहीं।
  • क्या आपको आईवीएफ संबंधित सभी जानकारियाँ खुल कर दी जा रही हैं और आपके सभी सवालों के जवाब सही से दिए जा रहे हैं।
  • उपचार में क्या खर्च होता है और किन परिस्थियों में खर्च कम या ज्यादा हो सकता है, इसकी जानकारी भी डिटेल्स में दी जा रहीं हैं या नहीं।
  • साथ ही IVF से प्रेगनेंसी ट्रीटमेंट के क्लिनिक के सक्सेस रेट या हॉस्पिटल की गर्भावस्था दर के बारे में जानें।
  • आईवीएफ क्लीनिक की जानकारी गुप्त रखने की पॉलिसी क्या हैं।
  • हॉस्पिटल के पास एग फ्रीजिंग,भ्रूण फ्रीजिंग, स्पर्म फ्रीजिंग की सुविधा है या नहीं।
  • हॉस्पिटल की अपनी खुद की लैब है या नहीं।

संभव हो तो वहां पहले से फर्टिलिटी का इलाज करवा रहे लोगों की राय ज़रुर लें।


भारतमेंआईवीएफसे जुड़े प्रश्न

आईवीएफ़ क्या है और इसकी प्रक्रिया कैसे होती है ?Show

आईवीएफ़ क्या है और इसकी प्रक्रिया कैसे होती है ?

आईवीएफ़ क्या है और इसकी प्रक्रिया कैसे होती है ?

आईवीएफ़ गर्भधारण के लिए की जाने एक मेडिकल और सर्जिकल प्रकिया है जिसके तहत कृत्रिम तरीके से एग, स्पर्म के साथ फर्टिलाइज होते हैं। इसके बाद फर्टिलाइज्ड एग यानि एम्ब्र्यो को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है ताकि वह विकास कर सके और शिशु का रूप ले सके।

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क्या IVF में गर्भावस्था की संभावना उम्र पर निर्भर करती है ?

क्या IVF में गर्भावस्था की संभावना उम्र पर निर्भर करती है ?

आईवीएफ़ साइकल में उम्र सबसे महत्वपूर्ण कारक है। आईवीएफ़ प्रक्रिया से गर्भधारण की संभावना 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में अधिक होती है। वहीं 35 वर्ष से अधिक उम्र के बाद गर्भधारण की संभावना बेहद कम होती चली जाती है।


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