वजन प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है?

How Weight Affects Fertility in hindi

Wajan prajann kshamta ko kaise prabhavit karta hai


एक नज़र

  • अगर आपका वजन आदर्श है तो आपके गर्भधारण करने और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना अधिक हो जाती है।
  • एक स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम गर्भधारण की संभावना को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • असामान्य वजन महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और ओवुलेशन की समस्या पैदा करता है।
  • अधिक वजन वाले पुरुषों के स्पर्म की गुणवत्ता कम होती है।
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Introduction

Adhik_Wajan_prajann_kshamta_ko_km_kerta_hain_

गर्भावस्था का सफर हर किसी के लिए अलग होता है। कुछ कपल सिर्फ सेक्स करने से प्रेग्नेंट हो जाते हैं, जबकि कुछ कपल महीनों या सालों तक गर्भधारण कर पाने में असमर्थ नजर आते हैं। आज की पीढ़ी में बांझपन सबसे आम प्रजनन समस्या है। कई मामलों में, लोगों का उन कारकों पर नियंत्रण नहीं होता है जो उनके बांझपन का बड़ा कारण होते हैं। कुछ परिवर्तनीय कारक हैं जो प्रेग्नेंट होने में भूमिका निभाते हैं। इस तरह के एक परिवर्तनीय कारक का एक उदाहरण वजन है।

स्वस्थ बीएमआई (BMI - Body mass index) बनाए रखने से, ना सिर्फ आपके गर्भधारण की संभावना बेहतर होती है बल्कि यह गर्भवस्था से जुड़े जोखिमों को भी कम कर सकता है। शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि गर्भधान के मामले में स्वस्थ वजन बेहद फायदेमंद होता है। हालांकि, यह नोट जरुर करें कि हेल्दी वेट बेस्ट फर्टिलिटी की गारंटी नहीं देता है, लेकिन कम वजनी या अधिक वजनी होने से आपके प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना घटती जरूर है। आगे के सेक्शन में, हम देखेंगे कि कैसे कम या अधिक वजन आपके गर्भधारण में देर कर सकता है।

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इस लेख़ में

 

स्वस्थ शारीरिक वजन क्या है?

What is healthy body weight? in hindi

svsth vajan kise kehte hain

स्वस्थ वजन का होना आपके प्रजनन और सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। यह आपको क्रोनिक स्वास्थ्य स्थितियों (chronic health condition) से बचाता है, जैसे - दिल की बीमारी और डायबिटीज़! स्वस्थ शारीरिक वजन आपके हार्मोनल बैलेंस को भी दुरुस्त रखता है, जो ओवुलेशन (महिलाओं में) से जुड़ी किसी समस्या बचाता है और स्पर्म की (पुरुषों में) अच्छी गुणवत्ता बनाए रखता है। मगर, सवाल उठता है कि आदर्श शारीरिक वजन है क्या?

यह सवाल हमें लेकर आता है बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की ओर! यह हमें बताता है कि हाइट के अनुसार एक व्यक्ति का वजन कितना होना चाहिए और अप्रत्यक्ष रूप से बॉडी फैट को मापता है। आपके वजन को (किलोग्राम में) आपकी हाइट के स्क्वायर से (मीटर में) भाग देकर आपका बॉडी मास इंडेक्स पता किया जा सकता है। आप इंटरनेट पर उपलब्ध बीएमआई कैलकुलेटर की भी मदद ले सकते हैं।

बीएमआई से जुड़ी सामान्य गाइलाइन, व्यक्ति इनमें से किसी एक श्रेणी में आ सकता है, [1]

19 के अंदर - कम वजन

19-24 - सामान्य

25-29 - अधिक वजन

30 से अधिक - मोटापा

यह एक आसान स्क्रीनिंग टूल है, क्योंकि यह आपके हाइट और वजन के अलावा, न्यूट्रिशन से जुड़ी आदतों, मासपेशियों के वजन, चिकित्सीय इतिहास, गतिविधि का अन्य चीजों की गणना नहीं करता। इसलिए, यदि आप गर्भधारण करने की योजना बना रहे हैं या प्राकृतिक गर्भाधान में समस्या का सामना कर रहे हैं, तो पूरे मूल्यांकन के लिए प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लें।

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वजन कैसे आपके सफल गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करता है?

How weight affects your chances of successful pregnancy?in hindi

Wajan kaise apke safal garbhdharan ki sambhavna ko prabhavit karta hai

वजन आपके शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। आप में से ज्यादातर लोग जानते होंगे कि आपके अंडाशय एस्ट्रोजन का उत्पादन करते हैं, बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि एडीपोज टिशू यानि वसा ऊतक या फैट सेल्स यानि वसा कोशिकाएं भी एस्ट्रोजन की कुछ मात्रा का स्राव करती हैं। एस्ट्रोजन आपके अंडाशय (ओवुलेशन) से अंडे जारी करने के लिए आवश्यक है।

आदर्श शरीर के वजन के तहत, आपका शरीर पर्याप्त एस्ट्रोजन का उत्पादन करता है जो आपको हर महीने आपके मासिक धर्म चक्र के अनुसार ओवुलेट करने में मदद करता है। हालांकि, जब आप मोटे होते हैं या अधिक वजन वाले होते हैं, तो आपके अंडाशय के साथ, एडीपोज टिशू (वसा ऊतक) भी एस्ट्रोजेन का उत्पादन शुरू कर देता है। एस्ट्रोजन का यह उच्च स्तर हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है, जो नियमित ओव्यूलेशन को रोकता है। अध्ययन से पता चलता है कि सामान्य वजन वाली महिलाओं की तुलना में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में असुरक्षित यौन संबंध के 12 महीनों के भीतर गर्भ धारण करने की संभावना कम होती है। [2]

आपके शरीर को ओवुलेट करने के लिए हार्मोन के बीच एक बेहतर संतुलन की आवश्यकता होती है, और उच्च या निम्न एस्ट्रोजन होने से यह संतुलन बिगड़ सकता है। सामान्य तौर पर, आपके शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल एक स्तर तक बढ़ता रहता है जो ओवेरीयन फॉलिकल्स से अंडों को रिलीज करता है, और इसके बाद यह स्तर कम हो जाता है। दूसरी तरफ़, यदि आप कम वजन वाली हैं, तो आपके अंडाशय कम एस्ट्रोजन बनाते हैं, जिस कारण माहवारी में अनियमितता हो सकती है। यदि आप काफी कम वजन के हैं और आपका मासिक धर्म पूरी तरह रुक जाता है तो यह एमोनोरिया (amenorrhea) की स्थिति है। [3]

मोटापे के साथ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं, इनमें से एक समस्या है इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance)। इंसुलिन प्रतिरोध न केवल टाइप 2 मधुमेह का कारण बन सकता है, बल्कि यह आपकी प्रजनन क्षमता को भी नुकसान पहुँचाता है। इंसुलिन (पैंकृयाज द्वारा स्रावित एक हार्मोन) का काम रक्तप्रवाह के माध्यम से सेल्स में ग्लूकोज को ट्रांसफर करना है। लेकिन जब आपका शरीर इंसुलिन प्रतिरोधी होता है, तो सेल्स, ग्लूकोज को सेल्स में ट्रांसफर करने के लिए इंसुलिन के अनुरोध को नहीं सुनती हैं। ऐसी स्थितियों में, पैंकृयाज खून में अधिक ग्लूकोज लेवल को जान उसे हटाने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करेगा। इसका मतलब है कि ग्लूकोज को हटाने के लिए शरीर सामान्य से अधिक इंसुलिन का उत्पादन कर रहा है। यह इंसुलिन की वृद्धि, चयापचय की गड़बड़ी का कारण बनती है जो ओवुलेशन को प्रभावित कर सकता है और जिससे गर्भाधान में देरी होती है। इतना ही नहीं, अधिक वजन, पुरुष प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है क्योंकि अध्ययनों के अनुसार, जो लोग अधिक वजन वाले या मोटे हैं उनमें कम गुणवत्ता वाले शुक्राणु होते हैं, और उन्हें स्तंभन दोष (erectile disfunction) और कम कामेच्छा (low libido) का सामना करना पड़ता है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि अधिक वजन होने से गर्भावस्था को पूर्ण अवधि यानि फुल टर्म तक ले जाने की महिलाओं की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है और गर्भावस्था की जोखिमों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार, जिन शिशुओं का जन्म मोटी महिलाओं (जिनका बीएमआई 30 या उससे अधिक होता है) के द्वारा होता है, उनमें दिल की समस्याओं और न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट जैसे दोषों के साथ पैदा होने की संभावना अधिक होती है। ACOG इस बात के लिए भी सचेत करता है कि अधिक वजन वाली महिलाओं में गर्भावस्था से संबंधित जटिलताएँ जैसे मधुमेह, प्री-टर्म बर्थ और उच्च रक्तचाप का जोखिम अधिक होता है। [4]

जर्नल ह्यूमन रिप्रोडक्शन में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि जिन महिलाओं का बीएमआई 25 से अधिक होता है, वे नॉर्मल बीएमआई वाली महिलाओं की तुलना में अधिक गर्भपात का शिकार होती हैं। मोटापे और अधिक वजन वाली महिलाओं के बीच बढ़े हुए गर्भपात के मामलों का सटीक मेकैनिज़्म और कारण आज की तारीख में ज्ञात नहीं है। लेकिन यह माना जाता है कि पीसीओएस (PCOS) और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी इंडोक्राइन समस्याएं इसमें भूमिका निभाती हैं। [5]

इतना ही नहीं, सामान्य शारीरिक वजन वाली महिलाओं की तुलना में अधिक वजन वाली महिलाओं के लिए कृत्रिम तकनीकों (artificial technologies) के साथ सफल गर्भधारण की दर भी कम है। जर्नल ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्टिव साइंस के एक प्रकाशित स्टडी में कहा गया है कि अधिक बीएमआई वाली महिलाएं, आईयूआई और आईवीएफ जैसे प्रजनन उपचार के लिए (सामान्य बीएमआई वाले लोगों की तुलना में) अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देती हैं।

 

क्या आदर्श शारीरिक वजन गर्भाधान में मदद कर सकता है?

Can healthy weight help you conceive in hindi

Kya adarsh sharirik wajan garbhadhan mein madad kar sakta hai

यदि आपकी बांझपन का कारण, बढ़ा हुआ वजन निर्धारित किया गया है, तो आदर्श वजन रखने से आपको गर्भधारण में मदद मिल सकती है। हर महिला अलग होती है, लेकिन शोधों से पता चला है कि अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं के वजन कम करने से उनके गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। [6] वजन कम करने से मासिक धर्म चक्र को सामान्य होने में भी मदद मिलती है। जो महिलाएं कम वजन की हैं और उन्हें गर्भाधान से पहले वजन बढ़ाने की जरूरत है तो उन्हें धीरे-धीरे वजन बढ़ाना चाहिए। उन्हें अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए कि सुरक्षित तरीके से वजन कैसे बढ़ाया जाए।

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मोटापे से जुड़े प्रेग्नेंसी के जोखिम और जटिलताएं

Pregnancy risk and complications associated with obesityin hindi

Motape se jude pregnancy ke jokhim aur jatiltaaye

गर्भावस्था के दौरान अधिक वजन या मोटापे के कारण गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। यहां तक ​​कि अगर आप पहले से अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त नहीं हैं, तो भी अनुशंसित वजन (recommended) से अधिक वजन प्राप्त करना भी एक समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान अधिक वजन होने के कारण होने वाली कुछ जटिलताएं हैं -

  • गर्भावधि उच्च रक्तचाप (Gestational hypertension)
    - गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप से प्रीक्लेम्पसिया (preeclampsia) नामक गंभीर जटिलता हो सकती है।
  • गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes) - यह एक प्रकार की डायबिटीज़ है जो गर्भावस्था के दौरान शुरू होती है और जीवन भर के लिए टाइप 2 डायबिटीज़ और मोटापे के खतरे को बढ़ाती है। यह नवजात शिशु में लो ब्लड शुगर का कारण भी बन सकती है। इससे अजन्मे बच्चे के बड़े होने का कारण बनता है, जो जन्म के दौरान बच्चे को या माँ को चोट पँहुचा सकता है।
  • सी-सेक्शन के लिए जोखिम (Increased risk for C-section) -
    अधिक वजन से गर्भावस्था के दौरान सी-सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा, अधिक वजन वाली मां से जन्म लेने वाले बच्चों में निम्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उच्च जोखिम होते है -

  • न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट
  • हृदय दोष
  • लो ब्लड शुगर और शरीर का बड़ा आकार (यदि मां को गर्भकालीन मधुमेह है)
  • मोटापा
  • टाइप 2 डायबिटीज
  • हाई कोलेस्ट्रॉल

जबकि, कम वजन वाली माँओं से जन्म लेने वाले शिशुओं में समय से पहले जन्म और लो बर्थ वेट जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक होता है। [7]

सही तरीके से वजन घटाने के बारे में या इन समस्याओं के जोखिम को कम करने के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

 

प्रजनन क्षमता बढ़ाने में सहायक हेल्दी वेट के लिए टिप्स

Tips for a healthier weight to enhance fertilityin hindi

Prajann kshmta badhane mein sahayak healthy weight weight ke liye tips

यदि आपको अपने वजन के बारे में संदेह है और गर्भधारण करने में मुश्किल हो रही है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। गर्भ धारण के लिए संघर्ष करना आपको काफी अकेला, बोझिल और हताश महसूस करा सकता है। और जब आपको यह पता लगता है कि यह सब आपके बढ़े वजन के कारण हो रहा है तो यह आपको और भी निराश और भ्रमित कर सकता है। यदि वजन कम करना आपके लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है, तो अपने डॉक्टर के साथ चर्चा करें, और निर्धारित करें कि आपके लिए कौन से कदम सबसे अधिक सहायक हो सकते हैं। आपके डॉक्टर आपको एक आहार विशेषज्ञ के साथ परामर्श का सुझाव दे सकते हैं या जीवन-शैली में कुछ बदलाव की पेशकश कर सकते हैं जो वजन कम करने में सहायक हो सकता है।

शोधों ने साबित किया है कि 5-10 प्रतिशत वजन घटाने से, प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। [8] इसलिए यह संभव है कि आप अपने जीवनशैली में सुधार के साथ-साथ, डाइट चेंज और व्यायाम की मदद से अपनी मंज़िल को पा सकती हैं। यह बात ध्यान रखें कि सप्लीमेंट्स, वर्कआउट आदि के माध्यम जल्द-से-जल्द वजन कम करने वाले वादे आपके लिए सही नहीं है, ये आपके लिए खतरनाक भी हो सकते हैं।

यदि आप कम वजन वाले हैं या खाने की बीमारी यानि इटिंग डिसॉर्डर से जूझ रहे हैं या उससे उबर रहे हैं, तो यह बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर से इस बारे में खुलकर बात करें। वे आपको उन आहार विशेषज्ञों से कनेक्ट करा सकते हैं जो डाइटीशियन हैं और जिन्होनें ईडी (EDs) में विशेषज्ञता हासिल की है, या उन थेरेपिस्ट से कनेक्ट करा सकते हैं जो आपको खाने और वजन से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में मदद कर सकते हैं।

यदि आप कोई नियमित दवा या सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो अपने प्रजनन क्षमता पर इसके प्रभावों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपकी दवा की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वे गर्भावस्था के दौरान उपभोग करने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं और गर्भवती होने की आपकी क्षमता में बाधा तो नहीं डाल रहे हैं! डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन के साथ-साथ, किसी भी सप्लीमेंट या ओवर-द-काउंटर दवाओं के बारे में बताना न भूलें।

आपके डॉक्टर एक फुल वर्क अप कर सकते हैं जो यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि क्या आपके वजन के अलावा, बांझपन का कुछ और कारण है, क्योंकि इसके संभावित अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिसके कारण आप परेशानी से जूझ रहे हों। आपका डॉक्टर अक्सर चिंता और तनाव को कम करने के तरीकों के बारे में बता सकते हैं जो अक्सर बांझपन से संबंधित होता है या आपको एक चिकित्सक से कनेक्ट करा सकते हैं जिन्हें गर्भावस्था की पूरी जानकारी हो।

प्रजनन विशेषज्ञ से बात करने के अलावा, हेल्दी वेट पाने के लिए आप निम्न टिप्स को फॉलो कर सकते हैं -

  • खुद को सक्रिय और प्रेरित रखने के लिए यथार्थवादी यानि रियलिस्टिक वजन लक्ष्य निर्धारित करें। जब तक आप अपने लक्ष्य के वजन तक नहीं पहुँच जाते तब तक प्रति सप्ताह आधा से एक किलोग्राम वजन कम करने का लक्ष्य एक यथार्थवादी लक्ष्य यानि एक रियलिस्टिक गोल है।
  • बहुत सारे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, अनाज, दही, दूध, पनीर, लीन मीट, मछली, मुर्गी, अंडे, बीज, और नट्स सहित स्वस्थ आहार का पालन करें।
  • वसायुक्त मीट, बिस्कुट, चिप्स, केक, पेस्ट्री, फास्ट फूड और कन्फेक्शनरी जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन में कटौती करें।
  • सीमित मात्रा में प्लांट बेस्ड फैट का सेवन करें जैसे, जैतून का तेल, अंगूर का तेल, और एवोकाडो। ये खाद्य पदार्थ सामान्य प्रजनन क्षमता और नियमित ओव्यूलेशन में मदद करते हैं।
  • रेड मीट का कम और मछली जैसे सैल्मन, सार्डिन और कैन्ड लाइट टूना का अधिक सेवन करें क्योंकि ये ओमेगा -3 फैटी एसिड और डीएनए (DHA) का बहुत अच्छा स्रोत हैं। ये बच्चे के तंत्रिका तंत्र को विकसित करने और समय से पहले जन्म की संभावनाओं को कम करने में भी मदद करते हैं।
  • सोया का किसी भी रूप में सेवन करने से बचें, विशेष रूप से एनर्जी बार और पाउडर के रूप में, यह आपके प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • चीनी के सेवन में कटौती करें और कम-संसाधित मिठास (less-processed sweetners) का सेवन करने का प्रयास करें।
  • चाय, कॉफी और शराब को कम मात्रा में पिएं। आपको शुगर ड्रिंक से भी पूरी तरह बचना चाहिए।
  • रोजाना, कम से कम 40-80 मिलीग्राम आयरन और 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड युक्त मल्टीविटामिन लें।
  • समय पर और नियमित भोजन करें और अस्वास्थ्यकर स्नैक से बचने की कोशिश करें।
  • अन्य गतिविधियों के लिए समय निकालें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधियों में लिप्त रहें जैसे हर दिन चलना, जैसे सीढ़ियाँ लेना, दोस्त के साथ घूमना, दुकानों पर जाना या व्यायाम करना।
  • अपने साथी के साथ मिलकर एक आहार और व्यायाम योजना शुरू करें। इससे गर्भधारण करने और स्वस्थ बच्चे होने की संभावना बढ़ जाएगी।

ये जीवनशैली में बदलाव आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। गर्भवती होने की कोशिश शुरू करने से पहले इन बदलावों को अपनी दिनचर्या में लाना शुरू करें। यह अनुशंसा (recommended) की जाती है कि आप इन अभ्यासों को तब तक बनाए रखें जब तक कि आप गर्भधारण नहीं कर लेती हैं और फिर आपकी गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद तक भी।

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references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

Cdc.gov. “About Adult BMI”.Centre for Disease Control and Prevention, June 30, 2020.

2 .

Lake JK, Power C, et al. “Women's reproductive health: the role of body mass index in early and adult life”.Int J Obes Relat Metab Disord. 1997;21(6):432-438; PMID: 9192225.

3 .

Grodstein F, Goldman MB, et al. ”Body mass index and ovulatory infertility”. Epidemiology. 1994;5(2):247-250; PMID: 8173001

4 .

www.acog.org. “Obesity and Pregnancy”. The American College of Obstetrician and Gynecologists, 27 July 2020.

5 .

Shilpi Pandey, Suruchi Pandey, et al. “The impact of female obesity on the outcome of fertility treatment”. J Hum Reprod Sci 2010 May, PMID: 21209748.

6 .

Erica Silvestris, Giovanni de Pergola, et al, “Obesity as disruptor of the female fertility”. Reprod Biol Endocrinol. 2018;16(1):22. PMID: 29523133.

7 .

Zhen Han, Sohail Mulla, et al. “Maternal underweight and the risk of preterm birth and low birth weight: a systematic review and meta-analyses”. Int J Epidemiol. 2011 Feb;40(1):65-101, PMID: 21097954.

8 .

Thomas A. Wadden, Victoria L, et al. “Lifestyle Modification for Obesity”. Circulation. 2012 Mar 6; 125(9): 1157–1170, PMID: 22392863.

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 28 Sep 2020

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