गर्भावस्था के तीसरे महीने की सम्पूर्ण जानकारी

All about third month of pregnancy in hindi

Garbhavastha ka teesra mahina


एक नज़र

  • गर्भवती महिला का 3 महीना ऐसा होता है जब महिला के पैरों में दर्द और ऐंठन पहले की मुक़ाबले अधिक महसूस हो सकती है।
  • गर्भावस्था के तीसरे महीने में मूड स्विंग पहले की तुलना में अधिक हो जाते हैं।
  • महिला को गर्भावस्था के तीसरे महीने में खाने की इच्छा में वृद्धि हो जाती है।
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Introduction

Garbhavastha_ka_teesra_mahina

गर्भकाल का तीसरा महीना, महिला के लिए प्रसन्नता, आशंकाओं और उत्सुकताओं से भरा समय होता है।

यह समय वह होता है जब महिला को पता होता है कि वह एक नए जीव को अपने अंदर जन्म दे रही है, लेकिन इसके लक्षण बाहरी दुनिया को नहीं पता होते हैं।

ऐसे में महिला के मन और मस्तिष्क में अनेक सवाल जन्म लेते हैं। इस लेख में गर्भावस्था का तीसरा महीना (third month of pregnancy in hindi) और उससे जुड़ी हर संभव जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

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इस लेख़ में

  1. 1.गर्भावस्था का तीसरा महीना कब शुरू होता है?
  2. 2.गर्भावस्था के तीसरे महीना के लक्षण क्या हो सकते हैं?
  3. 3.गर्भावस्था के तीसरे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?
  4. 4.गर्भावस्था के तीसरे महीने में शारीरिक परिवर्तन क्या हो सकते हैं?
  5. 5.गर्भावस्था के तीसरे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?
  6. 6.गर्भावस्था के तीसरे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?
  7. 7.गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं?
  8. 8.गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स किस प्रकार कर सकते हैं?
  9. 9.गर्भावस्था के तीसरे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?
  10. 10.गर्भावस्था के तीसरे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?
  11. 11.गर्भावस्था के तीसरे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से ह
  12. 12.गर्भावस्था के तीसरे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?
  13. 13.गर्भावस्था के तीसरे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?
  14. 14.प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए
 

गर्भावस्था का तीसरा महीना कब शुरू होता है?

When did the third month of pregnancy start in hindi

Pregnancy ka teesra mahina kab shuru hota hai in hindi

तकनीकी रूप से गर्भावस्था के पूरे समय को नौ महीनों और इन नौ महीनों को तीन-तिमाहियों में बांटा जाता है।

इस प्रकार गर्भावस्था का तीसरा महीना (third month of pregnancy in hindi) गर्भकाल की पहली तिमाही (first semester) का अंतिम भाग होता है।

समय के अनुसार यह नवें हफ्ते का समय होता है जो बारहवें हफ्ते तक चलता है।

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गर्भावस्था के तीसरे महीना के लक्षण क्या हो सकते हैं?

What are the symptoms of pregnancy in the third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke teesra mahine ke Lakshan kya ho sakte hain in hindi

सामान्य रूप से गर्भवती महिला का 3 महीना, पहले दो महीने से कोई विशेष भिन्न नहीं होता है।

इस महीने में वैसे तो कुछ गर्भकाल के कुछ लक्षण कम होने लगते हैं, तो वहीं कुछ लक्षण नए जन्म लेते हैं और कुछ पहले से चले आ रहे लक्षण उग्र रूप धारण कर लेते हैं।

सामान्य रूप से गर्भावस्था के तीसरे महीना के लक्षण इस प्रकार देखे जा सकते हैं : -

1. योनि स्त्राव (Vaginal Discharge in third month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को गर्भावस्था के तीसरे महीने के आरंभ में योनि से होने वाले स्त्राव में थोड़ी वृद्धि हो सकती है।

वैसे तो यह एक सामान्य बात है, लेकिन अगर यह वृद्धि असामान्य प्रतीत हो तब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

2. पैरों में दर्द और बल पड़ना (Cramp in legs in third month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला का 3 महीना ऐसा होता है जब महिला के पैरों में दर्द और ऐंठन पहले की मुक़ाबले अधिक महसूस हो सकती है।

ऐसा गर्भाशय के आकार और भ्रूण के शारीरिक वजन के बढ़ने के कारण हो सकता है।

इसके अलावा गर्भवती महिला को आयरन और पोटेशियम जैसे सपलीमेंट्स की कमी भी इस परेशानी का कारण हो सकती है।

3. यूरिन का अधिक होना (Increasing frequency of urination in third month of pregnancy in hindi)

तीसरा महीना लगते ही गर्भवती पहले की तुलना में अधिक बार पेशाब के लिए जा सकती है।

दरअसल, इस समय गर्भवती महिला के शरीर में एचसीजी हार्मोन (human chorionic gonadotropin in hindi) पहले की तुलना में अधिक बनते हैं, जिसके कारण गर्भवती महिला को बार-बार पेशाब आने की परेशानी वहन करनी पड़ती है।

इसके अलावा गर्भाशय के आकार बढ़ने के कारण मूत्राशय पर भी दबाव बढ़ जाता है, जिस कारण पेशाब अधिक आने की परेशानी हो सकती है।

4. कब्ज़ रहना (Frequent Constipation in in third month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के तीसरे महीने में (third month of pregnancy in hindi) महिला के शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है।

इस कारण पाचन तंत्र में परेशानी के कारण महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी का भी सामना बार-बार करना पड़ता है।

इसलिए गर्भवती महिला के लिए गर्भावस्था के तीसरे महीने में पोषण भोजन अनिवार्य हो जाता है।

5. मॉर्निंग सिकनेस (Morning Sickness in third month of Pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को गर्भकाल के पहले महीने से शुरू हुई मॉर्निंग सिकनेस गर्भावस्था के तीसरे महीने में (third month of pregnancy in hindi) काफी अधिक हो जाती है।

लेकिन घबराने की बात नहीं है, क्योंकि यह परेशानी इस महीने के खत्म होने तक अधिकतर स्थितियों में कम या लगभग खत्म भी हो जाती है।

6. मूड स्विंग (Mood Swings in third month of Pregnancy in hindi)

वैसे तो गर्भकाल में महिला के स्वभाव में परिवर्तन आना स्वाभाविक है।

लेकिन गर्भावस्था के तीसरे महीने में मूड स्विंग पहले की तुलना में अधिक हो जाते हैं।

बिना किसी कारण के चिड़चिड़ापन, गुस्सा होना, रोना या फिर गुमसुम होना इस बात के स्वाभाविक लक्षण माने जाते हैं।

7. अत्याधिक थकान (Excessive Fatigue in third month of Pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के तीसरे महीने में अक्सर महिला का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ जाता है।

यह दोनों कारक शरीर में थकान बढ़ाने के लिए काफी होते हैं।

इसलिए गर्भावस्था के तीसरे महीने में शारीरिक थकान का महसूस होना एक सामान्य बात मानी जा सकती है।

8. पीठ और पेट में दर्द (Pain in Stomach and back in third month of Pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के तीसरे महीने में पीठ और पेट में दर्द होने का मुख्य कारण शरीर में होने वाले हॉर्मोनल परिवर्तन माने जाते हैं।

इसके गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट में खिंचाव और भारीपन महसूस हो सकता है जिसके कारण दर्द महसूस हो सकता है।

9. खाने की इच्छा बढ़ना (Increased food cravings in third month of Pregnancy in hindi)

महिला को गर्भावस्था के तीसरे महीने में खाने की इच्छा में वृद्धि हो जाती है।

इसके अलावा कुछ महिलाओं को किसी विशेष प्रकार की गंध या तो पसंद नहीं आती है या फिर बहुत पसंद आती है।

यही स्थिति भोजन के साथ भी हो सकती है।

10. छाती में जलन होना (Heartburn in third month of Pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के तीसरे महीने में छाती में जलन में भी अधिकतर महिलाओं को महसूस हो सकती है।

11. मसूड़ों से खून आना (Bloody Gums in third month of Pregnancy in hindi)

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के तीसरे महीने में मसूड़ों से खून आना जैसी शिकायत हो सकती है।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?

How baby grow during third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke teesra mahine mein baby ka vikas kaise hota hai in hindi

जब महिला अपने गर्भकाल के तीसरे महीने में प्रवेश करती है तब उसके मन में स्वाभाविक रूप से यह सवाल आ सकता है कि इस समय गर्भ में शिशु के शरीर में क्या परिवर्तन हो रहे होंगे।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु का विकास निम्न रूप में होता है : -

शरीर के बाहरी अंगों का विकास

1. गर्भवस्था के तीसरे माह में शिशु के मस्तिष्क में विकास होने लगता है जिसके कारण सिर के आकार में वृद्धि होने लगती है।

2. चेहरे के अन्य भाग जैसे - पलकें पूरी बन जाती है और इनसे आँखों को सुरक्षा मिल जाती है।

इसके अलावा ज़ुबान, दांतों का जबड़ा और ऊपर के होंठ का निर्माण होने लगता है।

3. इस समय बच्चे का अंगूठा पूरा हो जाता है और उसे वह चूसने लगता है इसके साथ ही उसकी हिचकी भी आने लगती है।

4. शिशु की स्किन पारदर्शी रूप में बन जाती है जिसमें से नसें दिखने लगती हैं और इसके साथ ही बच्चे की उँगलियों के निशान भी बनने लगते हैं।

शरीर के आंतरिक अंगों का विकास

1. गर्भावस्था के तीसरे माह तक बच्चे के हृदय की संरचना पूरी हो जाती है और उसके हृदय की धड़कन डॉक्टर अपने उपकरणों की मदद से सुन सकते हैं।

2. शिशु के शरीर की मांसपेशियाँ और अस्थि-संरचना लगभग पूरी हो जाती है।

3. इस समय शिशु के शरीर में बोन मैरो (bone marrow) शरीर में सफ़ेद रक्त कोशिकाओं (white blood cells) का निर्माण शुरू कर देता है जो बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

4. यह वह समय है जब शिशु के शरीर के आंतरिक भाग जैसे आँतें, पेंक्रिया और किडनी का निर्माण पूरा हो जाता है।

ये सभी अंग अपना आकार लेकर काम करना शुरू कर देते हैं।

5. इसी समय गर्भ का शिशु थोड़ी बहुत हलचल शुरू करता है जो किक लगाने, हाथ पाँव फैलाने और थोड़ा बहुत घूमने की कोशिश करता है, क्योंकि गर्भाशय महिला के पेलविस के ऊपरी भाग में स्थित होता है, इसलिए अक्सर महिला को यह सब आसानी से महसूस नहीं हो सकता है।

6. गर्भाशय के तीसरे माह में शिशु की उँगलियों की बनावट पूरी हो जाती है और इसके साथ ही पैरों की उँगलियों में नाखून भी आ जाते हैं।

वह अपने छोटे-छोटे हाथ-पाँव फैलाने की कोशिश करता है।

अल्ट्रासाउंड करने पर शिशु के नाक और कान भी देखे जा सकते हैं।

बच्चे की गर्दन, बालों की जड़ें और छाती के निप्पल भी बनने लगते हैं।

इस प्रकार कहा जा सकता है की इस समय शिशु के बाहरी और आंतरिक अंगों का निर्माण काफी हद तक हो जाता है।

शिशु को अपने पोषण को गर्भनाल का सहयोग मिलता है जो गर्भाशय से पूरी तरह से जुड़ी होती है।

इस समय शिशु का आकार 2-3 इंच के लगभग होता है।

यही वह समय जब शिशु के हारमोन उसे स्त्री या पुरुष के रूप में परिवर्तित होने का मौका देते हैं।

लेकिन भारतीय कानून में शिशु के लिंग का पता करना कानूनी जुर्म है जिसके सिद्ध होने पर सख्त सज़ा और कैद भी हो सकती है।

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गर्भावस्था के तीसरे महीने में शारीरिक परिवर्तन क्या हो सकते हैं?

What would be physical changes in the third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Third month mein kya physical changes ho sakte hain in hindi

गर्भवस्था के तीसरे महीने के लक्षण जैसे अत्यधिक थकान, मतली होना और मॉर्निंग सिकनेस आदि आंतरिक लक्षण होते हैं।

लेकिन महिला के बाहरी रूप यानि शारीरिक परिवर्तन जो होते हैं वो इस प्रकार हैं : -

1. पेट में बैचेनी (Abdominal Discomfort in third month of Pregnancy in hindi)

महिला को गर्भावस्था के तीसरे माह में पेट में बेचैनी या दर्द जैसा महसूस हो सकता है।

यह स्थिति विशेषकर लेट कर उठने में या बैठे-बैठे पोजीशन बदलने के समय हो सकती है।

इसके अलावा पेट का निचला हिस्सा भारी-भारी महसूस हो सकता है।

यही वह समय है जब गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट पर खिंचाव की लाइनें दिखाई देने लगती हैं, जिन्हें स्ट्रेच मार्क्स कहा जाता है।

2. शारीरिक वज़न में अंतर आना (Increasing body weight in third month of Pregnancy in hindi)

गर्भ के तीसरे महीने में महिला का शारीरिक वज़न एक से दो किलो तक बढ़ जाता है।

ऐसा गर्भ में शिशु के आकार के बढ़ने के कारण होता है।

इसके साथ ही अक्सर गर्भवती महिला को होने वाली मॉर्निंग सिकनेस में भी कमी होने लगती है।

3. शरीर पर हार्मोनल परिवर्तन दिखाई देना (Body effect of hormonal changes in third month of Pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के तीसरे महीने में हार्मोनल परिवर्तन होने के कारण गर्भवती महिला के पेट के निचले भाग में काली लकीरें दिखाई देने लगती हैं।

लिनिया नाइग्रा (linea nigra in hindi) भी कहा जाता है।

4. स्तनों में भारीपन होना (Heavy Breast in third month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के तीसरे माह में स्तनों में भारीपन होना एक आम बात है।

इसका मुख्य कारण है कि इस समय से महिला के स्तन, स्तनपान के लिए तैयार होना शुरू हो जाते हैं।

5. स्किन में सूखापन आना (Dry Skin and Itching in third month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के तीसरे महीने से महिला की स्किन में सूखापन आने लगता है जिसके कारण स्किन में खिंचाव और खुजली जैसा महसूस हो सकता है।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?

Diet Plan in Third month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke teesra mahine mein lady ko kyaa khana chahiye in hindi

गर्भवस्था का तीसरा महीना गर्भवती स्त्री व गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य व पोषण के लिए बहुत जरूरी होता है।

इसलिए इस समय गर्भवती स्त्री को निम्न प्रकार के पोषण को प्राथमिकता देनी चाहिए : -

1. प्रोटीन युक्त भोजन (Protein included food items in third month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के तीसरे महीने से महिला व गर्भ के शिशु को विकास के लिए पोषण के रूप में प्रोटीन की बहुत ज्यादा जरूरत होती है।

यह केवल शिशु के सम्पूर्ण विकास के लिए ज़रूरी होता है, बल्कि प्रसव के समय और प्रसव के बाद भी महिला व शिशु के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में पोषण के लिए प्रोटीन युक्त निम्न वस्तुओं का सेवन कर सकती है : -

  • डेयरी प्रोडक्ट्स (Dairy Products)

महिला अपने दैनिक भोजन में एक कप दूध या दही को शामिल कर सकती है।

अगर आप चाहें तो दूध को दलिये के साथ या फिर मिल्कशेक या कस्टर्ड के रूप में भी ले सकती हैं।

इसके अतिरिक्त दूध को स्मूदी, दही के रायते, लस्सी या किसी भी अन्य रूप में ले कर अपने दैनिक भोजन में प्रोटीन को शामिल कर सकती हैं।

  • अंडे (Eggs)

अगर गर्भवती महिला मांसाहारी भोजन कर सकती है तब अंडे, प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माने जाते हैं।

अगर आप हफ्ते में तीन दिन अंडों को उबले अंडे, ऑमलेट या पेनकेक के रूप में ले सकती हैं, तब यह प्रोटीन की कमी कभी नहीं होने देंगे।

  • मीट (Meat)

गर्भवती महिला जब मांसाहारी प्रोडक्ट पसंद करती है, तब प्रोटीन के रूप में मछ्ली, मुर्गा और कम चिकनाई वाले मटन का सेवन कर सकती है।

इस प्रकार गर्भावस्था के तीसरे महीने में प्रोटीन का सेवन बहुत सरलता से किया जा सकता है।

  • दालें और फलियाँ (Pulses and beans)

दालों और फलियों को शाकाहारी भोजन में बहुत अच्छा सोर्स माना जाता है।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में प्रोटीन की मात्रा को अधिक करने के लिए भोजन में दालों और फलियों के सेवन को बढ़ाया जा सकता है।

इसके लिए दालों को भोजन में अंकुरित सलाद के अतिरिक्त, दाल का पाउडर बना कर चीले, ढोकला और चाट के रूप में खा सकती है।

2. आयरन युक्त भोजन (Iron packed food)

गर्भवती महिला के पोषण का अन्य जरूरी भाग आयरन है जो गर्भस्थ शिशु के शरीर में रक्त के निर्माण और उसकी वृद्धि का कारण बनता है।

इसके साथ ही आयरन ही वह पोषण तत्व है जो शिशु के विकास व वृद्धि के लिए जरूरी होता है।

इसके लिए गर्भवती महिला को निम्न का सेवन करना चाहिए : -

  • हरी पत्तेदार सब्जी (Green leafy vegetables)

हरी पत्तेदार सब्जी जैसे - पालक, मेथी, सरसों, चौलाई आदि मौसम के अनुसार अपने भोजन में शामिल की जा सकती हैं।

इनमें से किसी को भी हफ्ते में दो या तीन बार खाने में ली जा सकती है।

  • फलियाँ (Beans)

फलियों की श्रेणी में काला चना या चना, सोयाबीन, लोबिया और मूंग फलियाँ आदि वो वस्तुएँ हैं, जिनमें आयरन की मात्रा बहुत अधिक होती है।

इसलिए गर्भावस्था के तीसरे महीने में भोजन में आयरन के रूप में इस चीजों को शामिल कर सकती हैं।

  • सूखे मेवे (Dry fruits)

खरबूजा, स्ट्राबेरी, किशमिश और खजूर आदि को ऐसे फलों के रूप में जाना जाता है जो आयरन से भरपूर होते हैं।

  • मांसाहारी भोजन (Non-veg food)

मांसाहारी भोजन में मटन और चिकन भी आयरन के अच्छे स्त्रोत माने जाते हैं।

इसलिए अक्सर प्रेग्नेंसी डॉक्टर हीमोग्लोबिन में आयरन की मात्रा बढ़ाने के लिए मटन, चिकन और अंडों के सेवन का सुझाव भी देते हैं।

3. ओमेगा 3 फैट्स (Omega 3 Faits in third month of pregnancy in hindi)

भोजन में ओमेगा 3 फैट न केवल गर्भस्थ शिशु के तंत्रिका विकास (neuro development) के लिए ज़रूरी होता है, बल्कि शिशु के आदर्श वज़न के लिए भी ज़रूरी होता है।

इसलिए गर्भावस्था के तीसरे महीने में ओमेगा 3 की पर्याप्त मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए।

इसके लिए गर्भवती महिला कुछ विशेष प्रकार के तेल जैसे - कैनोला, सोयाबीन और/या अलसी का तेल अपने दैनिक भोजन में शामिल किया जाना चाहिए।

5. फिश ऑयल सप्लिमेंट (Fish oil supplement in second month of pregnancy in hindi)

ऐसे तेल जिनमें डीएचए और ईपीए जो ओमेगा 3 फैट के ही विभिन्न रूप हैं, उनको गर्भवती महिला अपने दैनिक भोजन में शामिल कर सकती हैं।

लेकिन, यह केवल अपने प्रेग्नेंसी डॉक्टर की सलाह और परामर्श के बाद ही शामिल किया जाना चाहिए।

6. ओमेगा 6 (Omega 6 in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को ओमेगा 6 का सेवन भी कम मात्रा में किया जाना उचित माना जाता है।

इसके लिए सूरजमुखी तेल, बिनौला तेल, मक्का या जई के तेल को अपने भोजन में शामिल किया जा सकता है।

7. फोलिक एसिड (Folic acid in second month of pregnancy)

गर्भवती माँ के शिशु को विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ जैसे - मेगालोब्लास्टिक एनीमिया (megaloblastic anemia) आदि के रोकने के लिए फोलिक एसिड युक्त भोजन का लेना बहुत जरूरी है।

यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की बहुत ज़्यादा कमी हो जाती है।

इसके अतिरिक्त शरीर में फोलिक एसिड की कमी से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (neural tube defects) हो सकता है, जिसमें शिशु के मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और न्यूरल सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।

इसके लिए केला, सेम की फली, भीगे बादाम, सभी प्रकार की हरी सब्जियाँ, टमाटर, गाजर, मसूर की दाल और सभी खट्टे फलों का सेवन लाभकारी रहता है।

8. ज़िंक भरपूर भोजन (Zinc enriched food in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला के लिए तीसरे महीने में ज़िंक भरपूर भोजन करना बहुत ज़रूरी है।

इससे गर्भ के शिशु में न केवल आनुवंशिक संबंधी तत्वों का सही विकास हो सकेगा बल्कि प्रसव के समय भी महिला को सुविधा हो सकती है।

गर्भवती महिला के शरीर में ज़िंक की कमी होने से प्रसव के समय किसी भी प्रकार की कठिनाई और शिशु में जन्मजात कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में ज़िंक का सेवन करने के लिए शैल फिश, ओयस्टर, ओट, फलियाँ, सोया, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट का चयन किया जा सकता है।

9. आयोडिन (Iodine)

गर्भ के शिशु के लिए आयोडिन की जरूरत उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी होती है।

इसके लिए गर्भवती माँ को आयोडिन युक्त नमक का सेवन करना ही उचित होगा।

10. विटामिन K (Vitamin K)

विटामिन K का काम शरीर में रक्त को जमने में मदद करना होता है।

इसके साथ ही यह गर्भवती महिला को प्रसव के समय अत्यधिक रक्त के होने वाले नुकसान से भी बचने में मदद करता है।

हालांकि, अगर गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन के की कमी पाई जाती है तब इसे इंजेक्शन के द्वारा दिया जा सकता है, लेकिन अच्छा यही रहता है कि इस विटामिन की पूर्ति भोजन के द्वारा किया जाये।

इससे गर्भवती माँ व शिशु दोनों को प्रकृतिक रूप से लाभ पहुंचा सकता है।

इसके लिए पालक, ब्रोकली, पत्ता गोभी, सर्फिंग ओनियन, डेयरी प्रोडकट और प्रोन आदि का सेवन किया जा सकता है।

11. विटामिन सी युक्त भोजन (Vitamin C enriched food)

चिकित्सक यह मानते हैं कि विटामिन सी युक्त भोजन लेने से विभिन्न प्रकार के भोजन से लिए हुए आयरन को हज़म करना सरल हो जाता है।

इसलिए गर्भावस्था के तीसरे महीने में विटामिन सी युक्त भोजन हर तरह से उपयुक्त रहता है।

इसके लिए आंवला, करौंदा, खट्टे फलों जैसे संतरा, मौसमी, नींबू और माल्टा का सेवन अच्छा रहता है।

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गर्भावस्था के तीसरे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?

What Foods to avoid in the third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Third month mein kyaa nahin khana chahiye in hindi

गर्भवस्था का 3 महीना गर्भकाल के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके बाद गर्भकाल का सबसे महत्वपूर्ण समय यानि गर्भवस्था की दूसरी तिमाही (second trimester in hindi) शुरू हो जाती है।

इसलिए गर्भावस्था के तीसरे महीने में गर्भवती महिला को खान-पान से परहेज करना चाहिए।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में गर्भवती महिला को खान-पान से परहेज करें : -

1.कैफीन (Caffeine in third month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से कैफीन में पाये जाने वाले तत्व किसी भी रूप में हानिकारक नहीं होते हैं।

लेकिन, अधिक रूप से ली जाने वाली चाय और काफी का सेवन करने से गर्भवती महिला को समय पूर्व प्रसव होने की आशंका रहती है।

इसके अतिरिक्त कुछ चिकित्सक मानते हैं कि प्रतिदिन 300 ग्राम से अधिक ली जाने वाली कैफीन की मात्रा गर्भवती के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकती है।

इसलिए प्रतिदिन एक या अधिक से अधिक 2 कप चाय या कॉफ़ी ही गर्भावस्था की तीसरे माह में उपयुक्त रहती है।

2. धूम्रपान (Smoking in third month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था की तीसरे माह में महिला को जंक फूड जैसे पिज्जा, बर्गर आदि प्रकार के खाने से परहेज रखना चाहिए।

इस प्रकार के खानों को बनाते समय मिलाये जाने वाले रसायन गर्भ के शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

3. मदिरापान (Alcohol in third month of pregnancy in hindi)

जो महिलाएं नियमित रूप से मदिरापान करती हैं उनके शिशु का जन्म के समय शारीरिक वज़न में कमी, कुपोषित शरीर या मानसिक रूप से विकृत बच्चे के जन्म की संभावना हो सकती है।

4. जंक फूड (Junk Food in third month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था की 3 माह में महिला को डिब्बा बंद खाना या जंक फूड खाने से पूरी तरह से परहेज रखना चाहिए।

इसका कारण इन खाने में मिले हुए प्रिजरवेटिव होते हैं जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट डालते हैं।

5. समुद्री भोजन (Seafood in third month of pregnancy in hindi)

अधिकतर यह देखा गया है कि समुद्री भोजन में पारे की मात्रा अधिकतम होती है।

यह पारा भोजन के साथ शरीर में जाने से गर्भ के शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए गर्भवती स्त्री को समुद्री भोजन से परहेज रखना चाहिए।

6. प्रोसेस्ड़ फूड (Packaged Food in third month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था की 3 माह में महिला को डिब्बा बंद खाना या जंक फूड खाने से पूरी तरह से परहेज रखना चाहिए।

इसका कारण इन खाने में मिले हुए प्रिजरवेटिव होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट डालते हैं।

7. कच्चा मांसाहार (Half-Cooked Food in third month of pregnancy in hindi)

कुछ महिलाएं कच्चा मांस जैसे कच्चा अंडा या चिकन, फिश आदि से बनी डिश पसंद करती हैं।

गर्भावस्था की 3 माह में महिला को इस प्रकार के खाने को नहीं खाना चाहिए।

इस प्रकार के खाने में लिस्टेरिया नाम का बैक्टीरिया हो सकता है जो गर्भ के शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं?

Does sex allowed in third month of pregnancy or not in hindi

kya pregnancy ke Third month mein sex kar sakte hain in hindi

अधिकतर दंपत्ति इस प्रश्न से कि से परेशान रहते हैं - गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं।

इस अवस्था में आपको सेक्स करने से पहले निम्न सवालों का जवाब देना चाहिए : -

1. क्या प्रेग्नेंसी डॉक्टर ने सेक्स करने से मना किया है या नहीं ?

2. क्या महिला का पहले गर्भपात हो चुका है ?

3. क्या गर्भधारण में अभी तक किसी प्रकार की कोई परेशानी हुई है?

4. क्या गर्भाशय में एक से अधिक शिशु के होने की संभावना है?

5. क्या पुरुष लिंग को महिला की योनि में प्रवेश करने में कोई कठिनाई हो रही है?

यदि इनमें से अधिकतर प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ है तब दंपत्ति को सेक्स क्रिया से परहेज रखना चाहिए।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स किस प्रकार कर सकते हैं?

How sex can do in third month of pregnancy or not in hindi

pregnancy ke Third month mein sex kaise kar sakte hain in hindi

हालांकि, गर्भवस्था में सेक्स करना कोई सरल प्रक्रिया नहीं है, फिर भी यदि दंपत्ति चाहिए तो कुछ पोजीशन को अपना कर सेक्स कर सकते हैं!

गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स के लिए निम्न पोजीशन अपनाएं जा सकते हैं : -

1. सेक्स करते समय महिला को पति के ऊपर वाली अवस्था में होना चाहिए।

इससे महिला के पेट और गर्भ पर अनावस्थ्यक ज़ोर नहीं पड़ेगा।

2. गर्भावस्था के तीसरे महीने में सेक्स (sex in third month of pregnancy in hindi) करने के लिए दोनों साथी करवट लेकर लेट सकते हैं।

इसके लिए चाहे वे एक दूसरे की और मुंह करके लेट सकते हैं या फिर पुरुष साथी महिला के पीछे से योनि में प्रवेश का प्रयास कर सकते हैं।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?

When should I seek an appointment with a doctor in third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Third mahine mein doctor se kab milna chahiye in hindi

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती स्त्री की डॉक्टर से पहली मुलाकात 4-१3 सप्ताह के बीच में होती है।

इस विज़िट के दौरान आपको अपने ड्यू डेट के बारे में पता चलेगा।

वहीं इस समय डॉक्टर के यहाँ आपके रक्तचाप (blood pressure) और वज़न (weight) की जाँच की जाएगी।

डॉक्टर आपसे कई प्रश्न पूछ सकते हैं जैसे कि आपके पिछले मासिक धर्म की तारीख, पिछली गर्भावस्था, और दवाओं या किसी अन्य चीज़ से एलर्जी ।

आपके द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर, वे एक विशिष्ट आहार (specific diet) और सप्लीमेंट्स (supplements) और अगर आवश्यक हो तो किसी भी दवा का सुझाव दे सकती हैं।

इसलिए शुरुआती जांच के दौरान अपनी डॉक्टर से खुलकर बातें करें।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?

When can meet the doctor immediately in Third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Third mahine mein kin situations mein doctor se turant milna chahiye in hindi

गर्भावस्था का तीसरा महीना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कहलाता है, जब महिला निम्न में से किसी एक स्थिति में हो :

1. महिला की आयु गर्भ धारण की दृष्टि से बहुत कम हो;

2. महिला ने 35 वर्ष से अधिक की आयु में गर्भ धारण किया हो;

3. गर्भवती महिला का शारीरिक वजन सामान्य से काफी अधिक हो;

4. गर्भ धारण करने वाली महिला का शारीरिक वजन सामान्य से भी बहुत कम हो;

5. गर्भ धारण करते समय महिला मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, एचआईवी, कैंसर या फिर किसी ऑटोइमम्यूनडिसॉर्डर बीमारी से ग्रस्त हो;

6. महिला के गर्भ में दो या दो से अधिक शिशु के होने की संभावना हो;

इनमें से किसी भी स्थिति में गर्भवती महिला को किसी भी समय पेट में दर्द, स्त्राव या रक्त स्त्राव या कोई भी बेचैनी होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से होते हैं?

Ultrasound and other tests in third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Third month mein kis tarah ke tests aur ultrasound ho sakte hain in hindi

सामान्य तौर पर गर्भावस्था के तीसरे महीने में होने वाली जांच और परीक्षण इस प्रकार हो सकते हैं : -

1. गर्भवती महिला का शारीरिक वजन और सामान्य रक्त परीक्षण;

2. गर्भवती महिला के पेट का आकार मापा जाता है;

3. शिशु के दिल की धड़कनें सुनना;

4. गर्भवती महिला के शरीर में शुगर की जांच के लिए यूरिन और ब्लड की जांच

5. महिला के रक्त का आरएच फैक्टर और प्रोटीन की जांच

6. अगर गर्भवती महिला के हाथ और पैरों में सूजन होती है तब इसके लिए फ़्ल्यूड रिटेनशन टेस्ट करना

इसके अलावा गर्भावस्था के तीसरे माह में शिशु के कुछ अन्य टेस्ट आमतौर पर तब किए जाते हैं जब शिशु को किसी प्रकार के गंभीर बीमारी के होने की संभावना होती है।

यह टेस्ट ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड परीक्षण के रूप में किए जाते हैं।

प्रेगनेंसी के 3 महीने में ये टेस्ट इस प्रकार हो सकते हैं : -

  • कोरियॉनिक विलस सैंपलिंग (Chorionic Veils Sampling)

यह टेस्ट गर्भस्थ शिशु में किसी प्रकार के आनुवंशिक रोग को पता करने के लिए किया जाता है।

इस टेस्ट को करने के लिए शिशु के पेट की अंदरुनी दीवार से तरल पदार्थ निकाला जाता है।

इस टेस्ट का परिणाम ही किसी रोग के होने या न होने की संभावना को व्यक्त करती है।

  • न्यूकल ट्रांसलुसेंसी स्कैन (Nuchal Translucency Scan)

गर्भावस्था के तीसरे माह में शिशु का यह टेस्ट आमतौर पर तब किया जाता है जब शिशु को किसी प्रकार के गंभीर बीमारी के होने की संभावना होती है।

यह टेस्ट ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड परीक्षण के रूप में किए जाते हैं।

सामान्य रूप से यह टेस्ट गर्भवस्था के 9वें हफ्ते से 13वें हफ्ते और 6 दिन के अंतर्गत ही किए जाते हैं।

  • ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट के माध्यम से महिला की गर्भावस्था में परिवर्तित होने वाले इन दो हार्मोन (free B-hCG and PAPP-A) के स्तर की जांच की जाती है।

इस स्तर में आने वाले अंतर से ही किसी प्रकार की गंभीर क्रोमोसोमल परिवर्तन का अनुमान लगाया जाता है।

  • अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भ के शिशु की गर्दन के पीछे वाले हिस्से के तरल पदार्थ की मोटाई का जायजा लिया जाता है।

यदि यह हिस्सा बड़ा है तब शिशु के डाउन सिंड्रोम (down syndrome) से प्रभावित होने की संभावना हो सकती है।

इन परीक्षणों के परिणाम लगभग एक हफ्ते के अंदर आ सकते हैं और उसके बाद ही प्रेग्नेंसी डॉक्टर किसी निर्णय पर पहुँच सकते हैं।

  • मैटरनल सीरम टेस्ट (Maternal Serum Test)

इस टेस्ट के लिए गर्भवती महिला के ब्लड की जांच की जाती है।

आमतौर पर यह टेस्ट गर्भ के 11वें और 13वें हफ्ते के मध्य में होता है।

इस टेस्ट के माध्यम से महिला के रक्त में प्रोटीन की जांच की जाती है।

इसमें दरअसल दो प्रकार के हार्मोन प्रेग्नेंसी-एसोसिएटेड प्लाज्मा प्रोटीन-ए (Pregnancy Associated Plasma) और ह्यूमन कोरियॉनिक गोनडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin) के लेवल की जांच की जाती है।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?

Tips for father in third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Third month mein father ke liye kya tips ho sakte hain in hindi

गर्भवस्था का पूरा समय वैसे तो महिला के द्वारा ही निभाया जाता है, लेकिन आधुनिक दौर में पति भी इस समय अपनी पत्नी का साथ देने का प्रयास भी करते हैं।

इसलिए ऐसे पति जो अपनी तीन माह की गर्भवती पत्नी का साथ देने का प्रयास करना चाह रहे हैं, उन्हें नीचे दिए गये टिप्स का ध्यान रखना चाहिए।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में पिता के लिए टिप्स : -

1. गर्भकाल का समय थोड़ा परेशानी वाला होता है, इसलिए इस समय आप पत्नी के साथ थोड़ा बाहर घूम कर उसके मन को प्रसन्न करने का प्रयास कर सकते हैं।

2. जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी का समय आगे बढ़ता है महिला की थकान बढ़ती जाती है। ऐसे में पति उसके कामों में हाथ बंटा कर उसकी मदद कर सकते हैं।

3. कुछ महिलाएं गर्भकाल में जटिलताओं के कारण घर से निकलने में कठिनाई महसूस करती हैं, ऐसे में पति उनके मन को बहलाने का प्रयत्न करके उनका साथ दे सकते हैं।

 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?

What you can do in the third month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke third month mein main kya kar sakti hoon in hindi

प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना मेडिकल दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होता है।

इसलिए इस महीने में गर्भवती महिलाओं को निम्न काम अवश्य रूप में करने चाहिए : -

1. केवल पौष्टिक और स्वस्थ भोजन का ही सेवन करें।

2. गर्भवस्था एक स्थिति है इसलिए इसे बीमारी मानकर केवल आराम न करें।

जरूरत भर काम और आराम करके संतुलन बना कर रखें।

3. डॉक्टर द्वारा बताए गए सप्लिमेंट्स ज़रूर लें क्यूंकी इनका बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर अच्छा प्रभाव होता है।

4. गर्भावस्था के तीसरे महीने में दांतों से खून आने की परेशानी हो सकती है।

इसलिए दांतों की देखभाल और समय-समय पर दांतों का चेकअप ज़रूर करवाएँ।

5. फल और सब्जी खाते समय उन्हें अच्छी तरह धो कर और काट कर ही खाएं और जब जरूरी हो उसे पका कर खाएं।

6. किसी भी प्रकार का तनाव न लें और हमेशा प्रसन्न रहें।

 

प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए

What you should not do in third month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke third month mein mujhe kya nahi karna chahiye in hindi

महिला द्वारा गर्भावस्था के तीसरे महीने में सावधानियाँ बरती जानी चाहिए : -

1. कभी भी कोई भारी वस्तु न उठाएँ जिससे पेट और गर्भ पर कोई वज़न नहीं पड़ना चाहिए।

2. इस समय पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है इसलिए जहां तक संभव हो सके ऐसा भोजन न करें जिससे पेट में जलन या गैस बने।

3. पेट और स्तनों का आकार बढ्ने के कारण ढीले कपड़े पहनें।

4. पैरों को सूजन और दर्द से बचाने के लिए आरामदायक और नरम जूते-चप्पल ही पहनें।

5. स्वस्थ जीवनशैली जीने के लिए धूम्रपान, मदिरापन न करते हुए जीवन को स्वस्थ अनुशासन में व्यतीत करें।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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