गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले परीक्षण और उनका महत्व

Tests done during pregnancy and their importance in hindi

Garbhavastha ke dauran kiye jaane wale parikshan aur unka mahatva in hindi


Introduction

Tests done during pregnancy

किसी भी महिला के जीवन का वो पल सबसे अद्भुत होता है जब उसे पता चलता है कि वो गर्भवती है। ऐसा कहा जाता है कि गर्भावस्था यानि महिला का दूसरा जन्म। गर्भावस्था के दौरान गर्भावस्था की पुष्टि, गर्भस्थ शिशु की सेहत और गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इस लेख में हम गर्भावस्था के दौरान जांच के महत्व, गर्भावस्था में किए जाने वाले टेस्ट, गर्भावस्था के तीनों ट्राइमेस्टर्स (trimesters) में की जाने वाली जांचों की सूची, गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाली टेस्ट के बारे में बात करेंगे। चलिए जानते हैं गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले विभिन्न जांच के बारे में।

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इस लेख़ में

 

गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले जांच का महत्व क्या है ?

What is the importance of test done during pregnancy in hindi

garbhavastha ke dauran janch ka mahatva in hindi

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गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से कई परीक्षण किए जाते हैं जो कि रूटीन एग्जामिनेशन (routine examination) का हिस्सा होते हैं।

इन जांचों के जरिए भ्रूण का विकास, मां का स्वास्थ्य और जटिल स्थिति को जानने का प्रयास किया जाता है।

गर्भवस्था के दौरान होने वाली जटिलताएँ भ्रूण और मां, दोनों के लिए जोखिम को बढ़ा सकती हैं, इसलिए इस दौरान किए जाने वाले परीक्षण बेहद आवश्यक होते हैं।

गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली जांच के महत्व निम्न हैं :

  • गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली जांच से पता लगाया जाता है कि गर्भवती महिला में भ्रूण के विकास के लिए हार्मोंस का उत्पादन सही तरह से हो रहा है या नहीं।
  • गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली जांच से भ्रूण की सेहत के बारे में पता लगाया जा सकता है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान किए जाने वाले टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि भ्रूण की धड़कन की गति सामान्य है या नहीं।
  • जांच के दौरान देखा जाता है कि भ्रूण में कोई असामान्य लक्षण तो नहीं हैं या बच्चे में कोई जन्मजात दोष या आनुवंशिक बीमारी तो नहीं।
  • जांच के दौरान, भ्रूण से जुड़ी जटिलताओं के आधार पर डॉक्टर्स के लिए गर्भपात के संदर्भ में निर्णय लेना आसान होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान जांच से मां की सेहत के बारे में पता लगाया जाता है।
    गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को डायबिटीज़ (diabetes), अवसाद और थायरॉइड (thyroid) जैसे विकार हो जाते हैं।
    विभिन्न जांचों से इन विकारों का समय पर पता लगाया जा सकता है।
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गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही में की जाने वाली जांच

Important tests done during first trimester of pregnancy in hindi

garbhavastha ke dauran pahli timahi mein ki jaane wali jaanch in hindi

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गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही में किए जाने वाले टेस्ट निम्न हैं :

1. गर्भावस्था परीक्षण (Pregnancy test)

प्रेगनेंसी टेस्ट दो प्रकार के होते हैं।

यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट (urine pregnancy test) और ब्लड प्रेगनेंसी टेस्ट (blood pregnancy test)।

इन दोनों टेस्ट के जरिए आपके शरीर में एचसीजी (HCG) के स्तर का पता लगाया जाता है।

मूत्र परीक्षण की तुलना में रक्त परीक्षण अक्सर कम किया जाता है।

ये दोनों ही परीक्षण गर्भावस्था का पता लगाने के लिए किए जाते हैं

2. मेडिकल कंडीशन के लिए परीक्षण (Test for Medical Condition)

यदि आपको मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मिर्गी, थायरॉयड या चयापचय/ मेटाबोलिज्म (metabolism) संबंधी विकार हैं या रह चुके हैं, तो आपको अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।

अधिक उम्र वाली महिलाओं को, गर्भपात से गुज़र चुकी महिलाओं को या कई बच्चों वाली महिलाओं को सामान्य से अधिक मेडिकल परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

3. रक्त परीक्षण (Blood Test)

पहली तिमाही में कुछ निम्न टेस्ट किए जाते हैं जैसे - एंटीबॉडी (antibody), आयरन (iron), प्लेटलेट्स (platelates) और थैलेसीमिया (thalassemia) , रूबेला (rubella), सिफलिस (syphilis) या वीडीआरएल (VDRL), हेपेटाइटिस बी और सी (hepatitis B and C), एचआईवी / एड्स (HIV / AIDS), कंप्लीट ब्लंड काउंट -सीबीसी (complete blood count - CBC), ब्लड ग्रुपिंग (blood grouping), थॉयराइड का स्तर (thyroid levels), वैरिकाला एंटीबॉडी (चिकन पॉक्स) (varicella antibodies (chicken pox), यदि डॉक्टर को किसी भी आनुवंशिक बीमारियों (genetic diseases) की संदेह है तो उसकी जांच।

4. मूत्र परीक्षण (Urine Test)

आपको प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इंफेक्शन की जांच के लिए यूरिन टेस्ट किया जाता है।

प्रेगनेंसी के दौरान बिना लक्षण के यूरिन इंफेक्शन होने को एसिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियूरिया (asymptomatic bacteriuria) के नाम से जाना जाता है।

यह एक ऐसी स्थिति है जब मूत्र में मवाद कोशिकाएं दिखाई देती हैं लेकिन रोगी को कोई लक्षण महसूस नहीं होते।

ज्यादातर लोगों में, यह एक समस्या नहीं होती, लेकिन गर्भावस्था में यह किडनी के संक्रमण का कारण बन सकता है, जो एक गंभीर है।

कई बार यूरिन टेस्ट, प्रोटीन, ग्लूकोज या कीटोन्स (ketones) की मात्रा जांचने के लिए भी मूत्र परीक्षण किया जाता है।

5. शारीरिक परीक्षण (Physical examinations)

प्रेगनेंसी के दौरान आपके वजन, रक्तचाप और शर्करा के स्तर को जांचा जाता है जिससे ये अनियंत्रि‍त होने पर इनके लिए दवाएं दी जा सकें।

इन्हें जांचने के लिए शारीरिक परीक्षण किया जाता है।

6. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

पहली तिमाही में, 12 सप्‍ताह होने पर सबसे पहले अल्ट्रासाउंड किया जाता है जिससे योनि से रक्तस्राव और भ्रूण के विकास को देखा जा सके।

डाउन सिंड्रोम के जांच के लिए पहले ट्राइमेस्टर में न्यूक्लल थिक स्कैन (nucleic thick scan) किया जाता है।

कई बार महिला की मेडिकल कंडीशन के हिसाब से पहली तिमाही में 2-3 बार अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं।

7. एनआईपीटी परीक्षण (NIPT testing)

एनआईपीटी (NIPT) गर्भधारण के 10 हफ्तों बाद कभी भी किया जा सकता है।

इसके जरिए बच्चे के डीएनए (DNA) का आकलन, भ्रूण में डाउन सिंड्रोम (down syndrome), एडवर्ड्स सिंड्रोम (edwards syndrome) होने का ख़तरा, क्रोमोसोमल असामान्यताएं (chromosomal imbalance), माइक्रोएलेट्रेशन सिंड्रोम (microeletation syndrome) इत्यादि की जांच के लिए किया जाता है।

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?
 

गर्भावस्था के दौरान दूसरी तिमाही में की जाने वाली जांच

Important tests done during second trimester of pregnancy in hindi

garbhavastha ke dauran दूसरी timahi mein ki jaane wali jaanch in hindi

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गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किए जाने वाले जांच निम्न हैं :

  1. दूसरी तिमाही में बच्चे की धड़कन सुनने के लिए टेस्ट किए जाते हैं।
    ये टेस्ट डॉपलर मशीन (doppler machine) और पिनार्ड स्टेथोस्कोप (pinards stethoscope) से किए जाते हैं।
    इससे पता लगाया जाता है कि बच्चे की धड़कन सामान्य रूप से धड़क रही है नहीं।
  2. आनुवंशिक स्क्रीनिंग टेस्ट (genetic screening test) को क्रोमोसोमल (chromosomal) असामान्यता जांचने के लिए किया जाता है।
  3. ट्रिपल टेस्ट/केटरिंग टेस्ट/बार्ट्स टेस्ट (triple test/catering test/barts test) गर्भावस्था से जुड़े प्रोटीन को मापता है जो कि बच्चे के डाउन सिंड्रोम होने की संभावना की गणना करता है।
  4. मॉफलॉजी स्कैन (morphology scan) अल्ट्रासाउंड बच्चे के सभी अंगों और संरचनाओं को व्यवस्थित रूप से देखने और मापने के लिए किए जाते हैं।
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गर्भावस्था के दौरान तीसरी तिमाही में की जाने वाली जांच

Important tests done during third trimester of pregnancy in hindi

garbhavastha ke dauran teesri timahi mein ki jaane wali jaanch in hindi

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  1. ग्लूकोज टॉलरेंस ब्लड टेस्ट (glucose tolerance blood test) एक ब्लड टेस्ट (blood test) है जिसे जेस्टेशनल डायबिटीज़ (gestational diabetes) का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  2. तीसरी तिमाही में स्ट्रेप्टोकोकस टेस्ट (streptococcus test) किया जाता है।
    इसे स्ट्रेप बी (strep b) या जीबीएस (GBS) भी कहा जाता है।
  3. बायोफिजिकल प्रोफाइल (biophysical profile) सिर्फ एक अल्ट्रासाउंड के साथ या एक नॉनस्ट्रेस टेस्ट (nonstress test) और एक अल्ट्रासाउंड के संयोजन के साथ किया जाता है।
    बच्चे के स्वास्थ्य का मूल्यांकन और निगरानी करने के लिए एक बायोफिज़िकल प्रोफ़ाइल का उपयोग किया जाता है।
    बायोफिजिकल प्रोफाइल का लक्ष्य गर्भावस्था के नुकसान को रोकना है और बच्चे में कम ऑक्सीजन की आपूर्ति यानि भ्रूण हाइपोक्सिया (fetal hypoxia) का पता लगाना है।
और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की कई तरह की जांच होती है।

इन जांचों के जरिए किसी भी जोखिम और जटिलताओं का पता लगाकर उनका सही तरह से इलाज किया जाता है।

इन जांचों के जरिए माँ और बच्चे के स्वास्थ्य की निगरानी के साथ ही विशिष्ट चिकित्सा स्थितियों को समय रहते संभाला जाता है।

ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर सभी जांचों को समय पर करवाना जरूरी होता है जिससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ‍ रहें और प्रसव के दौरान मां को किसी भी तरह की कोई परेशानी ना हो।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 16 Jun 2020

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