तनाव की जानकारी

Stress in hindi

tanav se kaise bache aur poori jankariin hindi

 

हर किसी के मन में कई तरह के विचार और चिंताएं चलती रहती हैं।

कुछ चिंताएं ऐसी भी होती हैं जो हर किसी के साथ बांटी भी नहीं जा सकती हैं।

ये चिंताएं परिवार को लेकर, आर्थिक तंगी को लेकर, स्वास्थ्य को लेकर या आपसी संबंधों को लेकर भी हो सकती हैं।

चिंता होना स्वाभाविक हैं मगर जब ये चिंताएं ज्यादा बढ़ जाती है तो तनाव का रूप ले लेती हैं।

अगर विज्ञान की भाषा में बात करें तो ‘तनाव’ किसी भी बदलाव के साथ सामंजस्य (adjustment) बिठाने के लिए शरीर द्वारा की गई एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है।

हमारा शरीर, मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से इन बाहरी बदलावों पर रिएक्ट (react) करता है।  

वो इस स्थिति मैं कुछ विशेष हार्मोन्स जैसे कोर्टिसोल (cortisol) और एड्रेनालाईन (adrenaline) का उत्पादन करता है। ये हार्मोन हार्ट बीट्स (heart rate) को बढ़ाते हैं और मांसपेशियों को चुनौती पूर्ण स्थिति के लिए तैयार करते हैं।

तनाव से घबराने की आवश्यकता नहीं है, ये हमारे जीवन का ही एक हिस्सा है।

तनाव होना हमेशा बुरा नहीं होता है, तनाव होने के कई सकारात्मक फायदे भी हैं।

ये तनाव ही हैं जिसकी वज़ह से हम निर्धारित समय पर कामों को पूरा कर पाते हैं,  कम्पटीशन एग्जाम (competition exams) में सफल हो पाते हैं, नौकरी में प्रोमोशन पाते हैं और विपरीत परिस्थितियों का सामना कर पाते हैं।

मगर जब तनाव एक लिमिट से ज्यादा हो जाता है तो इसके मानसिक और शारीरिक प्रभाव भी पड़ने लगते हैं।

ऐसे में तनाव का उपचार करना बहुत जरूरी हो जाता है।

 

तनाव के प्रकार

Types of stress in hindi

mansik tanav ke prakar in hindi

परिस्थितियों के अनुसार तनाव के भी प्रकार होते हैं।

तनाव का उपचार करने के लिए ये बेहद ज़रूरी है उसके प्रकारों के बारे में जाना जाये।

  1. तीव्र तनाव (Acute stress)

    ये तनाव बहुत सामान्य और बहुत कम समय के लिए होने वाला तनाव हैं इस तनाव की तीव्रता अधिक होती है मगर सामान्य रूप से ये नुकसानदायक नहीं होता हैं

    एक्यूट स्ट्रेस अक्सर हाल में हुई घटनाओं या निकट भविष्य में होने वाली समस्याओं के बारे में सोचने के कारण होता है।

    हालाँकि इन समस्याओं के समाधान हो जाने पर ये तनाव भी कम या दूर हो जाता है।

  2. एपिसोडिक तीव्र तनाव (Episodic acute stress in Hindi)

    कुछ लोग अपने जीवन में बार बार समस्याओं को लेकर चिंतित होते रहते हैं और अक्सर थोड़े थोड़े समय में तीव्र तनाव का अनुभव करते हैं

    जब काम को लेकर बहुत ज्यादा प्रतिबद्धता (commitment) रहती है तो एपिसोडिक तीव्र तनाव होता है।

    अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी करने वाले और मंथली टारगेट पूरा करने वाली नौकरी वाले (बैंकिंग, इंश्योरेंस क्षेत्र) लोग एपिसोडिक तीव्र तनाव के शिकार होते हैं।

    इस तरह के तनाव से उच्च हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग भी हो सकते हैं।

  3. चिर (दीर्घकालिक) तनाव (Chronic stress)

    जब तनाव के कारण दीर्घकालिक (गरीबी, बेरोज़गारी, शादीशुदा संबंध) हो और उनका समाधान जल्दी न हो सके तो वो क्रोनिक स्ट्रेस होता है।

    ये तनाव अक्सर इससे ग्रसित व्यक्ति के व्यक्तित्व का ही हिस्सा बन सकता है।

    ये तनाव सबसे नुकसानदायक तनाव है और यह लंबे समय तक रहता है।

    इससे ग्रसित लोगों में आत्महत्या करने, दूसरों के साथ हिंसक व्यवहार करने या दिल के दौरे पड़ने की आशंका बनी रहती है।

 

तनाव के शुरूआती लक्षण

Initial symptoms of stress in hindi

mansik Tanav ke shuruati lakshan in hindi

तनाव हमें कई तरह से प्रभावित करता हैं। इसके लक्षण इससे ग्रसित व्यक्ति में ना केवल शारीरिक रूप से नज़र आते हैं बल्कि उसके व्यवहार और प्रतिक्रिया में भी नज़र आते हैं।

ऐसे ही लक्षण नीचे बताये गये हैं:

  1. तनाव के शारीरिक लक्षण (Physical symptoms of stress)

    1. सरदर्द होना
    2. मांसपेशियों में जकड़न महसूस होना (Muscle tightness)
    3. हाई ब्लड प्रेशर होना
    4. बार बार पसीना आना
    5. सीने में दर्द होना
    6. हाथ पैरों में सुन्नता होना
    7. पूरी नींद ना आना
    8. सेक्स करने की इच्छा में कमी होना
    9. बार बार चक्कर आना
    10. हाँथ कांपना
    11. अचानक से वज़न का बढ़ना या कम होना  
    12. दांत पीसना
    13. पेट खराब रहना
  2. तनाव के भावनात्मक लक्षण (Emotional symptoms of stress)

    1. बार बार गुस्सा आना
    2. याद्दाश्त कमजोर होना
    3. मन उदास रहना
    4. मन घबराना
    5. नकारात्मक विचार आना
    6. अत्यधिक चिंता और बेचैनी रहना
    7. किसी काम में ध्यान ना लगना
    8. अवसाद होना
    9. थकान और कमजोरी महसूस होना
    10. चिड़चिड़ापन रहना
    11. असुरक्षित महसूस करना
  3. व्यवहार से जुड़े तनाव के लक्षण (Behavioral symptoms of stress)

    1. बहुत ज्यादा या कम भूख लगना
    2. अपने साथ वालो पर अचानक गुस्सा करना
    3. सिगरेट, तम्बाकू या शराब का अचानक अधिक सेवन करना
    4. सार्वजनिक कार्यक्रमों में ना जाना
    5. परेशान होकर बार बार रोना
    6. सामान्य बातचीत में अचानक से एग्ग्रेसिवे (aggressive) हो जाना
    7. हिंसक व्यवहार करना
    8. आत्महत्या की कोशिश करना
 

तनाव के मुख्य कारण

Potential causes of stress in hindi

Tanav ke karan in hindi

हर व्यक्ति तनाव के लिए अलग अलग तरह से प्रतिक्रिया देता हैं। किसी के लिए कोई एक तनाव की परिस्थिति उसे सकारात्मक रूप से प्रेरित करती है, तो अन्य व्यक्ति उन्ही परिस्थितियों में अवसाद में जा सकता है।

ऐसे ही तनाव के कुछ महत्वपूर्ण कारण हम यहाँ पर बता रहें हैं:

  1. पढ़ाई में अव्वल आने का दबाव
  2. समय पर नौकरी ना लगना
  3. प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता
  4. नौकरी में समय पर प्रोमोशन ना मिलना  
  5. आर्थिक तंगी होना
  6. प्रेम में धोखा या विफलता मिलना
  7. अपनी शारीरिक संरचना को लेकर हीनता महसूस करना
  8. नींद ना आना
  9. पारिवारिक समस्याएं होना
  10. गलत खान पान की आदत होना
  11. सिगरेट, तम्बाकू या शराब की आदत
  12. घरेलु हिंसा का शिकार होना
  13. बेटी का जन्म होने पर परिवार द्वारा बेटा पैदा करने के लिए दबाव बनाना
  14. किसी लम्बी बीमारी से ग्रसित होना
  15. नौकरी में घर से दूर ट्रान्सफर होना  
  16. पति पत्नी के वैवाहिक संबंध ठीक ना होना
  17. सेक्स लाइफ ठीक ना होना
  18. बच्चों की जिम्मेदारियां आना
  19. अनचाहा गर्भ होना
  20. गर्भपात हो जाना
 

तनाव का पता कैसे लगाये

How to diagnose stress in hindi

Tanav ka pata kaise lagaye in hindi

सामान्य रूप से तनाव की पहचान करने का कोई विशेष टेस्ट नहीं है।

जब तनाव से ग्रसित मरीज डॉक्टर के पास जाता है तो तनाव के लक्षणों और मरीज की ज़िन्दगी से जुड़े सवालों के जवाब के आधार पर ही तय किया जाता है कि मरीज तनाव में है या नहीं।

मगर तनाव के जो लक्षण होते हैं वो डिप्रेशन या एंग्जायटी डिसऑर्डर (Depression or Anxiety dirorder) के भी हो सकते हैं

इसलिए आमतौर पर डॉक्टर मरीज की सही मेडिकल कंडीशन्स का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट करता है।

  1. डॉक्टर द्वारा मरीज के साथ सवाल जवाब करना (Question and Answer session with doctor)

    डॉक्टर का मरीज के साथ साक्षात्कार बेहद महत्वपूर्ण होता है। मरीज द्वारा शारीरिक और भावनात्मक रूप से जो भी महसूस किया जाता है उसकी जानकारी ली जाती है।

    मरीज ऐसी किसी भी स्थिति का वर्णन करते हैं जो तनाव का कारण बन सकती है या उसे और बदतर बना सकती है।

    डॉक्टर मरीज से जुड़े सवाल करते हैं, जैसे कि-

    1. क्या मरीज पहले कभी अवसाद ग्रस्त रहा है?

    2. क्या मरीज के माता पिता से कोई कभी अवसाद से ग्रसित रहा है

    3. क्या मरीज महिला को कभी गर्भपात हुआ है?

    4. क्या उस पर बेटी के बजे बेटे को जन्म देने का दबाव है?

    5. क्या अपनी नौकरी और सफलता से खुश है?

    6. सेक्स लाइफ कैसी चल रही है?

    7. क्या आत्महत्या के ख्याल आते हैं?

    8. क्या बार बार गुस्सा आता है?

      अगर इनमे से किसी भी सवाल का जवाब ‘हाँ’ होता है तो मरीज के तनाव में होने की पुष्टि हो जाती है।

  2. फिजिकल एग्जामिनेशन (Physical examination)

    मरीज के तनाव से जुड़े लक्षणों की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर द्वारा मरीज का फिजिकल एग्जामिनेशन किया जाता है।

  3. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG)

    इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) टेस्ट किया जाता है ताकि तनाव की वजह से ह्रदय पर पड़ने वाले प्रभावों का जाना जा सके।

  4. अन्य टेस्ट (Other tests)

    ब्लड और यूरिन टेस्ट (blood and urine tests) किये जाते है ताकि कुछ विशेष हारमोंस के स्तर का पता लगा कर तनाव का पता लगाया जा सके।

 

सारांश

तनाव से आजकल हर कोई ग्रसित है। सभी शारीरिक और मानसिक परेशानियों की जड़ तनाव ही है।

एक सामान्य सा लगने वाला तनाव भी कई बीमारियों को जन्म देता है, जिनसे छुटकारा पाना आसान नहीं होता है। इसलियें छोटी-छोटी बातों को मन पर हावी न होने दें।

किसी घटना को लेकर अपने मन में स्वयं ही कोई परिणाम न बनने दें।

हो सकता है कि आज जिस घटना से आपको तनाव हो रहा है, भविष्य में वो ही घटना किसी बड़ी सफलता का कारण बने।

हमेशा याद रखें कि जो होता है, अच्छे के लिए होता है।

अगर तनाव अधिक बढ़ जाएं तो किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) से तुरंत परामर्श लें।