तनाव और प्रजजन क्षमता पर इसका प्रभाव

Stress and its effects on your fertilityin hindi

Tanav aur prajnan kshamta par iska prabhav


एक नज़र

  • बांझपन तनाव पैदा कर सकता है, लेकिन तनाव से संबंधित बांझपन या प्रजनन संबंधी समस्याएं भी संभव हैं।
  • तनाव महिलाओं में अनियमित पीरियड्स का कारण बन सकता है।
  • तनाव के परिणामस्वरूप लो स्पर्म काउन्ट और लो स्पर्म मोटैलिटी भी हो सकती है।
triangle

Introduction

Tanav_aur_prajnan_kshamta_par_iska_prabhav

कई वर्षों से तनाव और बांझपन यानि इंफर्टिलिटी के मुद्दे पर बात होती आ रही है। यह एक आम धारणा है कि इंफर्टिलिटी महिलाओं और पुरुषों में तनाव पैदा कर सकती है। प्रजनन उपचार से गुजरने वाले दंपति अक्सर खुद को व्यापक रूप से साइकोलॉजीकल (psychological) और फ़ाइनेंशियल (financial) तनाव से घिरा पाते हैं। इंफर्टिलिटी के बारे में पता चलने के कारण होने वाले तनाव के अलावा, फर्टिलिटी उपचार से गुजरने का अतिरिक्त तनाव आपके प्रजनन उपचार के परिणाम को भी प्रभावित कर सकता है। इंफर्टिलिटी की समस्या और इसके उपचार से गुजरना अपने आप में तनावपूर्ण है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तनाव महिला और पुरुष, दोनों में इंफर्टिलिटी का कारण बन सकता है?

आज हम जिस तरह की जीवनशैली में जी रहें हैं वह तनाव से भरी हुई है। खासतौर पर कामकाजी महिलाओं और पुरुषों के लिए, हर दिन एक नई चुनौती जैसा होता है। जीवन में काम का बोझ और निरंतर सफल होने की चाहत, मेंटल टेंशन (mental tension) को जन्म दे सकती है। यह टेंशन शादी के बाद और गर्भधारण करने के प्रयास तक जारी रहती है। यह तनाव गर्भाधान में देर कर सकता है, और इंफर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। रिसर्च बताते हैं कि साइकोलॉजीकल स्ट्रेस सिर्फ प्राकृतिक गर्भधारण में ही समस्या पैदा नहीं करता है बल्कि प्रजनन उपचार में भी बाधा बनता है, इसलिए कृत्रिम गर्भाधान (artificial conception) में भी देर करता है। (यहाँ पढ़े : जल्दी गर्भवती होने के टिप्स)

loading image

इस लेख़ में

 

तनाव प्रजनन क्षमता और गर्भधारण के मौकों को कैसे प्रभावित करता है?

How stress affects fertility and your chances of pregnancy?in hindi

Tanav prajnan kshmta aur garbhdharan ke maukon ko kaise prabhavit karta hai

तनाव हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। हमारे दिल और शरीर पर तनाव के प्रभाव के बारे में हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि निरंतर तनाव में रहने से आपकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है?

मानसिक तनाव आपके प्रजनन स्वास्थ्य को दो तरीकों से प्रभावित करता है : -

  • यदि आप बहुत तनाव में हैं और बच्चे के लिए प्रयासरत हैं तो यह प्राकृतिक गर्भाधान में देर कर सकता है।
  • आपको इंफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है, और इंफर्टिलिटी के कारण होने वाला तनाव, प्रजनन उपचार को प्रभावित कर सकता है।

तनाव में शरीर इस तरह प्रतिक्रिया देता है कि यह एक ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जो गर्भधारण को मुश्किल बना सकती है। तनाव फर्टाइल (fertile) और इनफर्टाइल (infertile) दोनों ही व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है, जो उनके लिए प्राकृतिक या कृत्रिम तरीके से गर्भधारण को मुश्किल बना सकता है।

यह जानने से पहले कि तनाव कैसे हमारे शरीर में जैविक वातावरण यानि कि बायोलॉजीकल एनवायरनमेंट (biological environment) पैदा करता है, जो शरीर को इनफर्टाइल बनाता है, यह जानना जरूरी है कि तनाव क्या है और ये कैसे काम करता है?

शारीरिक और भावनात्मक टेंशन के एहसास को तनाव के रूप में परिभाषित किया गया है। यह किसी भी घटना के कारण हो सकता है, जिससे आपको घबराहट, गुस्सा या निराशा महसूस हो सकती है। यह किसी मांग या चुनौती पर आपके शरीर की प्रतिक्रिया होती है। (यहाँ पढ़े : तनाव से जुडी सम्पूर्ण जानकारी )

तनाव को दो भागों में बांटा जा सकता है : -

  • तीव्र तनाव (Acute stress)

इस प्रकार का तनाव जल्दी दूर हो जाता है। आप इस तरह के तनाव का अनुभव तब करते हैं जब आप अपने साथी के साथ लड़ते हैं या किसी परीक्षा से पहले या फिर जब साक्षात्कार यानि इंटरव्यू के लिए जाते हैं, आदि।

  • क्रोनिक तनाव (Chronic stress)

इस प्रकार का तनाव लंबे समय तक रहता है। आप इस तरह के तनाव का अनुभव तब कर सकते हैं जब आप वित्तीय समस्याओं (financial problems) से जूझ रहे हों, बुरी शादी में फंस गए हों, बांझपन जैसी बीमारी से गुजर रहे हों। इलाज न कराने पर क्रोनिक स्ट्रेस के कारण अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

आपके रक्तप्रवाह में कोर्टिसोल (cortisol) हार्मोन जारी करके शरीर तनाव पर प्रतिक्रिया करता है। एड्रेनल ग्लैन्ड (adrenal gland) तनाव की स्थिति में सक्रिय हो जाता है और कोर्टिसोल हार्मोन जारी करना शुरू कर देती है।

कोर्टिसोल हार्मोन को स्ट्रेस हार्मोन (stress hormone) के नाम भी जाना जाता है जो शरीर के ‘फाइट या फ्लाइट रेस्पॉन्स’ (fight or flight response) का कारण है। यह आपके दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है और स्थिति को नज़रअंदाज़ करने के लिए आपके शरीर को तैयार करता है।

शॉर्ट टर्म के लिए, ये प्रतिक्रिया फायदेमंद होती है, क्योंकि ये आपके शरीर को खतरनाक स्थितियों से दूर रहने की सलाह देती है। हालांकि, अगर मानसिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है (chronic mental stress) तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है जैसे कि डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी आदि! न केवल तनाव इन स्थितियों का कारण बन सकता है, बल्कि, अगर आप पहले से ही ऊपर बताई गई किसी भी स्थिति से पीड़ित हैं, तो क्रोनिक तनाव इसे और बदतर बना सकता है।

तनाव कई भावनात्मक और शारीरिक लक्षणों का कारण बन सकता है जिन्हें आप समय पर अनदेखा कर सकते हैं या महसूस नहीं कर सकते हैं। अंतर्निहित मानसिक तनाव (underlying mental stress) न केवल आपके समग्र स्वास्थ्य पर बल्कि आपके प्रजनन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। तनाव मासिक धर्म और ओवुलेशन से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है, जिससे गर्भावस्था में देर हो सकती है।

तनाव और प्रजनन क्षमता के बीच संबंध (Relationship between Stress and Fertility)

दुनिया भर में कई डॉक्टरों का मानना ​​है कि तनाव पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम करने और महिलाओं में ओवुलेशन की समस्याओं का कारक हो सकता है। तनाव और प्रजनन क्षमता के बीच स्पष्ट संबंध का पता लगाने के लिए अभी भी अध्ययन किए जा रहे हैं।

2014 के एक अध्ययन में, 38 और 49 वर्ष की आयु के बीच के 193 पुरुषों का इंटरव्यू लिया गया और उनके शुक्राणुओं का विश्लेषण (analyzed) किया गया। यह पाया गया कि जीवन का तनाव (काम का तनाव नहीं) कम शुक्राणुओं की संख्या, गति और शुक्राणु के आकार के साथ जुड़ा हुआ था।

अध्ययनों से पता चला है कि तनाव महिलाओं में मनोदशा और शारीरिक परिवर्तन का कारण बन सकता है। मूड में बदलाव से कामेच्छा यानि लिबीडो में कमी आ सकती है, जिससे सेक्स लाइफ प्रभावित होती है। [1]

जो महिलाएं अक्सर थकी हुई या तनावग्रस्त होती हैं, वे नियमित संभोग नहीं कर पाती। लगातार मानसिक तनाव भी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करता है और ओवुलेशन में परेशानी का कारण बनता है। मासिक धर्म चक्र में ये बदलाव नाइट वर्क यानि रात में काम करने वाली महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है।

हो सकता है कि हम तनाव और बांझपन को सीधी तौर पर कनेक्ट न कर पाएँ। हालांकि, यह साफ है कि स्ट्रेस लेवल, पुरुषों और महिलाओं, दोनों के प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। यहाँ तक कि प्रजनन उपचार के दौरान भी स्ट्रेस यानि तनाव, उपचार के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। आइए देखते हैं क्रोनिक साइकोलॉजीकल स्ट्रेस (chronic psychological stress) प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है।

loading image
 

प्रजनन उपचार पर तनाव का प्रभाव

Impact of stress on infertility treatmentsin hindi

Fertility treatment par tanav ka prabhav

यह एक जाना-माना तथ्य है कि जिन लोगों में इंफर्टिलिटी का निदान किया जाता है, उन्हें काफी तनाव से गुजरना पड़ता है। हालांकि, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट यानि प्रजनन उपचार से गुजरने वाले लोग कभी-कभी ही इलाज से जुड़े मानसिक तनाव के बारे में बताते हैं, लेकिन उन्होनें कभी एंगजाइटी या अवसाद का जिक्र नहीं किया।

2004 में किए गए एक अध्ययन में, अपनी साइकोलॉजीकल स्थिति को लेकर पहली बार इंफर्टिलिटी क्लिनिक जाने से पहले 122 महिलाओं का इंटरव्यू लिया गया, इनमें से 40% महिलाओं ने अवसाद, एंगजाइटी या दोनों होने की शिकायत की। [2]

एक हालिया लिट्रेचर रिव्यू ने यह निष्कर्ष निकाला कि 25% से 60% इनफर्टाइल व्यक्तियों में मनोरोग के लक्षण (psychiatric symptoms) होते हैं, और उनके डिप्रेशन और एंगजाइटी का स्तर फर्टाइल व्यक्तियों की तुलना में काफी अधिक था।

मेडिकल रिसर्च में क्रोनिक स्ट्रेस के प्रभाव के बारे में कई बार अध्ययन किया गया है और शोधकर्ताओं ने सलाह दी कि मानसिक तनाव, गर्भाधान में देर कर सकता है और प्रजनन उपचार से गुजरने वाले कपल के लिए गर्भधारण के मौकों को कम कर सकता है।

2018 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) से गुजरने वाले 45 कपल में, जिन महिलाओं में तनाव से जुड़े अणुओं (molecules) का स्तर अधिक था, उनके गर्भवती होने की संभावना कम थी। कई मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों (mental health professionals) ने माना है कि तनाव जैसे मनोवैज्ञानिक कारक गर्भ धारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और जिससे बांझपन का इलाज प्रभावित हो सकता है।

तनाव से न केवल आपकी गर्भावस्था की संभावना कम हो जाती है, बल्कि प्रजनन उपचार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए गर्भधारण की कोशिश करते समय स्ट्रेस लेवल को मैनेज करना आवश्यक है। पुरुषों और महिलाओं दोनों को अपने स्ट्रेस लेवल को कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए, फिर चाहे वे स्वाभाविक रूप से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हों या इंफर्टिलिटी के निदान के बाद प्रजनन उपचार से गुजर रहे हों, उनके तनाव का स्तर उनके गर्भाधान के मौके को प्रभावित कर सकता है।

 

प्रजजन क्षमता बढ़ाने के लिए स्ट्रेस को मैनेज करें

Manage stress to improve your fertilityin hindi

Prjann kshmta badhane ke liye stress ko manage kare

कुछ सरल उपायों को अपनाकर और जीवनशैली में कुछ बदलाव करके अपने स्ट्रेस को मैनेज कर सकते हैं।

निम्नलिखित स्टेप्स घर पर तनाव को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं : -

  • अपने खाने की आदतों में सुधार करें (Adjust your eating habits)

स्वस्थ भोजन न केवल आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ बना सकता है, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य में भी मदद कर सकता है। जंक फूड खाने की बजाय, ताजी सब्जियां और फल खाने की कोशिश करें। अपने आहार में हरी और पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। ताजे फल, नट्स खाएं जैसे बादाम और खुद को हाइड्रेटेड रखें।

  • मेडिटेशन (Meditation)

घर पर मेडिटेशन करने से भी आपको तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। बस कुछ ही मिनटों का ध्यान, पूरे दिन के तनाव को दूर करने में मदद कर सकता है और नियमित रूप से किए जाने पर आपको आंतरिक शांति पाने में मदद करता है। आप घर, दफ्तर, पार्क, यात्रा करते समय आदि कहीं भी मेडिटेशन कर सकते हैं। नियमित मेडिटेशन करने से आपकी तंत्रिका शांत हो सकती है और आपकी चिंता का स्तर कम हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, गहरे ध्यान के साथ-साथ साँस लेने का व्यायाम और मांसपेशियों का व्यायाम, आपके तनाव के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। [3]

  • रिलैक्सेशन तकनीक (Relaxation techniques)

कई रिलैक्सेशन तकनीकें हैं, जिनका पालन करके आप अपने तनाव को दूर कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, गहरी श्वास, योग, और निर्देशित कल्पना (guided imagery) जैसी विभिन्न तकनीकें तनाव प्रबंधन यानि तनाव को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं।

  • परामर्श (Counseling)

यदि आप एक नियंत्रित दृष्टिकोण यानि कंट्रोल्ड एप्रोच (controlled approach) की तलाश कर रहे हैं तो आप स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए काउन्सेलिंग की कोशिश हमेशा कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए एक अच्छा उपाय है, जो नींद के पैटर्न, मूड में लंबे समय तक बदलाव से पीड़ित हैं और जिन्हें तनाव के कारण संभोग करने में समस्या होती है।

  • मनोचिकित्सा (Psychotherapy)

यह पाया गया है कि मनोचिकित्सा या इंटर पर्सनल थेरेपी (रिश्ते को सुलझाने वाले संबंधों पर ध्यान केंद्रित करने वाली चिकित्सा) उन लोगों की मदद कर सकती है जो इंफर्टिलिटी और बांझपन-संबंधी तनाव व अवसाद के कारण, अपनी शादी में कई तरह की समस्याओं से पीड़ित हैं।

  • दवाएं (Medications)

यदि बांझपन के कारण होने वाला तनाव, चिंता या अवसाद पैदा कर रहा है, तो आपके डॉक्टर कुछ एंटीडिप्रेसेंट या एंटी-चिंता दवाएं (antidepressants or anti-anxiety medications) भी लिख सकते हैं।

loading image

क्या यह लेख सहायक था? हां कहने के लिए दिल पर क्लिक करें

references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

Stefano Palomba, Jessica Daolio, et al. “Lifestyle and fertility: the influence of stress and quality of life on female fertility”. Reprod Biol Endocrinol. 2018; 16: 113, PMID: 30501641.

2 .

Kristin L. Rooney, Alice D. Domar. “The relationship between stress and infertility”. Dialogues Clin Neurosci. 2018 Mar; 20(1): 41–47, PMID: 29946210.

3 .

Balakrishnan Vandana, Lakshmiammal Saraswathy, et al. “Meditation induces a positive response during stress events in young Indian adults”. Int J Yoga. 2011 Jul-Dec; 4(2): 64–70, PMID: 22022124.

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 28 Sep 2020

हमारे ब्लॉग के भीतर और अधिक अन्वेषण करें

लेटेस्ट

श्रेणियाँ

संभोग का समय, गर्भवती होने के अवसर से कैसे जुडा है?

संभोग का समय, गर्भवती होने के अवसर से कैसे जुडा है?

क्या शराब, कैफीन और धूम्रपान आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं?

क्या शराब, कैफीन और धूम्रपान आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं?

वजन प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है?

वजन प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है?

उम्र आपकी प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करती है?

उम्र आपकी प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करती है?
balance
article lazy ad