प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसना या शोल्डर डिस्टोशिया

Shoulder dystocia during delivery in hindi

Prasav ke samay shishu ka kandha fasana


Introduction

Shoulder_dystocia_during_delivery_in_hindi

गर्भवती महिला का जैसे-जैसे गर्भकाल पूरा होने का और प्रसव निकट आने का समय आता है, महिला के मन में प्रसन्नता और आशंका के एक साथ जन्म लेने लगते हैं।

आशा और आशंका के इन्हीं भावों में डूबती-उतरती महिला जब प्रसव के लिए अस्पताल पहुँचती है तब डॉक्टर माँ-शिशु की सम्पूर्ण जांच करते हैं।

अगर गर्भावस्था में कोई विशेष परेशानी न हुई हो तब सामान्य प्रसव अथार्थ नॉर्मल डिलीवरी की तैयारी की जाती है।

लेकिन, कभी-कभी नॉर्मल डिलीवरी जिसे योनि प्रसव (vaginal delivery) भी कहा जाता है उसमें विभिन्न परेशानियाँ आ जाती हैं।

ऐसी ही एक परेशानी है प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसना जिसे शोल्डर डाइस्टोसिया (shoulder dystocia) भी कहा जाता है। इस लेख में शोल्डर डाइस्टोसिया की परेशानी के बारे में विस्तार से जानें।

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इस लेख़ में

  1. 1.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसना या शोल्डर डाइस्टोसिया क्या होता है?
  2. 2.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया के लक्षण क्या हो सकते है
  3. 3.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया के क्या जोखिम हो सकते है
  4. 4.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया का निदान कैसे होता है?
  5. 5.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंस जाने पर या शोल्डर डाइस्टोसिया के जोखिम क्या हैं?
  6. 6.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया का उपचार कैसे हो सकता है
  7. 7.प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया से बचाव कैसे हो सकता है?
 

प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसना या शोल्डर डाइस्टोसिया क्या होता है?

What is shoulder dystocia in hindi

Shoulder Dystocia kya hota hai in hindi

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प्रसव प्रक्रिया में जब शिशु का सिर बर्थ कनाल से बाहर आ जाता है लेकिन कंधा फंस जाता है तब इस स्थिति को शोल्डर डाइस्टोसिया कहते हैं।

यह स्थिति शिशु के एक या दोनों कंधों के माँ की कूल्हे की हड्डी (pelvic bone) के पीछे अटक जाने के कारण उत्पन्न होती है।

इस कारण प्रसव की प्रक्रिया धीमी होते हुए रुक जाती है और गर्भवती महिला का प्रसव-दर्द (labor-pain) लम्बे समय तक चलता है।

यह प्रसव के दौरान होने वाली एक आपात-स्थिति है जिसमें प्रेग्नेंसी डॉक्टर को प्रसव प्रक्रिया को जारी रखने के लिए तुरंत कुछ अतिरिक्त प्रयत्न करने पड़ते हैं।

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प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया के लक्षण क्या हो सकते हैं?

What are the symptoms of shoulder dystocia in hindi

Shoulder Dystocia ke kya Lakshan ho sakte hain in hindi

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शोल्डर डाइस्टोसिया के लक्षण अधिकतर प्रसव के समय दिखाई देते हैं। दरअसल, प्रसव की इस स्थिति में शिशु का सिर महिला की योनि से बाहर आ जाता है लेकिन शेष शरीर उसी समय बाहर नहीं आ पाता है।

चिकित्सा जगत में यह स्थिति “कछुआ स्थिति” (the turtle sign) के नाम से जानी जाती है।

ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस स्थिति में शिशु का शरीर का एक भाग (सिर) प्रसव प्रक्रिया में बाहर आ जाता है लेकिन वह पुनः बर्थ कनाल में वापस जाता हुआ दिखाई देता है, बिल्कुल उसी तरह जैसे एक कछुआ अपने खोल से केवल कुछ समय के लिए सिर बाहर निकालता है और उसे पुनः वापस अंदर ले लेता है।

इस तरह से शिशु का सिर बर्थ कनाल से बाहर आना और फिर अन्दर जाता हुआ प्रतीत होना, शोल्डर डाइस्टोसिया के लक्षण हो सकते हैं।

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प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया के क्या जोखिम हो सकते हैं?

What are the risk factors for Shoulder Dystocia in hindi

risk factors for shoulder dystocia in hindi

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प्रसव प्रक्रिया में कंधा फंसने का जोखिम आमतौर पर उन शिशुओं को होता है जिनका वजन गर्भ में सामान्य से अधिक होता है।

जिन माँओं को डायबिटीज़ होती है या जिनका पहला प्रसव असामान्य रहा हो, उनके प्रसव के वक़्त भी कंधा फंस सकता है।

इसके अलावा शोल्डर डाइस्टोसिया की स्थिति में गर्भवती महिला और जन्म लेने वाले शिशु को होने वाले जोखिम को प्रसव-पूर्व (pre-labour) जोखिम व प्रसव प्रक्रिया के दौरान (intrapartum) जोखिम के रूप में जान सकते हैं।

आइये दोनों स्थितियों में होने वाले जोखिम को विस्तारपूर्वक समझें :

प्रसव-पूर्व (Pre-Labour) जोखिम

प्रसव प्रक्रिया के दौरान (Intrapartum) जोखिम

1. अगर शिशु पोस्टटर्म बेबी हो तो शोल्डर डाइस्टोसिया का जोखिम - इस स्थिति में शोल्डर डिस्टोसिया का जोखिम दस गुना बढ़ जाता है।

2. मैक्रोसोमिया - जब जन्म लेने वाले शिशु का वजन 4.5 किलो से अधिक व सिर का आकार शेष शरीर से अधिक हो तब भी यह जोखिम काफी अधिक होता है।

3. गर्भकालीन मधुमेह - गर्भवती को मधुमेह होने की स्थिति में शोल्डर डिस्टोसिया का जोखिम 2 से 4 गुना तक बढ़ जाता है।

4. गर्भवती माँ का अत्यधिक वजन - प्रसव के समय से गर्भवती महिला का वज़न सामान्य से अधिक होने की स्थिति में भी शोल्डर डिस्टोसिया होने का जोखिम बढ़ जाता है।

5. पहले प्रसव में शोल्डर डाइस्टोसिया - यदि गर्भवती महिला का वर्तमान गर्भ से पहले गर्भ में भी शिशु को शोल्डर डाइस्टोसिया की परेशानी या बीपीआई (BPI) की स्थिति हो चुकी है तब अगले प्रसव में भी इसके होने की संभावना 20% अधिक हो जाती है।

1.प्रसव प्रक्रिया का प्रथम चरण का लंबा हो जाना

2. प्रसव प्रक्रिया के दूसरे चरण में बच्चे के गर्भ में आगे सरकने की प्रक्रिया रुक जाती है (शायद बच्चे की गर्भ में स्थिति सही न होने के कारण)

3. प्रसव प्रक्रिया के दूसरे चरण का जरूरत से ज्यादा लंबा हो जाना

5. प्रसव करवाने के लिए चिमटी या वैक्यूम उपकरण आदि की सहायता लेना

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प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया का निदान कैसे होता है?

How is shoulder dystocia diagnosed in hindi

Shoulder Dystocia ka pata kaise chalta hai in hindi

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प्रसव प्रक्रिया में जब गर्भ के शिशु का सिर महिला की योनि मार्ग से बाहर आ जाता है लेकिन उसका शरीर बाहर न तो स्वयं बाहर आ पता है और न ही प्रेग्नेंसी डॉक्टर के द्वारा किए प्रयासों से बाहर आ पाता है, तब चिकित्सक शोल्डर डाइस्टोसिया का निदान करते हैं।

शोल्डर डाइस्टोसिया की स्थिति में फ़ीमेल फीटस के मुकाबले मेल फीटस में होने की संभावना अधिक होती है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर, प्रसव के दौरान, चिमटी (forcep) या/और वैक्यूम उपकरण (vacuum apparatus) का प्रयोग करते हैं।

लेकिन यदि शिशु का सिर बाहर आते हुए वापस योनि में चला जाता है तब यह स्थिति टर्टल पोजीशन (turtle position) को दिखाती है और इस स्थिति में डॉक्टर अविलंब सर्जरी यानि सी-सेक्शन का निर्णय ले सकते हैं।

इसके अलावा अगर गर्भवती महिला के इतिहास में डायबिटीज़/ बीपीआई या पहले भी शोल्डर डाइस्टोसिया की स्थिति हुई थी तो भी डॉक्टर शोल्डर डाइस्टोसिया की आपात स्थिति में सी-सेक्शन का निर्णय ले सकते हैं।

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प्रसव के समय शिशु का कंधा फंस जाने पर या शोल्डर डाइस्टोसिया के जोखिम क्या हैं?

What are the complications of Shoulder Dystocia in hindi

Complications of Shoulder Dystocia in hindi

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प्रसव के समय शिशु का कंधा फंस जाने से कई परेशानियाँ हो सकती हैं। इनका समय पर उपचार करना माँ-शिशु के स्वास्थ्य और जीवन के लिए बहुत जरूरी होता है। हालांकि, इस स्थिति में खड़ी हुई कोई भी परेशानी अधिक समय तक नहीं रहती है।

शोल्डर डाइस्टोसिया की स्थिति में निम्न प्रकार की परेशानियों हो सकती हैं :

  1. प्रसव में महिला का अत्यधिक रक्त्स्त्राव होना;
  2. शिशु के कंधे, हाथ या बांह में चोट लगना;
  3. प्रसव प्रक्रिया के बीच में रुक जाने के कारण शिशु के मस्तिष्क में ऑक्सीजन या तो पहुँचती नहीं है या कम पहुँचती है, इसके कारण मस्तिष्क से जुड़ी परेशानी होना;
  4. महिला के गर्भाशय ग्रीवा (cervix), गुदा या मलद्वार (rectum), गर्भाशय (uterus) अथवा योनि (vagina) में से किसी में भी चोट लगने से नुकसान होना;

सामान्य तौर पर देखा यह गया है कि शोल्डर डाइस्टोसिया (shoulder dystocia) की स्थिति में परेशानी होने पर डॉक्टर उन्हें तुरंत दूर करने में सफल रहते हैं।

केवल 20% शिशु को ही प्रसव प्रक्रिया में आई इस बाधा के कारण लंबे समय तक या स्थायी नुकसान या परेशानी को झेलना पड़ता है।

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प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया का उपचार कैसे हो सकता है?

How is Shoulder Dystocia treated in hindi

Shoulder Dystocia treated in hindi

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प्रसव के समय कंधा फँसने के उपचार के रूप में डॉक्टर के द्वारा इस्तेमाल की गयी तकनीक को हेल्पर (HELPERR) कहा जाता है।

“H” - इसका अर्थ है मदद (help) लेना।

इस समय प्रेग्नेंसी डॉक्टर अपने असिसटेंट या साथी डॉक्टर अथवा नर्स आदि की मदद लेते हैं।

“E” - इसका अर्थ है एपिस्टोमी के लिए मूल्यांकन (evaluate) करना।

यह एक छोटी सर्जरी होती है जिसमें गुदा या योनिमुख के बीच का भाग यानि पेरिनियम (perineum) में छोटा सा चीरा लगाया जाता है।

इस चीरे के माध्यम से योनि मार्ग को थोड़ा और चौड़ा किया जाता है।

हालांकि, इस कार्य से ही शोल्डर डाइस्टोसिया की समस्या हल नहीं हो जाती है, क्योंकि बच्चा अभी भी पेल्विस में फंसा हुआ होता है।

“L” - इसका अर्थ है टाँगे (legs), अब डॉक्टर, गर्भवती महिला को अपनी टांगों को पेट की ओर ले जाने को कहेंगे।

इस तकनीक को मैकरोबर्ट्स मन्यूवर (McRoberts maneuver) कहा जाता है।

इस अवस्था में महिला के कूल्हे थोड़ा घूम कर चपटे हो जाते हैं और इससे शिशु को प्रसव लेने के लिए आगे बढ़ना सरल हो जाता है।

“P” - इसका अर्थ है स्प्रे प्युबिक प्रेशर (spray pubic pressure) तकनीक का प्रयोग करना।

इस तकनीक में डॉक्टर आपकी पेल्विस में कुछ स्थानों पर इस तरह आपने हाथों से दबाव बनाते हैं जिनसे बच्चे के फंसे हुए कंधे का घूमना आसान हो जाता है।

“E” - इसका अर्थ है इंटर मैन्युवर (enter maneuvers) यानि प्रवेश करने की तकनीक का इस्तेमाल करना।

इस तकनीक में डॉक्टर अपने हाथ की उँगलियाँ गर्भाशय में प्रवेश करवा कर बच्चे के कंधे को घुमाने का प्रयास करते हैं।

इसे इंटर्नल रोटेशन (internal rotation) भी कहा जाता है।

“R” - इसका अर्थ है पोस्टीरियर आर्म (posterior arm) अथार्थ पीछे के कंधे को बर्थ कनाल (birth canal) से निकालने का प्रयास करना।

यदि डॉक्टर इस प्रक्रिया में एक कंधा निकाल लेने में सफल हो जाते हैं, तब शिशु को बाहर आने में आसानी हो जाती है।

“R” - इसका मतलब है कि महिला को घूमने (roll the patient) को कहा जाना।

इसमें उन्हें अपने हाथों और घुटनों पर ज़ोर देने वाली अवस्था में आने के लिए कहा जाता है।

इससे महिला उलटी अवस्था में होती है और इससे शिशु को बर्थ कनाल से बाहर आने में बहुत आसानी हो सकती है।

यह ज़रूरी नहीं है कि यहाँ बताई गई सभी तकनीकों और विधियों को डॉक्टर इसी क्रम में अपनाएँ।

वे उस समय, माँ और शिशु की स्थिति के अनुसार ही निर्णय ले सकते हैं।

और पढ़ें:गर्भकालीन मधुमेह के कारण, लक्षण और उपचार
 

प्रसव के समय शिशु का कंधा फंसने या शोल्डर डाइस्टोसिया से बचाव कैसे हो सकता है?

Can Shoulder Dystocia be prevented in hindi

Shoulder Dystocia Be Prevented in hindi

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प्रसव के समय कंधा फंसना वो परेशानी है जिसका संकेत पहले से नहीं मिल सकता है। गर्भवती महिला की गहन जांच के बाद ही डॉक्टर यह बता सकते हैं कि महिला को प्रसव के समय शोल्डर डाइस्टोसिया की परेशानी होने की संभावना है या नहीं।

यदि आपके चिकित्सक ने प्रसव के समय शिशु के कंधे फंसने की स्थिति को महसूस किया है तब ही वह आपके व आपके शिशु के लिए बचाव के उचित विकल्प चुन सकते हैं।

यदि गर्भवती महिला का वजन या जन्म लेने वाले शिशु का वजन अधिक होता है और/अथवा यदि गर्भवती महिला मधुमेह से पीड़ित हो तब इन परेशानियों के कारण कंधा फँसने की समस्या के होने की संभावना अधिक हो जाती है।

इसलिए गर्भावस्था शुरू होते ही डॉक्टर से सारी जांच करवा कर हर प्रकार के निर्देश का पालन करना चाहिए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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