यौवनारंभ

यौवनारंभ की जानकारी

Puberty related health information in hindi

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यौवन उस समय का नाम है जब आपका शरीर विकसित होना और बदलना शुरू होता है, जैसे ही आप बच्चे से वयस्क होते हैं

10 से 14 साल की उम्र में आपका शरीर खुद ही तय करता है कि उसके विकसित होने का समय आ गया है। पर इस पर घबराने की कोई बात नहीं, क्योंकि यह हर मानव शरीर की सामान्य क्रिया है, जो आपके व्यस्क होने का संकेत है।

यौवनारंभ (प्यूबर्टी) के दौरान आपका दिमाग कुछ रसायनों का स्त्राव करता है जिसे हॉर्मोन कहा जाता है। यही हॉर्मोन आपके शरीर में परिवर्तन करते हैं।

लड़कियों की प्यूबर्टी को पहचानने के पांच चरण

Five stages of puberty in girls in hindi

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लड़कियों में लड़कों की तुलना में प्यूबर्टी के दौरान कुछ ज्यादा बदलाव देखने को मिलते हैं। हॉर्मोन के उतार चढ़ाव से हर महीने उनका सामना होता है।

लड़कियों में प्यूबर्टी के इस बदलाव को 5 चरणों में विभाजित किया गया है:

पहला चरण

ये पुबर्टी के शुरू होने से पहले का चरण है। इस चरण में दिमाग शरीर को हॉर्मोन्स के ज़रिये संकेत भेजता है कि बदलाव और यौवन का वक्त आ गया है।

ये लड़की के 8 साल की उम्र में शुरू होता है और इस दौरान शारीरिक बदलाव नहीं होते।

दूसरा चरण

ये चरण सामान्य तौर पर 9 से 11 साल के बीच में होता है, इस चरण में शारीरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं।

  • लड़कियों में इस वक्त स्तनों में उभार की शुरूआत हो सकती है। थोड़ा दर्द या खुजली अगर हो, तो यह सामान्य है।

  • यूटरस (Uterus) का विकास होता है, और हल्के प्यूबिक बाल (Pubic hair) भी निकलने लगते हैं।

तीसरा चरण

लड़कियों में शारीरिक बदलाव आमतौर पर 12 साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं, इस चरण में शारिरिक बदलाव नज़र आने लगते हैं।

  • स्तन और बड़े हो जाते हैं।

  • प्यूबिक बाल घने हो जाते हैं।

  • बगल में भी बाल निकल आते हैं।

  • पीठ और चेहरे पर मुंहासे दिखने लगते हैं।

  • कमर और जांघों पर फैट जमने लगता है।

चौथा चरण

इस चरण में सबसे ज्यादा शारीरिक बदलाव दिखते हैं, जो 13 साल की उम्र के आसपास होता है।

  • स्तन पूरी तरह विकसित हो जाते हैं।

  • 12-14 साल की उम्र में लड़कियों के पीरियड्स (Periods) शुरू हो जाते हैं।

  • इसके चरण के बाद हाईट (height) में वृद्धि प्रति वर्ष लगभग सिर्फ 2 से 3 इंच ही हो पाती है।

  • प्यूबिक बाल और घने हो जाते हैं।

पांचवा चरण

यह अंतिम चरण शारीरिक परिपक्वता के अंत का प्रतीक है लड़कियों में पांचवा चरण आमतौर पर 15 वर्ष की उम्र के आसपास होता है

  • वैसे 18 साल की उम्र तक स्तन के आकार में बदलाव हो सकते हैं, पर इस चरण तक में किसी भी व्यस्क लड़की की तरह स्तन आकार ले लेते हैं।

  • पीरियड्स नियमित हो जाते हैं।

  • हाईट का बढ़ना पीरियड के आने के 2-3 साल बाद थम जाता है।

  • कमर, बट्स (butts), और थाईज़ (thighs) पूरी तरह शेप (shape) में आ जाते हैं।

  • प्रजनन क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है।

प्यूबर्टी कितने तरह की हो सकती है

Types of puberty in hindi

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8 साल की उम्र से लेकर 17 साल तक लड़कियों में प्यूबर्टी आ सकती है। यानि शरीर में पैदा होने वाले हॉर्मोन कभी वक्त से पहले तो कई बार काफी देर से शुरू हो सकते हैं ।

इन सबके के लिये अलग मेडिकल टर्म्स तय हैं।

  1. अर्ली प्यूबर्टी (Early Puberty)

    शरीर में होने वाले बदलाव अगर 10 साल से पहले यानि 8 साल की उम्र के आसपास होने लगें, तो उसे अर्ली प्यूबर्टी कहा जाता है।

    वक्त से पहले लड़की का शरीर विकसित होने लगता है और उसके विकसित होने की प्रक्रिया भी अलग तरीके से चलने लगती है।

  2. सामान्य प्यूबर्टी (Normal Puberty)

    सामान्य तौर पर लड़कियों में यौवन का वक्त 10-13 साल का होता है। यह बदलावों के लिये सबसे सही वक्त माना जाता है।

    होर्मोनल बदलावों के लिये शरीर पूरी तरह से तैयार होता है, और लड़कियां भी मानसिक तौर पर इतनी मैच्योर (mature) हो जाती हैं, कि इन बदलावों को समझ कर स्वीकार कर सकें।

  3. डिले प्यूबर्टी (Delayed Puberty)

    13 साल की उम्र के बाद भी अगर लड़कियों का पीरियड (periods) नहीं आया। स्तनों में अपेक्षाकृत (expected) बढ़त नहीं हुई, तो ये यौवन देर से आने के लक्षण है।

    पर इससे घबराने की ज़रूरत नहीं क्यूंकि 17 साल की उम्र तक यौवन का इंतज़ार किया जा सकता है।

    एक बार बदलाव शुरू हुए तो फिर सामान्य तरीके से ही शरीर की क्रिया चलती रहती है।

    फिर भी अगर यौवन को लेकर कोई सवाल मन में हो तो डॉक्टर से संपर्क कर पूरी जानकारी ली जा सकती है। हार्मोन से जुड़े टेस्ट (test) से पता किया जा सकता है कि यौवन आने में देरी के कारण क्या हैं।

प्यूबर्टी की समस्याएं

Problems related to puberty in hindi

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वैसे तो हर मानव शरीर के लिये यौवन का आना प्राकृतिक है, और ज़रूरी भी।

पर इसके साथ ही कुछ समस्याएं भी हर लड़की को परेशान करती हैं:

  1. मुंहासे

    शरीर मे हॉर्मोन्स (hormones) के बदलाव, त्वचा पर आयल की मात्रा को भड़ा देते हैं, जो त्वचा पर पोर्स (pores) को ब्लॉक (block) कर, मुंहासे की समस्या बना सकते है।

    ये चेहरे, पीठ और ब्रेस्ट (breast) पर भी निकल सकते हैं। इनको ठीक करने के लिये घरेलू नुस्खे और दवाईयां दोनों काम करती है।

  2. शरीर से गंध

    यौवन के साथ ही पसीने का स्त्राव करने वाले ग्लैंड्स (glands) भी विकसित हो जाते हैं। ज्यादा पसीना आने से बदबू की शिकायत बढ़ती है।

    हर दिन स्नान, सही डियोड्रेन्ट (deodorant) का चुनाव इस समस्या का हल हैं।

यौवन के दौरान परिवर्तन के लिए समर्थन

Provide support for changes during puberty in hindi

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बच्चों और माता-पिता के लिये प्यूबर्टी का वक्त थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है। शारीरिक बदलाव तो होते ही हैं पर हॉर्मोन के बदलाव के कारण इमोशन्ल (emotional) बदलाव भी होते हैं।

लड़कियों में तो खासकर हॉर्मोनल बदलाव लड़कों से ज्यादा होते हैं तो उनका मिजाज़ बदलना स्वभाविक है। थोड़ी समझदारी से वक्त के साथ यौवन और आपसी तालमेल बिठाया जा सकता है।

  • लड़कियों को अपने मुंहासों और दूसरे बदलावों की चिंता ज्यादा परेशान करती हैं। उन्हें प्यार से इन बदलावों को स्वीकार करना सिखाए, क्योंकि हर लड़की अपने जीवन में इस दौर से गुजरती है।

  • उनसे खुल कर बात कीजिये, और अगर किसी समस्या के लिये डॉक्टर की सलाह लेनी हो, तो उसमें भी हिचक को हावी ना होने दें।

लड़कियों में हो रहे हॉर्मोनल बदलाव और शारीरिक संरचना में फेरबदल उनके लिये नया अनुभव है जिससे वे कई बार डर जाती हैं।

उनका वक्त पर सही मार्गदर्शन और जानकारी देना उनके मुश्किल वक्त को आसान कर सकता है।

सारांश

Summary in hindi

saransh in hindi

यौवनारंभ मानव के लिये बेहद महत्वपूर्ण है।

लड़कियों में हो रहे हॉर्मोनल बदलाव और शारीरिक संरचना में फेरबदल उनके लिये नया अनुभव है जिससे वे कई बार डर जाती हैं। उनका वक्त पर सही मार्गदर्शन और जानकारी देना उनके मुश्किल वक्त को आसान कर सकता है।

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