Labor or delivery ke liye khud ko kaise taiyar kare in hindi

लेबर और प्रसव के लिए खुद को कैसे तैयार करें?

How to prepare yourself for labor and delivery in hindi

Labor or delivery ke liye khud ko kaise taiyar kare in hindi

गर्भावस्था के शुरुआती सफर में बच्चे के आने की ख़ुशी में माता-पिता के साथ-साथ पूरा परिवार भी बेहद खुश रहता है। हालांकि, एक माँ की ख़ुशी की तुलना किसे और से नहीं की जा सकती।

पहली से लेकर तीसरी तिमाही तक गर्भवती महिला अपने खान-पान और जीवनशैली का ध्यान रखती है ताकि वह बिना किसी समस्या के स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे सके। लेकिन, तीसरी तिमाही के अंत तक आते-आते प्रेग्नेंट महिला के मन में लेबर और डिलीवरी को लेकर एक डर समा जाता है। इस समय गर्भवती महिला प्रसव के दौरान दर्द के बारे में सोचकर भी परेशान रहती है।

हालांकि, लेबर एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके लिए आपको मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को तैयार करना चाहिए। इस प्रयास में आपकी मदद करने के लिए, हम बच्चे के जन्म की तैयारी के संदर्भ में, इस लेख के माध्यम कुछ उपाय बताएँगे, जिसे अपनाकर आप अपने प्रसव को आरामदायक बना सकती हैं और शिशु के जन्म के बाद के लिए भी खुद को तैयार कर सकती हैं।

प्रसव और लेबर के लिए अपने शरीर को तैयार करने के लिए क्या करें?

How to prepare your body for delivery and labor in hindi

Prasav or labor ke liye apne sharir ki taiyari kya kare in hindi

loading image

हर महिला का शरीर भिन्न होता है, जिसके कारण दो महिलाओं की गर्भावस्था के लक्षण और उनकी डिलीवरी एक जैसी नहीं हो सकती।

ऐसे में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही के दौरान गर्भवती महिला को लेबर पेन और डिलीवरी के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहिए और इसे आसान बनाने के तरीक़ों को समझना चाहिए।

निम्नलिखित चार चरणों के माध्यम से गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में आप अपने शरीर को लेबर और डिलीवरी के लिए तैयार कर सकती हैं।

1. लेबर के चरणों को समझें (Understand the stages of labor)

भले ही हर एक चरण की अवधि हर एक गर्भवती महिला के लिए अलग होगी, लेकिन आप अपने लेबर के दौरान सभी चरणों का अनुभव करेंगी।

आइए जानते हैं कि इन चरणों के दौरान आप किस तरह के साइंस ऑफ़ लेबर पेन दिखेंगे।

लेबर पेन के तीन चरण निम्न हैं :

  • लेबर पेन का पहला चरण (First stage of labour pain)

लेबर के पहले चरण में अर्ली लेबर (early labor) और एक्टिव लेबर (active labor) शामिल है।

पहले चरण के दौरान, आपके गर्भाशय की मांसपेशियां कसने या सिकुड़ने लगती हैं और फिर सामान्य हो जाती हैं।

यह गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को फैलने और खोलने में मदद करती हैं ताकि आपका बच्चा बर्थ कैनाल से बाहर निकल सके।

आपको शुरुआती संकुचन के साथ लेबर पेन शुरू होगा, जो अनियमित (irregular) होता है और एक मिनट से कम समय तक रहता है।

ये शुरुआती चरण कुछ घंटों से लेकर दिनों तक रह सकता है।

फिर आप सक्रिय संकुचन (active contractions) का अनुभव करेंगी, जो नियमित और लगभग एक मिनट तक रहेगा।

एक बार जब आप सक्रिय संकुचन का अनुभव करती हैं, तो आपको डिलीवरी अस्पताल या बर्थिंग सेंटर में जाना होगा।

आप अंततः लेबर के दूसरे चरण में इंटर करेंगी, जब आपका सर्विक्स पूरी तरह से खुल जाएगा और आप नार्मल प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार हो चुकी होंगी।

  • लेबर पेन का दूसरा चरण (Second stage of labour pain)

दूसरा चरण, बच्चे के जन्म तक का होता है।

दूसरे चरण के दौरान, आपका गर्भाशय ग्रीवा पूरी तरह से खुल जाता है और आपका बच्चा बर्थ कैनाल से नीचे और फिर बाहर आ जाता है।

इसके बाद आपके बच्चे का जन्म हो जाता है।

  • लेबर पेन का तीसरा चरण (Third Stage of labour pain)

आपके शिशु के जन्म के बाद प्रसव का तीसरा चरण आता है।

जब तक प्लेसेंटा (placenta) आपके बर्थ कैनाल से बाहर नहीं निकलता है, तब तक आपको संकुचन (contractions) का अनुभव होगा।

2. दैनिक व्यायाम के साथ केगेल एक्सरसाइज़ करें (Do kegel exercises in addition to daily exercise)

आपको अपनी पूरी गर्भावस्था के दौरान हल्के व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखना चाहिए और पेल्विक मांशपेशियों (pelvic muscles) और लिगामेंट्स (ligaments) को मज़बूत करने के लिए केगल एक्सरसाइज़ करना चाहिए।

ऐसा करने से आपके शरीर को लेबर और डिलीवरी के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी।

केगल व्यायाम करने का तरीका निम्न है :

  • केगेल एक्सरसाइज़ करने के लिए, अपने पेल्विक एरिया (pelvic area) में समान मांसपेशियों को दबाएँ, जो आप अपने यूरिन को रोकने के लिए उपयोग करती हैं। अपने पेट या अपनी जांघों को मूव न करें, बस अपनी पैल्विक मांसपेशियों पर ध्यान दें।
  • तीन सेकंड के लिए दबाकर रखें, फिर तीन सेकंड के लिए छोड़ दें।
  • शुरुआत में तीन सेकंड के लिए दबाएँ और छोड़े। इसके बाद धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाए जब तक कि आप 10 सेकंड तक दबाने में सक्षम न हों।
  • केगेल एक्सरसाइज़ को प्रति सेशन 10 से 15 बार दोहराए। एक दिन में तीन या अधिक सेशन करें।

3. अपने पार्टनर के साथ बर्थिंग और पेरेंटिंग क्लास लें (Take birthing, breastfeeding and parenting classes with your partner)

  • बर्थिंग क्लास (Birthing Classes)

डिलीवरी अस्पताल और बर्थिंग केंद्रों के माध्यम से अक्सर बर्थिंग क्लासेज़ की पेशकश की जाती है। कुछ कक्षाएं एक विशिष्ट विधि का पालन करती हैं, जैसे कि लैमेज़ (Lamaze) या ब्रैडली पद्धति (Bradley method)। अन्य विभिन्न तरीकों से लेबर तकनीकों की समीक्षा करते हैं। अपनी ड्यू डेट से कई महीने पहले कक्षा के लिए ज्वाइन करने का प्रयास करें। कक्षाएं कभी-कभी जल्दी भर जाती हैं। यह भी सुनिश्चित करें कि इंस्ट्रक्टर क्वालिफाइड हो।

ज्यादातर महिलाएं उस व्यक्ति के साथ कक्षा में भाग लेती हैं, जो प्रसव के दौरान उसके साथ रहने वाला होता है, जैसे कि पति, बहन या कोई रिश्तेदार।
इस व्यक्ति को कभी-कभी लेबर कोच भी कहा जाता है। कक्षा के दौरान इंस्ट्रक्टर आपको साइंस ऑफ़ लेबर पेन से अवगत कराएँगे और साथ ही लेबर के स्टेज की भी जानकारी देंगे। वह लेबर और डिलीवरी के लिए स्थिति और लेबर पेन को कंट्रोल करने के तरीकों और रणनीतियों के बारे में बताएगी।अगर आप बच्चे की जन्म की तैयारी अच्छे से करना चाहते हैं तो आप दोनों को बर्थिंग और पेरेंटिंग कक्षाओं में भाग लेना चाहिए।

  • स्तनपान कक्षाएं (Breastfeeding classes)

किसी भी नए चीज़ को सीखने की ही तरह, ब्रेस्टफीडिंग को सफल बनाने के लिए जानकारी और प्रैक्टिस की आवश्यकता होती है। प्रेगनेंसी के दौरान जो गर्भवती महिलाएं, स्तनपान करना सीखती हैं, उन लोगों की तुलना में सफल होने की अधिक संभावना होती है, जो ब्रेस्टफीडिंग क्लास का हिस्सा नहीं बनती हैं। ब्रेस्टफीडिंग क्लासेज़, गर्भवती महिलाओं को शिशु के जन्म से पहले तैयार करने और सवाल पूछने का मौका देती हैं। डिलीवरी अस्पताल, स्तनपान सहायता कार्यक्रमों, या स्थानीय लैक्टेशन कंसल्टैंट के माध्यम से कक्षाएं पेश की जा सकती हैं। अपने क्षेत्र में एक ब्रेस्टफीडिंग क्लासेज़ खोजने के लिए अपने डॉक्टर से मदद लें।

  • पेरेंटिंग क्लासेज़ (Parenting Classes)

जो महिला और पुरुष पहली बार माता-पिता बनने वाले होते हैं उन्हें इस बात को लेकर डर बना रहता है कि शिशु के जन्म के बाद वो उसकी देखभाल कैसे करेंगे। ऐसे में पेरेंटिंग क्लास ज्वाइन करना आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। कई डिलीवरी अस्पताल, कम्युनिटी एजुकेशन सेंटर बेबी केयर क्लासेज़ की ऑफर करते हैं। ये कक्षाएं आपके नवजात शिशु के डायपर को बदलने, खिलाने और स्नान करने जैसी बुनियादी बातों के बारे में बताती हैं।

4. अपने डॉक्टर से प्रसव के दौरान डाइट के बारे में पूछें (Ask your doctor about diet during labor)

लेबर के दौरान डाइट टिप्स निम्न हैं :

  • अधिकांश डॉक्टर आपको लेबर के दौरान तरल पदार्थ और हल्के स्नैक्स खाने की सलाह देंगे, जैसे कि टोस्ट, सेब या बिस्कुट ताकि प्रसव के दौरान आप अपनी ताकत बनाए रखें।
  • इस दौरान आपको ज्यादा या भारी खाना खाने से बचना चाहिए।
  • आपको केवल ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो आपके पेट के लिए कोई परेशानी पैदा न करें, क्योंकि आपको लेबर के कारण पहले से ही पेट में दर्द महसूस हो रहा होगा।
  • लेबर के दौरान आपको तरल पदार्थ जैसे चिकन सूप, फ्रूट जूस, चाय का सेवन करना चाहिए।
  • इसके अलावा आप स्नैक्स जैसे बिस्कुट, फल व फिर नट्स का खा सकती हैं।
  • कुछ डॉक्टर केवल तरल पदार्थों के सेवन की सिफारिश कर सकते हैं, खासकर यदि उन्हें लगता है कि आपको सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता होने की संभावना अधिक है।

जन्म योजना कैसे बनाएँ?

How to make a birth plan in hindi

Janam yojna kaise banaye in hindi

loading image

जिस दिन आपके बच्चे का जन्म होता है, वो आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। ऐसे में समय से पहले जन्म योजना बनाना आपको इस निर्णय लेने में मदद करता है कि आप अपने लेबर और डिलीवरी को कैसे चाहती हैं। जन्म योजना आपके लेबर और डिलीवरी के दौरान आपकी प्राथमिकताओं की रूपरेखा होती है जिसमें आप कुछ भी शामिल कर सकती हैं, आपके लेबर और डिलीवरी आपके लिए और अधिक आरामदायक बनाए।

हालांकि, ध्यान रखें कि एक जन्म योजना पूर्ण रूप से निर्धारित नहीं होती है क्योंकि आप प्रसव के दिन होने वाली हर चीज़ की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। लेबर पेन शुरू होते ही आपको या आपके डॉक्टरों को योजना में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए कुछ अनपेक्षित होने पर फ्लेक्सिबल रहने की कोशिश करें। आइये, जानते हैं कि जन्म योजना बनाते वक़्त आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1.अपने साथी और अपने चिकित्सक की सहायता से जन्म योजना बनाए (Write down your birth plan with the assistance of your partner and your doctor)

किसी भी डिलीवरी की भविष्यवाणी करना कभी भी संभव नहीं है। एक लिखित या टाइप जन्म योजना होने से आपको ये रेखांकित करने में मदद मिल सकती है कि आप अपने लेबर और डिलीवरी के दौरान क्या करना चाहती हैं। आपको अपने जन्म की योजना की एक कॉपी अपने साथी, अपने डॉक्टर और अस्पताल के किसी भी कर्मचारी को भी देनी चाहिए। कई डिलीवरी अस्पताल एक मानक जन्म योजना (standard birth plan) प्रदान करेंगे जिसे आप भर सकते हैं और जमा कर सकते हैं ताकि वे आपकी इच्छाओं से अवगत हो सके।

2. अपने डॉक्टर के साथ अपने जन्म के विकल्पों पर चर्चा करें (Discuss your birthing options with your doctor)

अधिकांश गर्भवती महिलाएँ डिलीवरी अस्पताल में बच्चे का जन्म होना सबसे उचित मानती हैं। आप ये तय कर सकती हैं कि आप बच्चे का जन्म कहां चाहती हैं एक घर में या फिर डिलीवरी अस्पताल में। अगर आप डिलीवरी अस्पताल में बच्चे का जन्म चाहती हैं तो आपको ऐसे अस्पताल का चुनाव करना चाहिए जो आपके घर से करीब हो और जहां के डॉक्टर और स्टाफ पर आप पूरी तरह भरोसा कर सके और उनके साथ सहज महसूस भी कर सके।

कई अस्पताल डिलीवरी के पहले गर्भवती महिला को डिलीवरी अस्पताल का दौरा करने का मौका देते हैं, जिसमें उस फ्लोर से भी आपको परिचित कराया जाता है जहाँ आप संभवत बच्चे को जन्म देंगी। इस तरह से आप डिलीवरी के पहले अस्पताल के माहौल को भी समझ सकती हैं।अगर आपकी प्रेगनेंसी में कोई समस्या नहीं है और आप और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, तो आप घर पर जन्म देने में सक्षम हो सकती हैं। हालांकि, अगर आपकी गर्भावस्था के दौरान जोखिम या जटिलताएं हैं, तो घर में जन्म सुरक्षित विकल्प नहीं हो सकता है।

यह तय करना बहुत कठिन हो सकता है कि आप अपने बच्चे को कहाँ जन्म देना चाहती हैं, इसलिए निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर और अपने साथी से अपने विकल्पों पर चर्चा ज़रूर करें। आपके डॉक्टर आपको एक डिलीवरी अस्पताल में बच्चे को जन्म देने की सलाह दे सकते हैं अगर आप जुड़वाँ बच्चों की उम्मीद कर रही हैं, अगर आपका बच्चा ब्रीच पोज़िशन में है या अगर आपका पहले नार्मल प्रसव न होकर सीजेरियन हुआ हो।

3. अपने दर्द प्रबंधन विकल्पों पर चर्चा करें (Discuss your pain management options)

लेबर पेन एक तीव्र और दर्दनाक प्रक्रिया है। आपके डॉक्टर को आपके पेन मैनेजमेंट के विकल्पों की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए और आपको उनसे इस बारे में बात करनी चाहिए।

आप इनमें से एक या कई विकल्प चुन सकती हैं:

  • एपिड्यूरल (Epidural)

इस एनास्थेटिक को सीधे आपकी रीढ़ में इंजेक्ट किया जाता है। यह आपके बच्चे को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुँचता है और सुनिश्चित करता है कि आपको त्वरित दर्द से राहत मिले। यह प्रसव में कई महिलाओं के लिए एक लोकप्रिय दर्द निवारक विकल्प है। यद्यपि इसका असर होने में 15 मिनट या उससे अधिक समय लग सकता है, लेकिन जैसे ही आप इसके लिए अनुरोध करते हैं, वैसे ही एपिड्यूरल आपको दिया जा सकता है। एनीस्थिसिया आपके पूरे निचले शरीर को सुन्न (numb) कर देगा, जिसमें आपके गर्भाशय की नसें (nerves of your uterus) भी शामिल होंगी, जिससे आपके संकुचन (contractions) के दर्द को सुन्न किया जा सकेगा।

  • पुडेंडल ब्लॉक (Pudendal block)

इसका इस्तेमाल शुरुआती चरण के प्रसव पीड़ा को राहत देने के लिए किया जाता है। ये आमतौर पर तब दिया जाता है, जब आप नार्मल प्रसव के शुरुआती चरण में होती हैं। आपके डॉक्टर इस दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं अगर उन्हें फोरसेप्स (foreceps) या वैक्यूम एक्सट्रैक्शन (vaccuum extraction) का उपयोग करने की आवश्यकता है। ये आपके पेरिनेल या योनि क्षेत्र में दर्द को कम करेगा लेकिन आप अभी भी आपको संकुचन का अनुभव होगा।

  • स्पाइनल ब्लॉक या सैडल ब्लॉक (Spinal block or saddle block)

ये दर्द निवारक नार्मल प्रसव के लिए बहुत कम उपयोग किए जाते हैं। अगर आप प्रसव के दौरान एपिड्यूरल नहीं चाहते हैं लेकिन आप प्रसव के दौरान दर्द से राहत भी चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में, प्रसव से ठीक पहले इसका एक सिंगल डोज़ दिया जाता है। इससे आपको दर्द से जल्दी राहत मिल जाती है और इसके बाद आपका शरीर सुन्न हो जाता है।

  • डेमेरोल (Demerol)

यह दर्द निवारक दवा, इंजेक्शन या IV में एक गोली के माध्यम से दी जा सकती है। डेमरोल, आपको जन्म देने से दो से तीन घंटे पहले दिया जा सकता है और फिर हर दो से चार घंटे में भी इसकी खुराक दी जा सकती है। दवा का आपके संकुचन पर असर नहीं होगा बल्कि कुछ महिलाओं को उनके संकुचन को अधिक सामान्य बनाने के लिए डेमेरोल दिया जाता है।

  • नूबैन (Nubain)

यह एक और दर्द निवारक दवा है जो IV के माध्यम से दी जाती है। यह एक सिंथेटिक ओपिओइड (synthetic opioid) है, जो शरीर को सुन्न नहीं करता है लेकिन दर्द और घबराहट को कम कर सकता है।

  • नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide)

कुछ डॉक्टर नाइट्रस ऑक्साइड का उपयोग कर सकते हैं (जैसे वे डेंटल क्लिनीक में उपयोग करते हैं)।

  • जेनेरल और रीजनल एनेस्थिसिया (General and regional anesthesia)

जेनेरल एनेस्थिसिया का उपयोग नॉर्मल डिलीवरी के लिए बेहद कम किया जाता है। इसे केवल आपातकालीन सर्जिकल ऑपरेशन के लिए उपयोग किया जाता है। आप इसे इनहेल (inhale) कर सकते हैं या फिर इंजेक्शन के माध्यम से ले सकते हैं, जिसके बाद आप बेहोश हो जाएंगी और डॉक्टर आपातकाल में डिलीवरी ऑपरेशन (emergency Cesarean) करेंगे।

  • प्राकृतिक जन्म (Natural birth - drug free)

अगर आप अपने प्रसव के दौरान दर्द की दवा का उपयोग करने के बारे में चिंतित हैं, तो आप दवा मुक्त प्राकृतिक जन्म के लिए जाने का फैसला कर सकती हैं। अपने प्रसव के दौरान बिना दवा के जाने, या नार्मल प्रसव के तकनीकों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

4. जन्म देने के लिए वातावरण को अपने तरीके से निर्धारित करें (Determine if you are going to personalize the birthing environment)

अगर आप एक डिलीवरी अस्पताल में बच्चे के जन्म की तैयारी करने जा रही हैं, तो आपको अपने अस्पताल के कमरे में बर्थिंग वातावरण के लिए अनुरोध करना चाहिए। इसमें रोशनी को कम करना, संगीत बजाना या जन्म देते ही अपने कपड़े पहनना शामिल हो सकता है। आपके डॉक्टर को डिलीवरी से पहले बर्थिंग क्षेत्र के लिए किसी विशेष अनुरोध के बारे में पता होना चाहिए।

अगर आप बच्चे को घर पर जन्म देने जा रही हैं, तो आपको अपने साथी और मिडवाइफ से बर्थिंग माहौल पर चर्चा करनी चाहिए। आप अपने बाथटब में या घर के जन्म के लिए बने एक विशेष पूल में जन्म देने का फैसला कर सकते हैं। आप जन्म के दौरान संगीत बजाना, हल्के लाइट और माहौल को शांत बनाने का निर्णय ले सकते हैं।

5. अपने डॉक्टर से सिजेरियन डिलीवरी की स्थितियों के बारे में पूछें (Ask your doctor about cesarean delivery situations)

ये महत्वपूर्ण है कि आप अपनी जन्म योजना में सी-सेक्शन की संभावना के लिए भी तैयारी करें। आपकी गर्भावस्था के आधार पर, आपके डॉक्टर चिकित्सा कारणों के लिए सी-सेक्शन की सिफारिश कर सकते हैं या आपके डॉक्टर को आपके लेबर के दौरान आपातकालीन स्थिति में सी-सेक्शन करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

आपके डॉक्टर निम्न स्थितियों में सी-सेक्शन की सिफारिश कर सकते हैं :

  • आपको हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किडनी की बीमारी जैसी कुछ पुरानी चिकित्सा स्थितियां हैं।
  • आपको एचआईवी (HIV) या सक्रिय जननांग दाद (active genital herpes) जैसे संक्रमण है।
  • बीमारी या जन्म जात स्थिति के कारण आपके बच्चे का स्वास्थ्य खतरे में है।
  • अगर आपका बच्चा बर्थ कैनाल या नार्मल प्रसव के माध्यम से निकलने लिए बहुत बड़ा है, तो आपके डॉक्टर सी-सेक्शन की सलाह दे सकते हैं।
  • अगर आपका वज़न अधिक है, मोटे होने के कारण अन्य जोखिम कारक हो सकते हैं और सी-सेक्शन की आवश्यकता हो सकती है।
  • आपका बच्चा ब्रीच स्थिति में है, जहां उसके पैर नीचे की ओर हैं और सिर ऊपर की ओर, तो ऐसे में नार्मल प्रसव संभव नहीं होता है और सी-सेक्शन की आवश्यकता होती है।
  • आपके पिछले गर्भधारण के दौरान आपका सी-सेक्शन हुआ है।

6. शिशु के जन्म के बाद के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने का निर्णय लें (Decide to breastfeed immediately after delivery)

दुनिया में आपके बच्चे के आने के पहले घंटे के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क आपके बच्चे के स्वास्थ्य और आपके और आपके बच्चे के बंधन के लिए महत्वपूर्ण है। इसे गोल्डन ऑवर (golden hour) कहा जाता है और अक्सर यह सिफारिश की जाती है कि प्रसव के बाद जितनी जल्दी हो सके आप अपने बच्चे के साथ त्वचा से त्वचा का संपर्क करें। अगर आप अपने बच्चे के जन्म के बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने जा रही हैं तो अस्पताल को आपकी इच्छाओं के बारे में पता होना चाहिए।

ध्यान रखें, चाइल्ड डॉक्टर की ओर से सिफारिश की जाती है कि माँ को अपने नवजात शिशुओं को पहले छह महीनों तक स्तनपान ज़रूर कराना चाहिए। माँ बच्चे को कम से कम 12 महीने तक ब्रेस्टफीडिंग करा सकती हैं। स्तनपान आपके बच्चे को संक्रमणों से बचा सकता है और मधुमेह, मोटापा और अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम कर सकता है।

अस्पताल के लिए क्या पैक करें

What to pack for hospital in hindi

Hospital jane ke liye kya-kya pack kare in hindi

loading image

एक गर्भवती महिला को ड्यू डेट से 2-3 सप्ताह पहले अस्पताल जाने की तैयारी या पैकिंग शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि ड्यू डेट आते-आते आपको कभी भी साइंस ऑफ़ लेबर पेन दिखने लगेंगे और ऐसे में आपके लिए कुछ करना मुश्किल हो जायेगा। इसलिए बेहतर होगा कि आप कुछ हफ्ते पहले से शिशु के जन्म की तैयारी शुरू कर दें और डिलीवरी अस्पताल जाने के लिए अपने हॉस्पिटल बैग तैयार कर लें।

माँ के लिए (For Mom)

  • आपका मेडिकेयर कार्ड
  • आपकी जन्म योजना
  • पैन कार्ड या कोई भी प्रमाण पात्र
  • कपड़े - प्रसव के लिए एक नाइटगाउन या लंबी टी-शर्ट, सोने के लिए पजामा, पांच या छह जोड़े जांघिया, दो नर्सिंग ब्रा, कई जोड़े मोज़े, चप्पल, एक बाथरोब और एक जोड़ी कपड़े घर जाने के दौरान पहनने के लिए।
  • आरामदायक जांघिया के कुछ जोड़े (कुछ महिलाएं डिस्पोज़ेबल ब्रीफ्स का उपयोग करती हैं)
  • शैम्पू, कंडीशनर, एक हेयर ड्रायर, साबुन, शॉवर शूज़, एक हेयरब्रश, एक कंघी, लिप बाम, फेशियल क्लींजर, बॉडी लोशन, एक टूथब्रश, टूथपेस्ट और मैटरनिटी पैड
  • स्तनपान कराने के लिए सामने की ओर खुलने वाली या ढीली-ढाली नाइटी या टॉप
  • जन्म के बाद पहनने और घर में आने के लिए ढीले और आरामदायक कपड़े

नवजात बच्चे के लिए (For new born baby)

  • डायपर, बेबी वाइप्स और कॉटन
  • बेबी के 4 -5 जोड़े कपड़े रखें (न्यूबोर्न क्लोथ्स)
  • 2-3 कैप और बेबी के घर आने के लिए भी एक अच्छा क्लोदिंग
  • बेबी के लिए ब्लैंकेट
  • बेबी के लिए मौसम के अनुसार गर्म कपड़े और मोज़े

बच्चे को घर लाने के बाद क्या-क्या आवश्यकता होगी?

What will be required after bringing the child home in hindi

Aapko bachhe ke liye kya awashyakta hogi in hindi

loading image

डिलीवरी के बाद अपने बच्चे को घर लाना एक रोमांचक पल होता है। इसके लिए बच्चे के लिए कपड़े, बिस्तर और बेबी सीटर से लेकर कई चीज़ों को तैयार रखना चाहिए।

आइए जानते हैं कि आपको बच्चे के लिए क्या-क्या करने की आवश्यकता होगी:

1.बच्चों के कपडें (Baby’s clothes)

बच्चे बहुत जल्दी बढ़ते हैं। आपको यह सुनिश्चित करने के लिए पहले कुछ हफ्तों के लिए पर्याप्त कपड़े चाहिए ताकि आपका बच्चा गर्म और साफ रहे।
बच्चे के कपड़े आरामदायक होने चाहिए है, जिसमें 5-6 जम्पसूट, सोने के लिए कपड़े होने चाहिए। अगर ठंड का मौसम है तो गर्म कपड़े, 5-6 स्वेटर और जैकेट्स होने चाहिए। इसके अलावा मुलायम ब्लैंकेट भी आपको खरीदने चाहिए।

गर्म मौसम के लिए कॉटन रैप की आवश्यकता होगी और गर्मी के मौसम में बाहर निकलने के लिए कैप या हैट भी होने चाहिए। इसके अलावा 5-6 टी-शर्ट और 6-7 पैंट और कई जोड़े मोज़े होने चाहिए।

2. अपने बच्चे के कपड़े धोना (Washing your baby’s clothes)

अगर आप वॉशिंग मशीन का उपयोग करते हैं, तो एंजाइम (बायो पाउडर) या फैब्रिक कंडीशनर के साथ वॉशिंग पाउडर का उपयोग न करें, क्योंकि इससे आपके बच्चे को स्किन इर्रिटेशन हो सकती है। बच्चे के कपड़ों को हमेशा अच्छी तरह से डेटॉल में ज़रूर साफ़ करें।

3. बिस्तर (Bedding)

पहले कुछ महीनों के लिए, आपको एक पालना, एक कैरी कोट (carry cot) की आवश्यकता होगी। शिशु ऐसी जगह सुलाना चाहिए जो गर्म और सुरक्षित हो। इस बात का भी ध्यान रखें कि शिशु के सोने की जगह आपसे बहुत दूर नहीं हो।

अगर आपको किसी रिश्तेदार ने अपने बच्चे का पालना दे दिया है तो यह बच्चे के लिए अच्छा है। हालांकि, इसका इस्तेमाल करने से पहले आपको पालने के लिए नया गद्दे खरीदने चाहिए।

4. बेबी कैरियर (Baby carrier)

बेबी कैरियर, एक सॉफ्ट पैडेड कैरियर होते हैं जो पट्टियों से जुड़े होते हैं और आपको अपने बच्चे को आपके सामने कैरी करने में सपोर्ट करते हैं।अधिकांश माता-पिता जब बाहर जाते हैं तो अपने बच्चे को इस तरह से लेना ही पसंद करते हैं क्योंकि इससे बच्चा आपके करीब रहता है और वो गर्म भी महसूस करता है।

5. स्ट्रॉलर (Stroller)

जब आपका बच्चा अच्छे से बैठना शुरू कर देता है तब आपको स्ट्रोलर की आवश्यकता होती है लगता है। स्ट्रोलर की मदद से आप बच्चे को पार्क में घुमाने ले जा सकते हैं या फिर ट्रेन या बस से ट्रैवल करते समय आप इसका उपयोग कर सकते हैं।

6. प्रैम्स (Prams)

प्रैम्स में आपका बच्चा आराम से बैठ और सो सकता है लेकिन ये खुद बहुत अधिक जगह लेता है और ट्रेन या बस में इसका उपयोग करना कठिन होता है। अगर आपके पास एक कार है, तो एक ऐसे प्रैम की तलाश करें जिसे आसानी से फोल्ड किया जा सके।

7. कैरीकोट (Carrycot on wheels)

एक कैरीकोट एक हल्का, पोर्टेबल कोट होता है, जिसमें हैंडल लगे होते हैं, लेकिन ये प्रैम से छोटा होता है और इसमें व्हील्स लगे होते हैं। आपका बच्चा पहले कुछ महीनों तक कैरीकोट में सो सकता है।

8. कार सीट (Car seat)

अगर आपके पास गाड़ी है तो उसमें कार सीट होनी चाहिए क्योंकि इसमें आपका बच्चा ज़्यादा सेफ रहता है।

बच्चे के लिए डॉक्टर चुनते वक़्त क्या रखें ध्यान?

What to keep in mind while choosing a doctor for baby in hindi

Bachhe ki liye ek doctor chunte waqt kya dhyan rakhna chahiye in hindi

loading image

अपने नवजात शिशु की देखभाल के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ को चुनना एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है, जिसे आपको बच्चे के जन्म के पहले चयन कर लेना चाहिए। बच्चे के जन्म के लगभग एक साल तक आपको पेडियाट्रिशन से कम से कम छह बार डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होगी। ऐसे में बच्चे के जन्म से पूर्व आपको एक अच्छे शिशु रोग विशेषज्ञ का चयन कर लेना चाहिए।

निम्नलिखित पांच बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ को चुनें :

  • डॉक्टर की योग्यता देखें (See doctor's qualification)

एक बाल रोग विशेषज्ञ शिशुओं, बच्चों और किशोरों की देखभाल में माहिर होते हैं और मेडिकल स्कूल से स्नातक होने के बाद बाल रोग में प्रशिक्षण पूरा कर चुके होते हैं। अपना रेजीडेंसी प्रोग्राम पूरा करने के बाद, कई बाल रोग विशेषज्ञ बोर्ड द्वारा प्रमाणित होते हैं।

  • अनुभव (Experience)

योग्यता के अलावा शिशु रोग विशेषज्ञ के अनुभव के बारे में जाने और साथ ही ये भी देखे कि वे कितने सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। एक बाल रोग विशेषज्ञ जितने अनुभवी होंगे वो आपके बच्चे के लिए उतना ही अच्छा होगा।

  • भरोसेमंद (Trustworthy)

माता-पिता और बाल रोग विशेषज्ञ के बीच बंधन महत्वपूर्ण है। एक डॉक्टर अच्छी तरह से योग्य हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर माता-पिता को चिकित्सक पर भरोसा नहीं है, तो यह बच्चे के लिए नकारात्मक हो सकता है।

  • आपके घर से डॉक्टर के क्लिनिक की दूरी (Distance between clinic and home)

ये भी एक महत्वपूर्ण पहलू होता है जिस पर आपको एक बाल रोग विशेषज्ञ का चयन करते समय विचार करना चाहिए। डॉक्टर का क्लिनिक आपके घर से जितना करीब रहेगा वो आपके और आपके बच्चे के लिए फायदेमंद होगा। जहां एक ओर आपको क्लिनिक पहुंचने में कम समय लगेगा तो वही आपके बच्ची को अचानक कोई समस्या होती है तो उसके उपचार में विलंब भी नहीं होगा।


अपने घर को बच्चे के लिए कैसे सुरक्षित बनाएँ

How to make your home safe for children in hindi

Apne ghar ko bachhe ke liye kaise surakshit banaye in hindi

loading image

बच्चे का जन्म माता-पिता के लिए सबसे अनोखा और यादगार पल होता है। लेकिन शिशु के जन्म के पहले आपको बहुत कुछ सोचने की भी आवश्यकता होती है ताकि जन्म के बाद किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए आपको अपने घर को भी बच्चे के अनुरूप बनाना होता है या यूं कहे कि बच्चे के लिए घर को सुरक्षित बनाने की ज़रूरत होती है। ऐसे में कुछ सेफ्टी टिप्स अपनाकर आप अपने घर को बच्चे के लिए सुरक्षित बना सकते हैं।

बच्चे के जन्म के बाद घर को सुरक्षित बनाने के लिए सेफ्टी टिप्स :

  • अपने बच्चे के पालना और अन्य शिशु वस्तुओं की जाँच अच्छी तरह करें और ध्यान दें कि इससे बच्चे को कोई परेशानी तो नहीं होगी।
  • ये सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि पालना में लगे सब बोल्ट्स और नट्स टाइट है या नहीं! अगर ये लूज़ होंगे तो बच्चे के लिए ख़तरनाक हो सकते हैं।
  • अपने बच्चे को घुटन से बचाने के लिए पालना से तकिए, कंबल और बहुत बड़े-बड़े खिलोने निकाल दें।
  • सुनिश्चित करें कि आपके घर में आपात स्थिति में आग या बचाव करने के लिए फायर एक्सटिंगगुइशेर हो।

शिशु के क्रॉल शुरु करने से पहले के लिए टिप्स :

  • अधिकांश बच्चे लगभग छह से नौ महीने से क्रॉल करना शुरू करते हैं लेकिन इसके पहले आपको कुछ तैयारी करने की आवश्यकता होगी।
  • बच्चे के क्रॉल करने से पहले आपको घर में मौजूद कुछ चीज़ों से बच्चे के बचाव के लिए सावधानी बरतनी होगी।
  • सभी खुले सॉकेट्स को कवर करें। बच्चे की पहुंच से कॉर्ड को दूर रखें।
  • फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक के सामान, जैसे कि बुक-केस और टीवी को सुरक्षित रखें ताकि आपके बच्चे के ऊपर न गिरे।
  • टेबल या किसी भी तरह के फर्नीचर के किनारों और कोनों को कवर करने के लिए सुरक्षात्मक पैडिंग का उपयोग करें।
  • अलमारियाँ और दरवाज़ों पर सुरक्षा कुंडी का उपयोग करें।
  • पौधों को बच्चे की पहुंच से दूर रखें।
  • कुछ पौधे आपके बच्चे को बीमार कर सकते हैं या फिर इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं।
  • अपने वॉटर हीटर के तापमान को 125 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक नहीं सेट करें।
  • अधिक गर्म पानी बच्चे के लिए जलन का कारण बन सकता है।
zealthy contact

कॉल

zealthy whatsapp contact

व्हाट्सप्प

book appointment

अपॉइंटमेंट बुक करें