pregnancy in hindi

प्रेगनेंसी की संपूर्ण जानकारी

All about pregnancy in hindi

Pregnancy ki sampurn jankari in hindi

एक नज़र

  • प्रेगनेंसी की जानकारी होने से एक महिला गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का और स्वयं का सही तरीके से ध्यान रखने में सफल हो सकती है।
  • गर्भधारण तब होता है, जब एक पुरुष का शुक्राणु महिला के अंडे के साथ निषेचित होता है।
  • डॉक्टरों का मानना है कि होम प्रेगनेंसी टेस्ट की तुलना में ब्लड टेस्ट से अधिक विश्वसनीय और सटीक परिणाम मिलते हैं।

गर्भवस्था (pregnancy in hindi) के दौरान एक गर्भवती महिला को गर्भावस्था की संपूर्ण जानकारी से अवगत होना आवश्यक होता है।

जानकारी होने से एक महिला गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का और स्वयं का सही तरीके से ध्यान रखने में सफल हो सकती है।

इसलिए इस दौरान गर्भावस्था की संपूर्ण जानकारी के माध्यम से आपको उन सब चीज़ों की जानकारी प्राप्त हो सकती है, जो प्रेगनेंसी के दौरान जानना ज़रूरी है।

गर्भ कैसे ठहरता है, और एक महिला कैसे प्रेग्नेंट होती है, ये तमाम जानकारी आपको इस लेख के ज़रिए देंगे।

इसके साथ ही गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण से लेकर, कब आपको प्रेगनेंसी टेस्ट कराना चाहिए, इससे भी हम आपको अवगत कराएँगे।

दरअसल, जब एक महिला प्रेग्नेंट होती है उसकी ज़िम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ जाती है।

अब उसे न सिर्फ अपना ध्यान रखना होता बल्कि अपना आने वाली ख़ुशी यानि की अपने बच्चे का भी गर्भ में विशेष ध्यान रखना होता है।

बच्चे के विकास के लिए एक माँ को क्या खाना चाहिए या किन चीज़ों के सेवन से बच्चे की हड्डियां विकसित होती हैं या फिर किस तिमाही के दौरान बच्चा कितना बड़ा होता और उसके कौन-कौन से अंग विकसित होते हैं।

ये तमाम जानकरी आपको हमारे इस गर्भावस्था की संपूर्ण जानकारी से प्राप्त हो सकते हैं।

इस लेख में आपको ये भी बताएंगे कि तिमाही के अनुसार गर्भवती महिला के शरीर में किस-किस तरह के परिवर्तन आएंगे और महिला का बेबी बंप कब से दिखना शुरू हो जाएगा।

गर्भावस्था की संपूर्ण जानकारी की मदद से आपको ये भी जानकारी मिल पायेगी कि कब और किस तिमाही में आपके लिए यात्रा करना उचित होगा और किस तिमाही के दौरान आपको ट्रैवेलिंग करने से पूरी तरह से परहेज़ करना चाहिए।

इतना ही प्रेगनेंसी के दौरान आपको कब, कौन से टेस्ट कराने चाहिए और वो टेस्ट क्यों किए जाते हैं। ये तमाम जानकारी आपको गर्भवस्था की संपूर्ण जानकारी आपको मिलेगी।

गर्भवस्था की संपूर्ण जानकारी में हम आपको बताएंगे कि तिमाही के अनुसार एक महिला को अपनी जीवनशैली में किसी तरह के बदलाव करने होंगे।

इसके साथ ही प्रेग्नेंट महिला को अपने आपको गर्भावस्था के दौरान सक्रिय रहने के लिए कौन-कौन से व्यायाम करने चाहिए।

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इस लेख़ में/\

  1. गर्भावस्था क्या है?
  2. गर्भधारण कब होता है?
  3. प्रेगनेंसी के लक्षण
  4. प्रेगनेंसी के बारे में कितने दिनों में पता चलता है?
  5. प्रेगनेंसी टेस्ट कब कराना चाहिए?
  6. किन कारणों में गर्भ नहीं ठहरता है?
  7. गर्भावस्था के महीने
  8. गर्भावस्था के दौरान टेस्ट
  9. गर्भावस्था के दौरान कैसे रखें अपना ख़्याल
  10. गर्भावस्था में डाइट
  11. गर्भावस्था में शारीरिक बदलाव
  12. गर्भावस्था में बच्चे का विकास
  13. गर्भावस्था में जीवनशैली
  14. गर्भावस्था में यात्रा
 

1.गर्भावस्था क्या है?

What is pregnancy in hindi

Pregnancy kya hai

गर्भावस्था या प्रेगनेंसी एक ऐसी स्थिति को कहते हैं, जब महिला के गर्भ में भ्रूण का निर्माण हो जाता है यानि महिला किसी नई जिंदगी को दुनिया में लाने वाली होती है।

इस दौरान निषेचन से जन्म तक की पूरी प्रक्रिया में औसतन 266-270 दिन, या लगभग नौ महीने लगते हैं।

गर्भावस्था प्रारंभिक संकेत के तौर महिला का पीरियड मिस हो जाता है, अन्य लक्षण भी हैं।

डॉक्टर गर्भावस्था को तीन चरणों या ट्राइमेस्टर (trimester) में विभाजित करते हैं, जिस दौरान एक महिला के शरीर में विशिष्ट परिवर्तन होते हैं और बच्चे का भी विकास जारी रहता है।

प्रत्येक त्रैमासिक लगभग 3 महीने का होता है, और जिसके अंतर्गत 40 हफ्ते होते हैं।

जबकि 40 सप्ताह बच्चे के जन्म की सामान्य समय सीमा होती है, लेकिन पूरी तरह से विकसित बच्चे का जन्म एक 37 सप्ताह से पहले या फिर 42 सप्ताह तक देरी से हो सकता है।

और पढ़ें: गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले परीक्षण और उनका महत्व

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2.गर्भधारण कब होता है?

When does pregnancy happens in hindi

Garbh Dharan kab hota hai in hindi

गर्भधारण तब होता है, जब एक पुरुष का शुक्राणु महिला के अंडे के साथ निषेचित होता है।

यह आमतौर पर ओव्यूलेशन के बाद महिला के फैलोपियन ट्यूब में होता है।

जिसके परिणाम एक ज़ायगोट (zygote) का निर्माण होता है।

इसके बाद ज़ायगोट डिवाइड होना शुरू हो जाता है, जिससे भ्रूण (embryo) नामक कोशिकाओं का एक समूह बनता है।

विभाजन के 5-7 दिनों के बाद, भ्रूण गर्भ या गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है।

इस प्रक्रिया को आरोपण (implantation) कहा जाता है और इसे गर्भावस्था की शुरुआत माना जाता है।

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?

 

3.प्रेगनेंसी के लक्षण

Symptoms of pregnancy in hindi

Pregnancy ke lakshan in hindi

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत से ही इसके लक्षणों का अनुभव होना शुरू हो जाता है वहीं कुछ महिलाएं कुछ हफ़्तों बाद इसका अनुभव करती हैं।

आइए जानते हैं गर्भावस्था के कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में : -

  • पीरियड का मिस होना (Missed period)
  • स्तनों में बदलाव (Breast changes)
  • थकान (Fatigue)
  • जी मिचलाना (Nausea)
  • थोड़ा सा रक्तस्राव या ऐंठन (Slight bleeding or cramping)
  • सिर दर्द (Headaches)
  • कब्ज़ (Constipation)
  • मूड में उतार-चढ़ाव (Mood swings)

इन लक्षणों के अलावा आपको बार-बार यूरिन पास करनी की इच्छा हो सकती है और साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और कभी-कभी चक्कर आने का भी अनुभव हो सकता है।

इसके अलावा गंध प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है और साथ खाने की इच्छा में वृद्धी हो सकती है।

और पढ़ें:Guide To Get Pregnant

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4.प्रेगनेंसी के बारे में कितने दिनों में पता चलता है?

How many days does it come to know about pregnancy in hindi

Pregnancy ka kitne din mein pata chalta hai

जब एक महिला का आने वाला पीरियड मिस हो जाता है या नहीं आता है, तो उसे समझ लेना चाहिए कि वो प्रेग्नेंट है।

हालांकि, अगर आपकी पीरियड की साइकिल अनियमित है, तो हो सकता है कि आप प्रेग्नेंट न हो।

अगर आपका मेंस्ट्रुअल साइकिल नियमित 28 दिनों का होता है और अगर आपने ओवुलेशन के दौरान गर्भवती होने के लिए असुरक्षित सेक्स किया था, तो आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना बढ़ जाती है।

ऐसे में पीरियड का न आना और साथ ही गर्भवस्था के प्रारंभिक लक्षणों का अनुभव करना आपके गर्भवती होने का संकेत दे सकता है।

डॉक्टर के पास जाने से पहले अगर आप घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहती हैं, तो आपको टेस्ट करने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।

दरअसल, ओवुलेशन के दौरान सेक्स करने के बाद भी महिला के अंदर गर्भधारण से जुड़ी प्रक्रिया चलती रहती है और इसलिए आपको थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।

अपनी प्रेगनेंसी का पता लगाने के लिए होम प्रेगनेंसी टेस्ट का इस्तेमाल कर सकती हैं और पीरियड मिस होने के एक हफ्ता बाद टेस्ट करने से आपको परिणाम 99 प्रतिशत सही आते हैं।

अगर आप बहुत अपनी प्रेगनेंसी को लेकर बहुत उत्साहित इतना इंतज़ार आपके लिए कठिन है, तो कम-से-कम आपको सेक्स करने के 21 दिन या तीन हफ्ते बाद गर्भावस्था परीक्षण करना चाहिए।

अधिकांश मामलों में, एक अंडे के सफल प्रत्यारोपण के 7-12 दिनों के बाद ही यूरिन में एचसीजी (HCG) के स्तर का पता लगाना संभव होता है।

और पढ़ें:Uterine Fibroids and its treatment

 

5.प्रेगनेंसी टेस्ट कब कराना चाहिए?

When should I go for a test for pregnancy in hindi

Pregnancy test kab karana chahiye

अधिकांश महिलाएं आजकल होम प्रेगनेंसी किट की मदद से प्रेगनेंसी का पता लगाने में सक्षम हो जाती हैं।

लेकिन बावजूद इसके डॉक्टर प्रेगनेंसी की पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

ऐसे में अब आपके मन में ये सवाल होगा कि आखिर ब्लड टेस्ट के लिए आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।

दरअसल, होम प्रेगनेंसी टेस्ट से यूरिन में एचसीजी का स्तर पता चलता है और ब्लड टेस्ट के माध्यम से ब्लड में एचसीजी के स्तर का पता लगाया जाता है।

डॉक्टरों का मानना है कि होम प्रेगनेंसी टेस्ट की तुलना में ब्लड टेस्ट से अधिक विश्वसनीय और सटीक परिणाम मिलते हैं।

ऐसे में आपको पीरियड मिस होने के 10 दिन बाद ब्लड प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए जाना चाहिए।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी के साथ कैसे हो सकती हैं जल्द गर्भवती

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6.किन कारणों में गर्भ नहीं ठहरता है?

What are the reasons why some women are unable to become mothers in hindi

Kin karno mai garbh nahi thaharta

अगर आप बहुत समय से गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, और गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।

कुछ कारण आज के दौर में हमारी जीवनशैली की देन हैं तो कुछ महिला की शरीर से जुड़ी प्रजनन प्रणाली में संरचनात्मक समस्याएं होती हैं या फिर पुरुष की शुक्राणु (sperm) से जुड़ी समस्या हो सकती है।

ऐसे में कुछ उन कारणों को समझने की कोशिश करते हैं जो एक महिला के माँ बनने में रूकावट पैदा करती है।

माँ न बन पाने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं : -

  • अनियमित पीरियड
  • गर्भाशय में गांठ या फ़िब्रोइड
  • एंडोमेट्रियोसिस
  • ओवुलेशन से जुड़ी समस्या
  • फॉलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना
  • सर्वाइकल से जुड़ी समस्या
  • डीप्रेशन या स्ट्रेस
  • अधिक वज़न
  • अधिक उम्र
  • अनियमित जीवनशैली

अगर आपको भी गर्भवती होने में परेशानी आ रही है तो आपको ये समझने चाहिए कि आज चिकित्सा जगत ने बहुत तरक्की कर ली हैं और बाँझपन की समस्या का भी इलाज संभव है।

हालांकि, इस ओर आपको समय रहते ध्यान देना चाहिए और बिना समय गवाएं डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि बहुत विलम्ब न हो जाये।

और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत

 

7.गर्भावस्था के महीने

All month of pregnancy in hindi

Garbhavastha ke mahine

एक सामान्य, 'पूर्ण-अवधि की गर्भावस्था 40 सप्ताह की होती है और ये 37 से 42 सप्ताह तक हो सकती है।

गर्भावस्था को तीन तिमाही (three trimesters) में विभाजित किया गया है।

प्रत्येक तिमाही 12 से 14 सप्ताह या लगभग 3 महीने तक चलती है।

प्रत्येक ट्राइमेस्टर में गर्भावस्था से जुड़े कुछ हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन होते हैं।

पहली तिमाही (First trimester of pregnancy in hindi - 1-13 weeks)

गर्भावस्था की तारीख की गिनती आपके अंतिम सामान्य मासिक धर्म चक्र के पहले दिन से शुरू होती है और गर्भाधान सप्ताह 2 में होता है।

पहली तिमाही गर्भावस्था के पहले सप्ताह से 13वे सप्ताह तक की होती है।

इस तिमाही में आपको देखकर गर्भवती होना का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

लेकिन गर्भ में बच्चे के विकास होने के कारण आंतरिक रूप से आपका शरीर बहुत बड़े बदलावों से गुज़र रहा होता है।

पहली तिमाही आपके बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इस समय आपको गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों का अनुभव होगा।

इस समय आपको अपना और अपने बच्चे का अधिक ख्याल रखना चाहिए।

दूसरी तिमाही (Second trimester of pregnancy in hindi - 14-27 weeks)

दूसरी तिमाही (सप्ताह 14 से 27) आमतौर पर अधिकांश गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे आरामदायक समय होता है।

गर्भावस्था के अधिकांश शुरुआती लक्षण धीरे-धीरे कम हो जाएंगे, लेकिन आपको देखकर अब लोगों आपके प्रेग्नेंट होने का पता चलने लगेगा।

आप दिन के दौरान ऊर्जा के स्तर में वृद्धि महसूस करेंगी और रात में अधिक आरामदायक नींद का आनंद ले पाएंगी।

हालांकि, आम लक्षण पैरों में ऐंठन और सीने में जलन की शिकायत आपको रहेगी।

दूसरी तिमाही में सफर करना सबसे सुरक्षित माना जाता है।

इस तिमाही में अधिकतर महिलाएं अपने बच्चे को पहली बार महसूस कर सकती हैं, आमतौर पर 20 सप्ताह तक।

बच्चा दूसरी तिमाही के दौरान आपकी आवाज़ को सुन और पहचान सकता है।

तीसरी तिमाही (Third trimester of pregnancy in hindi - 28-40 weeks)

तीसरी तिमाही 28 वें सप्ताह से आपके बच्चे के जन्म तक रहती है।

तीसरी तिमाही से आपको हर हफ्ते अपने डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होगी।

इस समय डॉक्टर नियमित रूप से आपके प्रोटीन के लिए यूरिन टेस्ट करेंगी, आपके ब्लड प्रेशर की जाँच की जाएगी और बच्चे की हार्ट रेट को भी मॉनिटर किया जाएगा।

तीसरी तिमाही के दौरान आपकी यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा जाता है।

इस सप्ताह के अंत तक आते-आते आपका बच्चा पूरी तरह से विकसित हो जाता है।

वहीं आपके डॉक्टर शिशु की पोज़िशन का पता लगाएंगे और साथ ही आपके गर्भशय ग्रीवा की जाँच कर आपके प्रसव के समय का आकलन करने की कोशिश करेंगे।

तीसरी तिमाही अपने आप को लेबर और प्रसव के बारे में शिक्षित करने का एक अच्छा समय है, क्योंकि इस तिमाही के अंत तक आपकी डिलीवरी कभी भी हो सकती है।

और पढ़ें:एचसीजी गर्भावस्था परीक्षण - आमतौर से पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

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8.गर्भावस्था के दौरान टेस्ट

Test during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran test

गर्भावस्था की हर एक तिमाही में गर्भवती महिला की कई तरह की टेस्ट की जाती है

ये टेस्ट माँ और बच्चे की स्थिति को देखने के लिए किये जाते हैं ताकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की समस्या न उत्पन्न हो और एक सफल गर्भावस्था सुनिश्चित हो सके।

ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेगनेंसी की तीनों तिमाही में कौन-कौन से टेस्ट होते हैं और ये टेस्ट क्यों किये जाते हैं।

पहली तिमाही में होने वाले टेस्ट (Test during first trimester of pregnancy in hindi)

  • ब्लड टेस्ट (blood test)

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान आपके गर्भवती होने का पता लगाने के लिए सबसे पहले ब्लड टेस्ट किया जाएगा।

इस टेस्ट की मदद से एक्टोपिक प्रेगनेंसी का भी पता लगता है।

  • पैप स्मीयर टेस्ट (Pap smear test)

इस टेस्ट की मदद से गोनोरिया (gonorrhea) और क्लैमाइडिया (chlamydia) और जैसे इन्फेक्शन का पता लगाया जाता है।

  • यूरिन टेस्ट (urine test)

पहली तिमाही में शरीर में शुगर और प्रोटीन के लेवल का पता लगाने के लिए और इन्फेक्शन की जाँच के लिए यूरिन टेस्ट किया जाता है।

  • आरएच (Rh) फैक्टर टेस्ट

अगर गर्भवती महिला आरएच नेगेटिव है, तो बच्चे को एनीमिया और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

पहली तिमाही में 9वे हफ्ते में अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जो न्यूक्ल ट्रांसलुसेंसी (nuchal translucency) का पता लगाने के लिए किया जाता है।

ये बच्चे में मौजूद किसी भी तरह के जन्म दोष का पता लगता है।

दूसरी तिमाही में होने वाले टेस्ट (Test during second trimester of pregnancy in hindi)

  • मल्टीप्ल मार्कर टेस्ट (Multiple marker test)

ये टेस्ट बच्चे में जोखिम जैसे ट्राइसॉमी 18, डाउन सिन्ड्रोम और भ्रूण में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  • ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Glucose tolerance test)

प्रेग्नेंट स्त्री के ब्लड में शुगर के लेवल का पता लगाने के लिए ये टेस्ट किया जाता है।

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

इस तिमाही आपको एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis) कराने के लिए अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होगी।

इससे बच्चे में अनुवांशिक विकारों का पता लगाया जाता है।

  • लेवल II सोनोग्राम (level II sonogram)

बच्चे के सभी अंगों के विकास को मॉनिटर किया जाता है और बच्चे के दिल की भी जाँच की जाती है।

  • फीटलफ़िब्रनेक्टिन टेस्ट (Fetal fibronectin test)

अगर किसी महिला को लेकर प्रीटर्म लेबर के ख़तरे का अंदेशा है, तो उस स्थिति में ये टेस्ट किया जाता है। ये टेस्ट 22-34 हफ्ते के बीच कभी भी किया जा सकता है।

तीसरी तिमाही में होने वाले टेस्ट (Test during third trimester of pregnancy in hindi)

  • ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस टेस्ट (Group B streptococcus)

ये टेस्ट शिशु में निमोनिया या गंभीर संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।

  • नॉनस्ट्रेस टेस्ट (Nonstress test)

बच्चे की हृदय गति और उसके गतिविधि को देखने के लिए ये टेस्ट किया जा सकता है।

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

अंतिम तिमाही में अल्ट्रासाउंड 34वें हफ्ते में किया जाता है।

इसकी मदद से बच्चे के विकास, उसकी स्थिति और प्लेसेंटा की स्थिति का पता लगाया जाता है और साथ ही आपकी गर्भावस्था में जटिलताओं की संभावनाओं का भी निदान करता है।

और पढ़ें:कहीं माँ न बन पाने का कारण मानसिक तनाव तो नहीं

 

9.गर्भावस्था के दौरान कैसे रखें अपना ख़्याल

How to take care of yourself during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke douran kaise rakhe aapna khyal

जब आपको ये पता चलता है कि आप गर्भवती हैं तो शारीरिक और भावनात्मक रूप से खुद का ख्याल रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

इसलिए एक गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर अंत तक अपनी ओर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

ऐसे में आपको अपनी दिनचर्या में बदलाव करने से लेकर खान-पान, व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों को लेकर अधिक सचेत रहना होगा।

एक ओर जहाँ आपको पोषक तत्व युक्त डाइट लेनी आवश्यकता होगी तो वहीं दूसरी ओर अपनी दिनचर्या आपको व्यायाम और योग को भी शामिल करना होगा और साथ ही ज़्यादा-से-ज़्यादा खुश रहना होगा।

ये वक़्त आपके शरीर में कई तरह के बदलावों का गवाह बनेगा जिसे आपको ख़ुशी-ख़ुशी अपनाना होगा और सिर्फ अपने स्वास्थ्य और होने वाले बच्चे के बारे में सोचना होगा।

जहां कुछ चीज़ों को अपने खाने में आपको शामिल करके की ज़रूरत होगी तो वहीं कुछ चीज़ों से आपको पूरी प्रेगनेंसी के दौरान दूरी बनानी होगी।

और पढ़ें:कैसे करें गर्भावस्था किट का प्रयोग ?

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10.गर्भावस्था में डाइट

Diet during pregnancy in hindi

Garbhavastha mein diet

जैसे-जैसे एक गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे महिला को अपने खान-पान को लेकर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता हो जाती है।

ऐसे में हम आपको तिमाही के अनुसार ये बताने की कोशिश करते हैं कि पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में आपको क्या-क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों के सेवन से बचना चाहिए।

पहली तिमाही में गर्भवती महिला को क्या-क्या खाना चाहिए (Diet during first trimester of pregnancy in hindi)

पहली तिमाही के दौरान प्रेग्नेंट स्त्री को नियमित रूप से 400-600 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड युक्त खाद्य पदार्थ ज़रूर लेना चाहिए।

इसके अलावा कैल्शियम प्रोटीन, फाइबर और साथ ही विटामिन बी 12 और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त आहार भी लेना चाहिए।

इसके अलावा इस समय हाइड्रेटेड रहने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए।

दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला को क्या-क्या खाना चाहिए (Diet during second trimester of pregnancy in hindi)

दूसरी तिमाही में आयरन युक्त आहार का सेवन करना आवश्यक होता है।

प्रेग्नेंट महिला को प्रतिदिन 30-60 मिलीग्राम आयरन का सेवन करना चाहिए।

आयरन रेड सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जिससे माँ और बच्चे दोनों को पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है।

इसके साथ ही प्रोटीन और फोलिक एसिड का सेवन भी बरकरार रखना चाहिए।

वहीं दूसरी तिमाही से प्रसव तक प्रतिदिन 500-1000 मिलीग्राम तक कैल्शियम युक्त आहार ज़रूर लेना चाहिए।

इस समय विटामिन सी का सेवन भी महत्वपूर्ण होता है।

तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को क्या-क्या खाना चाहिए (Diet in third trimester of pregnancy in hindi)

तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला के लिए आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है क्योंकि इस समय बच्चा आयरन अधिक अब्सॉर्ब करता है।

इसलिए अंतिम तिमाही में भी 30 से 60 मिलीग्राम तक आयरन ज़रूर लें।

इसके साथ ही अंतिम तिमाही में बच्चे की मांसपेशियों, हड्डियों और दाँतों के विकास के लिए कैल्शियम और विटामिन डी (vitamin D) बहुत महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य-पदार्थ भी बच्चे के विकास में मदद करते हैं।

और पढ़ें:कैसे सर्विकल म्यूकस को ट्रैक कर आप जल्दी गर्भवती हो सकती हैं?

 

11.गर्भावस्था में शारीरिक बदलाव

Physical changes in pregnancy in hindi

Garbhavastha main sharirik badlav

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं, जो शारीरिक रूप से साफ तौर पर देखे जा सकते हैं।

पहली तिमाही में होने वाले शारीरिक बदलाव (Physical change in first trimester of pregnancy in hindi)

पहली तिमाही की शुरुआत में आपके पेट के आकार में कोई बदलाव नहीं दिखेगा लेकिन इस तिमाही के अंत में आते-आते पेट बाहर की ओर निकलने लगता है और ओवल शेप में आ जाता है।

वहीं प्रेगनेंसी के आगे बढ़ने के साथ आपके गर्भाशय के आकार में परिवर्तन होने शुरू हो जायेंगे।

जिस कारण लिगमेंट्स (ligments) में आप दर्द का अनुभव कर सकती हैं।

इस समय महिला का वज़न एक से दो किलो तक बढ़ सकता है।

दूसरी तिमाही में होने वाले शारीरिक बदलाव (Physical change in second trimester of pregnancy in hindi)

इस तिमाही की शुरुआत में आपको सायटिका नर्व के कारण रुक-रुककर एक पैर में दर्द हो सकता है।

वही इस वक़्त रक्त संचार अधिक होने के कारण आपको पसीना अधिक आ सकता है और योनि से स्राव भी हो सकता है, जिसे आम माना जाता है।

गर्भ में बढ़ रहे बच्चे के कारण बेली बम्प दिखना शुरू हो जाएगा।

इस समय गर्भवती महिला के वज़न में 5-6 किलो की वृद्धि हो सकती है।

तीसरी तिमाही में होने वाले शारीरिक बदलाव (Physical change of third trimester of pregnancy in hindi)

प्रेगनेंसी के इस चरण में आकर गर्भवती महिला के वज़न 8-11 की वृद्धि हो जाती है और गर्भाशय का ऊपरी हिस्सा नाभि से 4 इंच तक ऊपर आ जाता है।

इस समय स्तनों के आकार में भी अधिक वृद्धि हो जाती है और एरोला का रंग गहरा हो जाता है और कोलोस्ट्रम, दूध के जैसा तरल पदार्थ आपके स्तनों से निकलने लगता है।

स्ट्रेच मार्क्स भी दिखने अब शुरू हो जाते हैं।

अंतिम तिमाही के अंत तक आते-आते बढ़े हुए पेट के कारण सोने में परेशानी हो सकती है और साथ ही अब आपको ब्रेक्सटन-हिक्स कॉन्ट्रैक्शन शुरू हो सकता है।

वहीं बच्चे के पूरी तरह से विकसित होने के कारण आपको पीठ में दर्द का अनुभव हो सकता है।

और पढ़ें:कोरियोनिक विली सैंपलिंग/सीवीएस टेस्ट की प्रक्रिया, लाभ व जोखिम

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12.गर्भावस्था में बच्चे का विकास

Baby development during pregnancy in hindi

Garbhavastha mein bacche ka vikas

गर्भाधान के लगभग एक सप्ताह बाद, या सात से दस दिनों के बीच, फर्टीलाईज़ड एग गर्भाशय के अस्तर से जुड़ जाता है और प्लेसेंटा बनने लगता है।

जिसके कुछ दिनों बाद भ्रूण बन जाता है और फिर गर्भ में हर बढ़ता जाता है।

आइए ये समझने की कोशिश करते हैं कि तिमाही के अनुसार बच्चे का विकास कैसे और कितना होता है।

पहली तिमाही में बच्चे का विकास (Baby development in first trimester of pregnancy in hindi)

पहली तिमाही के दौरान एक बच्चा तेज़ी से बढ़ता है और खसकस के आकार से मानव की तरह दिखने लगता है।

इस तिमाही के अंत में भ्रूण लगभग 3 इंच और 19 ग्राम का हो जाता है।

भ्रूण का मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और अंगों को विकास शुरू हो जाता है।

बच्चे का दिल भी धड़कने लगता है।

दूसरी तिमाही में बच्चे का विकास (Baby growth in second trimester of pregnancy in hindi)

भ्रूण इस समय के दौरान कई परिवर्तनों से गुज़रेगा और वो अब लगभग 13-14 इंच तक लंबा हो जाएगा।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के अंत के हफ़्तों में में शिशु का वज़न लगभग एक किलोग्राम (1 kg) हो जाएगा।

शिशु के फेफड़ा और नर्वस सिस्टम अब तक मैच्योर परिपक्व होते रहते हैं।

वहीं बच्चा गर्भ में आंखे खोलना और बंद करना शुरू कर देता है और सुघने की क्षमता भी शुरू हो जाती है।

इसके साथ स्किन, आइब्रो, आईलैश, बाल, टेस्टबड और मसल टिश्यू का भी विकास जारी रहता है।

तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास (Baby growth in third trimester of pregnancy in hindi)

इस समय आपके शिशु का आकार तरबूज़ के सामान हो जाता है और उसकी लम्बाई लगभग 20 इंच हो जाती है।

वहीं जन्म का समय नज़दीक आते-आते बच्चे का वज़न 3-3.5 किलो हो जाता है।

इस तिमाही के मध्य तक आते-आते अधिकांश अंगों और शरीर प्रणालियों का गठन हो जाता है, लेकिन वे तीसरी तिमाही के दौरान विकसित और परिपक्व होते रहता है।

इस तिमाही की शुरुआत में भ्रूण के फेफड़े पूरी तरह से नहीं बनते हैं, लेकिन प्रसव के समय तक विकसित हो जाएंगे।

इस समय बच्चा सांस लेने की गति का अभ्यास करना शुरू कर देता है।

और पढ़ें:क्या अधिक वजन होने से गर्भधारण होने में परेशानी हो सकती है?

 

13.गर्भावस्था में जीवनशैली

Lifestyle in pregnancy in hindi

Garbhavastha mein lifestyle

प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला की जीवनशैली बहुत अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि इस समय एक महिला को शारीरिक रूप तरह से स्वस्थ और मज़बूत रहने की आवश्यकता होती है।

ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि तिमाही के अनुसार आपकी जीवनशैली कैसी होनी चाहिए।

पहली तिमाही में गर्भवती महिला की जीवनशैली (Lifestyle in first trimester of pregnancy in hindi)

पहली तिमाही में एक महिला को अपना बहुत ज़्यादा ख्याल रखना चाहिए और एक स्वस्थ्य वज़न बनाए रखने के लिए हल्के व्यायाम करने चाहिए।

नियमित रूप से वॉक करना चाहिए, अगर हरी घास पर चलती हैं तो और अच्छा होता है।

इस समय प्रेग्नेंट स्त्री के लिए स्विमिंग करना भी फायदेमंद होता है।

वहीं पहली तिमाही के दौरान तले-भुने और बहुत ज़्यादा स्पाइसी खाने और कोल्ड ड्रिंक पीने से परहेज़ करना चाहिए।

पूरी प्रेगनेंसी में अल्कोहल और धूम्रपान से दूर रहना चाहिए।

दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला की जीवनशैली (Lifestyle in second trimester of pregnancy in hindi)

दूसरी तिमाही में लगभग 20 मिनट से लेकर आधा घंटा तक सुबह-शाम टहलना चाहिए।

साथ ही एरोबिक्स और स्विमिंग करना भी अच्छा होता है।

प्रेग्नेंट महिला को इन सब चीज़ों को अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाहिए।

अगर आप मेडिटेशन और योग करती हैं तो उससे आप भावनात्मक रूप से स्ट्रांग बनी रहेंगी।

वहीं इस समय कब्ज़ की समस्या से बचने के लिए मैदा युक्त खाने के सेवन से बचना चाहिए और साथ ही बाहर का खाना पूरी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं खाना चाहिए।

आपको जंक फूड भी नहीं खाना चाहिए और अल्कोहल और धूम्रपान को त्याग देना चाहिए।

तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला की जीवनशैली (Lifestyle in third trimester of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को पूरी तरह से सक्रीय रहने की कोशिश करनी चाहिए, इसे लेबर के वक़्त बहुत मदद मिलती है।

प्रतिदिन सुबह-शाम आधा घंटा टहलना चाहिए और अंतिम तिमाही के मध्य में आकर स्क्वाट (squat) करना शुरू कर देना चाहिए।

इस समय कैफीन का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और शराब और धूम्रपान से बिल्कुल बचना चाहिए।

और पढ़ें:क्या गर्भावस्था के लक्षण आ कर जा सकते हैं?

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14.गर्भावस्था में यात्रा

Travel during pregnancy in hindi

Garbhavastha mein kaise kare travel

एक बार जब एक महिला को उसके गर्भवती होने का पता चलता है तो उसके मन में कई तरह के प्रश्न आने लगते हैं जैसे कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

ऐसा ही एक प्रश्न यात्रा से जुड़ा होता है।

ऐसे में हम आपको ये बताने को कोशिश करते हैं किस तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को ट्रैवल करने से बचना चाहिए और किस तिमाही में यात्रा करना सबसे अच्छा माना जाता है।

गर्भावस्था में यात्रा निम्न रूप से होनी चाहिए : -

गर्भावस्था की पहली तिमाही में यात्रा (Travelling in first trimester of pregnancy in hindi)

कहते हैं कि प्रेगनेंसी की शुरुआत में एक प्रेग्नेंट महिला को बहुत सतर्क रहने की आवश्यकता होती है क्योंकि ये समय बहुत क्रिटिकल होता है और

महिला पहले से ही प्रेगनेंसी की शुरुआती लक्षणों से परेशान रहती हैं।

इसलिए अधिकांश डॉक्टर पहली तिमाही के दौरान प्रेग्नेंट महिला को यात्रा न करने की सलाह देते हैं।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में यात्रा (Travelling in second trimester of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही को सबसे सुरक्षित माना जाता है, खासकर 15-25वे हफ्ते तक।

इस समय अगर आपने कई जाने की योजना बनाई थी तो अब वक़्त आ गया है कि आप उसका पालन करें और कही घूम कर आए।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सफर करने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होती है लेकिन आपको सतर्कता ज़रूर बरतनी चाहिए।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में यात्रा (Travelling in third trimester of pregnancy in hindi)

तीसरी तिमाही के दौरान यात्रा प्रतिबंध प्रभावी होते हैं।

कुछ एयरलाइंस, 28वे सप्ताह के बाद गर्भवती महिलाओं को उड़ान भरने की अनुमति देती हैं, और अगर आपका यात्रा करना आवश्यक है तो बिना डॉक्टर की सलाह के अनुमति नहीं दी जाती है।

माना जाता है कि तीसरी तिमाही में बच्चे का जन्म कभी भी हो सकता है और इसी जटिलता से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को इस समय ट्रैवल न करना की सलाह दी जाती है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 17 Jun 2020

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