प्री-एक्लेम्पसिया क्या है?

What is preeclampsia in hindi

Preeclampsia kya hai


Introduction

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प्री-एक्लेम्पसिया (preeclampsia) एक ऐसी स्थिति है, जो गर्भवती महिलाओं में विकसित होती है। जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के पूर्व हाई ब्लड प्रेशर नहीं होता है, उन्हें भी ये समस्या हो सकती है।

प्री-एक्लेम्पसिया से पीड़ित महिलाओं के यूरिन में प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है और चेहरे, पैरों और हाथों में भी सूजन हो जाती है।

यह स्थिति आमतौर पर गर्भावस्था के 20वें हफ्ते के बाद होती है, हालांकि, ये पहले भी हो सकती है और प्रसव के बाद भी विकसित हो सकती है।

अगर प्री-एक्लेम्पसिया को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है तो यह एक्लेम्पसिया का कारण बन सकता है।

एक्लेम्पसिया अधिक गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है, जो माँ और बच्चे दोनों के लिए जोखिमों को बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं एक्लेम्पसिया दुर्लभ मामलों में मृत्यु की वजह भी बन सकती है।

प्रसवाक्षेप रोग (preeclampsia) होने पर अगर महिलाओं को दौरे पड़ने (seizures) लगे तो इसे एक्लेम्पसिया माना जाता है। सभी गर्भवती महिलाओं में से लगभग 5 को प्रीक्लेम्पसिया हो जाता है।

इस स्वास्थ्य जटिलता को प्रीक्लेम्पटिक टॉक्सिमिया (preeclamptic toxemia) या टॉक्सिमिया (toxemia) के रूप में भी जाना जाता है और इसे दो भागों में वर्गीकृत किया गया है।

प्रीक्लेम्पटिक टॉक्सिमिया (preeclamptic toxemia) के दो भाग निम्न हैं :

  • माइल्ड प्री-एक्लेम्पसिया (Mild preeclampsia)

माइल्ड प्री-एक्लेम्पसिया तब होता है, जब गर्भावस्था के दौरान महिला का रक्तचाप 140/ 90 या उससे ज़्यादा होता है।

यह उन महिलाओं में भी विकसित हो सकता है, जिन्हें पहले कभी रक्तचाप की समस्या नहीं हुई थी।

  • गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया (Severe preeclampsia)

गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया तब होता है, जब रक्तचाप 160/ 100 या इससे ज़्यादा होता है।

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इस लेख़ में

  1. 1.प्री-एक्लेम्पसिया के कारण क्या हैं?
  2. 2.प्री-एक्लेम्पसिया के लक्षण क्या हैं?
  3. 3.प्री-एक्लेम्पसिया से जुड़े जोखिम कारक क्या हैं?
  4. 4.प्री-एक्लेम्पसिया का निदान कैसे किया जाता है?
  5. 5.अनुपचारित प्री-एक्लेम्पसिया की जटिलताएं क्या हैं?
  6. 6.प्री-एक्लेम्पसिया से बचाव करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?
  7. 7.प्री-एक्लेम्पसिया का इलाज क्या है?
 

प्री-एक्लेम्पसिया के कारण क्या हैं?

What are the causes of preeclampsia? in hindi

Preeclampsia ke kya karan hain

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प्रसवाक्षेप रोग क्यों होता है, इसके सटीक कारण का अब तक पता नहीं चला है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि कई कारक हैं जो इस बीमारी का कारण बन सकते हैं।

प्री-एक्लेम्पसिया की संभावना को बढ़ाने वाले कारक निम्न हैं :

रक्त की मात्रा में वृद्धि (Increased in blood volume)

जब गर्भावस्था में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, तो शरीर इसे सामान्य रूप से स्वीकार नहीं कर पाता है।

ऐसे मामलों में, रक्तचाप बढ़ जाता है और प्री-एक्लेम्पसिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

प्लेसेंटा में असामान्यताएं (Abnormalities in the placenta)

कुछ अध्ययनों में प्लेसेंटा विकारों और प्री-एक्लेम्पसिया की वृद्धि के बीच संबंध दिखाया गया है। हालांकि, इस विषय पर अधिक शोध किए जा रहे हैं।

पहले से मौजूद स्थितियां (Pre-existing conditions)

कुछ स्वास्थ्य स्थितियां जैसे कि किडनी विकार (kidney disorder), हाइपरथायरायडिज्म (hyperthyroidism), मधुमेह (diabetes) या सिकल सेल विकार (sickle cell disorder) भी प्री-एक्लेम्पसिया का कारण बन सकते हैं।

आहार परिवर्तन (Dietary changes)

डाइट में कुछ परिवर्तन करना, जैसे कैल्शियम और प्रोटीन का सेवन पर्याप्त मात्रा में न करना या विटामिन डी (vitamin D) या मछली के तेल (fish oil) का सेवन अधिक मात्रा में करने से भी प्री-एक्लेम्पसिया हो सकता है।

अन्य (Others)

मोटापा (obesity), ऑटोइम्यून विकार (autoimmune disorders), रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं (problems with blood vessels) और कमज़ोर इम्यून सिस्टम (weak immune system) भी प्री-एक्लेम्पसिया का अन्य कारण हो सकते हैं।

प्रारंभिक और लगातार प्रसवपूर्व देखभाल आपके डॉक्टर को प्रसवाक्षेप रोग (preeclampsia) का जल्द निदान (diagnose) करने और जटिलताओं से आपका बचाव करने में मदद कर सकती है।

समय रहते इस स्थिति के बारे में पता चलने से आपके डॉक्टर को आपकी डिलीवरी की तारीख तक उचित निगरानी प्रदान करने में मदद मिलेगी।

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प्री-एक्लेम्पसिया के लक्षण क्या हैं?

What are the symptoms of preeclampsia? in hindi

Preeclampsia ke lakshan kya hain

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गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, यूरिन में प्रोटीन की मौजूदगी और हाथ-पैरों के साथ-साथ चेहरे पर सूजन आना प्रीएक्लेम्पसिया के मुख्य लक्षण होते हैं।

हालांकि, इसके अलावा प्री-एक्लेम्पसिया के कुछ और लक्षणों का भी एक गर्भवती महिला अनुभव कर सकती है।

प्री-एक्लेम्पसिया के लक्षण कुछ और लक्षण इस प्रकार हैं :

  • वज़न में एकाएक वृद्धि होना
  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द का अनुभव करना
  • सिर में बहुत अधिक दर्द होना
  • ध्यान केन्द्रित (Concentrate) करने में कमी आना
  • यूरिन पास करने की इच्छा में कमी आना
  • चक्कर आना
  • अत्यधिक उल्टी और मिचली
  • दृष्टि में धुंधलापन आना
  • रक्त में प्लेटलेट्स की कमी
  • लिवर के फंक्शन पर प्रभाव पड़ना

आपको ये तमाम लक्षणों में से कई का अनुभव हो सकता है या किसी का भी अनुभव नहीं भी हो सकता है।

यही कारण है कि गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर की जाँच और यूरिन टेस्ट के लिए अपने डॉक्टर से मिलना महत्वपूर्ण होता है।

और पढ़ें:अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण, कारण और उपचार
 

प्री-एक्लेम्पसिया से जुड़े जोखिम कारक क्या हैं?

What are the risk factors associated with preeclampsia? in hindi

Preeclampsia se jude jokhim karak kya hain

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पहली गर्भावस्था में प्री-एक्लेम्पसिया होना अधिक आम है, जैसे ही इसका पता चलता है इसे हाई रिस्क प्रेगनेंसी मान लिया जाता है।

ऐसे कई कारक होते हैं जो महिला को प्री-एक्लेम्पसिया से जोड़ते हैं या कहे इसका कारण बनते हैं।

प्री-एक्लेम्पसिया की संभावना को बढ़ाने वाले जोखिम कारक निम्न हैं :

  • जुड़वा, या ट्रिप्लेट के साथ प्रेग्नेंट होना
  • 20 साल से कम और 40 साल से अधिक उम्र होना
  • क्रोनिक उच्च रक्तचाप (chronic hypertension), गुर्दे की बीमारी (kidney disease) या दोनों का इतिहास होना
  • जो महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं या जिनका बीएमआई (BMI) 30 या उससे अधिक है
  • इन विट्रो निषेचन (आईवीएफ) के परिणामस्वरूप गर्भावस्था
  • मधुमेह
  • गर्भकालीन उच्च रक्तचाप (Gestational hypertension)
  • विटामिन ई, विटामिन सी या मैग्नीशियम में कमी
  • हालिया शोध के अनुसार गर्भावस्था के पहले 26 हफ्तों में विटामिन डी की कमी होना

प्रारंभिक और लगातार प्रसवपूर्व देखभाल आपके डॉक्टर को प्री-एक्लेम्पसिया का जल्द निदान करने और जटिलताओं से बचने में मदद कर सकती है।

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प्री-एक्लेम्पसिया का निदान कैसे किया जाता है?

How is preeclampsia diagnosed? in hindi

Preeclampsia ka nidan kaise kiya jata hai

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डॉक्टर पहले प्री-एक्लेम्पसिया के किसी भी लक्षण जैसे कि सूजन, अचानक वज़न बढ़ना और रक्तचाप में बदलाव को जांचेंगे।

अगर रक्तचाप बहुत अधिक है या प्री-एक्लेम्पसिया होने का संदेह है तो डॉक्टर कुछ परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।

प्री-एक्लेम्पसिया के निदान के लिए निम्न परीक्षणों की सलाह दी जा सकती है :

रक्त परीक्षण (Blood test)

यह परीक्षण आपके लीवर और किडनी के कार्य की जाँच करता है और आपके ब्लड प्लेटलेट्स काउंट (blood platelet count) को मापता है।

यूरिन टेस्ट (Urine test)

प्री-एक्लेम्पसिया के निदान के लिए यूरिन टेस्ट की सलाह दी जा सकती है।

अगर प्रेग्नेंट महिला के यूरिन में प्रोटीन का स्तर चौबीस घंटे में 0.3g या उससे अधिक पाया जाता है तो माना जाएगा कि गर्भवती महिला प्री-एक्लेम्पसिया से पीड़ित है।

नॉन-लेबोरेटरी टेस्ट (Non-laboratory test)

नॉन-लेबोरेटरी टेस्ट और अल्ट्रासोनोग्राफी दो परीक्षण हैं, जो किसी भी स्थिति जैसे कि प्री-एक्लेम्पसिया की जाँच करते समय शिशु और माँ के स्वास्थ्य को मॉनिटर करते हैं।

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अनुपचारित प्री-एक्लेम्पसिया की जटिलताएं क्या हैं?

What are the possible complications of untreated preeclampsia? in hindi

unupcharit preeclampsia ki sambhavit jatiltayein kya hain

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अगर समय रहते प्रसवाक्षेप रोग का उपचार नहीं किया जाता है तो इससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

अगर गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से प्रसवपूर्व जांच (prenatal visit) के लिए जाती है तो समय रहते जोखिम को कम करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, सही समय पर स्थिति का पता नहीं चलने पर जोखिम बढ़ सकता है।

प्री-एक्लेम्पसिया को अनुपचारित छोड़ने पर निम्लिखित जोखिमों की संभावना बढ़ सकती है:

एक्लेम्पसिया (Eclampsia)

ये प्री-एक्लेम्पसिया (preeclampsia) और दौरे (seizures) का एक कॉम्बिनेशन होता है।

इस स्थिति में महिला को शरीर की दाईं तरफ पसलियों के नीचे दर्द, धुंधली दृष्टि (blurry vision), तेज़ सिरदर्द (intense headache), सतर्कता में कमी (decreased alertness) का अनुभव हो सकता है।

अगर महिला को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो महिला कोमा (coma) में जा सकती है या महिला को स्थायी मस्तिष्क क्षति (permanent brain damage) पहुंच सकती है।

यहाँ तक की इससे महिला की मृत्यु होने का रिस्क भी बढ़ जाता है और बच्चे की जान को भी ख़तरा होता है।

हेल्प सिंड्रोम (HELLP syndrome)

मां और बच्चे दोनों के लिए हेल्प सिंड्रोम ख़तरनाक साबित हो सकता है। इस ओर शीघ्र ध्यान न दिया जाए या अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो इससे लिवर को नुकसान (liver damage) पहुंच सकता है और कई और जटिलताएं हो सकती हैं।

ये लिवर और ब्लड क्लॉट (liver and blood clotting disorder) से जुड़ा विकार होता है। ये सिंड्रोम बच्चे के जन्म के बाद होता है लेकिन बीसवें हफ्ते की प्रेगनेंसी के बाद कभी भी हो सकता है।

हेल्प सिंड्रोम (HELLP syndrome) का प्रभावी ढंग से इलाज करने का एकमात्र तरीका है कि बच्चे की जल्द-से-जल्द डिलीवरी करना।

प्लेसेंटा में खराब रक्त प्रवाह (Poor blood flow to the placenta)

अगर प्लेसेंटा तक ब्लड सही तरीके से नहीं पहुंच रहा है, तो बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्व की कमी होने लगती है, जिससे बच्चे के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है, सांस लेने में परेशानी हो सकती है और समय पूर्व जन्म भी हो सकता है।

प्लेसेंटा का अलग होना (Placental abruption)

इस स्थिति में प्लेसेंटा गर्भाशय से बहुत जल्दी या यूं कहे कि प्रसव के पहले ही अलग हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप योनि से भारी रक्तस्राव (heavy bleeding) शुरू हो सकता है।

यह गर्भनाल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है और इससे माँ और बच्चे की जान का जोखिम बढ़ सकता है।

हृदय रोग (Cardiovascular disease)

जिन महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया होता है, उन्हें बाद में आगे चलकर हृदय रोग के बढ़ने का ख़तरा अधिक होता है।

उपयुक्त जोखिम आपके लिए तभी ख़तरनाक साबित हो सकते हैं, जब आप समय रहते उपचार की ओर रूख नहीं करते हैं।

उपचार द्वारा समय पर निदान से इन जटिलताओं को रोका जा सकता है।

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प्री-एक्लेम्पसिया से बचाव करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

What you can do to prevent preeclampsia? in hindi

Preeclampsia ko rokne ke liye aap kya sakte hain

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गर्भावस्था से संबंधित अधिकांश जटिलताओं के साथ, प्री-एक्लेम्पसिया को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी सभी प्रीनेटल विज़िट का हिस्सा ज़रूर बने।

ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान आपके द्वारा अनुभव किये गए किसी भी स्थिति का निदान जल्द करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा प्री-एक्लेम्पसिया के जोखिम को कम करने के अन्य तरीकों में शामिल है :

  • भरपूर मात्रा में पानी पिएं
  • फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड के सेवन से बचें
  • नमक का सेवन बहुत अधिक न करें
  • नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
  • शराब और कैफीन के सेवन से बचें
  • एक जगह पर बहुत देर तक न बैठे और पैरों की मूवमेंट करते रहे
  • आराम करें
  • आपके चिकित्सक द्वारा निर्धारित सप्लीमेंट्स और दवाएं लें

इन उपायों से ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने और प्रीक्लेम्पसिया से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

और पढ़ें:गर्भकालीन मधुमेह के कारण, लक्षण और उपचार
 

प्री-एक्लेम्पसिया का इलाज क्या है?

What is the treatment for preeclampsia? in hindi

Preeclampsia ka ilaj kya hai

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हल्के प्री-एक्लेम्पसिया के मामले में, डॉक्टर महिला को खासतौर पर बेड रेस्ट करने की सलाह देते हैं और ब्लड प्रेशर कम करने की सलाह दे सकते हैं।

ब्लड प्रेशर कम करने के लिए खाने में नमक का सेवन कम करें और पानी भरपूर मात्रा में पिएं।

स्थिति गंभीर होने पर निम्न उपचार विकल्पों की सिफारिश की जाती है :

दवाएं (Medicine)

डॉक्टर रक्तचाप को कम करने और दौरे की शुरुआत को रोकने के लिए दवा लेने की सलाह दे सकते हैं। प्रसव से पहले बच्चे के फेफड़ों को तैयार करने के लिए दवाएं भी निर्धारित की जा सकती हैं।

गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया के मामले में, डॉक्टर एंटीहाइपरेटिव थेरेपी (antihypertensive therapy) प्रेस्क्राइब कर सकते हैं और एक्लम्पसिया के लक्षणों की जांच भी कर सकते हैं।

कुछ मामलों में, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए नसों के ज़रिए दवाई दी जा सकती है।

बेड रेस्ट और मॉनिटरिंग (Bed rest and monitoring)

प्री-एक्लेम्पसिया के कुछ मामलों में, माँ और बच्चे की निरंतर निगरानी के साथ-साथ मेडिकेशन और बेड रेस्ट आवश्यक हो जाता है।

डिलीवरी (Delivery)

अगर महिला पर दवा का असर नहीं हो रहा है, तो गर्भ की आयु (gestational age) की परवाह किए बिना प्रसव का सुझाव दिया जाता है।

ये मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए, निरंतर निगरानी के तहत किया जाता है। असामान्य रक्तचाप के स्तर के मामले में दवाएं भी दी जाती हैं।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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