Garbh dharan karne se pahle ki yojana in hindi

गर्भधारण से पहले की योजना

Pre-pregnancy planning in hindi

Garbh dharan karne se pahle ki yojana in hindi

 

समय कितना भी आधुनिक हो जाये, लेकिन आज भी हर नारी बचपन से ही अपने अंदर मातृत्व का भाव समेटे होती है।

यह भाव तब प्रत्यक्ष रूप लेता है जब हर पल साथ देने वाला जीवनसाथी जीवन में प्रवेश कर लेता है।

इसके बाद गोद में खेलने वाला एक शिशु हर समय आँखों में एक सपना बनकर खेलता दिखाई देता है।

मगर इस सपने को बेहतर रूप से साकार करने के लिए  एक अच्छी योजना का होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि आने वाले बच्चे का भविष्य गर्भधारण से पहले की योजना पर ही आधारित होती है।

 

प्री-प्रेग्नेंसी योजना क्या होती है

What is Pre-Pregnancy planning in hindi

Pre-pregnancy planning kya hoti hai in hindi

Pre-pregnancy planning kya hoti hai in hindi

एक महिला के गर्भधारण करने से पहले दंपत्ति के द्वारा चिकित्सक के साथ सोच-समझ कर बनाई गई योजना ही 'प्री-प्रेग्नेंसी योजना' कहलाती है।

इस योजना में वह सभी बातें ध्यान में रखनी अनिवार्य होती हैं, जो किसी भी अन्य नियोजन कार्य में रखी जाती हैं।

सामान्य रूप से इन बातों में गर्भधारण करने वाली महिला के न्यूटरिशन (nutrition), शरीर को दिये जाने वाले ज़रूरी विटाममिन्स, शरीर का वज़न, किए जाने वाले व्यायाम को शामिल किया जाता है।

इसके अलावा गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचा सकने वाली दवाइयाँ और भावी माता-पिता या उनके परिवार में होने वाली बीमारियाँ, टीकाकरण आदि के बारे में विचार किया जाता है।

 

प्री-प्रेग्नेंसी प्लानिंग का क्या महत्व होता है

What is the importance of pre-pregnancy planning in hindi

Pre-pregnancy planning kyun jaruri hoti hai in hindi

Pre-pregnancy planning kyun jaruri hoti hai in hindi

परिवार में एक बच्चे का जन्म अनेकों ख़ुशियों का कारण होता है।

इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि भावी शिशु को जन्म से पहले और बाद में किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो।

इसके लिए शिशु का स्वागत करने वाले दंपत्ति को एक कुशल चिकित्सक के साथ मिलकर प्री-प्रेग्नेंसी प्लानिंग करनी चाहिए।

इस प्लानिंग का महत्व इन बातों से समझा जा सकता है :

  • गर्भावस्था नियोजन से महिला के गर्भकाल को सुरक्षित और एक स्वस्थ बच्चे के जन्म को सुनिश्चित किया जा सकता है।

  • प्रेग्नेंसी प्लानिंग में एक चिकित्सक के शामिल होने से गर्भवती महिला के लिए किसी आपात स्थिति में दी जाने वाली दवा को देते समय सावधानी बरतना सरल हो जाता है।

    ऐसे में उन दवाइयों को देने से रोका जा सकता है जो किसी भी रूप में गर्भवती महिला या उसके शिशु को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

  • कुछ महिलाओं को उनकी प्रेग्नेंसी की शुरुआत होने का पता नहीं चलता है और जब तक उन्हें अपनी वर्तमान स्थिति का पता लगता है, वे किसी न किसी दवा का सेवन कर चुकी होती हैं।

    लेकिन अगर प्री-प्रेग्नेंसी प्लानिंग का काम किया जाये तब प्रेग्नेंसी डॉक्टर की मदद से प्रेग्नेंसी के लक्षण का ज्ञान होने से किसी भी प्रकार की असावधानी को रोका जा सकता है।

  • जब भावी माता-पिता संतान को अपनी जिंदगी में शामिल करने का निर्णय लेते हैं तब चिकित्सक की सलाह लेना इस प्लानिंग का हिस्सा होता है।

    ऐसे में डॉक्टर, दंपत्ति के और माता के भी विभिन्न टेस्ट करवाती हैं।

    इन टेस्टों के माध्यम से दोनों में से किसी के परिवार में हुई किसी आनुवंशिक बीमारी का पता लग सकता है।

    इससे भावी शिशु को होने वाले खतरे से बचाने के लिए उपाय किए जा सकते हैं।

  • प्री-प्रेग्नेंसी प्लानिंग के अंतर्गत प्री-प्रेग्नेंसी टेस्ट अनिवार्य है जो केवल माता के होते हैं।

    इसके अलावा इन टेस्टों के आधार पर गर्भधारण करने वाली महिला को अनिवार्य टीके दिये जाते हैं।

    इसके साथ ही अगर किसी और इंजेक्शन की ज़रूरत हो, तब वह भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

 

प्री-प्रेग्नेंसी प्लानिंग कैसे करें

How to do pre-pregnancy planning in hindi

Pre-pregnancy planning ke liye mujhe kya karna chahiye in hindi

Pre-pregnancy planning ke liye mujhe kya karna chahiye in hindi

प्री-प्रेग्नेंसी प्लानिंग के तहत आपको कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखना होगा।

आइये एक नज़र उन मुख्य पर डालें :

अच्छे चिकित्सक से संपर्क करें (Consult a doctor) :

  • गर्भकाल के नियोजन का सबसे पहला काम है कि पति-पत्नी एक अच्छे प्रेग्नेंसी डॉक्टर से संपर्क करें।

  • वह डॉक्टर आपके आने वाले शिशु को ध्यान में रखकर कुछ टेस्ट करवा सकते हैं।

  • इन टेस्टों के माध्यम से डॉक्टर भावी शिशु के माता-पिता के परिवार में या उनको स्वयं किसी प्रकार की आनुवंशिक बीमारी के होने या होने की संभावना को सुनिश्चित करते हैं।

  • इसके अतिरिक्त शिशु के पिता की प्रजनन जांच (Fertility Test) की भी जांच करके संतानोत्पत्ति की संभावना की जांच की जाती है।

  • गर्भधारण करने वाली महिला कहीं डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome), थैलासीमिया (thalassemia) या सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic fibrosis) आदि रोगों से तो प्रभावित नहीं है, क्योंकि ऐसा होने पर शिशु का गर्भकाल असुरक्षित हो सकता है।

  • इसके अलावा महिला के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा, रक्तचाप, विटामिन डी की जांच के साथ ही यह भी देखते हैं कि कहीं भावी माता-पिता किसी संक्रामक रोग से तो ग्रस्त नहीं हैं।

  • ऐसा होने पर इलाज़ ज़रूरी हो जाता है। इसके साथ ही आपकी डॉक्टर आपको प्रेग्नेंसी से पहले लगने वाले टीकों की भी जानकारी देगी जिसका नियमित रूप से पालन करना जरूरी है।  

 गर्भधारण से पहले स्वस्थ शरीर और पोषण (Healthy body and nutrition) :

  • जब पति-पत्नी एक संतान को जन्म देने का निर्णय लेते हैं तब भावी माता को अपने शरीर के स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना अनिवार्य है।

  • गर्भधारण करने से पहले अपने आहार को हर प्रकार से पौष्टिक आहार का रूप देना अनिवार्य है।

  • आपको अपने भोजन में केवल वही तत्व शामिल करने होंगे जिनसे आपको हर तरह के विटामिन और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में सरलता से मिल सकें।

  • इसके लिए अपने आहार में साबुत अनाज, ताज़ फल, जूस और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना होगा।

  • इसके अतिरिक्त अत्यधिक फैट वाले बटर या रेडी टू कुक खाने की चीजें और पिज़्ज़ा, बर्गर आदि को अपने खाने की लिस्ट से बाहर करना होगा।

  • अपने खाने में आपको आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की मात्रा को अधिकतम करना होगा।

  • इसके लिए खाने-पीने की चीजों के साथ ही आप डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट्स का सेवन भी शुरू कर सकती हैं।

 गर्भावस्था से पहले शारीरिक वज़न और व्यायाम (Body weight and regular exercise) :

  • गर्भावस्था से पहले अपने शारीरिक वज़न की जांच कर लें।

  • अगर आपका वजन आदर्श वजन से अधिक है तो उसे कम करने के बाद ही प्रेग्नेंट होने का निर्णय लें।

  • इसके अतिरिक्त अपने दैनिक जीवन में व्यायाम और योग को नियमित रूप से शामिल करें।

  • इससे न केवल आपके शरीर में एनर्जी बनी रहेगी बल्कि मांसपेशियों भी दुरुस्त बनी रहेगी जो आपके पूरे गर्भाकाल के लिए बहुत जरूरी है।

  • इससे आप प्रेग्नेंसी में होने वाले अनिवार्य शारीरिक परिवर्तनों को आपका शरीर सरलता से स्वीकार कर सकेगा।

 गर्भावस्था से पहले वित्तीय नियोजन जरूरी है (Financial Planning) :

  • अपने जीवन में एक नयी जिंदगी को लाने से पूर्व उससे जुड़े सभी खर्च और जरूरत के सभी काम सरलता से हो सकें, इसके लिए आपको पहले फाइनेंशियल प्लानिंग भी करनी अनिवार्य है।

  • इसके लिए आप अपनी आय में से कुछ हिस्सा इस नाम से बचत के रूप में अलग कर सकती हैं। जिससे समय पर इस बचत का इस्तेमाल कर सकें।

 गर्भावस्था से पहले लाइफस्टाइल में सुधार जरूरी (Improve your lifestyle) :

  • आधुनिक युग में बदलते लाइफस्टाइल में महिलाओं की जिंदगी में भी तनाव अब अनिवार्य अंग बन गया है।

  • इसलिए प्रेग्नेंसी का निर्णय लेने से पहले आपको इस तनाव को दूर करके शांत जीवन जीने का अभ्यास करना होगा।

  • इसके लिए आप नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम और योग को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना सकती हैं।

  • इसके अतिरिक्त धूम्रपान और किसी भी तरह के नशे से दूरी बनानी बहुत ज़रूरी है।

  • अगर आपको दफ्तर के काम से हर समय कार्यालय से बाहर रहना पड़ता है या अधिकतर समय मेज़-कुर्सी पर पैर लटकाकर बैठना होता है तब इसमें भी एडजस्टमेंट (adjustment) करनी होगी।

  • किसी भी महिला के गर्भधारण से पहले उससे जुड़े हर पहलू को ध्यान में रखते हुए एक उपयुक्त योजना का बनाया जाना बहुत जरूरी होता है।

  • प्री-प्रेग्नेंसी नियोजन में एक अच्छे डॉक्टर से मिलकर हर प्रकार की वर्तमान, पूर्व और भविष्य में होने वाली किसी भी मेडिकल स्थिति के बारे में विचार-विमर्श करके, इस संबंध में उचित निर्णय लेना होगा।

  • अपने भोजन को पौष्टिक रूप देते हुए, नियमित व्यायाम हो भी जिंदगी का अनिवार्य अंग बनाना जरूरी है।

 

सारांश

Summary in hindi

Saransh in hindi

दरअसल एक शिशु को अपनी जिंदगी में लाने से पहले उससे जुड़ी हर बात के लिए आपको अपनी वर्तमान जिंदगी और लाइफस्टाइल में थोड़ा परिवर्तन करना होगा।

यह आपके स्वस्थ और निश्चिंत गर्भकाल से लेकर स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए अनिवार्य होता है।