पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के कारण, लक्षण, प्रकार और उपचार

Postpartum infection in hindi

Postpartum infection ke karan, lakshan, prakar or upchar, Causes, symptoms, types and treatment of postpartum infection in hindi


Introduction

Postpartum_infection_ke_karan__lakshan__prakar_or_upchar__Causes__symptoms__types_and_treatment_of_postpartum_infection_in_hindi_

बच्चे के जन्म के बाद, माँ के शरीर को ठीक होने और वापस अपनी पूर्व स्थिति में आने में समय लगता है। लेकिन इस दौरान कुछ महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद संक्रमण के होने की संभावना बढ़ जाती है।

चाहे आपने बच्चे को सामान्य प्रसव के माध्यम से जन्म दिया है या सिजेरियन ऑपरेशन की मदद से, दोनों ही स्थितियों में आपको प्रसव के बाद संक्रमण हो सकता है।

इस स्थिति को प्रसवोत्तर संक्रमण कहा जाता है। आइए जानते हैं कि क्यों और कैसे उत्पन्न होती है ये स्थिति और क्या हैं इसके कारण, लक्षण और उपचार।

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इस लेख़ में

  1. 1.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन क्या होता है?
  2. 2.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के प्रकार क्या हैं?
  3. 3.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के लक्षण क्या हैं?
  4. 4.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के कारण क्या हैं?
  5. 5.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन का निदान कैसे किया जाता है?
  6. 6.क्या पोस्टपार्टम इन्फेक्शन जटिलताओं का कारण बन सकता है?
  7. 7.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन का इलाज कैसे किया जाता है?
  8. 8.पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के लिए दृष्टिकोण क्या है?
  9. 9.क्या पोस्टपार्टम इन्फेक्शन से बचाव किया जा सकता है?
 

पोस्टपार्टम इन्फेक्शन क्या होता है?

What is postpartum infection in hindi

Postpartum infection kya hai

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प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) तब होता है, जब प्रसव के बाद बैक्टीरिया गर्भाशय और आस-पास के क्षेत्रों को संक्रमित कर देते हैं।

प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) को प्युपेरल इन्फेक्शन (puerperal infection) भी कहा जाता है।

प्रसव के दौरान गर्भवती महिला में संक्रमण होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है क्योंकि योनि और गर्भाशय ग्रीवा के चारों ओर विभिन्न प्रकार के कट या घाव होते हैं। अगर आपकी सीजेरियन डिलीवरी हुई है, तो घाव काफी समय तक ताज़ा रहता है।

प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) उन महिलाओं में अधिक आम है, जिनकी सीजेरियन डिलीवरी हुई है या जिनकी समय से पहले झिल्ली फट (premature membrane rupture) जाती है।

हालांकि, सामान्य प्रसव के बाद या स्तनपान कराने के दौरान भी प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) होना आम है।

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पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के प्रकार क्या हैं?

What are the types of Postpartum Infections in hindi

Puerperal infection ke prakar kya hain

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विभिन्न प्रकार के पोस्टपार्टम इन्फेक्शन हैं, जो बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं को प्रभावित करते हैं और वे गर्भाशय, पेट और अन्य भागों को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रसवोत्तर संक्रमण के सामान्य प्रकार निम्नलिखित हैं :-

1. एंडोमेट्रैटिस (Endometritis)

एंडोमेट्रैटिस गर्भाशय की आंतरिक परत (inner lining of the uterus) की सूजन होती है। इसके लक्षणों में बुख़ार, पेट के निचले हिस्से में दर्द और असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज शामिल हो सकते हैं। यह बच्चे के जन्म के बाद संक्रमण का सबसे आम कारण है।

2. प्युपेरल मैस्टायटिस (Puerperal mastitis)

ये इन्फेक्शन ब्रेस्ट के टिश्यू से जुड़ा हुआ है, जो ब्रेस्टफीडिंग के दौरान होता है। प्युपेरल मास्टिटिस इन्फेक्शन होने की संभावना तब बढ़ सकती है, जब स्तनपान के दौरान बैक्टीरिया मिल्क डक्ट (milk duct) में चले जाते हैं। बच्चे के जन्म से एक से तीन महीने बाद ब्रेस्ट इन्फेक्शन होने की संभावना अधिक होती है।

3. मूत्र पथ संक्रमण (Urinary tract infection)

मूत्र मार्ग संक्रमण या यूटीआई तब होता है, जब एक महिला के शरीर के बाहर कहीं से बैक्टीरिया उसके मूत्रमार्ग (मूल रूप से मूत्र पथ) के अंदर चला जाता है और संक्रमण का कारण बनता है।

4. घाव संक्रमण (Wound infection)

यह एक संक्रमण है, जो सी-सेक्शन के बाद होता है। इन क्षेत्रों के आस-पास बैक्टीरिया की उपस्थिति से महिला के शरीर में कट की जगह संक्रमित हो सकती है।

इस संक्रमण को विभिन्न लक्षणों से पहचाना जा सकता है जैसे : कट के पास लालिमा (एरिथेमा) होना, बुख़ार, जन्म देने के बाद पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।

5. पेरिनिअल इन्फेक्शन (Perineal infection)

इस प्रकार का संक्रमण, पेरिनियम (perineum) को प्रभावित करता है और जिन महिलाओं में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होती है, उनकी स्थिति और जटिल हो सकती है।

प्रसवोत्तर संक्रमण के अन्य रूप इस प्रकार हैं : -

  • पुडेंडल और पैरासर्विकल ब्लॉक संक्रमण (pudendal and paracervical block infection)
  • पेट में घाव का संक्रमण (abdominal wound infection)
  • इंट्रावेनस इन्फेक्शन (intravenous infection)
  • नरम ऊतक संक्रमण, आदि (soft tissue infection, etc)
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पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के लक्षण क्या हैं?

What are the symptoms of postpartum infection in hindi

Postpartum infection ke lakshan kya hain

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आपके बच्चे के जन्म के बाद, आपको आमतौर पर 2-5 दिनों के अंदर अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। हालांकि, ये आपके डिलीवरी के प्रकार, आपके स्वास्थ्य और शिशु के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

ऐसे में आमतौर डिलीवरी के तुरंत बाद या अस्पताल में रहने के दौरान संक्रमण का पता नहीं चलता है। एक बार घर वापस आने के बाद संक्रमण के लक्षण दिखने शुरू हो सकते हैं। वैसे तो संक्रमण के प्रकार के आधार पर लक्षण कई तरह से दिख सकते हैं, लेकिन प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) के कुछ सामान्य संक्रमणों का अनुभव आपको हो सकता है।

प्रसवोत्तर संक्रमण के कुछ सामान्य लक्षण हैं :-

  • तेज़ बुख़ार
  • निचले पेट या श्रोणि में सूजन के कारण दर्द होता है
  • दुर्गंधयुक्त योनि स्राव
  • त्वचा का पीला पड़ना, जो बड़ी मात्रा में रक्त के नुकसान का संकेत हो सकता है
  • ठंड लगना
  • बेचैनी या बीमारी का अनुभव करना
  • सरदर्द
  • भूख में कमी
  • हृदय गति की दर अचानक बढ़ना
  • यूरिन पास करने में परेशानी आना
  • अत्यधिक बालों का झड़ना
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पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के कारण क्या हैं?

What are the causes of postpartum infection in hindi

Puerperal infection ke karan kya hain

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प्रसव के बाद, महिला के शरीर में प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) होने का खतरा होता है, जो बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म-जीवों (microoranganism) के कारण होता है।

संक्रमण स्टेफिलोकोकस (staphylococcus) के कारण हो सकता है, एक बैक्टीरिया जो आमतौर पर बच्चे के मौखिक गुहा (oral cavity) में या मां के पेट (abdominal) और गर्भाशय के अस्तर (uterus lining) के अंदर होता है।

अतिरिक्त कारक हैं जो एक महिला को संक्रमण विकसित करने के लिए अधिक जोखिम में डाल सकते हैं।

ये कारक निम्न हो सकते हैं :

  • एनीमिया
  • मोटापा
  • बैक्टीरियल वेजिनोसिस (यौन संचारित संक्रमण)
  • प्रसव के दौरान कई योनि परीक्षाएं
  • भ्रूण की आंतरिक रूप से निगरानी करना
  • लंबे समय तक लेबर में रहना
  • एमनियोटिक थैली फटने और प्रसव के बीच अंतराल होना
  • प्रसव के बाद गर्भाशय में प्लेसेंटा का कुछ हिस्सा रह जाना
  • प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव
  • माँ की उम्र बहुत कम होना

गर्भाशय के संक्रमण के विकास की संभावना मुख्य रूप से प्रसव के प्रकार पर भी निर्भर करती है : -

  • सामान्य योनि प्रसव में 1 से 3 प्रतिशत
  • लेबर शुरू होने से पहले किए गए प्लान सिजेरियन प्रसव में 5 से 15 प्रतिशत
  • लेबर शुरू होने के बाद स्थिति को देखते हुए किए गए सिजेरियन प्रसव में 15 से 20 प्रतिशत
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पोस्टपार्टम इन्फेक्शन का निदान कैसे किया जाता है?

How is Postpartum infection diagnosed in hindi

Puerperal fever ya puerperal infection ka nidan kaise kiya jata hai

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शारीरिक परीक्षा (physical exam) के माध्यम से आपके डॉक्टर द्वारा प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) का निदान किया जा सकता है।

बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए यूरिन या ब्लड के सैंपल लिए जा सकते हैं या फिर यूरिन कल्चर के लिए कॉटन स्वैब की मदद से म्यूकस लिए जा सकते हैं।

यूरिन कल्चर एक तरह का टेस्ट होता है जो रोगाणु (germs - जैसे बैक्टीरिया) का पता लगाता है, जो संक्रमण का कारण बन सकता है।

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क्या पोस्टपार्टम इन्फेक्शन जटिलताओं का कारण बन सकता है?

Can postpartum infections cause complications in hindi

Kya puerperal fever jatiltaon ka karan ban sakta hai

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आमतौर पर प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) जटिलताओं का कारण नहीं बनता है, लेकिन इस ओर समय रहते ध्यान न दिया जाए या इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो इससे कुछ जटिलताएं हो सकती हैं।

प्रसवोत्तर संक्रमण की संभावित जटिलताएं हैं : -

  • पेरिटोनिटिस(peritonitis) या पेट की परत की सूजन
  • पैल्विक थ्रोम्बोफ्लिबिटिस (pelvic thrombophlebitis) या पेल्विक नसों में ब्लड क्लॉट
  • पल्मोनरी एम्बोलिस्म (pulmonary embolism) - ऐसी स्थिति जिसमें ब्लड क्लॉट फेफड़ों में एक आर्टरीज़ को ब्लॉक कर देता है
  • सेप्सिस (sepsis) या सेप्टिक शॉक (septic shock) - एक ऐसी स्थिति जिसमें बैक्टीरिया रक्त-प्रवाह में चले जाते हैं और ख़तरनाक सूजन पैदा करते हैं
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पोस्टपार्टम इन्फेक्शन का इलाज कैसे किया जाता है?

How are postpartum infections treated in hindi

Puerperal infection ka ilaj

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प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) का इलाज आमतौर पर ओरल एंटीबायोटिक दवाओं (oral antibiotics) की मदद से किया जाता है।

आपके डॉक्टर क्लिंडामाइसिन - क्लियोसीन (clindamycin - cleocin) या (जेंटामाइसिन - जेंटासोल) (gentamicin - gentasol) प्रेस्क्राइब कर सकते हैं।

बैक्टीरिया के प्रकार (type of bacteria) के आधार पर आपको एंटीबायोटिक्स दिए जाएंगे।

इसके अलावा आपको अपनी साफ़-सफाई पर मुख्य तौर पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि ज़्यादातर मामलों में साफ-सफाई में कोताही बरतने के कारण भी बैक्टीरिया पनपते हैं और इन्फेक्शन का कारण बन जाते हैं।

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पोस्टपार्टम इन्फेक्शन के लिए दृष्टिकोण क्या है?

What is the outlook for puerperal infection in hindi

Puerperal fever ke liye drishtikon kya hai

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प्युपेरल सेप्सिस (puerperal sepsis), प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) की एक संभावित जटिलता है। ये दुनिया में प्रसवोत्तर मृत्यु दर (postpartum mortality) के प्रमुख कारणों में से एक है।

प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection), खराब स्वास्थ्य और आपके बच्चे की डिलीवरी के बाद आपके रिकवर होने की प्रक्रिया को धीमा करने का कारण बनता है।

ऐसे में डिलीवरी के बाद इन्फेक्शन की संभावना तब ही कम हो सकती है, जब प्रसव के दौरान साफ़-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए।

अगर आपको इन्फेक्शन हो जाता है, तो संभावना है कि प्रारंभिक चिकित्सीय देखभाल से आप ठीक हो सकती हैं।

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क्या पोस्टपार्टम इन्फेक्शन से बचाव किया जा सकता है?

Can postpartum infections be prevented in hindi

Kya puerperal infection se bachaw kiya ja sakta hai

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गंदगी की स्थिति संक्रमण का कारण बन सकती है। प्रसवोत्तर संक्रमण कई बार खराब स्वास्थ्य देखभाल वाली जगहों पर होता है।

डॉक्टरों के बीच जागरूकता की कमी या अपर्याप्त स्वच्छता प्रणाली (insufficient sanitation system), संक्रमण की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।

प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक प्रसव के प्रकार हैं।

अगर आपको पहले से पता है कि आपकी सिजेरियन डिलीवरी होने वाली है, तो आपको अपने डॉक्टर से पूछना चाहिए कि इन्फेक्शन से आपका बचाव करने के लिए अस्पताल की ओर से क्या कदम उठाये जाते हैं।

एक शोध के अनुसार, अगर सिजेरियन डिलीवरी के समय कुछ सावधानियां बरती जाती हैं, तो प्रसवोत्तर संक्रमण (postpartum infection) के होने की संभावना को कम हो सकती हैं!

सिजेरियन डिलीवरी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां निम्न हैं : -

  • सर्जरी के पूर्व नहाने के लिए एंटीसेप्टिक जेल का इस्तेमाल करना
  • प्यूबिक हेयर हटाने के लिए रेज़र की जगह क्लिपर्स का इस्तेमाल करना
  • सर्जरी से पहले एंटीबायोटिक देना

कई अस्पतालों में संक्रमण होने के जोखिम को कम करने के लिए पहले से ही इनमें से कुछ उपाय किए जाते हैं।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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