निप्पल की समस्याएँ

Nipple Problems in hindi

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Introduction

निप्पल_की_समस्याएँ

हर महिला निपल समस्याओं से अपने जीवन में कभी न कभी ज़रुर गुजरती है, मगर जानकारी ना होने के कारण, निप्पल की समस्या का निदान नहीं जान पाती।

निप्पल शरीर का एक ऐसा हिस्सा है जिसके बारे में बहुत कम बात की जाती हैं, लेकिन असल मायनों में निप्पल का स्वस्थ होना आपके स्वास्थ्य के लिए काफी जरूरी है।

यह स्त्री और पुरुष दोनों के शरीर का अभिन्न अंग है मगर स्त्री के शरीर में इसकी महत्ता अधिक होती है।

स्तन के केंद्र में निप्पल स्थित होता है जो एरोला से घिरा होता है। एरोला निप्पल की आस-पास की त्वचा को कहते हैं। निप्पल द्वारा बच्चों को पोषण मिलता है, इसलिए शरीर के इस अंग की अनदेखी नहीं करना चाहिए।

आइये जानते हैं कि निप्पल में किस तरह की समस्या हो सकती है और निप्पल की समस्या का समाधान और उपचार कैसे किया जाए!

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इस लेख़ में

 

निप्पल की समस्याओं के लक्षण

Symptoms Of Nipple Problems in hindi

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निप्पल की समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं जैसे शरीर की कोई बीमारी या किसी चीज से एलर्जी।

निप्पल की समस्या महिलाओं और पुरुषों किसी को भी हो सकती है लेकिन यहाँ यह बात ध्यान देने वाली है कि निप्पल की हर समस्या कैंसर नहीं होती है, लेकिन यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है।

अगर आपके निप्पल से किसी तरह का स्त्राव (discharge) हो रहा है और आप गर्भवती नहीं है और स्तनपान नहीं करा रहीं हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

आइये जानते हैं कि निप्पल की समस्याओं के लक्षण क्या हो सकते हैं और इससे कै से बचा जा जाए।

निप्पल की समस्याओं के लक्षण निम्न हो सकते हैं :

  • निप्पल से रिसाव (Nipple Discharge)

अगर आप गर्भावस्था या स्तनपान कराने के दौर में नहीं हैं और आपके निप्पल से रिसाव हो रहा है तो ये चिंता का विषय है।

निप्पल से गाढ़े हरे रंग का, दूधिया, सफ़ेद पस या खूनी रिसाव के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये स्तन कैंसर का लक्षण भी हो सकता है।

  • निप्पल में खुजली (Itching Nipple)

अगर आपके निप्पल में लगातार खुजली की समस्या है तो ये भी निप्पल की समस्या की ओर इशारा करते हैं। निप्पल में खुजली किसी तत्व से एलर्जी होने के कारण भी हो सकती है।

  • निप्पल में क्रैक और खून निकलना (Cracked Nipple and Bleeding Nipple)

कई बार कपड़े की रगड़ से भी निप्पल में दरारें और खून निकलने जैसी समस्या देखने को मिलती है।

यह समस्या एथलीट (athletes) में ज्यादा देखने को मिलती है। जब भी ऐसी समस्या देखने को मिले डॉक्टर्स से संपर्क करें।

ड्राई स्किन के कारण भी निप्पल में क्रैक पड़ सकता है, समय-समय पर तेल या मॉशचेराइजर से मालिश करने से सूखेपन से निजात पाया जा सकता है।

  • निप्पल में सूजन (Swollen Nipple)

अगर आपके निप्पल में सूजन और दर्द है तो ये भी निप्पल की अस्वस्थता दर्शाता है। ऐसी स्थिति की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

  • निप्पल के आस-पास परिवर्तन (Changes Around Nipple Area)

निप्पल के आस-पास की त्वचा का सख्त और मोटा होना, त्वचा में पपड़ी जमना, निप्पल में एक्जिमा के लक्षण को दिखाता है। ये एक्ज़िमा फैले नहीं इसलिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेकर उसे फैलने से रोकने के उपाय करने चाहिए।

इसके अलावा आप अपने निप्पल या एरोला (निप्पल के आस-पास की त्वचा) के आकार में बदलाव महसूस कर सकती हैं, जैसे - त्वचा में दरार पड़ना, निप्पल पर डिम्पल पड़ना या त्वचा के रंग में परिवर्तन तो इन स्थितियों में अपने डॉक्टर से जल्द-से-जल्द मिलकर निप्पल की समस्याओं पर बात करें।

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बीमारियाँ जो निपल समस्याओं का कारण हो सकती हैं

Causes Of Nipple Problems in hindi

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निप्पल समस्याओं के कारण निम्न हो सकते हैं : -

  • गर्भावस्था
  • निप्पल में संक्रमण (nipple infection)
  • छोटे नॉन-कैंसर युक्त गाँठ
  • हाईपोथायरोइडिज्म (Hypothyroidism)
  • एकटैशिया - जिसमें दुग्ध वाहिनी (milk duct) चौड़ी हो जाती है
  • स्तन में चोट

कुछ अन्य तरह के बीमारियों जो निप्पल समस्या का कारण हो सकती है : -

  • जॉगर्स निप्पल (Jogger's Nipple)

आमतौर पर एथलीटों (athletes) को जॉगर्स निप्पल की समस्या का सामना करना पड़ता है। दरअसल, जब आप शारीरिक गतिविधि कर रहे होते हैं तो आपका निप्पल भी इरेक्ट हो जाता है। कपड़ों की रगड़ खाकर ये जख़्मी हो जाता है, जिससे खून बहने लगता है। इसे जॉगर्स निप्पल कहते हैं।

  • पेजेट की बीमारी मे निप्पल की समस्या (Paget’s Disease of the Breast)

पेजेट की बीमारी (Paget’s disease of the breast) स्तन कैंसर का ही एक दुर्लभ रूप है।

यह बीमारी ज्यादातर महिलाओं में पाई जाती है पर पुरुष भी इस बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं।

इस बीमारी में कैंसर की कोशिकाएं (cells) निप्पल के अंदर या उसके चारों तरफ वाली त्वचा में फैल जाती हैं।

पेजेट की बीमारी के दौरान निम्न लक्षण पाएं जाते हैं : -

  • खुजली झुनझुनी और निप्पल का रंग लाल ही जाना
  • निप्पल के चारों ओर परतदार, पपड़ीदार या मोटी त्वचा
  • निप्पल जो समस्या से अधिक सपाट दिखाई पड़ता है
  • निप्पल से पीले स्त्राव या खून का प्रवाह

यह सभी लक्षण दिखने पर जल्द-से-जल्द अपने डॉक्टर से मिलें। निप्पल की त्वचा की बायोप्सी कर इस तरह के कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

  • निप्पल में संक्रमण (Infection in Nipple)

निप्पल के आस-पास की त्वचा का मोटा हो जाना, पपड़ी जमना, निप्पल से रिसाव होना आदि निप्पल में संक्रमण को दर्शाता है।

और पढ़ें:एरोला और निप्पल से जुड़े तथ्य
 

निपल फंगल संक्रमण लक्षण, कारण और उपचार

Yeast Infection Or Fungal Infection Of Nipple And Breastin hindi

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स्तन और निप्पल थ्रश (breast and nipple thrush) या बीएनटी (BNT) एक तरह का फंगल इन्फेक्शन है, जो कैंडीडा एल्बिकंस (candida albicans) नामक फंगस से होता है।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं में निपल फंगल संक्रमण अत्यधिक सामान्य समस्या है। निप्पल में फंगल संक्रमण होने पर स्तन और निप्पल में असहनीय दर्द होता है, ख़ासकर स्तनपान कराते समय।

अगर स्तनपान करा रही महिला को निप्पल में फंगस इन्फेक्शन है तो बच्चे के मुंह में भी फंगल इन्फेक्शन होने का ख़तरा होता है।

निप्पल में फंगल संक्रमण के लक्षण निम्नलिखित हैं : -

  • निप्पल और स्तन में अत्यधिक दर्द, मुख्यतः स्तनपान के दौरान
  • निप्पल फंगल संक्रमण में दर्द इतना अधिक होता है कि हल्के स्पर्श या कपड़े की रगड़ से भी यह दर्द बढ़ जाता है
  • स्तन में रैश और खुजली
  • स्तन में दूध का सक्रीय कम हो जाना

निम्न स्थितियों में निप्पल फंगल संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है : -

  • स्तनपान के दौरान निप्पल में घाव हो जाना
  • प्रसव के तुरंत बाद एंटी-बायोटिक्स का इस्तेमाल
  • पहले कभी अधिक दिनों तक एंटी-बायोटिक्स का सेवन किया जाना
  • पहले कभी वेजाइनल संक्रमण से पीड़ित हुई हो तो
  • ब्रेस्ट पैड की वजन से आस-पास की त्वचा का नम हो जाना
  • अत्यधिक थकान या पौष्टिक आहार की कमी
  • यदि आप पहले से बीमारियों जैसे - डायबिटीज़, एनीमिया या एचआईवी से ग्रस्त हों

यही आप निपल फंगल संक्रमण से ग्रस्त हैं तो आपके डॉक्टर आपके शारीरिक परीक्षण और शरीर के तापमान की जांच करने के साथ-साथ कुछ लैब टेस्ट और ब्लड टेस्ट करा सकते हैं। इसके अलावा अगर आप स्तनपान करा रही हैं तो आपके स्तन के दूध का परीक्षण भी करा सकते हैं।

एंटी-फंगल (antifungal) दवाइयां खाने को दे सकते हैं और साथ ही साथ एंटी-फंगल ट्यूब स्तन और निप्पल पर लगने को दे सकते हैं।

अगर आप निपल फंगल संक्रमण से ग्रस्त हैं तो डॉक्टर आपको एंटी-फंगल (antifungal) दवाइयां खाने को दे सकते हैं और साथ ही साथ एंटी-फंगल ट्यूब स्तन और निप्पल पर लगाने के लिए भी दे सकते हैं।

लगातार हो रहे निप्पल फंगल संक्रमण से बचाव (Prevention from Regular Nipple Infection)

अगर आप लगातार निप्पल फंगल इन्फेक्शन से ग्रस्त हैं तो निम्न उपायों द्वारा आप निप्पल फंगल इन्फेक्शन को कंट्रोल कर सकती हैं : -

  • ढीलें और आरामदायक कपड़े पहनें, जो आपकी त्वचा की नमी को कम न होने दें
  • व्यायाम और बाहर से आने के बाद यदि आप पसीने से भरे हो तो नहाना न भूलें और त्वचा को अच्छे से सुखा लें।
  • अपने इनर-वेयर नियमित रूप से धोएं, ख़ासकर अगर आप फंगल संक्रमण से गुज़र रही हो तो
  • शुगर का सेवन कम करें और प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दही आपने खाने में शामिल करें।
  • अगर आप ओवरवेट यह डायबिटीज़ की शिकार हैं तो अपने डॉक्टर से मिलकर हेल्दी डाइट और जीवनशैली में बदलाव के बारे में ज़रुर सलाह लें।
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डॉक्टर निपल समस्याओं की पहचान कैसे करते हैं?

How Nipple Related Problems Are Diagnosed in hindi

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सबसे पहले तो डॉक्टर आपसे निपल समस्याओं के लक्षणों के बारे में पूछेंगे और आपसे आपके स्वास्थ्य संबंधित अन्य जानकारियाँ लेंगे जैसे -

  • अगर आप किसी तरह की मेडिसीन ले रही हों
  • अगर आपने हाल ही में खाने में कोई बदलाव किया हो
  • डॉक्टर आपसे आपके गर्भवती होने के बारे में पूछ सकते हैं

इन सब सवाल के अलावा डॉक्टर निम्न परीक्षणों द्वारा समस्या का पता लगा सकते हैं:

  • डक्टोग्राफी (Ductography)

अगर आपको निप्पल से किसी तरह के रिसाव या स्त्राव की समस्या है तो आपके डॉक्टर डक्टोग्राफी (ductography) नामक परीक्षण कर सकते हैं।

डॉक्टर इस प्रक्रिया से वह यह पता लगाते हैं कि निप्पल्स में तरल पदार्थ लाने वाली कितनी नलिकाएं (ducts) शामिल हैं।

डक्टोग्राफी के दौरान, डॉक्टर आपके स्तनों में मौजूद नलिकाओं में डाई इंजेक्ट (Dye inject) करते हैं और फिर नलिकाओं के कार्य की निगरानी के लिए एक्स-रे (X-ray) लेते हैं।

  • मैमोग्राम या ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड (Mammogram or Breast Ultrasound)

मैमोग्राम या ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड इमजिंग (imaging) परीक्षण हैं जो स्तन के अंदरुनी हिस्से की तस्वीर दिखाता है। इस तकनीक से ब्रेस्ट में किसी भी तरह की गाँठ का पता लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हर 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को साल में एक बार मैमोग्राम ज़रुर कराना चाहिए। यह परीक्षण ब्रेस्ट कैंसर का पता प्रारंभिक चरण लगाने में सहायक है।

  • त्वचा की बायोप्सी (Skin Biopsy)

जैसे कि हम लेख के शुरुआत में पेजेट की बीमारी (paget’s disease) के बारे में बता चुके हैं जो कि एक किस्म का दुर्लभ स्तन कैंसर है।

अगर आपके डॉक्टर को आपके पेजेट्स डिजीज से ग्रस्त होने की शंका होती है तो वह आपके निप्पल की त्वचा की बायोप्सी द्वारा जांच करा सकते हैं।

इसमें जांच के लिए आपके स्तन से त्वचा का एक छोटा टुकड़ा निकाला जाता है , जिसकी बायोप्सी जांच की जाती है।

  • प्रोलैक्टिन परीक्षण (Prolactin Test)

ऊपर दिए गए परीक्षण के अलावा डॉक्टर प्रोलैक्टिन टेस्ट भी करवा सकते हैं। प्रोलैक्टिन पित्युट्री ग्रंथि से सक्रिय होने वाला हार्मोन है। प्रोलैक्टीन का परीक्षण ब्लड टेस्ट द्वारा किया जा सकता है।

गर्भावस्था में प्रोलैक्टिन का सक्रिय होना, शरीर में दूध बनाने के लिए आवश्यक है। यह ब्लड टेस्ट, दूध प्रोडक्शन बढ़ाने वाले हार्मोन यानि प्रोलैक्टिन की जांच के लिए जरुरी है।

  • थायराइड हार्मोन परीक्षण (Thyroid Test)

कई बार निप्पल की समस्या थाइरोइड की समस्या से भी जुड़ी होती है। डॉक्टरों की मानें तो अगर आपको हाइपरथाइरोइड या अंडरएक्टिव थाइरोइड (hypothyroid or underthyroid) है तो आपको निप्पल से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए कई मामलों में डॉक्टर थाइरोइड टेस्ट की भी सलाह देते हैं। इसके लिए आपके खून की जांच की जाती है।

  • सिटी या एम्. आर. आई जांच (CT or MRI Scan)

अगर इनमें से कोई परीक्षण सफल नहीं होता तब आखिर में डॉक्टर स्तन का सिटी (CT scan) या एम्.आर.आई (MRI) जांच के लिए कहते हैं।

ये भी केवल इमेजिंग प्रक्रिया (Imaging procedure) है जो स्तन में गांठ, कैंसर या किसी संरचनात्मक विकृति के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

और पढ़ें:क्यों मैमोग्राम की आवश्यकता 40 पर शुरू होती है
 

निपल समस्याओं का इलाज़

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निप्पल के समस्या के इलाज के लिए मेडीसिन के अलावा गरम सेक से काफी आराम पंहुचता है। डॉक्टर निप्पल समस्या के कारण को जानकर निप्पल की समस्या के इलाज का निर्धारण करते हैं।

निप्पल की निम्न समस्याओं के आधार पर उपचार किया जाता है : -

  • निप्पल संक्रमण (Nipple Infection)

आपके डॉक्टर निप्पल संक्रमण या ब्रैस्ट संक्रमण का कारण जानकर आपके लिए उपयुक्त दवाइयों का निर्णय लेते हैं। जैसे - अगर निप्पल संक्रमण का कारण बैक्टीरियल इन्फेक्शन है तो डॉक्टर आपको एंटी-बीयोटिक्स दे सकते हैं।

  • कैंसर रहित छोटा ट्यूमर (Non-Cancerous Benign Tumor)

अगर आपके स्तन में गाँठ है जो कि कैंसर नहीं है तो विशेषज्ञ इसे निकालने की सलाह नहीं देते हैं क्योंकि इस की तरह की गाँठ बेनिंग (benign) होती है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है।

इस अवस्था में डॉक्टर आपको नियमित चेकअप के लिए लगातार बुला सकते हैं, इस दौरान वह ब्रेस्ट की गांठ पर नियमित नज़र रखते हैं।

  • एक्टासिया (Ectasia)

एक्टासिया या दूध नलियों में सूजन वैसे तो आम स्थिति है और आपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन यदि यह अपने आप ठीक नहीं हो रही तो आपके डॉक्टर सर्जरी द्वारा सूजी हुई दूध नलिकाओं को निकाल सकते हैं।

इसके अलावा गरम सेंक या मालिश से भी आपको ब्रेस्ट पेन और निप्पल की समस्याओं में आराम मिलेगा।

  • गर्म सेंक (Warm Compress)

अगर निप्पल में दर्द और सूजन है तो गर्म सेंक से इसमें आराम मिलता है।

  • एंटीबायोटिक कोर्स (Antibiotics Course)

अगर निप्पल में इन्फेक्शन है तो आपको डॉक्टर एंटीबायोटिक का कोर्स की सलाह दे सकते हैं।

  • पेट्रोलियम जेली और एंटीसेप्टिक क्रीम (Petroleum Jelly and Antiseptic Cream)

जॉगर्स निप्पल, पेट्रोलियम जेली या एंटीसेप्टिक क्रीम से ही ठीक हो सकता है, साथ ही डॉक्टर 2-3 दिन के आराम की सलाह दे सकते हैं।

  • मस्टेक्टॉमी (Mastectomy)

निप्पल में पैजेट की बीमारी के इलाज़ के लिए मस्टेक्टॉमी का उपयोग किया जा सकता है। यह एक सर्जरी है जिसके जरिये प्रभावित स्तन को हटाया जाता है।

याद रखें कि ब्रेस्ट की बीमारी और निप्पल की समस्याओं के लिए बाज़ार में कई दवाइयों उपलब्ध है पर बिना डॉक्टर की सलाह के आपको दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए।

और पढ़ें:जाने स्तन मसाज करने के लाभ
 

सारांश

Summaryin hindi

saransh

अधिकतर निप्पल की समस्या गंभीर नहीं होती और आसानी से इलाज हो जाता है मगर किसी भी प्रकार का जोखिम लेना सही नहीं है।

इसलिए जब भी निप्पल में किसी प्रकार का परिवर्तन दिखे तो हमें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। निप्पल में पैजेट की बीमारी गंभीर बीमारी है, पर इसका इलाज़ भी संभव है।

जितनी जल्दी रोग का पता चल जाता है उसका निदान उतना ही आसान हो जाता है। इसलिए किसी भी लक्षण की अनदेखी करना सही नहीं है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 12 May 2020

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