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लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) के लक्षण, पहचान, चरण और जटिलताएं

Signs, Symptoms, Stages and Complications Of Labor Pain in hindi

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कई गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा के बारे में जानने की इच्छुक रहती हैं। वो जानना चाहती हैं कि उन्हें लेबर पेन के वक़्त कैसा महसूस होगा, कितना समय लगेगा और कैसे पता चलेगा कि यह असली प्रसव पीड़ा है या सिर्फ अलार्म है।

अधिकतर मामलों में पहली बार गर्भवती हुई महिलाएं अपने और अपने होने वाले बच्चे की डिलीवरी के लिए चिंतित रहती है और यह जानना चाहती है कि आखिर प्रसव पीड़ा या लेबर पेन (labor pain in hindi) का अनुभव कैसा होता है।

वैसे तो हर महिला का प्रसव अलग होता है लेकिन यह सच है कि प्रसव के समय महिलाओं को अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि प्रसव के समय महिलाएं एक साथ बीस हड्डियों के टूटने जितना दर्द सहन करती है।

आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि प्रसव पीड़ा क्या होती है और प्रसव पीड़ा की पहचान कैसे करे, ताकि जब समय आये तो आप प्रसव पीड़ा के लिए तैयार रहे।

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इस लेख़ में/\

  1. प्रसव पीड़ा क्या होती है?
  2. प्रसव का सही समय क्या है?
  3. नॉर्मल डिलीवरी या प्रसव के लक्षण क्या हैं?
  4. लेबर या प्रसव के चरण क्या हैं?
  5. डिलीवरी के समय कितना दर्द होता है?
  6. फॉल्स लेबर क्या है?
  7. प्रेरित प्रसव पीड़ा क्या है?
  8. समय से पहले प्रसव क्या होता है?
  9. क्या बिना दर्द के प्रसव संभव है?
  10. घर पर लेबर पेन कैसे शुरू करें या लेबर पेन कैसे लाएँ?
  11. प्रसव से संबंधित जटिलताएँ क्या हैं?
  12. प्रसव पीड़ा के निम्न लक्षणों में आपने डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करे
  13. निष्कर्ष
 

1.प्रसव पीड़ा क्या होती है?

Labor Pain in hindi

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प्रसव, वह प्रक्रिया है, जो गर्भाशय के संकुचन से शुरू होती है और बच्चे की डिलीवरी के साथ समाप्त हो जाती है।

अपनी नियत तारीख के करीब आने के साथ-साथ आपको लेबर पेन के हल्के-फुल्के संकेत मिलने शुरू हो जाएँगे।

प्रसव पीड़ा का अंत बच्चे के जन्म के साथ होता है। प्रसव पीड़ा का आरम्भ हर महिला में अलग अलग तरीके से होता है।

कुछ महिलाओं को लेबर पेन का एहसास मासिक धर्म के दर्द के जैसा होता है, और कुछ लोगों को एकदम से अत्यधिक दर्द का अनुभव होता है।

प्रसव के दौरान महिला को माहवारी के समय आने वाली ऐठन के साथ साथ पीठ के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है। इसके साथ ही दस्त का लगना प्रसव पीड़ा का संकेत माना जाता है।

आइये इस लेख में जानते है कि लेबर पेन के लक्षण क्या हैं और प्रसव के दौरान महिला का शरीर बच्चे के जन्म के लिए कैसे तैयार होता है।

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2.प्रसव का सही समय क्या है?

Correct Time of Childbirth in hindi

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सामान्यतः प्रसव का समय आखिरी मासिक धर्म की पहली तारीख से ले कर 40 हफ़्तों तक मन जाता है।

महिला के प्रसव का कौन सा महीना चल रहा है इसका पता डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड से लगते हैं।

डॉक्टर 37वें से 42वें हफ्ते का समय प्रसव के लिए उपयुक्त मानते हैं। अगर प्रसव 37वें सप्ताह से पहले हो तो उसे समय से पहले प्रसव (premature birth or preterm labor) माना जाता है।

समय से पहले प्रसव बहुत नाज़ुक होता है क्योंकि इस समय तक शिशु के फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हुए होते हैं।

इस अवस्था में नवजात शिशु को कुछ दिनों के लिए हॉस्पिटल के NICU में रखा जाता है ताकि बच्चे की देखभाल सही से की जा सके।

जैसे कि हर महिला को गर्भावस्था के दौरान एक समान लक्षण नहीं होते वैसे ही प्रसव पीड़ा का अनुभव और प्रसव हर महिला में अलग होता है, लेकिन प्रसव पीड़ा के कुछ सामान्य लक्षण है।

जिनको ध्यान में रख कर गर्भवती महिला प्रसव का समय नज़दीक होने पर खुद को तैयार कर सकती है।

 

3.नॉर्मल डिलीवरी या प्रसव के लक्षण क्या हैं?

Symptoms of Labor Pain in hindi

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योनी मार्ग से प्रसव डिलीवरी का सामान्य तरीका है। परन्तु आज कल प्रसव सामान्य दो प्रकार के होते है - नार्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी

कभी-कभी किन्हीं कारणों के प्रसव पीड़ा अनुमानित समय से पहले भी शुरू हो सकते हैं।

महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान ऐसे कई संकेत हैं जो यह बताते हैं कि प्रसव जल्दी शुरू होगा।

यदि आप लेबर पेन शुरु होने के निम्नलिखित लक्षणों में से कोई भी महसूस करती हैं, तो अपने डॉक्टर से तुरंत मिलें - भले ही यह आपकी नियत तारीख से हफ्तों पहले हो।

आपके डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि अस्पताल जाने का समय है या नहीं।

प्रसव के लक्षण निम्न हैं :

  • आपके पीठ के निचले हिस्से में अत्यधिक दर्द और क्रेम्प्स हों।
  • आपकी पानी की थैली फट जाती है। जब यह फटती है, तो द्रव बाहर रिसना शुरु होता है और आपकी योनि से बाहर आता है।
  • आपको लाल रंग का म्यूकस डिस्चार्ज (mucus discharge) होता है। यह संभवतः म्यूकस प्लग (mucus plug) है जो गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को अवरुद्ध करता है।
  • अपने म्यूकस प्लग को खोने का आमतौर पर मतलब है कि आपका गर्भाशय ग्रीवा पतला और नरम हो रहा है। प्रसव इसके तुरंत बाद शुरू हो सकता है या अभी कई दिन दूर भी हो सकता है।
  • पीठ दर्द, दस्त और पेट खराब होना प्रसव पीड़ा का संकेत हो सकते हैं।
  • पीरियड्स के दर्द के समान, ऐंठन या कसना प्रसव पीड़ा का संकेत हो सकता है।
  • जब बच्चे का सिर पेल्विस में जाता है तो यह आपकी आंत को दबाता है। इससे आपको शौचालय जाने की इच्छा तीव्र हो सकती है।

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4.लेबर या प्रसव के चरण क्या हैं?

Stages of Labor in hindi

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प्रसव पीड़ा के मुख्यता तीन चरण होते हैं - गर्भाशय ग्रीवा का छोटा और बड़ा होना, संकुचन के कारण बच्चे का जन्म लेने के लिए आगे खिसकना और बच्चे का जन्म होना और प्लेसेंटा का बहार आना। आइये लेबर पेन के चरणों को विस्तार से जानते हैं।

लेबर पैन के चरण निम्नलिखित हैं :

प्रसव पीड़ा का प्रथम चरण: प्रारंभिक प्रसव पीड़ा (Early labor pain)

अवधि : 6 घंटे या उससे अधिक समय

प्रसव पीड़ा या लेबर पेन पहला चरण तब होता है जब गर्भवती महिला का संकुचन बढ़ जाते हैं और आपका गर्भाशय ग्रीवा (cervix) खुलने लगता है।

यह आमतौर पर सबसे लंबी स्थिति है। आपका गर्भाशय ग्रीवा 3 से 4 सेंटीमीटर तक खुल जाता है।

प्रारंभिक प्रसव पीड़ा में आमतौर पर, हल्के से मध्यम संकुचन 30 से 60 सेकंड तक होते हैं और हर 5 से 20 मिनट में होते हैं। धीरे-धीरे ये संकुचन गंभीर होते जाते हैं और अधिक बार होते हैं।

प्रसव पीड़ा का दूसरा चरण: सक्रिय प्रसव पीड़ा (Active labor pain)

अवधि : लगभग 2 से 8 घंटे

यह प्रसव पीड़ा का दूसरा चरण है और इस दौरान संकुचन लगातार और गंभीर होते रहते हैं और महिला का गर्भाशय ग्रीवा 7 सेंटीमीटर तक फैल जाता है।

इस दौरान अत्यधिक दर्द के ज्यादातर महिलाएं दर्द की दवा का अनुरोध करती हैं, हालांकि कभी-कभी दर्द निरोधक दवाई इस अवस्था से पहले भी दी जाती है।

प्रसव पीड़ा का तीसरा चरण: ट्रांजिशन प्रसव पीड़ा (Transition labor pain)

अवधि : 1 घंटे तक

प्रसव पीड़ा का यह दर्द सबसे गंभीर होता है क्योंकि महिला का गर्भाशय ग्रीवा 10 सेंटीमीटर तक फैल जाता है।

इस अवस्था में तीव्र और बार-बार होने वाले संकुचन के अलावा, गर्भवती महिला अपनी पीठ, कमर, यहां तक ​​कि अपने जांघों में दर्द के साथ-साथ मतली (nausea) भी महसूस कर सकती हैं।

प्रसव पीड़ा का चौथा चरण: पुशिंग प्रसव पीड़ा (Pushing labor pain)

अवधि : कुछ मिनट से 3 घंटे

तीव्र दर्द के साथ-साथ प्रसव पीड़ा के इस दौर में भारी दबाव भी महसूस होता है क्योंकि इस दौरान गर्भवती महिलाएं अपने बच्चे को बाहर धकेलना चाहती हैं।

प्रसव पीड़ा या लेबर पेन के इस चरण में बच्चे का सिर दिखाई देने लगता है साथ ही योनि जैसे-जैसे फैलती है, महिलाएं इसके चारों ओर एक जलन और चुभने वाला दर्द अनुभव कर सकती हैं।

प्रसव पीड़ा का अंतिम चरण: प्लेसेंटा डिलीवरी पेन (Placenta delivery pain)

अवधि : 30 मिनट तक यह चरण अपेक्षाकृत आसान होता है

प्रसव का यह अंतिम चरण होता है और लेबर पेन के इस चरण में हल्के, ऐंठन वाले संकुचन महसूस होते हैं जो प्लेसेंटा (नाल) को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

 

5.डिलीवरी के समय कितना दर्द होता है?

How Much Pain Does a Woman Experience During Childbirth in hindi

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सभी महिलाओं को खास कर गर्भवती महिला को इस बात की चिंता रहती है कि वे प्रसव और प्रसव के दर्द से कैसे निपटेंगी।

प्रसव सभी के लिए अलग होता है, आप पहले से इस बात का अंदाज़ा नहीं लगा सकती कि प्रसव के वक़्त आप कैसा महसूस करेंगी।

गर्भाशय एक मस्कुलर ऑर्गन (muscular organ) है जो आपके बच्चे को बाहर धकेलने के लिए शक्तिशाली रूप से सिकुड़ता है, और ये संकुचन प्रसव दर्द या लेबर पेन का प्राथमिक स्रोत है।

प्रसव के दौरान एक महिला को कितना दर्द होगा, यह संकुचन की ताकत सहित कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि आपके बच्चे का आकार और श्रोणि (pelvic) में उसकी स्थिति - वह फेसअप (faceup) है या फेस्डाउन (facedown), प्रसव की गति आदि ।

आपके पूरे पेट और कभी-कभी, आपके पूरे धड़ और श्रोणि क्षेत्र में तीव्र मांसपेशियों की जकड़न के अलावा, आप अपनी पीठ, मूत्राशय (bladder) और आंत्र (bowels) पर दबाव महसूस कर सकते हैं।

आनुवंशिक (hereditary) कारक और जीवन के अनुभव, आपके दर्द की सीमा या दर्द को झेलने की क्षमता को निर्धारित करते हैं।

प्रसव की ओर सकारात्मक रहने के लिए, अपने डॉक्टर से जानकारी लें। अपने प्रश्नों को लिखें और डॉक्टर से उनके बारे में बात करें। अपने डर और भावनाओं को दोस्तों, परिवार और अपने साथी के साथ शेयर करें।

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6.फॉल्स लेबर क्या है?

What is False Labor in hindi

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कई महिलाएं, विशेष रूप से पहली बार प्रेग्नेंट हुई महिलाएं सोचती हैं कि वे प्रसव में हैं जबकि वे होती नहीं हैं। इसे फॉल्स लेबर (false labor) या झूठा प्रसव कहा जाता है।

ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (braxton hicks contractions) नामक ये "प्रैक्टिस" संकुचन गर्भावस्था के आखिरी हफ्तों में या उससे पहले आम हैं।

आपके गर्भाशय का कसना आपको चौंका सकता है। यह दर्दनाक हो सकता है या फिर इस दौरान आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।

कई महिलाएं ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन को प्रसव पीड़ा की शुरुआत समझने कि भूल कर बैठती हैं।

तो फिर कैसे पता करें कि आपके संकुचन सच में प्रसव पीड़ा में हैं? इसके लिए आपको संकुचन के समय पर नज़र रखनी होगी।

दो संकुचन के बीच के समय पर नज़र रखने के लिए एक घड़ी का उपयोग करें, साथ ही प्रत्येक संकुचन कितने समय तक रहता है, इसपर भी ध्यान देना ज़रूरी है। वास्तविक प्रसव पीड़ा के दौरान, संकुचन नियमित, गंभीर और अधिक होते जाते हैं।

ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन एक नियमित पैटर्न में नहीं होते हैं और वे बंद हो जाते हैं और थोड़ी देर बाद रूक जाते हैं।

कुछ महिलाओं की गतिविधि में बदलाव, जैसे चलना या लेटना, ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन को दूर कर देता है। सच्चे प्रसव के साथ ऐसा नहीं होगा।

इन दिशा-निर्देशों के साथ भी, यह बताना कठिन हो सकता है कि क्या प्रसव वास्तविक है। यदि आप इस बात को लेकर दुविधा में हैं कि संकुचन सच में प्रसव है या फॉल्स लेबर पेन है, तो अपने डॉक्टर से मिलें।

 

7.प्रेरित प्रसव पीड़ा क्या है?

Induced Labor in hindi

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गर्भावस्था के 37वें से 42वें सप्ताह के बीच सामान्य रूप से किसी भी समय प्रसव शुरू हो सकता है।

गर्भाशय ग्रीवा नरम हो जाती है और खुलने लगती है, आपको संकुचन होते हैं और आपकी पानी की थैली टूट जाती है।

लेकिन प्रेरित प्रसव पीड़ा या इंड्यूसड लेबर में, इन प्रसव प्रक्रियाओं को कृत्रिम रूप से शुरू किया जाता है।

डॉक्टर गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे की सेहत और गर्भावस्था के जोखिम को ध्यान में रखते हुए प्रसव को कृत्रिम रूप से करने का निर्णय लेते हैं।

इसमें यंत्र की मदद से आपके गर्भाशय ग्रीवा को खोलना, आपके पानी की थैली को तोड़ना या आपके संकुचन को शुरू करने के लिए दवा का उपयोग करना शामिल हो सकता है।

एक प्रेरित प्रसव, प्राकृतिक प्रसव की तुलना में अधिक दर्दनाक हो सकता है। प्राकृतिक प्रसव में, संकुचन धीरे-धीरे बढ़ता है। लेकिन, प्रेरित प्रसव में ये संकुचन अधिक तेज़ी से शुरू होते है और दर्दनाक हो सकते हैं।

दर्द से राहत के लिए डॉक्टर आपको दवाइयाँ दे सकते हैं। यदि आपको या आपके बच्चे के स्वास्थ्य को कोई जोखिम है तो आपके डॉक्टर प्रेरित प्रसव की सिफारिश कर सकते हैं।

अगर समय रहते आपको प्राकृतिक रूप से प्रसव पीड़ा नहीं उठती है तो इस स्थिति में डॉक्टर आपकी और आपके बच्चे की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लेबर पेन को कृत्रिम रूप से प्रेरित कर सकते है।

निम्नलिखित स्थितियों में प्रेरित प्रसव पीड़ा या इंड्यूसड लेबर को रेकम्मेंड किया जाता है :

  • आप 41 सप्ताह से अधिक गर्भवती हैं और नेचुरल तरीके से प्रसव पीड़ा का अनुभव नहीं कर रही है।
  • यदि डॉक्टर को लगता है कि प्लेसेंटा ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है।
  • आप मधुमेह (diabetes), गुर्दे (kidney) की समस्याएं या उच्च रक्तचाप से ग्रस्त है।
  • शिशु की गतिविधि नॉर्मल नहीं है, उसकी हृदय गति परिवर्तन दिखा रही है या शिशु का विकास ठीक से नहीं हो रहा।
  • आपकी पानी की थैली टूट गई है, लेकिन संकुचन स्वाभाविक रूप से शुरू नहीं हुआ है।
  • यदि आपके गर्भ में एक से अधिक बच्चे हो।

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8.समय से पहले प्रसव क्या होता है?

Preterm Labor in hindi

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37 सप्ताह पूरे होने से पहले यदि गर्भाशय, दबाव के कारण खुलना शुरू हो जाता है तो इसे समय से पहले प्रसव या प्रिटर्म लेबर (preterm labor) कहा जाता है।

ज्यादातर मामलों में, प्रीटर्म लेबर अप्रत्याशित रूप से शुरू होता है और इसका कारण अज्ञात है।

समय से पहले प्रसव के लक्षण भी नियमित प्रसव की तरह ही होते हैं : -

  • हर 10 मिनट पर या अधिक बार संकुचन (पेट एक मुट्ठी की तरह कसता है)।
  • योनि स्राव (vaginal discharge) में बदलाव (योनि से स्राव या रक्तस्राव की मात्रा में वृद्धि)।
  • श्रोणि पर दबाव (Pelvic pressure) - यह महसूस करना कि शिशु नीचे की ओर धकेल रहा है।
  • हल्का और सुस्त पीठ दर्द।
  • ऐंठन जो मासिक धर्म की तरह महसूस होती है।
  • दस्त के साथ या बिना, पेट में ऐंठन या क्रेम्प्स (abdominal cramps)।

अगर आपको लगता है कि आप प्रीटर्म लेबर का अनुभव कर रही हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप डॉक्टर से तुरंत मिलें।

यदि आपको समय से पहले प्रसव पीड़ा हो रही है, तो आपके डॉक्टर आपको दवा दे सकते हैं, ताकि जन्म के समय बच्चा स्वस्थ हो। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे अक्सर जटिल मेडिकल समस्याओं से ग्रस्त होते हैं।

आमतौर पर, जटिलताएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि बच्चे का जन्म कितनी जल्दी हुआ है। अपेक्षित समय से जितने पहले बच्चे का जन्म होगा, जटिलताओं का ख़तरा उतना अधिक होगा।

समय से पहले प्रसव पीड़ा महसूस करने वाली पचास प्रतिशत महिलाएं 37 सप्ताह पूरे करने के बाद ही बच्चे को जन्म देती हैं।

इसलिए ज़रूरी नहीं कि प्रीटर्म लेबर या 37वें सप्ताह के पूर्व की लेबर पेन के कारण हमेशा बच्चे का जन्म समय से पहले हो।

 

9.क्या बिना दर्द के प्रसव संभव है?

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प्रसव दर्द को कम करने या बिना दर्द के प्रसव के दो तरीके हैं। पहला प्राकृतिक और दूसरा चिकित्सीय।

1. प्रसव पीड़ा को कम करने के प्राकृतिक तरीके (Natural methods)

कई प्राकृतिक तरीके प्रसव दर्द को कम करने में मददगार होते हैं।

प्रसव दर्द को कम करने में शामिल हैं : -

  • श्वास और विश्राम तकनीक (Rhythmic breathing)

यह एक तरह की रिलैक्सेशन का तरीका है जिसमे आप प्रसव पीड़ा के दौरान धीरे धीरे अपनी सांस को भीतर लेती और छोड़ती है। यह एक्सरसाइज आपको प्रसव से पहले होने वाली लामज़ क्लासेज में सिखाई जाती है।

  • गर्म स्नान (Warm showers)

लेबर पेन के दौरान गर्म पानी का स्नान या गर्म पानी का सेक प्रसव पीड़ा के दर्द को कम करता है साथ ही साथ यह प्रसव को गति भी प्रदान करता है।

  • मालिश (Massage)

पीठ के निचले हिस्से में मालिश भी प्रसव पीड़ा में आराम प्रदान करती है. प्रसव पीड़ा के दौरान हलके हाथों से मालिश महिला को संकुचन के दर्द से आराम दिलाती है। मालिश के लिए आप टेनिस गेंद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

  • धीरे टहलना (Keep moving)

प्रसव के दर्द से आराम पाने के लिए धीरे-धीरे टहलना भी लाभदायक होता है. इस स्थिति में कुछ पोजीशन ज्यादा आरामदायक हो सकती है।

प्रसव के दौरान आरामदायक स्थिति खोजने जैसे, स्टैंड, क्राउच, सिट, वॉक, आदि से भी लेबर पेन से आराम मिल सकता है

  • प्रसव पीड़ा को कम करने के आसन तरीके (Other simple steps)

गर्मी और ठंड का उपयोग करना, जैसे कि पीठ के निचले हिस्से पर गरम और माथे पर ठंडे वॉशक्लॉथ का प्रयोग और किसी साथी या नर्स की सहायता व देखभाल भी प्रसव पीड़ा को सहनीय बनाता है.

2. प्रसव पीड़ा को कम करने के चिकित्सीय तरीके (Medical methods)

आजकल प्रसव दर्द के लिए महिलाओं के पास कई दर्द-निवारक विकल्प हैं जो एक प्रशिक्षित और अनुभवी चिकित्सक द्वारा दिए जाने पर अच्छी तरह से काम करते हैं।

आपके डॉक्टर या नर्स यह तय करने में आपकी मदद कर सकते हैं कि आपके लिए कौन-सा दर्द-निवारक विकल्प सबसे अच्छा है।

डॉक्टर प्रसव के लेबर के अलग-अलग चरणों में, दर्द से राहत के लिए, विभिन्न तरीकों का भी उपयोग कर सकते हैं। फिर भी, हर अस्पताल और नर्सिंग होम में सभी विकल्प उपलब्ध नहीं होते हैं।

साथ ही, आपकी मेडिकल हिस्ट्री (medical history), एलर्जी, और आपकी गर्भावस्था की कोई समस्या दूसरों की तुलना में कुछ तरीकों को बेहतर बनाएगी।

प्रसव के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले दर्द से राहत के तरीके नीचे दिए गए हैं। ध्यान रखें कि दुर्लभ, लेकिन गंभीर प्रसव संबंधित जटिलताएं कभी-कभी ही होती हैं।

अपने चिकित्सक से जान लें कि प्रसव के बाद दर्द निवारक तरीके आपके बच्चे या आपके स्तनपान की क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

1) ओपीओइड्स (Opioids)

ओपीओइड्स को मादक पदार्थ (narcotics) भी कहा जाता है। ये ट्यूब के माध्यम से या इंजेक्शन के द्वारा दी जाने वाली दवाएं हैं।

ओपीओइड्स दर्द को सहने योग्य बना सकते हैं और (बच्चे को जन्म देने के लिए) धक्का देने की आपकी क्षमता को प्रभावित नहीं करते है।

इनके नुकसान निम्नलिखित हैं: -

  • ओपिओयड्स सभी दर्द से छुटकारा नहीं देते हैं, और थोड़ी देर के लिए ही काम करते हैं।
  • ये आपको सुला सकते हैं।
  • ये मतली (nausea) और उल्टी पैदा कर सकते हैं।
  • ये खुजली का कारण बन सकते हैं।
  • प्रसव से ठीक पहले ओपिओइड नहीं दिया जा सकता क्योंकि ये जन्म के समय बच्चे की सांस लेने और हृदय गति को धीमा कर सकते हैं।

2) एपिड्यूरल और स्पाइनल ब्लॉक्स (Epidural and spinal blocks)

एक एपिड्यूरल में एक ट्यूब (कैथेटर) को रीढ़ की हड्डी के नीचे एक छोटी जगह में रखना शामिल होता है। आवश्यकतानुसार, पूरे प्रसव में, ट्यूब के माध्यम से दवाओं की छोटी-छोटी खुराकें दी जा सकती हैं।

स्पाइनल ब्लॉक में, दवा की एक छोटी खुराक को रीढ़ की हड्डी में, स्पाइनल फ्लुइड (spinal fluid) में दिया जाता है। रीढ़ की हड्डी के ब्लॉक आमतौर पर केवल एक बार प्रसव के दौरान दिए जाते हैं।

एपिड्यूरल और स्पाइनल ब्लॉक प्रसव के दौरान, ज्यादातर महिलाओं को, जागृत और सतर्क रखना दर्द को कम करने में मददगार साबित होता है। एपिड्यूरल के मामले में, दवा दिए जाने के 10 से 20 मिनट बाद दर्द में राहत मिलती है।

प्रसव के दौरान, सुन्नता के स्तर को नियंत्रित भी किया जा सकता है। स्पाइनल ब्लॉक के मामले में, दर्द से राहत तुरंत मिल जाती है, लेकिन इसका असर 1 से 2 घंटे तक रहता है।

इनके निम्नलिखित साइड एफफ़ेक्ट्स (side effects) हो सकते हैं :

  • यह आपके रक्तचाप को कम कर सकता है, जो आपके बच्चे के दिल की धड़कन को धीमा कर सकता है।
  • यदि स्पाइनल कॉर्ड के कवर इस दौरान पंचर हो जाये, तो आपको गंभीर सिरदर्द हो सकता है, हालांकि उपचार से सिरदर्द में मदद मिल सकती है।
  • प्रसव के बाद कुछ दिनों तक पीठ दर्द रहता है।
  • एपिड्यूरल, प्रसव के पहले और दूसरे चरण को लम्बा खींच सकता है।
  • अगर लेबर में देर से दवा दी जाती है या बहुत अधिक दवा का उपयोग किया जाता है, तो समय आने पर बच्चे को धक्का देना मुश्किल हो सकता है।
  • अध्ययन बताते हैं कि एपिड्यूरल से असिस्टेड वेजाइनल डिलीवरी (assisted vaginal delivery) का ख़तरा बढ़ जाता है।

3) पुडेंडल ब्लॉक (Pudendal block)

इस तकनीक में योनि और पास के पुडेंडल नर्व (pudendal nerve) में सुन्न करने वाली दवा इंजेक्ट की जाती है।

यह तकनीक प्रसव के दौरान, देर से इस्तेमाल की जाती है, आमतौर पर बच्चे के सिर से बाहर आने से पहले।

पुडेंडल ब्लॉक के इस्तेमाल से आपको दर्द से राहत मिलती है और आप जागृत, सतर्क और बच्चे को बाहर निकालने में सक्षम भी रहती हैं।

शिशु इस दवा से प्रभावित नहीं होता है और इसके बहुत कम नुकसान होते हैं।

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10.घर पर लेबर पेन कैसे शुरू करें या लेबर पेन कैसे लाएँ?

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यदि आप प्रेग्नेंसी के 40वें सप्ताह में हैं, तो आप नीचे दिये गए प्राकृतिक तरीकों से घर पर लेबर पेन ला सकती हैं। लेकिन इनमें से किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से बात ज़रूर कर लें।

आपके डॉक्टर बता पाएंगे कि निम्न उपायों को अपनाना आपके लिए कितना सुरक्षित है : -

1. व्यायाम (Exercise)

कोई भी ऐसा व्यायाम करें जो हृदय गति को बढ़ा देता है, जैसे कि लंबी सैर।

यह तनाव दूर करने और बच्चे के जन्म के लिए आपके शरीर को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

2. सेक्स (Sex)

सेक्स कई तरीकों से प्रसव को प्रेरित कर सकता है।

उदाहरण के लिए, सेक्स ऑक्सीटोसिन (oxytocin) जारी कर सकता है, जो गर्भाशय के संकुचन को शुरू करने में मदद कर सकता है।

ऑक्सीटोसिन वह हार्मोन है जो गर्भाशय को सिकोड़ने और दूध को स्तन से बाहर निकालने का कारण बनता है।

यौन संबंध पूरे कार्यकाल में सुरक्षित है, लेकिन आपकी पानी की थैली टूट जाने के बाद आपको सेक्स नहीं करना चाहिए।

ऐसा करने से आपके संक्रमण का ख़तरा बढ़ सकता है।

3. निप्पल की उत्तेजना (Nipple stimulation)

आपके निपल्स को उत्तेजित करने से आपका गर्भाशय सिकुड़ सकता है और प्रसव पीड़ा हो सकती है।

4. एक्यूपंक्चर (Acupuncture)

एक्यूपंक्चर शरीर में ऑक्सीटोसिन की रिहाई को उत्तेजित कर प्रसव शुरू करने में मदद करता है।

5. एक्यूप्रेशर (Acupressure)

एक्यूप्रेशर लगाने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपको एक प्रशिक्षित एक्यूप्रेशर पेशेवर से उचित निर्देश मिले।

यदि एक्यूप्रेशर से आपका प्रसव शुरू नहीं भी होता है, तो भी यह लेबर पेन और प्रसव की असुविधा को कम करने का एक शानदार तरीका है।

 

11.प्रसव से संबंधित जटिलताएँ क्या हैं?

What are the complications of labor? in hindi

Delivery se sambandhit complications in hindi</strong>

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पूरी तरह से स्वस्थ और प्रसव के लिए तैयार होने के बावजूद आपको प्रसव के दौरान कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता हैं।

प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताये इस प्रकार हैं:

1. प्रसव की धीमी प्रगति (Slow progress of labor)

यदि आपकी गर्भाशय ग्रीवा धीरे-धीरे खुल रहा है, या संकुचन धीमा हो गया है, तो संभव है कि आपका लेबर आगे नहीं बढ़ रहा है।

जल्दी प्रसव करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित में से कुछ सुझाव दे सकते हैं :

  • उस स्थिति में लेटने/बैठने को कह सकते हैं जिसमें आप आराम महसूस करें।
  • घूमना - फिरना बच्चे को और नीचे ले जाने और संकुचन को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है।
  • गर्म स्नान।
  • पीठ रगड़ने का सुझाव।
  • अपनी ऊर्जा वापस पाने के लिए एक झपकी लें।
  • डॉक्टर आपके संकुचन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सिंटोसिनॉन के साथ इंट्रावेनस ड्रिप (intravenous drip with syntocinon) डालने का सुझाव दे सकते हैं।

2. जब बच्चा असामान्य स्थिति में होता है (Unusual position of the baby)

अधिकांश शिशुओं का जन्म सिर से होता है, यानि बच्चे के जन्म के समय उसका सर योनि से पहले बहार आता है। लेकिन कुछ अवस्था में गर्भ में बच्चे की स्थिति भिन्न होती है जैसे,

  • पीछे की स्थिति (Back Situation)

इसका अर्थ है कि शिशु का सिर आपकी पीठ के बजाय आपके सामने की ओर से श्रोणि में प्रवेश करता है। इस स्थिति में अधिक पीठ दर्द के साथ लंबा श्रम हो सकता है।

  • ब्रीच बर्थ (Breech birth)

यह तब होता है जब एक बच्चा पैरों की ओर से जन्म लेता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर धीरे से महिला के पेट को हाथ से घुमाते हैं और धीरे से सहलाते हैं ताकि बच्चा सिर की तरफ से जन्म ले सके।

यदि गर्भावस्था के अंत में भी बच्चा ब्रीच की स्थिति में है, तो डॉक्टर सीज़ेरियन का सुझाव दे सकते हैं।

  • एकाधिक गर्भावस्था (Multiple pregnancy)

जब एक से अधिक बच्चे होते हैं, तो प्रसव समय से पहले हो सकता है।

समय से पहले जन्म लिए हुए बच्चों को कुछ दिनों या हफ्तों तक अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है।

कभी-कभी बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा बाहर नहीं आता है, इसलिए डॉक्टर को इसे तुरंत हटाने की आवश्यकता होती है।

यह आमतौर पर एक एपिड्यूरल या एक सामान्य एनेस्थेसिया (epidural or a general anaesthesia) की मदद से किया जाता है।

  • प्रसवोत्तर रक्तस्राव (Postpartum haemorrhage - PPH)

प्रसवोत्तर रक्तस्राव (पीपीएच) एक असामान्य जटिलता है जो बच्चे के जन्म के बाद हो सकती है।

बच्चे के जन्म के दौरान कुछ रक्त खोना सामान्य माना जाता है। जन्म के बाद योनि से अत्यधिक रक्तस्राव प्रसवोत्तर रक्तस्राव कहलाता है।

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12.प्रसव पीड़ा के निम्न लक्षणों में आपने डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करे

Contact your doctor as soon as possible during these conditions of labor painin hindi

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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही नाज़ुक समय होता है, इस अवस्था के दौरान महिलाओं को अपना ख़ास ध्यान रखना चाहिए।

साथ ही साथ जैसे-जैसे प्रसव का समय नज़दीक आता है, गर्भवती महिला को शरीर में हो रहे कई बदलावों को ध्यान में कहना चाहिए ताकि समय रहते डॉक्टर से सही ट्रीटमेंट लिया जा सके।

वैसे तो प्रसव पीड़ा को महिलाएं आसानी से पहचान सकती है लेकिन गर्भावस्था के अंतिम सप्ताह के दौरान निम्न लक्षणों में गर्भवती महिलाओं को जल्द से जल्द आपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  • यदि गर्भवती महिला की पानी की थैली फट जाये।
  • यदि गर्भावस्था के दौरान कभी भी योनी से रक्त स्त्राव का एहसास हो।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला के हाथ और पैरो में सूजन होना।
  • बच्चे की गति विधि महसूस न होना।
  • यदि गर्भवस्था के दौरान महिला को धुन्दला दिखाई दे, आँखों के आगे अंधेरा छा जाये, पेट में तीव्र दर्द महसूस हो या चक्कर आये तो डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना चाहिये।
 

13.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

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हर गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा को ले कर परेशान रहती है। प्रसव के दौरान दर्द को कम करने के कई घरेलु उपाय हैं जैसे, मालिश, गर्म पानी का सेक आदि।

साथ ही साथ, चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण दवाइयों और इंजेक्शन के द्वारा प्रसव के दर्द को कम किया जा सकता हैं।

हर गर्भवती महिला को प्रसव से पहले, प्रसव के लक्षणों के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे वह समय आने पर प्रसव के लिए पूरी तरह से तैयार रहे।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 01 Jun 2020

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