अनियमित पीरियड्स (माहवारी) के लक्षण, कारण व इलाज

अनियमित माहवारी या अनियमित पीरियड

Irregular Periods in hindi

irregular periods or aniyamit periods kab hote hai in hindi, पीरीयड अनियमित होने के कारण, लक्षण और उपचार

अनियमित माहवारी यानि पीरियड्स का समय पर न होना महिलाओं की ज़िंदगी का एक तनाव भरा एहसास है। यहाँ तक कि पीरियड्स का समय पर न होने पर महिलाएँ डिप्रेशन की भी शिकार हो जाती हैं। अनियमित मासिक धर्म या पीरियड्स का इर्रेगुलर होना महिलाओं की महिलाओं की प्रजनन क्षमता की संभावना को कम करता है।

अनियमित पीरियड्स को जानने से पहले यह जानना बहुत जरुरी हैं कि इर्रेगुलर पीरियड्स (अनियमित पीरियड) की पहचान कैसे हो? अनियमित पीरियड्स की पहचान के लिए महिलाओं में स्वाभाविक मासिक चक्र (menstrual cycle in hindi) के बारे में जानना बहुत आवश्यक है।

पीरियड्स या माहवारी आमतौर पर यौवन के दौरान, 10 से 16 साल की उम्र के बीच शुरू होते हैं, और वे रजोनिवृत्ति (menopause) तक जारी रहते हैं। एक महिला के दो मासिक धर्म चक्रों (menstrual cycle) के बीच का अंतराल समान्यतः 28 दिनों का होता है, लेकिन यह हर महिला में थोड़ा भिन्न होता है।

कुछ महिलाओं में यह अवधि 21 दिनों से 40 दिनों तक भी हो सकती है। ज्यादातर महिलाओं सामान्यतः एक साल में लगभग 11 से 13 मासिक धर्म या पीरियड्स होते हैं। एक मासिक धर्म रक्तस्राव आमतौर पर लगभग 5 दिनों तक रहता है, लेकिन यह 2 से 7 दिनों तक भी हो सकता है।

जब मासिक धर्म पहली बार शुरू होता है तो एक नियमित साइकल (regular cycle) स्थापित होने में 2 साल तक का समय लग सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि पहली बार पीरियड आने के बाद, पीरियड्स को रेगुलर होने में दो साल का समय लग जाता है।

प्युबर्टी (puberty) के लगभग कुछ सालो में, ज्यादातर महिलाओं का मासिक धर्म नियमित हो जाता है और दो मासिक धर्म चक्र के बीच की अवधि समान हो जाती है। अनियमित पीरियड्स तब होता है, जब मासिक चक्रों के बीच का अंतराल 40 दिनों से अधिक या 21 दिनों से कम होता है, या यदि अंतराल हर पीरियड (माहवारी) में बदलता रहता है।

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इस लेख़ में/\

  1. अनियमित पीरियड्स के लक्षण
  2. अनियमित माहवारी के कारण
  3. अनियमित माहवारी की पहचान कैसे की जाती है
  4. पीरियड्स अनियमित होने का पता कैसे लगाये ?
  5. अनियमित माहवारी का उपचार
  6. अनियमित माहवारी का महिलाओं के प्रजनन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है
  7. सारांश
 

1.अनियमित पीरियड्स के लक्षण

Irregular periods symptoms in hindi

irregular or aniyamit periods ke lakshan kya hote hai in hindi

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अनियमित माहवारी के लक्षणों में शामिल हैं : -

  • पीरियड्स का अनियमित अंतराल अनियमित माहवारी का लक्षण है

ऐसी माहवारी जो 21 दिनों से कम या 35 दिनों से अधिक दूर होती है। अगर आपको प्रत्येक 35 दिनों में एक बार से कम पीरियड्स होते हैं, तो यह भी अनियमित पीरियड्स का एक लक्षण माना गया है।

  • अनियमित माहवारी का लक्षण : मिस्ड पीरियड्स

लगातार तीन या उससे अधिक माहवारी का गुम रहना या न आना यह अनियमित माहवारी का एक लक्षण हो सकता है। 90 दिन या उससे अधिक दिनों तक माहवारी का न आना इर्रेगुलर पीरियड की पहचान होता है।

  • माहवारी का अनियमित प्रवाह होता हैं अनियमित पीरियड का लक्षण

मासिक धर्म प्रवाह जो सामान्य से अधिक भारी या हल्का होता है। इसका मतलब पीरियड्स में रक्तस्त्राव अचानक से अधिक बढ़ जाना या कम होना यह अनियमित पीरियड्स का एक लक्षण होता है।

  • मासिक धर्म का अधिक आना है अनियमित पीरियड का लक्षण

ऐसी माहवारी जो सात दिनों से अधिक समय तक रहती है तो यह अनियमित पीरियड्स का लक्षण हो सकता है। इस दौरान पीरियड्स का रक्त प्रवाह सामान्य या अधिक भी हो सकता है। अगर आपको पीरियड्स के दौरान 16 से अधिक सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करना पड़े तो यह हेवी माहवारी का लक्षण होता है।

  • पीरियड्स में दर्द, ऐंठन या उल्टी होना

पीरियड्स जो दर्द, ऐंठन, मतली या उल्टी के साथ होते हैं, उन्हें भी अनियमित माहवारी का लक्षण माना गया है।

  • माहवारी के बीच में हलकी ब्लीडिंग या स्पॉटिंग

दो पीरियड्स के बीच होने वाली ब्लीडिंग या स्पॉटिंग। स्पॉटिंग को हल्के योनि रक्तस्राव के रूप में परिभाषित किया गया है, जो आपके नियमित पीरियड्स के समय न होकर अतिरिक्त दिनों में होता है।

आमतौर पर, स्पॉटिंग में थोड़ी मात्रा में रक्त शामिल होता है।

और पढ़ें:Amenorrhea - Absent or Irregular Periods

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2.अनियमित माहवारी के कारण

Causes of irregular periods in hindi

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अनियमित माहवारी के निम्न कारण होते हैं : -

  • तनाव और जीवन शैली में बदलाव के कारण पीरियड्स इर्रेगुलर हो सकते हैं

बहुत अधिक या बहुत कम वजन, डाइटिंग (dieting), व्यायाम (excercise), दिनचर्या में बदलाव (routine changes), अत्यधिक यात्रा, बीमारी (disease), या किसी महिला की दिनचर्या में अन्य व्यवधानों के कारण उसके मासिक धर्म पर प्रभाव पड़ सकता है और मासिक धर्म की समस्याएं खड़ी कर सकता है।

  • गर्भनिरोधक गोली के सेवन से भी माहवारी अनियमित होती है

अधिकांश जन्म नियंत्रण की गोलियों (birth control pills) में हार्मोन एस्ट्रोजन (estrogen hormone) और प्रोजेस्टिन (progestin) का संयोजन होता है। जन्म नियंत्रण की गोलियों लेने या बंद करने से औरत का महीना प्रभावित हो सकता है।

  • गर्भाशय पॉलीप्स (Uterine polyps) या फाइब्रॉएड (Fibroids)

गर्भाशय की लाइनिंग में होने वाली गैर-कैंसर वृद्धि (non-cancerous growth) को पॉलीप्स कहते हैं। गर्भाशय फाइब्रॉएड वो ट्यूमर होते हैं जो गर्भाशय की दीवार पर पैदा होते हैं। ट्यूमर आमतौर पर छोटे होते हैं, लेकिन इनसे पीरियड्स के दौरान भारी रक्तस्राव (heavy bleeding) और दर्द हो सकता है।

इसी तरह पॉलीप्स भी भारी रक्तस्त्राव और अनियमित पीरियड्स के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

एंडोमेट्रियल ऊतक (endometrial tissue) हर महीने मासिक धर्म प्रवाह के दौरान गर्भाशय से अलग हो शरीर से बाहर निकल जाता है। एंडोमेट्रियोसिस तब होता है, जब एंडोमेट्रियल ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। एंडोमेट्रियोसिस असामान्य रक्तस्राव का कारण हो सकता है।

  • पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (Pelvic Inflammatory Disease - PID)

एक जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) है, जो महिला प्रजनन प्रणाली (reproductive system) को प्रभावित करता है। बैक्टीरिया यौन संपर्क के माध्यम से योनि में प्रवेश कर सकते हैं और फिर गर्भाशय और ऊपरी जननांग पथ (upper genital tract) में फैलकर अनियमित माहवारी और अन्य मासिक धर्म की समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

  • पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (Polycystic Ovarian Syndrome - PCOS)

पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (PCOS - पीसीओएस) में अंडाशय (ovaries) बड़ी मात्रा में एण्ड्रोजन (androgen hormone) बनाते हैं, जो पुरुष हार्मोन हैं। ये हार्मोनल परिवर्तन अंडे को परिपक्व होने से रोक सकते हैं, और इसलिए ओव्यूलेशन (ovulation) लगातार नहीं होता है।

इस कारण से कभी-कभी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम वाली महिला में अनियमित पीरियड्स होंगे या मासिक धर्म पूरी तरह से रुक जाएँगे।

  • प्रीमेच्युर ओवरियन इन्सफ़्फ़ीसीएनसी (Premature ovarian insufficiency)

यह स्थिति 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में होती है, जिनके अंडाशय (ovaries) सामान्य रूप से कार्य नहीं करते हैं। इस स्थिति में मासिक धर्म बंद हो जाता है। यह उन रोगियों में हो सकता है जो किमोथेरेपी (chemotherapy) और रेडियेशन (radiation) के साथ कैंसर का इलाज कर रहे हैं, या उनको जिनको प्रीमेच्युर ओवरियन इन्सफ़्फ़ीसीएनसी या कुछ क्रोमोसोमल असामान्यताओं (chromosomal abnormalities) का पारिवारिक इतिहास है।

  • मिनार्चे और मेनोपॉज (Menarche and Menopause)

मिनार्चे या मेनोपॉज की शुरुआती दिनों में भी माहवारी अनियमित हो सकती है और यह बिलकुल स्वभाविक बात है। इसमें चिंता की कोई बात नहीं। महिलाओं में पहली बार मासिक चक्र शुरू होने की घटना को मिनार्चे और मासिक चक्र पूरी तरह से ख़तम होने की घटना को मीनोपॉज कहते हैं।

  • थायराइड की बीमारी (Thyroid disease)

ओवरएक्टिव थायराइड (हाइपरथायरायडिज्म-Hyperthyroidism) या अंडरएक्टिव थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म) से महिलाओं में मासिक धर्म चक्र में परिवर्तन आ सकता है। हाइपरथायरायडिज्म में थाइरोइड ग्लैंड (thyroid gland) थायरोक्सिन (thyroxine) नामक हार्मोन का बहुत अधिक निर्माण करती है।

उससे वीकनेस, वजन का घटना और अनियमित पीरियड्स जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं बनाती है।

इससे वजन बढ़ना या वजन कम करने में कठिनाई आना, थकान और अनियमित माहवारी जैसी प्रोब्लेम्स निर्माण हो सकती है।

  • असामान्य मासिक धर्म के अन्य कारणों में शामिल हैं

गर्भाशय कैंसर या सर्वाइकल कैंसर (cancer of uterus or cervical cancer)

दवाएं, जैसे कि स्टेरॉयड (steroids) या थक्कारोधी दवाएं (रक्त को पतला करने वाली दवाएं)

रक्तस्राव विकार (bleeding disorders)

पिट्यूटरी विकार (pituitary problems) जो हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करते हैं

गर्भपात या गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ

स्तनंपन करने वाली महिलाएं भी ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान अनियमित माहवारी से ग्रस्त हो सकती है

और पढ़ें:Polycystic ovary syndrome (PCOS) and Infertility | Zealthy

 

3.अनियमित माहवारी की पहचान कैसे की जाती है

How to diagnose irregular periods in hindi

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अनियमित माहवारी की पहचान के लिए डॉक्टर निम्नलिखित शारीरिक संरचनाओं या कार्यों की जांच कर सकते हैं : -

  • हृदय गति, रक्तचाप और वजन (Heart rate, Blood pressure, and Weight)

आपके अपॉइंटमेंट के डॉक्टर आपकी हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर और वजन (BMI) को नाप कर आपके शरीर की तंदुरुस्ती का अनुमान लगते है

  • दिल और फेफड़े की जाँच (Heart and Lungs)

श्वसन परीक्षा, या फेफड़ों की परीक्षा, एक शारीरिक परीक्षा के हिस्से के रूप में की जाती है।

इसमें श्वसन लक्षणों जैसे कि सांस की तकलीफ़, खांसी, या छाती में दर्द, और हृदय गति की परीक्षा की जाती है।

  • पैल्विक परीक्षा (Pelvic examination)

पैल्विक परीक्षा में डॉक्टर महिला के प्रजनन अंगों की दृश्य और शारीरिक परीक्षा करते है।

परीक्षा के दौरान, डॉक्टर योनि, गर्भाशय ग्रीवा, फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube), वल्वा (vulva), अंडाशय (ovary) और गर्भाशय (uterus) का निरीक्षण करते हैं।

आपका डॉक्टर निम्नलिखित लैब टेस्ट या अध्ययन का आदेश भी दे सकता है : -

  • गर्भावस्था परीक्षण (Pregnancy test)

गर्भावस्था परीक्षण यह मूत्र या रक्त में किसी विशेष हार्मोन की जाँच करके गर्भवती हैं या नहीं यह बता सकता है

  • एंडोमेट्रियल बायोप्सी (Endometrial Biopsy)

इस परीक्षण में गर्भाशय के टिश्यू का एक नमूना लेकर परीक्षण किया जाता है।

एंडोमेट्रियल बायोप्सी परीक्षण अनियमित पीरियड्स या रक्तस्राव की समस्याओं के कारण का पता लगाने में मदद करता है।

  • पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test)

यह टेस्ट विभिन्न संक्रमण या कैंसर टिश्यू का पता लगाने के लिए किया है।

  • कुछ हार्मोन स्तरों के लिए रक्त परीक्षण (Blood tests for certain hormone levels)

इसमें शामिल हैं :

  • थायराइड उत्तेजक हार्मोन (Thyroid Stimulating Hormone - TSH)
  • कोर्टिसोल (Cortisol)
  • प्रोलैक्टिन (Prolactin)
  • फॉलिकल उत्तेजक हार्मोन (Follicle Stimulating Hormone - FSH)
  • 17-हाइड्रॉक्सीप्रोजेस्टेरोन (17-Hydroxyprogesterone)
  • टेस्टोस्टेरोन (Testosterone)
  • डीएचईए (DHEA) आदि टेस्ट


  • मुक्त कोर्टिसोल के लिए 24 घंटे का मूत्र संग्रह (24-hour urine collection for free cortisol)

कोर्टिसोल(cortisol) मूत्र परीक्षण व्यक्ति के मूत्र में मौजूद कोर्टिसोल की मात्रा को मापने के लिए की जाती है।

कोर्टिसोल मूत्र परीक्षण विभिन्न मेडिकल कंडीशंस के निदान में मदद कर सकता है।

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic ultrasound)

पेल्विक अल्ट्रासाउंड असामान्य मासिक धर्म के रक्तस्राव के कारण का निदान करने में मदद करता है, और इसका उपयोग गर्भाशय के लाइनिंग को देखने के लिए किया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड में कोई विकिरण शामिल नहीं है।

  • सोनोहिस्टेरोग्राम (Sonohiterogram)

सोनोहिस्टेरोग्राम से गर्भाशय की इमेजिंग स्टडी की जाती है। डॉक्टर गर्भाशय के लाइनिंग की जांच करने के लिए गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भाशय में तरल पदार्थ डालता है। जिससे पॉलीप्स (polyps) या फाइब्रॉएड (fibroids) की जांच की जा सके। इससे अनियमित माहवारी का कारण पता लगा ने में मदद मिलती है।

और पढ़ें:अजवायन से पाएं पीरियड्स के दर्द से छुटकारा

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4.पीरियड्स अनियमित होने का पता कैसे लगाये ?

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कई बार महिलाएँ चिंता में पड़ जाती है की कैसे जाने की पीरियड अनियमित है या नहीं। इसे जानने का सटीक उपाय क्या है ये जानने के लिए महिला उत्सुक रहती है।

अगर आप भी अपने पीरियड्स को लेकर चिंतित हैं, तो हर महीने निम्नलिखित बातों पर भी ध्यान दें :

  • पीरियड्स के दिन

आपकी माहवारीआम तौर पर कितने समय तक चलती है? क्या यह सामान्य से अधिक लंबा या छोटा है?

  • पीरियड्स की मात्रा

यह जानने के लिए महिलाओं ने अपने मासिक प्रवाह के भारीपन या कमी का रिकॉर्ड रखें।

क्या यह सामान्य है ? या हल्का या भारी है? आपको कितनी बार अपनी सैनिटरी नैपकिन्स को बदलने की आवश्यकता होता है? क्या मासिक रक्तस्त्राव में कोई ब्ब्लडक्लॉट पास हुआ है ?

  • असामान्य रक्तस्राव

असामान्य रक्तस्राव यानि असमय होने वाला रक्तस्त्राव है। क्या पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग हो रही है?

  • पीरियड्स में दर्द

महिलाएँ माहवारी से जुड़े किसी भी दर्द के अनुभव को समझने की कोशिश करें। जैसे कि क्या माहवारी में दर्द सामान्य से अधिक ज्यादा है?

  • अन्य परिवर्तन

जैसे की महिलाओं मे मनोदशा या व्यवहार में कोई बदलाव महसूस किया है? क्या पीरियड्स में बदलाव के समय कुछ नया हुआ है, जो महिलाओं के सामान्य व्यवहार से अलग हो?

और पढ़ें:अनियमित पीरियड्स के लिए गुलाब की चाय के फायदे

 

5.अनियमित माहवारी का उपचार

Irregular periods treatment in hindi

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अनियमित माहवारी का इलाज उसके होनेवाले कारणों पर निर्भर करता है। डॉक्टर आपकी जाँच के दौरान अनियमित महवरी के कारणों का पता करते हैं।

अनियमित माहवारी के कारणों को दूर कर पीरियड्स को रेगुलर किया जा सकता है।

  • यौवन और रजोनिवृत्ति (Puberty and menopause)

अनियमित पीरियड्स जो यौवन के दौरान होते हैं या रजोनिवृत्ति के करीब पहुँचने पर होते हैं, ऐसे अनियमित पीरियड्स को आमतौर पर उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। इस समय पर शरीर में हॉर्मोन का उतार-चढ़ाव होता है, जिसके इलाज के लिए डॉक्टर आपको हार्मोनल मेडिसीन दे सकते हैं।

  • जन्म नियंत्रण गोलियां (Birth control Pills)

यदि गर्भनिरोधक के कारण अनियमित रक्तस्राव होता है, और यह कई महीनों तक जारी रहता है, तो महिला को अन्य विकल्पों के साथ डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

  • PCOS और मोटापा (Obesity)

PCOS के साथ यदि अधिक वजन हो तो ऐसे मामलों में, मोटापा कम करने से मासिक धर्म को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। इससे टेस्टोस्टेरोन (testosterone) हॉर्मोन का स्तर कम होता है और ओवुलेशन (ovulation) का बेहतर मौका मिलता है और अनियमित माहवारी के लक्षणों से राहत मिल सकती है।

  • थायराइड की समस्याएं (Thyroid problems)

अगर अनियमित माहवारी का कारण अंडर या ओवरएक्टिव थायरॉयड ग्रंथि है, तो थायराइड का इलाज़ ज़रूरी है। थायराइड के इलाज़ में दवा, रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी (Radioactive iodine therapy) या सर्जरी शामिल हो सकते हैं।

थायराइड की समस्या को ठीक करने से आमतौर पर अनियमित पीरियड्स ठीक हो जाते हैं।

  • तनाव और खाने के विकार (Stress issues and unhealthy food habits)

अगर भावनात्मक तनाव, खाने की गड़बड़ी, या अचानक वजन घटाने से अनियमित अवधि की शुरुआत हुई हो तो मनोवैज्ञानिक चिकित्सा (psychiatric help) से मदद मिल सकती है। इसमें विश्राम, तनाव प्रबंधन (stress management) और चिकित्सक से बात करना और सलाह शामिल हो सकता है।

दवाइयाँ (Medications)

  • डॉक्टर टाइप-2 मधुमेह (Type 2 diabetes) इस्तेमाल होने वाली और इंसुलिन (insulin) कम करने वाली एक मौखिक दवा मेटफॉर्मिन (metformin) लेने की सलाह दे सकते हैं, जो ओव्यूलेशन और नियमित माहवारी सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है।
  • एस्ट्रोजन (estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) के संयोजन से बनाने वाली और काम डोज़ वाली जन्म नियंत्रण की गोली अनियमित पीरियड्स को सही करने में मदद कर सकती है। यह एण्ड्रोजन (androgen) उत्पादन को कम करेगा और असामान्य पीरियड्स को सही करने में मदद करेगा।
  • वैकल्पिक रूप से, हर महीने 10 से 14 दिनों तक प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट्स लेने से पीरियड्स नियमित होने की संभावना होती है।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी का इलाज

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6.अनियमित माहवारी का महिलाओं के प्रजनन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है

How does irregular menstruation affect the fertility of womenin hindi

aniyamit mahwari ka mahilaon ke prjanan kshmta par kya prabhav padta hai

अनियमित पीरियड्स महिलाओं मे प्रेगनेंसी का ठहरना अधिक कठिन बना सकता है, खासकर यदि महिलाएँ हर महीने में ओवुलेशन नहीं कर रही हैं। महिलाएँ ओवुलेट कर रहे हैं या नहीं यह देखने के लिए डॉक्टर कुछ परीक्षण करने का सुझाव दे सकते हैं।

अनियमित पीरियड वाली महिलाएं जो बच्चे पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें कभी-कभी ओवुलेशन बढ़ाने के लिए फर्टिलिटी ड्रग्स दिया जाता है। अनियमित माहवारी में अनओवुलेशन 30%-40% तक इनफर्टिलिटी के लिए जिम्मेदार होता है। अनओवुलेशन (anovulation) मतलब जब आपका डिम्बाशय हर महीना एक डिम्ब निस्सरण करने में सक्षम नहीं हो पता है।

इसका कारण फॉलिकल स्टिमुलेटिंग होर्मोनेस (follicle stimulating hormones) और लुटेइनीज़िंग होर्मोनेस (luteinizing hormones) की असंतुलन हो सकता है।
यदि महिलाएँ अनियमित माहवारी, नो पीरियड्स, या हेवी पीरियड्स से परेशान है और गर्भधारण करने में कठिनाई महसूस कर रही है तो यह इस बात का संकेत देता है कि महिलाओं मे ओवुलेशन अच्छे से हो रहा है।

इसलिए अनियमित माहवारी से प्रेगनेंसी के चान्सेस बहुत घट जाते है और इनफर्टिलिटी की समस्या दिखाई दे सकती है। ऐसे स्थिति में आप ज़रूर डॉक्टर से संपर्क करें।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी में गर्भधारण कैसे करे

 

7.सारांश

Summaryin hindi

saransh

ज्यादातर महिलाओं का मासिक धर्म नियमित होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में पीरियड अनियमित हो सकते हैं। अनियमित मासिक धर्म तब होता है जब मासिक चक्रों के बीच का अंतराल 35 दिनों से अधिक या 21 दिनों से कम होता है या यदि अंतराल बदलता रहता है।

अनियमित मासिक धर्म का इलाज़ उसके होने वाले कारणों पर निर्भर करता है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 14 Sep 2020

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