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IVF kya hai or kaise karta hai ye kaam

टेस्ट ट्यूब बेबी (आईवीएफ) क्या है, ट्रीटमेंट, तकनीक, उपचार, खर्च, डॉक्टर, क्लिनिक और जानकारी

What is IVF treatment process, cost, success rate and how does it works in hindi

IVF kya hai or kaise karta hai ye kaamin hindi

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानि आईवीएफ़ (In Vitro Fertilization) एक प्रकार की सहायक प्रजनन तकनीक (Assistive Reproductive Technology - ART) है।

इस तकनीक में सबसे पहले महिला के अंडाशय (ovaries) से अंडे (egg) को बाहर निकाला जाता है और फिर उसे पुरुष के निकाले गए स्पर्म (sperm) के साथ फर्टिलाइज (fertilize) किया जाता है।

ये प्रक्रिया लैब के अंदर की जाती है और इस दौरान फर्टिलाइज़ किये गए एग या अंडे को एम्ब्रोयो (embryo) यानि भ्रूण कहा जाता है।

जब ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो भ्रूण को मां के गर्भ (uterus) में डाल दिया जाता है ताकि उसका विकास हो सके और वो भ्रूण से शिशु के रूप में आ सके।

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) उन दम्पत्तियों के लिए वरदान है जो कई कारणों से बच्चे का सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

दंपतियों की स्थिति के आधार पर आईवीएफ में नीचे दिए गए चीज़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है :

  • महिला के अंडे (eggs) और उसके पार्टनर के शुक्राणु (sperm)
  • महिला के अंडे और डोनर (donor) का शुक्राणु
  • डोनर के अंडे और महिला के साथी के शुक्राणु
  • डोनर के अंडे और डोनर के शुक्राणु
  • डोनेट किए गए भ्रूण (embryo)

इतना ही नहीं आपका डॉक्टर आपके भ्रूण को सरोगेट (surrogate), या जेस्टेशनल कैरियर (gestational carrier) में भी ट्रांसफर कर सकता है।

सरोगेट महिला आपके बच्चे को पूरे नौ महीने अपने कोख़ में रखती है और फिर उसे जन्म देती है।

वहीं आईवीएफ के माध्यम एक स्वस्थ बच्चा होने की संभावना एक महिला की उम्र और उसकी इनफर्टिलिटी (infertility) के कारण पर निर्भर करती है।

अगर एक से अधिक भ्रूण महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर हो जाते हैं, तो आईवीएफ के परिणामस्वरूप एक से अधिक भ्रूण (multiple pregnancies) हो सकते हैं।

आईवीएफ की ज़रूरत किसे होती है?

Who really needs IVF? in hindi

IVF ki zarurat kise hoti hai in hindi

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आईवीएफ जैसे नयी तकनीक उन लोगों के लिए आशा की किरण होती है, जो कई कारणों से माता-पिता नहीं बन पाते हैं।

अगर आईवीएफ इनफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है तो ऐसे में आईवीएफ ट्रीटमेंट करने से पहले आप और आपके साथी को उपचार के कुछ और हल्के विकल्प दिए जा सकते हैं।

इनमें प्रजनन दवाएँ (fertility drugs) लेना या अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (intrauterine insemination) शामिल हो सकते हैं।

इस प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर स्पर्म को सीधे महिला के यूटेरस में डाल देता है।

कभी-कभी, 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में इनफर्टिलिटी के लिए प्राथमिक उपचार के रूप में आईवीएफ की पेशकश की जाती है।

अगर आपको हेल्थ से जुड़ी कोई समस्या है तब भी आईवीएफ किया जा सकता है।

कुछ स्वास्थ्य से जुड़ीं समस्याएं इस प्रकार हैं :

  • फैलोपियन ट्यूब डैमेज या ब्लॉक होना (Damaged or blocked fallopian tube)
    फैलोपियन ट्यूब के डैमेज या ब्लॉक होने के कारण अंडे का रिलीज़ होना या भ्रूण के लिए गर्भाशय तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है।
  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)
    ये एक तरह का विकार (disorder) होता है जिसमें टिश्यू सामान्य रूप से गर्भाशय के बाहर बढ़ता है।
    जो अक्सर फैलोपियन ट्यूब, ओवरीज़ और यूटरस के काम को प्रभावित करता है।
  • अधिक उम्र का होना (Over age)
    अक्सर देखा जाता है कि 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं में प्रजनन क्षमता कम हो जाती है, जिस कारण वो माँ नहीं बन पाती हैं।
  • स्पर्म के आकर और संख्या का असामान्य होना (Impaired sperm production or function)
    पुरुषों में स्पर्म के असामान्य होने के कारण अंडे को रिलीज़ करना मुश्किल हो सकता है।
  • ओवुलेशन साइकिल अस्थिर होना (Ovulation disorders)
    अगर एक महिला का ओव्यूलेशन समय पर नहीं होता है या फिर अस्थिर रहता है तो अंडे की संख्या में कमी आ जाती है।
    जिस कारण ओव्यूलेशन प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है और प्रेग्नेंट होना मुश्किल हो जाता है।
  • बिना किसी कारण के इनफर्टिलिटी का होना (unexplained infertility)
    जब सामान्य कारणों के मूल्यांकन के बावजूद इनफर्टिलिटी के कारण का पता न चल सके।

इसके अलावा अगर माता-पिता अपने आने वाले बच्चे को किसी भी तरह के जेनेटिक डिसऑर्डर (genetic disorder) से दूर रखना चाहते हैं तो वो आईवीएफ चुन सकते हैं।

एक मेडिकल लैब आनुवंशिक असामान्यताओं के लिए भ्रूण का परीक्षण कर सकती है।

फिर, डॉक्टर आनुवंशिक दोष के बिना रहित भ्रूण को गर्भाशय में डाल देते हैं।

आईवीएफ के प्रकार

Types of IVF in hindi

IVf ke prakar in hindi

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जब किसी तरह के ट्रीटमेंट के बाद भी दंपत्ति (couple) बच्चे का सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो वो इस तकनीक का सहारा लेते हैं।

आइए जानते हैं आईवीएफ के प्रकार के बारे में:

  • इंट्रायूटेरिन इन्सेमीनेशन (Intrauterine Insemination)
    ये एक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट होता (fertility treatment) है, जिसके अंतर्गत फर्टिलाइज़ेशन के लिए एक महिला के गर्भाशय (womb) के अंदर स्पर्म (sperm) को डाला जाता है।
    आईयूआई (IUI) का लक्ष्य स्पर्म की संख्या को बढ़ाना होता है, जो फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube)तक पहुंचते हैं और बाद में फर्टिलाइज़ेशन (fertilization) की संभावना को बढ़ाते हैं।
  • इंट्रासायटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (Intracytoplasmic Sperm Injection)
    आईसीएसआई (ICSUI) एक प्रकार का आईवीएफ है, जो आमतौर पर उन मामलों में उपयोग किया जाता है, जब एक पुरुष के स्पर्म की संख्या या तो कम होती है या खराब होती है।
    इस आईसीएसआई (ICSUI) प्रक्रिया के दौरान एक सिंगल (single) स्पर्म को सीधे एक अंडे के साइटोप्लाज्म (cytoplasm) में इंजेक्ट किया जाता है।
  • डोनर के अंडे के ज़रिये आईवीएफ (IVF using donor eggs)
    ये प्रक्रिया बिल्कुल आईवीएफ के जैसी होती है सिवाए इसके कि इसमें डोनर ओवेरियन स्टिम्युलेशन (ovarian stimulation) और एग कलेक्शन (egg collection) प्रोसेस से गुज़रता है।
    जिसके बाद डोनर के अंडे को पुरुष साथी (male partner) के स्पर्म के साथ मिलाया जाता है और फिर भ्रूण को महिला के गर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन कैसे किया जाता है

How is In Vitro Fertization performed in hindi

In vitro fertization kaise kiya jata hai in hindi

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जो दंपत्ति इस तकनीक को अपनाकर औलाद का सुख प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।

मुख्य तौर पर आईवीएफ में छह प्रक्रियाएं होती हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • प्राकृतिक मासिक धर्म को रोकना (Suppressing the natural menstrual cycle)
    इस क्रम में सबसे पहले महिलाओं के मासिक धर्म रोकने की कोशिश की जाती है।
    जिसके अंतर्गत तक़रीबन दो हफ्ते तक इंजेक्शन के ज़रिये दवाई देकर पीरियड्स को रोका जाता है ताकि महिला गर्भ धारण कर सके।
  • स्टिम्युलेशन (Stimulation)
    एक महिला अपने मासिक धर्म के दौरान एक अंडे का उत्पादन करती हैं लेकिन आईवीएफ के लिए कई अंडों की आवश्यकता होती है।
    दरअसल कई अंडो का इस्तेमाल करने से एक अच्छे भ्रूण के बनने की संभावना बढ़ जाती है।
    ऐसे में महिला के द्वारा अधिक संख्या में अंडे का उत्पादन हो इसके लिए आपको फर्टिलिटी ड्रग्स दी जाएगी।
    जिससे समय-समय पर देखने के लिए आपका डॉक्टर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करेगा और ये बताएगा कि कब आप इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अंडे को बाहर निकालना (Eggs retrieval)
    जब ओवरीज़ द्वारा पर्याप्त संख्या में अंडे का उत्पादन किया जाता है, तो डॉक्टर एक महिला के शरीर से अंडे को निकालता है, जिसे अंग्रेज़ी में एग रेटरीवाल (egg retrieval) कहा जाता है।
    इस प्रक्रिया में एक छोटी सी सर्जरी की मदद से अंडों को बाहर निकाला जाता है।
    इस दौरान एनेस्थिसिया से देने के बाद महिला के वजाइना में एक पतली सी सुई डाली जाती है, जो ओवरी तक ले जाती है और सुई के आगे लगे सक्शन पंप की मदद से अंडे को खींचकर बाहर निकाला जाता है।
  • इन्सेमीनेशन (Insemination)
    ये प्रक्रिया लैब में की जाती है, जहां महिला के अंडे को उसके साथी या एक डोनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइजेशन के लिए रखा जाता है।
    वहीं इंजेक्शन की मदद से भी कई बार स्पर्म को अंडो के अंदर डाला जाता है, जिसे इनसेमिनेशन कहा जाता है।
  • फर्टीलायज़ेशन (Fertilization)
    इसके बाद जब स्पर्म अंडे के अंदर तरह जाता है तो वो फर्टिलायज़ करना शुरु कर देता है।
    जब पूरी तरह से ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो भ्रूण बन जाता है।
    इस दौरान भ्रूण आनुवंशिक परिस्थितियों के लिए परीक्षण से गुज़र सकता है।
    इस प्रक्रिया में महिला के ओवरी से निकाले गए सभी अंडो का इस्तेमाल होता है।
  • एम्ब्रोयो ट्रांसफर (Embryo transfer)
    अंडे की पुनर्प्राप्ति के लगभग 3-5 दिनों के बाद, एक या अधिक भ्रूण आपके गर्भाशय में डाल दिए जाते हैं।
    जिसे भ्रूण स्थानांतरण कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर आपके सर्विक्स (cervix) और यूटेरस (uterus) के माध्यम से एक पतली ट्यूब स्लाइड (slide) करता है, और ट्यूब के माध्यम से भ्रूण को सीधे आपके गर्भाशय में डाल देता है।
    गर्भावस्था तब होती है जब भ्रूण खुद यूटरीन वॉल (uterine wall) पर आ जाये। इसमें 6 से 10 दिन का समय लग सकता है।
    अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो आपका डॉक्टर आपको ब्लड-टेस्ट कराने (blood test) की सलाह देगा।

आईवीफ कितना सफल है

How successful is IVF in hindi

IVF kitna safal hai in hindi

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आईवीएफ के लिए सफलता अनुपात दर महिला की उम्र, इनफर्टिलिटी का कारण, कितने साल से इनफर्टिलिटी की समस्या है, भ्रूण के ट्रांसफर के तरीके, शुक्राणु की गुणवत्ता और चाहे महिला या डोनर के अंडे का उपयोग करने पर निर्भर करता है।

फ्रेश भ्रूण के विपरीत जमे हुए भ्रूण का उपयोग करने पर सफलता दर अधिक होती है।

वहीं महिला अगर कम उम्र की रहेगी तो उसके अंडे उतने ही हेल्दी रहेंगे और सफलता मिलने की संभावनाएं ज़्यादा बनी रहेगी।

सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी के अनुसार ये बताते हैं कि भारत में आईवीएफ की सफलता दर क्या है:

35 वर्ष से कम उम्र की महिला – 40 से 43 %

35-37 वर्ष की उम्र की महिला – 33 से 36 %

38-40 वर्ष की उम्र की महिला – 23 से 27 %

41 वर्ष से अधिक उम्र की महिला – 13 से 18 %

आईवीएफ से जुड़ें जोखिम और जटिलताएं

Risk and complications of IVF in hindi

IVF se judi jokhim or jatiltayein in hindi

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किसी भी मेडिकल प्रोसीजर की ही तरह इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन से भी संबंधित कुछ जोखिम है।

ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से बात करने के बाद ही इसके बारे में पूरी तरह से सोचना चाहिए।

आइए जानते हैं आईवीएफ से जुड़े जोखिमों के बारे में:

  • एक से अधिक बच्चों का पैदा होना (Multiple pregnancies)
    अगर इस तकनीक के दौरान यूटेरस में दो भ्रूण डाल दिए जाते हैं तो जुड़वाँ बच्चे या ट्रिप्लेट्स (triplets) होने की संभावना बढ़ जाती है।
    जिससे समय से पहले बच्चे की जन्म होने के साथ जन्म के वक़्त वज़न कम होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम (Ovarian hyper-stimulation syndrome)
    ये एक चिकित्सा स्थिति है, जो कुछ महिलाओं में हो सकती है।
    दरअसल जो महिलाएं अंडे के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रजनन क्षमता की दवाओं के प्रति सेंसिटिव होती हैं, उनमें ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम की समस्या देखी जा सकती है।
  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic pregnancy)
    आईवीएफ से एक्टोपिक प्रेगनेंसी का रिस्क भी बना रहता है।
    इस स्थिति में भ्रूण गर्भ की जगह फेलोपियन ट्यूब में बढ़ने लगता है।
  • गर्भपात का खतरा (Risk of miscarriage)
    महिलाओं की उम्र जितनी कम होती है उतनी ही आईवीएफ के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
    वहीं दूसरी और अधिक उम्र की महिलाओं में आईवीएफ तकनीक के दौरान गर्भपात का रिस्क बढ़ जाता है।

भारत में आईवीएफ के उपचार की लागत क्या है

What is the cost of IVF treatment in india in hindi

bharat mein IVF ke upchar ki lagat kya hai in hindi

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आईवीएफ उपचार भारत के सभी प्रमुख शहरों में उपलब्ध है लेकिन उपचार की कुल लागत आईवीएफ डॉक्टर की विशेषज्ञता और भारत में आईवीएफ केंद्र की लोकप्रियता और सफलता दर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

आमतौर पर, भारत में आईवीएफ की लागत 150000.00 से 250000.00 तक होती है।

ऐसे में आपको बताते हैं कुछ चुनिंदा शहरों में आईवीएफ की लागत क्या है:

शहरलागत दिल्लीरु 175000.00 - 250000.00मुंबईरु 175000.00 - 300000.00बंगलुरु रु 160000.00 - 200000.00चेन्नई रु 150000.00 - 200000.00पुणे रु 140000.00 - 160000.00हैदराबाद रु 140000.00 - 175000.00

भारत को आईवीएफ उपचार के लिए सबसे सस्ते देशों में से एक माना जाता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको गुणवत्ता उपचार पर समझौता करना होगा क्योंकि भारत के पास सबसे उन्नत सुविधाऐं और विश्व स्तरीय (world class) आईवीएफ विशेषज्ञों के साथ अत्याधुनिक तकनीक (advanced technology) है।

निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

अगर आप आईवीएफ की मदद से बच्चे को जन्म देना का सोच रही हैं तो इस बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

दरअसल आईवीएफ के दौरान धूम्रपान करने वाली महिलाओं में आमतौर पर कम अंडे होते हैं और अधिक बार गर्भपात हो सकता है।

धूम्रपान करने से आईवीएफ का उपयोग करके महिला की सफलता की संभावना 50% कम हो सकती है।

वहीं मोटापा आपके गर्भवती होने और बच्चा होने की संभावनाओं को कम कर सकता है।

शराब (alcohol) , अत्यधिक कैफीन (caffeine) और कुछ दवाओं का उपयोग भी हानिकारक हो सकता है।

इसलिए इस दौरान आपको अपने लाइफस्टाइल में भी बदलाव करनी चाहिए।

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