IVF kya hai or kaise karta hai ye kaam

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी की सम्पूर्ण जानकारी - IVF प्रकिया, जोखिम, सफलता दर और खर्च (IVF in Hindi)

What is IVF - IVF Process, Risks, Success Rate and Cost in hindi

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आईवीएफ प्रोसेस (IVF meaning in hindi) इनफर्टिलिटी या बाँझपन का उपचार है, जो उन दंपतियों के लिए वरदान है जो कई कारणों से बच्चे के सुख से खुद को वंचित पाते हैं।

आईवीएफ (IVF process in hindi) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby in hindi) की प्रक्रिया के दौरान महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणुओं को अप्राकृतिक (artificially) तरीके से मिलाया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया फर्टिलिटी एक्सपर्ट की निगरानी में प्रयोगशाला के भीतर, नियंत्रित परिस्थितियों में की जाती है।

मेडिकल भाषा में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन यानि आईवीएफ (in-vitro fertilization in hindi) को सहायक प्रजनन तकनीक (Assisted reproductive technique- ART) या आर्ट भी कहा जाता है, क्योंकि आईवीएफ के दौरान अंडे और शुक्राणु का मिलन महिला के शरीर में न कर मेडिकल लैब में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से किया जाता है।

फर्टिलिटी डॉक्टर की मानें, तो आईवीएफ या टेस्ट त्युब बेबी की प्रक्रिया उन लोगों के लिए सबसे उपयोगी है जो काफी समय के प्रयास के बाद ही गर्भधारण नहीं कर पा रहे हो और फर्टिलिटी के अन्य उपचार उनके लिए कारगर साबित नहीं हो रहे हो।

इस लेख़ में/\

  1. टेस्ट त्युब बेबी या आईवीएफ (IVF) क्या है?
  2. आईवीएफ (IVF) या टेस्ट ट्यूब बेबी की ज़रूरत किसे होती है?
  3. टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ की प्रक्रिया और चरण
  4. आइवीएफ के बाद प्रेगनेंसी में कितना समय लगता है?
  5. क्या आईवीएफ (IVF process in hindi) का कोई नुकसान है?
  6. आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया कितनी सफल है?
  7. आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी से जुड़ें जोखिम और जटिलताएं क्या हैं?
  8. भारत में आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की लागत क्या है?
  9. निष्कर्ष
 

1.टेस्ट त्युब बेबी या आईवीएफ (IVF) क्या है?

What is IVF / Test Tube Baby in hindi

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आईवीएफ या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF in hindi) एक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट यानि प्रजनन उपचार है जो बांझपन के कारण बच्चा पैदा करने में असमर्थ होते हैं।

आईवीएफके द्वारा निसंतान दंपतियों को संतान का सुख प्राप्त होता है। यह एक तरह का मॉडर्न फर्टिलिटी ट्रीटमेंट (बाझपन का उपचार) है, जिसमे महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु का निषेचन प्रयोगशाला में किया जाता है।

इन-विट्रो का अर्थ है इन-गिलास (in-glass) यानि गिलास के भीतर और फर्टिलाइजेशन यानि अंडे और स्पर्म के फर्टिलाइजेशन या निषेचन की प्रक्रिया।

आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF in hindi) के द्वारा पैदा हुए बच्चे को टेस्ट त्युब बेबी (test tube baby in hindi) के नाम से भी जाना जाता है।

आईवीएफ को टेस्ट त्युब बेबी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें अंडे और शुक्राणु का निषेचन महिला के शरीर के बाहर पेट्रीडिश (petri-dish) में किया जाता है।

और निषेचित भ्रूण (fertilized egg) को गर्भ में आगे की प्रक्रिया के लिए प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। यह भ्रूण महिला के गर्भ में बड़ा होता है और प्रेगनेंसी पूरी होने के बाद जन्म लेता है।

इनफर्टिलिटी या बाँझपन के सही कारण का पता लगा कर डॉक्टर IVF treatment का सुझाव दे सकते हैं। यहाँ यह बात ध्यान रखने वाली है कि आईवीएफ के अलावा भी ऐसे कई फर्टिलिटी ट्रीटमेंट हैं जिनका सुझाव आपके फर्टिलिटी डॉक्टर दे सकते हैं, जैसे - आईसीएसआई (ICSI), पीजीडी (PGD), असिस्टेड हैचिंग (Assisted hatching), डोनर स्पर्म (donar sperm) और सरोगेसी (aur surrogacy)।

गर्भधारण के लिए कौन सी तकनीक इस्तेमाल की जाएगी इसका निर्णय आपके डॉक्टर दोनों कपल्स की संपूर्ण जांच के बाद ही डीसाइड कर पाते हैं। ट्रीटमेंट के दौरान आपकी और आपके डॉक्टर की आपसी सहमति के बाद ही उपचार की विधि तय की जाती हैं।

आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) निसंतान लोगों के लिए एक आशा की किरण साबित हुआ है। अगर आप पिछले 6 महीने से असुरक्षित संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण न कर पा रहे हैं तो महिला या पुरुष बाँझपन की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं।

यदि महिला और पुरुष दोनों में ही कुछ दिक्कत हो तो उसे युगल इनफर्टिलिटी (couples infertility) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ही बच्चा होने का एकमात्र उपाय रहता है।

हालांकि, आईवीएफ या टेस्ट त्युब बेबी अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की अपेक्षा में अधिक महंगा और समय लेने वाला हो सकता हैं लेकिन ईवीएफ बाँझपन के कई कारणों के निदान की सबसे सफल प्रक्रिया हैं।

आईवीएफ की प्रक्रिया (IVF process in hindi) में महिला के अंडो के उत्पादन के लिए सबसे पहले पहले महिला के गर्भाशय को उत्तेजित किया जाता है। जब महिला की ओवरी में अंडो का उत्पादन शुरू हो जाता है तो एक छोटी सर्जरी से अंडे को बाहर निकला जाता है।

इसके बाद एग को स्पर्म (sperm) के साथ फर्टिलाइज (fertilize) होने के लिए रख दिया जाता है। जब ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो भ्रूण को मां के गर्भ (uterus) में डाल दिया जाता है ताकि उसका विकास हो सके और वो भ्रूण से शिशु के रूप में आ सके।

आईवीएफ (ivf) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) के माध्यम से स्वस्थ बच्चा होने की संभावना एक महिला की उम्र और इनफर्टिलिटी (infertility) के कारणों पर निर्भर करती है।

आईवीएफ ट्रीटमेंट द्वारा बाँझपन के इलाज से पहले आपके फर्टिलिटी डॉक्टर कुछ अन्य विकल्प दे सकते हैं जैसे - प्रजनन दवाइयाँ या आईयूआई ट्रीटमेंट (IUI treatment)

अगर एक से अधिक भ्रूण महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर हो जाते हैं तो आईवीएफ के दौरान मल्टीप्ल प्रेगनेंसी (multiple pregnancy) होने की संभावना रहती है यानि एक से अधिक बच्चे होने की संभावना रहती है।

दंपतियों में इनफर्टिलिटी के आधार पर IVF treatment या टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए निम्न विकल्प उपलब्ध हैं :-

  • महिला के अंडे और उसके पार्टनर के स्पर्म
  • महिला के अंडे और डोनर (donor) का शुक्राणु
  • डोनर के अंडे और महिला के साथी के शुक्राणु
  • डोनर के अंडे और डोनर के शुक्राणु
  • डोनेट किए गए भ्रूण (embryo)

इतना ही नहीं आपके डॉक्टर आपके भ्रूण को सरोगेट (surrogate), या जेस्टेशनल कैरियर (gestational carrier) में भी ट्रांसफर कर सकते हैं।

सरोगेट महिला आपके बच्चे को पूरे नौ महीने अपने कोख़ में रखती है और फिर उसे जन्म देती है।

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2.आईवीएफ (IVF) या टेस्ट ट्यूब बेबी की ज़रूरत किसे होती है?

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आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) इनफर्टिलिटी के इलाज का एक तरीका है। बाँझपन के कुछ कारण जैसे फैलोपियन ट्यूब ब्लाक होने पर यह गर्भधारण का एकलोता तरीका है।

कुछ अन्य केस में आईवीएफ करने का निर्णय डॉक्टर तभी लेते हैं, जब बाँझपन का इलाज अन्य सरल तरीकों से न किया जा सके। आइये जानते हैं कि डॉक्टर इव्फ़ ट्रीटमेंट (IVF treatment in hindi) किन परिस्थितियों में करते हैं।

निम्न स्थितियों में आईवीएफ (IVF) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) की सिफ़ारिश की जा सकती है :

  • फैलोपियन ट्यूब डैमेज या ब्लॉक होना (Damaged or Blocked Fallopian Tube)

फैलोपियन ट्यूब ब्लाक या डैमेज होने पर अंडे का रिलीज़ होना या भ्रूण के लिए गर्भाशय तक पहुँचना नामुमकिन हो जाता है और अंडे का शुक्राणु से मिलन नहीं हो पाता। इस कारण महिला बांझपन की शिकार रहती है।

फैलोपियन ट्यूब ब्लाक का इलाज और महिला के प्रेग्नेंट होने की संभावना दो तरह से हो सकती हैं : -

  • पहला, सर्जरी के द्वारा फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज को हटाना और नेचुरल तरीके से गर्भधारण करना!
  • और दूसरा आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन तकनीक (ART) की मदद से प्रेग्नेंट होना।

क्योंकि सर्जरी के द्वारा फैलोपियन ब्लॉकेज को हटाना काफी कठिनाई भरा और मुश्किल कार्य है और सर्जरी के द्वारा एक्टोपिक प्रेगनेंसी के संभावना अधिक रहती है। इस कारण डॉक्टर फैलोपियन ट्यूब ब्लाक होने पर आईवीएफ कराने की सलाह देते हैं।

  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

ये एक तरह का विकार (disorder) है, जिसमें टिश्यू असामान्य रूप से गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगते हैं, जो अक्सर फैलोपियन ट्यूब, ओवरीज़ और यूटरस को प्रभावित करते हैं।

मेडिकल रिसर्च के अनुसार एंडोमेंट्रियोसिस (endometriosis) की गंभीर मामले में आईवीएफ ट्रीटमेंट से गर्भधारण करना सबसे सफल होता है।

  • अधिक उम्र का होना (Older Age Women)

अक्सर देखा जाता है कि 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं में प्रजनन क्षमता कम हो जाती है, जिस कारण वो माँ नहीं बन पाती हैं।

मेडिकल रिसर्च के अनुसार महिला की उम्र का सीधा असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ता है।

यदि महिला की उम्र 35 साल से अधिक है और वे एक साल के असुरक्षित संबंध के बाद भी गर्भवती नहीं हो पा रही है तो डॉक्टर आईवीएफ ट्रीटमेंट की सलाह देते हैं।

  • स्पर्म के आकर और संख्या का असामान्य होना (Low Sperm Count or Abnormal Sperm)

पुरुष बाँझपन के कारणों के कारण भी दंपति बच्चे के सुख से वंचित रह जाते हैं। पुरुषों में अगर स्पर्म की मात्र अत्यधिक कम हो या स्पर्म की बनावट असामान्य हो तो एग को फर्टिलाइज करना मुश्किल होता है।

आईवीएफ के साथ ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) इस तरह के बाँझपन के इलाज में उपयोगी पाया जाता है।

  • ओवुलेशन साईकल अस्थिर होना (Missed or Irregular Ovulation)

महिलाओं में ओवुलेशन समय पर नहीं होने के कारण भी गर्भधारण करने में मुश्किल होती है। उम्र के साथ ओवुलेशन की प्रक्रिया में भी धीमापन आता है और अंडे की संख्या में कमी आती है।

इन स्थितियों में IVF treatment गर्भवती होने में सहायता करता है। आईवीएफ के साथ अन्य तकनीक जैसे असिस्टेड हैचिंग (assisted hatching) और आईसीएसआई (ICSI) का इस्तेमाल महिला की मेडिकल स्थिति को देखते हुए किया जा सकता है।

कई बार महिलाएं अनोवुलेशन (anovulation) से भी पीड़ित होने पर प्रेग्नेंट नहीं हो पाती। अनोवुलेशन वह स्थिति है जब महिला का शरीर अंडा रिलीज़ नहीं कर पाता ।

अनोवुलेशन और पीसीओडी से ग्रस्त महिला के लिए डॉक्टर अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट जैसे - ओवुलेशन इन्डकशन (ovulation induction) और आईयुआई (IUI) की सलाह दे सकते हैं।

  • अनएक्स्प्लेंड इनफर्टिलिटी (Unexplained infertility)

जब सामान्य कारणों के मूल्यांकन के बावजूद इनफर्टिलिटी के कारण का पता न चल सके तो उसे अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी कहा जाता है।

आंकड़ों की मानें तो लगभग 20 % दंपति अनेक्स्प्लेंड फर्टिलिटी (unexplained fertility) के कारण बच्चे के सुख से वंचित रहते हैं। आईवीएफ के द्वारा इस तरह के बाँझपन का इलाज संभव है।

इसके अलावा अगर माता-पिता अपने आने वाले बच्चे को किसी भी तरह के जेनेटिक डिसऑर्डर (genetic disorder) से दूर रखना चाहते हैं तो वो आईवीएफ (IVF) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) का विकल्प चुन सकते हैं।

प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक स्क्रीनिंग या पीजीडी (preimplantation genetic screening in hindi) के दौरान मेडिकल लैब में आनुवंशिक असामान्यताओं का पता लगाने के लिए भ्रूण का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद डॉक्टर आनुवंशिक दोष रहित भ्रूण को गर्भाशय में डाल देते हैं।

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3.टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ की प्रक्रिया और चरण

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आईवीएफ की प्रक्रिया फर्टिलिटी के उपचार के लिए सबसे अधिक कारगर उपाय है। आईवीएफ की सफलता दर सबसे अधिक होने के कारण यह काफी प्रचलित फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है।

आईवीएफ प्रक्रिया (IVF process in hindi) को शुरू करने से पहले डॉक्टर महिला और पुरुष दोनों की सम्पूर्ण जांच करते हैं और ट्रीटमेंट का प्लान बनाते हैं।

आपके और आपके डॉक्टर की सहमति पर बनाये गए ट्रीटमेंट प्लान के अनुसार बाँझपन के इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

आईवीएफ (ivf) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) प्रक्रिया की छह मुख्या स्टेप्स होते हैं :-

  • स्टेप 1: प्राकृतिक मासिक धर्म को रोकना (Suppressing the natural menstrual cycle)

एग निकलने की तिथि के एक महीने पहले ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर इंजेक्शन और मेडिसीन के द्वारा महिला के मासिक धर्म को रोकते हैं। इस प्रक्रिया के लिए डॉक्टर गर्भनिरोधक गोलियों और लूप्रोन (leuprolide acetate) इंजेक्शन का उपयोग करते हैं।

ऐसा करने से डॉक्टर आपके मासिक धर्म पर कंट्रोल कर लेते हैं ताकि आपके ओवरी में मैच्योर अंडे के उत्पादन को मैनेज किया जा सके।

  • स्टिम्युलेशन (Stimulation)

इस चरण के दौरान गोनाडोट्रोपिन या फर्टिलिटी दवाइयों की मदद से महिला की ओवरी को स्टिमुलेट किया जाता है जिससे ज्यादा से ज्यादा मैच्योर अण्डों का उत्पादन हो सके।

इस दौरान महिला को 9 से 11 दिन तक फर्टिलिटी दवाइयां लेनी पड़ती है। इस दौरान डॉक्टर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के द्वारा महिला के ओवरी और पूरी सेहत पर नज़र रखे रहते हैं।

जब अंडे पूरी तरह से मैच्योर हो जाते हैं तो फर्टिलिटी डॉक्टर HCG का इंजेक्शन लगा अण्डों को रिलीज़ करते हैं।

  • अंडे को बाहर निकालना (Eggs retrieval)

जब ओवरीज़ द्वारा पर्याप्त संख्या में अंडे का उत्पादन किया जाता है, तो डॉक्टर महिला अंडे को एक छोटी सर्जरी की मदद से बाहर निकालते हैं।

ओवरी स्टिमुलेशन (ovary stimulation) यानि HCG इंजेक्शन देने के 35-36 घंटों के बाद यह सर्जरी की जाती है।

सर्जरी के दौरान, एनेस्थिसिया देने के बाद महिला के वेजाइना में एक पतली सुई डाली जाती है, सुई के आगे लगे सक्शन पंप की मदद से अंडे को खींचकर बाहर निकाला जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में 30 मिनट से एक घंटे का समय लगता है। लेकिन एनेस्थेसिया के कारण आपको कुछ और घंटों तक असहज महसूस हो सकता है।

  • फर्टीलाइज़ेशन (Fertilization)

महिला के अंडे को निकालने के बाद महिला के अंडो को प्रयोगशाला में पुरुष के स्पर्म के साथ निषेचित (fertilization) किया जाता है।

फर्टिलाजेशन की प्रक्रिया दो तरह से होती है प्राकृतिक फर्टिलाईजेशन या आईसीएसआई (ICSI) यानि इंट्रासाईटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन द्वारा फर्टिलाजेशन।

आईसीएसआई (ICSI) के दौरान डॉक्टर इंजेक्शन में स्पर्म को लेकर अंडे के अन्दर डालते हैं बल्कि प्राकृतिक फर्टिलाईजेशन में अंडा और स्पर्म पेट्रीडिश में स्वयं फर्टिलाज हो जाते हैं।

आईसीएसआई (icsi) प्रक्रिया उन दंपत्तियों के लिए सहायक है को लो स्पर्म काउंट या स्पर्म की बनावट में बदलाव के कारण गर्भधारण नहीं कर पा रहे।

फर्टिलाईजेशन की प्रक्रिया लगभग 18 से 20 घंटों में शुरू हो जाती है। प्रजनन के 3 दिन बाद भ्रूण तैयार हो जाता है।

  • एम्ब्र्यो ट्रांसफर (Embryo transfer)

प्रजनन के तीसरे या पांचवें दिन भ्रूण महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है जिसे एम्ब्र्यो ट्रांसफर कहा जाता है।

भ्रूण को गर्भाशय में डालने के लिए कैथेटर (catheter) का उपयोग किया जाता है, जो कि एक लचली नली की तरह दिखती है।

यहाँ यह बात ध्यान देने वाली है कि भ्रूण का ट्रांसफर प्रजनन के तीसरे या पांचवें दिन पर किया जा सकता है और पांचवें दिन में किये गए भ्रूण ट्रांसफर के सफल होने की संभावना अधिक होती है।

इस कारण IVF सेंटर के चुनाव के दौरान आपको वह अस्पताल या क्लिनिक चुनना चाहिए जिनमें भ्रूण को 5 दिन तक प्रयोगशाला में रखने की फैसिलिटी हो।

भ्रूण ट्रांसफर के बाद डॉक्टर आपको 10 से 12 दिन तक प्रोजेसट्रोन की दवाई या इंजेक्शन दे सकते हैं।

IVF से प्रेगनेंसी तब सफल मानी जाती है जब जब भ्रूण खुद यूटरीन वॉल (uterine wall) पर आ जाता है। इसमें 6 से 10 दिन का समय लग सकता है।

एग रिट्रीवल के दो हफ़्तों के बाद डॉक्टर प्रेगनेंसी टेस्ट कर गर्भवती होने की सूचना देते हैं। अगर आपका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव नहीं आता है तो डॉक्टर 2-3 दिन में फिर से ब्लड प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं।

एम्ब्र्यो ट्रांसफर के 2 से 3 हफ़्तों के बाद डॉक्टर आपका पहला अल्ट्रासाउंड करते हैं। अल्ट्रासाउंड पहली तिमाही में 2 से 3 बार किया जाता है ताकि आपके होने वाले बच्चे की ग्रोथ पर पूरी नज़र रखी जा सके।

और पढ़ें:10 Best IVF Doctors in Jaipur with High Success Rate

 

4.आइवीएफ के बाद प्रेगनेंसी में कितना समय लगता है?

When To Do Pregnancy Test After IVF (In Vitro Fertilization) in hindi

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आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित करने के बाद आपको गर्भावस्था परीक्षण (प्रेगनेंसी टेस्ट) करने के लिए दो हफ्ते यानि 15 दिन तक इन्तेजार करना होगा।

हालांकि, यह दो हर्फ्तो का समय काफी कठिन हो सकता है, लेकिन गर्भावस्था के सटीक परिणाम के लिए यह बहुत आवश्यक है कि आप 15 दिन से पहले प्रेगनेंसी टेस्ट न करें।

प्रेगनेंसी टेस्ट किसी भी तरीके से किया जा सकता है यानि होम प्रेगनेंसी किट के द्वारा यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट या डॉक्टर के क्लिनिक में ब्लड प्रेगनेंसी टेस्ट।

कौन-सा प्रेगनेंसी टेस्ट आपके लिए उपयुक्त होगा इसका निर्णय आपके डॉक्टर आपकी सेहत को ध्यान में रखते हुए लेंगे।

प्रेगनेंसी टेस्ट के अलावा डॉक्टर समय समय पर अल्ट्रासाउंड भी करेंगे। आईवीएफ के सफल होने के 9 महीने बाद आप तंदुरुस्त बच्चे को जन्म देंगे।

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5.क्या आईवीएफ (IVF process in hindi) का कोई नुकसान है?

Is IVF Process safe in hindi

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कई बार IVF प्रकिया सामान्य गर्भावस्था की तरह ही होती है जिसमें बस भ्रूण प्रयोगशाला में तैयार कर महिला के गर्भाशय में डाला जाता है।

आईवीएफ का कोई नुकसान या साइड-इफेक्ट नहीं होता है। बहुत लोगों का मानना है कि IVF treatment से होने वाले बच्चों के अंदर कोई कमी रह जाती है। लेकिन असल में ऐसा नहीं होता, IVF से हुए बच्चे भी नॉर्मल बच्चों की तरह एकदम स्वस्थ होते हैं।

IVF से हुए बच्चे, माँ के गर्भ में नॉर्मल बच्चों की तरह ही बड़े होते हैं। टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ में प्रजनन से लेकर शिशु के जन्म की पूरी प्रकिया नॉर्मल बच्चों जैसी ही होती है।

पीजीडी टेस्ट के द्वारा जेनेटिक डिसऑर्डर रहित एम्ब्र्यो ही आईवीएफ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में, बच्चों में किसी प्रकार का अनुवांशिक दोष नहीं आ सकता।

और पढ़ें:7 Best IVF Centers in Pune with High Success Rate 2020

 

6.आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया कितनी सफल है?

IVF success rate in hindi

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आईवीएफ की सफलता दर महिला की उम्र, इनफर्टिलिटी के कारण, कितने साल से इनफर्टिलिटी की समस्या है, भ्रूण के ट्रांसफर के तरीके, शुक्राणु की गुणवत्ता और डोनर के अंडे के उपयोग की स्थिति पर निर्भर करती है।

यहाँ यह बात ध्यान देने वाले है कि भ्रूण का प्रत्यारोपण यदि फर्टिलाईजेशन के पांचवें दिन हो तो उसकी सफलता दर तीसरे दिन में प्रत्यारोपित भ्रूण से ज्यादा होती है।

इस कारण आईवीएफ सेंटर का चुनाव करते समय उस क्लिनिक को चुना जाना चाहिए जिनमें 5 दिन के भ्रूण को रखने की सुविधा उपलब्ध हो।

सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी के अनुसार ये बताते हैं कि भारत में आईवीएफ (ivf) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) की सफलता दर क्या है:

  • 35 वर्ष से कम उम्र की महिला – 40 से 43 %
  • 35-37 वर्ष की उम्र की महिला – 33 से 36 %
  • 38-40 वर्ष की उम्र की महिला – 23 से 27 %
  • 41 वर्ष से अधिक उम्र की महिला – 13 से 18 %

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7.आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी से जुड़ें जोखिम और जटिलताएं क्या हैं?

What are the risks and complications associated with IVF or test tube baby procedure in hindi

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किसी भी मेडिकल प्रोसीजर की ही तरह इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन से भी संबंधित कुछ जोखिम हैं। ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से बात करने के बाद ही इसके बारे में पूरी तरह से सोचना चाहिए।

आईवीएफ (ivf) या टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) प्रक्रिया से जुड़ें जोखिम इस प्रकार हैं :

  • एक से अधिक बच्चे पैदा होने की संभावना (Multiple pregnancies)

आईवीएफ की तकनीक में जुड़वाँ बच्चे या ट्रिप्लेट्स (triplets) होने की संभावना बढ़ जाती है। जिससे समय से पहले बच्चे के जन्म होने के साथ जन्म के वक़्त बच्चे का वज़न कम होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

  • ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम (Ovarian hyperstimulation syndrome)

ये एक चिकित्सा स्थिति है, जो कुछ महिलाओं में हो सकती है। दरअसल, जो महिलाएं अंडे के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रजनन क्षमता की दवाओं के प्रति सेंसिटिव होती हैं, उनमें ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम की समस्या देखी जा सकती है।

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic pregnancy)

आईवीएफ से एक्टोपिक प्रेगनेंसी का रिस्क भी बना रहता है। इस स्थिति में भ्रूण गर्भ की जगह फेलोपियन ट्यूब में बढ़ने लगता है।

  • गर्भपात का खतरा (Risk of miscarriage)

महिलाओं की उम्र जितनी कम होती है उतनी ही आईवीएफ के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं दूसरी और अधिक उम्र की महिलाओं में आईवीएफ तकनीक के दौरान गर्भपात का रिस्क बढ़ जाता है।

और पढ़ें:Best 7 IVF Center in Kanpur with High Success Rate in 2020

 

8.भारत में आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की लागत क्या है?

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आईवीएफ उपचार भारत के सभी प्रमुख शहरों में उपलब्ध है, लेकिन उपचार की कुल लागत आईवीएफ डॉक्टर की विशेषज्ञता और भारत में आईवीएफ केंद्र की लोकप्रियता और सफलता दर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर, भारत में आईवीएफ की लागत रु 1,50,000/- से रु 2,50,000/- तक होती है।

कुछ चुनिंदा शहरों में आईवीएफ की लागत इस प्रकार है :

  • दिल्ली रु 1,75,000/- से रु 250000.00/-
  • मुंबई रु 1,75,000/- से रु 3,00,000/-
  • बंगलुरु रु 1,60,000/- से 2,00,000/-
  • चेन्नई रु 1,50,000/- से रु 2,00,000/-
  • पुणे रु 1,40,000/- से रु 1,60,000/-
  • हैदराबाद रु 1,40,000/- से रु 1,75,000/-

भारत को आईवीएफ उपचार के लिए सबसे सस्ते देशों में से एक माना जाता है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि आपको गुणवत्ता उपचार पर समझौता करना होगा क्योंकि भारत के पास सबसे उन्नत सुविधाऐं और विश्व स्तरीय (world class) आईवीएफ विशेषज्ञों के साथ अत्याधुनिक तकनीक (advanced technology) भी मौजूद हैं।

और पढ़ें:Best 7 IVF Centers in Chandigarh with High Success Rate

 

9.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

अगर आप आईवीएफ की मदद से बच्चे को जन्म देने का सोच रही हैं तो इसमें बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। आईवीएफ़ उपचार उन दंपत्तियों के लिए बेहद कारगर उपाय हैं जो किसी कारण से गर्भधारण नहीं कर पा रहें हैं। हालांकि, आईवीएफ़ की सफलता दर महिला की उम्र के साथ-साथ कई कारणों पर निर्भर करती है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 02 Apr 2020

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अक्सर पूछे गए प्रश्न

आईवीएफ क्या है?

What is IVF? in hindi

IVF kya hai

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सबसे सामान्य प्रकार की असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (assisted reproductive technology - ART) है।

आईवीएफ उपचार का उपयोग बांझपन के कुछ कारणों को दरकिनार कर, भ्रूण बनाने के लिए किया जाता है।

बांझपन के कुछ कारणों में शामिल है - शुक्राणु असामान्यताएं, और महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब की समस्या या ओव्यूलेशन अनियमितता आदि। इस प्रक्रिया से जन्म लेने वाले बच्चे को टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby) कहा जाता है।

फर्टिलिटी डॉक्टर से परामर्श करने से पहले मुझे कब तक इंतजार करना चाहिए?

How long should I wait before consulting a fertility doctor? in hindi

Fertility doctor se milne se pehle mujhe kab tak intezar karna chahiye

आमतौर पर अगर एक साल तक कोशिश करने के बाद भी आप गर्भवती नहीं हो पा रही हैं तो उसके बाद आपको फर्टिलिटी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

एक फर्टाइल दंपत्ति की किसी भी महीने में गर्भधारण करने की संभावना लगभग 20 प्रतिशत होती है।

ऐसे में गर्भधारण करने की कोशिश करने के एक वर्ष के बाद लगभग नब्बे प्रतिशत जोड़े को सफलता मिल जाती है।

इसके बाद 10 प्रतिशत जोड़े को फर्टिलिटी डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होती है।

आईवीएफ की आवश्यकता किसे पड़ती है?

Who needs IVF? in hindi

IVF ki avashyakta kise padti hai

जब महिला या पुरुष की प्रजनन क्षमता स्पर्म की कम संख्या, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब की समस्याएं, ओवुलेशन से जुड़े विकार, सर्वाइकल म्यूकस में स्पर्म का जीवित न रह पाने, अन्य स्वास्थ्य समस्या या अस्पष्टीकृत बांझपन जैसे किसी भी कारक से प्रभावित होती है तो ऐसी स्थिति में दंपत्ति को आईवीएफ की रूख करना चाहिए। आईवीएफ की मदद से बाँझपन का इलाज का संभव है।

बाँझपन किस विटामिन की कमी से होता है?

Which vitamin deficiency cause infertility ? in hindi

Kis vitamin ki kami se banjhpan hota hai

शोध से पता चलता है कि विटामिन-डी की कमी से बाँझपन होता है। विटामिन-डी अंडाशय में अच्छी गुणवत्ता वाले अंडे के उत्पादन को बढ़ावा दे सकता है और भ्रूण के गर्भाशय में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण की संभावना में सुधार कर सकता है।

आईवीएफ की प्रक्रिया क्या है?

what is the procedure of IVF? in hindi

IVF process

आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिला की ओवरी (ovaries) से अंडे (eggs) निकाले जाते हैं और फिर लैब में स्पर्म के साथ फर्टिलाइज़ किए जाते हैं। फर्टिलाइज़शन की प्रक्रिया के बाद भ्रूण बनता है और फिर इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है ताकि वह विकास कर सके और शिशु का रूप ले सके।

क्या आईवीएफ से पहले मुझे आईयूआई की कोशिश करनी चाहिए?

Should I try IUI before IVF? in hindi

Kya IVF se pehle mujhe IUI ki koshish karni chahiye

आईयूआई यानि इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन, ज्यादातर पुरुष बांझपन के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है।

आईयूआई की प्रक्रिया में स्पर्म को सीधे महिला के योनि में इंजेक्ट कर दिया जाता है। सरल शब्दों में कहे तो पुरुष बाँझपन उपचार आईयूआई से संभव है।

वहीं आईवीएफ में, अंडे और शुक्राणु को गर्भाशय के बाहर संयोजित किया जाता है, और फिर निषेचित अंडे या भ्रूण को गर्भाशय में रखा जाता है।

हालांकि, आपके लिए कौन-सी विधि उचित होगी यह कई कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि आपकी उम्र, मेडिकल इतिहास आदि! विधि निर्धारित करने के लिए अपने चिकित्सक से बात करें।

क्या होगा अगर मैं स्वस्थ अंडे का उत्पादन नहीं कर पाती या मेरे पति को प्रजनन से जुड़ी समस्या हो?

What if I can not produce healthy eggs or my husband has fertility problems? in hindi

Kya hoga agr main healthy eggs release nhi kar pati ya mere husband ko

इस स्थिति में भी आईवीएफ की और रूख कर सकती हैं। अगर आप हेल्दी एग्स रिलीज़ नहीं कर पा रही हैं तो आप किसी दूसरी महिला के अंडे (donor eggs) का इस्तेमाल कर सकती हैं।

ठीक इसी तरह अगर आपके पार्टनर को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या है तो आप डोनर स्पर्म (donor sperm) का इस्तेमाल कर आईवीएफ प्रक्रिया का विकल्प चुन सकती है।

आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान कितने भ्रूण डाले जाने चाहिए?

How many embryos should be created or transferred during IVF process? in hindi

IVF prakriya ke dauran kitne bhrun daale jane chahiye

आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिला की उम्र के आधार पर भ्रूण ट्रांसफर किए जाते हैं। जितनी अधिक महिला की उम्र होती है, उतने अधिक एम्ब्र्यो (embryo) ट्रांसफर किए जा सकते हैं। हालांकि, अधिकतर मामलों में दो भ्रूण ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

आईवीएफ़ उपचार के कितने दिनों बाद मैं गर्भवती हो सकती हूँ?

एम्ब्र्यो ट्रांसफर के 14 दिन के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट से आप गर्भधारण सुनिश्चित कर सकती हैं।

अगर मैं आईवीएफ से गर्भवती हो गई तो क्या होगा?

What happens if I become pregnant with ivf? in hindi

Agar main garbhvati ho gayi to kya hoga

एक बार गर्भावस्था की पुष्टि हो जाने के बाद, आपको अपने फ़र्टिलिटी डॉक्टर से नियमित रक्त परीक्षण कराना होगा।

इसके बाद अल्ट्रासाउंड की मदद से देखने की कोशिश की जाएगी कि गर्भावस्था सुचारु रूप से आगे बढ़ रही है नहीं।

एक बार भ्रूण के दिल की धड़कन का पता चल जाने के बाद, आपको प्रसवपूर्व देखभाल के लिए , प्रसूति विशेषज्ञ के पास भेजा जाएगा।

यदि मैं गर्भवती नहीं हूं, तो हम फिर से कब कोशिश कर सकते हैं?

If I am not pregnant, when can we try again? in hindi

Agar main pregnant nahi hoon, to phir se kab koshish kar sakte hain

आमतौर पर, रोगियों को एक और आईवीएफ चक्र फिर से शुरू करने से पहले एक या दो पूर्ण मासिक धर्म चक्रों के लिए इंतजार करने की सलाह दी जाती है।

आईवीएफ उपचार की कोशिश, कपल कितनी बार कर सकते हैं?

How many times can a couple try for IVF treatment? in hindi

Kitni baar ek dampatti IVF treatment ki koshish kar sakta hai

इसकी कोई सीमा नहीं है। हालांकि, कई आईवीएफ प्रयास गर्भावस्था की संभावना को कम कर सकते हैं। कुछ मामलों में, गर्भावस्था होने तक कई प्रयास किए जाते हैं।

क्या आईवीएफ के दौरान उम्र गर्भावस्था की संभावना को प्रभावित करती है?

Does age influence the chance of pregnancy during IVF? in hindi

Kya IVF ke dauran umr pregnancy ki sambhavna ko prabhavit karti hai

महिला की आयु आईवीएफ चक्र को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक है। गर्भावस्था की संभावना 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लिए अधिक होती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे-वैसे आईवीएफ के सफल होने की संभावना कम होती जाती है।

क्या आईवीएफ उपचार में गर्भपात का खतरा अधिक होता है?

Is there a higher risk of miscarriage in IVF treatment? in hindi

Kya IVF treatment mein miscarriage ka khatra adhik hota hai

आईवीएफ उपचार के बाद गर्भपात का ख़तरा थोड़ा अधिक होता है। यह जोखिम उपचार से ही नहीं, बल्कि रोगी के गर्भवती होने की क्षमता से जुड़ा है।

क्या आईवीएफ में जुड़वाँ या अधिक बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है?

Will IVF significantly increase my chances of having twins or more? in hindi

Kya IVF mein judwa ya teen bachhe hone ki sambhavna badh jayegi

ये आईवीएफ उपचार पर विचार करने वाले जोड़ों द्वारा पूछा जाने वाला एक बहुत ही सामान्य प्रश्न है, और इसका उत्तर कई कारकों पर निर्भर करता है।

आप और आपके डॉक्टर भ्रूण की संख्या को आपके गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने का निर्णय लेंगे। अगर एक सिंगल भ्रूण को स्थानांतरित किया जाता है, तो कई गर्भावस्था होना असंभव होगा।

क्या एम्ब्र्यो ट्रांसफर के बाद कपल सेक्स कर सकते हैं?

एम्ब्र्यो ट्रांसफर के बाद प्रेगेनेंसी टेस्ट तक (दो हफ्ते) सेक्स न करना सुरक्षित है। अगर आप सकारात्मक प्रेगेंसी टेस्ट के दो हफ्ते बाद किसी तरह की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग महसूस नहीं कर रहीं हैं और आपके बेबी की धड़कन सामान्य है तो आप सेक्स कर सकती हैं।

क्या मुझे उपचार से पहले विशेष डाइट प्लान का पालन करना चाहिए?

Should i need to follow a special diet before treatment? in hindi

Kya mujhe upchar se pehle ek vishesh diet ka palan karna chahiye

इस विषय को लेकर अब तक कोई अध्ययन नहीं हुआ है। लेकिन, कुछ शोधों से पता चला है कि जिन लोगों को उपचार में सफलता हासिल हुई थी उन्होंने चक्र के दौरान अपने डाइट में सब्ज़ी, मछली के जैविक तेल (fish organic oil) आदि को शामिल किया था।

आईवीएफ उपचार (आईवीएफ लागत) में कितना खर्च आता है?

How much does IVF treatment cost? in hindi

IVF treatment mei kitna kharcha aata hai

भारत में आईवीएफ की लागत डॉक्टर के अनुभव और आईवीएफ क्लिनिक के स्थान के आधार पर 106,100 से 235,500 तक होती है।

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