हेल्प सिंड्रोम - लक्षण, कारण, जोखिम कारक और उपचार

Hellp Syndrome - symptoms, causes, risk factors and treatment in hindi

Hellp Syndrome – lakshan, kaaran, risk factors aur treatment in hindi


Introduction

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हेल्प सिंड्रोम गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक खतरनाक स्थिति है जो आमतौर पर गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले विकसित होती है।

हेल्प सिंड्रोम को अक्सर प्री-एक्लेम्पसिया (pre-eclampsia) का एक रूप माना जाता है।

हेल्प सिंड्रोम सिंड्रोम नाम तीन असामान्यताओं से लिया गया है :

  • एच (H) - हेमोलिसिस (लाल रक्त कोशिकाओं का टूटना)
  • ईएल (EL) - लिवर एंजाइम (लिवर फंक्शन)
  • एलपी (LP) - लो प्लेटलेट्स काउंट (प्लेटलेट रक्त को थक्का बनाने में मदद करता है)

हेल्प सिंड्रोम पूरी दुनिया में लगभग 0.2 से 0.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करता है।

यदि समय रहते इसका सही उपचार न किया जाये तो यह मां और बच्चे के लिए गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है।

यह पाया गया है कि प्रीक्लेम्पसिया से पीड़ित लगभग 4-12 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को हेल्प सिंड्रोम विकसित होने का ख़तरा होता है।

प्री-एक्लम्पसिया और लक्षण (Pre-eclampsia & symptoms)

प्री-एक्लम्पसिया गर्भावस्था की एक ऐसी जटिलता है, जिसमें महिला गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप और ऑर्गन फ़ेल्यर (organ failure) की शिकार होती है।

ऑर्गन फ़ेल्यर के मामलों मुख्य रूप से महिलाएं लीवर और किडनी फ़ेल्यर की शिकार होती है।

प्री-एक्लम्पसिया मां और भ्रूण दोनों के लिए घातक हो सकता है और आमतौर पर 20 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद एक महिला में शुरू होता है।

यदि कोई महिला गर्भावस्था के शुरूआती चरण में प्री-एक्लेमप्सिया की शिकार हो जाती है, तो गर्भावस्था के दौरान महिला को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में, एक बच्चे का विकास होने में अधिक समय लग जाता है और बच्चे को हमेशा गंभीर जटिलताओं का ख़तरा होता है, जिससे बचने की ज़रूरत होती है।

प्री-एक्लेमप्सिया के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • मूत्र में अत्यधिक प्रोटीन
  • गंभीर सिरदर्द
  • मिचली या उल्टी
  • ऊपरी पेट में दर्द
  • मूत्र के आउटपुट में कमी
  • प्लेटलेट काउंट में कमी
  • बिगड़ा हुआ लिवर का कार्य
  • सांस की तकलीफ़

प्री-एक्लेमप्सिया से बचाव के लिए नियमित रूप से गर्भवती महिला के रक्तचाप की निगरानी करना ज़रूरी होता है।

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इस लेख़ में

  1. 1.हेल्प सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?
  2. 2.हेल्प सिंड्रोम के कारण क्या हैं?
  3. 3.हेल्प सिंड्रोम से जुड़े जोखिम कारक क्या हैं?
  4. 4.हेल्प सिंड्रोम का निदान क्या है?
  5. 5.हेल्प सिंड्रोम के उपचार क्या हैं?
  6. 6.हेल्प सिंड्रोम की संभावित जटिलताएं क्या हैं?
  7. 7.हेल्प सिंड्रोम वाली महिलाओं के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण क्या है
  8. 8.हेल्प सिंड्रोम की रोकथाम कैसे करें?
  9. 9.निष्कर्ष
 

हेल्प सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?

What are the symptoms of Hellp Syndrome in hindi

Hellp Syndrome ke symptoms kya hain in hindi

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हेल्प सिंड्रोम के लक्षणों में शामिल हैं :

  • मिचली (nausea) के साथ पेट में दर्द
  • उल्टी, एनीमिया और पीठ दर्द
  • कुछ महिलाओं को सिरदर्द और दृष्टि की समस्या भी हो सकती है
  • थकान या अस्वस्थता
  • सूजन
  • गंभीर सिरदर्द के साथ रक्तस्राव
  • स्ट्रोक और दौरे
  • उच्च रक्तचाप (निम्न रक्तचाप)

ये लक्षण, स्थिति की गंभीरता के आधार पर, विभिन्न रोगियों में भिन्न होते हैं। ये लक्षण रात के समय गंभीर हो सकते हैं।

इस दौरान जैसे-जैसे स्थिति खराब होने लगती है, हेमाटोमा (hematoma) होने और लिवर कैप्सूल (liver capsule) के टूटने की स्थिति पैदा हो जाती है। हेमाटोमा ब्लड वेससल्स के बाहर रक्त संग्रह होने की स्थिति है।

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हेल्प सिंड्रोम के कारण क्या हैं?

What are the causes of Hellp Syndrome in hindi

Hellp Syndrome ke karan kya hain in hindi

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हेल्प सिंड्रोम का मुख्य कारण अभी भी अज्ञात है। यह सिंड्रोम आमतौर पर प्री-एक्लम्पसिया या एक्लम्पसिया के साथ होता है। जिन महिलाओं को पहले यह सिंड्रोम था, उन्हें फिर से होने का अधिक ख़तरा होता है।

उच्च रक्तचाप वाली महिलाओं में यह सिंड्रोम आम होता है, हालांकि सामान्य रक्तचाप वाली महिला भी इस सिंड्रोम की शिकार हो सकती है।

निम्नलिखित मामलों में आपकी मुश्किलें अधिक हो सकती हैं :

  • अगर महिला की उम्र 30 साल से अधिक है और महिला श्वेत नस्ल की है
  • जब गर्भवती महिला को उच्च रक्तचाप होता है
  • जब एक महिला ने पहले दो या अधिक बार जन्म दिया है
  • कोकेशियान (caucasian) महिलाओं को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है
और पढ़ें:अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण, कारण और उपचार
 

हेल्प सिंड्रोम से जुड़े जोखिम कारक क्या हैं?

What are the risk factors associated with Hellp Syndrome in hindi

Kin mahilaon ko Hellp Syndrome ki risk adhik hoti hai in hindi

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हेल्प सिंड्रोम आनुवंशिक हो सकता है और जो महिलाएं पहले माँ बन चुकी हैं, उन्हें इसका ख़तरा अधिक होता है।

बढ़ा हुआ बीएमआई (elevated BMI) और मेटाबोलिज्म संबंधी विकार (metabolic disorders) भी महिला रोगियों में हेल्प सिंड्रोम के जोखिम को बढ़ाते हैं।

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हेल्प सिंड्रोम का निदान क्या है?

What is the diagnosis of Hellp Syndrome in hindi

Hellp Syndrome ke liye kaun se diagnostic tests zaruri hain in hindi

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हेल्प सिंड्रोम के लक्षण गर्भावस्था के दौरान कई अन्य जटिलताओं को पैदा कर सकते हैं। इसलिए यह सुझाव दिया जाता है कि गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान यदि किसी महिला में कुछ जटिलताएँ नज़र आयें, तो डॉक्टर द्वारा सारे ज़रूरी परीक्षण कराएं।

हेल्प सिंड्रोम के निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षण उपयोगी हो सकते हैं:

  • लिवर परीक्षण
  • रक्त परीक्षणों की एक श्रृंखला
  • हेमोलिसिस (hemolysis)
  • ब्लड प्रैशर
  • प्रोटीन की जांच के लिए मूत्र परीक्षण
  • एबनोरमल पेरीफेरीयल स्मीयर (abnormal peripheral smear)
  • लैक्टेट डीहाइड्रोजिनेज (lactate dehydrogenase)
  • बिलीरुबिन स्तर (bilirubin level)
  • एलिवेटेड लिवर एंजाइम स्तर (elevated liver Enzyme levels)
  • सीरम एस्परेट एमिनोट्रांस्फरेज़ (serum aspartate aminotransferase)
और पढ़ें:कोरोना वायरस के बारे में क्या जानना जरुरी है?
 

हेल्प सिंड्रोम के उपचार क्या हैं?

What are the treatment options available for Hellp Syndrome in hindi

Hellp Syndrome ka treatment kya hai in hindi

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गर्भवती महिलाओं में हेल्प सिंड्रोम को रोकने के लिए कोई विशेष उपाय नहीं है। हेल्प सिंड्रोम का इलाज करने का सबसे अच्छा तरीका बच्चे की डिलीवरी है। डिलीवरी के 2-3 दिनों के अन्दर हेल्प सिंड्रोम के अधिकांश दुष्प्रभाव और लक्षण कम हो जाते हैं।

हेल्प सिंड्रोम के उपचार में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • गर्भावस्था के दौरान पूरा आराम (complete bed rest)
  • महिला रोगी को अस्पताल में प्रवेश लेना ज़रूरी होता है ताकि उसपर बारीकी से नजर रखी जाए
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroid), ताकि शिशु के फेफड़ों को अधिक तेजी से विकसित करने में मदद मिल सके
  • मैग्नीशियम सल्फेट (magnesium sulfate)
  • अगर प्लेटलेट काउंट (platelet count) सामान्य ब्लड काउंट से कम हो जाए तो ब्लड ट्रांसफ्यूजन
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हेल्प सिंड्रोम की संभावित जटिलताएं क्या हैं?

Possible complications of HELLP syndrome in hindi

HELLP syndrome kaun si complications paida kar sakta hai in hindi

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हेल्प सिंड्रोम से जुड़ी जटिलताओं में शामिल हैं:

  • यकृत टूटना (liver rupture)
  • किडनी फ़ेल्यर (kidney failure)
  • तीक्ष्ण स्वास विफलता (acute respiratory failure)
  • फेफड़ों में तरल पदार्थ (fluid in the lungs)
  • प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (excessive bleeding during delivery)
  • प्लेसेंटा का विघटन (placental abruption) इसके कारण बच्चे के जन्म से पहले नाल गर्भाशय से बाहर निकल जाता है
  • आघात (stroke)
  • मौत (death)

प्रारंभिक उपचार इन जटिलताओं को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। हालांकि, उपचार के साथ भी कुछ जटिलताएं हो सकती हैं।

प्रसव के बाद भी हेल्प सिंड्रोम के लक्षण आपको और आपके बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं।

और पढ़ें:गर्भकालीन मधुमेह के कारण, लक्षण और उपचार
 

हेल्प सिंड्रोम वाली महिलाओं के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण क्या है

What is the long-term outlook for women with HELLP syndrome in hindi

HELLP syndrome wali mahilaon ke liye long-term outlook kya hai in hindi

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अगर समय पर इलाज हो जाए तो हेल्प सिंड्रोम से पीड़ित ज्यादातर महिलाएं पूरी तरह ठीक हो जाती हैं। बच्चे के प्रसव के बाद लक्षण में भी काफी सुधार हो जाता है।

अधिकांश लक्षण और दुष्प्रभाव प्रसव के बाद कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। रोग के समाधान के लिए प्रसव के बाद अपने चिकित्सक से नियमित फॉलो-अप और उनकी सलाह का पालन करना ज़रूरी है।

हेल्प सिंड्रोम के कारण होने वाली सबसे बड़ी चिंता होती है बच्चे पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव। हेल्प सिंड्रोम वाले अधिकतर मामलों में प्रसव जल्दी हो जाता है, जिससे समय से पहले प्रसव (premature delivery) से जुड़ी जटिलताओं का ख़तरा बढ़ जाता है।

इसीलिए 37वें सप्ताह से पहले पैदा होने वाले शिशुओं की खास निगरानी रखी जाती है।

और पढ़ें:गर्भपात के लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं
 

हेल्प सिंड्रोम की रोकथाम कैसे करें?

How to prevent Hellp Syndrome in hindi

Hellp Syndrome ko kaise roke in hindi

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निम्न उपायों का पालन करके हेल्प सिंड्रोम के जोखिम को कम किया जा सकता है:

  • मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों को रोकने के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें
  • स्वस्थ खाद्य पदार्थ जैसे साबुत अनाज, सब्जियां, फल आदि ज़्यादा खाएं
  • नियमित रूप से व्यायाम करें

हेल्प सिंड्रोम को रोकने के लिए केवल ऊपर उल्लिखित तरीके ही मौजूद हैं। हेल्प सिंड्रोम के कारण सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की ज़रूरत नहीं होती है।

ऑपरेटिव सर्जरी के कारण रक्त के थक्के जमने या अत्यधिक रक्तस्राव आदि की समस्या खड़ी हो सकती है। यदि आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण या जोखिमों का अनुभव करती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ताकि प्री-एक्लेमप्सिया या हेल्प सिंड्रोम का सही समय पर पता चल पाये।

और पढ़ें:गर्भवस्था के दौरान आयरन की कमी (एनीमिया) होने के कारण, लक्षण और उपचार
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

हेल्प सिंड्रोम गर्भावस्था की एक ऐसी जटिलता है जो हेमोलिसिस, लिवर एंजाइम की अधिक मात्रा और कम प्लेटलेट काउंट से पहचानी जाती है।

यह आमतौर पर गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले विकसित होती है। हेल्प सिंड्रोम माँ और बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान यदि किसी भी प्रकार की जटिलताएँ नज़र आयें, तो डॉक्टर से जांच करवाना न भूलें।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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