healthy diet ke baare mein jankari in hindi

पौष्टिक आहार क्या है और इन्हें कैसे तैयार कर सकते हैं

Important facts about healthy food and diet in hindi

Healthy diet ke baare mein jankari in hindi

 

एक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए जिन चीजों की जरूरत होती है उसमें संतुलित व पौष्टिक आहार भी शामिल हैं।

दरअसल संतुलित आहार (balanced diet) का मतलब है पोषक तत्व से भरपूर खाना।

संतुलित आहार में जरूरी प्रोटीन, कैल्शियम, हेल्दी फैट, विटामिन, और कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व शामिल होते हैं।

आइये इस लेख में संतुलित आहार के बारे में जानते हैं।

 

संतुलित आहार के अनिवार्य तत्व क्या होते हैं

What are required elements of balanced diet in hindi

Santulit aahar ke anivarya tatav kya hai in hindi

Santulit aahar ke anivarya tatav kya hai

वे सभी पोषक तत्व जो किसी भोजन तालिका (meal planning chart) को संतुलित और पौष्टिक बनाते हैं, इस प्रकार हैं:

  • प्रोटीन (Protein)

    प्रोटीन न केवल व्यक्ति की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक है बल्कि यह इम्यूनिटी सिस्टम को सुदृढ़ भी रखने में भी मददगार है।

    इसके अतिरिक्त यह बच्चे से लेकर वृद्ध आयु तक के व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    इसके अतिरिक्त प्रोटीन तनाव, डिप्रेशन और एंगजाइटी को खत्म करने में भी सहायक है। 

    किसी व्यक्ति को कितने प्रोटीन की आवश्यकता है यह उस व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले शारीरिक श्रम पर निर्भर करता है।

    सामान्य रूप से प्रोटीन मांसाहारी भोजन जैसे मांस, अंडे और मछ्ली आदि में प्रचूर मात्रा में मिल सकता है।

    लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तब आप प्रोटीन के लिए पनीर, दूध, मटर और बीन्स व चने का सेवन कर सकते हैं।

  • आयरन व कैल्शियम (Iron and Calcium)

    शरीर में आयरन व कैल्शियम की जरूरत हड्डियों की मज़बूती, दांतों की हेल्थ के लिए जरूरी होता है।

    इसके अलावा कैल्शियम व्यक्ति के हृदय की मांसपेशियों, शरीर के सभी सेल्स और नर्वस सिस्टम के सही रेगुलेशन के लिए भी जरूरी होता है।

    वैसे तो आयरन और कैल्शियम की जरूरत हर व्यक्ति को हर आयु में रहती है, लेकिन बच्चों और महिलाओं विशेषकर प्रेग्नेंट महिलाओं को इन न्यूट्रीट्रेंट्स की ज्यादा जरूरत होती है।

    आयरन के लिए आप पालक, मेथी, टमाटर आदि सब्ज़ियाँ और अंजीर, अंगूर आदि जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं।

    इसके अलावा कैल्शियम के लिए सभी डेयरी प्रोडक्ट, साबुत अनाज, दालें, लहसुन आदि का सेवन किया जा सकता है।

  • विटामिन्स (Vitamins)

    हर व्यक्ति को हमेशा स्वस्थ रहने के लिए अन्य न्यूट्रीट्रेंटस के साथ ही विटामिन्स की भी जरूरत रहती है।

    विटामिन्स दरअसल वे रासायनिक और कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो हर खाने योग्य वस्तु में अलग-अलग मात्रा में होते हैं और शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही संपूर्ण विकास के लिए जरूरी भी होते हैं।

    इन्हें मेडिकल भाषा में सिक्यूरिटी एलीमेंट भी कहा जाता है क्योंकि हर प्रकार के विटामिन का शरीर में अलग-अलग काम होता है।

    मुख्य रूप से विटामिन दो प्रकार के होते हैं – पानी में घुल जाने वाले विटामिन जैसे विटामिन बी और इसकी सभी श्रेणी जैसे बी 2, बी 3, बी 6, बी 10 और बी 12 आदि और विटामिन सी।

    विटामिन बी की सभी श्रेणियों को सामूहिक रूप में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स कहा जाता है।

    दूसरे प्रकार के विटामिन वो होते हैं जो फैट के रूप में शरीर में घुल जाते हैं।

    इनमें शामिल विटामिन ए, डी, ई और के होते हैं।

  • कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)

    जैसे किसी भी मशीन को चलाने के लिए ऊर्जा यानि एनर्जी की जरूरत होती है वैसे ही हमारे शरीर को भी हर समय एक्टिव रहने के लिए एनर्जी की जरूरत होती है।

    भोजन के जरिये यह एनर्जी कार्बोहाइड्रेट से मिलती है।

    लेकिन इसका सेवन सही मात्रा में किया जाना जरूरी होता है नहीं तो यह शरीर में एक्स्ट्रा फैट के रूप में जमा होकर वज़न भी बढ़ा देती है।

    इसके लिए कम चिकनाई वाले डेयरी प्रोडक्ट, ओर्गेनिक रूप से उगाई हुई सब्ज़ियाँ जैसे आलू, ब्राउन राइस आदि का सेवन करें तो इससे शरीर में केवल एनर्जी ही जाएगी, अतिरिक्त फैट नहीं जमा होने पाएगी।

  • मिनरल्स (Minerals in hindi)

    हमारे शरीर के हर अंग का सही ढंग से संचालन होता रहे इसके लिए यह जरूरी है कि हमारे शरीर को सही मात्रा में मिनरल्स या खनिज लवण भी मिलते रहें।

    ये आयोडीन, आयरन, मेग्नीशियम , कैल्शियम, सोडियम, पोटेशियम, क्लोरीन आदि के रूप में होते हैं।

    शरीर में हड्डियों और दांतों की हेल्थ के लिए मिनरल्स बेहद ज़रूरी हैं।

    इसके साथ ही ये हार्मोन के बैलेंस को बनाने के साथ ही नर्वस सिस्टम को भी ठीक रखते हैं।

  • गुड फैट (Good Fat in hindi)

    अधिकतर लोगों का यह मानना है कि पौष्टिक खाना वह होता है जिसमें फैट्स की मात्रा बिलकुल ना हो।

    लेकिन यह ख्याल बिल्कुल गलत है क्योंकि भोजन में फैट या वसा भी कुछ मात्रा में ज़रूरी है।

    लेकिन इसे सही मात्रा में और संतुलित रूप में लेना जरूरी होता है नहीं तो यह शारीरिक वजन बढ़ने का मुख्य कारण बन सकती है।

    इसलिए अपने भोजन में गुड फैट के रूप में अखरोट, जैतून का तेल, मछ्ली का तेल और ओमेगा 3 युक्त चीजों का सेवन कर सकते हैं।

 

संतुलित आहार चार्ट क्या होता है

What is healthy diet planner in hindi

Healthy diet chart kya hota hai aur kaise taiyar hota hai in hindi

Healthy diet chart kya hota hai aur kaise taiyar hota hai in hindi

जब किसी व्यक्ति की आयु, लिंग और जीवनशैली को ध्यान में रखकर संतुलित आहार के सभी अनिवार्य तत्वों को शामिल करते हुए एक आहार योजना को तैयार किया जाता है तब इसे संतुलित आहार योजना (balanced meal planning) कहा जाता है। 

इसलिए एक अच्छे और पौष्टिक आहार योजना को तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि किसी एक व्यक्ति को एक निश्चित समय पर कितने पौष्टिक तत्वों या कैलोरी की जरूरत हो सकती है।

इसके लिए  जिन बातों को ध्यान में रखा जाता है वो इस प्रकार है:

व्यक्ति की आयु (Diet chart according to age)

सामान्य रूप से व्यक्ति की आयु के आधार पर उन्हें मिलने वाली कैलोरी की मात्रा का निर्धारण होता है।

जैसे एक बच्चे की कैलोरी की जरूरत एक वृद्ध व्यक्ति की तुलना में अधिक होती है।

इसी प्रकार एक सुस्त जीवनशैली जीने वाले पुरुष और महिला की तुलना में एक्टिव जीवन जीने वाले पुरुष और महिला को अधिक कैलोरी की जरूरत होती है।

इस बात को इस प्रकार समझा जा सकता है :

कैलोरी चार्ट

कैलोरी की जरूरत का आधार

आयु

अनिवार्य कैलोरी की मात्रा

छोटे बच्चे

2 से 8 वर्ष

1000 से 1400

एक्टिव रहने वाली महिला

14 से 30 वर्ष

2400

सुस्त जीवनशैली जीने वाली महिला

14 से 30 वर्ष

1800 से 2000

एक्टिव रहने वाले पुरुष

14 से 30 वर्ष

2800 से 3000

सुस्त जीवनशैली रहने वाले पुरुष

14 से 30 वर्ष

2000 से 2600

30 वर्ष और इससे अधिक आयु के एक्टिव रहने वाले महिला और पुरुष

---

2200 से 3000

30 वर्ष और इससे अधिक आयु के सुस्त जीवनशैली में रहने वाले महिला और पुरुष

---

1800 से 2200

इस प्रकार कहा जा सकता है कि यदि यहाँ बताई गई कैलोरी से अधिक या कम मात्र में केलोरीज़ भोजन के माध्यम से शरीर में जाती हैं तब दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति को नुकसान हो सकता है।

  • व्यक्ति का जेंडर (Diet chart according to Gender)

    सामान्य रूप से यह देखा गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को कम कैलोरीज़ की जरूरत होती है।

    लेकिन गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली स्त्रियों को अन्य समय की तुलना में अधिक कैलोरीज़ की जरूरत होती है।

  • वातावरण (Diet chart according to Environment)

    साधारण रूप में यह देखा गया है कि जो लोग गर्म प्रदेशों या वातावरण में रहते हैं उन्हें कम एनर्जी और कैलोरी की जरूरत होती है।

    जबकि ठंडे वातावरण में रहने वाले लोगों को स्वयं को एक्टिव और हेल्दी रखने के लिए अधिक कैलोरी की जरूरत होती है।

  • एक्टिविटी (Diet chart according to Activity)

    यह देखा गया है कि जो लोग अधिक शारीरिक मेहनत वाले काम करते हैं उन्हें अधिक एनर्जी की जरूरत होती है।

    लेकिन जो लोग मानसिक मेहनत का काम करते हैं उन्हें अपेक्षाकृत कम कैलोरी की जरूरत होती है।

 

हेल्दी डाइट चार्ट कैसे बनाएँ

Way to prepare a balanced diet chart in hindi

healthy diet chart kaise banaye in hindi

healthy diet chart kaise banaye in hindi

हेल्दी डाइट चार्ट बनाने के लिए सबसे पहले यह देखा जाता है कि वह किस आयु के व्यक्ति के लिए बनाया जा रहा है और उसका जेंडर क्या है।

इसके साथ ही उसका लाइफस्टाइल क्या है और वह व्यक्ति किस प्रकार के वातावरण में रह रहा है।

एक बैलेंस्ड और हेल्दी डाइट चार्ट में इन चीजों को शामिल किया जाता है :

  • अनाज (Grains)

    डाइट चार्ट को बनाते समय सबसे पहले उसमें अनाज (grain) को शामिल किया जाता है।

    इसमें मुख्य रूप से साबुत अनाज जैसे जौ, बाजरा, चना, मक्का और ज्वार आदि को शामिल किया जा सकता है।

    इसके अलावा इसमें चावल और दलिया भी शामिल किया जा सकता है।

    मुख्य रूप से यह कार्बोहाइड्रेट यानि एनर्जी देने वाले स्त्रोत होते हैं।

    हेल्दी भोजन में कार्बोहाइड्रेट के किसी भी सोर्स का 33% हिस्सा ही होना चाहिए।

  • फल व सब्जियाँ (Fruits and Vegetables) 

    डाइट चार्ट का अगला भाग फल व सब्जियों से मिलकर बनता है। इनसे शरीर को विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं।

    डबल्यूएचओ (WHO) के अनुसार एक हेल्दी डाइट चार्ट में लगभग 400 ग्राम फल और सब्ज़ियाँ ज़रूर होनी चाहिए।

    इससे न केवल हृदय रोग, डायबिटीज़ और मोटापे जैसी परेशानियों से छुटकारा मिलता है बल्कि सभी न्यूट्रीट्रेन्ट्स भी सही और उपयुक्त मात्रा में मिल जाते हैं। 

    अपने डाइट चार्ट में मुख्य रूप से हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ जैसे पालक, मेथी, धनिया के साथ ही गाजर, खीरा, फलियाँ, चुकंदर, ब्रोकली आदि को शामिल करना चाहिए।

    इसके अलावा फलों में एनर्जी देने वाले फल अधिक खाने चाहिए जैसे सेब, केला, पपीता, खरबूजा, तरबूज आदि।

    आपकी प्लेट में भी इनका 33% भाग एक सही डाइट प्लान की निशानी होता है।

    इसके अलावा सलाद के रूप में भी फल और सब्जियों को उबाल कर खाने से उनके पूरे पौष्टिक गुण शरीर में पहुँच जाते हैं।

  • प्रोटीन (Protein) 

    डाइट चार्ट का अगला हिस्सा प्रोटीन के सोर्स के लिए होता है। इसमें दालें, डेयरी प्रोडक्ट, बीन्स आदि को शामिल किया जाता है।

    इसके लिए हर प्रकार की दाल, दूध (बिना चिकनाई वाला), दही, राजमा, लोबिया, अंडा, मांस, मछ्ली चिकन आदि को शामिल किया जा सकता है।

    इसके संतुलित सेवन से शारीरिक वजन में तो बैलेंस रहता ही है साथ ही मांसपेशियों में भी मज़बूती बनी रहती है और डाइजेस्टीव सिस्टम भी ठीक रहता है।

    इसमें दूध और डेयरी प्रोडक्ट का 15% भाग व प्रोटीन के अन्य सोर्स को 12% भाग लेना ठीक रहता है।

    इसके लिए दूध और दूध से बने प्रोडक्ट, अंडा, मछ्ली को दिन में कम से एक -दो बार तो लेना ही चाहिए।

    इससे शरीर में पर्याप्त प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा पहुँच जाती है।

  • फैट और शुगर (Fat and Sugar)

    शरीर को ऊर्जा देने के लिए कार्ब डाइट के साथ थोड़ी मात्रा में फैट और शुगर की भी जरूरत होती है।

    इसलिए एक बेलेंस्ड और हेल्दी मील चार्ट में 7% भाग हेल्दी फैट और शुगर का भी होना चाहिए।

    इससे कम होने पर शरीर को पूरी शक्ति नहीं मिलेगी और इससे अधिक होने पर वजन बढ़ने के साथ ही हृदय रोग और डायबिटीज़ जैसी बीमारियाँ होने का डर रहता है।

    शरीर को अच्छे फैट मिले इसके लिए रिफाइन ऑयल के स्थान पर ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

हेल्दी डाइट संबंधी जरूरी टिप्स

Tips for healthy diet in hindi

Healthy diet ke liye jaruri tips in hindi

Healthy diet ke liye jaruri tips in hindi

अपने हेल्दी डाइट चार्ट के अनुसार लिए गए हेल्दी खाने को हमेशा पौष्टिक और स्वादपूर्ण बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें जैसे :

  • अपने दिन के भोजन में एक समय मेवों और मौसमी फलों को किसी न किसी रूप में ज़रुर शामिल करें।

  • कभी भी सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक के क्रम को न तोड़ें।

    अगर किसी वजह से ऐसा होता है तब दूसरे वक्त के खाने के समय आपको अधिक भूख लगने के कारण अधिक भोजन करना होगा।

    इससे जहां एक ओर डाइजेस्टीव सिस्टम में परेशानी हो सकती है वहीं दूसरी ओर शारीरिक वजन भी बढ़ सकता है।

  • जहां तक हो सके बाज़ार में बने प्रोसेस्ड और जंक फूड के खाने से बचें।

    ये चीज़ें मैदा, चीज़ और अत्यधिक फैट से बनी होती हैं जिनके कारण पेट को इन्हें पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और वह जल्दी बीमार हो जाता है।

    इसके अतिरिक्त मैदा, चीज़ और ऑयल खराब फैट को भी बढ़ा देते हैं जिससे शारीरिक वजन भी बढ़ने लगता है।

  • जहां तक हो सके योगा और मेडिटेशन के जरिये स्वयं को तनावमुक्त रखने का प्रयास करें।

  • शरीर में किसी प्रकार का रोग होने पर अपने डाइट चार्ट में डाइटीशियन की मदद से ही परिवर्तन करें।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि शरीर रूपी मशीन को चलाने के लिए सभी मुख्य पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोडाइट्रेट, विटामिन्स, मिनरल्स, फैट आदि की जरूरत होती है।

लेकिन एक अच्छे डाइट चार्ट के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार सभी तत्वों का चयन सही अनुपात में करें और भोजन के माध्यम से मिलने वाली एनर्जी से अपने शरीर को स्वस्थ व प्रसन्न रखें।

 

निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

हर आयु के व्यक्ति को अच्छे स्वस्थ्य के लिए पौष्टिक भोजन की जरूरत होती है।

भोजन को पौष्टिक बनाने के लिए उसमें उन सभी अनिवार्य तत्वों को शामिल करना जरूरी होता है जो शरीर के संपूर्ण स्वस्थ्य के लिए जरूरी होते हैं।

इसलिए एक हेल्दी डाइट प्लान को बनाते समय आवश्यक प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का ध्यान रखा जाता है।