बाल प्रत्यारोपण

बाल प्रत्यारोपण

Hair transplant in hindi

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बालों का झड़ना सबसे आम समस्याओं में से एक है जिससे लगभग एक तिहाई लोग प्रभावित होते हैं।

बालों के झड़ने के पीछे कई कारण होते है जैसे आनुवंशिक (genetic), अत्यधिक तनाव, मानसिक बीमारी, डैंड्रफ, स्कैल्प बैक्टीरिया, मॉनुट्रिशन (malnutrition), हार्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance), दवाओं का साइड इफ़ेक्ट आदि।

बाल झड़ने की समस्या के पीछे सबसे बड़ा कारण अनुवांशिक - पैटर्न बाल्डनेस (Genetic pattern baldness) होता है।

मेडिकल टर्म्स में हेयर डिसऑर्डर के अध्ययन को ट्राइकोलॉजी (Trichology) और बालों के झड़ने की समस्या को अलोपेशिआ (Alopecia) कहा जाता हैं।

 

बाल प्रत्यारोपण क्या है

What is hair transplant in hindi

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बालों के झड़ने की समस्या के निदान के लिए बाल प्रत्यारोपण - हेयर ट्रांसप्लांट (hair transplant) करवाया जाता हैं।

हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल तकनीक है जिसमे शरीर के एक हिस्से (जिसे डोनर साइट (donor site) भी बोलते है) से हेयर फॉलिकल्स (hair follicles) को शरीर के गंजे हिस्से (जिसे रेसिपिएंट साइट (recipient site) भी बोलते है) पर स्थानांतरित (move) किया जाता हैं।

बाल प्रत्यारोपण प्रक्रिया में जिस हिस्से से बाल निकाले जाते है, कुछ ही दिनों के भीतर उस हिस्से पर दुबारा बाल आ जाते है और वो हिस्सा सामान्य हो जाता हैं।

 

हेयर ट्रांसप्लांट के लिए कौन उपयुक्त है

Who is suitable for hair transplant in hindi

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हेयर ट्रांसप्लांट कौन करवा सकता हैं
  • जिन पुरुषो को पैटर्न बाल्डनेस होती हैं।
  • जिन महिलाओ के बाल पतले होते हैं।
  • जब किसी व्यलक्ति के किसी प्रकर की चोट या स्कैल्प पर जलने की वजह से बाल झड़ गये हो।
 

बाल प्रत्यारोपण कैसे काम करता है

How does hair transplant work in hindi

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बाल प्रत्यारोपण कैसे काम करता है
  1. हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया डर्मेटोलॉजिस्ट (Dermatologist) द्वारा कुछ टेस्ट करने से शुरू होती हैं। हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में सर्जन स्वस्थ बालों को डोनर साइट से लेकर लैब में टेस्ट करते है और उन्हें गंजेपन वाली जगह पर लगाने के लिए तैयार करते हैं।

  2. हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में मुख्य तौर पर दो तरीकों का उपयोग किया जाता हैं - फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (FUT) और फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन (FUE)।

  3. हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में 4 से 8 घंटे का समय लगता हैं। अगर आपको अधिक हिस्सों में बाल प्रत्यारोपित करवाने होते है तो आपको एक से ज्यादा सिटिंग्स (sittings) लेने की जरुरत होती हैं।

  4. अधिकांश लोगों को हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में एनेस्थीसिया की आवश्यकता होती है। लेकिन कुछ लोग अपने आपको रिलैक्स रखने के लिए माइल्ड सेडेटिव (mild sedatives) भी लेते हैं।

  5. हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में 15-20 दिनों के अंदर गंजेपन वाले हिस्से में बाल आने लगते हैं। ये बाल बिलकुल अन्य बालों की तरह प्राकृतिक और उसी रंग के होते हैं।

  6. हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया का यह फायदा होता है कि नए उगे हुए बाल सिर की त्वचा में परनामेंट उगते हैं।

  7. हेयर ट्रांसप्लांट प्रक्रिया होने के एक महीने के अंदर व्यक्ति सामान्य महसूस करने लगता है। बाल प्रत्यारोपण करवाने से व्यक्ति की पर्सनालिटी और उसका आत्मविश्वास बढ़ता हैं।

  8. बाल प्रत्यारोपण सर्जरी करवाने के बाद उसके कुछ साइड इफेक्ट्स जैसे सिर में दर्द होना, सिर के निचे के भाग में जकड़न आदि होता हैं जिसके लिए दवाएँ लेने की आवश्यकता होती हैं। इन दवाओं में शामिल हैं -

    1. पैन किलर्स (pain killers)

    2. इन्फेक्शन के जोखिम को कम करने के लिए एंटीबायोटिक्स (antibiotics)

    3. सूजन को कम रखने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) दवाएं

 

बाल प्रत्यारोपण के प्रकार

Types of hair transplant in hindi

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बाल प्रत्यारोपण के प्रकार

हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में शरीर के गंजेपन वाले हिस्से में बाल लगाये जाते हैं।

बाल प्रत्यारोपण प्रक्रिया का उपयोग न केवल सिर के बालों पर किया जाता है अपितु ये शरीर के अन्य भागों जैसे पलकों (eyelashes), भौंहों (eyebrows), दाढ़ी के बालों (beard hair) और छाती के बालों (chest hair) पर भी किया जाता हैं।

हेयर ट्रांसप्लांट निम्न प्रकार का होता हैं:

  1. फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (Follicular unit transplantation - FUT)

    बाल प्रत्यारोपण करने की यह सबसे पुरानी और पारंपरिक पद्धति हैं। इसे स्ट्रिप मेथड (strip method) भी कहा जाता हैं।

    इस पद्धति में डोनर साइट से एक स्ट्रिप को हटाकर लेबोरेटरी में उसको जांचा जाता है। एक स्ट्रिप में आम तौर पर 2000 से 2500 हेयर फॉलिकल्स होते हैं और एक फॉलिकल में 2 से 3 बाल होते हैं।

    उसके बाद उसमे से हेयर फॉलिकल्स को शरीर के गंजे हिस्से (रेसिपिएंट साइट) पर स्थानांतरित किया जाता हैं।

    इस प्रक्रिया में फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन प्रक्रिया से ज़्यादा दर्द होता है और स्कैल्प पर निशान रह जाता हैं जो बालों से ढक दिया जाता हैं। इस तकनीक में हेयर ग्राफ्ट का कोई नुक्सान नहीं होता है और हेयर हार्वेस्टिंग (hair harvesting) में कम समय लगता हैं।

    इस तकनीक से बाल भी ज्यादा डेंसिटी वाले आते हैं।

  2. फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन  (Follicular unit extraction - FUE)

    बाल प्रत्यारोपण की इस पद्धति में सर्जन सिर के पीछे से एक-एक करके स्वस्थ फॉलिकल्स को निकालता है। स्वस्थ हेयर फॉलिकल्स को डोनर साइट से लेकर शरीर के गंजे हिस्से - रेसिपिएंट साइट पर मोटोराइज्ड पंच (motorized punch) प्रक्रिया से स्थानांतरित किया जाता हैं।

    इस प्रक्रिया में एक से ज्यादा सिटींग लेने की जरुरत होती है और एक सिटिंग में 2000-3000 फॉलिकल्स लगाए जाते हैं।  इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता हैं।

    फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन सर्जरी में कोई टांका और स्टीट्चेस (stitches) नहीं आते है और इसमें दर्द फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन से कम होता हैं।

    इस प्रक्रिया में डोनर साइट 7 से 10 दिन में सामान्य हो जाती है और नए बाल आ जाते हैं। इस प्रक्रिया में सर्जरी के बाद स्वस्थ और अच्छे बाल आते है और ये प्रक्रिया पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए बेहतर मानी जाती हैं।

  3. माइक्रोग्राफ्ट्स और मिनीग्राफ्ट्स (Micrografts and Minigrafts)

    माइक्रोग्राफ्ट्स और मिनीग्राफ्ट्स दोनों ही प्रक्रिया में हेयर बेयरिंग टिश्यू (hair-bearing tissue) भाग को हेयर ट्रांसप्लांट करने के लिए तैयार किया जाता हैं।

    सर्जन डोनर साइट की स्कैल्प से हेयर फॉलिकल्स की त्वचा से स्ट्रिप को हटाकर शरीर के उस हिस्से से लगा देते है जहा गंजापन या कम बाल होते हैं।

    इन ग्राफ्ट्स को सीधे डोनर साइट से लेकर रेसिपिएंट साइट पर पहले से किये गए छेदों में डाला जाता हैं।

    माइक्रोग्रैफ़्ट और मिनीग्राफ़ दोनों ही प्रक्रियायों में स्ट्रिप सर्जरी की जाती हैं।

    माइक्रोग्रैफ़्ट में बालों का पूरा जोड़ा होता है जबकि मिनीग्राफ्ट्स में केवल तीन -चार बाल होते हैं।

  4. स्कैल्प फ्लैप और स्कैल्प रिडक्शन (Scalp flap and Scalp reduction)

    स्कैल्प फ्लैप और स्कैल्प रिडक्शन तकनीक लगभग 20 साल पुरानी प्रक्रिया है जिसके बहुत सारे साइड इफेक्ट्स होते हैं।

    इस तकनीक को आजकल केवल अलोपेशिआ (alopecia) के गंभीर मामलों या ट्रॉमेटिक बर्न्स (traumatic burns) वाले मामलों में उपयोग की जाती हैं।

    इस तकनीक में बालों वाली त्वचा को उपयोग में लाया जाता है जिसे फ्लैप कहा जाता है।

    फ्लैप से बालों को गंजेपन वाले हिस्से पर स्थानांतरित किया जाता हैं।

  5. डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन (Direct hair transplantation)

    यह तकनीक फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन का परिवर्तित रूप हैं।

    इस प्रक्रिया में स्वस्थ हेयर फॉलिकल्स को डोनर साइट से लेकर डायरेक्ट रेसिपिएंट साइट पर प्रत्यारोपित कर दिया जाता हैं।

    डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी में डोनर साइट से एक-एक करके हेयर फॉलिकल्स को अलग किया जाता है और सीधे स्कैल्प के रेसिपिएंट साइट में स्थानांतरित कर दिया जाता हैं।

    इस प्रक्रिया में स्केलपेल (scalpels) का उपयोग नहीं होता है और इस तकनीक में दर्द भी नहीं होता हैं।

    इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य हेयर फॉलिकल्स को लैब में जांचने की प्रक्रिया को हटाकर कम समय में स्वस्थ हेयर ग्रोथ करना हैं।

  6. हेयर प्लग्स (Hair plugs)

    हेयर प्लग्स बालों का एक समूह या पैच होता है जिसे डोनर साइट से एकत्र किया जाता हैं।

    डोनर साइट से एकत्र किये गए पैच या समूह को सर्जन गंजेपन वाले हिस्से में लगाने के लिए छेद बनाकर उनमे प्रत्यारोपित कर देते हैं।

    इस प्रक्रिया में एक ‘पंचिंग टूल’ का उपयोग किया जाता  है जिसकी मदद से प्रत्येक समूह या पैच जिसमे लगभग बीस बाल होते है उसे रेसिपिएंट साइट पर पैच साइज का छेद बनाकर प्रत्यारोपित कर दिया जाता हैं।

 

हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया

Hair transplant process in hindi

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हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया

रिसर्च मैं पाया गया है की 50% महिलाएं और 40% पुरुष, बालों के झड़ने से प्रभावित होते हैं

हेयर ट्रांसप्लांट शरीर के किसी भी हिस्से में किया जा सकता हैं

हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में निम्न स्टेप्स होते हैं:

  1. डायग्नोस्टिक प्रोसेस (Diagnostic process)

    हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सर्जन डायग्नोसिस करते है जिसमे शामिल है:

    1. डर्मटोलॉजिकल एग्जामिनेशन (dermatological examination)

    2. साइकोलॉजिकल आस्पेक्ट्स एग्जामिनेशन (psychological aspects examination),

    3. मैथमेटिकल काउंट ऑफ़ डोनर एंड रेसिपेंट (mathematical count of donor and recipient) किये जाते हैं।

    4. ब्लड टेस्ट (Blood test): थायरॉयड या किसी गंभीर बीमारी की जांच

    5. पुल टेस्ट (Pull test): इस टेस्ट से डॉक्टर आपके बालों को खींचकर यह देखते है कि एक बार में आपके कितने बाल टूटते हैं।

    6. स्कैल्प बायोप्सी (Scalp Biopsy): इस टेस्ट में डॉक्टर स्क्लेप से स्किन और हेयर का टेस्ट करके स्कैल्प इन्फेक्शन (scalp infection) की जांच करते हैं।

    7. लाइट माइक्रोस्कोपी (Light Microscopy): इस टेस्ट में डॉक्टर हेयर शाफ्ट डिसऑर्डर (hair shaft disorder) का पता लगाते हैं।

  2. निष्कर्षण फेज (Extraction Phase)

    बाल प्रत्यारोपण की तैयारी के लिए सबसे पहला स्टेप चरण निष्कर्षण (extraction) होता है।

    1. इसमें डोनर साइट (donor site) यानि सिर के पीछे से हेयर फॉलिकल्स को रेसिपिएंट साइट (रेसिपेंट साइट) पर ट्रांसप्लांट करने के लिए हटाया जाता हैं।

    2. सर्जरी शरूर करने से पहले डोनर साइट के भाग को ट्रिम किया जाता हैं।

    3. डोनर साइट की ट्रिम्मिंग के बाद लोकल एनेस्थीसिया (local anesthesia) दिया जाता हैं।

    4. उसके बाद सर्जरी के द्वारा डोनर साइट से उन टिश्यू को हटाया जाता है जिसमे बाल्ड रेसिस्टेंट हेयर फॉलिकल्स (bald resistant hair follicles) होते हैं। टिश्यू को हटाने के बाद डोनर साइट पर टाँके (suture) लगाए जाते हैं।

    5. डोनर साइट की सर्जरी और टाँके लगाने के लगभग 10 -15 दिन के बाद टाँके काटे जाते हैं।

    6. डोनर साइट से लिए गए बाल्ड रेसिस्टेंट हेयर फॉलिकल्स टिश्यू को सर्जिकल तकनीशियन द्वारा लैब में जांचा जाता है और फॉलिक्युलर यूनिट हेयर ग्राफ्ट्स (follicular units hair grafts) को रेसिपेंट साइट पर लगाने के लिए तैयार किया जाता हैं।

  3. प्लेसमेंट फेज (Placement Phase)

    प्लेसमेंट फेज में गंजेपन से प्रभावित भाग को बालों के प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया जाता हैं।

    लोकल एनेस्थीसिया (local anesthesia) देने के बाद बाल्ड रेसिपिएंट साइट (Bald recipient area) में हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी की जाती हैं।

    1. रेसिपिएंट साइट पर सर्जरी से पहले किसी प्रकार की ट्रिम्मिंग या बालों को हटाने की जरुरत नहीं होती हैं।

    2. हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी में रेसिपिएंट साइट पर फॉलिक्युलर यूनिट हेयर ग्राफ्ट्स को छोटे छोटे भागों में अनियमित क्रम में लगाया जाता हैं।

    3. छोटे फॉलिक्युलर हेयर ग्राफ्ट्स को हेयर लाइन (hairline) के आगे के भाग में और बड़े फॉलिक्युलर हेयर ग्राफ्ट्स को बीच में और पीछे की ओर लगाया जाता हैं।

    4. हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी के बाद छोटे बाल सर्जरी वाले हिस्से में दिखाई देने लगते हैं।

    5. सर्जरी के बाद लगभग 7 -10 दिन के अंदर सिर में रेसिपिएंट साइट पर लगे चीरे के निशान, घाव, लाली के निशान अपने आप भर जाते हैं।

 

सारांश

Summary in hindi

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बालों के झड़ने की समस्या के लिए बाल प्रत्यारोपण - हेयर ट्रांसप्लांट सबसे बेहतरीन उपाय होता है जिसमे आपके बाल परमानेंट तौर पर गंजेपन वाले हिस्से में आ जाते हैं।

हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आसान होती है लेकिन इसको करवाने में आपको समय और पैसे दोनों को व्यय करना पड़ता हैं।