girls ya ladki pregnant kab or kaise hoti hai

महिलाओं में गर्भ कब और कैसे ठहरता है?

How does a woman get pregnant? in hindi

girls aur mahila ya ladki pregnant kaise hoti hai in hindi

प्रेग्नेंट होना किसी भी महिला के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है। प्रजनन पर ही यह संसार टिका है।

एक महिला का गर्भधारण करना व एक नयी जान को संसार में लाना वाकई एक मुश्किल और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

अगर आप माँ बनने का सोच रही हैं तो आपके मन में ज़रुर ये विचार आ रहा होगा कि आपको प्रेग्नेंट होने में कितना समय लगेगा, आपको कब सम्भोग करना चाहिए और आपको जल्द से जल्द प्रेग्नेंट होने के लिए किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

आज इस लेख के द्वारा हम प्रेगनेंसी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों जैसे - महिला प्रेग्नेंट होती कैसे है, गर्भ ठहरने का कारण क्या हैं, गर्भधारण करने का सबसे उपयुक्त समय क्या है पर चर्चा करेंगे।

आइये इस लेख के माध्यम से प्रेगनेंसी के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं। अगर आप प्रेग्नेंट हैं और अपनी गर्भावस्था के दौरान आने वाले बदलावों के बारे में जानना चाहती हैं तो गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों के बारे मे यहाँ पढ़े!

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इस लेख़ में/\

  1. प्रेग्नेंसी के लिए कौन से अंग महत्वपूर्ण हैं?
  2. प्रेग्नेंसी क्या है?
  3. प्रेग्नेंट कैसे होते हैं?
  4. गर्भधारण के लिए सही समय क्या है?
  5. जल्द गर्भवती होने के उपाय क्या हैं?
  6. महिलायें अपना ओवुलेशन कैसे ट्रैक करें?
  7. प्रेग्नेंट होने के लिए मासिक धर्म कैसे ट्रैक करें?
  8. गर्भधारण करने से पहले क्या करें?
  9. निष्कर्ष
 

1.प्रेग्नेंसी के लिए कौन से अंग महत्वपूर्ण हैं?

Which organs are important for pregnancy? in hindi

Pregnancy kya hoti hai in hindi

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गर्भ ठहरने की विधि, प्रेग्नेंट होने के कारणों को समझने के लिए सबसे पहले स्त्री के प्रजनन अंगों (reproductive organ) के बारे में जानना आवश्यक है।

ओवरीज़ (ovaries) और फॉलोपियन ट्यूब (fallopian tube) स्त्री के प्रमुख रिप्रोडक्टिव यानि प्रजनन अंगों में से हैं।

आइये ओवरी और फॉलोपियन ट्यूब के बारे में विस्तार मे जानते हैं :

  • ओवरी (Ovaries)

हर महिला में दो ओवरी, एक दाई तरफ और एक बाई तरफ होती है। ये लगभग 4 सेंटीमीटर बड़ी और ओवल आकार की होती है।

ओवरी गर्भ (uterus) के दोनों तरफ ओवारियन फोल्लिकल्स (ovarian follicles) में स्थित होती है।

ये लिगामेंट (ligament) के द्वारा गर्भ से जुड़ी होती है मगर बाकी स्त्री प्रजनन अंगों जैसे फैलोपियन ट्यूब से दूर होती है।

ओवरी गर्भावस्था में दो विशेष काम करती है, अंडाणु (egg) को सक्रिय करना, जो शुक्राणुओं के साथ मिलकर फ़र्टिलाइज होते हैं और प्रेगनेंसी की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

इसके अलावा गर्भावस्था/प्रेगनेंसी को बरकरार रखने के लिए जरुरी हार्मोन्स ऑसट्रोजन (oestrogen) और प्रोजेसटेट्रोन (progesterone) का निर्माण करना, जिन्हें प्रेगनेंसी हार्मोन (pregnancy hormone) भी कहा जाता है।

  • फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes)

दूसरा महत्वपूर्ण अंग होता है डिंबवाहिनी नली यानि फैलोपीयन ट्यूब (fallopian tube) जिसका एक हिस्सा ओवरी (ovary) से जुड़ा होता है और दूसरा हिस्सा गर्भाशय (uterus) से जुड़ा होता है।

फैलोपीयन ट्यूब (fallopian tube), ट्यूब जैसी आकृति की होती हैं जो महिला के अंडो को ओवरी से गर्भाशय तक पहुँचाने मे मदद करती हैं।

प्रथम माहवारी आने से पहले तक अंडाशय या ओवरी के अंडाणु (egg) सुप्त (सोये) अवस्था में रहते हैं।

महिला के युवावस्था में प्रवेश करने के साथ ही यह अंडाणु सक्रिय हो जाते हैं जिसके कारण महिला में मासिक धर्म चक्र की शुरुआत हो जाती है।

पुरुष के साथ सेक्स करने पर महिला की योनि (vagina) के मार्ग से पुरुष के वीर्य/ शुक्राणु (sperm) महिला के शरीर में प्रवेश करते हैं।

शरीर में प्रवेश करने के साथ ही शुक्राणु महिला की फैलोपिन ट्यूब में प्रवेश करते हैं और अगर उन्हें वहाँ जीवित अंडाणु मिल जाता है तो प्रेगनेंसी का पहला चरण पूरा हो जाता है, जिसे निषेचन / फर्टिलाइजेशन (fertilization) कहा जाता है। [1]

फर्टिलाइजेशन के बाद निषेचित अंडा (fertilised egg) गर्भाशय मे जाकर प्रत्यारोपित (implantation) हो जाता है। निषेचित अंडे का गर्भाशय में प्रत्यारोपण सफल प्रेगनेंसी की निशानी है।

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2.प्रेग्नेंसी क्या है?

What is pregnancy? in hindi

Pregnancy kya hoti hai in hindi

किसी भी स्त्री के गर्भवती होने में उसके शरीर के प्रजनन अंगों का बहुत बड़ा योगदान होता है।

ये अंग हैं अंडाशय या ओवरी (ovaries), जहां नए जीव का सृजन करने वाले अंडाणु (egg) महिला के कौमार्य से पूर्व तक सुप्त (सोये) अवस्था में रहते हैं।

महिला के युवावस्था में प्रवेश करने के साथ ही मासिक धर्म की शुरुआत होती है।

मासिक धर्म की शुरुआत के साथ यह अंडाणु भी जागृत हो जाते हैं।

दूसरा महत्वपूर्ण अंग होता है डिंबवाहिनी नली यानि फैलोपीयन ट्यूब (fallopian tube) जिसका एक हिस्सा ओवरी से जुड़ा होता है और दूसरा हिस्सा गर्भाशय (uterus) से जुड़ा होता है।

ओवरी से निकला हुआ अंडाणु, फैलोपिन ट्यूब में प्रवेश करके आगे का सफर तय करता है।

पुरुष के साथ सेक्स करने पर महिला की योनि (Vagina) के मार्ग से पुरुष के वीर्य या शुक्राणु (sperm) महिला के शरीर में प्रवेश करते हैं।

शरीर में प्रवेश करने के साथ ही शुक्राणु महिला की फैलोपिन ट्यूब में प्रवेश करते हैं और अगर उन्हें वहाँ जीवित अंडाणु मिल जाता है तब निषेचन (fertilization) की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। यही स्थिति गर्भधारण कहलाती है।

 

3.प्रेग्नेंट कैसे होते हैं?

How a woman gets pregnant? in hindi

Pregnant kaise hote hai in hindi

महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का मिलना प्रेग्नेंट होने के लिए बहुत जरुरी है। यह प्रक्रिया निषेचन (fertilization) कहलाती है।

निषेचन की प्रक्रिया, किसी भी सामान्य महिला के अंडोत्सर्ग या ओव्यूलेशन (ovulation) के चक्र के दौरान होती है।

ओवुलेशन के समय महिला का अंडाणु फैलोपिन ट्यूब से परिपक्व (mature) अवस्था में बाहर निकलता है।

आमतौर पर महिला का मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) 28 दिनों का होता है और एक स्वस्थ महिला के शरीर में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया मासिक धर्म के 10 दिन बाद होती है। इस समय महिला की ओवरी से अंडा निकल कर फैलोपियन ट्यूब तक जाता है।

यदि इस समय फैलोपियन ट्यूब में पुरुष का वीर्य (sperm) मौजूद होता है तब यह अंडा उसके साथ मिलकर निषेचित (fertilise) हो जाता है।

निषेचन की सफल प्रक्रिया के बाद ही महिला गर्भवती होती है। हर महिला का शरीर अलग होता हैं इस कारण ये जरुरी नहीं कि हर महिला का ओव्यूलेशन उसके माहवारी के 10 दिन बाद ही होगा।

कुछ महिलाओं का मासिक धर्म चक्र अनियमित होता है। ऐसी स्थिति में यह जरुरी है कि आप आपने ओवुलेशन को ट्रैक करें और ओवुलेशन के समय पर अपने साथी से सम्बन्ध (sex) बनाये। ऐसा करने से आपके प्रेगनेंट होने की संभावना बढ़ जाती है।

इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि महिला का अंडा गर्भनाल में 24 घंटे तक जीवित रहता है और इसी प्रकार फैलोपिन ट्यूब में मौजूद वीर्य (spem) 5 दिनों तक जीवित रहते हैं।[2]

यदि इस अवधि में महिला का अंडा फैलोपिन ट्यूब तक पहुँच जाता है तभी निषेचन प्रक्रिया की संभावना बढ़ जाती है।

इसलिए गर्भ ठहरने के लिए निम्न में से किसी एक स्थिति का होना जरूरी होता है :

  • महिला के अंडाशय से जब अंडा रिलीज होता है तब पुरुष का वीर्य यानि स्पर्म पहले से ट्यूब में मौजूद हो
  • महिला के अंडाशय से रिलीज हुआ अंडा 24 घंटे तक जीवित रहता है, इन 24 घंटों के समय में पुरुष का वीर्य महिला के फैलोपियन ट्यूब में मौजूद हो
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4.गर्भधारण के लिए सही समय क्या है?

What is the most suitable time to get pregnant? in hindi

Pregnancy ke liye sahi samay kya hai in hindi

अधिकतर महिलाएं इस दुविधा में रहती हैं कि गर्भधारण के लिए सही समय क्या है?

सामान्य रूप से स्वस्थ महिला का मासिक स्त्राव (menstruation discharge) 5 से 7 दिनों तक चलता है।[3]

पीरियड्स शुरू होने के 12वें दिन से लेकर 18वें दिन तक महिला की प्रजनन क्षमता चरम पर होती है।

इस समय को ओव्यूलेशन पीरियड (ovulation period) भी कहा जाता है। ओवुलेशन पीरियड को गर्भधारण का सबसे सही समय समझा जाता है। इन दिनों में पुरुष के साथ सेक्स करने पर गर्भ ठहरने की संभावना अधिकतम होती है।

और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत

 

5.जल्द गर्भवती होने के उपाय क्या हैं?

How to get pregnant faster? in hindi

shighra pregnant hone ke upay in hindi

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गर्भधारण करने के लिए फ़ीमेल एग और मेल स्पर्म का फर्टिलाइजजेशन होना बहुत जरुरी है।

इसके कारण सही समय पर गर्भधारण के लिए, सही समय पर सेक्स करना भी जरूरी होता है।

यह समय महिला के ओव्यूलेशन के समय पर निर्धारित होता है। इस समय पर महिला का परिपक्व अंडाणु (egg) फैलोपियन ट्यूब में मौजूद होता है।

महिला का ओव्यूलेशन समय वह होता है जब महिला की प्रजनन क्षमता सबसे अधिक होती है इसलिए इस अवस्था को सबसे उपयुक्त प्रजनन दिन (favorable fertile period) भी कहा जाता है। [4]

यह समय प्रेगनेंट होने के लिए सबसे उपयुक्त है। जल्दी प्रेग्नेंट होने के लिए आप अपने ओवुलेशन साइकल को ट्रैक कर सकती हैं।

लगभग सभी डॉक्टर ओव्यूलेशन समय की गणना के लिए निम्न विधि बताते हैं :

  • प्रत्येक महिला के मासिक चक्र के बीच का समय ओव्यूलेशन का होता है।
  • आमतौर पर स्वस्थ महिला का मासिक चक्र 28 दिन का माना जाता है।
  • ऐसी स्थिति में पीरियड शुरू होने के 14वें दिन ओव्यूलेशन होता है।
  • पीरियड शुरू होने के 12 से 18 दिनों के बीच में सेक्स करने से गर्भ जल्दी ठहरता है।

ओवुलेशन के दौरान आपके शरीर में कई बदलाव होते हैं, शरीर के इन बदलावों को ट्रैक करने से आप अपने ओवुलेशन का ध्यान रख सकती हैं।

महिला के शरीर में हो रहे बदलावों के बारे में हम अगले सेक्शन (ओवुलेशन को कैसे ट्रैक करें) में बात करेंगे।

ओवुलेशन साइकल के अलावा आप मासिक धर्म (menstruation cycle) को भी ट्रैक कर सकती हैं।

मासिक धर्म के सात दिन बाद (7 days after mensuration) से लेकर अगले मासिक धर्म के शुरू होने से पहले के सात दिनों (7 days before mansuration) तक सेक्स करने पर गर्भ जल्दी ठहर सकता है।

और पढ़ें:एचसीजी गर्भावस्था परीक्षण - आमतौर से पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

 

6.महिलायें अपना ओवुलेशन कैसे ट्रैक करें?

How to track your ovulation? in hindi

ovulation kaise track kare

अमेरिकन एस्सोशियेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी (American Association of Pregnancy) के अनुसार ओवुलेशन तब होता है जब मैच्योर एग ओवरी से निकल कर फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइजेशन के लिए तैयार होता है।

महिलाओं के लिए उनके ओवुलेशन का समय प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। यहाँ ये बात जानना बहुत आवश्यक है कि मैच्योर एग सिर्फ 12 से 24 घंटों तक ही जीवित रहता है।

ज्यादातर महिलाएं अपने मासिक चक्र के ग्यारहवें दिन और इक्कीसवें दिन के बीच में ओवुलेट करती हैं।

ओवुलेशन के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं। अगर आप प्रेग्नेंट होना चाहती हैं तो ओवुलेशन ट्रैक करना आपके लिए बहुत जरुरी है।

ओवुलेशन के लक्षण निम्न हैं :

  • सर्विकल म्यूकस (Cervical mucus)

ओवुलेशन के समय आपके योनि से होने वाले स्त्राव की मात्रा और गाढ़ेपन में साफ़ तौर पर बदलाव दिखाई देते हैं।

ओवुलेशन के समय सर्विकल म्यूकस चिकनाईयुक्त होता है और छूने पर एक इंच खींच जाता है।

  • बेसल बॉडी टेम्प्रेचर (Basal body temperature)

आप सुबह उठ कर रोज शरीर का तापमान ले सकती हैं। ओवुलेशन के समय आपके शरीर का तापमान एक से दो डिग्री तक बढ़ता है।

तापमान लेने के लिए आप बेसल थर्मोमीटर (basal thermometer) का यूज़ कर सकती हैं।

  • मिट्टेलस्किमर्ज पेन (Mittelschmerz pain)

कुछ महिलाओं में ओवुलेशन के समय पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द महसूस हो सकता है। ये दर्द कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटो तक रह सकता है।

इसके अलावा आपको ब्लोटिंग, हल्की स्पॉटिंग जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

और पढ़ें:कहीं माँ न बन पाने का कारण मानसिक तनाव तो नहीं

 

7.प्रेग्नेंट होने के लिए मासिक धर्म कैसे ट्रैक करें?

How to track your menstruation cycle for being pregnant? in hindi

ovulation kaise track karain

सामान्य तौर पर महिला का मासिक धर्म पांच से साथ दिन का होता है। मगर कई महिलाओं में ये समय लम्बा भी हो सकता है।

ज्यादातर महिलाओं में मासिक चक्र (menstrual cycle) की अवधि 28 दिनों की होती है। इसका मतलब हर महीने 6 दिन आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

आपके मासिक चक्र (menstrual cycle) की अवधि का पता करने के लिए आपको कुछ महीनों (लगभग तीन महीनों) तक अपने मासिक धर्म को ट्रैक करना होगा।

मासिक धर्म का पहला दिन आपके मासिक चक्र का पहले दिन होगा और अगला मासिक धर्म शुरू होने से एक दिन पहले आपके मासिक चक्र का आखिरी दिन होगा।

मान लीजिये आपका मासिक चक्र इस प्रकार है, पहले महीने में 28 दिन दूसरे महीने में 30 दिन और तीसरे महीने में 28 दिन।

आप सबसे छोटे मासिक चक्र यानि 28 दिन से 18 को घटा दीजिये, ये आपके फर्टाइल विंडो का पहला दिन होगा।

ऐसे ही अपने सबसे बड़े मासिक चक्र यानि कि 30 दिन से 11 घटा देने पर यह आपके फर्टाइल विंडो का आखिरी दिन बताता है। इन दिनों के बीच संभोग करने से प्रेग्नेंट होने की संभावना बढ़ जाती है।

और पढ़ें:कैसे करें गर्भावस्था किट का प्रयोग ?

 

8.गर्भधारण करने से पहले क्या करें?

What are the tips for women who are trying to conceive? in hindi

pregnant hone ke liye kya taiyari kare in hindi

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विवाह के बाद हर दंपत्ति अपने जीवन में एक नन्हें शिशु का आगमन चाहते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि जब आप अपने परिवार को आगे बढ़ाने का निर्णय ले लेते हैं, तब आपके लिए गर्भधारण करने के कई पहलुओं को मद्देनज़र रखना काफी ज़रुरी होता है।

गर्भधारण करने से पहले निम्न बातों पर ध्यान दें :

  • गर्भनिरोधक लेना बंद करें (Stop using contraception)

अगर आप या आपके साथी किसी भी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको इन गर्भनिरोधक उपायों जैसे - कॉनट्रासेप्टिव पिल्स (contraceptive pills), कंडोम (condoms) आदि का इस्तेमाल बंद करना होगा।

  • ओव्यूलेशन पीरियड का पता करें (Know your Ovulation)

जब आप अपने परिवार को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती हैं, तब इसके लिए सबसे पहले अपने ओव्यूलेशन पीरियड का ठीक से पता करना आपके लिए ज़रुरी है।

अपने ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए आप ओव्यूलेशन कैलकुलेटर की मदद ले सकती हैं। [5]

इसके अतिरिक्त आप एक कैलेंडर पर अपनी दो मासिक चक्र की तिथियों को अंकित करके भी अपने सबसे अच्छे प्रजनन दिनों का पता लगा सकती हैं।

  • डॉक्टर से मिलना (Appointment with Doctor)

गर्भधारण करने से पहले भावी माता-पिता को अपने डॉक्टर से अवश्य मिलना चाहिए[6]

इस मुलाक़ात में डॉक्टर पति-पत्नी का चिकित्सीय इतिहास के माध्यम से यह जानने का प्रयास करती हैं कि परिवार में किसी को कोई संक्रामक रोग (genetic disease) तो नहीं हुआ है।

ऐसा होने की स्थिति में आने वाले शिशु को इस परेशानी से बचाने के हर संभव उपाय किया जाता है। इसके अलावा फिजिकल चेकअप से कपल के स्वस्थ होने की पुष्टि हो जाती है।

  • अनिवार्य पोषण लेना (Take Healthy Diet)

जब आप गर्भधारण का निर्णय लेती हैं तब उस स्थिति में आपको स्वयं को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना जरूरी है। इसके लिए आपको पूर्ण पोषण युक्त भोजन लेना होगा।

संपूर्ण पोषण युक्त भोजन के अलावा डॉक्टर की सलाह से आप आयरन, कैल्शियम सप्लिमेंट भी ले सकती हैं। [7]

  • स्वस्थ लाइफस्टाइल जीना (Healthy Lifestyle)

स्वस्थ गर्भकाल और स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

तनाव रहित जीवन जीने के साथ ही धूम्रपान व मदिरापन जैसे शौक आपको त्यागने होंगे।

  • नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

गर्भावस्था के लिए स्वयं को शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से स्वस्थ व मजबूत करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना होगा। [8]

इससे न केवल आपका शरीर गर्भभार सह सकने योग्य हो सकेगा बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य में भी मज़बूती आ सकेगी।

और पढ़ें:कैसे सर्विकल म्यूकस को ट्रैक कर आप जल्दी गर्भवती हो सकती हैं?

 

9.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

एक नारी के जीवन में गर्भवती होना सबसे सुखद एहसास के समान होता है। लेकिन गर्भवस्था के आरंभ को लेकर अनेक प्रश्न हर महिला के मन में होते हैं।

जब अंडाणु और शुक्राणु निषेचित होते हैं तब एक स्त्री गर्भवती हो जाती है। हालाँकि, गर्भधारण की सावधानी के तौर पर गर्भावस्था के निर्णय से पूर्व कई ज़रुरी पहलुओं को ध्यान रखना ज़रुरी होता है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 11 Mar 2020

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संदर्भ/\

  1. NIH. "About Pregnancy". NIH, 31 January 2017.

  2. NCBI."Initial advice to people concerned about delays in conception". NICE Clinical Guidelines, No. 156. National Collaborating Centre for Women’s and Children’s Health (UK). London: Royal College of Obstetricians & Gynaecologists; 2013 Feb.

  3. Mihm M1, Gangooly S, et al. "The normal menstrual cycle in women". Anim Reprod Sci. 2011 Apr;124(3-4):229-36, PMID: 20869180.

  4. Allen J Wilcox, David Dunson, et al. "The timing of the “fertile window” in the menstrual cycle: day specific estimates from a prospective study". BMJ. 2000 Nov 18; 321(7271): 1259–1262, PMID: 11082086.

  5. Womenshealth.gov. "Ovulation calculator". Womenshealth.gov, 23 January 2019.

  6. Johnson S1, Marriott L et al. "Can apps and calendar methods predict ovulation with accuracy". Curr Med Res Opin. 2018 Sep;34(9):1587-1594, PMID: 29749274.

  7. Noran M. Abu-Ouf, Mohammed M. Jan, et al. "The impact of maternal iron deficiency and iron deficiency anemia on child’s health". Saudi Med J. 2015; 36(2): 146–149, PMID: 25719576.

  8. Danielle B. Cooper, Lily Yang, et al. "Pregnancy And Exercise". Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2020 Jan, PMID: 28613571.

अक्सर पूछे गए प्रश्न

प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे सही उम्र क्या है?

चिकित्सीय दृष्टिकोण से 20-30 वर्ष की उम्र के बीच एक महिला की प्रजनन क्षमता सबसे अधिक होती है। इसलिए 20-30 वर्ष की उम्र गर्भधारण के लिए सबसे सही उम्र मानी जाती है।

30 वर्ष के बाद गर्भावस्था में बांझपन, मिसकैरेज, उच्च रक्तचाप, जन्म दोष, गर्भकालीन मधुमेह, सिजेरियन डिलीवरी और मल्टीपल बर्थ जैसे जोखिम हो सकते हैं।

प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे फर्टाइल दिन का पता कैसे करें?

प्रेग्नेंट होने के लिए आपको अपने ओवुलेशन को ट्रैक करना होगा। अपने ओवुलेशन को ट्रैक करके आप गर्भवती होने के लिए सबसे फर्टाइल दिनों का पता लगा सकती हैं।

आप निम्न तरीकों से ओवुलेशन को ट्रैक कर सकती हैं :

  • फर्टाइल दिनों की गणना करके
  • वेजाइनल डिसचार्ज की जाँच करके
  • अन्य शारीरिक संकेतों पर नज़र रखकर जैसे -पेट के एक तरफ दर्द, स्तनों में भारीपन, कोमलता आदि

क्या मैं 35 वर्ष के बाद गर्भवती हो सकती हूँ?

जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, उसकी प्रजनन क्षमता कमजोर होने लगती है। पैंतीस वर्ष के बाद गर्भावस्था में बांझपन, मिसकैरेज, उच्च रक्तचाप, जन्म दोष, गर्भकालीन मधुमेह, सिजेरियन डिलीवरी और मल्टीपल बर्थ जैसे जोखिम हो सकते हैं। हालांकि,अगर आप अपने शरीर को स्वस्थ रखती हैं तो 35 वर्ष के बाद भी आप गर्भधारण कर सकती हैं।

क्या अनियमित माहवारी (अनियमित पीरियड्स) के साथ गर्भवती होना संभव है?

इर्रेगुलर पीरियड्स में अधिक सेक्स करने और अपने ओव्युलेशन को ट्रैक करने से गर्भधारण की सम्भावना बढ़ सकती है।

इसके अलावा अनियमित माहवारी की स्थिति में गर्भधारण के लिए पौष्टिक भोजन खाएं, नुकसानदायक खाद्य पदार्थों से दूर रहें, वज़न संतुलित रखें और डॉक्टर से परामर्श लें।

क्या पीरियड्स के दौरान प्रेगनेंसी हो सकती है?

जिन महिलाओं का मासिक चक्र 28-30 दिन या अधिक लम्बा होता है उनके पीरियड्स के दौरान प्रेग्नेंट होने की संभावना न के बराबर होती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 28-30 दिन के मासिक चक्र में पीरियड्स के दौरान ओव्युलेशन की तिथि काफी दूर होती है।

क्या अधिक वज़न के कारण गर्भधारण में परेशानी आ सकती है?

आदर्श वजन और जीवनशैली ओवुलेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, स्वभाविक रूप से यह गर्भधारण के लिए भी ज़रुरी है।

मोटापे के कारण, ओवुलेशन में रुकावट और पीसीओएस होने का जोखिम होता है जिससे प्रेग्नेंट होने में बाधा आ सकती है।

इसके साथ ही अधिक वज़न से प्रजनन उपचारों का असर भी कम हो सकता है और गर्भपात का ख़तरा भी बढ़ जाता है।

क्या पहले गर्भपात का प्रभाव दूसरी प्रेगनेंसी पर पड़ सकता है?

अगर महिला के गर्भपात का कारण, गर्भाशय में परेशानी या कोई जटिलता न हो तो इसका प्रभाव दूसरी प्रेगनेंसी पर नहीं पड़ सकता है।

वहीं अगर गर्भपात के वक़्त गर्भ में कुछ अंश शेष रह गए हों या गर्भाशय में चोट लग गयी हो तो इसका प्रभाव दूसरी प्रेगनेंसी पर पड़ सकता है।

इसके अलावा गर्भपात के बाद गर्भाशय ग्रीवा में आई कमज़ोरी भी दूसरी प्रेगनेंसी को प्रभावित कर सकती है।

क्या मेनोपॉज़ के बाद प्रेगनेंट होना संभव है?

मेनोपॉज़ से पहले दो स्टेज आते हैं प्री-मेनोपॉज़ और पोस्ट-मेनोपॉज़!

प्री-मेनोपॉज़ के स्टेज में अनियमित पीरियड्स के बावजूद ओवुलेशन हो सकता है जिस कारण गर्भधारण संभव है।

हालाँकि, पोस्ट-मेनोपॉज़ (जब 12 महीने तक महिला को पीरियड्स नहीं आएं हों) में ओवुलेशन ना होने के कारण गर्भधारण नहीं किया जा सकता।

क्या व्यायाम करने से गर्भधारण करने में मदद मिलती है?

व्यायाम, तनाव और अनिद्रा को दूर रखने के साथ-साथ वजन संतुलित रखने और प्रसव के लिए शरीर को तैयार करने में भी सहायक है, जिससे गर्भधारण में मदद मिलती है।

इसके साथ ही व्यायाम अजन्मे बच्चे के लिए भी लाभदायक होता है। गर्भधारण के लिए आप योग, वॉकिंग, तैराकी और साईक्लिंग कर सकती हैं।

प्रेग्नेंट होने के लिए प्रजनन क्षमता को कैसे बढ़ाये?

प्रेग्नेंट होने के लिए प्रजनन क्षमता का मजबूत होना बेहद आवश्यक है। प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए नाश्ता स्किप न करें, पौष्टिक आहार खाएं, अधिक कार्बोहाईड्रेट और तला-भुना खाने से बचें, फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करें और साथ ही ज़रुरी सप्लीमेंट्स भी लें।

इसके अलावा तनाव रहित जीवन जी कर, शारीरिक रूप से एक्टिव रहकर और संतुलित वज़न रखकर भी प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

क्या प्रेग्नेंट होने के लिए कोई बेस्ट सेक्स पोजीशन होता है?

यूँ तो प्रेग्नेंट होने के लिए कोई बेस्ट सेक्स पोजीशन नहीं होता है। मगर, आईयूआई के एक रिसर्च में ये पाया गया है कि जो महिलाएं इनसेमीनेशन (गर्भधान) के बाद कुछ देर तक लेटी रहीं, उनमें गर्भधारण की सफलता दर अधिक है।

प्रेग्नेंट होने के लिए कब तक सेक्स करना चाहिए?

35 वर्ष से कम आयु की महिला को (जिनमें कोई प्रजनन विकार नहीं है) प्रेग्नेंट होने के लिए एक साल तक असुरक्षित सेक्स करना चाहिए।

वहीं 35 वर्ष से अधिक आयु की महिला को (जिनमें कोई प्रजनन विकार नहीं है) प्रेग्नेंट होने के लिए छह महीने तक असुरक्षित सम्भोग करना चाहिए।

इन दोनों स्थितियों में, अगर कोशिश के बाद भी गर्भ नहीं ठहरता तो कपल को डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सेक्स के कितने दिनों बाद गर्भधारण होता है?

सेक्स के तुरंत बाद महिला गर्भवती नहीं होती है। सेक्स के लगभग 10-15 दिनों के बाद महिला के गर्भधारण की संभावना होती है।

सम्भोग के कुछ मिनट या कुछ दिनों बाद फर्टिलाइजेशन हो सकता है मगर इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया में 10-15 दिनों का समय लग सकता है।

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