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प्रेग्नेंट कब और कैसे होती है ?

How does a woman get pregnant? in hindi

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एक नज़र

  • ओवरी और फॉलोपियन ट्यूब स्त्री के प्रमुख प्रजनन अंगों में से हैं।
  • महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का मिलना प्रेग्नेंट होने के लिए बहुत जरुरी है।
  • पीरियड्स शुरू होने के 12वें दिन से लेकर 18वें दिन तक महिला की प्रजनन क्षमता चरम पर होती है।
  • हर महीने 6 दिन महिला के प्रेग्नेंट होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है, इस समय को फर्टाइल डेज कहा जाता हैं ।

प्रेग्नेंट होने के लिए महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का मिलना जरुरी हैं, पुरुष के शुक्राणु और महिला के अंडाणु के मिलने की प्रक्रिया को फर्टिलाइजेशन कहते हैं. यहाँ यह बात ध्यान रखने वाली हैं की महिला के शरीर में अंडाणु 12 से 24 घंटे तक जीवित रहते हैं जबकि पुरुष के स्पर्म 5 से 7 दिन तक जीवित रहते हैं।

प्रेग्नेंट होना किसी भी महिला के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है। प्रजनन पर ही यह संसार टिका है। एक महिला का गर्भधारण करना व एक नयी जान को संसार में लाना वाकई एक मुश्किल और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। अगर आप माँ बनने का सोच रही हैं तो आपके मन में ज़रुर ये विचार आ रहा होगा कि प्रेग्नेंट (गर्भधारण) कैसे होती है , आपको प्रेग्नेंट होने में कितना समय लगेगा, प्सेग्रेंट होने के लिए कब सम्भोग करना चाहिए और आपको जल्द से जल्द प्रेग्नेंट होने के लिए किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

आज इस लेख के द्वारा हम प्रेगनेंसी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों जैसे - महिला प्रेग्नेंट कैसे होती है, गर्भ ठहरने का कारण और गर्भ ठहरने की विधि क्या हैं, गर्भधारण करने का सबसे उपयुक्त समय क्या है पर चर्चा करेंगे। आइये इस लेख के माध्यम से प्रेगनेंसी कब और कैसे ठहरती है, के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं। अगर आप प्रेग्नेंट हैं और अपनी गर्भावस्था के दौरान आने वाले बदलावों के बारे में जानना चाहती हैं तो गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों के बारे मे यहाँ पढ़े!

गर्भधारण की पूरी विधि को समझने से पहले, यह जानना बहुत जरुरी है की प्रेग्नेंट (गर्भवती) होने के लिए महिला और पुरुष के कौन से प्रजनन अंग होते हैं और वह कैसे काम करते है।

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इस लेख़ में/\

  1. प्रेग्नेंसी के लिए महत्वपूर्ण अंग
  2. प्रेग्नेंट कैसे होते हैं और प्रेगनेंसी क्या है ?
  3. प्रेगनेंट होने के लिए कब सम्बन्ध बनाये?
  4. प्रेग्नेंट होने की अधिकतम संभावना - फर्टाइल डेज
  5. ओवुलेशन को ट्रैक कर प्रेग्नेंट कैसे होती है
  6. प्रेग्नेंट होने के लिए मासिक धर्म को ट्रैक करे
  7. प्रेगनेंसी कब से काउंट होती है? (गर्भधारण की उम्र )
  8. प्रेगनेंसी टेस्ट के द्वारा गर्भावस्था की पुष्टि करे
  9. प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) में पहले सप्ताह के लक्षण
  10. प्रेगनेंसी के लिए खुद को कैसे तैयार करे
  11. निष्कर्ष
  12. पूछे गए प्रश्न
 

1.प्रेग्नेंसी के लिए महत्वपूर्ण अंग

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स्त्री और पुरुषोंके प्रजनन अंग बच्चे के जन्म के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इसलिए दोनों में प्रजनन अंगो का स्वस्थ होना जरुरी होता है।

प्रेग्नेंसी के महिला में कौन से अंग महत्वपूर्ण होते है?

गर्भ ठहरने की विधि, प्रेग्नेंट होने के कारणों को समझने के लिए सबसे पहले स्त्री के प्रजनन अंगों (reproductive organ) के बारे में जानना आवश्यक है। ओवरीज़ (ovaries) और फॉलोपियन ट्यूब (fallopian tube) स्त्री के प्रमुख रिप्रोडक्टिव यानि प्रजनन अंगों में से हैं।

आइये ओवरी और फॉलोपियन ट्यूब के बारे में विस्तार मे जानते हैं :

ओवरी (Ovaries)

हर महिला में दो ओवरी, एक दाई तरफ और एक बाई तरफ होती है। ये लगभग 4 सेंटीमीटर बड़ी और ओवल आकार की होती है। ओवरी गर्भ (uterus) के दोनों तरफ ओवारियन फोल्लिकल्स (ovarian follicles) में स्थित होती है। ये लिगामेंट (ligament) के द्वारा गर्भ से जुड़ी होती है मगर बाकी स्त्री प्रजनन अंगों जैसे फैलोपियन ट्यूब से दूर होती है।
ओवरी गर्भावस्था में दो विशेष काम करती है, अंडाणु (egg) को सक्रिय करना, जो शुक्राणुओं के साथ मिलकर फ़र्टिलाइज होते हैं और प्रेगनेंसी (गर्भधारण) की प्रक्रिया शुरू करते हैं। इसके अलावा गर्भावस्था/प्रेगनेंसी को बरकरार रखने के लिए जरुरी हार्मोन्स ऑसट्रोजन (oestrogen) और प्रोजेसटेट्रोन (progesterone) का निर्माण करना, जिन्हें प्रेगनेंसी हार्मोन (pregnancy hormone) भी कहा जाता है।

फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes)

दूसरा महत्वपूर्ण अंग होता है डिंबवाहिनी नली यानि फैलोपीयन ट्यूब (fallopian tube) जिसका एक हिस्सा ओवरी (ovary) से जुड़ा होता है और दूसरा हिस्सा गर्भाशय (uterus) से जुड़ा होता है। फैलोपीयन ट्यूब (fallopian tube), ट्यूब जैसी आकृति की होती हैं जो महिला के अंडो को ओवरी से गर्भाशय तक पहुँचाने मे मदद करती हैं।

प्रथम माहवारी आने से पहले तक अंडाशय या ओवरी के अंडाणु (egg) सुप्त (सोये) अवस्था में रहते हैं। महिला के युवावस्था में प्रवेश करने के साथ ही यह अंडाणु सक्रिय हो जाते हैं जिसके कारण महिला में मासिक धर्म चक्र की शुरुआत हो जाती है। पुरुष के साथ सेक्स करने पर महिला की योनि (vagina) के मार्ग से पुरुष के वीर्य/ शुक्राणु (sperm) महिला के शरीर में प्रवेश करते हैं।

शरीर में प्रवेश करने के साथ ही शुक्राणु महिला की फैलोपिन ट्यूब में प्रवेश करते हैं और अगर उन्हें वहाँ जीवित अंडाणु मिल जाता है तो प्रेगनेंसी का पहला चरण पूरा हो जाता है, जिसे निषेचन / फर्टिलाइजेशन (fertilization) कहा जाता है। [1] फर्टिलाइजेशन के बाद निषेचित अंडा (fertilised egg) गर्भाशय मे जाकर प्रत्यारोपित (implantation) हो जाता है। निषेचित अंडे का गर्भाशय में प्रत्यारोपण सफल प्रेगनेंसी की निशानी है।

प्रेग्नेंसी के लिए पुरुषों में कौन से अंग महत्वपूर्ण हैं?

पुरुष प्रजनन प्रणाली के अंगों का उद्देश्य निम्नलिखित कार्य करना है:

  • पुरुष प्रजनन कोशिकाओं में शुक्राणु- स्पर्म(sperm) और सुरक्षात्मक तरल पदार्थ वीर्य- सीमेन (semen) का उत्पादन करना और वहन करना होता है
  • सेक्स के दौरान महिला प्रजनन अंगों के भीतर स्पर्म का निर्वहन करना
  • पुरुष प्रजनन प्रणाली को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार पुरुष सेक्स हार्मोन का उत्पादन और स्राव करना

आइये पुरुष प्रजनन प्रणाली के अंगों के बारे में विस्तार मे जानते हैं :

महिला प्रजनन प्रणाली के विपरीत, अधिकांश पुरुष प्रजनन प्रणाली शरीर के बाहर स्थित होती है। इन बाहरी संरचनाओं में लिंग (penis) और अंडकोष (scrotum and testicles) शामिल हैं।

लिंग (Penis)

यह सेक्स के दौरान उपयोग किया जाने वाला पुरुष अंग है। इसके तीन भाग हैं- जड़(root), जो पेट की दीवार से जुड़ी होती है; शरीर, या शाफ्ट(shaft) ; और ग्रंथियां(glands), जो लिंग के अंत में शंकु के आकार का हिस्सा है। ग्लान्स (glans-penis), जिसे लिंग का सिर भी कहा जाता है, यह त्वचा की एक ढीली और पतली परत के साथ कवर किया जाता है जिसे फोरस्किन(foreskin) कहा जाता है। यह त्वचा कभी-कभी खतना नामक एक प्रक्रिया में हटा दी जाती है।

लिंग में कई संवेदनशील तंत्रिकाओंका अंत (number of sensitive nerve endings) भी होता हैं। जब पुरुष सेक्स के समय उत्तेजित होता है। तब लिंग रक्त से भर जाता है, यह कठोर और सीधा हो जाता है। सेक्स के दौरान पेनिस से सीमेन का स्खलन होता है, जिसमें स्पर्म होते हैं, जब पुरुष यौन चरमोत्कर्ष (संभोग) तक पहुंचता है।

जब लिंग खड़ा होता है, मूत्र का प्रवाह मूत्रमार्ग से अवरुद्ध हो जाता है, जिससे केवल वीर्य को संभोग सुख पर स्खलित होने की अनुमति मिलती है। पुरुष का स्पर्म महिला की योनि के माध्यम से उनके के शरीर में प्रवेश करता है, फिर उसके गर्भाशय ग्रीवा और से फैलोपियन ट्यूब में जाता है, जहां एक अंडा स्पर्म के साथ निषेचित (fertilise) होता है।

निषेचित अंडे का गर्भाशय में प्रत्यारोपण सफल प्रेगनेंसी की निशानी होता है। एक स्वस्थ पुरुष के सीमेन में औसतन १५ मिलियन स्पर्म से ले कर २०० स्पर्म तक होते हैं। १५ मिलियन स्पर्म से कम स्पर्म काउंट होने पर उसे लो स्पर्म काउंट कहा जाता है और यह पुरुष बाँझपन का कारण हो सकता हैं।

अंडकोष (scrotum and testicles)

पुरुषोंमें में अंडकोष स्क्रोटम और वृषण (scrotum and testicles) से बनता है। स्क्रोटम - अंडकोश लिंग के पीछे और नीचे लटकने वाला थैली जैसा अंग होता है। इसमें अंडकोष (जिसे वृषण भी कहा जाता है), साथ ही कई तंत्रिकाएं और रक्त वाहिकाएं शामिल हैं। सामान्यतः पुरुषों में दो वृषण (testes) होते हैं। वृषण यह प्राथमिक पुरुष प्रजनन अंग हैं जो टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन (testosteron hormone) और शुक्राणु उत्पादन (sperm production) के लिए जिम्मेदार हैं।

पुरुष शरीर में बनने वाला टेस्टोस्टेरोन हार्मोन मुख्य रूप से सेक्स हार्मोन के रूप में जाना जाता है। जब पुरुष के शरीर में इस हार्मोन के लेवल में कमी हो जाती है, तब इसके परिणामस्वरूप पुरुष में स्पर्म काउंट की कमी हो कर बांझपन की शिकायत हो सकती है। सही मेडिकल ट्रीटमेंट और कुछ घरेलु नुस्खों से स्पर्म काउंट बढ़ाया जा सकता है
अगले भाग में जानते है की प्रेग्नेंट कैसे होती हैं, यानि पुरुष के शुक्राणु और महिला के अंडे के मिलने के बाद गर्भधारण कैसे होता है ।

और पढ़ें: गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले परीक्षण और उनका महत्व

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2.प्रेग्नेंट कैसे होते हैं और प्रेगनेंसी क्या है ?

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अधिकांश समय, महिलाओं को पता नहीं होता कि वे गर्भवती हुईं या नहीं। आपका डॉक्टर आपकी गर्भावस्था की शुरुआत को आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन से गिना गिनता है। और प्रेगनेंसी होने की तारीख बताता है। यह दिन गर्भाधान होने पर यह लगभग 2 सप्ताह आगे होता है।

आइये देखते है की प्रेग्नेंट कैसे होती है और उसकी क्या स्टेजेस होती है-

  • ओवुलेशन (Ovulation)

ओवुलेशन तब होता है जब महिला में अंडाशय (ovaries) एक अंडा (egg) जारी करती हैं। ओवुलेशन के समय महिला का अंडाणु फैलोपिन ट्यूब से परिपक्व (mature) अवस्था में बाहर निकलता है। आमतौर पर महिला का मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) 28 दिनों का होता है और एक स्वस्थ महिला के शरीर में ओवुलेशन की प्रक्रिया मासिक धर्म के 10 दिन बाद होती है। इस समय महिला की ओवरी से अंडा निकल कर फैलोपियन ट्यूब तक जाता है।

कुछ महिलाओं का मासिक धर्म चक्र अनियमित होता है। ऐसी स्थिति में यह जरुरी है कि आप आपने ओवुलेशन को ट्रैक करें और ओवुलेशन के समय पर अपने साथी से सम्बन्ध (sex) बनाये। ऐसा करने से आपके प्रेगनेंट होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • फर्टिलाइजेशन (fertilization)

महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का मिलना प्रेग्नेंट होने के लिए बहुत जरुरी है। यह प्रक्रिया निषेचन (fertilization) कहलाती है। निषेचन की प्रक्रिया, किसी भी सामान्य महिला के अंडोत्सर्ग या ओवुलेशन (ovulation) के चक्र के दौरान होती है। यदि इस समय फैलोपियन ट्यूब में पुरुष का वीर्य (sperm) मौजूद होता है तब यह अंडा उसके साथ मिलकर निषेचित (fertilise) हो जाता है।

निषेचन की सफल प्रक्रिया के बाद ही महिला गर्भवती होती है। हर महिला का शरीर अलग होता हैं इस कारण ये जरुरी नहीं कि हर महिला का ओवुलेशन उसके माहवारी के 10 दिन बाद ही होगा। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि महिला का अंडा गर्भनाल में 24 घंटे तक जीवित रहता है और इसी प्रकार फैलोपिन ट्यूब में मौजूद वीर्य (spem) 5 दिनों तक जीवित रहते हैं।[2] यदि इस अवधि में महिला का अंडा फैलोपिन ट्यूब तक पहुँच जाता है तभी निषेचन प्रक्रिया की संभावना बढ़ जाती है।

निषेचन के तुरंत बाद, आपके बच्चे के जीन और लिंग सेट हो जाते हैं। यदि शुक्राणु में एक वाई क्रोमोजोम (Y- chromosome) होता है, तो आपका बच्चा एक लड़का होगा। यदि इसमें एक एक्स क्रोमोजोम (X- chromosome) है, तो बच्चा एक लड़की होगी

  • प्रत्यारोपण (Implantation) :

निषेचित अंडा (fertilized egg) लगभग 3 से 4 दिनों तक फैलोपियन ट्यूब में रहता है। लेकिन निषेचित होने के 24 घंटे के भीतर, इसकी कोशिकाओं में तेजी से विभाजन होने लगता है। निषेचित अंंडे का विभाजन फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से गर्भाशय में धीरे-धीरे जाने तक होता रहता है। इसका अगला काम गर्भाशय के अस्तर (uterus wall) से जुड़ना होता है।

जब फर्टिलाइज एग विभाजित होकर यूटेरस में जाता है और गर्भाशय के अस्तर यानि यूटेराइन वाल से जुड़ता है इसे मेडिकल भाषा में इम्प्लांटेशन (Implantation) कहा जाता है। यह गर्भाशय के अस्तर से तब तक जुड़ा रहेगा जब तक बच्चा पैदा होने के लिए तैयार नहीं हो जाता।

इसलिए गर्भ ठहरने के लिए निम्न में से किसी एक स्थिति का होना जरूरी होता है :

  • महिला के अंडाशय से जब अंडा रिलीज होता है तब पुरुष का वीर्य यानि स्पर्म पहले से ट्यूब में मौजूद हो
  • महिला के अंडाशय से रिलीज हुआ अंडा 24 घंटे तक जीवित रहता है, इन 24 घंटों के समय में पुरुष का वीर्य महिला के फैलोपियन ट्यूब में मौजूद हो

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?

 

3.प्रेगनेंट होने के लिए कब सम्बन्ध बनाये?

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गर्भधारण की संभावनाओं को अधिकतम करने के लिए आप सेक्स करते समय सभी सावधानिया बरतना चाहते है जिससे प्रेगनेंसी जल्दी ठहर जाये। प्रेगनेंसी जल्दी ठहरे इसके लिए उस समय सेक्स करना चाहिए जब महिला के ओवरी से अंडे की रिहाई का समय होता है। जल्दी गर्भधारण के लिए प्रेगनेंसी के सर्वोत्तम समय, सेक्स की फ्रीक्वेंसी (frequency) याने महीने में कितनी बार सेक्स करने से जल्दी गर्भधारण होगी और प्रेगनेंसी के लिए सेक्स की सही पोजीशन क्या होगी इस बात का भी खयाल रखना आवश्यक होता है।

अधिकतर महिलाएं इस दुविधा में रहती हैं कि गर्भधारण के लिए सही समय क्या है?

आईये इसे विस्तार में जानते है -

  • प्रेगनेंसी के लिए सर्वोत्तम समय - ओवुलेशन का समय

अधिकतर महिलाएं इस दुविधा में रहती हैं कि गर्भधारण के लिए सही समय क्या है? सामान्य रूप से स्वस्थ महिला का मासिक स्त्राव (menstruation discharge) 5 से 7 दिनों तक चलता है।[3] पीरियड्स शुरू होने के 12वें दिन से लेकर 18वें दिन तक महिला की प्रजनन क्षमता चरम पर होती है। इस समय को ओवुलेशन पीरियड (ovulation period) भी कहा जाता है। ओवुलेशन पीरियड को गर्भधारण का सबसे सही समय समझा जाता है। इन दिनों में पुरुष के साथ सेक्स करने पर गर्भ ठहरने की संभावना अधिकतम होती है।

यदि आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं, तो अपने मासिक धर्म चक्र को ट्रैक करें और ओवुलेशन के अन्य संकेतों को देखें, जैसे कि शरीर के तापमान में परिवर्तन।ओवुलेशन को ट्रैक करने के लिए आप ओवुलेशन कैलंडर का इस्तेमाल कर सकती हैं या बेसल बॉडी तापमान और सर्वाइकल म्यूकस (cervical mucouस) में हो रहे बदलाव को भाप कर ओवुलेशन का पता लगा सकती हैं। ध्यान रखें कि एक अंडाणु निषेचन (egg fertilization) के लिए केवल 12-24 घंटों के दौरान उपलब्ध होता है।

शुक्राणु महिला के शरीर में तीन से पांच दिनों के लिए रह सकते हैं, अगर ओवुलेशन दिनों में या ओवुलेशन के ३-४ दिन पहले असुरक्षित यौन संबंध बनाती हैं, तो भी आप गर्भवती हो सकती हैं। हालांकि, यदि आप ओवुलेशन के बाद दिन सेक्स करती हैं, तो आप गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। अगर आप शारीरिक तौर पर स्वस्थ हो और आप गर्भवती होना चाहती हैं, तो महीने भर में हर 2 से 3 दिन में सेक्स करना आपको प्रेगनेंसी का सबसे अच्छा अवसर देगा।

आपको केवल ओवुलेशन के आसपास सेक्स करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप ६ महीने या एक वर्ष से अधिक समय से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं और यदि आप की उम्र ३५ से अधिक हैं - तो अपने डॉक्टर से बात करें।

  • प्रेग्नेंट होने के लिए सेक्स का उपयुक्त समय

प्रेगनेंसी की प्लानिंग करते समय महिला को ये भी सवाल परेशान कर सकता है की कितनी बार सेक्स करना चाहिए? जिससे प्रेगनेंसी जल्दी ठहर जाये। कुछ अध्ययनों में यह साबित हुआ है की अक्सर लगातार सेक्स करने से स्पर्म क्वालिटी और मात्रा कम हो जाती है। कुछ शोधों से पता चला है कि हर 2-3 दिनों के संयम के बाद सेक्स करने से शुक्राणु की गुणवत्ता बेहतर होती है। अध्ययनों से यह भी पता चला है महिलाओं मे ओवुलेशन पीरियड्स के दौरान दिन में एक बार या हर दूसरे दिन सेक्स करना आपके गर्भवती होने की संभावनाओं को बढ़ाएगा।

  • प्रेगनेंसी के लिए बेस्ट सेक्स पोसिशन्स

सेक्स के दौरान जारी किए गए सैकड़ों लाखों पुरुष स्पर्म्स के साथ, ओवुलेशन के समय के आसपास, असुरक्षित यौन संबंध बनाने से प्रेग्नेंट हो सकती है। जब तक शुक्राणु योनि में प्रवेश करते रहते हैं, तब तक महिलाओं के पास गर्भ धारण करने का मौका होता है। सेक्स के दौरान कोई निश्चित स्थिति या पोजीशन गर्भाधान की संभावना को बढ़ाने के लिए साबित नहीं हुई है। फिर भी कुछ पोसिशन्स दूसरी पोजीशन की तुलना में बेहतर हो सकती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि स्पर्म बिना कोई अड़चन से आसानी से साथ अंडे तक पहुँच सके।

निम्न लिखित पोसिशन्स आपने से जल्दी प्रेगनेंसी की सम्भावना होती है

मिशनरी पोजीशन (man on top)

पुरुष के पेनिस को अधिक गहरा जाने की अनुमति देते है जिससे महिला के गर्भाशय ग्रीवा के करीब शुक्राणु को छोड़ सके।

डौगी स्टाइल पोजीशन (doggie-style positions or man behind)

मिशनरी पोजीशन की तरह यह पोस्टिव भी पुरुष के पेनिस को अधिक गहरा जाने की अनुमति देते है जिससे महिला के गर्भाशय ग्रीवा के करीब स्पर्म को छोड़ सके और गर्भधारण प्रक्रिया जल्दी से हो सके।

स्टैंडिंग या वीमेन ऑन टॉप पोजीशन (Standing or women on top position)

स्टैंडिंग या वीमेन ऑन टॉप पोजीशन (Standing or women on top position) गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ काम करता है। यह पोजीशन सेक्स के तुरंत बाद खड़े होने पर भी गर्भावस्था की संभावना को कम नहीं करता।

क्युकी की स्पर्म बहुत अच्छे तैराक(swimmer) होते हैं। एक बार योनि में जमा होने के बाद, वे 15 मिनट के भीतर गर्भाशय ग्रीवा तक पहुंच सकते हैं।

और पढ़ें:Guide To Get Pregnant

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4.प्रेग्नेंट होने की अधिकतम संभावना - फर्टाइल डेज

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प्रेग्नेंट होने के लिए करने के लिए फ़ीमेल एग और मेल स्पर्म का फर्टिलाइजजेशन होना बहुत जरुरी है। इसके कारण सही समय पर गर्भधारण के लिए, सही समय पर सेक्स करना भी जरूरी होता है। यह समय महिला के ओवुलेशन के समय पर निर्धारित होता है। इस समय पर महिला का परिपक्व अंडाणु (egg) फैलोपियन ट्यूब में मौजूद होता है। महिला का ओवुलेशन समय वह होता है जब महिला की प्रजनन क्षमता सबसे अधिक होती है इसलिए इस अवस्था को सबसे उपयुक्त प्रजनन दिन (favorable fertile period) भी कहा जाता है। [4]

यह समय प्रेगनेंट होने के लिए सबसे उपयुक्त है। जल्दी प्रेग्नेंट होने के लिए आप अपने ओवुलेशन साइकल को ट्रैक कर सकती हैं।

लगभग सभी डॉक्टर ओवुलेशन के समय की गणना के लिए निम्न विधि बताते हैं :

  • प्रत्येक महिला के मासिक चक्र के बीच का समय ओवुलेशन का होता है।
  • आमतौर पर स्वस्थ महिला का मासिक चक्र 28 दिन का माना जाता है।
  • ऐसी स्थिति में पीरियड शुरू होने के 14वें दिन ओवुलेशन होता है।
  • पीरियड शुरू होने के 12 से 18 दिनों के बीच में सेक्स करने से गर्भ जल्दी ठहरता है।

ओवुलेशन के दौरान आपके शरीर में कई बदलाव होते हैं, शरीर के इन बदलावों को ट्रैक करने से आप अपने ओवुलेशन का ध्यान रख सकती हैं। महिला के शरीर में हो रहे बदलावों के बारे में हम अगले सेक्शन (ओवुलेशन को कैसे ट्रैक करें) में बात करेंगे। ओवुलेशन साइकल के अलावा आप मासिक धर्म (menstruation cycle) को भी ट्रैक कर सकती हैं।

मासिक धर्म के सात दिन बाद (7 days after mensuration) से लेकर अगले मासिक धर्म के शुरू होने से पहले के सात दिनों (7 days before mansuration) तक सेक्स करने पर गर्भ जल्दी ठहर सकता है।

और पढ़ें:How to conceive a baby boy - A Scientific Approach

 

5.ओवुलेशन को ट्रैक कर प्रेग्नेंट कैसे होती है

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अमेरिकन एस्सोशियेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी (American Association of Pregnancy) के अनुसार ओवुलेशन तब होता है जब मैच्योर एग ओवरी से निकल कर फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइजेशन के लिए तैयार होता है। महिलाओं के लिए उनके ओवुलेशन का समय प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। यहाँ ये बात जानना बहुत आवश्यक है कि मैच्योर एग सिर्फ 12 से 24 घंटों तक ही जीवित रहता है।

ज्यादातर महिलाएं अपने मासिक चक्र के ग्यारहवें दिन और इक्कीसवें दिन के बीच में ओवुलेट करती हैं। ओवुलेशन के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं। अगर आप प्रेग्नेंट होना चाहती हैं तो ओवुलेशन ट्रैक करना आपके लिए बहुत जरुरी है।

ओवुलेशन के लक्षण निम्न हैं :

  • सर्विकल म्यूकस (Cervical mucus)

ओवुलेशन के समय आपके योनि से होने वाले स्त्राव की मात्रा और गाढ़ेपन में साफ़ तौर पर बदलाव दिखाई देते हैं। ओवुलेशन के समय सर्विकल म्यूकस चिकनाईयुक्त होता है और छूने पर एक इंच खींच जाता है।

  • बेसल बॉडी टेम्प्रेचर (Basal body temperature)

आप सुबह उठ कर रोज शरीर का तापमान ले सकती हैं। ओवुलेशन के समय आपके शरीर का तापमान एक से दो डिग्री तक बढ़ता है। तापमान लेने के लिए आप बेसल थर्मोमीटर (basal thermometer) का यूज़ कर सकती हैं।

  • मिट्टेलस्किमर्ज पेन (Mittelschmerz pain)

कुछ महिलाओं में ओवुलेशन के समय पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द महसूस हो सकता है। ये दर्द कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटो तक रह सकता है। इसके अलावा आपको ब्लोटिंग, हल्की स्पॉटिंग जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

और पढ़ें:Uterine Fibroids and its treatment

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6.प्रेग्नेंट होने के लिए मासिक धर्म को ट्रैक करे

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मासिक धर्म में गर्भाशय का बाहरी अस्तर जिसे एंडोमेट्रियम(endometrium) कहते है उसका रक्तस्ताव होकर बहना होता है। सामान्य तौर पर महिला का मासिक धर्म पांच से साथ दिन का होता है। मगर कई महिलाओं में ये समय लम्बा भी हो सकता है। ज्यादातर महिलाओं में मासिक चक्र (menstrual cycle) की अवधि 28 दिनों की होती है। इसका मतलब हर महीने 6 दिन आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

आईये जानते है की मासिक धर्म का प्रेग्नेंट होने के लिए क्या महत्व होता और प्रेग्नेंट होने के लिए उसे कैसे ट्रैक करे:

नियमित समय पर पीरियड्स( Menses ) होने का मतलब है कि शरीर के सभी प्रजनन अंग स्वस्थ है और अच्छा काम कर रहे है। मासिक चक्र की वजह से ऐसे हार्मोन बनते है जो शरीर को स्वस्थ रखते है। पीरियड्स महिलाओं के शरीर को हर महीने गर्भावस्था के लिए तैयार करता है। मासिक चक्र के शुरू के दिनों में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन बढ़ना शरू होता है। ये हार्मोन शरीर को स्वस्थ रखता है विशेषकर ये हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही इस हार्मोन के कारण गर्भाशय की अंदरूनी दीवार पर रक्त और टिशूज़ की एक मखमली परत बनती है ताकि वहाँ भ्रूण पोषण पाकर तेजी से विकसित हो सके। ये परत रक्त और टिशू से बनी होती है।

ओवेरियन फॉलिकल (ovarian follicle) जो महिला के अंडाशय के अंदर पाए जाते हैं। वे महिला के शरीर में हार्मोन स्रावित करते हैं जो मासिक धर्म चक्र के चरणों को प्रभावित करते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिलाओं में यौवन के शुरुआत लगभग 300,000 से 400,000 तक ओवेरियन फॉलिकल होते है। प्रत्येक ओवेरियन फॉलिकल में निषेचन के लिए एक अंडा जारी करने की क्षमता होती है। फॉलिकल्स का आकार और स्थिति प्रजनन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

आपके मासिक चक्र (menstrual cycle) की अवधि का पता करने के लिए आपको कुछ महीनों (लगभग तीन महीनों) तक अपने मासिक धर्म को ट्रैक करना होगा। मासिक धर्म का पहला दिन आपके मासिक चक्र का पहले दिन होगा और अगला मासिक धर्म शुरू होने से एक दिन पहले आपके मासिक चक्र का आखिरी दिन होगा। मान लीजिये आपका मासिक चक्र इस प्रकार है, पहले महीने में 28 दिन दूसरे महीने में 30 दिन और तीसरे महीने में 28 दिन।

आप सबसे छोटे मासिक चक्र यानि 28 दिन से 18 को घटा दीजिये, ये आपके फर्टाइल विंडो का पहला दिन होगा। ऐसे ही अपने सबसे बड़े मासिक चक्र यानि कि 30 दिन से 11 घटा देने पर यह आपके फर्टाइल विंडो का आखिरी दिन बताता है। इन दिनों के बीच संभोग करने से प्रेग्नेंट होने की संभावना बढ़ जाती है।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी के साथ कैसे हो सकती हैं जल्द गर्भवती

 

7.प्रेगनेंसी कब से काउंट होती है? (गर्भधारण की उम्र )

When does pregnancy count in hindi

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प्रेगनेंसी का अनुमानित दिन वह होता है, जिस दिन आप पहली बार गर्भवती होती हैं, मगर, अधिकांश लोग गर्भावस्था की गणना इस दिन से नहीं करते। ऐसा इसलिए, क्योंकि वास्तव में आपने कौन से दिन डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेट) किया और किस दिन गर्भधारण किया, यह जानना थोड़ा कठिन होता है।

तो ऐसे में प्रेगनेंसी किस दिन हुई, यह पता न होने पर प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाये इस तरह के प्रश्न महिलाओं को पड सकते है? इसके लिए डॉक्टर जो तरीका अपनाते हैं उसमें वे महिला की पीरियड्स आने की लास्ट तारीख जिसे माहवारी की आखिरी तारीख (last menstrual period - LMP) भी कहते है के पहले दिन से गिनती करते हैं।

महिलोंमे गर्भावस्था लगभग 282 दिन यानि नौ कैलेंडर महीने और सात दिन तक या फिर 40 हफ्तों तक चलनी चाहिए। बच्चे के जन्म की संभावित तारीख (EDD - Estimated Due Date ) जानने के लिए गर्भावस्था की इस समयावधि को अपनी पिछली पीरियड्स के पहले दिन से जोडे जिससे आपको अपने बच्चे के जेस्टेशनल एज(Gestational Age) की जानकारी भी मिल जाती है।

हालांकि, इस तरीके से एकदम सही नियत तिथि का पता चलना मुश्किल होता है। यदि आपकी माहवारी नियमित रहती है और यह हर बार पूर्वानुमानित 28 दिन में शुरु हो जाती है, तो यह गणना अधिक विश्वसनीय परिणाम देती है। इसके लिए आप डिलीवरी तिथि कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकती है।

जेस्टेशनल एज (Gestational Age) या गर्भधारण की उम्र, गर्भधारण और बच्चे जन्म के बीच की अवधि है। इस समय के दौरान, बच्चा बढ़ता है और माँ के गर्भ में विकसित होता है।

और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत

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8.प्रेगनेंसी टेस्ट के द्वारा गर्भावस्था की पुष्टि करे

Confirm pregnancy through pregnancy test in hindi

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ऊपर दिए गए स्टेप्स के अनुसार अगर आप प्रेग्नेंट होने की तैयारी कर रही है और यह पता लगाना चाहती है की आपकी प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) ठहरी या नहीं तो आप मार्किट में उपलब्ध घर पे किये जाने वाले प्रेगनेंसी टेस्ट किट का प्रयोग कर सकती है।

होम प्रेगनेंसी टेस्ट किट की सहायता से महिलाएँ घर बैठे अपने गर्भवती होने की पुष्टि कर सकती हैं। प्रेग्नेंट होने पर महिला के शरीर में एचसीजी हॉर्मोन का उत्पादन शुरू हो जाता है और प्रेगनेंसी टेस्ट के दौरान ब्लड या मूत्र में इसी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin - HCG) की जांच की जाती है।

यहाँ यह बात ध्यान रखने वाली है कि घर पर किये जाने वाले होम प्रेगनेंसी किट महिलाओं के मूत्र में एचसीजी हॉर्मोन (hCG hormone) की मात्रा का पता लगा, प्रेग्नेंट होने की पुष्टि करती हैं।

लेकिन प्रेगनेंसी टेस्ट किट खरीदने से पहले इसकी एक्सपायरी डेट देख लेना बहुत आवश्यक है ताकि गलत परिणाम आने की सम्भावना कम हो। प्रेगनेंसी टेस्ट किट स्त्रीत्व और मातृत्व के लिए सबसे अच्छे उपहारों में से एक है जिसके माध्यम से सेकंड के भीतर खुशी का पता लगाने में मदद मिलती है, और हॉस्पिटल या क्लिनिक जाने की भी आवश्यकता नहीं होती है।

बाजार में कई प्रकार की गर्भावस्था जाँच किट उपलब्ध हैं, आप नीचे दिए गए लिस्ट से कोई भी प्रेगनेंसी टेस्ट किट घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए इस्तेमाल केर सकती हैं -

1. प्रेगा न्यूज़ प्रेगनेंसी टेस्ट किट (Prega News Pregnancy Test Kit)

2. आई-कैन प्रेग्नेंसी टेस्ट किट (I-Can Pregnancy Test Kit)

3. वेलोसिट प्रेगनेंसी टेस्ट किट (Velocit Pregnancy Test Kit)

4. क्लियरब्लू प्रेग्नेंसी टेस्ट किट (Clearblue Pregnancy Test Kit)

5. डॉ मोरपेन क्विक चेक गर्भावस्था परीक्षण किट (Dr Morepen’s quick check pregnancy test kit)

6. फर्स्ट रिस्पांस प्रेगनेंसी टेस्ट किट (First Response Pregnancy Test kit)

यह याद रखना ज़रूरी है कि सही समय पर प्रेगनेंसी टेस्ट लेने से ही सही परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

“पीरियड्स मिस होने के एक सप्ताह बाद सुबह के पहले मूत्र से प्रेगनेंसी टेस्ट करने से सटीक परिणाम आते हैं।”

और पढ़ें:एचसीजी गर्भावस्था परीक्षण - आमतौर से पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

 

9.प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) में पहले सप्ताह के लक्षण

Pregnancy symptoms week 1 in hindi

Pregnancy ke first week ke lakshan in Hindi, pregnancy ke pehle hafte ke lakshan

अगर महिलाये 1 सप्ताह की प्रेगनंट होती है तो याद रखें, इस प्रारंभिक चरण में, आपके द्वारा अनुभव किए जा रहे लक्षण महिलाओं मे उनके पीरियड्स के लक्षणों से मेल खा सकते है इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • योनि से खून बहना (Vaginal bleeding)

इसमें महिलाओं का शरीर गर्भाशय के अस्तर को बहाता है, क्यूंकि गर्भावस्था के लिए शरीर तैयार होता है।

  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन (Lower back pain and cramps)

गर्भाशय के अस्तर को छोड़ने के लिए, महिलाओं मे गर्भाशय सिकुड़ता है, जिससे पीठ और पेट में दर्द हो सकता है।

  • पेट पे सूजन (Bloated belly)

महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन अवधि से ठीक पहले और दौरान या प्रेगनेंसी में फूला हुआ पेट का अनुभव दे सकते हैं।

  • मुड़ स्विंग (Mood Swing)

शरीर में हार्मोन वृद्धि भी चिड़चिड़ापन पैदा कर सकता है और भावनात्मक तनाव पैदा कर सकते है।

  • सिरदर्द (Headache)

कई महिलाओं को मासिक धर्म से संबंधित माइग्रेन की शिकायत होती है, जो हार्मोन से संबंधित भी हैं।

  • जी मचलना और उल्टियां (Nausea and vomiting)

99 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को पीरयड्स रुकने के आठ सप्ताह के भीतर उल्टियां या जी मचलने जैसी समस्या जरूर होती हैं। अगर आपको प्रेगनेंसी के पहले सप्ताह के शुरुआती लक्षण नज़र आ रहे हैं और आपने अभी तक प्रेगनेंसी टेस्ट नहीं किया हैं? तो हमारी सलाह होगी की आप घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट कर प्रेगनेंसी कन्फर्म करे। आप डॉक्टर के पास जा कर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के द्वारा भी प्रेगनेंसी कन्फर्म कर सकते है।

और पढ़ें:कहीं माँ न बन पाने का कारण मानसिक तनाव तो नहीं

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10.प्रेगनेंसी के लिए खुद को कैसे तैयार करे

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विवाह के बाद हर दंपत्ति अपने जीवन में एक नन्हें शिशु का आगमन चाहते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि जब आप अपने परिवार को आगे बढ़ाने का निर्णय ले लेते हैं, तब आपके लिए गर्भधारण करने के कई पहलुओं को मद्देनज़र रखना काफी ज़रुरी होता है। उसके साथ ही प्रेगनेंसी के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक तरीके से तैयार रखना बहुत जरूरी होता है।

गर्भधारण करने से पहले निम्न बातों पर ध्यान दें :

गर्भनिरोधक लेना बंद करें (Stop using contraception)

अगर आप या आपके साथी किसी भी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको इन गर्भनिरोधक उपायों जैसे - कॉनट्रासेप्टिव पिल्स (contaceptive pills), कंडोम (condoms) आदि का इस्तेमाल बंद करना होगा।

ओवुलेशन का पता करें (Know your Ovulation)

जब आप अपने परिवार को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती हैं, तब इसके लिए सबसे पहले अपने ओवुलेशन पीरियड का ठीक से पता करना आपके लिए ज़रुरी है। अपने ओवुलेशन को ट्रैक करने के लिए ओवुलेशन कैलंडर की मदद ले सकती हैं। [5] इसके अतिरिक्त आप एक कैलेंडर पर अपनी दो मासिक चक्र की तिथियों को अंकित करके भी अपने सबसे अच्छे प्रजनन दिनों का पता लगा सकती हैं।

डॉक्टर से मिलना (Appointment with Doctor)

गर्भधारण करने से पहले भावी माता-पिता को अपने डॉक्टर से अवश्य मिलना चाहिए[6] इस मुलाक़ात में डॉक्टर पति-पत्नी का चिकित्सीय इतिहास के माध्यम से यह जानने का प्रयास करती हैं कि परिवार में किसी को कोई संक्रामक रोग (genetic disease) तो नहीं हुआ है। ऐसा होने की स्थिति में आने वाले शिशु को इस परेशानी से बचाने के हर संभव उपाय किया जाता है। इसके अलावा फिजिकल चेकअप से कपल के स्वस्थ होने की पुष्टि हो जाती है।

अनिवार्य पोषण लेना (Take Healthy Diet)

जब आप गर्भधारण का निर्णय लेती हैं तब उस स्थिति में आपको स्वयं को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना जरूरी है। इसके लिए आपको पूर्ण पोषण युक्त भोजन लेना होगा। [7] संपूर्ण पोषण युक्त भोजन के अलावा डॉक्टर की सलाह से आप आयरन, कैल्शियम सप्लिमेंट भी ले सकती हैं।

स्वस्थ लाइफस्टाइल जीना (Healthy Lifestyle)

स्वस्थ गर्भकाल और स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। तनाव रहित जीवन जीने के साथ ही धूम्रपान व मदिरापन जैसे शौक आपको त्यागने होंगे।

नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

गर्भावस्था के लिए स्वयं को शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से स्वस्थ व मजबूत करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना होगा। [8] इससे न केवल आपका शरीर गर्भभार सह सकने योग्य हो सकेगा बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य में भी मज़बूती आ सकेगी।

और पढ़ें:कैसे करें गर्भावस्था किट का प्रयोग ?

 

11.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh</strong>

एक नारी के जीवन में गर्भवती होना सबसे सुखद एहसास के समान होता है। लेकिन गर्भवस्था के आरंभ को लेकर अनेक प्रश्न हर महिला के मन में होते हैं।

जब अंडाणु और शुक्राणु निषेचित होते हैं तब एक स्त्री गर्भवती हो जाती है। हालाँकि, गर्भधारण की सावधानी के तौर पर गर्भावस्था के निर्णय से पूर्व कई ज़रुरी पहलुओं को ध्यान रखना ज़रुरी होता है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 14 Sep 2020

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संदर्भ/\

  1. NIH. "About Pregnancy". NIH, 31 January 2017.

  2. NCBI."Initial advice to people concerned about delays in conception". NICE Clinical Guidelines, No. 156. National Collaborating Centre for Women’s and Children’s Health (UK). London: Royal College of Obstetricians & Gynaecologists; 2013 Feb.

  3. Mihm M1, Gangooly S, et al. "The normal menstrual cycle in women". Anim Reprod Sci. 2011 Apr;124(3-4):229-36, PMID: 20869180.

  4. Wilcox AJ, Dunson D, Baird DD. “The timing of the fertile window in the menstrual cycle: day specific estimates from a prospective study”. BMJ. 2000;321(7271):1259-1262. PMID: 11082086

  5. Womenhealth.gov. “Ovulation Calculator” womenhealth.gov, 23 Jan 2019

  6. Johnson S, Marriott L et al. “Can apps and calendar methods predict ovulation with accuracy?”Curr Med Res Opin. 2018 Sep;34(9):1587-1594.PMID: 29749274

  7. Noran M. Abu-Ouf, Mohammed M. Jan. “The impact of maternal iron deficiency and iron deficiency anemia on child’s health” Saudi Med J.2015; 36(2): 146–149. PMID: 25719576

  8. Danielle B. Cooper; Lily Yang. “Pregnancy and Exercise”StatPearls [Internet]. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2020 Jan-.

अक्सर पूछे गए प्रश्न

प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे सही उम्र क्या है?

चिकित्सीय दृष्टिकोण से 20-30 वर्ष की उम्र के बीच एक महिला की प्रजनन क्षमता सबसे अधिक होती है। इसलिए 20-30 वर्ष की उम्र गर्भधारण के लिए सबसे सही उम्र मानी जाती है। 30 वर्ष के बाद गर्भावस्था में बांझपन, मिसकैरेज, उच्च रक्तचाप, जन्म दोष, गर्भकालीन मधुमेह, सिजेरियन डिलीवरी और मल्टीपल बर्थ जैसे जोखिम हो सकते हैं।

प्रेग्नेंट होने के लिए सबसे फर्टाइल दिन का पता कैसे करें?

फर्टाइल दिनों की गणना करके, योनि श्राव की जाँच करके और अन्य शारीरिक संकेतों जैसे -पेट के एक तरफ दर्द, स्तनों में भारीपन और कोमलता आदि पर नज़र रखकर, प्रेगेंट होने के लिए सबसे फर्टाइल दिन का पता लगाया जा सकता है।

क्या प्रेग्नेंट होने के लिए कोई बेस्ट सेक्स पोजीशन होता है?

यूँ तो प्रेग्नेंट होने के लिए कोई बेस्ट सेक्स पोजीशन नहीं होता है। मगर, आईयूआई के एक रिसर्च में ये पाया गया है कि जो महिलाएं इनसेमीनेशन (गर्भधान) के बाद कुछ देर तक लेटी रहीं, उनमें गर्भधारण की सफलता दर अधिक है।

प्रेग्नेंट होने के लिए कब तक सेक्स करना चाहिए?

35 वर्ष से कम आयु की महिला को (जिनमें कोई प्रजनन विकार नहीं है) प्रेग्नेंट होने के लिए एक साल तक असुरक्षित सेक्स करना चाहिए। वहीं 35 वर्ष से अधिक आयु की महिला को (जिनमें कोई प्रजनन विकार नहीं है) प्रेग्नेंट होने के लिए छह महीने तक असुरक्षित सम्भोग करना चाहिए। इन दोनों स्थितियों में, अगर कोशिश के बाद भी गर्भ नहीं ठहरता तो कपल को डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सेक्स के कितने दिनों बाद गर्भधारण होता है?

सेक्स के तुरंत बाद महिला गर्भवती नहीं होती है। सेक्स के लगभग 10-15 दिनों के बाद महिला के गर्भधारण की संभावना होती है। सम्भोग के कुछ मिनट या कुछ दिनों बाद फर्टिलाइजेशन हो सकता है मगर इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया में 10-15 दिनों का समय लग सकता है।

एक महिला में अण्डों की संख्या कितनी होती है?

एक महिला 7 लाख से 2 मिलियन अण्डों के साथ पैदा होती है और प्यूबर्टी तक पहुँचने के दौरान हर महीने 11,000 हज़ार अंडे खो देती है। किशोरावस्था के दौरान महिला में 3 से 4 लाख अंडे शेष होते हैं, इनमें से 500 से भी कम अंडे ओव्यूलेट हो पाते हैं। प्यूबर्टी शुरू होते ही महिला हर महीने 1000 अंडे खोने लगती है। 40-50 वर्ष तक यानि मेनोपॉज़ के दौरान महिला अपने ज्यादातर अंडे खो चुकी होती है, जिस कारण गर्भधारण कर पाना मुश्किल हो जाता है।

प्रेग्नेंट होने के लिए प्रजनन क्षमता को कैसे बढ़ाये?

प्रेग्नेंट होने के लिए प्रजनन क्षमता का मजबूत होना बेहद आवश्यक है। प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए नाश्ता स्किप न करें, पौष्टिक आहार खाएं, अधिक कार्बोहाईड्रेट और तला-भुना खाने से बचें, फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करें और साथ ही ज़रुरी सप्लीमेंट्स भी लें। इसके अलावा तनाव रहित जीवन जी कर, शारीरिक रूप से एक्टिव रहकर और संतुलित वज़न रखकर भी प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

क्या अनियमित माहवारी (अनियमित पीरियड्स) के साथ गर्भवती होना संभव है?

इर्रेगुलर पीरियड्स में अधिक सेक्स करने और अपने ओव्युलेशन को ट्रैक करने से गर्भधारण की सम्भावना बढ़ सकती है। इसके अलावा अनियमित माहवारी की स्थिति में गर्भधारण के लिए पौष्टिक भोजन खाएं, नुकसानदायक खाद्य पदार्थों से दूर रहें, वज़न संतुलित रखें और डॉक्टर से परामर्श लें।

क्या पीरियड्स के दौरान प्रेगनेंसी हो सकती है?

जिन महिलाओं का चक्र 28-30 दिन या अधिक लम्बा होता है उनके पीरियड्स के दौरान प्रेग्नेंट होने की संभावना न के बराबर होती है। माहवारी के दौरान ओव्युलेशन की तिथि काफी दूर होती है जिस कारण से प्रेग्नेंट होने की सम्भावना बेहद कम हो जाती है।

क्या व्यायाम करने से गर्भधारण करने में मदद मिलती है?

व्यायाम, तनाव और अनिद्रा को दूर रखने के साथ-साथ वजन संतुलित रखने और प्रसव के लिए शरीर को तैयार करने में भी सहायक है, जिससे गर्भधारण में मदद मिलती है। इसके साथ ही व्यायाम अजन्मे बच्चे के लिए भी लाभदायक होता है। गर्भधारण के लिए आप योग, वॉकिंग, तैराकी और साईक्लिंग कर सकती हैं।

तीस वर्ष के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं?

तीस वर्ष के बाद गर्भावस्था में बांझपन, मिसकैरेज, उच्च रक्तचाप, जन्म दोष, गर्भकालीन मधुमेह, सिजेरियन डिलीवरी और मल्टीपल बर्थ जैसे जोखिम हो सकते हैं।

क्या अधिक वज़न के कारण गर्भधारण में परेशानी आ सकती है?

मोटापे के कारण, ओवुलेशन में रुकावट और पीसीओएस होने का जोखिम होता है जिससे प्रेग्नेंट होने में बाधा आ सकती है। इसके साथ ही अधिक वज़न के कारण प्रजनन उपचारों का असर भी कम हो सकता है और गर्भपात का ख़तरा भी बढ़ जाता है।

क्या पहले गर्भपात का प्रभाव दूसरी प्रेगनेंसी पर पड़ सकता है?

अगर महिला के गर्भपात का कारण, गर्भाशय में परेशानी या कोई जटिलता न हो तो इसका प्रभाव दूसरी प्रेगनेंसी पर नहीं पड़ सकता है। वहीं अगर गर्भपात के वक़्त गर्भ में कुछ अंश शेष रह गए हों या गर्भाशय में चोट लग गयी हो तो इसका प्रभाव दूसरी प्रेगनेंसी पर पड़ सकता है। इसके अलावा गर्भपात के बाद गर्भाशय ग्रीवा में आई कमज़ोरी भी दूसरी प्रेगनेंसी को प्रभावित कर सकती है।

क्या मेनोपॉज़ के बाद प्रेगनेंट होना संभव है?

मेनोपॉज़ से पहले दो स्टेज आते हैं प्री-मेनोपॉज़ और पोस्ट-मेनोपॉज़! प्री-मेनोपॉज़ के स्टेज में अनियमित पीरियड्स के बावजूद ओवुलेशन हो सकता है जिस कारण गर्भधारण संभव है। हालाँकि, पोस्ट-मेनोपॉज़ (जब 12 महीने तक महिला को पीरियड्स नहीं आएं हों) में ओवुलेशन ना होने के कारण गर्भधारण नहीं किया जा सकता।

ओवुलेशन क्या है ?

ओवुलेशन एक प्रक्रिया है जो आमतौर पर हर मासिक चक्र में एक बार होती है जब हार्मोन्स में बदलाव ओवरी को अंडा रिलीज करने के लिए उत्तेजित करते हैं। मासिक चक्र के पहले भाग में ओवरी में मौजूद कोई एक अंडा मैच्योर होता है, जो ओवुलेट करता है। ओवुलेशन के दौरान अगर स्पर्म अंडे को निषेचित करता है तब प्रेगनेंसी हो सकती है।

ओवुलेशन कब होता है?

ओवुलेशन पैटर्न महिला दर महिला और मासिक चक्र के अनुसार बदल सकता है। हालाँकि, आमतौर पर ओवुलेशन पीरियड्स के 12 से 16 दिनों पहले होता है।

क्या ओवुलेशन मासिक चक्र के 14वें दिन ही होता है?

यह एक मिथ है। ओवुलेशन का समय कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे - मासिक चक्र की अवधि, हार्मोन का स्तर आदि। इसलिए, यह ज़रुरी नहीं है कि मासिक चक्र के 14वें दिन ही ओवुलेशन हो।

क्या एक मासिक चक्र में एक बार ही ओवुलेशन होता है?

यूँ तो एक मासिक चक्र में एक बार ही ओवुलेशन होता है। हालाँकि, एक ही वक़्त में आपकी ओवरी से दो या दो से अधिक अंडे रिलीज हो सकते हैं। अगर दोनों ही अंडे फर्टिलाइज हो जाते हैं तो जुड़वां बच्चों के जन्म की संभावना हो सकती है।

अगर मासिक चक्र की अवधि कम है तो ओवुलेशन कब हो सकता है?

कम अवधि का मासिक चक्र 21 दिनों से कम का माना जाता है। आमतौर पर, सामान्य मासिक चक्र में ओवुलेशन पीरियड्स से 10-16 दिनों पहले होता है, तो कम अवधि के मासिक चक्र में ओवुलेशन संभवतः 7-10 दिनों पहले हो सकता है।

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