गर्भावस्था के चौथे महीने की सम्पूर्ण जानकारी

All about 4 month of pregnancy in hindi

Pregnency ke chauthe mahine ki sampurn jankari in hindi


एक नज़र

  • गर्भवस्था के चौथे सप्ताह से सातवें सप्ताह से, स्तनों के आकार और भारीपन में वृद्धि होने लगती है।
  • गर्भावस्था के चौथे महीने से एस्ट्रोजेन हारमोन में वृद्धि होने के साथ ही गर्भवती महिला के मसूड़े भी नरम हो जाते हैं।
  • कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के चौथे माह में नाक से रक्त्स्त्राव या नकसीर आना भी महसूस हो सकता है।
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Introduction

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गर्भावस्था को मेडिकल दृष्टि से तीन भागों में बांटा जाता है, जिन्हें तिमाही कहा जाता है। हर तिमाही तीन महीनों का एक समूह होती है। इस तरह गर्भावस्था 3 तिमाही में विभाजित होती है

इस रूप में पहली तिमाही गर्भावस्था के आरंभ होने के साथ पहले महीने से शुरू होकर तीसरे महीने तक गिनी जाती है।

इसके बाद जब गर्भवती महिला गर्भवस्था के चौथे महीने में प्रवेश करती है तो तकनीकी भाषा में इसे दूसरी तिमाही की शुरुआत माना जाता है।

दूसरी तिमाही (second trimester) में गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे माह के समूह को गिना जाता है। इस लेख में गर्भावस्था के चौथे महीने की सम्पूर्ण जानकारी दी जा रही है।

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इस लेख़ में

  1. 1.गर्भावस्था के चौथे महीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?
  2. 2.गर्भावस्था के चौथे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?
  3. 3.गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला क्या शारीरिक परिवर्तन हो सकते हैं?
  4. 4.गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?
  5. 5.गर्भावस्था के चौथे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?
  6. 6.गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स कब और कैसे करें?
  7. 7.गर्भावस्था के चौथे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?
  8. 8.गर्भावस्था के चौथे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?
  9. 9.गर्भावस्था के चौथे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से हो
  10. 10.गर्भावस्था के चौथे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?
  11. 11.गर्भावस्था के चौथे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?
  12. 12.प्रेग्नेंसी के चौथे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?
 

गर्भावस्था के चौथे महीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?

What are the symptoms of pregnancy in the fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke chauthe mahine ke Lakshan kya ho sakte hain in hindi

गर्भवस्था का चौथा महीना, 13वें से 16वें हफ्ते से शुरू हो जाता है।

आइये जानते हैं प्रेगनेंसी के 4 महीने में गर्भावस्था ले लक्षण क्या हो सकते हैं!।

गर्भावस्था के चौथे महीने के लक्षण निम्न हो सकते हैं : -

1. स्तनों के आकार और भारीपन में वृद्धि (Increase in size and sensitivity of breast in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के चौथे सप्ताह से सातवें सप्ताह से, स्तनों के आकार और भारीपन में वृद्धि होने लगती है।

इस समय से स्तन, स्तनपान के लिए तैयार होने लगते हैं।

गर्भावस्था के चौथे सप्ताह से स्तनों में कोलोस्ट्रम (colostrum) का निर्माण शुरू हो जाता है, जो प्रसव के बाद स्तन के दूध के रूप में शिशु के काम आता है।

इसके अतिरिक्त एस्ट्रोजेन (estrogen) और प्रोजेस्ट्रोन (progestrone) हार्मोन के परिवर्तन होने के कारण भी स्तनों के आकार और एहसास में परिवर्तन होता है।

2. कब्ज़ में वृद्धि (Repetitive constipation in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के चौथे से सातवें सप्ताह से कब्ज़ होना एक सामान्य बात हो जाती है।

इसका एक तो मुख्य कारण प्रेग्नेंसी हार्मोन यानि प्रेजेस्ट्रोन हार्मोन का निरंतर बढ़ना है, जिसके कारण गर्भाशय का आकार भी बढ़ने लगता है।

इसके अतिरिक्त प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के कारण ही शरीर में पहुंचा हुआ भोजन पाचन तंत्र में देर से पहुंचता है।

इस वजह से मलाशय में पचा हुआ और गर्भाशय में शिशु को पोषण देने के बाद बचा हुआ भोजन भी वहाँ पहुंचता है।

इस कारण मलाशय पर भार अधिक हो जाता है और कब्ज़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

शिशु के आकार बढ़ने के कारण गर्भाशय का बढ़ा हुआ आकार भी मलाशय का मार्ग संकरा कर देता है और कब्ज़ का कारण बन जाता है।

3. योनि स्त्राव में वृद्धि (Increased vaginal discharge in fourth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से महिला शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन के स्तर में वृद्धि होने के कारण, योनि से सफ़ेद रंग का स्त्राव होता है।

गर्भावस्था के 4 महीने से योनि स्त्राव में वृद्धि होना एक आम बात है। इसका कारण भी एस्ट्रोजेन हार्मोन के स्तर में वृद्धि होना माना जाता है।

इसके साथ ही गर्भावस्था के चौथे महीने में श्लेष्मा झिल्ली (mucous membranes) में रक्त प्रवाह अधिक होता है , इसलिए भी योनि से स्त्राव में अधिकता हो जाती है।

4. पैरों की वैरिकोज वेंस (Varicose Veins in legs in fourth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से वैरिकोज वेंस का पैरों में बनना उम्र के साथ एक सामान्य लक्षण माना जाता है।

लेकिन गर्भवस्था के चौथे माह में पैरों में वैरिकोज वेंस का बनना, दरअसल, शरीर के रक्त का, पैरों की ओर बढ़ने के कारण होता है और योनि की तरफ इसका बहाव कम होता है।

इसके अतिरिक्त गर्भाशय के आकार और भार के बढ़ने के कारण पैरों पर भी दबाव बढ़ने लगता है।

5. कमर दर्द (Backache in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था में कमर के ऊपर और निचले हिस्से में दर्द और भारीपन महसूस होता है।

कभी-कभी यह दर्द पाँव और कूल्हों तक बढ़ जाता है।

आमतौर पर यह दर्द दूसरी तिमाही या गर्भावस्था के चौथे माह में कमर के दर्द के रूप में महसूस होने लगता है, जो समय के साथ बढ़ता जाता है।

इसका कारण गर्भवस्था में एक हार्मोन रिलेक्सिन (relaxin) का उत्पन्न होना है।

इस हार्मोन के कारण ही पेल्विस के जोड़ खुलने या ढीले होने शुरू हो जाते हैं, जिससे प्रसव के समय शिशु के गर्भ से बाहर आने का रास्ता सरलता से बन जाता है।

इसके अतिरिक्त गर्भाशया का आकार बढ़ने से भी कमर पर भार अधिक होता है, जिसके कारण दर्द हो सकता है।

6. मसूड़ों से खून (Bleeding gums in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे महीने से एस्ट्रोजेन हारमोन में वृद्धि होने के साथ ही गर्भवती महिला के मसूड़े भी नरम हो जाते हैं।

इसी कारण गर्भावस्था के चौथे माह में मसूड़ों से खून आना एक सामान्य बात होती है।

इसके अलावा लार का कम बनना भी इस परेशानी का कारण हो सकता है।

जो महिलाएं गर्भवस्था की पहली तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस अधिक महसूस करती हैं, उन्हें भी बाद में मसूड़ों की सूजन का सामना करना पड़ता है।

7. पेशाब में वृद्धि (Increase in urination in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भस्थ शिशु के आकार में वृद्धि होने के कारण मूत्राशय पर दबाव बढ़ जाता है।

इस कारण गर्भावस्था के चौथे महीने में पेशाब में वृद्धि हो सकती है और महिलाओं को बार-बार पेशाब जाना पड़ सकता है।

8. सांस में तकलीफ (Difficulty in breathing in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे माह में शिशु का आकार और इसके परिणामस्वरूप गर्भाशय के आकार में वृद्धि होना एक सामान्य बात है।

इसके परिणामस्वरूप गर्भवती महिला के सम्पूर्ण शरीर के विभिन्न भागों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने लगता है।

इसी कारण कुछ महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है।

9. स्किन में रूखापन (Itching in skin in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला की गर्भविधि बढ़ने के कारण स्किन में रूखापन भी बढ़ने लगता है।

ऐसा शरीर में प्रेग्नेंसी हार्मोन में वृद्धि होने के कारण होता है।

इस समय अच्छा यही होगा कि किसी अच्छे मोश्चराइजर का प्रयोग किया जाये।

10. स्तन के निप्पल के रंग में परिवर्तन (Changes in nipple colours in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे माह में स्तन के निप्पल के रंग और आकार में परिवर्तन आने लगता है।

इस समय निप्पल का रंग गहरा और स्तन कि नसें भी गहरी होकर प्रत्यक्ष दिखाई देने लगती हैं।

11. नाक से रक्त्स्त्राव (Nasal bleeding in fourth month of pregnancy in hindi)

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के चौथे माह में नाक से रक्त्स्त्राव या नकसीर आना भी महसूस हो सकता है।

इस स्थिति का कारण गर्भवस्था में शरीर द्वारा रक्त के अधिक मात्रा में निर्माण किया जाना होता है।

लेकिन अगर यह अधिक मात्रा में हो तब तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

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गर्भावस्था के चौथे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?

Baby grow during fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke chauthe mahine mein baby ka vikas kaise hota hai in hindi

गर्भावस्था के चौथे महीने तक आते हुए शिशु का विकास अग्रिम अवस्था में पहुँच जाता है।

उसके विकास की प्रक्रिया और शारीरिक विकास के चरण किस तरह हो सकता है यह नीचे बताया गया है।

प्रेगनेंसी के चौथे महीने में बच्चे का विकास निम्न रूप से हो सकता है : -

1. बाहरी प्रकाश के प्रति संवेदनशील (Sensitive to external light in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के चौथे माह में शिशु बाहरी प्रकाश के प्रति संवेदनशील होता है।

जब भी गर्भस्थ शिशु को बाहरी प्रकाश महसूस होता है, वह अपनी बंद आँखों को इधर-उधर घुमाना शुरू कर देता है।

2. अंगूठा चूसना (Sucking thumb in fourth month of pregnancy in hindi)

अधिकतर शिशु अपना अंगूठा चूसते दिखाई देते हैं।

लगभग सभी शिशु गर्भवस्था के चौथे माह से ही अंगूठा चूसने की आदत शुरू कर देते हैं।

3. हृदय काम करना शुरू करता है (Heart start work in fourth month of pregnancy in hindi)

यह वह समय है जब शिशु की हृदय की धड़कन को स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है।

गर्भावस्था के चौथे महीने से हृदय रक्त पंप करने का काम है और एक दिन में लगभग चौथाई गैलन या फिर चार कप के बराबर रक्त को पंप करने लगता है।

4. शारीरिक परिवर्तन (Bodily Changes in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे माह में शिशु की लंबाई और वजन में वृद्धि हो जाती है।

इस समय गर्भ में शिशु की लंबाई 4-5 इंच तक और उसका वजन 3-4 औंस अथार्थ 113 ग्राम के लगभग हो जाता है।

इसके साथ ही शिशु की पीठ की नसें और मांसपेशियों में मज़बूती आ जाती है जिसके कारण वह अपने सिर और गर्दन को पहले की तुलना में अधिक सीधा कर सकता है।

गर्भ के चौथे महीने में महिला के आने पर उसके गर्भ का शिशु चेहरे के भावों को व्यक्त करने लगता है।

इसमें उसके द्वारा ली जाने वाली जंवाहियाँ और प्रकाश के आने पर बंद आँखों को धीरे-धीरे घुमाना भी शामिल है।

5. शिशु की स्किन (Baby’s skin is transparent in fourth month of pregnancy in hindi)

जब गर्भ का शिशु चौथे माह की गर्भावस्था में प्रवेश करता है तब उसके ऊपर स्किन आ जाती है लेकिन यह स्किन अभी पारदर्शी होती है।

इस समय उसकी स्किन में किसी प्रकार का फैट नहीं होता है और अल्ट्रासाउंड से शिशु की नसें भी देखी जा सकती हैं।

6. आपकी आवाज़ सुनना (Can hear the voice in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के चौथे माह में शिशु के कान विकसित हो चुके हैं और इस कारण वह गर्भवती महिला के आसपास होने वाली आवाज़ों को सुन सकता है।

इसलिए यह भी कहा जाता है कि आप बच्चे को जो कुछ सिखाना चाहते हैं तो उसे इस समय सुना सकते हैं।

इसके अलावा गर्भ में शिशु अपनी हलचल के रूप में लात मारना शुरू कर देता है।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला क्या शारीरिक परिवर्तन हो सकते हैं?

What physical changes can occur in the fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Fourth month mein kya physical changes ho sakte hain in hindi

गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला के शरीर में विभिन्न प्रकार के बदलाव आने शुरू हो जाते हैं।

गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला में होने वाले शारीरिक परिवर्तन निम्न हो सकते हैं : -

1. पेट का बढ़ता आकार (Increasing size of belly in the fourth month of pregnancy in hindi)

जब महिला गर्भकाल की दूसरी तिमाही अथार्थ चौथे महीने में प्रवेश करती है तब गर्भस्थ शिशु का आकार और परिणामस्वरूप गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है।

इस कारण गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला के पेट का आकार बढ़ जाता है।

2. पाचन संबंधी परेशानियाँ (Digestive issues in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल के चौथे महीने में बढ़ता हुआ गर्भाशय पाचन क्रिया को धीमा और कमजोर कर देती है।

इसके साथ ही शरीर में प्रेग्नेंसी हार्मोन का बनना भी बहुत अधिक हो जाता है।

इन सबके कारण गर्भवती महिला को कब्ज़ और सीने में जलन की शिकायत अधिक होने लगती हैं।

3. नाक संबंधी परेशानियाँ (Nasal issues in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे महीने में एस्ट्रोजेन हार्मोन का निर्माण अधिक होने के कारण कुछ महिलाओं की नाक में सूजन आने लगती है।

इसके कारण नाक बंद होना या नाक से खून आने जैसी परेशानियाँ भी हो सकती हैं।

4. स्किन में परिवर्तन (Changes in skin in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला के शरीर में एस्ट्रोजेन या प्रेग्नेंसी हार्मोन का अधिक निर्माण होने के कारण स्किन पर भी इसका असर दिखाई देता है।

जिन महिलाओं की स्किन पर पहले से झाइयाँ और तिल होते हैं, वो इस समय अधिक गहरे हो जाते हैं।

सनस्क्रीन क्रीम के उपयोग से इस समस्या को हल करने का प्रयास किया जा सकता है।

5. शरीर में दर्द (Pain parts of the body in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भाशय का बढ़ता आकार, महिला के शरीर में आस-पास के अंगों पर भी प्रभाव डालता है।

इस कारण गर्भवती महिला को गर्भवस्था के 4 महीने में शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द महसूस हो सकता है।

ऐसे में महिला अपनी पीठ, जांघों,पेट के निचले हिस्से और कमर में लंबे समय तक बने रहने वाला दर्द महसूस कर सकती है।

6. स्तनों का आकार (Increasing size in the breast in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के समय शरीर में विभिन्न प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं।

इन्हें के कारण स्तनों के आकार में पहले से अधिक वृद्धि हो जाती है।

इसके साथ स्तन पहले से अधिक संवेदनशील और भारी महसूस होने लगते हैं।

इसका कारण स्तनों में स्तनपान करवाने वाली ग्रंथियों का निर्माण व विकास होना है।

7. हाथ-पैरों में सनसनी (Sensational feelings in the fourth month of pregnancy in hindi)

कुछ महिलाओं को गर्भवस्था के 4 महीने में हाथों और पैरों में सनसनी जैसा महसूस होता है।

कुछ महिलाओं को यह अनुभव कलाईयों के पास अधिक महसूस होता है, जो कुछ समय बाद या तो अपने आप ठीक हो जाता है या फिर इसके लिए सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।

8. मूत्राशय पर दबाव (Increasing pressure on the bladder in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल का समय बढ़ने के साथ-साथ महिला के मूत्राशय पर दबाव बढ़ता जाता है।

ऐसे में बार-बार पेशाब के लिए जाना या/और थोड़ा-थोड़ा करके पेशाब का रिसना शुरू हो सकता है।

कुछ महिलाओं को ऐसे में यूरिन इन्फेक्शन जैसी परेशानी भी हो सकती है।

9. वैरिकोज वेंस (Varicose veins in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भाशय की चौथी अवस्था में पैरों की ओर रक्त का प्रवाह अधिक होने के कारण पैरों की नसें थोड़ी मोटी हो सकती हैं।

ऐसे में कुछ महिलाओं को वैरिकोज वेंस की परेशानी भी हो सकती है।

लेकिन यह परेशानी प्रसव के बाद अपने आप ठीक भी हो सकती है।

10. योनि स्त्राव (Vaginal Discharge in the fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था में होने वाले परिवर्तनों में मुख्य है हार्मोनल परिवर्तन जो शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं।

ऐसा ही एक प्रभाव है योनि स्त्राव का होना।

गर्भ के चार माह बीत जाने के बाद यह स्त्राव पहले से अधिक हो सकता है।

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गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?

Diet Plan in fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke chauthe mahine mein lady ko kya khana chahiye in hindi

गर्भवस्था के चौथे महीने में महिला का आहार बहुत महत्व रखता है।

इस समय महिला के गर्भ में पल रहा शिशु अपने मूल आकार में आने का प्रयत्न कर रहा होता है, इसलिए पोषण की दृष्टि से यह समय गर्भवती माँ-शिशु दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

इसलिए गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए, इसका निर्णय लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी के 4 महीने में अपने आहार में शामिल करें निम्न पोषक तत्व : -

  • प्रोटीन (Protein Diet in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था में प्रोटीन की आवश्यकता कोशिकाओं के निर्माण के लिए मानी जाती है।

इसलिए गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला को प्रोटीन खाना चाहिए, जिससे गर्भवती माँ का स्वास्थ्य व गर्भस्थ शिशु का निर्माण व विकास सही ढंग से हो सके।

शाकाहारी प्रोटीन के लिए सोया और इससे बनी चीज़ें, मेवे, दालें, हर प्रकार की फलियाँ और मटर, मूँगफली, काबुली चना आदि शामिल की जा सकती हैं।

इसके अलावा हर प्रकार के वसा रहित डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही, पनीर आदि भी प्रोटीन का अच्छा सोर्स माने जाते हैं।

यदि महिला मांसाहारी भोजन ले सकती हैं तब चिकन, मछ्ली, अंडे या नरम मांस का सेवन कर सकती हैं।

लेकिन वह समुद्री भोजन जिसमें पारे की मात्रा अधिक हो नहीं लेना चाहिए।

  • फाइबर (Fiber diet in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भाशय के आकार बढ़ने के कारण गर्भवस्था के चौथे महीने में कब्ज़ होना एक सामान्य बात हो जाती है।

इसलिए इस समय गर्भवती को चौथे महीने में फाइबर युक्त भोजन करना बहुत जरूरी होता है।

फाइबर युक्त भोजन में दालें, पालक, बीन्स, हरी और पत्तेदार सब्जी, साबुत अनाज और ओट्स या जई को मुख्य रूप से शामिल किया जा सकता है।

सादे आटे के स्थान पर मल्टी-ग्रेन आटे को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इस आटे में बाजरा, गेहूं, मक्का, जौ, जई आदि का मिश्रण शामिल किया जाता है।

इससे गर्भवती महिला को बिना अतिरिक्त वसा या चिकनाई के शुद्ध पोषण प्राप्त होता है।

इसके साथ ही इससे बने भोजन से फाइबर के साथ आयरन, विटामिन बी भी सरलता से मिल जाते हैं।

मल्टी ग्रेन, को रोटी, पास्ता और ब्राउन राइस आदि से प्राप्त किया जा सकता है।

  • फल (Fruits in fourth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से फलों को विटामिन के साथ ही अच्छी मात्रा में फाइबर का स्त्रोत तो माना ही जाता है, साथ ही फल शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करते हैं।

गर्भावस्था के चौथे माह में फलों के सेवन से गर्भवती को न केवल ऐसिडिटी और गैस बनने की शिकायत दूर होती है, बल्कि पोषण भी मिलता है।

इस समय सेब, केला, संतरा, खूंबानी, अंगूर में खनिज और वो सभी ज़रूरी विटामिन होते हैं, जो गर्भवस्था एक चौथे माह में गर्भवती के लिए जरूरी होते हैं।

  • कैल्शियम (Calcium Products in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था का चौथा महीना वह समय होता है जब गर्भ में विकसित होने वाला शिशु सर्वांगीण विकास की ओर बढ़ रहा होता है।

इसलिए इस समय अधिकतर डॉक्टर गर्भवती महिला को कैल्शियम के सेवन का सुझाव भी देते हैं।

कैल्शियम और विटामिन डी का मिश्रण शिशु की हड्डियों को मज़बूती देने के लिए बहुत आवश्यक होता है।

इसलिए रोज़ कम से कम एक लीटर दूध और दूध से बने प्रोडक्ट का सेवन करना अच्छा रहता है।

अपने रोज़ के खाने में दही और पनीर को शामिल करने से कम से कम 200 ग्राम कैल्शियम और विटामिन डी की पूर्ति की जा सकती है।

  • सब्जियाँ (Vegetables in fourth month of pregnancy in hindi)

ताज़ी और हरी सब्जियों के सेवन से गर्भवती महिला को सभी प्रकार के अनिवार्य विटामिन, खनिज और लवण सरलता से मिल जाते हैं।

इसलिए गर्भावस्था के चौथे माह में सब्जियाँ खाने के लिए आप हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ ही गोभी, गाजर, पालक, मेथी, बथुआ अपने दैनिक भोजन में शामिल कर सकती हैं।

इसके अलावा टमाटर का सलाद विटामिन सी और एंटीओक्सीडेंट्स की कमी पूरे करने के लिए पर्याप्त रहता है।

  • मेवे और सूखे मेवे (Nuts and dried fruits in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला का गर्भावस्था के चौथे माह में मेवे और सूखे मेवे को शामिल करने से अतिरिक्त फाइबर, जरूरी फ़ैटि एसिड, आयरन और कैल्शियम की पूर्ति हो जाती है।

इसके लिए काजू, बादाम और अखरोट के अलावा खजूर, किशमिश, अंजीर का सेवन किया जा सकता है जो खनिज लवण और सभी ज़रूरी विटामिन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं।

  • फ़ैटि एसिड (Essential fatty acids in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को फ़ैटि एसिड की जरूरत हर माह होती है।

इसकी कमी से समय पूर्व प्रसव, जन्म के समय शिशु का कम वजन और शिशु में नर्वस सिस्टम संबंधी कोई परेशानी हो सकती है।

इसलिए गर्भावस्था के चौथे माह में फ़ैटि एसिड का सेवन करना नितांत आवश्यक होता है।

इसके लिए महिला अपने भोजन में शाकाहारी रूप में ऑलिव ऑयल और मेवों को शामिल कर सकती हैं।

अगर मांसाहारी भोजन कर सकती हैं तब ताज़े पानी की मछ्ली, टूना और सेलमन मछ्ली का सेवन किया जा सकता है।

इससे फ़ैटि एसिड के साथ ओमेगा 3, 6, 9 की पूर्ति भी हो जाती है।

इसके अलावा यदि महिला मांसाहारी भोजन करना चाहती है तो इस बात को सुनिश्चित करें कि वह अच्छी तरह से पकाया गया हो, खाना कच्चा या अधपका नहीं होना चाहिए।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?

What Foods to avoid in the fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Fourth month mein kya nahin khana chahiye in hindi

जब महिला गर्भकाल के चौथे पड़ाव पर पहुँचती है, तब महिला के मुंह का स्वाद कुछ अच्छा होने लगता है और इस समय उसके लिए कुछ खाना-पीना थोड़ा आसान हो जाता है।

हालांकि, कुछ महिलाएं इस समय चॉकलेट, आइसक्रीम, पिज्जा और अचार आदि अधिक खाना पसंद करती हैं।

लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से ऐसा करना उचित नहीं है, इसलिए अपने खाने की लालसा को पौष्टिक भोजन से पूरा करना ही अधिक उपयुक्त रहता है।

गर्भावस्था में कई खाद्य पदार्थों से परहेज करना उचित माना जाता है।

आइये देखते हैं प्रेगनेंसी में कौन-से खाद्य पदार्थ से दूर रहना चाहिए।

निम्न खाद्य पदार्थों से गर्भवस्था के चौथे महीने में परहेज करें : -

  • जंक और स्ट्रीट फूड (Junk food and street food in fourth month of pregnancy in hindi)

किसी भी महिला के लिए जंक फूड और स्ट्रीट फूड को देखकर न खाने का लालच छोड़ना लगभग असंभव है, लेकिन गर्भावस्था के चौथे माह में जंक और स्ट्रीट फूड के लिए सख्ती से न कहा जाता है।

इस प्रकार के भोजन को खाने से डायरिया, फूड पोइजनिंग आदि के होने का डर रहता है।

  • पारे वाली मछ्ली (Varieties of fishes containing mercury in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे माह में पारे वाली मछ्ली को खाने से पूरी तरह से परहेज़ करना चाहिए।

इसमें से किसी भी मछ्ली के खाने से शिशु के मानसिक रूप से विकलांग होने का भय होता है।

  • कच्चा या अधपका मांसाहार (Raw or uncooked meat in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे माह में मांसाहार खाने की शौकीन महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे केवल अच्छी तरह से पका हुआ भोजन ही करें।

कच्चे या अधपके मांसाहार, अंडे, मछ्ली, चिकन या रेडी तो इट मांसाहारी फूड को गर्भावस्था के चौथे माह में पूरी तरह से परहेज़ करना चाहिए।

  • हाई कैलोरीयुक्त भोजन (High calories in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था में ऐसा भोजन जिसमें पोषण से अधिक कैलोरी हो, उसे खाने से परहेज करना चाहिए।

कुकीज़, केक, चिप्स, बिस्किट आदि में कैलोरी अधिक होती है जिससे केवल शारीरिक वजन ही बढ़ेगा।

ऐसे में प्रेगनेंसी के 4 महीने में ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए।

  • अधिक मात्रा में ड्राई फ्रूट (Avoid overeating dry fruits in fourth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से ड्राई फ्रूट गर्भवस्था में एनर्जी और पोषण देते हैं।

लेकिन अगर इन्हें सीमा से अधिक मात्रा में खाया जाये तब इनका अधिक सेवन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसके अतिरिक्त धूम्रपान और मदिरापन न करना भी गर्भकाल में हितकारी होता है।

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गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स कब और कैसे करें?

How and when should I do sex in fourth month of pregnancy in hindi

kya pregnancy ke Fourth month mein sex kar sakte hain in hindi

गर्भवस्था का चौथा महीना वह समय है जब महिला के पेट का आकार और गर्भाशय में शिशु का आकार दोनों बढ़ चुके होते हैं।

ऐसे में सेक्स करने का निर्णय लेने से पहले निम्न प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करें और तभी गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं संबंधी निर्णय लें :

1. क्या गर्भवती महिला का पहले गर्भपात हुआ है?

2. क्या महिला को पहले गर्भ में या वर्तमान गर्भ को धारण करने में कठिनाई हुई थी?

3. क्या गर्भधारण करने के बाद डॉक्टर ने सेक्स करने से मना किया है?

4. क्या गर्भ में जुड़वां या अधिक शिशु हैं?

5. क्या गर्भवती होने के बाद सेक्स करते समय पुरुष को लिंग प्रवेश करवाने में कठिनाई हुई थी?

अगर इनमें से अधिकतर प्रश्नों के उत्तर ‘हाँ’ हैं तब गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स करना नहीं चाहिए।

इसके अलावा गर्भावस्था के चौथे महीने तक आपको डॉक्टर ने सेक्स करने से मना नहीं किया है, तो इस दौरान सेक्स करना आपके लिए सुरक्षित माना जा सकता है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स कैसे करें : -

अगर गर्भधारण करने के बाद गर्भवती महिला को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है तब उन्हें सेक्स करने के लिए किस पोजीशन को अपनाना सही रहेगा, इसका उत्तर थोड़ा कठिन हो जाता है।

गर्भवती स्त्री के दूसरे तिमाही में प्रवेश करने के बाद महिला का प्रत्येक अनुभव और एहसास पिछले से अलग हो सकता है।

इसलिए गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स किस प्रकार कर सकते है का उत्तर इतना सरल नहीं है।

फिर भी इस समय सेक्स के लिए निम्न में से जो भी पोजीशन सही लगे, सेक्स करने के लिए अपना सकते हैं: ।

1. वुमन ऑन टॉप (Women in top in sex during fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था में सेक्स के लिए यह पोजीशन पहली और दूसरी तिमाही के हर माह में उपयुक्त मानी जाती है।

इसलिए गर्भावस्था के चौथे महीने में सेक्स के लिए वुमन ऑन टॉप की पोजीशन अपनाने से गर्भवती महिला के पेट और गर्भाशय पर भार नहीं पड़ता है।

2. साइड पोजीशन (Side position during fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के 4 महीने में सेक्स करने के लिए साइड पोजीशन भी ठीक रहती है।

इसमें दोनों साथी एक दूसरे की ओर मुंह करके या फिर महिला अपने पुरुष साथी की ओर पीठ करके लेट सकती हैं।

इसमें महिला के पेट को पलंग का सहारा मिल जाता है।

3. मिशनरी पोजीशन (Missionary position during fourth month of pregnancy in hindi)

इसमें पुरुष साथी इस बात का ध्यान रखें कि उनका वजन गर्भवती महिला के पेट पर न आए।

गर्भावस्था के चौथे माह में संभोग करना चाहिए या नहीं इसका निर्णय डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?

When should I seek an appointment with a doctor in the fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Fourth mahine mein doctor se kab milna chahiye in hindi

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती स्त्री की डॉक्टर से पहली मुलाकात 4-१3 सप्ताह और दूसरी विजिट 14-17 सप्ताह के बीच में होती है।

अगर इस वक़्त तक आपकी दूसरी विजिट होने वाली है तब इस समय आपकी डॉक्टर आपके बच्चे के हार्ट रेट (heart rate) की जांच करने के लिए आपके गर्भाशय के ऊपर, एक डॉपलर (doppler) का इस्तेमाल करेंगी।

जिससे आपको अपने बच्चे के दिल की धड़कन सुन सकती हैं।

इसके साथ ही आपके खान-पान को लेकर डॉक्टर आपको कुछ सलाह दे सकती हैं।

आपके द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर, वे एक विशिष्ट आहार (specific diet) और सप्लीमेंट्स (supplements) और अगर आवश्यक हो तो किसी भी दवा का सुझाव दे सकती हैं।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?

Appointment with doctor in Fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Fourth mahine mein kin situations mein doctor se turant milna chahiye in hindi

गर्भवती महिला को कभी-कभी कुछ ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जब उन्हें डॉक्टर के मिलने के निर्धारित समय से पहले ही मिलने की ज़रूरत हो सकती है।

निम्न स्थितियों में प्रेगनेंसी के चौथे महीने में डॉक्टर से जल्द-से-जल्द मिलें : -

1. हर समय बिना किसी विशेष कारण के सिर में दर्द का बने रहना;

2. आँखों में अचानक धुंधलापन महसूस होना;

3. अचानक बुख़ार आना और लंबे समय तक तेज़ बने रहना;

4. योनि से अचानक सफ़ेद रंग का या पानी जैसा स्त्राव का होना’

5. बिना किसी कारण के पेट में तेज़ दर्द और/अथवा ऐंठन जैसा महसूस होना;

6. योनि से रक्त स्त्राव का होना;

7. अधिक समय तक सांस लेने में तकलीफ़ होना;

8. प्रसव होने के संकेत मिलना;

9. बहुत अधिक उल्टी और दस्त या किसी भी एक परेशानी का होना;

10. लंबे समय तक कब्ज़ का बने रहना;

11. अचानक बेहोशी आना;

अगर गर्भावस्था के चौथे माह में महिला को इनमें से कोई एक या एक से अधिक लक्षण दिखाई दे तब तुरंत डॉक्टर से मिल लेना चाहिए।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से होते हैं?

Ultrasound and other tests in fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Fourth month mein kis tarah ke tests aur ultrasound ho sakte hain in hindi

गर्भावस्था के चौथे माह में अलग-अलग ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के अलावा विभिन्न प्रकार के परीक्षण हो सकते हैं।

सामान्य अवस्था में किए जाने वाले परीक्षण हैं : -

1. गर्भवती महिला के शारीरिक वजन की जांच करना;

2. महिला के रक्तचाप की जांच करना;

3. महिला के ब्लड टेस्ट और यूरिन के द्वारा उसके मधुमेह की जांच करना;

4. गर्भ के शिशु की हृदय की धड़कन की जांच करना;

इसके अतिरिक्त गर्भावस्था के चौथे महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण निम्न भी हो सकते हैं : -

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound in fourth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से डॉक्टर, अगर किसी तरह की परेशानी न हो, तब गर्भवस्था के चौथे माह में अल्ट्रासाउंड को अंत में या 16 से 20वें हफ्ते में करवाने का निर्णय लेते हैं।

इसमें ध्वनि तरंगों की मदद से शिशु की तस्वीर बनाई जाती है, जिसे मशीन के स्क्रीन पर देखा जा सकता है।

इस स्कैन का उद्देश्य होता है, गर्भस्थ शिशु की वर्तमान आयु और पता लगाना और साथ ही यह भी पता लगाना कि कहीं किसी प्रकार की कोई विकार या विकृति तो नहीं है।

इस अल्ट्रासाउंड से गर्भनाल की सही स्थिति तो पता लगती ही है और साथ ही अगर गर्भ में जुड़वां बच्चे हों, तब वह भी पता लग जाता है।

  • अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट (Alpha-fetoprotein -AFP test in fourth month of pregnancy in hindi)

इस टेस्ट को भी चौथे महीने के अंत यानि 15-16 हफ्ते में किया जाता है।

इस टेस्ट के द्वारा, गर्भस्थ शिशु में किसी प्रकार का न्यूरल ट्यूब विकार (neural tube defects) आदि को मालूम करने के लिए किया जाता है।

इस टेस्ट में गर्भवती महिला के ब्लड में अल्फा-फेटोप्रोटीन (AFP) की जांच करने के लिए किया जाता है।

यदि इस टेस्ट के परीक्षण में परिणाम सामान्य से अधिक आता है तब इसका अर्थ है कि गर्भावस्था आयु अनुमानित आयु से अधिक है और दूसरे शब्दों में गर्भ में जुड़वां बच्चे हो सकते हैं।

कुछ परिणाम शिशु में रीढ़ की हड्डी में विकार की संभावना भी बता सकते हैं, जिसे स्पाइना बाइफिदा (spina bifida) कहा जाता है।

लेकिन यदि परिणाम सामान्य से कम है तब इसका अर्थ है कि गर्भावस्था की वास्तविक आयु अनुमानित आयु से काफी कम है।

इस संबंध में दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि गर्भस्थ शिशु को डाउन सिंड्रोम (down syndrome) जैसी परेशानी होने की संभावना भी हो सकती है।

लेकिन यदि इस टेस्ट के परिणाम असामान्य लगते हैं तब चिकित्सक इन्हें दोबारा और गहन रूप में करने की सलाह भी दे सकते हैं।

  • इंटेग्रेटिड प्रिनेटल स्क्रीनिंग (Integrated Prenatal Screening)

इंटेग्रेटिड प्रिनेटल स्क्रीनिंग में ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड दोनों ही किए जाते हैं।

इस टेस्ट के माध्यम से यह पता करने की कोशिश की जाती है कि कहीं गर्भस्थ शिशु को किसी प्रकार की आनुवंशिक (chormosome) संबंधी बीमारी जैसे डाउन सिंड्रोम (down syndrome) तो नहीं है।

  • अमीनोसेंटेसिस टेस्ट (Amniocentesis tests)

सामान्य तौर पर यह टेस्ट उन महिलाओं के लिए किया जाता है, जिनकी गर्भवस्था के समय आयु 35 वर्ष या इससे अधिक है और पिछले अल्ट्रासाउंड या स्क्रीनिंग टेस्ट में शिशु में किसी प्रकार के विकार की संभावना दिखाई देती है।

इस टेस्ट को एक खाली नीडल के माध्यम से किया जाता है, जिसमें यह नीडल सावधानीपूर्वक गर्भशाय में से अमीनोयोटिक फ़्ल्यूड लेने के लिए लगाई जाती है।

इसके बाद इस तरल पदार्थ का परीक्षण किया जाता है।

इस टेस्ट को बहुत सावधानी पूर्वक किया जाता है, क्योंकि इसमें गर्भपात होने का डर रहता है।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?

Tips for father in fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke fourth month mein father ke liye kya tips ho sakte hain in hindi

गर्भवस्था का चौथा महीना भावी माता-पिता के लिए बहुत भावुक, संशय और आशंकाओं से भरा होता है।

इस समय न केवल गर्भवती माँ को बल्कि भावी पिता को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।

गर्भावस्था के चौथे महीने में पिता के लिए टिप्स : -

1. गर्भावस्था का पूरा समय महिला के लिए विभिन्न प्रकार की चुनौतियों और परेशानियों से भरा होता है।

इसलिए इस समय जहां तक संभव हो आपको गर्भवती पत्नी के साथ समय बिताना चाहिए।

इससे न केवल आपकी पत्नी का मानसिक बल ऊंचा रहेगा बल्कि इस कारण इम्मुयूनिटी भी अच्छी रहेगी।

2. जैसे -जैसे गर्भवस्था का समय आगे बढ़ता है वैसे ही गर्भवती महिला में मूड स्विंग बढ़ते जाते हैं।

ऐसे में उनके किसी भी व्यवहार का प्रतिरोध न करके बल्कि उनकी वर्तमान मानसिकता को समझने का प्रयास करें।

3. गर्भावस्था के 4 महीने में महिला के पेट का आकार बढ़ जाता है।

ऐसे में गर्भवती महिला की परेशानी को समझते हुए अगर आप किसी अच्छे मॉस्चरॉइज़र से मालिश करते हैं तब इससे न केवल महिला को अच्छा लगेगा बल्कि आपके हाथ का स्पर्श गर्भ के शिशु तक भी पहुँच सकेगा।

इस प्रकार आप तीनों के संबंध में प्रगाढ़ता शिशु जन्म से पूर्व ही शुरू हो सकती है।

4. गर्भवती महिला के अल्ट्रासाउंड की वो तस्वीरें जिनमें शिशु का आकार स्पष्ट हो रहा है उसे संभाल कर रखें।

इन तस्वीरें को बार-बार देखने से आप स्वयं को शिशु के अधिक निकट महसूस कर सकेंगे।

5. गर्भवस्था के चौथे माह से शिशु बाहर की आवाज़ों को सुनकर उनपर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगता है।

इसलिए आप उससे उसी तरह बात कर सकते हैं जैसे एक पिता अपने सामने बैठे पुत्र या पुत्री के साथ करता है।

इसके अतिरिक्त एक पिता के रूप में आप जो भी अपने अजन्में बच्चे और पति के रूप में अपनी गर्भवती पत्नी के लिए करना चाहते हैं, कर सकते हैं।

 

गर्भावस्था के चौथे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?

What you can do in fourth month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke Fourth month mein main kya kar sakti hoon in hindi

महिला जब गर्भकाल के चौथे माह में प्रवेश करती है तब वह अपनी दिनचर्या में आने वाली परेशानियों को कुछ उपायों से हल कर सकती है!

गर्भावस्था के चौथे महीने में निम्न चीजें करें : -

1. सोते समय की दुविधा (Sleeping pattern in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था का चौथा महीना महिला के लिए थोड़ी मुश्किलों वाला होता है।

इस समय महिला के पेट का आकार पहले की तुलना में थोड़ा बढ़ जाता है।

ऐसे में लेटना और सोने में कठिनाई आती है।

इसलिए लेटते समय महिला को बाईं ओर करवट लेकर लेटना चाहिए।

इससे पेट को पलंग और गद्दे का सहारा मिल जाएगा।

इसके अतिरिक्त बाईं ओर लेटने से हृदय और पाचन तंत्र एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, इससे भोजन में पचने में सरलता होती है।

2. नाक और कान की समस्या (ENT issues in fourth month of pregnancy in hindi)

कुछ महिलाओं को गर्भवस्था के चौथे माह में नाक से खून या नकसीर आने की परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा कुछ महिलाएं इस समय कान बंद होने की शिकायत भी करती है।

इसलिए इस समय अपने पास एक साफ कपड़ा या हो सके तो टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें।

3. ढीले कपड़े (Loose Apparel in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल के आगे बढ़ते समय महिला के पेट और स्तनों का आकार बढ़ना शुरू हो जाता है।

इसलिए इस समय ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर पर टाइट न हों, जिससे सांस लेने में तकलीफ़ न हो।

4. पूरा आराम (Necessary rest in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल में महिला को यथासंभव अत्यधिक थकान से अपने को बचाना चाहिए।

इसलिए जहां तक हो सके अपने काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा आराम करते रहें।

5. जल ही जीवन है (Water is life in fourth month of pregnancy in hindi)

सामान्य रूप से पानी पीना हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है, लेकिन गर्भकाल में तो यह अत्यंत अनिवार्य होता है।

इसलिए जहां तक हो सके 2-3 लीटर पानी जरूर पिएँ ।

 

प्रेग्नेंसी के चौथे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?

What you should not do in Fourth month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke fourth month mein mujhe kya nahi karna chahiye in hindi?

गर्भवस्था के चौथे माह में महिला को निम्न सावधानियाँ भी रखनी चाहिए : -

1. पेट पर दबाव न डालें (Weight on stomach in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के चौथे माह में महिला को कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर दबाव पड़े, चाहे वह झुक कर झाड़ू लगाना हो, पेट के बल लेटना या सेक्स के समय ऐसी पोजीशन लेना जिसमें पेट पर दबाव पड़े।

2. वजन न बढ़ने दें (Keep an eye on body weight in fourth month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला का शारीरिक वजन वैसे भी थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है।

लेकिन गर्भवस्था के चौथे महीने से महिला को अपना लाइफस्टाइल इस प्रकार अपनाना चाहिए जिससे वजन बिना कारण और तेज़ी से न बढ़ सके।

अन्यथा इससे गर्भ पर अनावश्यक वजन पड़ेगा और प्रसव में कठिनाई हो सकती है।

3. धूम्रपान और मदिरापान (Drinking and smoking in fourth month of pregnancy)

गर्भावस्था के चौथे महीने में महिला को धूम्रपान और मदिरापान से पूरी तरह से बचाव रखना चाहिए।

ऐसा न करने से बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव हो सकता है।

4. भारी समान न उठाएँ (Lifting heavy things in fourth month of pregnancy)

गर्भकाल के चौथे पड़ाव में महिला को भारी सामान या चीज़ें नहीं उठानी चाहिए, क्योंकि इससे गर्भाशय पर आवश्यक भार पड़ने की संभावना रहती है।

5. सुस्त जीवनशैली (Sedentary lifestyle in fourth month of pregnancy)

गर्भावस्था का चौथा महीना वह समय होता है जब महिला के शरीर में लचीलापन और मांसपेशियों में नरमाहट का होना बहुत जरूरी है।

इसलिए पौष्टिक भोजन और अनिवार्य व्यायाम करना भी ज़रूरी है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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