Garbhavastha ke lakshan aur pahchan

गर्भावस्था के लक्षण और पहचान

Signs and symptoms of pregnancy in hindi

Garbhavastha ke lakshan aur pahchanin hindi

मां बनना हर स्त्री का सपना होता है और उसके लिए नया एहसास भी।

गर्भधारण करने से लेकर बच्चे के जन्म के दौरान माँ में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलते हैं।

इनमें गर्भाशय में ऐठन, मासिक धर्म बंद होना, मोर्निंग सिकनेस (morning sickness), अधिक थकान तथा स्तनों मे बदलाव आदि संकेत शामिल हैं।

गर्भधारण की पुष्टि के लिए गर्भवती होने के संभावित शुरुआती लक्षण

Very early symptoms of pregnancy in hindi

pregnancy ko confirm karne ke liye sabse pehle lakshan jo apko mehsus honge in hindi

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अगर आप गर्भवती होने की कोशिश कर रहीं हैं तो गर्भावस्ता की शुरुआत में आपको नीचे दिये गए लक्षण महसूस हो सकते हैं:

  • मासिक धर्म का ना होना या समय पर नहीं आना (Missed Periods)

    मासिक धर्म ना होना या समय पर ना आने को गर्भधारण का एक आम लक्षण माना जाता है। लेकिन ऐसा हर बार ज़रूरी नहीं होता।

    यदि किसी महिला के पीरियड्स अनियमित होते हैं तो इसे गर्भवती होने का लक्षण नहीं माना जा सकता है।

    लेकिन यदि कोई महिला बच्चा चाहती है और गर्भवती होने की कोशिश कर रही है और आमतौर पर उसका मासिक धर्म सही समय पर यानि नियमित है, तो इस प्रक्रिया में कोई बदलाव, गर्भवती होने का लक्षण हो सकता है।

  • स्तनों में बदलाव (Breast changes)

    यदि आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं और आपको अपने स्तनों में नीचे दिए गए बदलाव दिखें तो ये आपके गर्भवती होने के लक्षण हो सकते हैं :

    • स्तनों में सूजन

    • स्तनों में दर्द

    • स्तनों का संवेदनशील होना

    • स्तनों में भारीपन

    • निप्पल (nipple) के आस-पास की त्वचा का रंग बदलना

  • थकान होना (Fatigue)

    यदि आपको पर्याप्त पोषण लेने के बावजूद बहुत जल्द थकान महसूस होने लगती है और आप किसी बीमारी से ग्रस्त भी नहीं है तो यह लक्षण गर्भधारण के लक्षण हो सकते हैं।

  • बिना मासिक धर्म के भी योनि से खून आना (Vaginal bleeding or Spotting)

    यदि कोई महिला गर्भधारण करने का प्रयास कर रही है, उसका मासिक धर्म अपने समय से नहीं आया है और अचानक ही उसकी योनि से हल्का खून आने लगे और अपने आप बंद भी हो जाये तो हो सकता है कि महिला गर्भवती है।

    लेकिन यह महिला के गर्भधारण का पक्का प्रमाण नहीं है।

  • शरीर का तापमान बढ़ना (Raised body temperature)

    यदि महिला का शरीर अचानक से ही गर्म रहने लगा है और उसे बहुत अधिक पसीना या गर्मी लगने लगी हो तो हो सकता है कि वह गर्भवती है।

  • दिल की धड़कन बढ़ना (Faster heart beat)

    यदि महिला गर्भवती होने की कोशिश कर रही है और किसी छोटे से काम में भी उसकी दिल की धड़कन तेज़ हो जाए तो हो सकता है कि महिला ने गर्भ धारण कर लिया है।

  • बार-बार पेशाब जाने का मन करना (Frequent urination)

    यदि किसी महिला को अचानक ही बार-बार पेशाब जाने का मन करता है जो पहले नहीं होता था और वह गर्भधारण करने की कोशिश भी कर रही थी तो हो सकता है कि वह गर्भवती हो गयी हो।

  • सुबह सुबह मन मिचलाना (Nausea)

    अगर अचानक ही किसी महिला का सुबह-सुबह जी मिचलाने लगता है और उल्टी आने लगती है तो हो सकता है कि उसने गर्भधारण कर लिया हो।

  • रक्तचाप बढ़ जाना (High blood pressure)

    यदि किसी महिला का रक्तचाप आमतौर से सामान्य रहता था लेकिन कुछ दिनों से बिना किसी कारण ही बढ़ जाता है या बढ़ा हुआ रहता है तो यह गर्भवती होने का लक्षण हो सकता है।

गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक के लक्षण

Complete timeline of Pregnancy symptoms in hindi

Garbh Dharan se lekar bacche ke janam tak dikhne wale lakshan pregnancy symptoms timeline in hindi

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गर्भधारण से लेकर बच्चे के पैदा होने तक में 36-38 हफ़्तों का समय होता है जिसमें माँ के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं।

हर एक महीने या हफ्ते से जुड़े कुछ ख़ास लक्षण होते हैं जिससे यह पता चलता है कि बच्चा और माँ दोनों के ही शरीर में सही दिशा में बदलाव आ रहे हैं।

लेकिन यह ज़रूरी नहीं होता कि सभी गर्भवती महिलाएं इन लक्षणों का अनुभव करें।

यदि आप इस बात कि पुष्टि कर चुकी हैं कि आप गर्भवती हैं तो पहले तीन हफ्ते आपको शायद कोई फर्क नज़र ना आये।

लेकिन आपका शरीर पहले दिन से ही आने वाले बच्चे के लिए तैयारी करने लगता है।

गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन स्तर में उतार-चढ़ाव, रक्त संचार और मात्रा बढ़ना और मूड स्विंग्स होना आम लक्षण हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान 1-4 हफ़्ते के बीच आने वाले लक्षण:

  • पीरियड्स का ना होना

  • योनि से बिना मासिक धर्म के भी हल्का खून आता है

प्रेगनेंसी के दौरान 4-6 हफ़्ते के बीच आने वाले लक्षण:

  • पेट में हल्का दर्द या मरोड़

  • थकान

  • जी मिचलाना

  • शरीर के तापमान में बदलाव

  • स्तनों का कोमल और बड़ा होना

  • बार-बार पेशाब जाना

  • पेट फूलना

  • चक्कर आना

  • मूड स्विंग्स

प्रेगनेंसी के दौरान 6-10 हफ़्ते के बीच आने वाले लक्षण:

  • उच्च रक्तचाप

  • थकान और सीने में जलन

  • दिल की धड़कन बढ़ना

प्रेगनेंसी के दौरान 10-12 हफ़्ते के बीच आने वाले लक्षण:

  • स्तन और निप्पल में बदलाव

  • वजन बढ़ना

  • अलग-अलग चीज़ें खाने की लालसा (craving)

प्रेगनेंसी के दौरान 12-16 हफ़्ते के बीच आने वाले लक्षण:

  • चेहरे पर चमक (pregnancy glow),

  • मुहांसे आना,

  • शरीर में एक ढीलापन महसूस करना,

  • भूख बढ़ना

  • शरीर के कुछ हिस्सों जैसे निप्पल (nipple) के आसपास की त्वचा के रंग का गहरा होना

  • बच्चे की हलचल को महसूस करने लगना

प्रेगनेंसी के दौरान 16+ हफ़्ते के बाद आने वाले लक्षण:

  • चूँकि अब बच्चा बड़ा होने लगता है तो माँ का पेट भी बढ़ने लगता है जिसके चलते

  • कमर या पैरों में दर्द

  • हाथ-पैरों में सूजन

  • सोने में तकलीफ़

  • बहुत नींद आना

  • स्तनों से दूध आने लगना

  • स्ट्रेचमार्क्स (stretchmarks) दिखने लगना

गर्भवती होने की पुष्टि के बाद होने वाले शारीरिक व मानसिक बदलाव और उनके कारण

Physical and emotional changes post pregnancy confirmation in hindi

Pregnant hone par hone wale badlaav aur unke karan in hindi

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यदि आपका मासिक धर्म नहीं आया है और आपने प्रेगनेंसी टेस्ट या डॉक्टर से चेकअप कराकर इस बात की पुष्टि कर ली है कि आप गर्भवती हैं तो तैयार हो जाइये क्योंकि आपके शरीर और जीवन में कई बदलाव आने वाले हैं जो इस प्रकार हैं:

  • स्तनों में बदलाव (Changes in breast)

    गर्भवती होने पर आपके स्तनों का आकार बड़ा होने लगता है, स्तन नरम हो जाते हैं और कई बार दर्द भी महसूस होता है।

    यह सब शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव (hormonal changes) के कारण होता है जो समय के साथ खुद ही कम हो जाता है।

  • योनि से थोड़ा सा खून आना (Vaginal bleeding or spotting)

    योनि से मासिक धर्म की तरह ही हल्का खून आ सकता है जो गर्भाशय (uterus) में फर्टिलाइजड अंडे (fertilized egg) के प्रत्यारोपित (implant) होने की वजह से आता है।

    गर्भधारण (conceive) करने के 10-14 दिन के बाद ऐसा हो सकता है।

    लेकिन ऐसा हर गर्भवती महिला के साथ नहीं होता।

  • मोर्निंग सिकनेस (Morning sickness)

    यह दिन या रात किसी भी समय हो सकती है जिसके पीछे का कारण हॉर्मोन में आने वाले बदलाव होते हैं।

    यह आमतौर पर गर्भ के छठे हफ्ते के बाद से होती है।

    आने वाले महीनों में यह खुद ही ठीक हो जाती है।

  • बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination)

    शरीर में खून के स्तर में बढ़ोत्तरी होने के कारण किडनी को अधिक काम करना पड़ता है जिसके कारण सामान्य से अधिक मूत्र (urine) बनता है और इसलिए बार-बार महिला को शौचालय जाने की इच्छा होती है।

  • थकान (Tiredness)

    शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन (progesterone hormone) का स्तर बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को थकान महसूस होना एक आम बात है।

    इसके साथ ही शरीर बच्चे की मांग को भी पूरा करता है जिसके कारण थकान हो जाती है।

  • मूड स्विंग्स (Mood swings)

    गर्भवती महिला के शरीर में हॉर्मोन स्तर ऊपर नीचे होते रहते हैं जिसके कारण उनके मूड और व्यवहार में भी बदलाव आता रहता है जिन्हें मूड स्विंग्स कहा जाता है।

  • सीने में जलन (Heart burn)

    शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन (progesterone hormone) का स्तर बढ़ने के कारण एसोफैगल स्फिंकटर (esophageal sphincter) और अधिक खुल जाता है जिसके कारण आमाशय रस (gastric juices) ऊपर की ओर आने लगते हैं जिससे सीने में जलन होती है।

  • पेट फूलना (Bloating)

    शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन (progesterone hormone) की मात्रा बढ़ जाने से पाचन शक्ति कम हो जाती है जिसके कारण पेट हमेशा भारी और भरा लगता है।

  • मुहांसे (Acne-pimples)

    हॉर्मोन स्तर बढ़ने की वजह से एण्ड्रोजन स्तर (androgen level) बढ़ जाता है जिसके कारण सिबेसियस ग्लैंड (sebaceous gland) अधिक मात्रा में तेल उत्पादित करने लगते हैं जिसके चलते त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं और मुहांसे होने की समस्या उत्पन्न जो जाती है।

  • कब्ज (Constipation)

    पाचन शक्ति के कम हो जाने के कारण खाना देर से पचता है जिसके कारण शौच में समस्या आने लगती है।

  • सिरदर्द और चक्कर आना (Headache)

    शरीर में खून और हॉर्मोन के स्तर में बदलाव आने के कारण चक्कर आना और सिरदर्द होना एक आम लक्षण है।

    इसके साथ रक्त में शुगर (sugar) के स्तर में कमी, डिहाईड्रेशन (dehydration) आदि भी हो सकते हैं।

  • स्वाद में बदलाव (Taste changes)

    शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को किसी ख़ास चीज़ को खाने का मन करता है और तो कभी किसी चीज़ से मन ख़राब हो जाता है।

    हॉर्मोन के स्तर में बदलाव आने के कारण स्वाद भी बदल जाता है जैसे धातु के जैसा स्वाद (metallic taste) आना आदि।

    जब हॉर्मोन के स्तर नियंत्रित हो जाते हैं तो स्वाद खुद सही हो जाता है।

  • नाक बंद होना (Blocked Nose)

    रक्त का स्तर बढ़ जाने के कारण नाक के अंदर की त्वचा फूल जाती है जिसके कारण नाक बंद होने की समस्या आने लगती है।

  • कमर के निचले हिस्से में दर्द (Back pain)

    गर्भधारण के शुरुआती दिनों में महिलाओं में कमर के नीचे के हिस्से में दर्द होने की समस्या देखने को मिलती है।

  • दिल की धड़कन बढ़ जाना (Faster heart beat)

    शरीर को गर्भ में पल रहें बच्चे की ऑक्सीजन (oxygen) और अन्य तत्वों की मांग को पूरा करना होता है जिसके लिए दिल को अधिक काम करना पड़ता जिसके चलते दिल की धड़कन बढ़ जाती है।

  • चेहरे पर चमक (Pregnancy glow)

    हॉर्मोन के बढ़े हुए स्तर के कारण शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और त्वचा में तेल की मात्रा भी बढ़ जाती है जिसके कारण त्वचा पर चमक दिखने लगती है।

क्या गर्भवती नहीं होने पर भी गर्भावस्था के लक्षण आ सकते हैं और क्यूं

Is it common to experience symptoms similar to pregnancy even if not pregnant in hindi

garbhvati nahi hai phir uske jaise lakshan kyun aate hain in hindi

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गर्भधारण का पहला लक्षण मासिक चक्र में बदलाव को माना जाता है।

लेकिन इसके लिए और भी कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे अत्यधिक चिंता या तनाव, PCOS की समस्या, हॉर्मोन स्तर में बदलाव आदि।

इसलिए यदि आप गर्भवती नहीं हैं लेकिन आपकी माहवारी के चक्र में कोई भी बदलाव आया है तो चिकित्सक से परामर्श ज़रूर लें।

गर्भवती महिला में स्तनों में कई तरह के बदलाव आते हैं और सीने में दर्द होना भी एक आम लक्षण है लेकिन ऐसा मासिक धर्म के आस-पास भी होने लगता है जो माहवारी के बाद ठीक हो जाता है।

इसके अलावा अत्यधिक व्यायाम के कारण भी कई बार सीने में दर्द होने लगता है।

सुबह-सुबह जी मिचलाना या दिन में बार-बार उल्टी आने की स्थिति को गर्भधारण से जोड़ा जाना एक सामान्य सी बात है।

लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि गर्भधारण ही इसका एक कारण हो। पेट में किसी तरह की ख़राबी, ज्यादा तनाव या चिंता, किसी प्रकार की दवाई के कारण भी मन ख़राब हो सकता है जिसके कारण बार-बार उल्टी करने का मन कर सकता है।

गर्भवती महिला को थकान महसूस होना आम बात है लेकिन यदि आपको बिना कारण ही थकान लगती रहती है तो इसके लिए डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है।

इसके पीछे कुछ आम कारण जैसे रक्तचाप का गिरना, मधुमेह, ज़रुरत से ज्यादा शारीरिक काम आदि भी हो सकते हैं।

मूड स्विंग्स सिर्फ गर्भवती महिला में नहीं होते हैं, बल्कि यह हर महीने हर महिला को उसकी माहवारी के आसपास झेलना पड़ता है।

उसके साथ चिंता, तनाव, दुःख, या डाइट (diet) पर होने के कारण भी महिलाओ के व्यवहार में उतार चढ़ाव देखे जाते हैं।

पेट फूलने के पीछे का कारण सिर्फ गर्भधारण या माहवारी नहीं होता बल्कि गैस की समस्या, पाचन में दिक्कत, किसी दवाई का साइडइफ़ेक्ट (side effect), जल्दी- जल्दी खा लेना आदि भी हो सकते हैं।

इसके अलावा कब्ज, पीठ में दर्द, शरीर में सूजन आदि भी सिर्फ गर्भवती महिला में देखे जाने वाले लक्षण नहीं हैं बल्कि इनके पीछे जीवनशैली या और कोई स्वास्थ्य विकार भी हो सकता है।

निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

माँ बनना हर महिला के लिए खुशी की बात होती है। प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों को जल्दी समझ लेने पर माँ और उसके बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की देखभाल समय से हो सकेगी जिससे आगे जाकर डिलीवरी के समय किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

यदि गर्भधारण के सामान्य लक्षणों के अतिरिक्त कोई बड़ा बदलाव दिखाई देता है तो डॉक्टर से मिलें तथा आप गर्भवती हैं इस बात के साबित होते ही अपने खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

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