महिलाओं में अवसाद

महिलाओं में अवसाद (डिप्रेशन)

Depression among women in hindi

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डिप्रेशन (Depression) यानि अवसाद एक ऐसी समस्या है जिससे काफी लोग ग्रस्त रहते हैं लेकिन वे समझ नहीं पाते की उन्हें क्या करना चाहिए।

काफी बार अवसाद की स्थिति कुछ समय के लिए ही रहती है लेकिन कभी-कभी अवसाद की स्थिति एक भयावह रूप ले लेती है।

अवसाद की स्थिति तब उत्पन्न होने लगती है जब कोई व्यक्ति अपने जीवन की हर परिस्थिति के बारे में नकारात्मक सोच रखने लगता है।

जब यह स्थिति बार-बार आने लगती है तो व्यक्ति को अपना जीवन बिना किसी उद्देश्य का लगने लगता है जिसके कारण उसका दिमाग हमेशा दबाव में रहता है।

तब समझ लेना चाहिए कि अवसाद की स्थिति आ चुकी है।

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इस लेख़ में/\

  1. डिप्रेशन क्या है
  2. महिलाओं में डिप्रेशन के प्रकार
  3. महिलाओं में डिप्रेशन के मूल कारण
  4. महिलाओं में अवसाद के लक्षण
  5. महिलाओं में अवसाद का उपचार
  6. सारांश
 

1.डिप्रेशन क्या है

What is Depression in hindi

Kya hota hai depression ya avsaad

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अवसाद एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक नाखुश रहता है। उसकी जिंदगी में निराशा आने लगती है और रोज के काम करने में मन नहीं लगता है।

डिप्रेशन किसी भी उम्र के व्यक्ति को कभी भी हो सकता है और इसके होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है।

महिलाओं में अवसाद की स्थिति ज्यादा देखी जाती है जिसके कई प्रकार होते हैं जिनके अनेक कारण होते हैं।

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2.महिलाओं में डिप्रेशन के प्रकार

Types of depression in women in hindi

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अवसाद एक मानसिक बीमारी है जिसके कई प्रकार हैं और कई स्तर भी होते हैं। डिप्रेशन के इलाज़ के लिए चिकित्सक को अवसाद के प्रकार को समझना ज़रूरी हो जाता है।

अगर अवसाद के लक्षण शुरू में ही समझ आ जायें तो डिप्रेशन का इलाज करना या करवाना ज्यादा सरल हो जाता है।

  1. माइल्ड डिप्रेशन (Mild depression)

    माइल्ड डिप्रेशन की स्थिति ज्यादा खतरनाक नहीं होती है। देखा जाये तो इस तरह की डिप्रेशन की समस्या से आम तौर पर हर व्यक्ति को कभी न कभी परेशान करती ही है।

    उदासी या भावुक होना या रोना माइल्ड डिप्रेशन माना जाता है। कुछ लोगों में माइल्ड डिप्रेशन की समस्या कुछ घंटों तक ही दिखती है और कभी यह कुछ अधिक समय के लिए भी रह सकती है।

  2. मॉडरेट डिप्रेशन (Moderate depression)

    यदि अवसाद दो हफ्तों से ज्यादा हो तो उसे मॉडरेट डिप्रेशन की समस्या कहा जाता है।

    इस तरह की समस्या से यदि कोई इंसान गुजरता है तो उसे भूख कम लगती है और उसके बर्ताव में काफी सारे बदलाव दिखने लगते हैं।

    काउंसलिंग के माध्यम से इस समस्या का बहुत ही सरलता से इलाज़ किया जा सकता है।

    लेकिन यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि यदि मॉडरेट डिप्रेशन का समय से इलाज न किया जाता है तो यह मेजर डिप्रेशन का रूप ले सकता है।

  3. मेजर डिप्रेशन (Major depression)

    मेजर डिप्रेशन की परेशानी में महिलाएं भावनात्मक रूप से टूटने लगती हैं। मेजर डिप्रेशन होने के कारण महिला के व्यवहार और खान-पान पर बुरा असर पड़ता है।

    अवसाद के इस प्रकार के चलते महिलाओं में नींद की कमी होने की समस्या दिखने लगती है।

    यदि सही समय और सही तरीके से इस डिप्रेशन का इलाज न किया जाए तो इससे पीड़ित महिलाएं आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेती हैं।

    मेजर डिप्रेशन की परेशानी में ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत होती है। परसिस्टेंट डिप्रेसिव डिसऑर्डर (Persistent Depressive Disorder) भी इसी का एक प्रकार है।

  4. पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression)

    यह महिलाओं में अवसाद का एक विशेष रूप है जो बच्चे के जन्म के बाद होता है - जिसे अक्सर "बेबी ब्लूज़" (baby blues) कहा जाता है।

    अवसाद के विशिष्ट लक्षण जन्म के बाद के महीनों में शुरू होते हैं, जबकि कुछ महिलाओं में, गर्भवती होने के दौरान भी हो सकती हैं।

  5. माहवारी (Menstruation) से पूर्व होने वाला अवसाद

    यह अवसाद महिला के मासिक धर्म चक्र से जुड़ा होता है।

    इसमें मासिक धर्म की शुरुआत से पहले सप्ताह में मूड स्विंग्स (mood swings), चिंता और नकारात्मक विचार जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं और मासिक धर्म शुरू होने के बाद समाप्त हो जाते हैं।

    अवसाद के लक्षण दैनिक गतिविधियों पर प्रभाव डालते हैं।

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3.महिलाओं में डिप्रेशन के मूल कारण

Reasons of depression in women in hindi

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अनेक आनुवंशिक (heredity), हार्मोनल (hormonal), मनोवैज्ञानिक (psychological) और सामाजिक कारण हैं जो महिलाओं में अवसाद का कारण बनते हैं।

कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • परिवार में पहले किसी को अगर डिप्रेशन की बीमारी होना।

  • मस्तिष्क रसायन में कमी होना या कैमिकल्स के बैंलेस में गड़बड़ होना।

  • किसी विशेष घटना जैसे नज़दीकी व्यक्ति की मौत होना, प्यार सम्बन्ध टूटना आदि का एक गहरा असर दिमाग पर सीधे तौर पर पड़ना।

  • गर्भावस्था, प्रजनन क्षमता, प्रीमेनोपॉज़, रजोनिवृत्ति और मासिक धर्म आदि के कारण हार्मोन में तेजी से उतार-चढ़ाव आना।

  • स्वास्थ्य समस्याएं विशेष रूप से महिलाओं में अवसाद को जन्म दे सकती है।

  • वैवाहिक या रिश्तों की समस्या, कार्य-जीवन में संतुलन की समस्या, वित्तीय परेशानियों और तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं व किसी प्रियजन का नुकसान।

  • बचपन के दौरान शारीरिक या यौन शोषण।

  • मूड विकारों या किसी स्वास्थ्य समस्या विशेष रूप से पुरानी बीमारी या विकलांगता।

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4.महिलाओं में अवसाद के लक्षण

Symptoms of depression in women in hindi

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महिलाओं में अवसाद के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • उदास या चिंतित रहना

  • असहाय या अपने आप को बेकार महसूस करना

  • आत्महत्या करने का प्रयास करना या आत्महत्या कर लेना

  • नींद की कमी या अधिकता

  • व्यवहार में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन या बैचेनी महसूस करना

  • सामाजिक गतिविधियों में मन न लगना

  • गुस्सा करना एवं अधिक रोना

  • निराशा भरी बातें करना

  • जीवन में ख़ालीपन महसूस करना

  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना

  • सिरदर्द की शिकायत रहना

  • ज्यादा या कम खाने लगना एवं पाचन संबंधी परेशानी होना

  • वजन का कम व ज्यादा होना

  • अधिक थकान लगना

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5.महिलाओं में अवसाद का उपचार

Treatment of depression in women in hindi

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अवसाद के किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर महिलाओं को बिना देर किये इसका उपचार करना चाहिए ताकि वे एक अच्छा जीवन जी सकें।

एंटी-डिप्रेसेंट (anti-depressants) जैसी दवाइयों का सहारा लेने से पहले नीचे दिए गए तरीकों को अपना कर भी देखना चाहिए:

  • किसी एक्सपर्ट काउंसलर (counsellor) या साइकोलोजिस्ट (psychologist) से संपर्क करें और उनके साथ सेशंस (sessions) ले कर अपनी बात उनके सामने रखें

  • अपनी भावनाओं को अपने अंदर ना दबाएँ बल्कि दोस्तों एवं अपने परिवार से बात करें और उन्हें अपनी परेशानी समझाने की कोशिश करें

  • सामाजिक गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में हिस्सा ले

  • व्यायाम एवं ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं

  • कम से कम दिन में 8 घंटे की अच्छी एवं पूरी नींद लें

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6.सारांश

Summaryin hindi

अवसाद या डिप्रेशन किसी भी उम्र एवं किसी भी स्थिति में हो सकता है, ज़रूरी है इसके कारण एवं लक्षण को समझना।

अवसाद से जूझ रही किसी भी महिला को दवाई से ज्यादा मानसिक शांति और संबल (support) की ज़रुरत होती है।

महिला में यह भावना लाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनसे जुड़े लोगों के जीवन में उनकी बहुत महत्ता है। परिवार एवं समाज को कोशिश करनी चाहिए कि सिर्फ अवसाद के कारण कोई भी व्यक्ति अपना जीवन पूरे रूप से ख़राब न कर ले।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 04 Jun 2019

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