गर्भावस्था के दौरान खुजली हो सकती है कोलेस्टेसिस

Itching during pregnancy can be cholestasis in hindi

Pregnancy mein itching ho sakti hai obstetrics cholestasis in hindi


Introduction

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प्रेगनेंसी के नौ महीने के दौरान एक महिला में कई मानसिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। कुछ बदलाव आंतरिक रूप से होते हैं, तो कुछ बदलाव ऊपरी तौर पर दिखाई देते हैं।

आमतौर गर्भावस्था के दौरान होने वाली आम समस्याएं ज्यादातर गर्भावस्था के लक्षण होती हैं। मगर कुछ मामलों में गर्भावस्था के दौरान होने वाली जिन परेशानियों को आप गर्भावस्था के लक्षण समझ रहीं होती हैं, वो असल में किसी जोखिम की तरफ इशारा कर रहे होती हैं।

ऐसी ही एक समस्या का नाम है कोलेस्टेसिस, जिसके कारण महिलाओं को हाथ-पैर से लेकर शरीर के किसी भी हिस्से में गंभीर खुजली होने लगती है। आखिर क्यों होती है ये समस्या और इसके कारण क्या हैं, इस लेख के माध्यम से ये समझने के कोशिश करते हैं।

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इस लेख़ में

  1. 1.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस क्या है?
  2. 2.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के कारण क्या हैं?
  3. 3.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के लक्षण क्या हैं?
  4. 4.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का निदान कैसे किया जाता है?
  5. 5.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के जोखिम क्या हैं?
  6. 6.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का इलाज क्या है?
  7. 7.प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का घरेलू उपचार क्या है?
  8. 8.प्रसव के बाद कोलेस्टेसिस
 

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस क्या है?

What is cholestasis of pregnancy in hindi

Intrahepatic cholestasis of pregnancy kya hai in hindi

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गर्भावस्था के कोलेस्टेसिस को ओब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस (obstetric cholestasis) या इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस (intrahepatic cholestasis of pregnancy) के रूप में भी जाना जाता है।

ये विशेष रूप से हाथों और पैरों पर गंभीर खुजली पैदा कर सकता है। "कोलेस्टेसिस" शब्द ग्रीक शब्द "कोइल"(chole) से आया है जिसका अर्थ है "पित्त" (bile) और "स्टैसिस" का अर्थ है स्थिर यानि पित्तस्थिरता।

कोलेस्टेसिस तब होता है, जब पित्त (bile) लिवर से सामान्य रूप से नहीं निकल पाता है। पित्त एक तरल पदार्थ है, जो पाचन प्रक्रिया में मदद करता है। दरअसल, पित्त का सामान्य प्रवाह, गर्भावस्था हार्मोन की बढ़ी हुई मात्रा के कारण प्रभावित होता है।

इस कारण लिवर में बाइल एसिड (bile acid) का निर्माण होना शुरू हो जाता है, ये बाइल एसिड रक्त-प्रवाह (bloodstream) में फैल जाता है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान तीव्र खुजली शुरू हो जाती है।

खुजली आमतौर पर हाथों और पैरों पर होती है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। ये स्थिति आमतौर पर मां के स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरा पैदा नहीं करती है, लेकिन इससे शिशु को गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

गर्भावस्था के अंतिम तिमाही में कोलेस्टेसिस होना अधिक आम होता है, जब हार्मोन अपने चरम पर होते हैं, लेकिन आमतौर पर प्रसव के बाद कुछ दिनों के अंदर ये कम हो जाता है। लेकिन, सही समय पर इसका इलाज नहीं किये जाने से, ये गर्भावस्था में जोखिमों का कारण बन सकता है।

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प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के कारण क्या हैं?

What are the causes of cholestasis in pregnancy in hindi

Cholestatic causes in hindi

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सामान्य तौर पर पित्त (bile), लिवर (liver) द्वारा रिलीज़ होता है और गॉलब्लेडर में स्टोर होता है। ये विशेष रूप से आपकी पाचन प्रक्रिया में मदद करता है। यह वसा (fat) को पचाने में भी मदद करता है।

वहीं कोलेस्टेसिस एक ऐसी स्थिति है, जो पित्त के सामान्य प्रवाह को पित्ताशय की थैली (gallbladder) में धीमा कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप लिवर में बाइल एसिड बनना शुरू हो जाता है और जो बदले में रक्त प्रवाह में फैल जाता है, जिससे तीव्र खुजली होती है।

हालांकि, लिवर से जुड़ा ये विकार क्यों होता है इसका पता अब तक नहीं चला है लेकिन कुछ कारक हैं जो इसे प्रभावित कर सकते हैं।

संभावित कारणों में शामिल हैं:

1. हार्मोनल परिवर्तन (Hormonal changes)

गर्भावस्था के हार्मोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के बढ़ते स्तर के कारण लिवर के कार्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि कोलेस्टेसिस आमतौर पर अंतिम तिमाही में होता है जब एस्ट्रोजन का स्तर अधिक होता है।

हार्मोनल स्तर अधिक होने पर या गर्भ में एक से अधिक भ्रूण होने पर कोलेस्टेसिस होना सामान्य है।

2. गर्भकालीन मधुमेह (Gestational diabetes)

यह रोग अक्सर कोलेस्टेसिस के उच्च जोखिम से जुड़ा होता है।

3. आनुवंशिक कारण (Genetic reasons)

गर्भावस्था के दौरान होने वाली कोलेस्टेसिस की स्थिति परिवार से भी मिल सकती है।

अगर गर्भावस्था के दौरान आपकी माँ या बहन को आब्सटेट्रिक्स कोलेस्टेसिस हुआ था, तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको भी इस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

अगर महिला के गर्भ में एक से अधिक बच्चे हो या अगर किसी महिला के लिवर को पहले क्षति पहुंची हो तो उनमें कोलेस्टेसिस होना आम है।

इसके साथ ही अगर आपको पिछली गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस हो चुका है, तो दूसरी प्रेगनेंसी में भी ये होने का ख़तरा अधिक होता है।

और पढ़ें:अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण, कारण और उपचार
 

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के लक्षण क्या हैं?

What are the symptoms of intrahepatic cholestasis of pregnancy/ obstetric cholestasis in hindi

Cholestatic symptoms in hindi

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प्रसूति कोलेस्टेसिस का सबसे आम लक्षण खुजली है, जो आमतौर पर चकत्ते के बिना विकसित होता है। ये गर्भावस्था के 24 सप्ताह के बाद शुरू होता है, जब हार्मोन का स्तर अपने चरम पर होता है।

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के लक्षण निम्न हैं : -

  • यह हथेलियों और तलवों पर होता है, लेकिन यह शरीर के अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान रात में खुजली और बढ़ जाती है।
  • खुजली हल्के से गंभीर हो सकती है।
  • गंभीर खुजली आपकी नींद, आपके मूड और एकाग्रता को प्रभावित कर सकती है।
  • यूरिन के रंग में बदलाव आ सकता है।

अन्य दुर्लभ लक्षण में शामिल हैं :

  • त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
  • थकान
  • बीमार होना या महसूस करना
  • त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
  • लिवर के चारों ओर दर्द होना

गर्भावस्था के दौरान खुजली महसूस करना आम होता है। लेकिन जब ये खुजली गंभीर हो जाए और उपयुक्त लक्षणों का भी अनुभव हो तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से तुरंत मिलने की आवश्यकता है।

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प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का निदान कैसे किया जाता है?

How cholestasis of pregnancy diagnosis is done in hindi

Intrahepatic cholestasis of pregnancy ka nidan kaise kiya jata hai in hindi

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ओब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का निदान रक्त परीक्षणों (blood test) के माध्यम से किया जाता है।

आपके डॉक्टर आपके लक्षणों, आपके परिवार के इतिहास और चिकित्सा इतिहास पर चर्चा करेंगे और बाइल एसिड और लिवर एंजाइम को मापने के लिए कुछ परीक्षणों की सिफारिश करेंगे।

ये परीक्षण प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का पता लगाने के साथ-साथ खुजली के अन्य कारणों का भी पता लगाने में मददगार होते हैं।

1. बाइल एसिड टेस्ट (Bile acid test)

ओब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का पता लगाने के लिए बाइल एसिड टेस्ट सबसे विशिष्ट टेस्ट होता है।

ये रक्त-प्रवाह में बाइल एसिड के स्तर को मापता है।

सामान्य तौर पर बाइल एसिड का स्तर 0-10 माइक्रोमोल / एल (0-10 micromol/L) होता है।

अगर टेस्ट के दौरान, स्तर इस सीमा से ऊपर चला जाता है तो ये ओब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की उपस्थिति को इंगित करता है।

2. लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver function test)

ये विभिन्न एंजाइम स्तरों को मापकर लिवर के फंक्शन की जाँच करता है।

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस होने पर एलेनिन ट्रांसएमिनेस (alanine transaminase - ALT) और एस्पार्टेट ट्रांसएमिनेस (aspartate transaminase - AST) सहित मुख्य एंजाइम असामान्य रूप से बढ़ जाते हैं।

कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बाइल एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जबकि एएलटी और एएसटी का स्तर सामान्य रहता है।

अन्य मामलों में, लिवर एंजाइम बढ़ जाता और बाइल एसिड सामान्य रहता है।

ऐसे में अगर आपको लगातार खुजली हो, तो दोनों मामलों में, आपके बाइल एसिड का परीक्षण किया जाता है।

और पढ़ें:कोरोना वायरस के बारे में क्या जानना जरुरी है?
 

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के जोखिम क्या हैं?

What are the risks of cholestasis in pregnancy in hindi

ICP pregnancy ke jokhim kya hain in hindi

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गर्भावस्था के कोलेस्टेसिस (गर्भावस्था में खुजली) से माँ और विकासशील बच्चे में कुछ जटिलताएं हो सकती हैं।

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के जोखिम निम्न हैं : -

माँ के लिए (For mother)

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस से विटामिन K की कमी हो सकती है और रक्त के थक्के (blood clot) बनने की शरीर की क्षमता प्रभावित होती है।

रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इसे रोकने में अधिक समय लगता है। हालांकि, ऐसा क्यों होता है, इस पर अभी शोध चल रहा है।

आपके डॉक्टर थक्के की समस्या के इलाज के लिए विटामिन-के की खुराक लेने की सलाह देंगे।

अजन्मे बच्चे के लिए (For unborn baby)

आपका बच्चा गर्भ में रहते हुए अपना पहला मल (मेकोनियम-meconium) पास कर सकता है। जिस कारण जन्म के बाद बच्चे में सांस लेने की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

समय से पहले आपको प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है और ऐसी स्थिति में डॉक्टर डिलीवरी कराने की सलाह देंगे।

इस दौरान स्टिलबर्थ का खतरा बढ़ जाता है, यही वजह है कि डॉक्टर लगभग 37 से 38 सप्ताह के बीच लेबर को प्रेरित का सुझाव देते हैं।

आपके डॉक्टर ब्लड टेस्ट और रक्त में पित्त एसिड के स्तर के आधार पर लेबर इंड्यूस (labor induce) करने के बारे में सोचेंगे।

अगर कोलेस्टेसिस बहुत गंभीर है, तो 37 सप्ताह से पहले लेबर को प्रेरित किया जा सकता है।

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प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का इलाज क्या है?

What is the treatment of cholestasis in pregnancy in hindi

Cholestatic treatment in hindi

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प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का इलाज उपचार उपलब्ध है। आमतौर पर स्थिति गंभीर होने पर लिवर की दवा दी जाती है। वहीं सामान्य स्थिति में प्राथमिक लक्ष्य खुजली से राहत देना है।

गर्भावस्था में खुजली के उपाय:

  • ठंडे पानी से नहाएं
  • बर्फ के पानी में पैर और हाथ भिगोयें
  • खुजली वाले क्षेत्रों पर कैलामाइन लोशन लगायें
  • कैलेंडुला और कैमोमाइल के अर्क (extracts of calendula and chamomile) युक्त क्रीम अप्लाई करें, ये गर्भावस्था के दौरान होने वाली खुजली और लालिमा को कम करने के लिए लगाया जाता है
  • हल्के साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें
  • हार्श केमिकल युक्त शावर जेल की जगह, हल्के माइल्ड शावर जेल का इस्तेमाल करें
  • गर्म पानी से नहाने से बचें
  • ढीले ढाले और सूती कपड़े पहनें
  • स्वस्थ संतुलित आहार लें (तैलीय और वसायुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें)
  • जब भी आप थक जाएं तो आराम करें
  • अल्कोहल और ड्रग्स का सेवन न करें क्योंकि वे लिवर के लिए ख़तरनाक हैं और इससे बड़ा नुकसान हो सकता है

उपरोक्त उपाय विशेष रूप से सोने से पहले अस्थायी राहत प्रदान कर सकते हैं, ताकि खुजली कम हो सके और आपको रात में अच्छी नींद आ सके।

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस ठीक करने के लिए चिकित्सा उपचार (Medical treatment for managing OC)

दवा आमतौर पर पित्त के स्तर को कम करने, खुजली से राहत देने और बच्चे को जोखिम से बचाने के उद्देश्य से दी जाती है।

आपके डॉक्टर गर्भावस्था में खुजली के लिए निम्नलिखित दवाओं की सिफारिश कर सकते हैं :

  • उर्सोडॉक्सिकोलिक एसिड (ursodeoxycholic acid - ursodiol), जो खुजली से राहत देती है और लिवर और पित्त एसिड को सामान्य करती है।
  • बच्चे के फेफड़े के विकास के लिए गर्भवती महिला को स्टेरॉयड इंजेक्शन दिए जा सकते हैं।
  • गर्भवती महिला को प्रसव से पहले विटामिन-के की ख़ुराक दी जाती है और फिर एक बार बच्चे के जन्म के बाद दी जाती है, ताकि इंट्राक्रानियल रक्तस्राव से बचाव किया जा सके।

आहार की मदद से प्रेगनेंसी में खुजली की परेशानी को कैसे करें दूर? = How to overcome itching in pregnancy with the help of diet in hindi - Intrahepatic Cholestasis diet in hindi

गर्भावस्था के कोलेस्टेसिस डाइट का मुख्य मकसद होता है लिवर पर कम दबाव डालना।

इसके लिए आपको लेसिथिन युक्त खाद्य-पदार्थ खाने की आवश्यकता होगी, जो एक असंतृप्त वसा (unsaturated fat) है और जो बाइल में फैट को अब्जॉर्ब करने में मदद करता है। कम वसा वाले आहार आंत के लिए अच्छे होते हैं और पाचन क्रिया में मदद करते हैं।

ऐसे खाद्य-पदार्थों में शामिल है :

  • आसानी से पचने के लिए गाजर, बीन्स, आलू, कद्दू, लाल गोभी और फूलगोभी के साथ जैविक फलों और सब्जियों का मिश्रण।
  • बीमारियों से निपटने के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड (टूना (tuna), सामन (salmon), मैकेरल (mackerel), सार्डिन (sardines), अलसी (linseed), कॉड लिवर ऑयल (cord liver oil) और ओमेगा 6 फैटी एसिड (पत्तेदार साग, नट, मछली और सोयाबीन) युक्त खाद्य पदार्थ।
  • नट्स, बीन्स, मछली और अंडे सहित उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ।
  • चावल, गेहूं, मक्का, जई और राई जैसे कम वसा (low fat) वाले आहार।
  • वर्जिन ओलिव ऑयल (virgin olive oil), सूरजमुखी तेल (sunflower oil), और कनोला तेल (canola oil)।
  • शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए अधिक पानी पिएं।
  • पित्त एसिड को बेअसर करने के लिए गर्म पानी में ताज़ा नींबू का रस डालकर पिएं ।

यह आहार लिवर में पित्त के उत्पादन को कम करने में मदद करता है और लिवर के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। स्वस्थ आहार के अलावा, प्रेगनेंसी में खुजली की परेशानी से निपटने के लिए अन्य प्राकृतिक उपचारों का उपयोग किया जा सकता है।

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प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का घरेलू उपचार क्या है?

What are the natural remedies for cholestasis of pregnancy in hindi

Obstetric cholestasis ke liye natural remedies in hindi

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चिकित्सा उपचार के विकल्पों के लिए जाने से पहले, आप कोलेस्टेसिस (प्रेगनेंसी में खुजली की परेशानी) से जुड़ी असुविधा को कम करने के लिए निम्नलिखित उपायों को आज़मा सकते हैं। इन उपायों से स्थिति विकसित होने की संभावना भी कम हो जाती है।

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस के घरेलू उपचार निम्न हैं : -

  • ग्वार गम (Guar gum)

ग्वार गम, ग्वार पौधे के बीज का एक फाइबर कॉम्पोनेन्ट होता है।

अनुसंधान से पता चलता है कि ग्वार गम का सेवन करने से कोलेस्टेसिस से राहत मिलती है।

  • एक्टिवेटेड चारकोल (Activated charcoal)

ये एक गुणकारी उपचार पद्धति है, जिसकी मदद से शरीर में केमिकल और विषैले पदार्थ अब्जॉर्ब होने से पहले बाहर निकल जाते हैं।

  • विटामिन डी और कैल्शियम (Vitamin D and calcium)

शोध से पता चलता है कि चयापचय संबंधी हड्डी रोग, कोलेस्टेटिक लिवर रोग की जटिलता है।

इसलिए, ये आवश्यक है कि आप कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें और कैल्शियम के सप्लीमेंट लें।

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प्रसव के बाद कोलेस्टेसिस

Intrahepatic cholestasis of pregnancy after delivery in hindi

Delivery ke bad cholestasis of pregnancy

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बच्चे के जन्म के 6-8 हफ्ते के बाद डॉक्टर आपको जाँच के लिए बुलाएँगे। इस दौरान आपके डॉक्टर खुजली की स्थिति देखेंगे और साथ ही लिवर के फंक्शन की भी जाँच करेंगे कि लिवर सामान्य रूप से काम कर रहा है या नहीं।

अगर आप जन्म नियंत्रण की गोलियों का उपयोग कर रही हैं, तो आपको उन्हें रोकने के लिए कहा जा सकता है क्योंकि उनमें मौजूद एस्ट्रोजन फिर से कोलसिटोसिस को ट्रिगर कर सकता है।

डॉक्टर एक वैकल्पिक गर्भनिरोधक का सुझाव दे सकते हैं। आपको आगे चलकर क्रोनिक लिवर डिसीज़ या गॉल्स्टोन होने का ख़तरा हो सकता है। 45-70 प्रतिशत मामलों में भविष्य में भी प्रेगनेंसी के दौरान कोलेस्टेसिस हो सकता है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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