गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होना या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन

Cephalopelvic disproportion during pregnancy in hindi

Garbh mein bacche ka sir bada hona - Cephalopelvic disproportion in hindi


Introduction

Cephalopelvic_disproportion_during_pregnancy_in_hindi

परिवार में नए शिशु का आगमन हर आयु के सदस्य को खुशी और उत्साह देता है। लेकिन कभी-कभी गर्भवती महिला कुछ अजीबो-गरीब परेशानियों में आ जाती है जिसके कारण प्रसव में कठिनाई खड़ी हो सकती है।

ऐसी ही एक स्थिति होती है जब प्रसव के समय शिशु को महिला के गर्भ से बाहर आने में कठिनाई होती है। ऐसे में माँ-शिशु दोनों की जान को ख़तरा हो सकता है।

आमतौर पर ऐसा तब भी होता है जब शिशु का सिर गर्भाशय के मुंह से बड़ा होने के कारण फंस जाता है।

इस स्थिति को सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन (cephalopelvic disproportion) या गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होना कहा जाता है। इस लेख में सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की स्थिति के बारे में विस्तार से जानें।

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इस लेख़ में

  1. 1.गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होना या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन क्या होता है?
  2. 2.गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के लक्षण और संके
  3. 3.गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के क्या कारण होत
  4. 4.गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन का निदान कैसे हो
  5. 5.गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन का उपचार क्या है
  6. 6.गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के संभावित जोखिम
  7. 7.क्या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के बाद गर्भधारण में मुश्किल होती है?
 

गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होना या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन क्या होता है?

What is cephalopelvic disproportion in hindi

uterus mein bachche ke sir ka bade hone ka kya matlab hota hai in hindi

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आमतौर पर कहा जाता है कि लगभग 70% प्रसव योनि के माध्यम से होते हैं जिन्हें सामान्य प्रसव या नॉर्मल डिलीवरी कहा जाता है।

ऐसा इस कारण संभव हो पाता है क्योंकि महिलाओं की कूल्हों (pelvis) की बनावट इस प्रकार की होती है कि यह गर्भकाल और प्रसव के समय थोड़ी फैल जाती है।

लेकिन, कभी-कभी गर्भस्थ शिशु के सिर का आकार बड़े होने के कारण उसका योनि मार्ग से बाहर आना कठिन हो जाता है। इस परेशानी को गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होना कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो इस स्थिति में गर्भस्थ शिशु के सिर के आकार में और गर्भवती महिला के कूल्हों की हड्डी के आकार में समानता नहीं होने के कारण सामान्य प्रसव में कठिनाई हो सकती है।

यह एक असामान्य स्थिति है जिसका पता, महिला के प्रसव के समय ही चलता है।

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गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के लक्षण और संकेत क्या हो सकते हैं?

What are the signs and symptoms of Cephalopelvic disproportion in hindi

Cephalopelvic disproportion ke kyaa signs aur Lakshan ho sakte hain in hindi

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प्रसव-दर्द (labour pain) और प्रसव के समय कई स्थितियाँ होती हैं।

इनमें से कुछ स्थितियों से सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की परेशानी होने का संकेत मिलता है।

गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के लक्षण और संकेत निम्न हो सकते हैं : -

1. प्रसव-पूर्व जांच (prenatal checkup) में गर्भस्थ शिशु का आकार सामान्य शिशु के आकार से अधिक पाया जाना

2. प्रसव-पूर्व जांच (prenatal checkup) में गर्भस्थ शिशु की स्थिति का असामान्य होना;

3. प्रसव-दर्द का सामान्य से अधिक समय तक रहना;

4. प्रसव-दर्द होने पर भी शिशु का योनि द्वार की ओर न बढ़ना या धीमी गति से बढ़ना ;

5. प्रसव-दर्द होने पर भी गर्भाशय मुख (cervix) का मुख ठीक प्रकार से न खुलना;

और पढ़ें:अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण, कारण और उपचार
 

गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के क्या कारण होते हैं?

What causes cephalopelvic disproportion (CPD) in hindi

garbh mein bachche ka sir bada hone ke kya karan ho sakte hain in hindi

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अगर प्रेग्नेंसी डॉक्टर, प्रसव-पूर्व जांच में गर्भवती महिला को, गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने का संकेत देती हैं तब यह सूचना परेशान करने वाली हो सकती है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो जब गर्भवती महिला के कूल्हे की संरचना में और गर्भस्थ शिशु के सिर के आकार में समानता न हो तब सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन (cephalopelvic disproportion) जैसी परेशानी हो सकती है।

महिला के कूल्हे की बनावट में विकार होने के कारण निम्न हो सकते हैं : -

  • आनुवंशिकता (genetics)
  • ओस्टियोमलासिया (osteomalacia)
  • ट्यूबरक्लोसिस (tuberculosis)
  • पोलियो (polio)
  • ट्यूमर (tumors)
  • फ़ाइब्रोइड (fibroid)
  • किसी दुर्घटना के कारण (accident)
  • महिला के कभी चोट लगी हो या
  • कूल्हों का सही जगह पर ना होना (dislocation of hips)
  • सूखे का रोग (rickets),
  • वेजाइनल ट्रैक्ट में होने वाली अन्य परेशानियाँ जैसे - वेजाईना में ट्यूमर (tumors in the vagina), सर्विक्स की मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं, वेजाइनल सेप्टम (vaginal septum) या योनि का असामान्य आकार
  • पेल्विक ट्यूमर (pelvic tumors)
  • कूल्हे की हड्डी का आकार काफी छोटा होना
  • पेल्विक बोन पर अतिरिक्त हड्डी का बढ़ जाना
  • स्पोंडीलोलिस्टथीसिस (spondylolisthesis) होना जिसमें रीढ़ की हड्डी की एक हड्डी अपने स्थान से खिसक कर नीचे आ जाती है

लेकिन कभी-कभी गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने के कारण भिन्न भी हो सकते हैं।

गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने के अन्य कारण निम्न भी सकते हैं :

1. गर्भकालीन मधुमेह (gestational diabetes), जिसके कारण गर्भ के शिशु का आकार या वज़न बढ़ सकता है;

2. प्रेग्नेंसी की नियत तिथि (नौवें महीने दूसरे शब्दों में कहें तो 40 हफ्ते) पूरे होने के बाद तक प्रेगनेंसी का बने रहना, जिसके कारण बच्चे का आकार गर्भ में ही सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है

3. गर्भस्थ शिशु की मूल स्थिति का सही न होना

4. आनुवंशिकता, जिसके कारण भ्रूण का आकार सामान्य से काफी अधिक हो जाता है

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गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन का निदान कैसे हो सकता है?

How is cephalopelvic disproportion (CPD) diagnosed in hindi

uterus mein bachche ke sir bade hone ka kaise pata chal sakta hai in hindi

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गर्भवती महिला की प्रसव-पूर्व जांच (pre-natal check ups) के दौरान, कुछ स्थितियों में प्रेग्नेंसी डॉक्टर को गर्भ के शिशु की स्थिति या आकार में असामान्यता प्रतीत हो सकती है।

इसके लिए वे कुछ अन्य जांच का सहारा लेते हैं जिससे गर्भवती महिला सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की शिकार है या नहीं, यह पता चल पाता है।

गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन का निदान निम्न रूप से हो सकता है :

1. पेल्विक एमआरआई (Pelvic MRI)

यह एमआरआई महिला के कूल्हों की संरचना और आकार देखने के लिए की जाती है, जिससे पता चलता है कि महिला सामान्य प्रसव प्रक्रिया कर सकती है या नहीं।

इसे पेल्विमेट्री (pelvimetry) भी कहा जाता है।

इसमें महिला की पेल्विस या कूल्हों के आकार को देखने के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु की स्थिति भी देखी जाती है।

इसके साथ ही इसमें माँ-बच्चा के सॉफ्ट टिश्यू (soft tissues) की भी जांच की जाती है।

2. क्लिनिकल पेल्विमेट्री (Clinical MRI)

इस विधि के अंतर्गत प्रेग्नेंसी डॉक्टर अपने हाथों या पेल्विमीटर (pelvimeter) के जरिये गर्भाशय ग्रीवा (birth canal) की लंबाई को मापने का प्रयास करते हैं।

3. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

गर्भवती महिला की सामान्य जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भस्थ शिशु के सिर और शरीर के आकार का माप लिया जाता है।

इस माप की पूर्व स्थापित मानकों (pre-established standards) के साथ तुलना की जाती है।

इस तुलना से शिशु को प्रसव के समय सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन (CPD) होने की संभावना का पता लगाने की कोशिश की जाती है।

4. एक्स-रे या सी-टी पेल्विमेट्री (X-ray or C-T Pelvimetry)

इस तकनीक का उपयोग गर्भवती महिला की पेल्विस और गर्भस्थ शिशु के, सिर के, माप की जांच करने के लिए किया जाता है।

यह एक प्रकार की रेडिओग्राफिक जांच (radiographic test) है जिसको करवाने का निर्णय रेडिएशन से होने वाले जोखिम को देखते हुए लेना चाहिए।

दरअसल, कोई गर्भवती महिला सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन (CPD) की परेशानी से पीड़ित है, इसका पता प्रसव-दर्द के शुरू होने से पहले लगाना थोड़ा कठिन होता है।

यदि किसी तकनीक के माध्यम से प्रेग्नेंसी डॉक्टर, गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा (CPD) होने का निदान कर भी लेते हैं, तब भी वे कई बार सामान्य प्रसव करवाने में समर्थ हो जाते हैं।

ऐसी आपतकालकिन स्थिति में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी (c-section) की मदद लेते हैं, ताकि माँ और शिशु को बचाया जा सके।

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गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन का उपचार क्या है?

What is the treatment for cephalopelvic disproportion or CPD in hindi

Cephalopelvic disproportion ka kya treatment ho sakta hain in hindi

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गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन का निदान होने के बाद, प्रेग्नेंसी डॉक्टर सबसे पहले इस परेशानी की गंभीरता का निर्धारण करते हैं।

लेकिन यदि चिकित्सक सीपीडी (CPD) को गंभीर पाते हैं तब वे सिजेरियन सेक्शन का निर्णय लेकर माँ-शिशु के स्वास्थ्य व प्राण को बचाने का प्रयत्न करते हैं।

इस स्थिति में योनि प्रसव का निर्णय माँ व बच्चे के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

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गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के संभावित जोखिम और परेशानियाँ क्या हैं?

What are the possible risks and complications of Cephalopelvic disproportion in hindi

Cephalopelvic disproportion ke possible risk aur complications kya ho sakte hain in hindi

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प्रेग्नेंसी डॉक्टर यदि प्रसव काल से पहले या प्रसव प्रक्रिया के दौरान सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की स्थिति महसूस करते हैं तब उन्हें प्रसव के लिए अत्यंत सावधानी से काम लेना होता है।

सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की स्थिति में माँ और शिशु को निम्न परेशानियाँ व जोखिम हो सकते हैं : -

1. ओक्सिटोसिन की अधिक मात्रा (Overdose of Oxytocin)

जब प्रसव अवधि लंबी हो जाती है और शिशु गर्भ से बाहर नहीं आ पता है तब प्रेग्नेंसी डॉक्टर, प्रसव प्रक्रिया जल्द करने के लिए गर्भवती स्त्री को ओक्सिटोसिन (oxytocin) इंजेक्शन दे सकते हैं।

लेकिन अगर असावधानीवश, इस दवा की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तब प्रसव दर्द तेज़ हो सकता है।

ऐसे में गर्भवती महिला को भयंकर पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अतिरिक्त जन्म लेने वाले शिशु को भी नुकसान हो सकता है।

2. प्रसव-दर्द का लंबे समय तक होना (Prolonged Labor)

गर्भस्थ शिशु, जब गर्भवती महिला के योनि मार्ग से बाहर आने का प्रयास करता है, तब उठने वाले दर्द को प्रसव-दर्द (labor pain) कहते हैं।

अधिकतर डॉक्टर इस दर्द को अधिक समय तक होने देते हैं जिससे सामान्य प्रसव की प्रक्रिया को सम्पूर्ण किया जा सके।

लेकिन इस कारण, गर्भ के शिशु को ऑक्सीजन की कमी हो सकती है जिससे शिशु को विभिन्न प्रकार की शारीरिक/मानसिक परेशानियों का ख़तरा हो जाता है।

इन परेशानियों में हाइपोक्सिक-इस्केमिक एन्सेफैलोपैथी (hypoxic-ischemic encephalopathy), सेरेब्रेल पल्सि (cerebral palsy) आदि मस्तिष्क संबंधी परेशानियाँ प्रमुख हो सकती हैं।

इसके अतिरिक्त प्रसव पीड़ा के लंबे होने के कारण शिशु के मस्तिष्क में रक्त्स्त्राव (intracranial hemorrhages) की भी संभावना हो सकती है।

3. प्रसव के समय कंधा फंसना (Shoulder Dystocia)

महिला के योनि मार्ग का माप छोटा होने और बच्चे के सिर व शरीर के आकार में अंतर होने के कारण ३% बच्चों के पैदा होने में शोल्डर डिस्टोसिया की परेशानी सामने आती है।

अगर समय पर इसे पहचाना न जाए तो शिशु को लम्बे समय तक परेशानी हो सकती है। शिशु को होने वाली परेशानियों में से एक है हर्ब्स पाल्सी।

4. गर्भनाल का दबाव (Umbilical Cord Compression)

जब गर्भ में शिशु का सिर बड़ा होने की परेशानी होती है, तब प्रसव का समय नज़दीक आने पर गर्भनाल पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है।

इस दबाव से गर्भनाल में जकड़न या घुमाव आ सकता है, परिणामस्वरूप शिशु को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।

5. योनि, मूत्राशय और मलाशय से जुड़ी परेशानियाँ

गर्भाशय (uterus) मूत्राशय (bladder) या योनि की दीवारों (vaginal walls) में इन्फेक्शन हो सकता है या मूत्राशय या मलाशय (rectum) में चोट लग सकती है।

गर्भाशय में दरार (ruptured uterus) आ सकती है जिसके कारण आंतरिक रक्त्स्त्राव या/और शिशु की मृत्यु तक हो सकती है।

गर्भ में शिशु के सिर बड़ा होने की स्थिति में गर्भवती महिला के प्रसव में बाधा (obstructed labor) आने के साथ-साथ, महिला अपंगता की शिकार भी हो सकती है, ऐसे में महिला की मृत्यु का भी जोखिम हो सकता है।

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क्या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन के बाद गर्भधारण में मुश्किल होती है?

Is there any difficulty in conceiving after cephalopelvic disproportion in hindi

Cephalopelvic disproportion ka baad vaali pregnancy par kya effect ho sakta hai in hindi

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यदि किसी गर्भवती महिला को गर्भावस्था में सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की परेशानी हो जाती है, तब इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि वह महिला अगली किसी भी गर्भावस्था में भी इस परेशानी से गुज़रेगी।

अब तक की गई विभिन्न शोध के रिपोर्ट से यह पता चलता है कि औसतन 250 प्रेग्नेंसी में से केवल एक ही महिला सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन की परेशानी से प्रभावित हो सकती है।

आमतौर पर यह देखा गया है कि यदि महिला पहले गर्भ में सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन से प्रभावित रही हो, तब भी वह अगले प्रसव में सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म दे सकती है।

सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन एक असामान्य स्थिति है लेकिन इसके होने का अर्थ यह नहीं है कि महिला की आने वाली प्रेग्नेंसी में भी यही तकलीफ़ होगी।

हालाँकि, अगर गर्भवती महिला के गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होने की स्थिति में सामान्य प्रसव कराने का निर्णय लिया जाता है, तो इससे माँ-शिशु दोनों को शारीरिक और मानसिक चोट पहुँचने का जोखिम हो सकता है। इसके साथ ही दोनों के प्राण भी संकट में आ सकते हैं।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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