पैनिक डिसआर्डर या एंग्जायटी

Anxiety or Panic disorder in hindi

anxiety ya chinta kya hai


Introduction

पैनिक_डिसआर्डर_या_एंग्जायटी

एंग्जायटी एक ऐसी स्थिति है जिसमे व्यक्ति को अचानक से बहुत तेज घबराहट होती है और सांस लेने में तकलीफ़ होने लगती है, तेजी से चक्कर आने लगते है और व्यक्ति को ऐसा लगता है कि वह मरने वाला है।

पैनिक अटैक (panic attack) के समय ब्लड प्रेशर (blood pressure) अचानक से बहुत तेज या कम होने लगता है, शरीर कांपने लगता है। इस दौरान पीड़ित व्यक्ति खुद पर नियंत्रण खोने लगता है।

पैनिक अटैक अचानक से आता है और थोड़ी देर के लिए रहता हैं। पैनिक अटैक के दौरे 30 सेकंड से लेकर 30 मिनट तक चल सकते हैं।

जब ये पैनिक अटैक बार-बार आने लगे और इनकी तीव्रता बढ़ जाये तो पैनिक डिसऑर्डर की समस्या हो जाती है। पैनिक डिसऑर्डर एक प्रकार का मानसिक विकार है, जिसमे रोगी को बार बार तेज डर और घबराहट के दौरे पड़ने लगते हैं।

पैनिक डिसऑर्डर बहुत गंभीर अवस्था है, इसमें बहुत थोड़ी सी चिंता या तनाव होने पर ही पैनिक अटैक आने लगते हैं। पैनिक डिसऔर्डर से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा अगले पैनिक अटैक की आशंका को लेकर चिंता करता रहता हैं और हमेशा जिन परिस्थितियों में पिछला पैनिक अटैक आया था उन स्थितियों से बचने की कोशिश करता है।

इस वजह से वो सामाजिक रूप से मिलने जुलने और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से भी डरता है।

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इस लेख़ में

 

पैनिक डिसऑर्डर के प्रकार

Types of Panic Disorderin hindi

panic disorder ke prakar

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अलग अलग तरह के पैनिक अटैक के आधार पर पैनिक डिसऑर्डर के भी तीन मुख्य प्रकार है:

  1. एंटीसिपेटरी एंग्जायटी पैनिक डिसऑर्डर (Anticipatory anxiety panic disorder)

    इस तरह के पैनिक डिसऑर्डर में एक बार पैनिक अटैक आने के बाद व्यक्ति दूसरे पैनिक अटैक की चिंता करने लगता है।

    वो हर समय अलग-अलग पैनिक अटैक परिस्थितियों की आशंका/ कल्पना (anticipate) करने लगता है।

    ये “अब क्या होगा” की चिंता उसे सकारात्मक सोचने की बजाय डरे हुए रहने को मजबूर कर देती है।

  2. फ़ोबिक अवॉइडेंस पैनिक डिसऑर्डर (Phobic avoidance panic disorder)

    इस पैनिक डिसऑर्डर के मरीज जिन परिस्थितियों में उन्हें पिछला पैनिक अटैक आया था, उन सभी परिस्थितियों या वातावरण से बचना (avoidance) शुरू कर देते हैं।

    उन्हें डर रहता है कि अगर फिर से वो उस जगह या उन हालातों में होंगे तो उन्हें घबराहट का दौरा पड़ जायेगा।

  3. एगोराफोबिया के साथ पैनिक डिसऑर्डर (Panic disorder with agoraphobia)

    एगोरफोबिया पैनिक डिसऑर्डर एक तरह से फोबिक अवॉइडेंस (phobic avoidance) पैनिक डिसऑर्डर की ही अगली स्टेज है। जब फोबिक अवॉइडेंस पैनिक डिसऑर्डर बहुत अधिक बढ़ जाता है तो एगोराफोबिया पैनिक डिसऑर्डर हो जाता है।

    मरीज में पूर्व पैनिक अटैक की परिस्थितियों का डर इतना अधिक बढ़ जाता है कि वो भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक इलाकों में भी जाने से डरने लगता है। लोगो से मिलने जुलने में भी डरता है।

    यह माना जाता है कि एगोराफोबिया (agoraphobia) पैनिक डिसऑर्डर की समस्या को बहुत अधिक खतरनाक कर देता है।

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पैनिक डिसआर्डर के लक्षण

Symptoms of panic disorderin hindi

panic disorder ya chinta ke shuruati lakshan

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पैनिक डिसऑर्डर की पहचान निम्र लक्षणों से की जा सकती है:

  • एक बार पैनिक अटैक होने के बाद दूसरे पैनिक अटैक होने की चिंता करना।

  • हार्ट बीट्स (heart beats) कम-ज्यादा होते रहना।

  • जहां पहले पैनिक अटैक हुआ था, उन जगहों पर जाने से बचना।

  • खाने पीने की चीजो़ को लेकर वहम हो जाना और किसी भी खाने को पैनिक अटैक की वजह मानना।

  • सांस लेने में तकलीफ़ महसूस करना।

  • बार बार गला सूखना।

  • चक्कर आना और कमजोरी महसूस करना।

  • अपने आप पर कंट्रोल खोने का डर लगना।

  • मांसपेशियों में तनाव रहना।

  • किसी भी काम में मन न लग पाना और बार बार पैनिक अटैक के बारे में ही सोचना।

  • हमेशा मरने का डर सताना।

  • किसी भी वक्त पसीने से भर जाना और हाथ पैर कांपना।

  • एक से ज़्यादा बार पैनिक अटैक आना।

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पैनिक डिसऑर्डर के कारण

Causes of panic disorder in hindi

panic disorder ke karan

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पैनिक डिसऑर्डर के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हर व्यक्ति का अलग कारण होता है।

पैनिक डिसऑर्डर के मुख्य रूप से दो कारण हो सकते हैं:

  1. बायोलाॅजिकल कारण (Biological causes)

    वैज्ञानिकों की रिसर्च के आधार पर एंग्जायटी या पैनिक डिसऑर्डर के आसार उन लोगो में अधिक होते हैं, जिनके माता-पिता में से कभी कोई पहले पैनिक अटैक से ग्रसित रह चुका हो।

    ऐसे लोगो को घबराहट के समय में तेज सांस लेने की आदत पड जाती है, इससे सांस में कार्बन डाई ऑक्साइड (carbon dioxide) का स्तर बढ़ जाता है।

    रिसर्च एक्सपर्ट्स (research experts) के अनुसार अगर सांसों में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर सामान्य से अधिक होता है तो तनाव की परिस्थितियों में सक्रिय होने वाली मस्तिष्क की आपातकालीन प्रतिक्रिया (emergency reaction) शुरू हो जाती है और पैनिक अटैक की संभावना बढ़ जाती है।

  2. साइकोलाॅजिकल कारण (Psychological causes)

    पैनिक डिसऑर्डर के कई साइकोलॉजिकल कारण भी होते है। कई बार बचपन में घटी किसी असामान्य घटना, किसी तरह का यौन या शारीरिक शौषण के कारण व्यक्ति की मानसिक स्थिति में कई तरह के बदलाव आ जाते हैं।

    इस वजह से वह साइकोलॉजिकल रूप से कमजोर होकर पैनिक डिसआर्डर का बहुत आसानी से शिकार बन सकता है।

    इन दो मुख्य कारणों के अलावा पैनिक डिसऑर्डर के कुछ और कारण भी हो सकते हैं, जैसे:
    • धूम्रपान, निकोटिन या अत्यधिक कैफीन (caffeine) का सेवन

    • किसी डरा देने वाली अथवा या घबराहट को बढ़ाने वाली परिस्थिति का सामना करना

    • गंभीर तनाव

    • किसी प्रियजन की मृत्यु

    • ग्रह क्लेश या तलाक होना

    • बेरोजगारी या नौकरी छूट जाना

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पैनिक डिसआर्डर की पहचान करना

Diagnosis of panic disorderin hindi

panic disorder ki pehchan kaise ki jati hai

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पैनिक अटैक से ग्रसित व्यक्ति को पैनिक डिसऑर्डर होना जरूरी नहीं है। अगर समय पर पैनिक अटैक की पहचान करके इलाज कर लिया जाए तो पैनिक डिसऑर्डर से बचा जा सकता है।

पैनिक डिसऑर्डर का पता लगाने के लिए डाॅक्टर इन बातों पर गौर करते हैं:-

  • पैनिक अटैक कितनी बार आ चुका है?

  • क्या दूसरे पैनिक अटैक को लेकर कोई चिंता है?

  • मरीज के जीवन मे कोई बड़ा बदलाव तो नहीं आया है?

  • उसे किस बात से डर लगता है?

  • शराब, ड्रग्स या कोई नशे का पदार्थ की लत।

  • निजी जीवन से जुडे सवाल करना जिससे मरीज़ की मानसिक स्थिति का पता लगा सके।

यदि आपको पैनिक अटैक हुआ है, लेकिन पैनिक डिसऑर्डर नहीं हुआ है, तब आप आसानी से इसका इलाज करवा सकते हैं।

यदि पैनिक अटैक का इलाज नहीं किया जाता है, तो वो पैनिक डिसऑर्डर या फोबिया में बदल सकते हैं।

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पैनिक डिसऑर्डर का इलाज

Treatment of panic disorder in hindi

panic disorder ka ilaj in hindi

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पैनिक डिसऑर्डर का इलाज में थोड़ा समय लगता है, मगर इसका इलाज असंभव नहीं है।

नीचे पैनिक डिसऑर्डर के उपचार के तरीके बताए गए हैं:

  1. काॅगनीटिव बिहेवियोरल थैरिपी (Cognitive behavioral therapy)

    ये थैरेपी उन सोच पैटर्न और व्यवहारों पर केंद्रित है जो आपके पैनिक अटैक को बनाए रखते हैं और आपके डर को और ज़्यादा बढा़वा देते हैं।

    इस थैरेपी में मरीज से उसकी सभी तरह के डर और आशंकाओं की कल्पना करने को कहा जाता है।

    फिर काउंसलर उस डर को मरीज के मन से निकाल दिया जाता है और ये समझाया जाता है कि ये डर सिर्फ उसके मन का वहम है। हकीकत में ऐसा कुछ भी उसके साथ नही होगा।

    इस थैरेपी से पैनिक अटैक का डर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।

  2. एक्सपोजर थैरिपी (Exposure therapy for panic disorder)

    एक्सपोज़र थेरेपी के अंतर्गत पैनिक डिसऑर्डर के मरीज को पैनिक अटैक के दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों और संवेदनाओं का अनुभव करवाया जाता है।

    इससे मरीज को पैनिक अटैक की परिस्थितियों से निपटने का आत्मविश्वास मिलता है। इसमें मरीज को सिर को साइड से हिलाने या अपनी सांस रोक कर रखने को कहा जाता है। इन विभिन्न अभ्यासों से घबराहट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    प्रत्येक थेरेपी के साथ, आप इन आंतरिक शारीरिक हरकतों से कम डरते हैं और अपने अटैक पर नियंत्रण रखने का अधिक विश्वास महसूस करते हैं।

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सारांश

Summaryin hindi

saransh

पैनिक अटैक से घबराने की आवश्यकता नहीं है। पैनिक अटैक में दिल के दौरे जैसा महसूस होता है मगर ये जानलेवा नहीं हैं।

पैनिक अटैक के समय सकारात्मक सोच रखने की आवश्यकता होती है। जब भी पैनिक अटैक आये ये याद रखे कि ये थोड़ी देर में समाप्त हो जाएंगे। इनके बारे में अधिक सोचने की जरूरत नहीं है।

आप जितना अधिक सोचेंगे आपको पैनिक डिसऑर्डर होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी।

पहली बार पैनिक अटैक होने पर ही ठीक से इलाज करवा लेना चाहिए। रोगी को तनाव मुक्त रहना चाहिए और लाइफस्टाइल में सुधार करना चाहिए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 03 Jun 2019

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