कील मुंहासे हटा - what is acne (pimples)

कील मुहांसे

Acne (Pimples) in hindi

 

मुहांसे एक डिसीज़ है जिस कारण स्किन डैमेज हो जाती है और इसे ही पिंपल्स कहते हैं। ये स्किन के ऑयल ग्लैंड्स (तेल ग्रंथियों) द्वारा बहुत अधिक सीबम ( Sebum - एक तैलीय पदार्थ )बनाने के कारण होता है, जो पोर्स (छिद्रों) को बंद कर देता है। यह बैक्टीरिया पी. (Bacteria P.) के तेज़ी से बढ़ने के कारण भी हो सकता है।

मुहांसे के दाने या घाव ज्यादातर चेहरे, गर्दन, पीठ, छाती और कंधों पर होते हैं। यह सबसे आम त्वचा रोग है।

हालांकि यह एक गंभीर स्थिति नहीं है, लेकिन सख्त मुहांसे चेहरे की सुंदरता पर प्रभाव डालते हैं और गहरे दाग छोड़ जाते हैं।

 

कील-मुहांसे या पिंपल्स के प्रकार

Types of Acne (Pimples) in hindi

Keel muhase ya pimples ke prakaar in hindi

Types of Acne (Pimples) in hindi

कील-मुहांसे या पिंपल्स के प्रकार:

  1. व्हाइटहेड्स (Whiteheads)

    एक प्रकार के पोर्स होते हैं जो डेड स्किन सेल्स और सीबम के साथ उभरे होते हैं।
  2. ब्लैकहेड्स (Blackheads)

    ब्लैकहेड्स तब होते हैं जब रोम छिद्रे खुल जाते हैं और केमिकल रिएक्शन के कारण सतह का रंग गहरा हो जाता है। ब्लैकहैड गंदगी नहीं है, इसलिए इसे धोया नहीं जा सकता है।

    यह वास्तव में मेलेनिन (Melanin) (एक स्किन पिग्मेंट) के बनने से होता है। स्किन को रगड़ने या हार्ड क्लीन्ज़र का उपयोग करने से जलन हो सकती है।

  3. मुहांसे (Pimples)

    मुहांसे तब होते हैं जब भरे हुए पोर्स बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाते हैं और जिस कारण स्किन पर लाल, उभरे हुए दाने हो जाते हैं।पिंपल्स के ऊपर का हिस्सा पस से भरा हो सकता है, और ये एक तरह से शरीर का बैक्टीरिया के इन्फेक्शन से रियेक्ट करने का तरीका है।
  4. सिस्ट (Cysts)

    सिस्ट तब होते हैं जब स्किन के अंदर के बंद पड़े पोर्स ब्रेक हो जाते हैं जिस कारण बड़े घाव हो जाते हैं और दर्दनाक भी होते हैं। अगर इनपर ध्यान नहीं दिया जाये तो ये सिस्ट निशान छोड़ देते हैं।
 

कील-मुहांसे या पिंपल्स के कारण

Causes of Acne (Pimples) in hindi

Keel muhase ya pimples ke karan in hindi

Causes of Acne (Pimples) in hindi

मुहांसे पोर्स क्लॉग (जिसे हेयर फॉलिकल्स - hair follicles भी कहते हैं) होने के कारण होते हैं। हर एक फॉलिकल के अंदर एक डीप हेयर शाफ़्ट (Hair shaft) होता है जिसे "सिबेशियस ग्लैंड्स" - “Sebaceous gland”(वसामय ग्रंथि) कहा जाता है।

ये ग्लैंड्स हमारे बालों और स्किन को नम करने के लिए सीबम नामक एक ऑयली सब्सटांस बनाती है।

जब बहुत अधिक सीबम बनता है, तो यह एक चिपचिपा प्लग बनाने के लिए डेड स्किन सेल्स के साथ मिक्स हो सकता है, जो हेयर फॉलिकल को बंद कर देता है।

किशोरावस्था में ये होना बहुत सामान्य है क्यूंकि इस समय हार्मोन के लेवल में बदलाव होते रहते हैं। 

हेयर फॉलिकल में फंसे हुए बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं और ऐसे केमिकल बनाते हैं जो सूजन, लालिमा और जलन पैदा कर सकते हैं।

आखिरकार घाव फट सकता है और सब कुछ फैल सकता है (तेल, डेड स्किन सेल्स, और बैक्टीरिया) जिस कारण उस जगह के आसपास की स्किन पर मुहांसे, सिस्ट और दाग धब्बे हो जाते हैं। 

महिलाओं में कील-मुहांसे या पिंपल्स होने के क्या कारण होते हैं?

कई चीजें महिलाओं में मुहांसे पैदा कर सकती हैं: 

  1. पुबर्टी के दौरान हार्मोन में बदलाव होना (Hormonal changes during puberty)

    पुबर्टी के समय लड़कियों में एण्ड्रोजन नामक पुरुष सेक्स हार्मोन ज़्यादा बनने लगता है। इस वजह से ग्लैंड्स का आकर बड़ा होने लगता है और अधिक सीबम बनाने लगता है।

  2. मेंस्ट्रुअल साइकिल में हार्मोन में बदलाव (Hormonal changes during menstrual cycle)

    मेंस्ट्रुअल साइकिल (Menstrual Cycle) के कारण मुहांसे होना सबसे कॉमन है। साइकिल शुरू होने से कुछ दिन पहले मुहांसे आने शुरू हो जाते हैं और साइकिल पूरा होने के बाद चले जाते हैं।

    प्रेगनेंसी और मेनोपॉज़ जैसे हार्मोनल बदलाव महिलाओं में मुहांसे की स्थिति में सुधार लाते है।

    लेकिन कुछ महिलाओं में इस दौरान मुहांसे की स्थिति और भी ज़्यादा खराब हो जाती है। बर्थ कण्ट्रोल की दवा बंद करने से भी बहुत असर पड़ता है। 

  3. दवाएं (Medications)

    कुछ दवाएं, जैसे कि एपिलेप्सी (मिर्गी) और डिप्रेशन(अवसाद) के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, इससे भी मुहांसे हो सकते हैं।

  4. मेकअप (Excessive use of make-up)

  5. स्किन पर प्रेशर पड़ने या खरोच आने से (injury to skin)

    बाइक के हेलमेट या बैकपैक्स के कारण स्किन पर प्रेशर पड़ने से भी मुहांसे की स्थिति और खराब हो जाती है।

  6. फैमिली हिस्ट्री (Family history)

    अगर आपकी फैमिली में किसी को मुहांसे हैं, तो आपको होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

कील-मुहांसे या पिंपल्स का इलाज

Acne (Pimples) treatment in hindi

Keel muhase ya pimples ka ilaj in hindi

use crea for muhase treatment in hindi

कई प्रकार के टोपिकल (Topical - सामयिक) और ओरल मेडिकेशन (oral medication) हैं जो आपकी स्किन को ठीक करने में मदद कर सकती हैं।

इलाज के लिए आप कई तरह की मुहासे की दवा की और भी रुख कर सकते हैं, जैसे कि केमिकल पील्स (chemical peels), लेज़र और लाइट ट्रीटमेंट्स (laser and light treatments) या फिर एक्सट्रेक्शंस (extractions)। 

मुहांसे के ट्रीटमेंट को तीन केटेगरी डिवाइड किया जा सकता है:

  • टोपिकल (आपकी त्वचा पर लगाई जाने वाली दवाएं, या बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं),
  • सिस्टमिक (खाने वाली दवाएं जो  डॉक्टर ने लिखी हो) और
  • प्रोसिजरल (सैलून या डॉक्टर के यहां किए गए उपचार)

आइये जानते है कील-मुहासे के ट्रीटमेंट ऑप्शंस:

1. कील-मुहासे के लिए ओवर-द-काउंटर ट्रीटमेंट्स (OTC treatment)

ओवर-द-काउंटर एक्ने ट्रीटमेंट वैसे प्रोडक्ट होते हैं जो आप दवा की दुकान, किराने की दुकान, स्किन स्पा, या कॉस्मेटिक स्टोर से खरीद सकते हैं।

ऐसे OTC एक्ने प्रोडक्ट को जो वाकई अपना असर दिखाए, उसे खोजने एक लिए आपको प्रोडक्ट के इंग्रेडिएंट (ingredient) पर ध्यान देना होगा।

सबसे अच्छा OTC ट्रीटमेंट एक्ने प्रोडक्ट में कम से कम नीचे दिए गए किसी एक इंग्रेडिएंट का होना ज़रूरी है:

  • सलिसीक्लिक एसिड (Salicylic acid)
  • बेंजोईल पेरोक्साइड (Benzoyl peroxide)
  • सल्फर (Sulfur)
  • ग्लाइकोलिक एसिड (Glycolic acid)

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस प्रकार के प्रोडक्ट का उपयोग करते हैं, चाहे वो क्लीन्ज़र हो, टोनर हो, क्लींजिंग पैड या लोशन हो, जब तक कि इसमें ऊपर दिए गए कोई एक्ने ट्रीटमेंट इंग्रेडिएंट न हो।

2. कील-मुहासे के लिए प्रिस्क्रिप्शन टोपिकल मेडिकेशन (Prescription Topical medication)

अगर OTC प्रोडक्ट से एक्ने बेहतर नहीं हो रहा है, तो प्रिस्क्रिप्शन टोपिकल मेडिकेशन एक अच्छा ऑप्शन है।

इन दवाओं का उपयोग हल्के ब्रेकआउट्स या फिर गंभीर एक्ने को ठीक करने के लिए किया जा सकता है, या उसके बीच में कुछ भी।

टोपिकल एक्ने ट्रीटमेंट कई अलग-अलग रूपों में आते हैं, लाइट जेल (Light gel) और क्रीमी लोशन (Creme lotion) से लेकर टोनर जैसे सोल्युशन से लेकर मेडीकेटेड पैड्स तक।

प्रिस्क्रिप्शन द्वारा उपलब्ध टोपिकल ट्रीटमेंट्स में शामिल हैं:

  • एज़ेलैक एसिड (Azelaic acid)
  • बेंज़ोयल पेरोक्साइड (Benzoyl peroxide - prescription strength)
  • टोपिकल रेटिनोइड्स (Topical retinoids)
  • टोपिकल एंटीबायोटिक (Topical antibiotics)
  • कॉम्बिनेशन एक्ने मेडिकेशन (Combination acne medications)

3. कील-मुहासे के लिए ओरल मेडिकेशन (Oral medication)

ओरल मेडिकेशन आंतरिक रूप से काम करती हैं। ये दवाएं आमतौर पर गंभीर ब्रेकआउट या सिस्टिक एक्ने या मुहासे के निशान के लिए प्रेसक्राईब की जाती हैं।

अगर टोपिकल ट्रीटमेंट से हल्के एक्ने ठीक नहीं होते हैं तब भी ओरल मेडिकेशन ली जाती है।

ओरल एक्ने ट्रीटमेंट केवल प्रिस्क्रिप्शन द्वारा उपलब्ध है और इसमें शामिल है:

  • ओरल एंटीबायोटिक्स (Oral antibiotics)
  • हार्मोनल ट्रीटमेंट्स - बर्थ कंट्रोल पिल्स (Birth control pills), स्पाईरोनोलैक्टोन (Spironolactone)
  • आयज़ोट्रिटिनॉइन (Isotretinoin)

4. कील-मुहासे के लिए प्रोफेशनल प्रोसीजर्स (Professional Procedures)

प्रोसिजरल ट्रीटमेंट में डर्मेटोलॉजिस्ट (Dermatologist) द्वारा सलून या उनके ऑफिस में थेरेपी की जाती है।

ये हल्के से लेकर गंभीर एक्ने को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ प्रोफेशनल एक्ने ट्रीटमेंट जो आप करवा सकते हैं:

  • कोमेडो एक्सट्रेक्शंस (Comedo extractions)
  • एक्ने ट्रीटमेंट फेशियल (Acne treatment facials)
  • केमिकल पील्स (Chemical peels)
  • मइक्रोडर्माब्रेशन (Microdermabrasion)
  • फोटोथेरपी (Phototherapy)
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन (Corticosteroid injections)
  • एक्ने सर्जरी (Acne surgery)

डर्मेटोलॉजिस्ट एक मेडिकल डॉक्टर होता है जो स्किन से जुड़ी बीमारी, समस्याएं और उसे ठीक करने में माहिर होता है।

क्यूंकि एक्ने को ठीक करने के लिए डॉक्टर से मश्वरा लेना आपके लिए बहुत अच्छा होगा।

आपका डर्मेटोलॉजिस्ट एक्ने को ठीक करने के लिए आपको कई तरह के ऑप्शनस दे सकता है और साथ ही सलाह और समर्थन भी कर सकता है।

5. कील-मुहासे के लिए इशथिटीशियन (Esthetician) को दिखाना

एक इशथिटीशियन, या स्किन केयर थेरेपिस्ट, स्किन के उपचार और सौंदर्यीकरण में माहिर होता हैं। इशथिटीशियन मेडिकल डॉक्टर नहीं होते हैं; बल्कि वे फेशियल और वैक्सिंग जैसे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट करते हैं।

इशथिटीशियन स्किन स्पा में काम करते हैं। कई डर्मटोलॉजी ऑफिस और मेडी-स्पा भी डॉक्टर के सुपरविज़न में सपोर्टटिव थेरेपी देने के लिए इशथिटीशियन को रखते करते हैं।

इशथिटीशियन को दिखाना एक आवश्यकता नहीं होती है (जैसे कि एक स्किन एक्सपर्ट को दिखाना), इसलिए ये मत सोचिये की आपको लोकल स्किन स्पा में ज़रूर जाना चाहिए।

लेकिन अगर आपको ऐसा लगता है कि स्किन केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने के लिए आपको मदद की ज़रूरत है, या आपके पास कुछ सख्त ब्लैकहेड्स हैं जिन्हें आप निकालना चाहते हैं, तो एक इशथिटीशियन आपके लिए स्किन केयर प्रोफेशनल हो सकता है।

बस याद रखें कि कुछ ऐसी चीजें हैं जो एक इशथिटीशियन नहीं कर सकता है, जैसे कि एक्ने की दवाएं प्रेसक्राईब करना या सख्त एक्ने को ठीक करना।

अपने डॉक्टर से बात करें कि किस तरह के ट्रीटमेंट के तरीके से आपके मुहांसे ठीक हो सकते हैं।

अपनी दवाएं प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार लें। अपने डॉक्टर को यह बताना सुनिश्चित करें कि क्या आपको लगता है कि अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए आपके द्वारा ली जाने वाली दवाएं आपके मुहांसे को और भी बुरा बनाती हैं।

 

कील-मुहांसे या पिंपल्स से बचाव और इलाज़ के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव

Lifestyles changes for treatment and prevention of Acne (Pimples) in hindi

Keel muhase ya pimples se bachav aur ilaj ke liye lifestyle mein badlav in hindi

paani peeyein acne (muhase) se bachne ke liye

आप अपनी स्किन की अच्छी देखभाल करके चेहरे पर दाने को होने से और दाग-धब्बों से बचाने में मदद कर सकते हैं।

नीचे दिए गए लाइफस्टाइल में बदलाव आपको कील-मुहासे से बचा सकते है:

  1. अपना चेहरा ठीक से धोएं (Wash your face regularly)

    • अपनी स्किन को हल्के साबुन या क्लीन्ज़र से दिन में दो बार साफ़ करें - एक बार सुबह और एक बार रात में।

    • हार्ड सोप और रफ़ पैड से बचें। स्किन की स्क्रबिंग बहुत ज़ोर से करने से मुहांसे हो सकते हैं।

    • अपने पूरे चेहरे को जबड़े के नीचे से लेकर हेयरलाइन तक धोएं और अच्छी तरह से साफ करें।

    • हल्के साबुन और पानी से मेकअप को धीरे से हटाएं।

    • अपने बालों को नियमित रूप से धोएं। अगर आपके बाल ऑयली हैं, तो आप नियमित रूप से बाल धो सकते हैं।

  2. अपनी स्किन टाइप को जानें (Know your skin type)

    किसी को भी पिंपल्स हो सकते हैं चाहे आपकी स्किन कैसे भी हो।

    ऑयली स्किन में सबसे ज़्यादा पिंपल्स होते हैं। कॉम्बिनेशन स्किन, एक अन्य प्रकार की स्किन है जिसके कारण पिंपल्स हो सकते हैं।

    कॉम्बिनेशन स्किन का मतलब है कि आपकी स्किन में ड्राई और ऑयली दोनों एरिया है। ऑयली एरिया आपके माथे, नाक और ठुड्डी पर होते हैं।

    अपने स्किन टाइप को जानने से स्किन प्रोडक्ट्स चुनने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए, अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो "नॉन-कॉमेडोजेनिक (Non-comedogenic) " या "नॉन-एक्ने या पिम्पल्सिक (Pimplesgenic) " प्रोडक्ट का चयन करें।

    ये प्रोडक्ट इस तरह से बनाए गए हैं कि ये मुहांसे पैदा नहीं करते हैं। आप ऑयल-फ्री प्रोडक्ट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

  3. स्किन को मॉइस्चराइज करें (Moisturise your skin)

    मॉइस्चराइज़र स्किन को हाइड्रेटेड रखती है। लेकिन कई मॉइस्चराइज़र में तेल, सिंथेटिक फ्रेग्रेन्स, या अन्य तत्व होते हैं जो स्किन को परेशान कर सकते हैं और पिंपल्स का कारण बन सकते हैं।

    पिंपल्स को रोकने में मदद करने के लिए, अपने चेहरे को धोने के बाद या जब स्किन ड्राई लग रही हो, तब फ्रेग्रेन्स फ्री "नॉन-कॉमेडोजेनिक" या "नॉन-मुहांसेजेनिक" मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।

  4. ज़्यादा मेकअप करने से बचें (Avoid excessive make-up)

    पिंपल्स को कवर करने के लिए मेकअप का उपयोग करना लुभावना लगता है। हालांकि, ऐसा करने से पोर्स बंद हो सकते हैं और मुहांसे और खराब हो सकते हैं।

    जितना हो सके उतना नेचुरल रहने की कोशिश करें। जब आप मेकअप करें तो ऑयली, हेवी फाउंडेशन से बचें, और उन प्रोडक्ट्स का उपयोग करें जो "नॉन-कॉमेडोजेनिक" या "नॉन-मुहांसेजेनिक", और फ्रेग्रेन्स फ्री हो।

    ग्रीज़ी या ऑयली शैम्पू, बॉडी वॉश, शेविंग क्रीम और हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स सभी पिंपल्स का कारण हो सकते हैं। दाना होने से रोकने में मदद करने के लिए, आयल-फ्री, "नॉन-कॉमेडोजेनिक" ऑप्शन चुनें।

  5. हाइड्रेटेड (Hydrated) रहें

    अगर आप हाइड्रेटेड नहीं रहते हैं, तो आपका शरीर आपकी स्किन की ऑयल ग्लैंड को अधिक तेल बनाने के लिए संकेत दे सकता है।

    डिहाइड्रेशन (Dehydration) आपकी स्किन को डल रूप देता है और सूजन और लालिमा को बढ़ा देता है।

    अपने शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखने के लिए, हर दिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

    अगर आप प्रेग्नेंट हैं या ब्रेस्टफीड(Breastfeed) करा रही हैं, या आप गर्म, नम वातावरण में समय बिताती हैं, तो व्यायाम के बाद अधिक पानी पिएं।

  6. अपना चेहरा टच न करें (Avoid touching your face)

    आपके हाथ पूरे दिन लगातार जमी हुई गंदगी और बैक्टीरिया का सामना करते हैं। ऐसे में जब आप हर बार अपने चेहरे को टच करते हैं तो पोर्स के अंदर जमी गंदगी आपकी स्किन में आ जाती है।

    अपने हाथों को नियमित रूप से धोएं, और जितना संभव हो सके अपने चेहरे को टच करने की कोशिश कम करें 

  7. पिंपल को फोड़ने की कोशिश न करें (Avoid squeezing pimples)

    आपको अपनी नाक पर हुए व्हाइटहेड को फोड़ने का बहुत मन करेगा, लेकिन ऐसा न करें।

    पिंपल को फोड़ने से ब्लीडिंग हो सकती है या सख्त घाव या इन्फेक्शन हो सकता है।

    यह सूजन को बढ़ा सकता है और आसपास के पोर्स को बंद कर सकता है, जिससे आपकी पिंपल की समस्या और भी बदतर हो सकती है।

  8. धूप में जाने से बचें (Avoid direct sunlight)

    मुहांसे का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई दवाओं से सनबर्न होने का खतरा बढ़ सकता है।बहुत से लोग सोचते हैं कि सूरज मुहांसे ठीक करने में मदद करता है, क्योंकि धूप की लालिमा में मुहांसे के घाव कम दिखाई देते हैं। लेकिन, बहुत अधिक धूप आपमें स्किन कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकता है साथ ही स्किन पर उम्र से पहले झुर्रियां आ सकती हैं। जब आप बाहर जा रहे हो तो सनस्क्रीन का यूज़ करें जो कम से कम SPF15 हो।

    इसके अलावा, जितना हो सके छाया में रहने की कोशिश करें।

  9. कुछ खाद्य पदार्थों से बचें (Avoid certian food products)

    2010 की समीक्षा के अनुसार, उच्च ग्लाइसिमिक (High glycemic)खाना खाने से मुहांसे हो सकते हैं। उच्च ग्लाइसिमिक खाद्य पदार्थ और पेय ( Foods and Beverages) जैसे चिप्स, मैदा से बना हुआ बेक खाना, और सॉफ्ट ड्रिंक ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा देते हैं और अक्सर कम ग्लाइसिमिक खाद्य पदार्थों की तुलना में कम पौष्टिक होते हैं।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करने से पिंपल्स हो सकते हैं।

  10. तनाव कम करें (Reduce stress)

    तनाव के कारण पिंपल्स नहीं होते हैं, लेकिन यह उन्हें और ख़राब कर सकते हैं।

    अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (American acedemy of dermatology) के अनुसार, शोध से पता चला है कि जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर अधिक तेल-उत्तेजक हार्मोन का उत्पादन करता है।

 

सारांश

हर किसी को कभी न कभी पिंपल्स होते हैं। कई चीज़ो से पिंपल्स हो सकते हैं, जैसे हार्मोन, तनाव, जेनेटिक्स, और डाइट।

कुछ दवाएं ब्रेकआउट को भी ट्रिगर कर सकती हैं। शुरुआत में तो पिंपल्स सताते हैं लेकिन जब स्थिति ख़राब हो जाती है तो वे स्थायी रूप से दुखी, गंभीर चिंता या डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं।

रोकथाम के प्रयास मदद कर सकते हैं, लेकिन आसानी से चले जाये ज़रूरी नहीं है। 

जो भी प्लान आप पिंपल्स ठीक करने के लिए चुनते हैं, उसके लिए धैर्य और स्थिरता अहम है, ज़्यादातर ट्रीटमेन्ट के असर होने में कई हफ्ते लग जाते हैं।