गर्भावस्था के दूसरे महीने की सम्पूर्ण जानकारी

All about second month of pregnancy in hindi

Garbhavastha ka dusra mahina


एक नज़र

  • गर्भावस्था का दूसरा महीना, दरअसल गर्भावधि में पांचवे से लेकर आठवें हफ्ते तक का समय माना जाता है।
  • गर्भावस्था का दूसरा महीना गर्भवती महिला के लिए मूड स्विंग्स से भरा होता है।
  • अधिकतर महिलाओं में प्रेग्नेंसी के 2 महीने में मॉर्निंग सिकनेस के कारण मुंह में लार अधिक बनने की परेशानी भी देखी जा सकती है।
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Introduction

Garbhavastha_ka_dusra_mahina

प्रेग्नेंसी का समय शुरू होते ही महिला विभिन्न प्रकार की भावनाओं, आशंकाओं के साथ अनोखी पुलक और खुशी के मिले-जुले अहसासों से गुजरती है।

इस समय आने वाले शिशु का रूप, उसका और स्वयं का स्वास्थ्य संबंधी अनेक प्रश्न और जिज्ञासाएँ मन में घर बना लेती हैं।

इसलिए गर्भवस्था के दूसरे महीने (second month of pregnancy in hindi) से जुड़ी हर संभव जानकारी को इस लेख में देने का प्रयास किया जा रहा है।

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इस लेख़ में

  1. 1.गर्भावस्था के दूसरे महीना कब शुरू होता है?
  2. 2.गर्भावस्था के दूसरे महीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?
  3. 3.गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?
  4. 4.गर्भावस्था के दूसरे महीने में शारीरिक परिवर्तन क्या हो सकते हैं?
  5. 5.गर्भावस्था के दूसरे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?
  6. 6.गर्भावस्था के दूसरे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?
  7. 7.गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं?
  8. 8.गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स कैसे करें?
  9. 9.गर्भावस्था के दूसरे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?
  10. 10.गर्भावस्था के दूसरे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?
  11. 11.गर्भावस्था के दूसरे में महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन
  12. 12.गर्भावस्था के दूसरे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?
  13. 13.गर्भावस्था के दूसरे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?
  14. 14.प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?
 

गर्भावस्था के दूसरे महीना कब शुरू होता है?

When does the second month of pregnancy start in hindi

Pregnancy ka dusra mahina kab shuru hota hai in hindi

गर्भावस्था का दूसरा महीना, दरअसल गर्भावधि (gestation age) में पांचवे से लेकर आठवें हफ्ते तक का समय माना जाता है।

इस अर्थ में गर्भवस्था के चौथे हफ्ते के बाद, यानि पांचवें सप्ताह से गर्भवस्था का दूसरा महीना शुरू हो जाता है।

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गर्भावस्था के दूसरे महीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?

What are the symptoms of pregnancy in second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke dusre mahine ke Lakshan kya ho sakte hain in hindi

जब महिला गर्भावस्था के 2 महीने में प्रवेश करती है, तब उसके शरीर और गर्भ में विभिन्न प्रकार के परिवर्तन होते हैं।

इन्हें गर्भावस्था के 2 महीने के लक्षण (symptoms of second month of pregnancy in hindi) के रूप में देखा जाता है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने के लक्षण निम्न हो सकते हैं : -

1. घबराहट (Anxiety in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के 2 महीने में गर्भवती को पहले की तुलना में अधिक घबराहट होती है।

आने वाले शिशु के कारण जीवन में आने वाले बदलाव को सोचकर, इस तरह की घबराहट अधिक महसूस होती है।

इस समय तक आने वाले बच्चे की माँ के रूप में महिला इस नए परिवर्तन को स्वीकार कर चुकी होती है।

गर्भवती महिला, आने वाले जीवन और स्थितियों का सामना करने के लिए स्वयं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करती है।

इसी तैयारी में महिला को घबराहट और उत्तेजना का सामना करना पड़ता है।

इसलिए इस समय गर्भवती महिला को अपने जीवनसाथी की मदद लेनी चाहिए।

उन्हें भी अपने गर्भकाल का हिस्सा बनाकर न केवल महिला स्वयं के लिए मानसिक और भावनात्मक संतुलन तैयार करती है, बल्कि पुरुष साथी को भी इस नए रूप में ढलने का समय और सहयोग देती है।

2. मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness in second month of pregnancy in hindi)

अधिकतर यह देखा गया है कि गर्भवती महिला को दूसरे महीने में भी मॉर्निंग सिकनेस का सामना करना पड़ता है।

वैसे तो इस स्थिति का सामना महिला को दिन के किसी भी समय करना पड़ सकता है, लेकिन अधिकतर महिलाओं को सुबह उठते ही या फिर उठने के कुछ मिनट बाद उल्टी जैसा महसूस होता है।

कभी-कभी ये उल्टियाँ फॉल्स अलार्म की भांति होती है, जिन्हें साधारण भाषा में उबकाई आना कहते हैं।

गर्भावस्था के 2 महीने में यह स्थिति पहले की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।

3. मूड स्विंग्स (Mood swings in second month of pregnancy in hindi)

अक्सर यह देखा जाता है कि गर्भावस्था का दूसरा महीना गर्भवती महिला के लिए मूड स्विंग्स से भरा होता है।

इस समय महिला को अचानक किसी भी बात पर घबराहट, उत्तेजना, क्रोध, खुशी या मायूसी का बिना कारण प्रदर्शन कर सकती है।

इसलिए इसे गर्भावस्था के दूसरे महीने में मूड स्विंग्स (mood swings in second month of pregnancy in hindi) समझते हुए, परिवार वालों को गर्भवती महिला को इनसे उबरने में मदद करनी चाहिए।

4. कुछ खाने की ललक उठना (Cravings in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के दूसरे महीने में कुछ खाने की ललक उठना एक साधारण बात मानी जाती है।

लेकिन अगर महिला मिट्टी, चौक जैसी चीज़ें खाने की इच्छा दिखाये तब प्रेग्नेंसी डॉक्टर को दिखाया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा शरीर में किसी पौष्टिक तत्व की कमी के कारण भी हो सकता है।

5. स्तनों के आकार में परिवर्तन (Increasing size of breast in second month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल का दूसरा महीना आरंभ होने के बाद महिलाओं को अक्सर अपने स्तनों में कसावट महसूस होने लगती है।

यह गर्भावस्था का दूसरा महीना(second month of pregnancy in hindi) शुरू होने का लक्षण माना जाता है।

इसके साथ ही स्तनों में संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है जिसके कारण हल्का-सा छूने पर भी दर्द महसूस हो सकता है।

इस अवस्था का कारण प्रेग्नेंसी हार्मोन यानि प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजेन के बढ़ने के कारण होता है, जो इस समय गर्भवती महिला के स्तनों में फैट जमा करने में भी मदद करते हैं।

इसी कारण स्तनों के आकार और संरचना में परिवर्तन आने लगता है।

इस प्रकार महिला गर्भकाल का एक-एक चरण पूरा करती है।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है?

How baby grows during the second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke dusre mahine mein baby ka vikas kaise hota hai in hindi

गर्भावस्था के दूसरे महीने में, महिला के गर्भ में भ्रूण विकसित होकर एक आकार के रूप में परिवर्तित होने लगता है।

इस समय गर्भ में विकसित हो रहे भ्रूण में आने वाले अंतर इस प्रकार देखे जा सकते हैं : -

1. गर्भावस्था के पहले महीने में शिशु एक मुड़ी हुई आकृति होता है, जो दूसरे महीने में सीधी हो जाती है।

इसके साथ ही एक पुंछ जैसी आकृति विलुप्त होकर मानव आकार का निर्माण शुरू होने लगता है।

2. प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में भ्रूण का आकार एक किशमिश के दाने से बढ़कर एक-डेढ़ इंच तक हो सकता है।

इसके साथ ही वजन भी 14 ग्राम तक बढ़ जाता है।

3. भ्रूण के शरीर में हर पल लाखों कोशिकाओं का निर्माण होने लगता है जो आगे चलकर विभिन्न अंगों में परिवर्तित हो जाती हैं।

4. गर्भावस्था के दूसरे महीने में भ्रूण के चेहरे के हिस्सों का निर्माण होने लगता है और इसके साथ ही ज़ुबान और नाक भी बन जाते हैं।

5. आँखों के गड्ढे बनकर पलकों से ढंकें होते हैं, जो आगे के महीनों में खुल जाते हैं।

6. कानों का स्पष्ट निर्माण हो जाता है।

7. हाथ और पैरों की छोटी-छोटी उँगलियों की संरचना शुरू हो जाती है, जो आगे के समय में विकसित होने लगती है।

8. भ्रूण बहुत हल्के-हल्के हिलना शुरू कर देता है, लेकिन इस हलचल का एहसास माँ को नहीं हो पाता है।

9. गर्भावस्था के दूसरे महीने के अंत तक भ्रूण के शरीर में हड्डियों का ढाँचा बन जाता है और हाथ पैर अपने स्थान पर बनने शुरू हो जाता है।

10. इसके साथ ही गर्भनाल बन जाती है और गर्भ में स्थिति भ्रूण को माँ के माध्यम से पोषण देना शुरू कर देती है।

11. हृदय के आकार की बनावट बन जाती है और इसके बाद लिवर भी बन जाता है।

12. गले में आवाज़ नली की भी बनावट शुरू होने लगती है।

13. मस्तिष्क के दायें और बाएँ भाग का वह हिस्सा जिसे हेमिस्फेयर्स कहा जाता है, बन जाता है।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु के आंतरिक विकास के रूप में महत्वपूर्ण अंग और नरम हड्डियों का विकास शुरू हो जाता है।

इसके साथ ही सभी बाहरी अंग भी विकसित होने शुरू हो जाते हैं।

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गर्भावस्था के दूसरे महीने में शारीरिक परिवर्तन क्या हो सकते हैं?

What would be Physical changes in the second month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke second month mein kya physical changes ho sakte hain in hindi

गर्भवती महिला के शरीर में दूसरे महीने में निम्न शारीरिक परिवर्तन हो सकते हैं : -

1. योनि से स्त्राव में अंतर आना (Increased vaginal discharge in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के दूसरे महीने में महिलाओं को योनि से होने वाले स्त्राव में वृद्धि महसूस हो सकती है।

यह स्त्राव हल्के सफ़ेद रंग का हो सकता है।

ऐसा शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन के कारण हो सकता है।

इसके अतिरिक्त योनि में दर्द, खुजली या हल्के रक्त्स्त्राव जैसी परेशानी भी हो सकती है।

2. पानी पीने की इच्छा में वृद्धि (Increased craving to drink water in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था में महिला को बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है।

इस कारण अधिकतर महिलाओं को प्यास भी अधिक लगती है और उनकी पानी पीने की इच्छा में वृद्धि भी हो सकती है।

3. पेट के निचले हिस्से में दर्द होना (Stomach pain in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के पहले महीने के बाद गर्भाशय में फैलाव आना शुरू हो जाता है।

इस कारण गर्भावस्था के 2 महीने में पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है।

4. मुंह में लार का बनना (Saliva in second month of pregnancy in hindi)

अधिकतर महिलाओं में प्रेग्नेंसी के 2 महीने में मॉर्निंग सिकनेस के कारण मुंह में लार अधिक बनने की परेशानी भी देखी जा सकती है।

5. कब्ज़ होना (Constipation in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के 2 महीने में आंतों पर अधिक ज़ोर पड़ने के कारण पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है।

इसके कारण महिला को कभी-कभी कब्ज़ जैसी परेशानी भी हो सकती है।

6. नाक बंद होना (Nasal congestion in second month of pregnancy in hindi)

कुछ गर्भवती महिलाओं को तापमान में परिवर्तन या नमी होने पर गर्भावस्था के 2 महीने में नाक बंद होने की शिकायत भी हो सकती है।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए?

Diet plan in second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke dusre mahine mein lady ko kya khana chahiye in hindi

सामान्य तौर पर गर्भावस्था में महिला को पौष्टिक गुणों से भरपूर वस्तुओं का ही सेवन करना चाहिए, फिर भी गर्भावस्था के 2 महीने में गर्भवती महिला के भोजन में का निम्न सात पौष्टिक गुणों का होना बहुत ज़रूरी होता है।

गर्भावस्था के दूसरे महीने के डाइट प्लान में निम्न पोषक तत्व का शामिल होना जरुरी होता है : -

1. फोलिक एसिड (Folic acid in second month of pregnancy in hindi)

फोलिक एसिड वह सप्प्लिमेंट है जो न केवल उन महिलाओं के लिए लाभदायक होता है जो गर्भधारण का प्रयास कर रही हैं बल्कि गर्भधारण करने के बाद पहले तीन महीने तक का सफर भी तय कर चुकी हैं।

दरअसल अकेला फोलिक एसिड, विटामिन ए, बी से मिलने वाले लाभों की पूर्ति भी करता है।

गर्भ के दूसरे महीने में फोलिक एसिड का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु की रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क के विकास में लाभ होता है।

इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जी, अंडे, फल, मेवे और दालें व साबुत अनाज अधिक से अधिक मात्रा में लिया जा सकता है।

2. कैल्शियम (Calcium in second month of pregnancy in hindi)

किसी भी गर्भवती महिला के लिए दूसरे महीने में कैल्शियम का सेवन बहुत ज़रूरी होता है।

इस समय कम से कम 1000 मिग्रा कैल्शियम का सेवन अनिवार्य होता है।

इसका कारण है कि गर्भवस्था के दूसरे महीने में भ्रूण की हड्डियों का विकास होता है और इसके लिए गर्भवती माँ का कैल्शियम का सेवन करना ज़रूरी होता है।

गर्भ के दूसरे महीने में शरीर को ज़रूरी कैल्शियम पहुंचाने के लिए महिला को हरी पत्तेदार सब्जियाँ, पत्ता गोभी और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही, पनीर आदि का सेवन करना चाहिए।

3. आयरन (Iron in second month of pregnancy in hindi)

महिला के लिए गर्भवस्था का दूसरा महीना शुरू होने के बाद आयरन नाम के अनुपूरक का लेना भी अनिवार्य हो जाता है।

गर्भ के शिशु के लिए आयरन उसके शरीर में बनने वाले रक्त के लिए बहुत ज़रूरी होता है।

इसके अलावा गर्भावस्था के दूसरे महीने तक महिला को मॉर्निंग सिकनेस और थकान आदि का सामना करना पड़ता है।

इसलिए गर्भावस्था के 2 महीने में महिला को आयरन से भरपूर भोजन जैसे फल, सूखे मेवे और हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, मेथी, चुकंदर का सेवन ज़रूरी होता है।

अगर गर्भवती मांसाहारी भोजन ले सकती हैं तब चिकन और मछ्ली का सेवन भी लाभदायक हो सकता है।

4. ज़िंक (Zinc in second month of pregnancy in hindi)

एक सामान्य व्यक्ति के लिए ज़िंक का काम शरीर में पाचन तंत्र में एसिड व अन्य कामों के लिए जरूरी होता है।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में महिला को ज़िंक की प्राप्ति के लिए हर प्रकार की सब्जियाँ विशेषकर फलियाँ और मुर्गा व मछ्ली का सेवन करना चाहिए।

गर्भावस्था में ज़िंक की कमी न होने देने के लिए इन वस्तुओं का सेवन प्रतिदिन अनिवार्य होता है।

5. प्रोटीन (Protein in second month of pregnancy in hindi)

प्रोटीन की ज़रूरत प्रत्येक शरीर को होती है।

इसे सरल भाषा में शरीर के निर्माण के लिए अनिवार्य भोजन माना जाता है।

इसलिए गर्भवस्था के दूसरे महीने में प्रोटीन (protein in second month of pregnancy in hindi) लेना हर गर्भवती महिला के लिए ज़रूरी होता है।

इसके लिए महिला सभी दालें, दूध और दूध से बनी चीज़ें तो ले ही सकती हैं और अगर संभव हो तब अंडा भी लेना चाहिए।

6. फाइबर (Fiber in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के दूसरे महीने में कब्ज़ की परेशानी होना एक सामान्य बात है।

इसलिए इस समय फाइबर युक्त भोजन का लेना बहुत जरूरी है।

इससे खाये हुए भोजन का पाचन सरलता से हो जाता है और कब्ज़ की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

इसके लिए गाजर, पता गोभी, दालें, और संतरा व केला जैसे फल अधिक मात्रा में खाने चाहिए।

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गर्भावस्था के दूसरे महीने में किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?

What foods to avoid in the second month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke second month mein kya nahin khana chahiye in hindi

गर्भवती महिला को प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में कुछ प्रकार के भोजन व खाद्य वस्तुओं से परहेज करना चाहिए।

इसका कारण इनके सेवन से लाभ के स्थान पर हानि होने का डर होता है।

इसलिए गर्भावस्था के दूसरे महीने में जिन खाद्य पदार्थों से परहेज करें वो इस प्रकार हैं : -

1. नरम चीज़ (Soft cheese in second month of pregnancy in hindi)

सॉफ्ट चीज़ के नाम से मिलने वाला यह चीज़ अधिकतर ब्रेड और बिस्किट पर लगाने के काम आता है।

इसे उस किसी भी खाद्य वस्तु पर नहीं लगाया जाता है जिसे पकाना होता है।

चीज़ को बाज़ार में आने के बाद अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता है क्योंकि यह जल्दी खराब होने वाली चीज़ है।

इसलिए दूसरे माह की गर्भवती महिला को सॉफ्ट चीज़ का सेवन नहीं करना चाहिए।

2. कच्चा मांस (Processed meat in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवती होने के बाद अपने भोजन की थाली में कच्चे मांस को शामिल करने से बचना चाहिए, विशेषकर गर्भावस्था के दूसरे महीने में तो बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।

इसका कारण यह है कि कच्चे मांस में लिस्टेरिया नाम का बैक्टीरिया होता है जो गर्भ के शिशु के लिए बहुत हानिकारक होता है।

3. मीट स्प्रेड (Meat spreads in second month of pregnancy in hindi)

कच्चे माँस कि भांति मीट स्प्रैड में भी हानिकारक बैक्टीरिया होता है इसलिए गर्भवती महिला को दूसरे माह के गर्भ में इसके सेवन से भी बचना चाहिए।

4. कच्चे अंडे (Raw eggs in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के दूसरे माह में कच्चे अंडों का सेवन करने से गर्भवती महिला को दस्त व उल्टी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इसका कारण कच्चे अंडों में साल्मोनेला बैक्टीरिया का महिला के शरीर में पहुँच कर नुकसान पहुंचाना है।

इसके कारण गर्भ के शिशु के विकास में भी रुकावट आ सकती है।

इसके साथ ही इस समय हाफ-बोयल्ड या आधे पके अंडे भी नहीं खाने चाहिए।

5. अनपाश्चराइज्ड दूध (Unpasteurized milk in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दूसरे महीने में अन पाश्चराइज्ड दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

इसका कारण है कि इस दूध में छोटे जैविक किटाणु, पाथोगंस और सेमोनेला जैसे बैक्टीरिया होते है जो न केवल गर्भवती महिला के लिए बल्कि गर्भ के शिशु के लिए भी हानिकारक होते हैं।

6. कच्ची मछ्ली (Raw fish in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला को गर्भावस्था के 2 महीने में कच्ची मछ्ली का सेवन नहीं करना चाहिए।

कच्ची मछ्ली के किसी भी रूप जैसे क्रैब, प्रौन, श्रीम्प या जिसमें भी पारे की अधिक मात्रा हो, उनका सेवन नहीं करना चाहिए।

इनके सेवन से महिला के गर्भपात होने की संभावना बन जाती है।

7. धूम्रपान व मदिरापान (Smoking and drinking in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवती महिला के लिए धूम्रपान व मदिरापान का सेवन करने के लिए सख्ती से मना किया जाता है।

धूम्रपान या मदिरापान करने से गर्भवती महिला को गर्भकाल में गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

इसमें न केवल गर्भवती महिला व गर्भ के शिशु के स्वास्थ्य व विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स करना चाहिए या नहीं?

Sex in second month of Pregnancy in hindi

kya pregnancy ke second month mein sex kar sakte hain in hindi

गर्भावस्था में सेक्स करना चाहिए या नहीं, इस संबंध में पति-पत्नी के मन में संशय बना रहता है।

ऐसे में आप निम्न सवालों के जवाब के आधार पर ही गर्भवती महिला, गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स (sex in second month of pregnancy in hindi) के बारे में हाँ या न के निर्णय ले सकती हैं!

1. अगर पहले गर्भपात हो चुका है तब नहीं

2. अगर गर्भधारण के दूसरे महीने में योनि से खून आ रहा है तब नहीं

3. अगर इस समय पेट में दर्द हो रहा है या फिर मरोड़ जैसा महसूस हो रहा है तब नहीं

4. अगर प्रेग्नेंसी डॉक्टर ने जांच में गर्भनाल की स्थिति को नीचे की ओर बतया हो, तब नहीं

5. जब गर्भधारण की स्थिति में भ्रूण की संख्या एक से अधिक हो तब नहीं

इसके अलावा गर्भधारण करने के बाद महिला के शरीर में विभिन्न प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन आते हैं।

इसके कारण महिलाएं गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स प्रक्रिया में स्वयं को असहज महसूस कर सकती हैं।

इसके अतिरिक्त इस अवस्था में सेक्स करने के बाद महिला गर्भाशय में मरोड़ जैसी स्थिति भी महसूस कर सकती है जो लगभग एक घंटे तक रह सकती है।

अगर इस स्थिति में किसी भी तरह का स्त्राव या रक्त स्त्राव न हो तब इससे सामान्य स्थिति माना जा सकता है।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स कैसे करें?

How you can do sex in second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke dusre mahine mein sex kaise karein in hindi

गर्भावस्था के दूसरे महीने में सेक्स करने के लिए टिप्स : -

1. प्रेगेंसी के दूसरे महीने में सेक्स करने के लिए गर्भवती महिला ऊपर रहकर सेक्स का आनंद ले सकती हैं।

इससे उनके ऊपर पति के शरीर का भार महिला के पेट पर नहीं पड़ता है।

2. जब दूसरे महीने के गर्भ युक्त गर्भवती महिला पति के साथ खड़े होकर भी सेक्स का आनंद ले सकती हैं।

इसमें गर्भवती महिला को पति अपनी गोद में लेकर उनके साथ इस क्रिया को प्रसन्नता पूर्वक सम्पन्न कर सकते हैं।

3. जब महिला को दो महीने का गर्भ हो तब वह सेक्स करने के लिए पलंग के किनारे पर लेट कर अपने पाँव फर्श पर चौड़े रख सकती है।

इस पोजीशन में पति सामने से लिंग प्रवेश करवा सकते हैं।

इसमें गर्भवती पत्नी अपनी सुविधा को देखते हुए पति से सहयोग ले सकती है।

गर्भावस्था के इस समय में यदि महिला को थकान का अनुभव हो तब सेक्स करने से बचना चाहिए।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब लेना चाहिए?

When should seek appointment with doctor in second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke second mahine mein doctor se kab milna chahiye in hindi

गर्भावस्था के दूसरे महीने में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट गर्भ के पांचवे हफ्ते में लेना चाहिए।

यह समय सामान्य जांच व परीक्षण के लिए उपयुक्त मानी जाता है।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती स्त्री की डॉक्टर से पहली मुलाकात 4-१3 सप्ताह के बीच में होती है।

आपको डॉक्टर से जल्द-से-जल्द मिलना चाहिए ताकि आपका रजिस्ट्रेशन हो जाए और ड्यू डेट या जेस्टेशनल ऐज का पता चल सके।

वहीं इस समय डॉक्टर के यहाँ आपके रक्तचाप (blood pressure) और वज़न (weight) की जाँच की जाएगी।

डॉक्टर आपसे कई प्रश्न पूछ सकते हैं जैसे कि आपके पिछले मासिक धर्म की तारीख, पिछली गर्भावस्था, और दवाओं या किसी अन्य चीज़ से एलर्जी।

आपके द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर, वे एक विशिष्ट आहार (specific diet) और सप्लीमेंट्स (supplements) और अगर आवश्यक हो तो किसी भी दवा का सुझाव दे सकती हैं।

इसलिए शुरुआती जांच के दौरान अपनी डॉक्टर से खुलकर बातें करें।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में कब बिना अपॉइंटमेंट डॉक्टर से मिल लेना चाहिए?

When you should seek the doctor without delay in the second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke second mahine mein kin situations mein doctor se turant milna chahiye in hindi

यदि गर्भवती महिला को गर्भवस्था के दूसरे महीने में अगर गर्भवती महिला को योनि से स्त्राव या रक्तस्त्राव सामान्य से अधिक हो रहा है तब बिना किसी प्रकार की देर किए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

निम्न लक्षण एक्टोपिक प्रेगनेंसी या फिर प्रेगनेंसी के नुकसान का संकेत दे सकते हैं : -

  • इनमें योनि से रक्तस्राव (vaginal bleeding) या ऊतक (passage of tissue) का निकलना, योनि से फ्लूइड का रिसाव (vaginal fluid discharge), बेहोशी या चक्कर आना (feeling faint or dizzy), रक्तचाप घट जाना (low-blood pressure), कंधे में दर्द और गंभीर पैल्विक दर्द या ऐंठन शामिल हैं।
  • वहीं गर्भावस्था के दौरान यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (urinary tract infection) का भी ख़तरा अधिक होता है।

अगर आप उन लक्षणों को नोटिस करते हैं जो गर्भावस्था से नहीं आते हैं और जो संक्रमण का संकेत दे सकते हैं, या यदि आप किसी अन्य परिवर्तन के बारे में चिंतित हैं, तो आपको बिना देर किये अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

 

गर्भावस्था के दूसरे में महीने के दौरान अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कब और कौन से होते हैं?

Ultrasound and other tests in second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke second month mein kis tarah ke tests aur ultrasound ho sakte hain in hindi

गर्भवती महिला का दूसरे माह में डॉक्टर द्वारा निम्न जांच और परीक्षण किए जाते हैं : -

1. महिला का ब्लड प्रेशर की जांच

2. महिला के शरीर में प्रोटीन और शुगर लेवल की जांच के लिए यूरिन जांच

3. महिला का शारीरिक वज़न

4. महिला के रक्त में हीमोग्लोबिन और आयरन लेवल की जांच

5. रक्त जांच के द्वारा महिला में चेचक और रूबेला इन्फेक्शन होने की संभावना की जांच

इसके अलावा डॉक्टर यदि अन्य किसी भी प्रकार की जांच को अनिवार्य समझते हैं तो वो भी करवा सकते हैं।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में पिता के लिए टिप्स क्या हो सकते हैं?

Tips for father in second month of pregnancy in hindi

Pregnancy ke second month mein father ke liye kya tips ho sakte hain in hindi?

गर्भकाल का पूरा समय न केवल माँ के लिए महत्वपूर्ण होता है बल्कि वह भावी-पिता के लिए भी उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है।

महिला के गर्भावस्था के दूसरे महीने में भावी पिता को निम्न कार्यों के माध्यम से महिला का साथ देना चाहिए : -

1. गर्भावस्था के आगे बढ़ने के साथ महिला के खाने-पीने की इच्छा और ज़रूरतों में परिवर्तन आता है।

इन परिवर्तनों को समझ कर बिना किसी वाद-विवाद के महिला का साथ दें।

2. गर्भधारण करने के बाद महिला के शरीर में थकान अधिक होने लगती है।

ऐसे में महिला को आराम का मौका पूरा मिले, इस बात का ध्यान रखें।

3. गर्भवती महिला को स्वस्थ व पौष्टिक भोजन मिले, इसका ध्यान रखते हुए पूरी व्यवस्था करें।

4. गर्भवस्था के दूसरे महीने में महिला को किस प्रकार के शारीरिक व्यायाम और योगासान करने चाहिए, इसके लिए डॉक्टर की सहायता लेकर महिला को यह सब करने में पूरा सहयोग दें।

5. गर्भकाल में महिला मूड स्विंग जैसी स्थिति से गुजरती है, इसलिए इस बात को समझते हुए उसे प्यार और समर्पण से सहयोग करें।

6. जहां तक संभव हो गर्भवती महिला को तनाव से दूर रखकर प्रसन्न रखने का प्रयास करें।

 

गर्भावस्था के दूसरे महीने में आपको क्या-क्या करना चाहिए?

What you can do in the second month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke second month mein main kya kar sakti hoon in hindi

गर्भावस्था के दूसरे माह में प्रवेश के साथ अब आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा जिससे आपके मातृत्व का सफर खुशगवार और सुखमय हो सके।

इसके लिए गर्भवती महिला निम्न कार्यों कर सकती है : -

1. पौष्टिक आहार (Nutritious food in second month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल में गर्भ के शिशु को पोषण माँ के भोजन से ही मिलता है, इसलिए इस समय गर्भवती माँ को केवल पौष्टिक और स्वस्थ भोजन का सेवन करना ही उचित होगा।

2. अनुशासन (Disciplined life in second month of pregnancy in hindi)

जीवन में अनुशासन वैसे तो सबके लिए अच्छा होता है।

लेकिन गर्भवस्था के दूसरे माह में अनुशासन का अर्थ है गर्भवती महिला को अपना हर काम जिसमें उसका भोजन, डॉक्टर से मिलना, जांच व परीक्षण के साथ अन्य सभी ज़रूरी काम समय पर और नियमित रूप से करने होंगे।

3. आरामदायक कपड़े (Comfortable clothes in second month of pregnancy in hindi)

गर्भावस्था के दूसरे माह से महिला के स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है।

इसलिए इसके लिए महिला को अपने अन्तः और बाहरी वस्त्रों को थोड़ा ढीला पहनना होगा, जिससे विशेषकर स्तनों में दर्द न महसूस हो।

4. संक्रमण से बचाव (Prevention from Infection in second month of pregnancy in hindi)

गर्भकाल में महिला की इमम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, इस कारण महिला को गर्भावस्था के दूसरे माह में हर प्रकार के संक्रमण और बीमारी से हर संभव बचाव का प्रयास करना होगा।

5. स्किन की देखभाल (Skin pampering in second month of pregnancy in hindi)

प्रेग्नेंसी के दूसरे माह में गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने लगती है और इस कारण स्किन में रूखापन होना एक आम समस्या हो जाती है।

इसलिए महिला को स्किन पर नारियल के तेल या अन्य किसी भी प्रकृतिक तेल की हल्की मालिश से स्किन की देखभाल करने का प्रयास करना चाहिए।

6. स्वस्थ जीवनशैली (Healthy lifestyle in second month of pregnancy in hindi)

गर्भवस्था के दूसरे माह में स्वस्थ और गतिशील जीवनशैली को जीना बहुत जरूरी है।

इसके लिए समय पर व्यायाम और आराम में संतुलन बनाए रखना अच्छा रहता है।

 

प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?

What you should not do in second month of Pregnancy in hindi

Pregnancy ke second month mein mujhe kya nahi karna chahiye in hindi


महिला को गर्भावस्था के दूसरे माह के दौरान सावधानियाँ (precautions during second month of pregnancy in hindi) भी रखनी अनिवार्य हैं।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में निम्न सावधानी रखें : -

1. दूसरे माह की गर्भवती को अपनी थकान को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

2. गर्भकाल में शरीर में पानी की कमी नहीं होनी देनी होगी।

इसके लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थों और पानी का सेवन करना होगा।

3. डॉक्टर के बताए हुए सपलीमेंट्स और दवाओं को लेने में भूल न करें।

4. कभी भी फलों और सब्जियों को बिना धोये और छिलके के साथ न खाएं।

5. गर्भकाल में कब्ज़ की परेशानी को रोकने के लिए दिन में एक ही बार अधिक न खाना खाने के स्थान पर थोड़ी-थोड़ी देर में कम मात्रा में खाती रहें।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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