PCOD kya hain aur kya hain PCOD ke kaaran, lakshan, aahar aur upchar

पीसीओडी क्या है : कारण, लक्षण, आहार और उपचार

PCOD (Polycystic Ovary Disease) : causes, symptoms, diet and treatmentsin hindi

PCOD kya hain aur kya hain PCOD ke kaaran, lakshan, aahar aur upchar

आजकल न चाहते हुए भी लड़कियाँ प्रतियोगिता वाली (competitive) जिंदगी जीने के लिए मजबूर होती हैं क्योंकि ऐसा जीवन जीने की तमन्ना रखती हैं जहां उन्हें सारी ख़ुशियाँ मिलें।

इन्हीं ख़ुशियों की तलाश में बचपन से ही लड़कियाँ पढ़ाई, नौकरी, और जिंदगी में सब कुछ पाने की चाह में खुद को अनजाने में तनाव भरी जिंदगी के हवाले कर देती हैं।

जिंदगी के इस भागदौड़ में वह बचपन से अपने परिवार को, चाहे, वह उसके पिता का घर हो या पति का, सबको खुश रखना चाहती हैं।

घर-बाहर सब जगह संतुलन बनाये रखने के धुन में जिंदगी में वह स्वस्थ जीवनशैली से दूर हो जाती हैं और कई बीमारियों को अपना हमसफर बना लेती हैं, जिनमें सबसे आम है पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पॉलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम!

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को पीसीओडी या पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज भी कहते हैं।

आजकल ऐसे असंतुलित और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण ही कम उम्र में ही लड़कियाँ पीसीओडी का शिकार हो जाती हैं यानि, 13 से 18 साल की लड़कियाँ जिन्हें यह भी पता नहीं होता कि पीसीओडी क्या है वह इस बीमारी का कष्ट झेलने लगती हैं। [1]

अगर पीसीओडी (PCOD) का इलाज पहले चरण में ही किया जाए तो यह बीमारी जल्द ठीक होती है, लेकिन इसके लिए इसके बारे में सही और पूरी जानकारी होना जरूरी होता है।

इसके कारण, लक्षणों और उपचार के बारे में सटीक जानकारी होने पर ही समय रहते इलाज संभव हो पाता है।

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इस लेख़ में/\

  1. पीसीओडी क्या है?
  2. पीसीओडी होने के कारण क्या हैं?
  3. पीसीओडी के लक्षण क्या हैं?
  4. पीसीओडी के कारण होने वाली जटिलताएं क्या हैं?
  5. पीसीओडी के लिए किये जाने वाले परीक्षण
  6. पीसीओडी/पीसीओएस का इलाज
  7. पीसीओडी के घरेलू उपाय
  8. पीसीओडी का वैकल्पिक उपचार
  9. पीसीओडी में डाइट और जीवनशैली
  10. पीसीओडी में कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह
 

1.पीसीओडी क्या है?

PCOD in hindi

PCOD hai kya in Hindi, polycystic ovary syndrome in hindi

पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज या पीसीओडी एक तरह का हार्मोनल अंसुतलन होता है जो आमतौर पर प्रजनन क्षमता शुरू होने के उम्र से होता है।

इस बीमारी के कारण अनियमित मासिक धर्म चक्र, पुरूष हार्मोन - एंड्रोजन का अनियंत्रित स्तर होने के साथ-साथ डायबिटीज़, हृदय रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है।

वैसे तो पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज या पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (polycystic ovary syndrome) में कुछ महिलाओं के अंडाशय में सिस्ट बन जाती है, जिसको 'पॉलिसिस्टिक' कहा जाता है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है। [2]

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2.पीसीओडी होने के कारण क्या हैं?

What are the causes of PCOD? in hindi

PCOD ke kaaran in Hindi

पीसीओडी क्या होती है इस बात को समझने के लिए उसके होने के कारणों के बारे अच्छी तरह समझना चाहिए।

बीमारी होने के कारण को समझ लेने पर उसका निदान करना आसान होता है। [3]

सच तो यह है कि पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (PCOD in hindi) के कारणों के बारे में अभी भी कोई जानकारी नहीं मिली है, लेकिन शोधकर्ता आनुवंशिक (genetic) और पर्यावरणीय कारकों (environmental factors) को इस बीमारी के विकास का कारण मानते हैं।

अक्सर परिवार में या जीन में किसी को यह बीमारी होने पर इसके होने का खतरा बढ़ जाता है।

आमतौर पर पीसीओडी के ज्यादातर लक्षण एंड्रोजन हार्मोन के स्तर के बढ़ जाने के कारण होते हैं।

अंडाशय हार्मोन का उत्पादन करते हैं, जो रसायन या केमिकल्स होते हैं।

यही हार्मोन शरीर में कार्यों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

ओवरीज जो हार्मोन बनाते हैं उसे एस्ट्रोजन (estrogen) कहते हैं।

इनको "फ़ीमेल हार्मोन" भी कहा जाता है क्योंकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये हार्मोन ज्यादा बनते हैं।

इसी तरह ओवरीज या अंडाशय भी एण्ड्रोजन बनाते हैं, जिसको "मेल हार्मोन" कहते हैं क्योंकि यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा बनते हैं।

पुरुषों और महिलाओं के नॉर्मल हेल्थ के लिए इन दोनों हार्मोनों का स्तर सामान्य होना जरूरी होता है।

जिन महिलाओं को पीसीओडी होता है उनके शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है।

इन महिलाओं में एण्ड्रोजन का स्तर सामान्य से अधिक हो सकता है और एस्ट्रोजेन का स्तर सामान्य से कम हो सकता है।

जिसके कारण ओव्यूलेशन नियमित रूप से नहीं हो पाता है।

इसके अलावा ओवरीज में सिस्ट बन जाते हैं।

पीसीओडी के अन्य लक्षणों में शरीर में अतिरिक्त बालों का विकास और मुँहासे भी शामिल होते हैं।

इसके अलावा शरीर में इंसुलिन का सही तरह से काम न करने के कारण ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है।

यहां तक बहुत अधिक इंसुलिन, एण्ड्रोजन के उत्पादन को बढ़ाता है, जो पीसीओएस के लक्षणों का कारण बनता है।

इंसुलिन के उच्च स्तर से भी भूख ज्यादा लगती है और जिसके कारण वजन बढ़ता है।

हाई इंसुलिन का स्तर भी त्वचा की स्थिति से जुड़ा होता है जिसे एकैनथोसिस नाइग्रीकन्स (acanthosis nigricans) कहा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा में पैच बनते हैं।

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3.पीसीओडी के लक्षण क्या हैं?

What are PCOD symptoms? in hindi

PCOD ke lakshan in Hindi

पीसीओडी का मतलब क्या होता है या कैसे समझेंगे कि पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम हुआ है, इस बात को समझने के लिए सबसे पहले इसके लक्षणों के बारे में अच्छी तरह से जानकारी होना जरूरी होता है।

रोग के शुरूआत में पीसीओडी के संकेत और लक्षण बहुत ही कम होते हैं लेकिन नज़रअंदाज़ करने पर समय के साथ स्थिति गंभीर होती जाती है मरीज़ के लिए लंबे समय तक परेशानी का सबब बन जाता है।

पीसीओडी के लक्षणों में शामिल हैं : - [4]

  • बहुत अधिक ब्लीडिंग होना, 7 दिनों तक लगातार ब्लीडिंग होना
  • चेहरे, गर्दन, पेट, पीठ, हाथ, और पैरों पर ज्यादा बाल होना
  • चेहरे पर ज्यादा मुंहासे निकलना
  • त्वचा का ज्यादा तैलीय होना
  • त्वचा की हाइपरपिग्मेंटेशन (hyperpigmentation), यह आमतौर पर शरीर की परतों में पाया जाता है, जैसे गर्दन, आर्मपिट, कमर, नाभि, माथे में
  • बालों में रूसी होना
  • पेडू (groin) में दर्द
  • वजन बढ़ना/मोटापा (असामान्य रूप से कमर के आस-पास ज्यादा चर्बी होना)
  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • बालों का झड़ना
  • गर्दन, बाहों, जांघों और/या स्तनों की त्वचा मोटी हो जाना
  • स्लीप एपनिया (sleep apnea)
  • ओवुलेशन सही तरह से न होने के कारण बांझपन

और पढ़ें:अनियमित माहवारी का इलाज

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4.पीसीओडी के कारण होने वाली जटिलताएं क्या हैं?

What are the complications of PCOD? in hindi

PCOD ke kaaran hue complications in Hindi

पीसीओडी क्या है जितना जानना जरूरी है उतना ही जरूरी यह जानना भी है कि पीसीओडी होने पर शारीरिक किस तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है!

पीसीओडी का उपाय जानने के पहले उसके कारण हुए समस्याओं के बारे में ज्ञान होना जरूरी होता है, तभी समस्या का इलाज करना संभव हो पाता है।

शरीर में मेल हार्मोन एंड्रोजेन के उच्च स्तर होने के कारण बांझपन के अलावा बहुत सारी जटिलताओं का सामना शरीर को करना पड़ता है : -

1. अनियमित मासिक धर्म चक्र (Irregular Periods)

पीसीओडी का मतलब है अंडाशय को आपके पिट्यूटरी ग्रंथि से सही (हार्मोनल) संकेत नहीं मिल रहे हैं।

संकेत नहीं मिलने के वजह से हर महीने ओवुलेशन (अंडे बनाना) नहीं हो पाता है।

इसलिए मासिक धर्म या पीरियड्स की अवधि अनियमित हो सकती है, या एक अवधि नहीं भी हो सकती है। [5]

2. बांझपन (Infertility)

प्रेगनेंट होने का पहला शर्त होता है ओव्यूलेट होना।

बांझपन का मूल कारण, अंडों का निषेचन यानि फर्टीलाइजेशन सही तरह से न हो पाना होता है।

पीसीओडी, इंफर्टिलिटी यानि बांझपन का मुख्य कारण है।

असल में मेल हार्मोन एंड्रोजन के उच्च स्तर के कारण, अंडों के विकास और नियमित रूप से उत्पादन में बाधा आती है।

अगर स्वस्थ अंडे का निष्कासन नहीं होता है तो उसे शुक्राणु द्वारा निषेचित नहीं किया जा सकता है, यानि सरल शब्दों में कहें तो इसी कारण गर्भधारण करने में समस्या होती है। [6]

3. बढ़ता वजन (Obesity)

आपका शरीर, इंसुलिन हार्मोन के इस्तेमाल से, आपकी डाइट में मौजूद शुगर और स्टार्च को एनर्जी में परिवर्तित कर देता है।

मगर पीसीओडी, इस प्रक्रिया को मुश्किल बना देती है जिससे आपका शरीर इंसुलिन हार्मोन का इस्तेमाल नहीं कर पाता! ।

इस स्थिति को इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) कहते हैं, जिसके कारण इंसुलिन, शुगर और ग्लूकोज आपके रक्तप्रवाह यानि ब्लडस्ट्रीम (bloodstream) में बनने लगते हैं।

इंसुलिन का उच्च स्तर एण्ड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायता करता है।

इसी कारण मरीज़ बढ़ते वजन का शिकार हो जाता है। [7]

4. टाइप-2 डायबिटीज़ (Type-2 Diabetes)

जो महिलाएं पीसीओडी की मरीज़ होती हैं वह सामान्य तौर पर इंसुलीन प्रतिरोधी होती है।

उनका शरीर इंसुलिन बनाता तो है लेकिन सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता।

इसलिए ऐसी महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज़ होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। [8]

5. मेटाबॉलिक सिंड्रोम (Metabolic Syndrome)

ज्यादातर महिलाएं जो पीसीओडी से ग्रस्त होती हैं, वह मोटापे का शिकार होती हैं।

मोटापा और पीसीओडी दोनों मिलकर हाई ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, लो एचडीएल (गुड) कोलेस्ट्रॉल और हाई एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल होने की संभावना को बढ़ाते हैं। ये सारे फैक्टर्स मिलकर मेटाबॉलिक सिंड्रोम कहलाते हैं। [9]

6. स्लीप एपनिया (Sleep Apnea)

स्लीप एपनिया, यह वह अवस्था है जिसके कारण रात को सोने के दौरान सांस लेने में असुविधा महसूस होती है।

नींद में साँस लेने के समय बार-बार रूकावट महसूस होती है।

यह समस्या अक्सर ज्यादा वजन वाली महिलाओं को ही होती है, विशेष रूप से जिन्हें पीसीओडी की समस्या होती है।[10]

7. एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial cancer)

जैसा कि पहले ही बताया गया है कि पीसीओडी या पीसीओएस के कारण ओव्यूलेशन में समस्या होती है जिसके कारण गर्भाशय में एक तरह का लाइनिंग शेड बनने लगती है।

गर्भाशय में यह लाइनिंग दिन-ब-दिन बढ़ने लगती है जिसके कारण एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा होता है। [11]

8. डिप्रेशन या अवसाद (Depression)

महिलाओं के प्रजनन के उम्र में पॉलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम सबसे आम एंडोक्राइन डिसऑर्डर है।

इस बीमारी के लक्षणों में एमेनोरिया (amenorrhea), हिर्सुटिज्म (hirsutism), बांझपन (infertility), मोटापा (obesity), एक्ने वल्गरिस (acne vulgaris) और एंड्रोजेनिक एलोपेशिया (androgenic alopecia) शामिल है।

पीसीओडी की अवस्था महिला के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करती है, जो डिप्रेशन का कारण बन जाती है। [12]

9. पीसीओडी और गर्भधारण (PCOD and Pregnancy)

जिन महिलाओं को पीसीओडी की समस्या होती है उनको प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यहां तक कि जो माँ पीसीओडी से गुज़र रही होती हैं उनके नवजात शिशुओं को अक्सर जन्म के बाद नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (neonatal intensive care unit) में रखने की जरूरत पड़ती है।

इसके साथ ही ऐसे बच्चों के जन्म के साथ, जन्म के दौरान या जन्म के बाद मरने की संभावना होती है।

इन सारे जटिलताओं का एकमात्र कारण पीसीओडी की समस्या होती है।

इसके अलावा, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और बढ़े हुए एंड्रोजेन जैसी पीसीओएस से जुड़ी स्थितियां शिशुओं को बहुत प्रभावित करती हैं। [13]

10. गर्भपात (Miscarriage)

पीसीओडी से गुज़र रही महिलाओं की, गर्भावस्था के शुरूआती महीने में गर्भपात होने की संभावना तीन गुना होती है।

कुछ शोध से पता चलता है कि मेटफोर्मिन (metformin), पीसीओडी वाली गर्भवती महिलाओं में गर्भपात के खतरे को कम कर सकता है।

11. जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes)

यह एक प्रकार का डायबिटीज़ या मधुमेह होता है जो केवल गर्भवती महिलाओं को ही होता है।

लेकिन सबसे अच्छी बात यह है इसका समय पर इलाज करने पर इसको नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे मां या भ्रूण को समस्याओं से बचाया जा सकता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज़ से पीड़ित महिलाओं के साथ-साथ उनके बच्चों को भी भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज़ होने का अधिक खतरा होता है।

12. प्रीक्लेम्पसिया (Preeclampsia)

प्रीक्लेम्पसिया, गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद ब्लड प्रेशर के अचानक बढ़ने के कारण, महिला की किडनी, लीवर और ब्रेन को प्रभावित कर सकती है।

यदि इसको नज़रअंदाज़ किया जाता है, तो प्रीक्लेम्पसिया, एक्लेम्पसिया में बदल सकता है।

एक्लम्पसिया से अंग क्षति, दौरा और यहां तक ​​कि मौत भी हो सकती है।

प्रीक्लेम्पसिया वाली गर्भवती महिलाओं को सी-सेक्शन डिलीवरी की अक्सर जरूरत पड़ती है, जो माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरा बन सकता है।

13. प्रीटर्म बर्थ (Preterm birth)

37 हफ्ते से पहले जन्मे शिशु को "प्रीटर्म" माना जाता है।

प्रीटर्म बेबी को जन्म के बाद या भविष्य में बहुत सारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

14. सिजेरियन या सी-सेक्शन डिलीवरी (Cesarean or C-section delivery)

पीसीओडी से ग्रस्त महिलाएं जो गर्भधारण करती हैं उनमें सी-सेक्शन होने की संभावना ज्यादा होती हैं क्योंकि गर्भावस्था से संबंधित बहुत सारी समस्याएं होने की आशंका रहती है।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी में गर्भधारण कैसे करे

 

5.पीसीओडी के लिए किये जाने वाले परीक्षण

Diagnosis of PolyCystic Ovarian Diseasein hindi

PCOD ke parikshan in Hindi

पीसीओडी के निदान के लिए कोई निश्चित परीक्षण अभी तक नहीं मिला है।

आपके डॉक्टर इस बीमारी को समझने के लिए मेडिकल हिस्ट्री, मासिक धर्म और वजन में परिवर्तन के बारे में पूछेंगे।

डॉक्टर, शारीरिक परीक्षण में अतिरिक्त बालों का विकास, इंसुलिन रेसिस्टेंस और मुँहासे की जांच कर सकते हैं। [14]

आपके डॉक्टर निम्न परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं : -

1. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

आपके डॉक्टर अंडाशय की अवस्था की जांच कर सकते हैं।

इसकी जांच ट्रांसड्यूसर (transducer) जैसी डिवाइस वेजाइना में डालकर कर सकते हैं।

2. पेल्विक एक्जाम (Pelvic Exam)

डॉक्टर विजुअली और मैनुअली प्रजनन अंगों के असामान्यताओं के बारे में निरीक्षण करते हैं।

3. ब्लड टेस्ट (Blood Test)

शरीर में हार्मोन के स्तर को जानने के लिए रक्त का परीक्षण किया जाता है।

इस परीक्षण से मासिक धर्म संबंधी असामान्यताओं या एंड्रोजन की अधिकता को समझा जा सकता है।

इसके अलावा ग्लूकोज टॉलरेंस (glucose tolerance) और फास्टिंग कोलेस्ट्रॉल (fasting cholesterol) तथा ट्राइग्लिसेराइड लेवल (triglyceride level) की भी जांच होती है।

अगर डॉक्टर पीसीओडी के परीक्षण की सलाह दे रहे हैं तो : -

  • ब्लड प्रेशर, ग्लूकोज टॉलरेंस और कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जांच,
  • अवसाद और चिंता के लिए स्क्रीनिंग,
  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लिए स्क्रीनिंग करने के लिए डॉक्टर कह सकते हैं।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी या अनियमित पीरियड

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6.पीसीओडी/पीसीओएस का इलाज

PCOS/PCOD Treatmentin hindi

PCOD ka ilaj in Hindi

पीसीओडी का इलाज जीवनशैली में बदलाव या दवाओं का सही तरह से सेवन करने पर किया जा सकता है।

इसके अलावा ओवेरियन ड्रिलिंग भी की जाती है।

ओवेरियन ड्रिलिंग एक सर्जरी है जिसमें ओवेरियन सतह पर और स्ट्रोमा में कई छिद्र बनाए जा सकते हैं।

1. वजन पर नियंत्रण (Weight Management)

पीसीओडी के उपचार में डॉक्टर सबसे पहले वजन घटाने पर ध्यान देने के लिए कहते हैं।

इसके लिए डॉक्टर, लो कैलोरी डाइट लेने और एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं।

यहां तक कि शरीर का वजन अगर 5% भी कम हो जाये स्थिति में सुधार हो सकता है।

साथ ही वजन कम होने के साथ-साथ दवा का प्रभाव भी अच्छी तरह काम करने लगता है।

इसके अलावा कम वजन, बांझपन के इलाज के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

2. दवाएं (Medicine)

एस्ट्रोजन प्रोजेस्टिन थेरेपी (Estrogen progestin therapy)

10-14 दिनों तक प्रोजेस्टिन का सेवन करने से मासिक धर्म चक्र नियमित हो सकता है, साथ ही एंडोमेट्रियल कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

बर्थ कंट्रोल पिल्स में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टिन मौजूद होता है जो एंड्रोजेन के उत्पादन को कम करने और एस्ट्रोजेन को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।

कहने का मतलब यह है कि हार्मोन को नियंत्रित करने पर एंडोमेट्रिल कैंसर का खतरा कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

यहां तक कि पिल्स के जगह पर आप वेजाइनल रिंग या स्किन पैच का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

ओव्युलेशन के लिए डॉक्टर सलाह दे सकते हैं : -

  • क्लोमीफीन (Clomifeen)

पीरियड्स होने के प्रथम चरण में ही ओरल एंटी-एस्ट्रोजेन दवा लेने की सलाह दे सकते हैं।

  • लेट्रोजोल - फेमारा (Letrozole - Femara)

ओवरीज़ को उत्तेजित करने का काम यह दवा करती है जिसके मदद से ब्रेस्ट कैंसर होने के खतरे को कम किया जा सकता है।

  • मेटफॉर्मिन - ग्लूकोफेज, फोर्टमेट और अन्य (Metformin - Glucophage, Fortmate and others)

यह मुँह से लेने वाली दवा, टाइप-2 डायबिटीज़ को खतरे को कम करने में मदद करता है।

  • गोनैडोट्रॉपिंस (Gonadotropins)

हार्मोन की यह दवाएं इंजेक्शन द्वारा दी जा सकती हैं।

अत्यधिक बालों के इलाज के लिए डॉक्टर इनकी सलाह दे सकते हैं-

  • फ़ीमेल हार्मोन टैबलेट (Female hormone tablet)

ये गोलियां एण्ड्रोजन उत्पादन को कम करती हैं जो बालों के अत्यधिक विकास का कारण बन सकती हैं।

  • स्पिरोनोलैक्टोन - एल्डक्टोन (Spironolactone - Aldactone)

यह दवा त्वचा पर एण्ड्रोजन के असर को रोकने में मदद करती है।

स्पिरोनोलैक्टोन जन्म दोष का कारण बन सकता है, इसलिए इस दवा को लेते समय प्रभावी गर्भनिरोधक की आवश्यकता होती है।

यदि आप गर्भवती हैं या गर्भवती बनने की योजना बना रही हैं तो इसका सेवन करने से बचें।

  • एफ़्लोर्निथिन - वानीका (Aflornithine - Vanica)

यह क्रीम महिलाओं में चेहरे के बालों के विकास को धीमा कर सकती है।

  • इलेक्ट्रोलाइसीस (Electrolysis)

प्रत्येक बाल कूप (hair follicle) में एक छोटी सुई डाली जाती है।

सुई, कूप को नष्ट कर देती है।

और पढ़ें:इन 6 टिप्स से जानें आपके पीरियड्स नियमित है या नहीं

 

7.पीसीओडी के घरेलू उपाय

Home Remedies for PCODin hindi

PCOD ka gharelu upay in Hindi

पीसीओडी जैसी बीमारी से लड़ने के लिए सबसे पहले लोग जो प्रयास करते हैं वह है घरेलू उपाय।

पीसीओडी के प्रभाव को कम करने में घरेलू उपाय की अहम भूमिका होती है : -

  • वजन को घटायें

वजन घटाने से इंसुलिन और एंड्रोजन का स्तर कम हो सकता है और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बेहतर होने लगती है।

वजन को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है, इसके बारे में डॉक्टर से पूछें या आहार विशेषज्ञ से मिलें ताकि आपको सही मार्गदर्शन मिल सके।

  • सीमित कार्बोहाइड्रेड का सेवन

कम वसा वाले, उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले आहार इंसुलिन के स्तर को बढ़ा सकते हैं।

यदि आपको पीसीओडी है, अपने डॉक्टर से कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार के बारे में पूछें।

जटिल कार्बोहाइड्रेट चुनें, जो आपके रक्त शर्करा के स्तर को और अधिक बढ़ाते हैं।

  • सक्रियशील बनें

व्यायाम ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करता है।

यदि आपको पीसीओडी है, तो दैनिक गतिविधि को बढ़ाने की जरूरत है।

और पढ़ें:एचआरटी टेबलेट्स से क्यों बढ़ जाता है ब्लड क्लॉट का ख़तरा

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8.पीसीओडी का वैकल्पिक उपचार

Alternatives of PCODin hindi

PCOD ka vaikalpik upchar in Hindi

पीसीओडी के वैकल्पिक उपचार निम्न हैं : -

  • एक्यूपंक्चर

हाल के क्लिनिकल और एनिमल एक्स्पेरमेन्टल स्टडीज़ से संकेत मिलता है कि एक्यूपंक्चर पीसीओएस में ओवुलेटरी डिसफंक्शन के लिए फायदेमंद है।

एक्यूपंक्चर में विशिष्ट शारीरिक बिंदुओं (एक्यूपॉइंट्स) में सुइयों का प्रयोग कर उपचार किया जाता है।

हजारों वर्षों से पूर्वी एशियाई देशों में इसका उपयोग किया जाता रहा है।

हाल ही में, प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजी और बांझपन में एक्यूपंक्चर के उपयोग ने दुनिया भर में लोकप्रियता बढ़ाई है। [15]

  • आयुर्वेदिक उपचार

पीसीओडी के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानने से पहले उसके दोषों यानि वात, पित्त और कफ के बारे में जानना बहुत जरूरी होता है।

आर्तव काश्या, पीसीओडी या पीसीओएस से संबंधित होता है, जो कमी या हानि के रूप में देखा जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार, आर्तव काश्या पित्त और कफ दोषों, मेद, अम्बु / रस, शुक्रा / आर्तव धातु और रस, रक्ता, आर्तव वाहा को शामिल करने वाला विकार है।

इसलिए पॉली सिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम को भी दोष, धातू और उपाधातु कफा की प्रमुखता के रूप में शामिल किया जा सकता है, जो वजन, उदासीनता, हिर्सुटियम, डायबिटिक प्रवृत्ति और शीतलता में वृद्धि करता है।

बालों के झड़ने, मुँहासे, दर्दनाक मासिक धर्म, थक्के और हृदय की समस्याओं के रूप में पित्त की प्रबलता होती है।

वात के प्रबलता के कारण दर्दनाक मासिक धर्म, कम मासिक धर्म और गंभीर मासिक धर्म अनियमितता के साथ सामने आती है। [16]

  • त्रिफला और गुग्गुल

यह दोनों बढ़ते वजन को नियंत्रित करने के काम आता है।

  • ए.रेसमोसस का पाउडर

मासिक धर्म चक्र को नियमित करने और शक्ति प्रदान करने में मदद करता है।

  • पी ग्रेवालोन्स (P. graveloens) के बीज का पाउडर, कृष्ण जेरका का तेल (Nigella sativa) और सहचरा (Barleria prionits) के तेल

यह तीनों अंडाशय में सिस्ट और रोमछिद्र की शुद्धता के इलाज में सहायता करता है।

  • गुडुचचडिय़ा का पाउडर

यह प्रतिरक्षा को बढ़ाता है।

  • अतीबाला के पाउडर

गर्भाशय की दुर्बलता को ठीक करने में सहायता करता है, इसलिए यह गर्भ धारण करने और गर्भस्राव से बचने में मदद करता है।

आयुर्वेद में स्त्रीरोग संबंधी विकारों में उत्तरा वस्ति सबसे प्रभावी उपचार होता है।

  • हर्बल दवाएं

पीसीओडी से लड़ने के लिए आयुर्वेदिक, एलोपैथिक उपचार के साथ-साथ हर्बल दवाओं का भी सहारा लिया जाता है, क्योंकि कुछ तो आसानी से घर में ही मिल जाते हैं।

दालचीनी और हल्दी हर्बल दवाओं का ऐसा उदाहरण है जिनका उपयोग पीसीओडी के घरेलू उपाय के रूप में किया जाता है। [17]

  • दालचीनी (Cinnamomum cassia)

दालचीनी पेड़ों की छाल से आती है।

इंसुलिन प्रतिरोध के रूप में दालचीनी के अर्क का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

साथ ही जिन महिलाओं को पीसीओडी के कारण मासिकधर्म संबंधी समस्याएं होती है उनके लिए भी दालचीनी फायदेमंद साबित होती है।

  • हल्दी (Curcuma longa)

हल्दी में सक्रिय संघटक को करक्यूमिन कहा जाता है।

हल्दी इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) को कम करने और एंटी-इंफ्लेमटोरी एजेंट के रूप में काम करता है।

  • बर्बेरिन (Berberine)

बर्बेरिन एक तरह का जड़ी बूटी होता है, जिसका उपयोग चीनी दवा में इंसुलिन प्रतिरोध में मदद करने के लिए किया जाता है।

पीसीओएस के मरीज़ अगर इसका सेवन करते हैं तो इसके उपयोग करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ सकता है और शरीर की अंत: स्रावी प्रतिक्रियाओं (endocrine responses) को संतुलित कर सकता है।

और पढ़ें:एमेनोरिया (Absence of menstruation) के घरेलू उपाय

 

9.पीसीओडी में डाइट और जीवनशैली

PCOD diet and lifestylein hindi

PCOD mein kya khana chahiye aur kya nahi aur jane kya hogi jivanshaili in Hindi

आपके आहार और जीवनशैली पर आपका स्वास्थ्य निर्भर करता है।

जीवनशैली और आहार का संबंध शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से होता है साथ ही कई बीमारियों के शुरूआत, विकास और उसके उपचार को प्रभावित करता है।

इसलिए पीसीओडी के घरेलू उपाय जानने के साथ-साथ उससे लड़ने के लिए लाइफस्टाइल और डायट के बारे में भी जानना जरूरी है। [18]

पीसीओडी में क्या खाना चाहिए (What should you eat in PCOD)

  • हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थ
  • ब्रोकोली, फूलगोभी, और अंकुरित अनाज
  • साग और लेट्यूस
  • हरी और लाल मिर्च
  • सेम और दाल
  • बादाम
  • जामुन
  • कद्दू
  • हरी सब्जियां
  • कम प्रोटीन वाले स्रोत यानि पतले अंश में चिकेन, मछली, टोफू
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली मछलियाँ जैसे, सालमन
  • टमाटर
  • पालक
  • बादाम और अखरोट
  • फलों में स्ट्रॉबेरी, बेर आदि

पीसीओडी में क्या नहीं खाना चाहिए (What you should not eat in PCOD)

  • मैदा से बनी हुई चीजें
  • व्हाइट ब्रेड
  • मफ़ीन
  • मिठाई
  • मीठे स्नैक्स और ब्रेवरेज
  • प्रोसेस्ड फूड
  • रेड मीट
  • हाई कार्बोहाइड्रेड वाले खाद्य पदार्थ और कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थ

जीवनशैली (What should be your lifestyle in PCOD)

पीसीओडी के मरीज़ों के लिए सबसे अहम बात जो ध्यान रखने वाली है कि उनकी जीवनशैली हमेशा सक्रिय होनी चाहिए।

नियमित रूप से व्यायाम या योगाभ्यास करने से वजन को नियंत्रण में रखने में आसानी होती है।

इसके अलावा एक बात का ध्यान हमेशा रखना चाहिए कि तनाव का स्थान जीवन में बिल्कुल न हो।

मन को शांत रखने के लिए योग और ध्यान करना चाहिए।

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10.पीसीओडी में कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह

When to see a doctor in PCOD? in hindi

PCOD mein Kab leni Chahiye Doctor ki salah in Hindi

यदि आपको पीसीओडी के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो इसको बिना नज़रअंदाज़ किये डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना बेहतर होता है क्योंकि जितनी जल्दी आप इलाज करवाना शुरू करेंगे उतनी ही जल्दी ठीक होना शुरू करेंगे।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 07 May 2020

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संदर्भ/\

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