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जन्म के समय कम वजन वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी की जानकारी

Information about low birth weight baby in hindi

लो बर्थ वेट डेफिनिशन इन हिंदी, 9 month बच्चे का वज़न कम होना

परिवार में नवजात शिशु का जन्म अपने साथ एक नयी खुशी का लहर तो लाता ही है साथ ही नए बने माता-पिता के मन में असंख्य प्रश्नों की लड़ी भी लेकर आता है।

इन प्रश्नों में सबसे पहला प्रश्न होता है कि क्या हमारा शिशु आदर्श वज़न (ideal weight) का है या नहीं।

परिवार में जब कोई नवजात शिशु के जन्म पर बधाई देते हैं तब वह भी सबसे पहला यही सवाल पूछते हैं कि नवजात शिशु का वज़न कितना है?

ऐसे में भ्रम और संदेह को दूर करने वाला यह लेख आपको बताएगा कि जन्म के समय बच्चे का आदर्श वज़न कितना होना चाहिए और जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) का कारण, जोखिम और उपचार आदि क्या हो सकता है।

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इस लेख़ में/\

  1. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट क्या होता है?
  2. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबीज़ के प्रकार क्या हैं?
  3. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी के कारण क्या हैं?
  4. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी के लक्षण क्या हैं?
  5. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी का निदान कैसे होता है?
  6. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी का उपचार कैसे होता है?
  7. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी को क्या परेशानियाँ हो सकती हैं?
  8. जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट की स्थिति से बचा जा सकता है?
 

1.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट क्या होता है?

What is low birth weight ?in hindi

Low birth weight baby kya hota hai, 9 month बच्चे का वज़न कम होना क्या है

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) के अनुसार, गर्भावस्था के नौ माह पूरे करने पर जब शिशु का जन्म होता है तब नौ महीने के (9 month) बच्चे का वज़न लगभग 2500 ग्राम (2.5 कि.ग्रा.) और 2900 ग्रा. (2.9 कि.ग्रा.) के बीच में हो सकता है।

संगठन का यह भी कहना है कि यदि कोई शिशु नौ महीने पूरे होने से पहले किसी भी अवधि में जन्म लेता है तब, यदि जन्म के समय उसका वजन 2500 ग्राम (2.5 कि.ग्रा.) से कम है तब वह जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) की श्रेणी में रखा जा सकता है।

यह आवश्यक नहीं है कि लो बर्थ वेट (low birth weight) के साथ जन्म लेने वाले शिशु का स्वास्थ्य खराब ही होगा।

जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) आकार में छोटा ही क्यों न हो, वह स्वस्थ भी हो सकता है।

लेकिन यह सही है कि जिस बच्चे का जन्म के समय वजन कम हो, उसे कुछ गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

और पढ़ें:Ectopic Pregnancy and Infertility

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2.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबीज़ के प्रकार क्या हैं?

What are the types of low birth weight baby in hindi

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चिकित्सकों के अनुसार नौ महीने के (9 month) बच्चे का वज़न भी डिलीवरी के समय कम हो सकता है, भले ही वह पूरे गर्भकाल (9 महीने) के दौरान स्वस्थ रहा हो।

जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) को निम्न तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  • कम वजन वाले शिशु (Low birth weight - LBW)

जब जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) का वास्तविक वज़न 2500 ग्राम/5 पाउंड/5 औंस से कम होता है तब इसे कम वजन वाले शिशु (low birth weight - LBW) की श्रेणी में रखा जाता है।

  • अत्यधिक कम वजन वाले शिशु (Very low birth weight - VLBW)

जब जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) का वजन सामान्य से काफी कम अथार्थ 1500 ग्राम/3 पाउंड/9 औंस से कम होता है तब उस शिशु को अत्यधिक कम वजन वाले शिशु (very low birth weight - VLBW) की श्रेणी में रखा जाता है।

  • बहुत अधिक कम वजन वाले शिशु (Very low birth weight - VLBW)

जब जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) का वजन सामान्य से बहुत अधिक कम अथार्थ 1000 ग्राम/2 पाउंड/9 औंस से कम होता है तब उस शिशु को अत्यधिक कम वजन वाले शिशु (very low birth weight - VLBW) की श्रेणी में रखा जाता है।

और पढ़ें:Understanding Miscarriage, its Symptoms and Treatment

 

3.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी के कारण क्या हैं?

What are the causes of low birth weight ?in hindi

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ज्यादातर, लो बर्थ वेट बेबी के जन्म लेने का कारण (causes of low birth weight) उनका समय से पहले जन्म (premature birth) लेना माना जाता है।

महिला की गर्भावस्था में बच्चे का वजन कम होने के आसार अधिकतर, बच्चे के समय से पहले जन्म लेने की स्थिति में बढ़ते हैं।

ऐसा माना जाता है कि गर्भावधि के 37वें सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चे आमतौर पर छोटे आकार और कम वज़न वाले होते हैं।

इसके अलावा नवजात शिशु का वजन कम होने के कारण निम्न हो सकते हैं :

  1. गर्भ में एक से अधिक भ्रूण का विकसित होना जिसके कारण जुड़वा या इससे अधिक संख्या में बच्चे जन्म लेते हैं। इस अवस्था में बच्चों को पूरी तरह से विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती और जन्म लेने वाला शिशु लो बर्थ वेट होता है।
  2. कुछ बच्चों का जन्म के समय कम वजन, उनके आनुवंशिक गुणों के कारण भी हो सकता है। आनुवंशिक रूप में, माता या पिता की कुछ जटिल बीमारियाँ भी भ्रूण को प्रभावित करती हैं, जो शिशु के लिए गर्भावस्था में कम वजन का कारण बन जाती हैं।
  3. गर्भावस्था में गर्भनाल संबंधी जटिलता जैसे - प्रीएक्लेम्पसिया (preeclampsia) के कारण, गर्भनाल से शिशु तक जाने वाली रक्त प्रवाह में बाधा आने लगती है। इससे गर्भ के शिशु को सही पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता जिससे शिशु का विकास सही तरह से नहीं हो पाता है। स्वाभाविक रूप से यह लो बर्थ वेट बेबी का कारण होता है।
  4. गर्भावस्था के दौरान प्लेसेन्टा का नीचे होना भी शिशु के लिए गर्भावस्था में कम वजन का कारण हो सकता है।
  5. गर्भवती महिला को होने वाली विभिन्न तरह की परेशानियां जैसे - खून की कमी, दमा, मधुमेह, लीवर संबंधी परेशानी या फिर आरएच फैक्टर में असमानता भी लो बर्थ वेट बेबी का कारण हो सकती हैं।
  6. पहले प्रसव में मृत शिशु का जन्म लेना, गर्भपात या फिर पहले भी कम वजन वाले शिशु का जन्म, गर्भावस्था में शिशु के कम वजन का कारण हो सकता है।
  7. गर्भवती महिला को टॉक्सोप्लाज्मोसिस (toxoplasmosis) या लिस्टिरीओसिस (listeriosis) अथवा यौन जनित रोग (Sexually Transmitted Diseases) जैसा कोई इन्फेक्शन शिशु के लिए लो बर्थ वेट का कारण हो सकता है।
  8. गर्भवती महिला द्वारा खराब जीवनशैली जैसे मादक पदार्थ, मदिरापान या धूम्रपान करना भी शिशु के लिए गर्भावस्था में कम वजन का कारण हो सकता है।
  9. गर्भावस्था के समय महिला के स्वास्थ्य का ठीक से ध्यान न रख पाना और गर्भवती महिला का हर समय तनावग्रस्त रहना भी लो बर्थ वेट बेबी का कारण हो सकता है।

और पढ़ें:अनेम्ब्र्योनिक गर्भावस्था के कारण, संकेत और उपचार

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4.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी के लक्षण क्या हैं?

What are the symptoms of low birth weight baby during pregnancy? in hindi

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यदि गर्भावस्था में बच्चे का वजन सामान्य है लेकिन प्रसव होने के बाद शिशु का वजन 3.6 किलो (8 पाउंड) से कम है तब उसे जन्म के समय कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) की श्रेणी में रखा जाएगा।

इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) द्वारा स्थापित मानक के अनुसार यदि शिशु का जन्म गर्भावस्था के पूर्ण होने अथार्थ 37-42 सप्ताह के बाद होता है और उसका वजन 2.5 किलो नहीं है तब भी नवजात शिशु कम वजन वाला माना जाएगा।

इसके अतिरिक्त प्रसव के बाद जन्म लेने वाले कम वजन के शिशु का सिर, उसके शेष शरीर से थोड़ा बड़ा प्रतीत होता है।

और पढ़ें:अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण, कारण और उपचार

 

5.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी का निदान कैसे होता है?

How is low birth weight baby diagnosed? in hindi

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अधिकतर स्थितियों में गर्भावस्था में बच्चे का वजन सामान्य प्रतीत होता है। प्रसवपूर्व जांच में प्रेग्नेंसी डॉक्टर शिशु के विकास संबंधी अनुमान लगाने के लिए विभिन्न प्रकार की जांच करते हैं। इन विभिन्न जांच के परिणाम से उन्हें गर्भ में ही लो बर्थ वेट बेबी का पता चल सकता है।

लो बर्थ वेट बेबी का पता लगाने के लिए किये जाने वाले विभिन्न जाँच में शामिल हैं:

  1. समय-समय पर गर्भवती के वजन को मापा जाता है जिससे गर्भ की प्रत्येक अवस्था में शिशु का वजन सही तरीके से बढ़ रहा है या नहीं, इसका पता लग सकता है।
  2. अन्य महत्वपूर्ण जांच गर्भाशय के आकार को सेंटीमीटर में मापना होता है। इसके अंतर्गत पेल्विक के ऊपर से लेकर गर्भाशय के ऊपरी हिस्से (Fundal Height) को मापा जाता है। यही माप अगर, गर्भावस्था की अवधि के अनुसार कम होता है तब इसे लो बर्थ वेट बेबी (low birth weight) का संकेत माना जा सकता है।
  3. प्रेग्नेंसी में नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड करके भी भ्रूण के विकास का जायजा लिया जाता है। इसमें गर्भ में पल रहे शिशु के हर अंग का अलग-अलग माप लेकर, उसे सामान्य माप से मैच किया जा सकता है। मैच करने के दौरान, गर्भ में लो बर्थ वेट बेबी (low birth weight) के होने का पता चल सकता है।

और पढ़ें:एबॉर्शन की टैबलेट

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6.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी का उपचार कैसे होता है?

How is low birth weight baby treated? in hindi

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प्रसव के बाद अगर चिकित्सक नवजात को लो बर्थ बेबी (low birth weight treated) के रूप में पाते हैं तब वे शिशु का उपचार शुरू करते हैं।

इसके लिए वह सबसे पहले शिशु को विशेष देखभाल वाले कक्ष (Neonatal Intensive Care Unit) में एडमिट करते हैं। इस कक्ष के सभी कर्मचारी व डॉक्टर नवजात की विशेष देखभाल में दक्ष होते हैं। इस कक्ष में तापमान नियंत्रित करने वाले बेड भी होते हैं जो नवजात के उपचार में सहायक होते हैं।

यदि नवजात का वजन सामान्य से काफी कम है तब चिकित्सक उसे विशेष देखभाल वाले कक्ष में तब तक रहने की सलाह देते हैं जब तक शिशु का कम वजन बढ़ कर सामान्य वज़न सीमा तक नहीं आ जाता है।

यदि लो बर्थ वेट बेबी (low birth weight) को जन्म के बाद, फेफड़ों या आंतों की बनावट में कमी जैसी अन्य परेशानियाँ हैं, तब चिकित्सक इन परेशानियों के दूर होने तक शिशु को अस्पताल में रखने की सलाह देते हैं।

इस कक्ष में जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु (low birth weight baby) के शारीरिक तापमान को व्यवस्थित करने के साथ ही उसके भोजन (क्योंकि वह स्तनपान नहीं कर सकता है) आदि की भी विशेष व्यवस्था होती है।

नवजात शिशु को उपचार के लिए NICU (Neonatal Intensive Care Unit) में रखा जाता है लेकिन जब संभव हो तब उसके स्तनपान की भी व्यवस्था की जाती है। इससे उनके शारीरिक वृद्धि और वजन बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है।

यदि किसी कारण से शिशु अपनी माँ का स्तनपान नहीं कर पाता है तब अस्पताल के कर्मचारी डोनर मदर (जो महिला अपने स्तन का दूध बच्चे को पिला सके) की भी व्यवस्था कर सकते हैं।

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7.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट बेबी को क्या परेशानियाँ हो सकती हैं?

What are possible complications of low birth weight ?in hindi

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डॉक्टर यह देखने की कोशिश करते हैं कि जन्म के बाद लो बर्थ वेट बेबी किस प्रकार की परेशानियों का सामना कर रहा है।

सामान्य रूप से जन्म के समय जिस शिशु का वजन कम होता है, जन्म के बाद लो बर्थ वेट बेबी की परेशानियाँ (low birth weight baby complication) विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं।

सबसे पहली बात तो यह है कि बच्चा सामान्य बच्चों की भांति शारीरिक रूप से मजबूत नहीं होगा।

प्रसव के समय वजन कम होने के कारण उसे खाने, वजन बढ़ाने और भावी इन्फेक्शन से दूर रहने में भी परेशानी हो सकती है।

इसके साथ ही वजन कम होने के कारण शिशु के शरीर पर चर्बी कम होने से शारीरिक तापमान भी कम रह सकता है।

इसके अतिरिक्त यदि प्रसव समय से पहले हुआ है तब बच्चा दो प्रकार की परेशानियों को झेल रहा होता है।

इस स्थिति में यह जांच कर पाना थोड़ा कठिन हो जाता है कि नवजात शिशु को समय पूर्व प्रसव के कारण या फिर लो वेट बेबी होने के कारण परेशानी हो रही है ।

फिर भी चिकित्सक जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु को होने वाली कुछ परेशानियों को अधिक गंभीर मानते हैं।

लो बर्थ बेबी को होने वाली गंभीर परेशानियाँ इस प्रकार हो सकती हैं :

1. जन्म के समय शरीर में ऑक्सीजन की कमी होना

2. शरीर के तापमान को गरम बनाए रखने में मुश्किल

3. दूध पीने और वज़न बढ़ाने में कठिनाई

4. विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शन होना

5. फेफड़ों की बनावट सही न होने के कारण सांस लेने में कठिनाई होना (infant respiratory distress syndrome)

6. तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएँ जैसे मस्तिष्क में आंतरिक रूप से रक्त स्त्राव होना (intraventricular hemorrhage)

7. पाचन संबंधी समस्याएँ जैसे आंतों में गंभीर सूजन (necrotizing enterocolitis)

8. अचानक नवजात मृत्यु का आघात (Sudden infant death syndrome (SIDS)

ऐसे शिशु जिनका वज़न अत्यधिक कम होता है वो अपंगता या लंबे समय तक चलने वाली परेशानियों से ग्रसित हो सकते हैं।

अत्यधिक कम वज़न वाले शिशु के लिए ये परेशानी निम्न में से किसी भी रूप में हो सकती हैं :

1. सेरेब्रेल पल्सि (Cerebral palsy)

2. अंधापन

3. बहरापन

4. विकास का धीमी गति होना

और पढ़ें:गर्भ में बच्चे का सिर बड़ा होना या सेफालोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन

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8.जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु या लो बर्थ वेट की स्थिति से बचा जा सकता है?

Can low birth weight be prevented ?in hindi

9 month बच्चे का वज़न कम होना kaise roke in hindi

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वर्तमान समय में अधिकतम नवजात शिशु, चाहे उनका जन्म समय से पहले हुआ हो या फिर कम वज़न के साथ के साथ हुआ हो, वे अपने जीवन को जीने में कामयाब रहते हैं।

इसका श्रेय आधुनिक और विकसित चिकित्सा पद्धति को दिया जा सकता है जो समय से पूर्व और गंभीर बीमारियों के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की देखभाल करने में काफी हद तक सफल रही है।

इसके अतिरिक्त निम्न कार्यों और प्रयासों के द्वारा जन्म के समय के कम वज़न वाले शिशु की स्थिति को यथासंभव रोका जा सकता है:

1. प्रसव-पूर्व जांच का समय (Timing of Antenatal Care)

गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव-पूर्व जांच का बहुत महत्व होता है।

इन जाँचों में ही गर्भवती महिला को गर्भावस्था में होने वाली गंभीर बीमारियाँ या परेशानियाँ जैसे गर्भावस्था-मधुमेह (gestational diabetes) या प्रिक्लेम्पसिया (preeclampsia) का पता समय पर ही चल जाता है।

इन गंभीर बीमारियों से गर्भनाल में होने वाले रक्त-प्रवाह में बाधा आ सकती है जिससे गर्भस्थ शिशु के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

इसी कारण डॉक्टर गर्भवती महिला की हर जांच में माँ-शिशु के शारीरिक वजन, ब्लड प्रेशर के साथ बच्चे का गर्भ में हो रहा विकास और उसकी हृदय गति की भी जांच करती है।

इसलिए किसी भी स्थिति में गर्भवती को प्रसव-पूर्व जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

2. जीवनशैली में महत्वपूर्ण परिवर्तन (Change in lifestyle)

गर्भवती महिला द्वारा किए जाने वाले धूम्रपान, मदिरापन या फिर मादक पदार्थों के सेवन से कम वज़न वाले शिशु (low birth weight) के जन्म की संभावना अधिक हो जाती है।

इसके साथ ही गर्भवती महिला का हर समय तनाव में रहना भी इस जोखिम को बढ़ा सकता है।

इसलिए जीवनशैली को स्वस्थ व खुश बनाकर इस जोखिम से बचा जा सकता है।

3.गर्भावस्था से पहले की बीमारियों और परेशानियों पर नियंत्रण (Control over pre-pregnancy disease and problems)

वे गर्भवती स्त्रियाँ जिन्हें गर्भधारण से पहले ही हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 मधुमेह की परेशानी होती है उनमें कम वज़न वाले शिशु (low birth weight) को जन्म देने का सबसे अधिक जोखिम होता है।

ऐसी महिलाओं को अपने डॉक्टर के हर निर्देश का पूरी तरह से पालन करना चाहिए।

4. पोषणयुक्त भोजन व व्यायाम (Nutritious diet and exercise)

गर्भावस्था में व्यायाम करना माँ और शिशु के लिए बेहद लाभकारी होता है।

यह शिशु के वज़न को सामान्य रखने में लाभकारी हो सकता है।

इसके अलावा गर्भावस्था शुरू होते ही गर्भवती महिला को प्रेग्नेंसी डॉक्टर के बताए सभी सप्लिमेंट्स को अपनाना चाहिए।

इस समय अन्य पोषण के अतिरिक्त शरीर में फोलिक एसिड की कमी न होने दें क्योंकि यह स्थिति प्रसव के समय शिशु के कम वज़न का कारण बन सकती है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 02 Jun 2020

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