प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी

What is IUGR in pregnancyin hindi

Intrauterine Growth Restriction in hindi - iugr baby, बेबी की ग्रोथ न होने की वजह इन हिंदी


Introduction

IUGR_baby_in_hindi


“आईयूजीआर वह स्थिति है, जब गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ सामान्य दर पर नहीं हो पाती।”

गर्भावस्था महिलाओं के लिए बहुत संवेदनशील दौर होता है और इस समय प्रेग्नेंट महिला का अपने शरीर के हर संकेत को अच्छे से समझना जरूरी होता है।

गर्भावस्था शुरू होते ही, डॉक्टर प्रति सप्ताह भ्रूण के विकास दर का जायजा लेते हैं।

इसके लिए गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली विभिन्न जाँच में गर्भवती स्त्री के शारीरिक वज़न को मापना सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।

इसके माध्यम से डॉक्टर गर्भ में शिशु के विकास व शारीरिक वज़न का अनुमान लगाते हैं। कभी-कभी डॉक्टर गर्भ में बच्चे के विकास का न होने का भी अनुमान लगा लेते हैं।

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना या विकास अधूरा रह जाने को मेडिकल भाषा में आईयूजीआर बेबी कहा जाता है, यानि आईयूजीआर से ग्रस्त बच्चों का विकास गर्भ में सामान्य बच्चों की तुलना में कम हो पाता है।

बच्चे के विकास में बाधा आने वाली इस स्थिति को ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन (growth restriction) भी कहा जाता है।

आइये आईयूजीआर बेबी के लक्षण, जोखिम व उपचार के बारे में विस्तार पूर्वक इस लेख में जानते हैं।

loading image

इस लेख़ में

  1. 1.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी क्या होता है?
  2. 2.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी होने के कारण क्या होते है
  3. 3.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी होने के लक्षण क्या हैं?
  4. 4.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी की पहचान कैसे होती है?
  5. 5.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी के कितने प्रकार के होते ह
  6. 6.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी को गर्भावस्था में, डिलीवर
  7. 7.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी का उपचार कैसे होता है?
  8. 8.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी से बचाव कैसे हो सकता है?
  9. 9.प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी के जन्म के बाद क्या अपेक्
  10. 10.निष्कर्ष
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी क्या होता है?

What is IUGR baby in hindi

iugr kya hota hai in hindi, what is iugr in pregnancy in hindi</strong>

loading image

आईयूजीआर जिसे इंट्रायूटराइन ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन (Intrauterine growth restriction) भी कहा जाता है, वह स्थिति होती है, जब गर्भ में विकसित हो रहे शिशु का वज़न, गर्भधारण की आयु (gestational age) से 10 प्रतिशत या इससे ज्यादा कम हो।

इसके साथ ही अगर अल्ट्रासाउंड की जांच में डॉक्टर बच्चे की ग्रोथ में कमी महसूस करते हैं तब भी यह स्थिति आईयूजीआर की हो सकती है।

आईयूजीआर की स्थिति को कभी-कभार, आयु से लघु गर्भ (Small-for-Gestational-Age -SGA) भी कहा जाता है, हालाँकि, यह स्थिति आईयूजीआर बेबी से बिलकुल भिन्न होती है।

loading image
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी होने के कारण क्या होते हैं?

What are the causes of iugr baby in hindi

iugr baby ki growth ke kya kaaran ho sakte hain in hindi, बेबी के ग्रोथ न होने की वजह, baby ki growth na hone ki vajah </strong>

loading image

इंट्रायूटराइन ग्रोथ रेटार्डेशन या आईयूजीआर की स्थिति तब होती है, जब प्लेसेन्टा किन्हीं कारणों से गर्भ में पल रहे बच्चे तक जरूरी पोषक तत्व नहीं पँहुचाना पाता।

आइए प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे की ग्रोथ ना होने की इन्हीं कारणों को विस्तार जानते हैं।

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होने के कारण, गर्भ के शिशु, गर्भवती माँ और गर्भनाल से जुड़े होते हैं।

आईयूजीआर बेबी होने के कारण निम्न हैं : -

1. गर्भस्थ शिशु से जुड़े कारण (Fetus related issues)

आईयूजीआर बेबी (प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना) के कारणों में भ्रूण संबंधी प्रमुख कारण निम्न हैं :

  • भ्रूण में आनुवंशिक विकार का (genetic deformity) होना;
  • एक से अधिक भ्रूण के साथ गर्भावस्था (multiple pregnancy)

2. प्लेसेंटा से जुड़े कारण (Placenta related issues)

आईयूजीआर बेबी (प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना) की अवस्था में प्लेसेंटा से जुड़े कारण निम्न हैं :

  • गर्भाशय की बनावट में विकार होना (uterus structural deformity)
  • प्लेसेंटा (placenta) में रक्त संचार का सही तरीके से न होना

3. गर्भवती महिला संबंधी कारण (Pregnant lady related issues)

गर्भवती महिला का निम्न कारणों से ग्रस्त होने के कारण भी आईयूजीआर बेबी (प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना) की परेशानी हो सकती है :

  • गर्भधारण करते समय महिला का शारीरिक वजन कम होना या शारीरिक कमजोरी से ग्रस्त होना
  • गर्भवती महिला का पौष्टिक भोजन न लेने के कारण, शरीर में पोषण की कमी (nutritional deficiency) होना
  • शरीर में खून की कमी (anaemia) संबंधी परेशानी होना या सिकल सेल अनिमिआ (sickle cell anemia) का होना
  • गर्भवस्था में महिला के द्वारा मदिरापान (drinking) और धूम्रपान (smoking) आदि करना
  • गर्भावस्था से पहले या गर्भावस्था की अवधि के दौरान महिला का मधुमेह (diabetes) से या ज्यादा रक्त शर्करा से ग्रस्त होना
  • गर्भावस्था से पहले या गर्भावस्था की अवधि के दौरान महिला का रक्तचाप बढ़ना (high blood pressure)
  • गर्भधारण के समय महिला की आयु का बहुत कम या फिर सामान्य से अधिक होना
  • गर्भवती महिला का हृदय (heart disease), फेफड़े (lungs) और/या गुर्दे (kidney) संबंधी रोग से ग्रसित होना
  • महिला द्वारा दो गर्भधारण की अवधि में बहुत कम अंतर रखना
  • गर्भधारण से पहले या दौरान ऐसी दवाइयाँ लेना जिनसे गर्भ पर बुरा प्रभाव पड़ता है
  • गर्भवती महिला का समुद्र तल से काफी अधिक ऊंचाई (high altitude) वाले स्थान पर रहना
  • गर्भ से पहले गर्भवती का रुबैला, सिफ़लिस या अन्य किसी यौन संचारित रोग (sexually transmitted diseases) से ग्रसित होना
और पढ़ें:अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण, कारण और उपचार
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी होने के लक्षण क्या हैं?

What are the symptoms of having iugr baby during pregnancy in hindi

Intrauterine Growth Restriction ke Lakshan kya hote hain in hindi</strong>

loading image

आईयूजीआर बेबी का आमतौर पर महिलाओं के प्रेगनेंसी के रूटीन चेकअप के दौरान ही निदान किया जाता है क्योंकि प्रेगनेंसी के नियमित जाँच में महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के आकार की निगरानी की जाती है।

गर्भधारण के वक़्त आईयूजीआर बेबी होने का सबसे पहला और महत्वपूर्ण लक्षण है, भ्रूण का आकार सामान्य से कम होना।

डॉक्टर हाथों के जरिये या फिर इंचीटेप की मदद से गर्भवती महिला के पेट का माप लेती हैं, जिससे वे भ्रूण के आकार का अनुमान लगाती हैं।

आमतौर पर गर्भावस्था में गर्भ का विकास 1 सेंटीमीटर प्रति सप्ताह के रूप में होता है यानि हर सप्ताह बच्चे की ग्रोथ के कारण आपका पेट 1 सेंटीमीटर बढ़ता है। इसका मतलब है 20वें सप्ताह पर यह 20 सेंटीमीटर तक बढ़ चुका होता है।

इस समय आपके रेगुलर डॉक्टर अपॉइंटमेंट के समय, आपके पेट के आकार को मापकर आपके बच्चे की ग्रोथ का अनुमान लगाते हैं।

यदि डॉक्टर को बच्चे की ऊंचाई महिला के प्रेगनेंसी महीने के हिसाब से सही नहीं लगती है और कोई चिंता की बात लगती है तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड स्कैन (ultrasound scan) की सलाह से सकते है।

यह जरूरी नहीं है कि कुछ गलत ही हो, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि बच्चे के विकास का आकलन करने के अधिक सटीक तरीके के रूप में स्कैन किया जाए।

यदि भ्रूण का आकार गर्भावस्था के अनुसार 10% से कम होता है या समान गर्भावधि उम्र के 90% शिशुओं की तुलना में कम है, तब गर्भ में आईयूजीआर बेबी होने की अधिक संभावना रहती है।

आईयूजीआर बेबी के कारणों के आधार पर भ्रूण का आकार या तो छोटा हो सकता है या फिर शिशु कुपोषित प्रतीत हो सकता है।

जन्म के बाद ऐसे शिशु की त्वचा सूखी, पीली या लटकी हुई हो सकती है।

ऐसे में गर्भनाल (umbilical cord) भी अक्सर मोटी और मजबूत होने की बजाय पतली व कमजोर हो सकती है।

loading image
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी की पहचान कैसे होती है?

How do we diagnose IUGR baby in hindi

IUGR baby ke diagnosis aur test kya hote hain in hindi</strong>

loading image

नौ महीने की गर्भावधि के बाद जन्म लेने वाले शिशु आकार, रंग-रूप में भिन्न होते हैं।

कुछ शिशु जन्म से ही लंबे होते हैं, जबकि कुछ का आकार छोटा होता है।

इसका अंदाज़ा प्रेग्नेंसी डॉक्टर गर्भकाल में विभिन्न प्रकार की जांच एवं परीक्षण के माध्यम से लगाने का प्रयास करते हैं।

आईयूजीआर बेबी (प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना) की जांच करने के लिए डॉक्टर टीफा स्कैनिंग (TIFFA scanning) करते हैं।

डॉक्टर टीफा स्कैनिंग (TIFFA scanning) की मदद से गर्भ में शिशु का विकास एवं वृद्धि उस गति से हो रही है या नहीं, इसका पता लगाया जाता है।

इसके अलावा आईयूजीआर बेबी (प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना) का निदान करने के तरीके निम्न हो सकते हैं : -

1. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

गर्भ में शिशु के विकास और स्वास्थ्य की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड तकनीक का सहारा लिया जाता है।

इस तकनीक में एक उपकरण को गर्भवती महिला के गर्भाशय के ऊपरी हिस्से या पेट के ऊपर घुमाया जाता है।

इस उपकरण से निकलने वाली ध्वनि तरंगों (sound waves) की सहायता से भ्रूण की तस्वीरें ली जाती हैं

इसी प्रक्रिया में भ्रूण के सिर व पेट का माप भी लिया जाता है।

इस प्रकार से लिए गए माप की, शिशु के शारीरिक वज़न के अनुसार, स्थापित मानकों के साथ तुलना की जाती है।

इसके अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड तकनीक से गर्भाशय के अमीनोटिक फ़्ल्यूड (amniotic fluid) की मात्रा भी जांच की जाती है।

गर्भाशय में अमीनोटिक फ़्ल्यूड की कमी होने पर भी प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होने या आईयूजीआर बेबी होने का संकट हो सकता है।

2. गर्भाशय के तरल पदार्थ की जांच (Amniotic Fluid Screening)

गर्भाशय के तरल पदार्थ की जांच के लिए गर्भवती स्त्री के पेट में सुई लगाकर गर्भाशय में से तरल पदार्थ या अमीनोटिक फ़्ल्यूड का नमूना लिया जाता है। इस जाँच को एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis) कहा जाता है।

इस माध्यम से किए जाने वाले टेस्ट से गर्भाशय में किसी प्रकार के इन्फेक्शन या अन्य कोई आनुवंशिक विकार (chromosomal abnormalities) की संभावना का पता लगाया जाता है।

इस जांच का परिणाम ही आईयूजीआर बेबी के होने या न होने का उत्तर देता है।

3. डॉप्लर फ़्लो (Doppler flow)

इस तकनीक में अल्ट्रासाउंड की भांति ध्वनि तरंगों (sound waves) के माध्यम से गर्भवती महिला की रक्त वाहिनियों (blood vessels) में बहने वाले रक्त की मात्रा और गति की जांच की जाती है।

प्रेग्नेंसी डॉक्टर आईयूजीआर बेबी की संभावना की जांच करने के लिए इस तकनीक के द्वारा गर्भनाल (umbilical cord) और भ्रूण के मस्तिष्क की सभी नाड़ियों (vessels in the baby's brain) में प्रवाहित होने वाले रक्त की भी जांच करते हैं।

4. शारीरिक वज़न की जांच (Estimated Fetal Weight)

प्रेग्नेंसी डॉक्टर गर्भवती महिला की प्रसव पूर्व जांच में हर बार वज़न की जांच करते हैं।

यदि किसी भी जांच के समय गर्भवती महिला का वज़न पिछली बार के वजन के बराबर या अपेक्षाकृत गति से नहीं बढ़ता है तब यह आईयूजीआर बेबी की उपस्थिति का संकेत हो सकता है।

5. भ्रूण की जांच करना (Fetal screening)

इस जांच के लिए गर्भवती महिला के पेट पर कुछ संवेदनशील इलेक्ट्रोड्स (electrodes) लगा दिये जाते हैं।

ये इलेक्ट्रोड्स (electrode) एक प्लास्टिक जैसी पट्टी में लगे होते हैं, जिसे महिला के पेट पर बांध दिया जाता है और इस पट्टी को एक मॉनिटर से जोड़ दिया जाता है।

इन इलेक्ट्रोड्स में लगे सेंसर भ्रूण के दिल की धड़कन की गति और उसके पैट्रन को, मॉनिटर पर दिखा देते हैं या फिर उसे प्रिन्टर की मदद से प्रिंट कर देते हैं।

भ्रूण की जांच करना (fetal screening) की मदद से जितनी जल्दी हो सके गर्भावस्था के साथ जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।

और पढ़ें:कोरोना वायरस के बारे में क्या जानना जरुरी है?
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी के कितने प्रकार के होते हैं?

What are the types of iugr baby in hindi

iugr baby ke prakar</strong>

loading image

चिकित्सा जगत में अभी तक आईयूजीआर बेबी के दो प्रकार देखें गए हैं।

आईयूजीआर बेबी के दो प्रकार निम्न हैं : -

1. सममित गर्भाशयांतर अल्प वृद्धि/ सिमेट्रिक या प्राइमरी आइयूजीआर (Symmetric or primary IUGR)

सिमेट्रिक या प्राइमरी आइयूजीआर (symmetric or primary IUGR) की स्थिति में गर्भ में भ्रूण का विकास समान रूप कम होता है।

इसके अंतर्गत भ्रूण के शारीरिक अंगों का विकास शुरू से ही कम होता है।

आईयूजीआर की स्थिति में इस प्रकार के मामले 20-25% देखे जाते हैं।

2. असममित गर्भाशयांतर अल्प वृद्धि/ असिमेट्रिक आइयूजीआर (Asymmetric IUGR)

असिमेट्रिक आइयूजीआर (asymmetric IUGR) की स्थिति में, गर्भ में भ्रूण के सिर और मस्तिष्क का आकार सामान्य होता है, लेकिन उसका पेट और शरीर का शेष भाग अपेक्षा से छोटा होता है।

loading image
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी को गर्भावस्था में, डिलीवरी के समय और डिलीवरी होने के बाद कौन सी समस्याओं से गुजरना पड़ता है , pregnancy me bacche ki growth na hona - iugr baby ko garbhavstha me, delivery ke samay aur delivery hone ke bad kounsi samyaonse gujrana padta hai in hindi</strong>

loading image

सामान्य रूप से आईयूजीआर बेबी की अवस्था में गर्भ के शिशु को जन्म से पूर्व व पश्चात, दोनों ही समय अनेक जोखिम और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे शिशु जो समय पूर्व प्रसव (premature delivery) के माध्यम से आईयूजीआर बेबी के रूप में जन्म लेते हैं, उन्हें बाद की देखभाल के लिए अस्पताल में अधिक समय तक रहना पड़ सकता है।

इसके अलावा उन्हें जन्म के बाद कुछ परेशानियाँ जैसे - सांस लेने में कठिनाई , इन्फेक्शन आदि कि स्थिति में विशेष देखभाल की जरूरत हो सकती है।

इसके अलावा आईजीईयूईआर बेबी को विभिन्न दवाइयाँ लेने की भी जरुरत पड़ सकती है।

इन जोखिमों के अतिरिक्त आईयूजीआर बेबी निम्न जोखिमों का भी सामना कर सकते हैं : -

1. सिजेरियन प्रसव (cesarean delivery) की संभावना अधिक हो जाती है।

2. जन्म के समय शिशु के शरीर में ऑक्सीजन की कमी (hypoxia) हो सकती है।

3. प्रसव से पहले कई बार शिशु गर्भ में ही अपने मल को मुंह में ले लेते हैं जिससे उनकी सांस लेने की नली में रुकावट आने से प्राणों पर जोखिम आ सकता है। इसके अलावा कई बार शिशु न्यूमोनिया या बैक्टीरियल इन्फेक्शन के साथ जन्म लेता है।

4. रक्त में शुगर की कमी हो जाना, जिस स्थिति को हैपोग्लिसिमिया कहते हैं (hypoglycemia - low blood sugar)

5. लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि हो जाना, जिस स्थिति को पौल्य्सिथेमिया कहते हैं (polycythemia - लाल रक्त कोशिकाओं की बढ़ी हुई मात्रा)

6. रक्त में लाल कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाने के कारण रक्त के प्रवाह में कमी हो जाती है।

7. न्यूरोलोजिकल एवं परिचलन (motor and neurological) विकार के उत्पन्न होने का जोखिम बहुत बढ़ जाता है।

न्यूरोलोजिकल एवं परिचलन (motor and neurological) विकार को एपगर स्कोर (apgar scores) की जाँच से भी मापा जाता है।

इसमें बच्चे के जन्म के तुरंत बाद एक परीक्षण किया जाता है, जिसमें नवजात शिशु की शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है। अगर बच्चे को किसी विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता हो तो उसका निर्धारण किया जाता है।

एपगर स्कोर बच्चे के जन्म के १ मिनट और ५ मिनट पर किया जाता हैं।

1 मिनट वाले एपगर स्कोर यह निर्धारित करता हैं कि बच्चे की स्थिति प्रसव के समय पर कैसे थी!

इसके अलावा ५ मिनट वाला एपगर स्कोर यह निर्धारित करता हैं कि बच्चा गर्भ के बाहर नए वातावरण में कैसे ढल रहा हैं।

कभी कभी एपगर स्कोर १० मिनट पर भी किया जाता है।

इस समय डॉक्टर बच्चे की सांस, हृदय गति, मस्पेशियों, त्वचा का रंग और रिफ्लेक्स पर बच्चे की स्थिति को मापते हैं।

आईयूजीआर में बेबी का एपगर स्कोर कम आता है।

एपगर स्कोर 1 से 10 के कुल स्कोर पर आधारित है।

यह स्कोर जितना अधिक होगा, बच्चा जन्म के बाद उतना ही बेहतर होगा। 7, 8, या 9 का स्कोर सामान्य है।

यह संकेत है कि नवजात शिशु अच्छे स्वास्थ्य में है अगर इससे कम है तो बच्चे को विशेष चिकित्सा का प्रयोजन किया जाता है।

8. शिशु की प्रसव से पहले ही मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है

और पढ़ें:गर्भकालीन मधुमेह के कारण, लक्षण और उपचार
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी का उपचार कैसे होता है?

What is the treatment for iugr baby in hindi

Intrauterine Growth Restriction - iugr baby ka treatment kya ho sakta hai in hindi</strong>

loading image

विश्व-भर में अब तक इंट्रायूटराइन ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन (intrauterine growth restriction) या आइयूजीआर बेबी के उपचार पर अनेक प्रकार के शोध एवं विचार-विमर्श हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इस परेशानी का उपयुक्त उपचार का पता लगाना संभव नहीं हो पाया है।

  • फिर भी चिकित्सक, महिला की गर्भावधि के पूरे समय काल पर निगरानी बनाए रखते हैं, क्योंकि पूरे गर्भकाल के दौरान माँ व बच्चे के स्वास्थ्य के लिए रक्तचाप (blood pressure) व शुगर (blood sugar) की जांच बेहद ज़रुरी होती है।
  • गर्भावस्था के दौरान, प्रेग्नेंसी डॉक्टर गर्भवती महिला की जांच करने के लिए, उन्हें प्रसव होने तक हर 2 से 6 सप्ताह के अंतराल पर बुला सकते हैं।
  • इस अवधि में प्रेग्नेंसी चिकित्सक गर्भस्थ शिशु की गर्भनाल (umblical cord) में रक्त प्रवाह (blood circulation) की जांच करते हैं।
  • इसके साथ ही डॉक्टर शिशु के शारीरिक आकार को जाँचने के लिए अल्ट्रासाउंड और नॉन-स्ट्रेस टेस्ट (non-stress tests) भी करते हैं।
  • ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर गर्भनाल में रक्त प्रवाह को ठीक करने के लिए दवा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • प्रसव के 34 सप्ताह पूरे होने की स्थिति में डॉक्टर गर्भ के अमीनोटिक फ़्ल्यूड (amniotic fluid) की जांच करके शिशु के फेफड़ों की वास्तविक स्थिति का जायजा ले सकते हैं।

वैसे सामान्य रूप से अभी तक इस परेशानी का उपचार महिला के गर्भ की अवधि पर निर्भर करता है।

  • यदि गर्भकाल 34 सप्ताह या इससे अधिक का है, तब प्रेग्नेंसी डॉक्टर समय से पूर्व प्रसव की सलाह दे सकते हैं।
  • लेकिन गर्भकाल 34 सप्ताह से कम अवधि के होने की स्थिति में डॉक्टर गर्भ की अवधि को 34 सप्ताह तक या इससे अधिक होने का मौका देते हैं।

इस अवधि में भ्रूण के स्वास्थ्य और गर्भ के अमीनोटिक फ़्ल्यूड पर नज़र रखी जाती है।

इस समय यदि चिकित्सक को भ्रूण के फेफड़ों में कमी या परेशानी दिखाई देती है, तब चिकित्सक भ्रूण के फेफड़ों को विकसित करने के लिए इंजेक्शन दे सकते हैं।

इस तरह गर्भस्थ शिशु को गर्भ से बाहर मिलने वाले पोषण और पोषक तत्वों के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने का मौका मिल सकता है, जो शिशु को गर्भ के आंतरिक माहौल में प्राप्त होना मुश्किल था।

और पढ़ें:गर्भपात के लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी से बचाव कैसे हो सकता है?

What is the prevention for iugr baby? in hindi

iugr baby se kaise bacha ja sakta hai in hindi</strong>

loading image

एक स्वस्थ माँ आईजीयूआर बेबी से जुड़ी परेशानियों का सामना कर सकती है।

मगर कुछ सावधानियां बरतने से और कुछ बचाव के उपाय अपनाने से गर्भवती महिला आईजीयूआर बेबी की स्थिति से बच सकती है।

आईयूजीआर बेबी से बचाव के तरीके निम्न हैं : -

1. गर्भावस्था के शुरू होते ही एक अच्छे प्रेग्नेंसी डॉक्टर के संपर्क करें।

एक अच्छे और अनुभवी डॉक्टर भविष्य में होने वाली किसी भी समस्या या परेशानी को शुरू होने से पहले ही जांच एवं परीक्षण के माध्यम से पता लगाकर समय रहते उसका इलाज कर सकते हैं।

2. गर्भ में विकसित हो रहे भ्रूण की गतिविधि के लिए पूरी तरह से जागरूक रहें

अगर आपको शिशु के गतिविधि में कमी महसूस हो या फिर गतिविधि का बिलकुल भी एहसास न हो तब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

यह स्थिति शिशु के ख़तरे में होने की और इशारा करती है।

3. गर्भावस्था में दवाओं का सेवन बिना चिकिसक की सलाह के न करें।

कई बार किसी अन्य बीमारी के लिए ली गई दवा का गर्भस्थ शिशु की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।

4. पौष्टिक भोजन करें।

गर्भावस्था में लिया गया स्वस्थ व पोषक भोजन गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।

5. गर्भावस्था में आराम करने को भी अनिवार्य हिस्सा मानें।

आराम करने से गर्भवती महिला न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी स्वस्थ महसूस करती है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बेहद स्वास्थ्यवर्धक है।

6. गर्भवती महिला के लिए रात में कम से कम आठ घंटों की नींद लेना और दोपहर में घंटे-दो घंटे का आराम करना, अत्यंत जरूरी माना जाता है।

7. गर्भावस्था में महिला को नमक और चीनी का कम मात्रा में सेवन करना चाहिए।

इसके साथ ही गर्भवती महिला को बाईं ओर करवट लेकर सोना चाहिए।

8. गर्भावस्था में स्वस्थ जीवन शैली का पालन करें।

इस अवधि में धूम्रपान, मदिरापान और मादक पदार्थों का सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं।

और पढ़ें:गर्भवस्था के दौरान आयरन की कमी (एनीमिया) होने के कारण, लक्षण और उपचार
 

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होना - आईयूजीआर बेबी के जन्म के बाद क्या अपेक्षा की जाती है?

What to expect after delivery of iugr baby in hindi

iugr baby in mein delivery ke baad kya ho sakta hai in hindi </strong>

loading image

आमतौर पर 90% शिशु, जिनका आकार छोटा होता है उनके जन्म लेने के कुछ वर्षों में उनका आकार सामान्य हो जाता है।

यदि किसी महिला का आईयूजीआर बेबी के रूप में समय से पहले प्रसव होता है तब उन्हें थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में अगर आईयूजीआर बेबी का कारण आनुवंशिक नहीं है (जैसे -ट्राईसोमी - trisomy), तब भी बच्चे का विकास सामान्य रूप से हो सकता है।

प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ न होने की समस्या अधिकतर विकासशील देशों में मुख्य रूप से देखी जाती है। इसके मुख्य कारण, गर्भधरण करने वाली माँ, गर्भनाल, भ्रूण और आनुवंशिकता से जुड़े हो सकते हैं।

जिन महिलाओं के गर्भ में आईयूजीआर बेबी के होने की संभावना होती है उन्हें अपने चिकित्सक से नियमित रूप से जांच करानी चाहिए।

आमतौर पर इस परेशानी का पता गर्भ के शुरुआती समय में ही लग सकता है।

शुरुआती समय में ही इस स्थिति का पता लगने से, सही समय पर इसका उपचार व प्रबंधन भी सरल हो सकता है।

आईयूजीआर बेबी की स्थिति में गर्भ में भ्रूण के अंगों का एक समान (symmetrical) या असमान (non-symmetrical) विकास भी हो सकता है।

आईयूजीआर बेबी को परेशानियाँ कुछ समय तक या फिर लंबे समय तक भी रह सकती हैं। यही वज़ह है कि आईजीयूआर बेबी को निरंतर चिकित्सक की निगरानी में रहना चाहिए। हैं।

और पढ़ें:गर्भावस्था के दौरान एचआईवी/एड्स
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh </strong>

loading image

जब एक महिला को पता चलता है कि उसके बच्चे को आईयूजीआर है या आईयूजीआर हो सकता है।

उस समय महिलाओं को अपने डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए की उन्हें क्या परेशानियाँ हो रही है और अपने डॉक्टर ने दी गयी सिफारिशों का पालन करना चाहिए।

इस के साथ ही महिलाओं को स्वस्थ आहार खाकर अपना ध्यान रखना चाहिए; पर्याप्त नींद लेना चाहिए; और शराब और तंबाकू से परहेज करना चाहिए।

क्या यह लेख सहायक था? हां कहने के लिए दिल पर क्लिक करें

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 10 Jun 2020

हमारे ब्लॉग के भीतर और अधिक अन्वेषण करें

लेटेस्ट

श्रेणियाँ

प्रसवोत्तर रक्तस्राव के लक्षण, कारण, उपचार, निदान, और जोखिम

प्रसवोत्तर रक्तस्राव के लक्षण&amp;#44; कारण&amp;#44; उपचार&amp;#44; निदान&amp;#44; और जोखिम

गर्भावस्था के दौरान राउंड लिगामेंट पेन के कारण, लक्षण और उपचार

गर्भावस्था के दौरान राउंड लिगामेंट पेन के कारण&amp;#44; लक्षण और उपचार

सबकोरियोनिक हिमाटोमा क्या है और आपकी गर्भावस्था को ये कैसे नुकसान पहुँचाता है

सबकोरियोनिक हिमाटोमा क्या है और आपकी गर्भावस्था को ये कैसे नुकसान पहुँचाता है

प्रसव के दौरान बच्चे से पहले गर्भनाल का बाहर आना - अम्ब्लिकल कॉर्ड प्रोलैप्स: कारण, निदान और प्रबंधन

प्रसव के दौरान बच्चे से पहले गर्भनाल का बाहर आना - अम्ब्लिकल कॉर्ड प्रोलैप्स: कारण&amp;#44; निदान और प्रबंधन

गर्भपात के लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं

गर्भपात के लक्षण&#44; कारण और उपचार क्या हैं
balance
article lazy ad