शतावरी - खुराक़, उपयोग, फायदे और दुष्प्रभाव

Shatavari - Dose, use, benefits and side-effects in hindi

Shatavari ke dose, upyog, fayde aur side-effects in hindi


Introduction

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शतावरी का पुराने समय से एक औषधीय जड़ी बूटी की तरह उपयोग होता आ रहा है। इसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की रानी कहा जाता है।

ये एक ऐस्परैगस रसमोसूस (asparagus racemosus) जाति की जड़ी बूटी होती है जिसको कई नामों जैसे - सतावर, सतावरि, सतमूली, शुतमूल, शतावरी, सरनोई शतावरी बेल या झाड़ आदि से बुलाया जाता है। इसकी जड़ों को आयुर्वेद में अमृत कहा जाता है।

कुछ शोधों से पता चला है कि यह एडाप्टोजेनिक (adaptogenic) जड़ी बूटी भी होती है जो शरीर की प्रणालियों को रेगुलेट करने और तनाव को कम करने का काम करती है।

यह शरीर को ऊर्जा प्रदान कर शरीर के ग्लूकोज मेटाबोलिज्म (glucose metabolism) में सुधार लाती है और साथ ही शरीर में स्टैमिना को भी बढ़ाती है।

अध्ययनों के मुताबिक, इस औषधि‍ में बहुत से विटामिन और फॉलिक एसिड होते हैं। शतावरी सिरदर्द, मासिक धर्म के दर्द और गठिया (arthritis) को भी ठीक करती है।

प्रत्येक औषधीय गोली के हल्के से लेकर गंभीर दुष्प्रभाव भी होते हैं। इसी तरह शतावरी को भी अगर सावधानी से नहीं लिया जाए तो यह रक्तस्राव की जटिलताओं और लीवर डैमेज का कारण बन सकती है। इसके साथ ही पेट दर्द, मतली, मल के साथ खून आना और अपच जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं।

इस लेख़ में

 

शतावरी की खुराक क्या होनी चाहिए?

What should be the dose of Shatavari? in hindi

Shatavari ki khurak kya honi chahiye in hindi

शतावरी को पाउडर, टैबलेट या तरल के रूप में लिया जा सकता है।

शतावरी की उचित खुराक कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे व्यक्ति की आयु, उसका स्वास्थ्य और कुछ अन्य स्थितियां।

शतावरी का सेवन हमेशा डॉक्टर के परामर्श से ही करना चाहिए।

शतावरी की सामान्‍य खुराक निम्न हो सकती है :

  • एक व्यक्ति के लिए इसकी सामान्य खुराक 500 मिलीग्राम हो सकती है, जो दिन में दो बार ली जा सकती है।
  • अगर आप शतावरी को अर्क यानि तरल के रूप में ले रहे हैं तो आपको इसकी 30 बूंदें पानी या जूस के साथ लेनी चाहिए, जो एक दिन में तीन बार ली जा सकती हैं।
  • अगर आप शतावरी को पाउडर के फॉर्म में ले रहे हैं तो आप इसे 3 से 10 ग्राम यानि 1/2 चम्मच पाउडर को दूध में मिलाकर आप 2 बार ले सकते हैं।
  • अगर आप पहली बार शतावरी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श अवश्य लें।
 

शतावरी टैबलेट के फायदे क्या हैं?

What are the benefits of Shatavari? in hindi

Shatavari ke fayde in hindi

शतावरी एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुणों से भरपूर होती है जो सूजन और दर्द में राहत देती है।

आयुर्वेद के अनुसार, शतावरी में शरीर को ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो वात और पित्त दोषों को शांत और संतुलित करने में मदद करते हैं।

इसका उपयोग अक्सर लोग प्रजनन और पाचन स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए करते हैं।

शतावरी के निम्नलिखित स्वास्थ्य लाभ होते हैं :

  • स्वस्थ प्रजनन प्रणाली को बढ़ावा देना (Improves female reproductive health)

शतावरी में कुछ प्राकृतिक जैसे फाइटो-एस्ट्रोजन (phyto-estrogen) नामक हार्मोन होते हैं जो महिलाओं की प्रजनन प्रणाली को स्वस्थ रखता है।

यह महिला के गर्भाशय को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी देता है।

  • पीरियड्स में दर्द कम करना (Reducing symptoms of menopause)

शतावरी शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ पीरियड्स के समय होने वाले दर्द को भी कम करती है।

इसी के साथ ये हार्मोन असंतुलन को भी नियंत्रि‍त करता है।

  • योनि के स्वास्थ्य में सुधार (Vaginal health improvement)

कभी-कभी महिलाओं में योनि संक्रमण होने का डर रहता है जो अन्य समस्याओं को बढ़ा सकता है।

योनि संक्रमण का कारण बनने वाले कैंडिडा बैक्टीरिया (candida bacteria) से लड़ने में शतावरी मदद करती है।

इसके साथ ही यह पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOD) के इलाज़ में भी मदद करती है।

  • इम्‍यून सिस्टम करता है मज़बूत (Strong immune system)

शतावरी शरीर में इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाती है और इसके प्रतिरोध को बढ़ावा देती है।

इसके सेवन से मौसम के साथ आने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है - जैसे कोल्ड, फ्लू, वायरल आदि।

  • प्राकृतिक एन्टीऑक्सीडेंट गुण (Natural antioxidant effects)

जिनके पेट में या आंतों में अल्सर की समस्या होती है, उनके लिए शतावरी का सेवन फायदेमंद होता है।

ये शरीर में मुक्त कणों को कम करके अल्सर को बनने से रोकती है।

शतावरी में मौजूद एन्टीऑक्सीडेंट गुण पेट में होने वाले गैस्ट्रिक एरिया के अंदर की परत के प्रभाव को कम करते हैं।

  • पाचन सिस्टम करता है मज़बूत (Makes digestive system strong)

शतावरी एक ऐसी श्रेष्ठ जड़ी बूटी है जो हमारे शरीर से टॉक्सिन्स को निकालकर और पाचन एंजाइमों को सक्रिय करके पाचन तंत्र को मज़बूत बनाती है।

इसके साथ ही यह आंतों की सफाई करके शरीर से मल-मूत्र त्यागने में मदद करती है।

  • स्तनों में दूध बढ़ाने में सहायक (Increases breast milk)

कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद स्तनों में पर्याप्त दूध नहीं आ पाता जिसके कारण बच्चे का विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है।

ऐसी स्थिति में महिलाओं को शतावरी चूर्ण का दूध के साथ सेवन करना चाहिए।

इससे स्तनों में दूध बनना शुरू हो जाता है।

  • सेक्सुअल पॉवर को बढ़ाने में मददगार (For increasing sexual power)

जिन लोगों में सेक्सुअल पॉवर से संबंधित कोई समस्या या सेक्सुअल पॉवर की कमी होती है उन्हें शतावरी का सेवन करना चाहिए।

शतावरी के अन्य लाभों में शामिल है :

  • चिंता को दूर करना
  • ब्रोंकाइटिस की समस्या का समाधान
  • कब्ज की समस्या से निजात
  • मधुमेह में लाभकारी
  • दस्त सही करना
  • खट्टी डकार का इलाज
  • इर्रिटेबल बॉउल सिंड्रोम (IBS) में लाभकारी
 

शतावरी के साइड-इफेक्ट्स क्या हैं?

What are the side-effects of Shatavari in hindi

Shatavari ke side-effects kya hai in hindi

जैसे हर दवा के फायदे और नुकसान होते हैं, वैसे ही शतावरी के भी कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हैं।

एक शोध के अनुसार, गर्भावस्था और स्तनपान की स्थिति में शतावरी का लंबे समय तक उपयोग बिल्कुल सुरक्षित नहीं होता है।

एक अन्‍य अध्ययन के अनुसार, शतावरी लेने के बाद कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं।

शतावरी को अन्य मूत्रवर्धक जड़ी-बूटियों या ड्रग्स जैसे फ़्यूरोसेमाइड (Furosemide) के साथ नहीं लेना चाहिए।

शतावरी के दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं :

  • गर्भावस्था और स्तनपान (Pregnancy and breastfeeding)

यदि आप गर्भवती हैं तो शतावरी का उपयोग न करें।

गर्भावस्था के दौरान इसका उपयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे और मां को नुकसान हो सकता है।

शतावरी लेने से गर्भपात होने का ख़तरा भी रहता है। स्तनपान के दौरान शतावरी के उपयोग से बचें।

  • मधुमेह (Diabetes)

शतावरी ब्लड शुगर के स्तर को कम कर सकता है।

मधुमेह के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के साथ इसे लेने से दवाओं का असर कम होता है।

  • उच्च या निम्न रक्तचाप (High or low blood pressure)

शतावरी रक्तचाप को कम कर सकती है।

इससे निम्न रक्तचाप वाले लोगों में रक्तचाप अधिक कम हो सकता है या उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के साथ इसका सेवन करने से दवाइयों का असर भी कम हो सकता है।

अगर आपको लो ब्लड प्रेशर है या आपके हाई ब्लड प्रेशर के लिए दवाएं ले रहे हैं तो शतावरी का इस्तेमाल करने से बचें।

इसके अन्य दुष्परिणाम निम्न हैं :

  • त्वचा पर दाने आना
  • हृदय गति का तेज होना
  • आंखों में जलन महसूस होना
  • त्वचा में खुजली होना
  • सांस लेने मे तकलीफ़ महसूस होना
  • चक्कर आना आदि।
 

शतावरी के दुष्प्रभाव से कैसे बचें?

How to avoid the side-effects of Shatavari in hindi

Shatavari ke dushprabhav se kaise bache in hindi

शतावरी लेने से पहले निम्न बातों का रखें ध्यान :

  • शतावरी को डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं लेना चाहिए।
  • जिन लोगों को प्याज़ और लहुसन से एलर्जी है उन्हें शतावरी नहीं लेना चाहिए।
    डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें।
  • रोगी को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि शतावरी से उसे कोई एलर्जी ना हो।
  • दवा के सेवन के बाद रोगी को अपने शरीर में होने वाले प्रतिकूल परिवर्तनों की सूचना डॉक्टर को तुरंत देनी चाहिए जैसे कि चेहरे पर सूजन, त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, अस्थमा का दौरा, पेट में रक्तस्राव या नाक में जलन।
  • शतावरी का सेवन करने से पहले पेट के रक्तस्राव या आंत के अल्सर के रोगी को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
  • लिवर और किडनी के रोगियों को यह दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
  • हृदय रोग, हार्ट फेल्योर या स्ट्रोक के मरीज़ों को दवा के सेवन के बाद कोई दुष्प्रभाव होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • दूध या खाने के साथ ही दवा सेवन करें अन्यथा कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
  • गर्भधारण की कोशिश में हैं, तो शतावरी न लें।
  • शतावरी के सेवन के दौरान शराब का सेवन ना करें।
  • पहले से किसी दवा का सेवन कर रहे हैं तो शतावरी लेने से पहले डॉक्टर को बताएं।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 01 Apr 2020

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