sanjeevani tablet ke dose, upyog, fayde aur side-effects in hindi

संजीवनी - डोज़, उपयोग फ़ायदे और दुष्प्रभाव

Selaginella bryopteris - Dose, use, benefits and side-effects in hindi

sanjeevani tablet ke dose, upyog, fayde aur side-effects in hindi

हिंदू पौराणिक कथाओं में चर्चित संजीवनी जड़ी बूटी को सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस (selaginella bryopteris) भी कहते हैं।

इसको आम भाषा में लिथोफाइट्स पेरिडीडोफाइटिक (lithophytes peridophytic) पौधे के नाम से जाना जाता है।

सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस भारत में ज्ञात ऐसी जड़ी बूटी के नाम से विख्यात है जिसको जीवन दान देने वाली जड़ी बूटी कहा जाता है।

संजीवनी जड़ी बूटी का उल्लेख हिंदी कवि तुलसी दास ने रामायण में भी किया है। रामायण के अनुसार हनुमान जी ने संजीवनी जड़ी-बूटी लाकर लक्ष्मण जी की जान बचाई थी।

संजीवनी जड़ी बूटी में किसी भी समस्या को ठीक करने के गुण होते हैं। यह माना जाता है कि इस जड़ी बूटी से तैयार दवाएं मृत व्यक्ति को जीवन दान दे सकती हैं। जबकि वैज्ञानिक साहित्य के अनुसार, इस जड़ी-बूटी को सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस के रूप में माना गया है।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने निश्चित रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि ये जड़ी बूटी सच में मृत व्यक्ति को जीवित कर सकती है। संजीवनी जड़ी बूटी की सबसे खास बात यह है कि वो अंधेरे में चमकती है।

प्राचीन काल से संजीवनी बूटी अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है और इसका उपयोग बीमारियों के इलाज के लिए प्रभावी रूप से किया जाता रहा है।

आजकल के समय में सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस का उपयोग हीट स्ट्रोक, अनियमित मासिक धर्म के इलाज, लेबर पेन को कम करने और पीलिया के उपचार के लिए किया जाता है।

संजीवनी सिरदर्द, मासिक धर्म के दर्द और गठिया (arthritis) को भी ठीक करती है।

संजीवनी के कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं जैसे - पेट दर्द, मतली, मल के साथ खून आना और अपच आदि।

सही तरह से दूध के साथ खाने या खाना खाने के बाद इसे लेने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

प्रत्येक औषधीय गोली के हल्के से लेकर गंभीर दुष्प्रभाव भी होते हैं। इसी तरह संजीवनी अगर सावधानी से नहीं लिया जाए तो रक्तस्राव की जटिलताओं और लीवर डैमेज का कारण बन सकता है।

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इस लेख़ में/\

  1. संजीवनी की संरचना में कौन से घटक शामिल हैं?
  2. संजीवनी की खुराक क्या होनी चाहिए?
  3. संजीवनी टैबलेट की सलाह कब दी जा सकती है?
  4. संजीवनी के लाभ क्या हैं?
  5. संजीवनी के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?
  6. संजीवनी के दुष्प्रभाव से कैसे बचें?
 

1.संजीवनी की संरचना में कौन से घटक शामिल हैं?

Selaginella bryopteris is made up of which components in hindi

Sanjeevani tablet kisse bana hai in hindi

संजीवनी जड़ी-बूटी में विभिन्न प्रकार के सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स (secondary metabolites) और बायोएक्टिव यौगिक जैसे अल्कलॉइड (alkaloid), फिनोल - फ्लेवोनोइड्स, टैनिन, सैपोनिन (phenol - flavonoids, tannins, saponins) और टेरपीनॉइड्स - ट्राइटरपीन, स्टेरॉयड (terpenoids -triterpene, steroi) शामिल होते हैं।

इस जड़ी बूटी का मुख्य सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स बाईफ्लैवोनोइड (biflavonoid) होता है।

संजीवनी में कई यौगिक होते हैं जो एंटीऑक्सिडेंट (antioxidants), एंटी-स्ट्रेस (anti-stress), एंटीइन्फ्लेमेटरी (anti-inflammatory), एंटी-कैंसर (anti-cancer), एंटी-एलर्जिक (anti-allergic), एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial), एंटीफंगल (antifungal), एंटीबैक्टीरियल (antibacterial), एंटीवायरल (antiviral), एंटीप्रोटोज़ोआन (anti protozoan), एंटी-यूवी-विकिरण (anti UV-irradiation) , एंटी-स्पैस्मोडिक (anti-spasmodic), वैसोरेलैक्सेंट (vasorelaxant), हार्ट बूस्टर (heart boosters), एंटीहाइपरटेन्शन (antihypertensive), एंटी-क्लॉटिंग (anti-clotting) का काम करके मेटाबोलिज्म एंजाइमों (metabolism enzymes) को प्रभावित करते हैं।

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2.संजीवनी की खुराक क्या होनी चाहिए?

What should be the dose of Selaginella bryopteris in hindi

Sanjeevani ki khurak kya honi chahiye in hindi

आमतौर पर संजीवनी की खुराक आपके द्वारा इलाज करवाने वाली स्थिति पर निर्भर करती है।

यूं भी संजीवनी की उचित खुराक कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य और कुछ अन्य स्थितियां।

संजीवनी की खुराक लेने के बारे में कोई सही जानकारी नहीं है लेकिन इसको हमेशा डॉक्टर के परामर्श से लेना चाहिए।

ध्यान रखें कि, प्राकृतिक उत्पाद के सेवन से पहले हमेशा डॉक्टर के दिए निर्देशों का पालन करें।

अगर हम किसी भी हर्बल दवा की बात करें तो यह एफडीए द्वारा निर्देशित नहीं होती है और न ही इन दवाओं कोई भी एफडीए मानक इन दवाइयों पर लागू होता है।

 

3.संजीवनी टैबलेट की सलाह कब दी जा सकती है?

When Selaginella bryopteris can be suggested in hindi

Sanjeevani tablet ka sevan kab kiya ja sakta hai in hindi

संजीवनी गुणों से भरपूर जड़ी बूटी होती है जो कई तरह की बीमारियों में फायदेमंद होती है।

मुख्य रूप से इसका उपयोग हीट स्ट्रोक, अनियमित मासिक धर्म के इलाज, लेबर पेन को कम करने और पीलिया के उपचार के लिए किया जाता है।

कुछ अन्य स्थितियों में भी संजीवनी लेने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद के चिकित्सकों के अनुसार, संजीवनी में बायोएक्टिव यौगिक होते हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है बायो फ्लैवोनॉइड (bioflavonoid)।

सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस भारतीय मेडिकल पद्धति में कई विकारों की रोकथाम और इलाज के लिए उपयोग में लाई जाती है जैसे - वेनेरल रोग, कब्ज, कोलाइटिस, यूरिन इन्फेक्शन, बुख़ार, मिर्गी, ल्यूकोरिया, बेरी-बेरी और कैंसर।

संजीवनी का इस्तेमाल एक पॉवर टॉनिक की तरह भी किया जा सकता है।

इसी के साथ इसको बेहोशी, सेरेब्रल विकारों, श्वसन समस्याओं, शारीरिक दर्द और अन्य समस्याओं का इलाज करने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है।

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4.संजीवनी के लाभ क्या हैं?

What are the benefits of selaginella bryopteris in hindi

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संजीवनी के निम्नलिखित स्वास्थ्य लाभ होते है:

  • मासिक धर्म की अनियमितता (Irregular menstrual cycle)

मासिक धर्म की प्रक्रिया में अनियमितता, शरीर के अस्वस्थ होने का संकेत है।

मासिक चक्र में अनियमितता एक बहुत आम समस्या बनती जा रही है।

अनियमित मासिक धर्म के कई कारण हो सकते हैं- हार्मोनल असंतुलन (hormonal disorder), खराब जीवनशैली, खान-पान की खराब आदतें, दवाइयों का दुष्प्रभाव आदि।

अनियमित मासिक धर्म की समस्या को ओलिगोमेनोरिया (oligomenorrhea) कहा जाता है।

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए संजीवनी जड़ी बूटी का उपयोग किया जाता है।

  • ल्यूकोरिया (Leukorrhea)

ल्यूकोरिया महिलाओं में अक्सर होने वाली एक आम समस्या है जिससे मुख्य रूप से महिलाएं या युवा लड़कियां प्रभावित होती हैं।

संजीवनी स्त्री रोग संबंधी इन सभी समस्याओं का इलाज करने में सक्षम है।

  • स्वस्थ प्रजनन प्रणाली को बढ़ावा देना (Improving female reproductive health)

संजीवनी में कुछ प्राकृतिक जैसे - फाइटो-एस्ट्रोजन (phyto-estrogen) नामक हार्मोन होते हैं जोकि महिलाओं की प्रजनन प्रणाली को स्वस्थ रखते हैं।

यह महिला के शरीर में गर्भाशय को मजबूत बनाने के साथ-साथ महिला को अन्य स्वास्थ्य लाभ भी देते हैं।

  • यूवी रेज़ से कोशिकाओं की रक्षा करना (Protect cells against UV rays)

यूवी किरणें शरीर को जेनेटिक क्षति (genetic damage) पहुंचाती हैं और हमारे शरीर में हाइड्रॉक्सिल रेडिकल्स (OHI) के स्तर को बढ़ाकर तनाव को भी बढ़ा देती हैं।

यह हर्बल जड़ी-बूटी यूवी रेज़ से कोशिकाओं की रक्षा कर सकती हैं।

  • प्रसव पीड़ा को कम करना (Reducing symptoms of labour pain)

संजीवनी शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ पीरियड्स के समय होने वाले दर्द को कम करती है।

इसी के साथ ये हार्मोन असंतुलन को भी नियंत्रित करती है।

  • योनि के स्वास्थ्य में सुधार (Vaginal health improvement)

योनि संक्रमण का कारण बनने वाले कैंडिडा बैक्टीरिया से लड़ने में संजीवनी मदद करती है।

साथ ही यह पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOD) के इलाज़ में भी मदद करती है।

  • इम्यून सिस्टम मज़बूत (Strong immune system)

संजीवनी शरीर में इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है और बीमारियों से प्रतिरोध को बढ़ावा देती है।

ऐसा होने पर मौसम के साथ आने वाली बीमारियों से बचा जा सकता हैं - जैसे कोल्ड, फ्लू, वायरल आदि।

  • पाचन सिस्टम मज़बूत (strong immune system)

संजीवनी एक ऐसी श्रेष्ठ जड़ी बूटी है जो हमारे शरीर से टॉक्सिन्स को निकालकर पाचन सिस्टम को मज़बूत बनाती है और आंतों की सफाई करके शरीर से मलमूत्र त्यागने में मदद करती है।

ये पाचन एंजाइमों को सक्रिय करके पाचन तंत्र को मज़बूत बनती है।

संजीवनी के अन्य लाभ भी होते है जिनमें शामिल हैं :

  • हीट स्ट्रोक और जलन से राहत
  • पेशाब के दौरान संवेदना
  • पीलिया के उपचार में चिंता को दूर कर करना
  • ब्रोंकाइटिस की समस्या का समाधान
  • कब्ज की समस्या से निजात
  • मधुमेह में लाभकारी
 

5.संजीवनी के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

What are the side-effects of Selaginella bryopteris in hindi

Sanjeevani ke side-effects kya hai in hindi

जैसे हर दवा के फायदे और नुकसान होते हैं। वैसे ही संजीवनी के भी कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हैं।

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि वो यूनाइटेड स्टटेड ऑफ़ अमेरिका फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन-एफडीए (U.S. Food and Drug Administration -FDA) द्वारा विनियमित नहीं होती हैं।

2003 में हुए एक शोध के अनुसार, आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार, गर्भावस्था और स्तनपान की स्थिति में संजीवनी का लंबे समय तक उपयोग बिल्कुल सुरक्षित नहीं होता हैं।

जो महिलाएं गर्भवती हैं या स्तनपान करवा रही हैं, उन्हें डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

एक अध्ययन के अनुसार, संजीवनी लेने के बाद कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं।

यदि आपको संजीवनी से एलर्जी है, तो इस पूरक से बचें।

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6.संजीवनी के दुष्प्रभाव से कैसे बचें?

How to avoid the side-effects of Selaginella bryopteris in hindi

Sanjeevani ke dushprabhav se kaise bache in hindi

संजीवनी लेने से पहले निम्न बातों का रखें ध्यान :

  • संजीवनी को डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं लेना चाहिए।
  • ध्यान रखें कि मरीज़ को संजीवनी से एलर्जी न हो।
    रोगी को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि संजीवनी से उसे कोई एलर्जी ना हो।
  • दवा के सेवन के बाद रोगी को अपने शरीर में होने वाले प्रतिकूल परिवर्तनों की सूचना डॉक्टर को तुरंत देनी चाहिए जैसे कि चेहरे पर सूजन, त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, अस्थमा का दौरा, पेट में रक्तस्राव, या नाक में जलन।
  • संजीवनी का सेवन करने से पहले पेट के रक्तस्राव या आंत के अल्सर के रोगी को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
  • लिवर और किडनी के रोगियों को यह दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
  • हृदय रोग, हार्ट फेल्योर या स्ट्रोक के मरीज़ों को दवा के सेवन के बाद कोई दुष्प्रभाव होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • दूध या खाने के साथ ही दवा सेवन करें, अन्यथा कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
  • गर्भधारण की कोशिश में हैं तो संजीवनी ना लें।
  • संजीवनी के सेवन के दौरान शराब का सेवन ना करें।
  • पहले से किसी दवा का सेवन कर रहे हैं तो संजीवनी लेने से पहले डॉक्टर को बताएं।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 31 Mar 2020

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