Ashwagandha  ke dose, upyog, fayde aur side-effects in hindi

अश्वगंधा - डोज़, उपयोग फ़ायदे और दुष्प्रभाव

Ashwagandha - dose, use, benefits and side-effects in hindi

Ashwagandha ke dose, upyog, fayde aur side-effects in hindi

अश्वगंधा को आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का राजा कहा जाता है। पुराने समय से अश्वगंधा का उपयोग एक औषधीय जड़ी बूटी की तरह होता आ रहा है।

ये एक एडाप्टोजेन (adaptogen) के रूप में स्ट्रेस को कम करने में सहायक है। कुछ शोधों से भी पता चला है कि अश्वगंधा तनाव और चिंता को कम करता है।

यह शरीर को ऊर्जा प्रदान कर ग्लूकोज मेटाबोलिज्म (glucose metabolism) में सुधार लाता है और साथ ही शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर (testosterone levels) को भी बढ़ाता है। यह सिरदर्द, मासिक धर्म के दर्द और गठिया (arthritis) को भी ठीक करता है।

प्रत्येक औषधीय गोली के हल्के से लेकर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसी तरह अश्वगंधा के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं जैसे - पेट दर्द, मतली, मल के साथ खून आना और अपच आदि।

अश्वगंधा अगर सावधानी से नहीं लिया जाए तो यह रक्तस्राव की जटिलताओं और लीवर डैमेज का कारण बन सकता है। सही तरह से इसे दूध के साथ खाने से या खाना खाने के बाद लेने से, इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

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इस लेख़ में/\

  1. अश्वगंधा की खुराक क्या होनी चाहिए?
  2. अश्वगंधा टैबलेट की सलाह कब दी जा सकती है?
  3. अश्वगंधा के साइड इफेक्ट्स क्या हैं ?
  4. अश्वगंधा के दुष्प्रभाव से कैसे बचें ?
  5. पूछे गए प्रश्न
 

1.अश्वगंधा की खुराक क्या होनी चाहिए?

What should be the dose of Ashwagandha in hindi

Ashwagandha ki khurak kya honi chahiye in hindi

अश्वगंधा की खुराक इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस बीमारी से राहत के लिए इसका सेवन कर रहें हैं।

अश्वगंधा की उचित खुराक कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य और कुछ अन्य स्थितियां।

हालाँकि, अश्वगंधा की खुराक लेते वक़्त डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

अश्वगंधा का सेवन करते वक़्त निम्न बातें ध्यान में रखें :

  • अगर आप अश्वगंधा को कैप्सूल के रूप में ले रहे हैं तो भोजन के बाद प्रतिदिन एक कैप्सूल (1 capsule), एक दिन में, दो बार ले सकते हैं।
  • अगर आपकी समस्या अधिक गंभीर है और आप डॉक्टर से परामर्श कर चुके हैं तो आप दो कैप्सूल (2 capsule) का सेवन, एक दिन में, दो बार भी कर सकते हैं।
  • अगर आप अश्वगंधा के रूट पाउडर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसे 120 मिलीग्राम से लेकर 2 ग्राम तक एक दिन में खुराक के तौर पर लिया जा सकता है।

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2.अश्वगंधा टैबलेट की सलाह कब दी जा सकती है?

What are the situations in which ashwagandha can be prescribed in hindi

Ashwagandha ka sevan kab kiya ja sakta hai in hindi

अश्वगंधा एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुणों से भरपूर होता है जो सूजन और दर्द से राहत देता है।

गठिया, कब्ज, अनिद्रा, तनाव, मधुमेह, बुख़ार में अश्वगंधा लेने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा निम्न स्थितियों के लिए अश्वगंधा के सेवन की सलाह दी जा सकती है :

  • एंटीसाइकोटिक्स (Antipsychotics)

एंटीसाइकोटिक दवाओं का उपयोग सिज़ोफ्रेनिया (schizophrenia) के इलाज के लिए किया जाता है लेकिन इसके कारण ब्लड शुगर और शुगर लेवल बढ़ जाता है।

दवाओं के साइड-इफेक्ट्स को कम करने के लिए अश्वगंधा लेने की सलाह दी जाती है।

  • चिंता (Anxiety)

कुछ शोधों से यह पता चला है कि अश्वगंधा लेने से चिंता और मूड स्विंग्स के लक्षण कम होते हैं।

  • अटेंशन-डेफिसिट-हाइपर-एक्टिविटी-डिसऑर्डर (Attention deficit-hyperactivity disorder)

अश्वगंधा के सेवन से अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर की समस्या कम हो सकती है।

इसके सेवन से बच्चों की एकाग्रता और गुस्से में सुधार लाया जा सकता है।

  • बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar disorder)

अश्वगंधा के सेवन से बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या में सुधार होता है और मस्तिष्क भी तेजी से काम करता है।

  • हाई कोलेस्ट्रॉल (High cholesterol)

अश्वगंधा के सेवन से उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले रोगियों में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम किया जा सकता है।

  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)

अंडरएक्टिव थायराइड (underactive thyroid) वाले लोगों में टीएसएच हार्मोन (TSH हार्मोन) का स्तर अधिक होता है।

इसके साथ ही अंडरएक्टिव थायराइड वाले लोगों में थायराइड हार्मोन का स्तर भी कम हो जाता है।

ऐसे में हार्मोन का स्तर नियंत्रित करने में अश्वगंधा बहुत कारगर है।

  • मेल फर्टिलिटी (Male infertility)

अश्वगंधा के सेवन से पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार आता है।

  • ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthritis)

एक शोध से पता चलता है कि अश्वगंधा का सेवन ओसीडी के लक्षणों को कम करता है।

  • पार्किंसंस डिजीज (Parkinson's disease)

अश्वगंधा के सेवन से पार्किंसंस के लक्षणों में सुधार होता है।

 

3.अश्वगंधा के साइड इफेक्ट्स क्या हैं ?

What are the side-effects of Ashwagandha in hindi

Ashwagandha ke side-effects kya hai in hindi

जैसे हर दवा के फायदे और नुकसान होते हैं। वैसे ही अश्वगंधा के भी कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हैं।

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का सबसे बड़ा नुकसान ये होता है कि वो यूनाइटेड स्टटेड ऑफ़ अमेरिका फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन-एफडीए (U.S. Food and Drug Administration -FDA) द्वारा विनियमित नहीं होती हैं।

कुछ स्थितियों में अश्वगंधा के दुष्प्रभाव निम्न हैं : -

  • गर्भावस्था और स्तनपान (Pregnancy and breastfeeding)

यदि आप गर्भवती हैं तो अश्वगंधा का उपयोग न करें।

गर्भावस्था के दौरान इसका उपयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे और मां को नुकसान हो सकता है।

अश्वगंधा लेने से गर्भपात होने का ख़तरा भी रहता है। स्तनपान के दौरान अश्वगंधा के उपयोग से बचें।

  • मधुमेह (Diabetes)

अश्वगंधा ब्लड शुगर के स्तर को कम कर सकता है।

मधुमेह के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के साथ इसे लेने से दवाइयों का असर कम हो जाता है।

  • उच्च या निम्न रक्तचाप (High or low blood pressure)

अश्वगंधा रक्तचाप को कम कर सकता है। इससे निम्न रक्तचाप वाले लोगों के लिए नुक़सानदेह हो सकता है।

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के साथ इसका सेवन करने से दवाओं का असर कम हो सकता है।

अगर आपको लो ब्लड प्रेशर है या आप हाई ब्लड प्रेशर के लिए दवाएं ले रहे हैं तो अश्वगंधा का इस्तेमाल करने से बचें।

  • पेट का अल्सर (Stomach ulcers)

अश्वगंधा से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग होने का डर रहता है।

यदि आपके पेट में अल्सर है तो अश्वगंधा का उपयोग न करें।

  • ऑटो-इम्यून डिजीज (Autoimmune diseases)

ऑटो-इम्यून डिजीज जैसे - मल्टीपल स्केलेरोसिस (multiple sclerosis), सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस, एसएलई (systemic lupus erythematosus), रूमेटाइड आर्थराइटिस (rheumatoid arthritis) या कोई अन्य स्थिति में अश्वगंधा के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक सक्रिय होकर इनके लक्षण बढ़ा सकती है।

इन दवाओं के साथ अश्वगंधा का सेवन हो सकता है खतरनाक :

  • ऐसी दवाएं जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली - इम्यूनोसप्रेसेन्ट (immunosuppressants) को कम करती हैं उनका सेवन अश्वगंधा के साथ नहीं करना चाहिए वरना उन दवाओं का असर कम हो जाता है।

ऐसी दवाओं में शामिल हैं - अज़ैथोप्रिन (azathioprine), बेसिलिक्सैब (basiliximab), साइक्लोस्पोरिन (cyclosporine), डेक्लिज़ुमैब (daclizumab), मुरोमोनैब-सीडी 3 (muromonab-CD3), मायकोफेनोलेट (mycophenolate), टैक्रोलिमस (tacrolimus), सिरोलिमस (sirolimus ) और प्रेडनिसिस (prednisone)।

  • सेडेटिव दवाएं जैसे- बेंज़ोडायजेपाइन (Sedative medications - Benzodiazepines) - जो दवाएं नींद आने का कारण बनती है उनको सेडेटिव दवाओं का नाम दिया जाता है जिसमें शामिल है - क्लोनाज़ेपम (clonazepam), डायजेपाम (diazepam (valium), लॉरिपम (lorazepam)।
    इन दवाओं के साथ अश्वगंधा का सेवन करने से बहुत अधिक नींद आती है।
  • मेथोट्रेक्सेट (methotrexate) के साथ अगर अश्वगंधा का सेवन करने से लीवर को नुकसान, सांस की तकलीफ़ हो सकती है।
  • अश्वगंधा और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (corticosteroids) ड्रग्स का एक साथ सेवन करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (Gastrointestinal bleeding) का ख़तरा रहता है।
  • एस्पिरिन (aspirin) के साथ अश्वगंधा लेने पर अश्वगंधा का प्रभाव कम हो सकता है।
    इससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (Gastrointestinal bleeding), पेट में दर्द और मल के साथ खून आने जैसी समस्याओं का ख़तरा बढ़ जाता है।
  • एंटीहाइपरटेंसिव ड्रग (Antihypertensive drug) के साथ अश्वगंधा का सेवन करने से लीवर डैमेज होने का डर रहता है।

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4.अश्वगंधा के दुष्प्रभाव से कैसे बचें ?

How to avoid the side-effects of Ashwagandha in hindi

Ashwagandha ke dushprabhav se kaise bache in hindi

अश्वगंधा टैबलेट लेने पहले निम्न बातों का रखें ध्यान :

  • अश्वगंधा को डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं लेना चाहिए।
  • रोगी को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि अश्वगंधा से उसे कोई एलर्जी ना हो।
  • दवा के सेवन के बाद रोगी को अपने शरीर में होने वाले प्रतिकूल परिवर्तनों की सूचना डॉक्टर को तुरंत देनी चाहिए जैसे कि चेहरे पर सूजन, त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, अस्थमा का दौरा, पेट में रक्तस्राव, या नाक में जलन।
  • अश्वगंधा का सेवन करने से पहले पेट के रक्तस्राव या आंत के अल्सर वाले रोगी को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
  • लीवर और किडनी के रोगियों को यह दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
  • हृदय रोग, हार्ट फेल्योर या स्ट्रोक के मरीज़ों को दवा के सेवन के बाद कोई दुष्प्रभाव होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • दूध या खाने के साथ ही दवा का सेवन करें, अन्यथा कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
  • गर्भधारण की कोशिश में हैं तो अश्वगंधा न लें।
  • अश्वगंधा के सेवन के दौरान शराब का सेवन न करें।
  • पहले से किसी दवा का सेवन कर रहे हैं तो अश्वगंधा लेने से पहले डॉक्टर को बताएं।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 28 Mar 2020

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अक्सर पूछे गए प्रश्न

अश्वगंधा का उपयोग कितने समय तक करना चाहिए?

अश्वगंधा कैप्सूल या चूर्ण का इस्तेमाल हर मामले में अलग होता है। इसका इस्तेमाल ज़रूरत के अनुसार अलग होता है और इसी के अनुसार अवधि निश्चित की जाती है। डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन ना करें।

अश्वगंधा को एक दिन में कितनी बार ले सकते हैं?

अश्वगंधा कैप्सूल या चूर्ण एक दिन में दो बार से अधिक नहीं लेना चाहिए। हर व्यक्ति की ज़रूरत के हिसाब से डॉक्टर इसको लेने की सलाह देते हैं।

अश्वगंधा को कब लेना चाहिए - खाली पेट या भोजन से पहले या भोजन के बाद?

आमतौर पर अश्वगंधा को भोजन खाने के बाद लेने की सलाह दी जाती है। खाली पेट सेवन करने से पेट में इर्रिटेशन होने लगता है। इसीलिए इसे खाने या दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है।

क्या अश्वगंधा दवा का सेवन एक आदत या लत बन सकती है?

आदत या लत बनना या न बनना व्यक्तिगत निर्णय होता है। लेकिन, अगर आपको इसकी लत या आदत हो गयी है तो डॉक्टर से सलाह अवश्य करें। डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन न करें।

क्या अश्वगंधा का अचानक से सेवन बंद करने से कुछ नुकसान होता है?

ऐसी कुछ दवाईयां हैं जिनका सेवन अचानक बंद करने से समस्या हो सकती है। डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही अश्वगंधा को खाने या न खाने का निर्णय लें।

क्या अश्वगंधा का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?

हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए डॉक्टर से पूछे बिना अश्वगंधा का सेवन न करें।

क्या अश्वगंधा किसी भी केमिस्ट के पास आसानी से मिल जाता है?

आप किसी भी केमिस्ट या आयुर्वेदिक दवाखाने से अश्वगंधा ले सकते हैं लेकिन आपके पास डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन होना चाहिए।

क्या अश्वगंधा सभी यौन संबंधित बीमारियों में फायदेमंद होता है?

इस बात की पुष्टि कर पाना बहुत मुश्किल होता है कि अश्वगंधा यौन संबंधित बीमारियों को ठीक कर पाता है या नहीं लेकिन ये यौन संबंधित बीमारियों में सुधार लाने में सक्षम हो सकता है।

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