जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर प्रक्रिया, फ़ायदे, नुकसान और ख़र्च

Zygote intrafallopian transfer – process, advantages, disadvantages and cost in hindi

Zygote intrafallopian transfer – prakriya, fayde, nuksan aur kharch in hindi


एक नज़र

  • जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर - जिफ्ट (Zygote intrafallopian transfer -ZIFT) इन-विट्रोफर्टिलाइजेशन (आईवीएफ - In-vitro fertilization) की मॉडिफाइड (modified) तकनीक है।
  • जिफ्ट प्रक्रिया में कुल 10 लाख से 15 लाख तक का खर्च आ सकता है।
  • ZIFT प्रक्रिया से एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) हो सकती है।
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Introduction

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कई ऐसे कारण होते हैं जिस वजह से महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो पाती हैं।

जिफ्ट आईवीएफ़ की अल्टरनेटिव (alternative) मॉडिफाइड (modified) तकनीक है जो महिलाओं को आसानी से गर्भधारण कराने में मदद कर सकती है।

अगर फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) का कोई एक हिस्सा ब्लॉक (block) नहीं है तो इस प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है।

यह प्रक्रिया बहुत आसान होती है जिसका सफलता दर काफी अच्छी है।

इसलिए,आईवीएफ ट्रीटमेंट (IVF treatment) के बाद फर्टिलिटी डॉक्टर इस ट्रीटमेंट को कराने की सलाह देते हैं।

चलिए जानते हैं, जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर -जिफ्ट प्रक्रिया कैसे होती है ?

इसके फायदे और नुकसान क्या हैं और इस ट्रीटमेंट की लागत कितनी है।

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इस लेख़ में

 

जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर की प्रक्रिया

Zygote intrafallopian transfer process in hindi

Zygote intrafallopian transfer ki prakriya in hindi

इस पूरी प्रक्रिया को करने में लगभग 4 से 5 सप्ताह लगते हैं।

यह आईवीएफ (IVF) तकनीक की मॉडिफाइड (modified) प्रक्रिया है जिसमे एम्ब्रायोट्रांसप्लांट (embryo transplant) न कर जायगोट - फर्टिलाइज्ड एग (zygote - fertilized egg) को गर्भाशय में इंप्लांट किया जाता है। आइये इसकी पूरी प्रक्रिया जानते हैं :-

  • कुछ टेबलेट्स (tablets) या इंजेक्शन्स (injections) की मदद से ओवरी (ovary) को उत्तेजित किया जाता है ताकि ओवरी में कई सारे अंडे पनप सकें।
  • अब एस्पिरशन (aspiration) प्रक्रिया की मदद से अंडे को बाहर निकाला जाता है।
  • अंडे को लेबोरेटरी (laboratory) में कई तकनीक की मदद से फर्टिलाइज (fertilize) किया जाता है।
  • ऐसा होने में लगभग 4 से 5 दिन का समय लगता है।
  • एग सेल्स को महिला के अंडाशय से हटाया जाता है और उन्हें विट्रो में फर्टिलाइज्ड एग यानि ज़ायगोट बनाया जाता है।
  • इसके बाद जायगोट (zygote) को महिला की फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) में लेप्रोस्कोपिक (laparoscopic) सर्जरी (surgery) के जरिये डाला जाता है।
  • गर्भाशय में एम्ब्र्यो का विकास (embryo development) शुरू हो जाता है और महिला गर्भवती हो जाती है।
  • पूरी प्रक्रिया होने में लगभग 4 से पांच सप्ताह का समय लगता है।
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जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर के फ़ायदे

Advantages of zygote intrafallopian transfer in hindi

Zygote intrafallopian transfer ke fayde in hindi

जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर के फ़ायदे :

  • यह प्रक्रिया जेमेट इंट्राफैलोपियन ट्रान्सफर से ज्यादा भरोसेमंद है क्योंकि एग (egg) को फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) में रखने से पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि एग फर्टिलाइज (fertilize) है या नहीं।
  • भ्रूण के विकास में कोई बाधा नहीं आती है, क्योंकि फर्टिलिटी (fertility specialist) स्पेशलिस्ट अंडे को ट्रांसप्लांट (transplant) करने से पहले उसकी कई तकनीक की मदद से जांच करते हैं और उसी जायगोट को ट्रांसप्लांट करते हैं जिसका पूरी तरह से विकास हुआ है और स्वस्थ है।
  • यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक है क्योंकि एम्ब्रयो का विकास गर्भाशय के अंदर होता है जो पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर होता है।
  • इस प्रक्रिया में महिला के किसी भी प्रजनन अंग को कोई नुकसान नहीं होता है।
और पढ़ें:अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सफलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
 

जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर के नुकसान

Disadvantages of zygote intrafallopian transfer in hindi

Zygote intrafallopian transfer ke nuksan

जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर के नुकसान इस प्रकार हैं :

  • गर्भाशय के भीतर एम्ब्रयो डेवलपमेंट प्रक्रिया में कई सारे एम्ब्रयो का निर्माण हो सकता है। इसलिए, आपको जुड़वा बच्चे हो सकते हैं।
  • आपको एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो सकती है। यह गर्भावस्था की वह अवस्था है जब भ्रूण निर्माण गर्भाशय में न होकर फैलोपियन ट्यूब में होने लगता है। इससे आपके जान को ख़तरा भी हो सकता है इसलिए, ऐसा होने पर डॉक्टर इसे हटाने की सलाह देते हैं।
  • इस प्रक्रिया का खर्च बहुत ज्यादा है और ऐसे कम ही क्लिनिक मिलते हैं जो इस प्रकिया का इस्तेमाल करते हैं।
  • इस प्रक्रिया के शुरुआत में महिला के अंडाशय में अंडे का उत्पादन ज्यादा करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं। इस वजह से शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं।
  • कई शोध यह भी दावा करते हैं इस प्रक्रिया के जरिये होने वाले बच्चे में कुछ डिफेक्ट (defect) हो सकता है।

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जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर प्रक्रिया का ख़र्च

Zygote intrafallopian transfer cost in hindi

Zygote intrafallopian transfer prakriya ka kharch in hindi

इस प्रक्रिया का खर्च बहुत ज्यादा है। इसे करवाने में लगभग 10 लाख से 15 लाख तक लग सकते हैं।

इसका खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस डॉक्टर और क्लिनिक की मदद से यह प्रक्रिया कराने वाले हैं।

इसकी इतनी ज्यादा लागत होने के कारण यह प्रक्रिया अभी भारत में ज्यादा विकसित नहीं है।

और पढ़ें:आईएमएसआई आईवीएफ क्या है?
 

निष्कर्ष

Conclucionin hindi

Nishkarsh

जायगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रान्सफर (जिफ्ट -Zygote intrafallopian transfer - ZIFT) प्रक्रिया के कई फ़ायदे और नुकसान होते हैं।

इसलिए, इलाज के पहले डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेना उचित रहेगा। ताकि, प्रेगनेंसी के दौरान आपको किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 03 Jun 2020

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