आईवीएफ गर्भावस्था में क्यों ज़रूरी है अल्ट्रासाउंड टेस्ट?

Why ultrasound is important during IVF pregnancy ?in hindi

IVF garbhavastha me ultrasound test ka mahatva


एक नज़र

  • अल्ट्रासाउंड को सोनोग्राफी भी कहा जाता है।
  • आईवीएफ के दौरान अल्ट्रासाउंड की अहम भूमिका होती है।
  • महिला की इनफर्टिलिटी के कारणों को समझने में मदद करता है अल्ट्रासाउंड।
  • अल्ट्रासाउंड की मदद से आप भ्रूण के विकास को देख सकते हैं, उसके दिल की धड़कन भी सुन सकते हैं।
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Introduction

Basics of IVF Pregnancy Ultrasound Test - Zealthy

इन-विट्रो-फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एक सामान्य बांझपन उपचार है। [1]

प्रक्रिया के दौरान, एक प्रजनन चिकित्सक अंडाशय से अंडे लेकर, उन्हें एक विशेष प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ निषेचित (conception) करते हैं।

जिसके बाद भ्रूण को माँ के गर्भाशय में रख दिया जाता है।

हालांकि इस प्रक्रिया के पहले डॉक्टर सबसे पहले एक महिला को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं ताकि वो उसके बांझपन के कारण को समझ सके।

दरअसल इस प्रक्रिया के पहले और इसके दौरान भी महिला की गर्भावस्था की स्थिति को देखने के लिए डॉक्टर द्वारा कई बार अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है।

इतना ही नहीं प्रक्रिया के बाद भी भ्रूण के विकास को देखने के लिए महिला को अल्ट्रासाउंड कराने को कहा जाता है।

ऐसे में जानते हैं इस लेख से कि आईवीएफ़ प्रक्रिया के पहले, प्रक्रिया के दौरान और प्रक्रिया के बाद अल्ट्रासाउंड की क्या भूमिका होती है और क्यों इसकी ज़रूरत बार-बार पड़ती है।

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इस लेख़ में

 

अल्ट्रासाउंड क्या है और यह कैसे काम करता है?

What is ultrasound and how does it work ?in hindi

Ultrasound kya hai or kaise kaam karta hai?

अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी (sonography) एक तकनीक है, जो महिला के प्रजनन अंगों (female’s reproductive organs ) की तस्वीरों को देखने के लिए ध्वनि तरंगों (sound waves) का उपयोग करती है।

आईवीएफ उपचार (IVF treatment) के दौरान उसकी स्थिति और इलाज की प्रगति को जानने के लिए समय पर निगरानी (monitoring) की आवश्यकता होती है, जिसके लिए अल्ट्रासाउंड की मदद ली जाती है। [2]

आईवीएफ उपचार के पहले और बाद में अल्ट्रासाउंड स्कैन महिला के प्रजनन स्वास्थ्य की स्थिति का पता लगाने में मदद करते हैं।

आईवीएफ दंपत्तियों में बांझपन का इलाज करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला प्रजनन उपचार है।

अल्ट्रासाउंड इमेजिंग विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं, जैसे कि ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (transvaginal ultrasound) [3]और पेट का अल्ट्रासाउंड (abdominal ultrasound) [4]

लेकिन जब एक महिला के प्रजनन स्थिति को देखने की बात आती है तो ट्रांसवेजायनल अल्ट्रासाउंड ज़्यादा कारगर होता है।

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आईवीएफ से पहले अल्ट्रासाउंड की क्या भूमिका होती है?

What is role of ultrasound before IVF ?in hindi

IVF ke pehle ultrasound ki kya bhumika hoti hai?

इंफर्टिलिटी से जूझ रहे दंपत्ति बांझपन के इलाज के लिए प्रजनन केंद्र या क्लिनिक जाते हैं।

यहाँ सबसे पहले उन्हें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ या बांझपन विशेषज्ञ की ओर से अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है।

दरअसल आईवीएफ से पहले अल्ट्रासाउंड महिला बांझपन के कारणों को जानने में मदद करता है।

ये महिला के यौन अंगों में मौजूद समस्या के निदान (diagnosis) में मददगार है।

एक महिला के मुख्य प्रजनन अंग होते हैं जैसे अंडाशय (ovaries), गर्भाशय (uterus), गर्भाशय ग्रीवा (cervix), योनि (vagina) और फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube)।

अल्ट्रासाउंड स्कैन की मदद से इनमें से किसी भी अंग की परेशानी निर्धारित की जा सकती है।

इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड की मदद से पेल्विस को देखकर पेल्विक इंफ्लेमेटरी (pelvic inflammmatory) बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है, जो बांझपन का कारण बन सकती हैं। ये बीमारियाँ इस प्रकार हैं : -

अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भाशय को देखना (Viewing the uterus with the help of USG)

  • फाइब्रॉएड और पॉलीप्स (Fibroids and Polyps) [5]
    एक अल्ट्रासाउंड की मदद से फाइब्रॉएड या पॉलीप्स की उपस्थिति के लिए एक महिला के गर्भाशय का निदान किया जाता है।
    वास्तव में, फाइब्रॉएड और पॉलीप्स के आकार का पता लगाना भी संभव है।
    अगर पॉलीप्स या फाइब्रॉएड का आकार बड़ा है, तो इन्हें आईवीएफ से पहले लेप्रोस्कोपी की मदद से हटाया जा सकता है।
    ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ये आईवीएफ गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की समस्या पैदा न करे जैसे भ्रूण को गर्भाशय में रखने के दौरान परेशानी होना, गर्भपात या फिर समय से पहले प्रसव पीड़ा (labour pain) होना।
  • एंडोमेट्रियम लाइनिंग की मोटाई (Endometrium lining thickness) [6]
    अल्ट्रासाउंड की मदद से एंडोमेट्रियम लाइनिंग भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
    अगर एंडोमेट्रियम का स्वास्थ्य और स्थिति इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट के अनुसार एकदम सही है, तो आईवीएफ उपचार के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
    ऐसे में अल्ट्रासाउंड यह पता लगाने में मदद करता है कि क्या एंडोमेट्रियम की मोटाई अनुकूल है और भ्रूण को रखने के लिए यहां ब्लड सप्लाई आवश्यकता अनुसार है कि नहीं।
  • गर्भाशय का आकार (Uterus shape and size) [7]
    अल्ट्रासाउंड की मदद से यूटेरस के शेप और साइज़ को आसानी से निर्धारित किया जा सकता है।
    असामान्य आकार के गर्भाशय और छोटे आकार के गर्भाशय को गर्भधारण करने में कठिनाई होती है।
    ऐसे में आईवीएफ प्रक्रिया शुरू करने से पहले इन मसलों को समझने में अल्ट्रासाउंड मदद करता है।
    इससे प्रक्रिया के सफल होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

फीमेल फैलोपियन ट्यूब (Female fallopian tubes) [8]

हर महिला के शरीर में दो फैलोपियन ट्यूब होती हैं जिनका बच्चे के गर्भधारण करने के लिए ठीक से काम करना आवश्यक है।

अल्ट्रासाउंड महिला के फैलोपियन ट्यूब में निम्नलिखित समस्याओं का निदान करने में सहायक है : -

  • ट्यूब में ब्लॉकेज होना (Blockage in tube)
  • ट्यूब में इन्फेक्शन या सिस्ट होना (Cyst or Infection in tubes)
  • ट्यूब मौजूद होना या न होना (Presence or absence of tubes)

महिला अंडाशय का निदान (Diagnosing female ovaries)

ओवरीज़ को देखने के लिए एक वेजायनल अल्ट्रासाउंड सामान्य निदान (diagnosis) विधि है।

ये ओवरीज़ को देखने के साथ-साथ, ओवेरियन सिस्ट, ओवेरियन कैंसर, प्राइमरी ओवेरियन इनसफिसिएंसी (primary ovarian insufficiency) और एक या फिर दोनों ओवरीज़ का न होना जैसे मामलों को समझने में भी मदद करता है। जैसे : -

  • बढ़ते हुए फॉलिकल्स की संख्या (Number of developing follicles)
    महिला के ओवरीज़ में मौजूद अंडों की उपस्थिति, साथ ही अंडाशय की स्थिति, महिला की प्रजनन क्षमता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
    ऐसा इसीलिए है क्योंकि फॉलिकल्स की संख्या, उसकी स्थिति और स्वास्थ्य ही यह निर्धारित करेगा कि क्या महिला के खुद के अंडों का इस्तेमाल कर आईवीएफ की प्रक्रिया की जा सकती है या नहीं।
    ऐसे में आईवीएफ उपचार शुरू करने से पहले, फॉलिकल्स की संख्या की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन अन्य प्री-प्रेगनेंसी टेस्ट के साथ किया जाता है।
    दोनों अंडाशय की स्थिति और उसके फंक्शन का पता लगाने के लिए कुछ मामलों में बेसलाइन पैल्विक अल्ट्रासाउंड (Baseline pelvic ultrasound) की भी सिफारिश की जाती है।
  • अंडाशय में सिस्ट(Cyst in ovaries)
    अंडाशय में सिस्ट की उपस्थिति देखने और पता लगाने के लिए पेल्विक या ट्रांसवेजायनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
  • अंडाशय की उपस्थिति या अनुपस्थिति (Presence or absence of ovaries)
    एक नियमित रूप से ट्रांसवेजायनल अल्ट्रासाउंड की मदद से, ओवरीज़ को देखना संभव है क्योंकि यह ध्वनि तरंगों की मदद से एक स्पष्ट तस्वीर बनाता है।
    ओवेरियन सिस्ट और कैंसर जैसी अन्य स्थितियों के अलावा, इस अल्ट्रासाउंड की मदद से एक या दोनों अंडाशय की उपस्थिति या अनुपस्थिति देखी जाती है।
  • डिम्बग्रंथि ट्यूमर (Ovarian tumor)
    आईवीएफ के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग करने का सबसे अच्छा फायदा ये है कि इसमें कैंसर का पता लगाने की भी क्षमता होती है।
    जिसका पता एक नार्मल एब्डोमिनल स्कैन (normal abdominal scan) से नहीं चल पाता है।
और पढ़ें:अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सफलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
 

आईवीएफ के दौरान अल्ट्रासाउंड की क्या भूमिका होती है?

What is role of ultrasound during IVF ?in hindi

IVF ke dauran ultrasound ki kya bhumika hoti hai?

आईवीएफ उपचार के दौरान अल्ट्रासाउंड पूरे उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ये आईवीएफ उपचार के दौरान फॉलिकल्स के विकास को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड की मदद ली जाती है।

साथ ही यह एंडोमेट्रियल मोटाई (endometrial thickness) की जांच करने में भी मदद करता है।

आईवीएफ के दौरान अल्ट्रासाउंड की भूमिका : -

  • ओवेरियन स्टिम्युलेशन दवाओं का असर (Response to ovarian stimulating drugs)
    जब एक महिला आईवीएफ उपचार के दौर से गुज़र रही होती है, तो उसके बढ़ते फॉलिकल्स (follicles) को देखने और उसका मूल्यांकन करने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
    इसकी मदद से स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynecologist) या इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ (infertility expert) भ्रूण निर्माण (embryo retrieval) प्रक्रिया के लिए उपलब्ध अंडों की संख्या निर्धारित करती हैं।
  • एंडोमेट्रियल मोटाई की जाँच करें (Check endometrial thickness)
    अल्ट्रासाउंड की मदद से एंडोमेट्रियम की लाइनिंग भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
    अगर एंडोमेट्रियम का स्वास्थ्य और स्थिति बांझपन विशेषज्ञ के अनुसार सही है, तो आईवीएफ उपचार सफलतापूर्वक सफल होता है।
    दरअसल एंडोमेट्रियल लाइनिंग (endometrium) भ्रूण को एक तरह का सपोर्ट देता है और उसे बढ़ने में मदद करता है।
    एंडोमेट्रियम की मोटाई (thickness) जानने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
    अगर मोटाई 8 से 11 मिमी (mm) के बीच पाई जाती है, तब ही भ्रूण स्थानांतरण (embryo transfer) की प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है, नहीं तो फिर इसे अगले साइकिल तक टाल दिया जाता है।
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आईवीएफ के बाद अल्ट्रासाउंड की क्या भूमिका होती है

What is role of ultrasound after IVF in hindi

IVF ke baad ultrasound ki kya bhumika hoti hai

आईवीएफ ट्रीटमेंट के बाद अल्ट्रासाउंड, उपचार की सफलता की जांच करने के लिए किया जाता है।

अगर उपचार सफल होता है, तो गर्भाशय के अंदर बच्चे के विकास की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं।

आईवीएफ के बाद अल्ट्रासाउंड की भूमिका : -

  • गर्भावस्था की पुष्टि (Confirmation of pregnancy)
    एक बार आईवीएफ उपचार पूरा हो जाने पर और भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित करने के कम से कम दो बार महिला में गर्भावस्था परीक्षण किया जाता है।
    यह गर्भावस्था की पुष्टि करने में मदद करता है।
    इसके बाद अल्ट्रासाउंड स्कैन होता है, जो उपचार के दौर से गुज़रने वाली महिला के गर्भाशय में भ्रूण के सही आरोपण (implantation) को निर्धारित करने में मदद करता है।
    आगे की आवश्यकता के मामले में, एक या दो हफ्ते के बाद महिला को अल्ट्रासाउंड स्कैन की सलाह दी जाती है।
  • प्रारंभिक भ्रूण के दिल की धड़कन (Initial level fetus heartbeat)
    आईवीएफ उपचार के बाद अल्ट्रासाउंड की मदद से भ्रूण के दिल की धड़कन का भी पता लगाया जाता है।
    जिसकी मदद से डॉक्टर महिला के अंदर पल रहे भ्रूण के विकास को देखने और उसे समझने में मदद करता है।
और पढ़ें:आईएमएसआई आईवीएफ क्या है?
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

इस प्रकार, अल्ट्रासाउंड स्कैन आईवीएफ प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

हर एक स्टेज पर अल्ट्रासाउंड की मदद से उपचार की सफलता और उसके विकास को समझने का अवसर मिलता है।

इस तरह से आईवीएफ की मदद से गर्भावस्था को सफल बनाने में अल्ट्रासाउंड की अहम भूमिका होती है।

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references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

Mayoclinic. “In vitro fertilization (IVF)”. Mayoclinic, 22 June 2019.

2 .

Iyoke CA1, Ugwu GO, et al." The role of ultrasonography in in-vitro fertilization and embryo transfer (IVF-ET)". Niger J Med. 2013 Jul-Sep;22(3):162-70, PMID: 24180141.

3 .

MedlinePlus. "Transvaginal ultrasound". MedlinePlus,04 March 2020.

4 .

MedlinePlus. "Abdominal ultrasound". MedlinePlus,04 March 2020.

5 .

Andrzej Woźniak and Sławomir Woźniak. " Ultrasonography of uterine leiomyomas". Prz Menopauzalny. 2017 Dec; 16(4): 113–117.Published online 2017 Dec 30, PMID: 29483851.

6 .

Jing Zhao,1 Qiong Zhang, et al. "The effect of endometrial thickness and pattern measured by ultrasonography on pregnancy outcomes during IVF-ET cycles". Reprod Biol Endocrinol. 2012; 10: 100. Published online 2012 Nov 28, PMID: 23190428.

7 .

Merz E1, Miric-Tesanic, et al. "Sonographic size of uterus and ovaries in pre- and postmenopausal women". Ultrasound Obstet Gynecol. 1996 Jan;7(1):38-42, PMID: 8932630.

8 .

MSD MANUAL."Problems With the Fallopian Tubes and Abnormalities in the Pelvis". MSD MANUAL, Accessed 06 March 2020.

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 03 Jun 2020

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