pregnancy ki koshish karte samay immune system ka majboot hona kyu jaruri hai

प्रेग्नेंसी की कोशिश करते समय इम्यून सिस्टम का मजबूत होना क्यों जरूरी है

Why a strong immune system is required while trying to get pregnant in hindi

pregnancy ki koshish karte samay immune system ka majboot hona kyu jaruri hai

एक नज़र

  • विश्व के हर हिस्से में महिलाओं की इम्युनिटी कमजोर होती है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के बाहरी रोगाणुओं से रक्षा करती है।
  • इम्युनिटी कमजोर होने पर प्रेग्नेंसी में मुश्किल आ सकती है।
  • पौष्टिक भोजन और भरपूर नींद के साथ अन्य उपाय से इम्युनिटी मजबूत हो सकती है।

सामान्य रूप से किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) पर आधारित होता है।

इसी प्रकार माँ बनने वाली स्त्री की रोग प्रतिरोधक क्षमता उसके गर्भधारण के निर्णय को प्रभावित करती है।

इसलिए हर उस महिला के लिए जो निकट भविष्य में गर्भ धारण करने का प्रयास कर रहीं हैं उनके लिए यह जानना जरूरी है कि प्रेग्नेंसी की कोशिश करते समय प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना क्यों जरूरी है।

आज हम इस लेख में इसी के बारे विस्तार से बात करेंगे :

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इस लेख़ में/\

  1. गर्भधारण का प्रयास और रोग प्रतिरोधक क्षमता का क्या संबंध है
  2. क्या है रोग प्रतिरोधक क्षमता
  3. रोग-प्रतिरोधक क्षमता कितने प्रकार की होती है
  4. गर्भधारण के प्रयास में रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना क्यों जरूरी है
  5. गर्भवती स्त्री का रोगों से बचाव करती है प्रतिरोधक क्षमता
  6. प्रेग्नेंसी की तैयारी के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे मजबूत करें
  7. निष्कर्ष
 

1.गर्भधारण का प्रयास और रोग प्रतिरोधक क्षमता का क्या संबंध है

What is the relation between pregnancy and immune system in hindi

Pregnancy ki koshish karne mein immunity system ka kya sambandh hai in hindi

सामान्य रूप से देखा जाए तो प्रेग्नेंसी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में परस्पर कोई संबंध नहीं दिखाई देता है।

लेकिन वास्तविकता यह नहीं है।

अक्सर देखा गया है कि कुछ दंपत्ति सब कुछ सामान्य होने पर भी माता-पिता बनने का सुख नहीं उठा पाते हैं।

इसके अतिरिक्त कभी-कभी कुछ महिलाएं गर्भकाल पूरा नहीं कर पाती हैं।

इन दोनों ही स्थितियों में चिकित्सक कहीं न कहीं एक ही कारण को इसका जिम्मेदार मानते हैं।

जबकि इन्हें गर्भधारण करने वाली स्त्री के इम्यून सिस्टम कमजोर होने के लक्षण के रूप में भी माना जा सकता है।

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2.क्या है रोग प्रतिरोधक क्षमता

What is immune system in hindi

Rog pratirodhak kshamta kise kahte hain in hindi

सरल शब्दों में शरीर को रोगों से बचाने वाली क्षमता को रोग प्रतिरोधक क्षमता या प्रतिरक्षा प्रणाली कहा जाता है।

जब शरीर में रोगों को जन्म देने वाले किटाणु (Bacteria) या सूक्ष्म जीव (Microbes) को पनपने से पहले ही समाप्त करने की क्षमता मजबूत होती है तब इसे मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता माना जाता है।

दरअसल यह प्रणाली शरीर की विभिन्न कोशिकाओं (Cells), उत्तकों (Tissues) और विभिन्न अंगों का संगम होती हैं।

इस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वो श्वेत रक्त कोशिका (White Blood Cells) होती हैं जो शरीर पर आक्रमण करने वाले बैक्टीरिया या माइक्रोब्स को मार कर शरीर से उनकी रक्षा करती हैं। इन्हें ल्यूकोसाइट (leukocytes) कहा जाता है।

इस प्रकार एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में यह क्षमता प्राकृतिक रूप से व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शन से मुक्त रखकर स्वस्थ रखने का काम करती है।

लेकिन जब यह प्रणाली इस काम में कमजोर हो जाती है तब व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर माना जाता है।

इसके कारण प्रभावित व्यक्ति शारीरिक कमज़ोरी, विभिन्न प्रकार की बीमारियों और इन्फेक्शन का शिकार हो जाता है।

 

3.रोग-प्रतिरोधक क्षमता कितने प्रकार की होती है

Types of Immune system in hindi

immunity system kitne prakar ke hote hain in hindi

सामान्य रूप से प्रत्येक व्यक्ति में स्वस्थ व निरोग रहने की एक प्राकृतिक क्षमता होती है जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता है।

एक सामान्य व्यक्ति में प्रतिरक्षा प्रकार तीन प्रकार के होते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Natural Immune System)
    कोई भी एक सामान्य शिशु जिस रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ जन्म लेता है उसे प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता है।
    इस क्षमता में लगभग हर प्रकार के रोगाणु और किटाणु से शरीर की रक्षा करने की शक्ति होती है।
  • एक्टिव रोग प्रतिरोधक क्षमता (Active Immune System)
    यह रोग प्रतिरोधक क्षमता व्यक्ति के जीवन में उम्र के विकसित होने के साथ ही विकसित होती है।
    इस क्षमता का विकास शरीर में बढ़ने वाले ल्यूकोसाइट्स की संख्या के आधार पर होता है।
    इनका विकास शरीर में तब होता है जब व्यक्ति किसी प्रकार के इन्फेक्शन की चपेट में आकर टीकाकरण के माध्यम से स्वयं को उस इन्फेक्शन से बचाने का उपाय करते हैं।
  • निष्क्रिय रोग प्रतिरोधक क्षमता (Inactive Immune system)
    यह क्षमता व्यक्ति के शरीर में अल्पकालीन होती है और यह व्यक्ति को किसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त होती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण स्तन का दूध माना जाता है
    स्तन के दूध में मौजूद रोग प्रतिरोधक किटाणु, दूध के माध्यम से नवजात शिशु के शरीर में प्रवेश करते हैं और उसकी प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ ही बच्चे को रोगमुक्त रखने का काम भी करते हैं।
    यह क्षमता बच्चे को तब तक मिलती है जब तक वह माँ के स्तन से दूध पीता है।
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4.गर्भधारण के प्रयास में रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना क्यों जरूरी है

Why strong immunity is required while trying to conceive in hindi

Pregnancy ki koshish karte samay immunity system ka mazbut hona kyon zaruri hai in hindi

जब एक स्त्री गर्भ धारण करती है तब उसके गर्भ का शिशु, गर्भनाल (Placenta) के माध्यम से माँ के शरीर से जुड़ जाता है।

लेकिन कभी-कभी यह गर्भनाल गर्भाशय की दीवार पर अतिरिक्त दबाव बना देती है जो गर्भवती स्त्री के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

इस समय गर्भवती स्त्री की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना जरूरी है।

क्योंकि इसी स्थिति में गर्भनाल जो एक ओर माँ के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन रही है वहीं दूसरी ओर शिशु के जीवन के लिए जरूरी है, उसमें संतुलन बैठाना जरूरी है जो केवल मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता के द्वारा ही संभव हो सकता है।

यहाँ यह क्षमता गर्भनाल और शिशु, दोनों को ही विकसित करने का काम करती है।

दरअसल गर्भवती स्त्री के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता दो प्रकार से कार्य करती है :

  • कोशिकीय (Cellular)
  • एंटीबॉडी (Antibody)

सामान्य गर्भावस्था में प्लेसेन्टा द्वारा निर्मित हार्मोन विशेषकर प्रोजेस्ट्रोन (Progesterone) में बदलाव आ जाता है।

इसके कारण माँ के शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता इस प्रकार से प्रतिउत्तर देती है जिससे एंटीबॉडी प्रभावशील हो जाते हैं।

इसके कारण गर्भवती स्त्री और गर्भ के शिशु के जीवन को कोई संकट नहीं उत्पन्न होता है जो अन्यथा हो सकता है।

क्योंकि कोशिकीय स्थिति गर्भ व स्त्री दोनों के लिए जोखिम भरी स्थिति होती है।

इसके कारण गर्भवती स्त्री को रयूमेटायड अर्थराइटिस (Rheumatoid arthritis) के होने का जोखिम खड़ा हो सकता है।

और पढ़ें:How to conceive a baby boy - A Scientific Approach

 

5.गर्भवती स्त्री का रोगों से बचाव करती है प्रतिरोधक क्षमता

Immune system defends a pregnant woman from diseases in hindi

vibhinn rogon se garbhvati stri ka bachaav

गर्भवती स्त्री की रोग प्रतिरोधक क्षमता उसे गर्भकाल में होने वाले विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शन और जानलेवा रोग जैसे कैंसर आदि से भी रक्षा करती है।

गर्भकाल में मजबूत रोग प्रतिरक्षा प्रणाली, गर्भाशय को मजबूत और गर्भस्थ शिशु को विकसित करने का अवसर प्रदान करती है।

जबकि तकनीकी रूप से शिशु के शरीर में बाहरी तत्वों के रूप में पिता के शरीर के अंश भी होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए स्त्री शरीर के लिए बाहरी तत्व होते हैं।

और पढ़ें:Uterine Fibroids and its treatment

 

6.प्रेग्नेंसी की तैयारी के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे मजबूत करें

How to make strong immune system while trying to conceive in hindi

Conceive karne se pahle immunity system ko kaise strong banaye in hindi

जब गर्भधारण करने की कोशिश कर रहीं हो तब अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए यह काम ज़रूर करें :

  • स्वस्थ और पौष्टिक भोजन का नियमित सेवन करें।
  • जीवन को तनावमुक्त और प्रसन्नचित रखें।
  • प्रतिदिन अनिवार्य भरपूर नींद जरूर लें।
  • जीवनशैली गतिशील रखें।
  • धूम्रपान, शराब और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएँ।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी के साथ कैसे हो सकती हैं जल्द गर्भवती

 

7.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

एक सामान्य व्यक्ति की भांति गर्भ धारण का प्रयास करने वाली स्त्री के लिए भी रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत आवश्यक है।

इससे न केवल उन्हें गर्भकाल में विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाव होता है बल्कि उनका गर्भकाल स्वस्थ व शिशु प्रसन्न अवस्था में जन्म ले सकता है।

अपनी इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत रखने के लिए वो विभिन्न उपाय अपना सकती हैं।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 02 Jun 2020

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