पहले और दूसरे गर्भधारण में क्या अंतर है ?

What is the difference between first and second pregnancy in hindi

Kya hota hai pehli aur dusri baar garbh dharan karne mein antar in hindi


एक नज़र

  • दूसरी बार माँ बनना पहली बार गर्भवती होने जितना ही ख़ास होता है।
  • पहले प्रसव के बाद महिला की मांसपेशियाँ ढीली हो जाती हैं जिसके कारण प्रसव में आसानी होती है।
  • पहली बार माँ बनने पर महिला के मन में प्रसव पीड़ा (labour pain) को लेकर काफी डर और चिंताएं होती हैं।
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Introduction

Kya_hota_hai_pehli_aur_dusri_baar_garbh_dharan_karne_mein_antar_in_hindi

मां बनने की खुशी हर महिला को होती है। लेकिन जब कोई स्त्री पहली बार माँ बनती है तो एक सुखद एहसास के साथ-साथ उसके मन में कई प्रश्न आते हैं जैसे - डिलीवरी (delivery) कैसे होगी, कितना दर्द होगा, बच्चा स्वस्थ होगा या नहीं, वजन बढ़ने पर क्या परेशानी होगी।

अपने अंदर आने वाले शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों के बारे में जानने के लिए गर्भवती महिलाएं घंटों गर्भवस्था से जुड़ी किताबें पढ़ती हैं।

लेकिन दूसरी बार मां बनने का एहसास पहली बार मां बनने के एहसास से कुछ अलग होता है क्योंकि पहली गर्भावस्था के बाद आपको गर्भवती होने से जुड़ी कई बातें मालूम हो जाती है जिससे दूसरी प्रेगनेंसी थोड़ी आसान हो जाती है।

इस लेख के माध्यम से पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में कुछ मुख्य अंतर बताये गए हैं।

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इस लेख़ में

 

गर्भावस्था से जुड़ी किताबें पहले से कम पढ़ना

Reading less pregnancy related books in hindi

Garbhavstha se judi kitabein kam padhna in hindi

जब कोई महिला पहली बार माँ बनती है तब उसके दिमाग में बच्चे के स्वास्थ्य, उसके आहार और उसकी देखभाल को लेकर कई सवाल होते हैं जिसके लिए वह किताबें, लेख और ब्लॉग आदि पढ़ती हैं ताकि वह एक अच्छी माँ बन सके लेकिन दूसरी बार गर्भधारण करते समय वह सब कुछ जान चुकी होती है और हर चीज़ का अनुभव भी कर चुकी होती है।

इसलिए दूसरी बार मातृत्व का सुख प्राप्त करने महिला को किताबें पढ़ने की जरुरत कम महसूस होती है।

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खान-पान को लेकर सतर्कता कम होना

Less conscious about eating habits in hindi

Khane peene par kam dhyan dena

पहली बार माँ बनने पर महिला अपने खाने-पीने को लेकर बेहद सतर्क रहती है, जिससे महिला के साथ-साथ बच्चे का स्वास्थ्य भी ठीक रह सके।

इतना ही नहीं महिला पहली गर्भवास्था के दौरान अपने खाने-पीने की चीज़ों के लिए पूरी लिस्ट तैयार करती है लेकिन आमतौर पर दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान खाने-पीने को लेकर इतना नहीं सोचती।

इसके कारण की बात की जाये तो पहली बार माँ बनने के बाद महिला खुद ही समझ जाती है कि उसके लिए क्या अच्छा रहेगा और क्या नहीं।

इसलिए दूसरी बार माँ बनने पर महिला अपनी मनपसंद चीज़ें भी खाती हैं और साथ ही अपनी सेहत का ध्यान भी रख लेती है।

लेकिन कई बार खान-पान का उचित ध्यान ना रखने के कारण महिलाओं में हीमोग्लोबिन (hemoglobin) का स्तर कम हो जाता है जिसके कारण वजन कम होता है और शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर भी पड़ता है।

यदि महिला के पहले और दूसरे गर्भधारण में ज्यादा अंतराल नहीं है तो महिला के शरीर में कमज़ोरी आने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

इसलिए महिला को गर्भवती होने पर खाने पीने का बहुत ध्यान रखना चाहिए।

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?
 

गर्भ को लेकर डर का कम होना

To be less anxious about the pregnancy in hindi

Pregnancy ko lekar kam darna

पहली बार माँ बनने पर महिला के मन में प्रसव पीड़ा (labour pain), होने वाले बच्चे की सुरक्षा और उसके पालन को लेकर काफी डर और चिंताएं होती हैं।

इसके विपरीत जब महिला फिर से माँ बनने वाली होती हैं तो इन सभी बातों को लेकर वह कम तनाव में रहती है।

हालांकि, होने वाले बच्चे की चिंता हर माँ को हमेशा रहती है, लेकिन दूसरी गर्भावस्था में महिला को अनुभव के साथ-साथ खुद पर विश्वास भी होता है कि वह सब कुछ संभाल लेगी।

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पहले से उत्साह कम हो जाना

Lowering of excitement in hindi

Pehle se utsaah kam ho jaana

माता-पिता के लिए हर बच्चा ही ख़ास होता है और परिवार में किसी नए मेहमान के आने कि ख़ुशी भी होती है। लेकिन घर में पहले बच्चे के आने पर होने वाला उत्साह कुछ अनोखा ही होता है।

अब चाहे वो बच्चे के कमरे को सजाने की बात हो या फिर उसके लिए खरीदे गए खिलोने, हर चीज़ में परिवार के सभी सदस्य बहुत रूचि दिखाते हैं। वहीं दूसरी प्रेगनेंसी में यह सब कुछ ज़रा कम हो जाता है।

ज़्यादातर लोगों का मानना है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दूसरी गर्भावस्था तक माता-पिता अधिक परिपक्व (mature) हो जाते हैं और समझ जाते हैं कि नन्हें शिशु को बस देखभाल की ज़रुरत होती है।

और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत
 

शारीरिक बदलाव को लेकर उत्साह कम होना

Losing interest in observing physical changes in hindi

Sharirik badlav ko lekar utsaah kam hona

जब कोई महिला पहली बार मातृत्व का एहसास कर रही होती है तो उसके लिए हर बदलाव बहुत ही अनोखा और अनूठा होता है जिसे वह बहुत ही जिज्ञासा से अनुभव भी करती है।

पहली प्रेगनेंसी में महिला को अपने शरीर में होने वाले बदलावों को देखना बेहद अच्छा लगता है। अपने बढ़ते हुए पेट को छूकर अपने होने वाले बच्चे को महसूस करना गर्भवती महिला के लिए काफ़ी नया होता है।

दूसरी बार माँ बनने वाली महिला इन सब पर थोड़ा कम ध्यान देती हैं क्योंकि अपनी पहली प्रेगनेंसी में वह, यह सब अनुभव कर चुकी होती हैं।

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बच्चे की गतिविधि महसूस करना

To feel the movements of the child in hindi

Bacche ki gatividhiyon ko mehsoos karna

दूसरी गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने शिशु की हलचल पहले के मुकाबले जल्द महसूस होते हैं। किये गए शोधों के अनुसार, मांसपेशियों के ढीले होने के कारण ऐसा होता है। इसलिए पहली बार गर्भधारण करने पर शिशु की गतिविधियों को सही तरीके से महसूस कर पाना कठिन होता है।

और पढ़ें:कैसे करें गर्भावस्था किट का प्रयोग ?
 

बेबी बंप के कारण कम खिंचाव होना

Less stretching happens due to baby bump in hindi

Baby bump ki wajah se kam stretch hota hai

दूसरी बार माँ बनने पर बेबी बंप पहली गर्भावस्था के समय से पहले दिखने लगेगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पहली गर्भावस्था के दौरान एब्डॉमिनल एरिया (abdominal area) में अधिक खिंचाव होता है।

लेकिन दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान बेबी बंप में अधिक खिंचाव नहीं आता है।

और पढ़ें:कैसे सर्विकल म्यूकस को ट्रैक कर आप जल्दी गर्भवती हो सकती हैं?
 

पहले के मुकाबले गर्भावस्था का जल्दी अंदाजा होना

To get a feeling of being pregnant much earlier in hindi

Pehle ki tulna mein pregnancy ka pehle pata lagna

आमतौर पर दूसरी बार में गर्भावस्था के लक्षण पहचानना आसान होता है। पहली गर्भावस्था के मुकाबले सुबह-सुबह ज्यादा जी नहीं मिचलाता, पाचन की गड़बड़ी भी कम हो जाती है।

थकान ज्यादा महसूस होती है क्योंकि पहली गर्भावस्था के मुकाबले इस बार दिन में आराम करने का समय कम मिलता है क्योंकि महिला को अपने प्रथम बच्चे की देखभाल भी करनी होती है ।

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प्रसव में आसानी

Delivery seems easy in hindi

Delivery mein jyada pareshani nahi hoti

दूसरी बार माँ बनने पर ऐसा कहा जाता है कि पहले से कम तकलीफ़ होती है क्योंकि पहले बच्चे के जन्म के समय मांसपेशियों में ढीलापन आ जाता है।

इसलिए दूसरे बच्चे के जन्म में कम समय लगता है और प्रसव पीड़ा कम होती है। इसके साथ-साथ महिला को पहले से ही अनुभव होता है इसलिए वह दर्द को सहने के लिए मानसिक रूप से तैयार होती है।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

माँ बनना महिला के लिए एक नए जीवन को इस दुनिया में लाने का वरदान होता है चाहें वो पहला बच्चा हो या दूसरा। लेकिन पहली बार माँ बनने की तुलना में दूसरी बार मातृत्व का सुख मिलने पर महिला और अधिक परिपक्व हो जाती है। अपने अनुभवों के आधार पर यह समझ चुकी होती है कि उसे अपना और आने वाले शिशु का ख्याल कैसे रखना है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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