पेसा (PESA) - प्रक्रिया, फ़ायदे और जोखिम

PESA - procedure,benefits and risks in hindi

PESA kya hai, kab aur kaise kiya jata hai aur iske benefits aur risks kya hain in hindi


एक नज़र

  • पेसा गर्भाधान के लिए शुक्राणु पुनर्प्राप्ति की एक प्रक्रिया है।
  • इसमें एक सुई के उपयोग से एपिडीडिमिस से शुक्राणुओं को निकाला जाता है।
  • पेसा को एक बहुत ही हल्की सर्जरी माना जाता है।
  • इस सर्जरी के कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
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Introduction

PESA treatment | Zealthy

पीईएसए या पेसा (PESA- Percutaneous Epididymal Sperm Aspiration) एक शुक्राणु पुनर्प्राप्ति तकनीक है जिसमें एक सुई का उपयोग एपिडीडिमिस (epididymis) से शुक्राणुओं को निकालने के लिए किया जाता है।

पेसा निःसंतानता उपचार का एक कारगर उपाय है।

ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया (obstructive azoospermia) वाले पुरुषों को पेसा उपचार की आवश्यकता होती है।

ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शुक्राणु एपिडीडिमिस में उत्पन्न होते हैं लेकिन यह ट्यूब द्वारा अवरुद्ध होता है।

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इस लेख़ में

 

पेसा से पहले क्या परीक्षण किए जाने की आवश्यकता है?

Wich tests are required before PESA? in hindi

PESA se pahle kaun se tests zaruri hain in hindi

फोल्लिसल स्टिमुलेटिंग हॉरमोन-एफएसएच (Follicle Stimulating Hormone FSH -) परीक्षण एक रक्त परीक्षण है जिसका उपयोग एफएसएच हार्मोन के स्तर को मापने के लिए किया जाता है।

सामान्य एफएसएच स्तर वाले नर शुक्राणु पैदा कर सकते हैं।

  • एफएसएच का सामान्य मान 1.5 से 12.4 IU / ml तक होता है।
  • यदि FSH मान 30 IU / ml से अधिक है, तो यह दिखाता है कि स्पर्म्स पैदा नहीं हो रहे हैं।
    उच्च एफएसएच स्तर पुरुष बांझपन के साथ जुड़े हुए हैं।
    एफएसएच अधिक होने पर पेसा का कोई फ़ायदा नहीं होगा।
  • कम एफएसएच की मात्रा पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या का संकेत देते हैं।
  • पीएसए उपचार के लिए तभी जाएं जब आपका एफएसएच स्तर सामान्य सीमा में या थोड़ा ऊंचा हो।
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पेसा की ज़रूरत किसे पड़ती है?

Who should go for PESA? in hindi

PESA kab zaruri hota hai in hindi

नीचे दी गयी परिस्थितियों में डॉक्टर पेसा का निर्णय लेते हैं :-

  1. यदि दंपति या आदमी को अज्ञात कारणों से बांझपन (unexplained/idiopathic infertility) हो तो, यानि कि यदि डायाग्नोसिस और उपचार के बाद भी बांझपन के कारणों का पता न चले, तो पेसा का सुझाव दिया जाता है।
  2. जिन पुरुषों के वीर्य विश्लेषण टेस्ट रेपोर्ट्स (semen analysis tests/ sperm culture test reports) में इनमें से कोई कमी पायी गयी हो :-
  • एज़ोस्पर्मिया (Azoospermia) - एजाकुलेशन में जीरो स्पर्म
  • ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) - शुक्राणुओं की कमी
  • अस्थेनोजोस्पर्मिया (Asthenozoospermia) - शुक्राणुओं में आवश्यक गतिशीलता (Sperm motility) का अभाव होना
  • क्रिप्टोजोस्पर्मिया (Cryptozoospermia) - ऊंची केसूयल्टी रेट (Casualty rate) वाले शुक्राणु
  • नेक्रोज़ोस्पर्मिया (Necrozoospermia) - मृत और स्थिर शुक्राणुओं वाली एक स्थिति
  1. असामान्य एजाकुलेशन विकार वाले पुरुष जैसे कि रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन (Retrograde Ejaculation) जहां मूत्रमार्ग से बाहर आने के बजाय एजाकुलेशन मूत्राशय से पीछे की ओर जाता है।
  2. यदि पुरुष के वीर्य में कोई सक्रिय शुक्राणु नहीं है।
  3. इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन-आईवीएफ (In-Vitro Fertilization-IVF) के लिए शुक्राणु प्राप्त करने के लिए, जहां अंडे एक प्रयोगशाला में शरीर के बाहर शुक्राणु के साथ फर्टिलाइज किए जाते हैं।
  4. अंडकोष (testicles) में गांठ या चोट की स्थिति होने पर यदि इनमें से कोई समस्या हो गयी हो तो :-
  • भारी अंडकोष
  • पेट के दबाव महसूस होने के साथ अंडकोष की सूजन
  • एक अंडकोष दूसरे की तुलना में बहुत अधिक भारी
  • अंडकोष में सूजन
  • चोट या दुर्घटना के कारण अंडकोष में मरोड़
  • कैंसर की संभावना के साथ गांठ
  1. जब पुरुष में लेउटिनाइजिंग हार्मोन (Leutenizing hormones -LH) और फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन कम होते हैं जो पुरुषों में प्रजनन और टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) उत्पादन के लिए आवश्यक होते हैं।
और पढ़ें:अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सफलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
 

पेसा उपचार की प्रक्रिया

Procedure of PESA treatment in hindi

PESA ki prakriya kya hai in hindi

पेसा सर्जन या यूरोलॉजिस्ट द्वारा की जाने वाली एक बहुत तेज़ और सरल सर्जिकल प्रक्रिया है।

पूरी प्रक्रिया में मुश्किल से 10 मिनट लगते हैं।

इस प्रक्रिया में कोई चीरा नहीं लगाया जाता है।

शुक्राणुओं को एक सुई का उपयोग करके निकाला जाता है जो एपिडीडिमिस के सिर में डाल दिया जाता है।

प्रक्रिया को महिला के अंडे की पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के साथ समन्वित (coordinate) किया जाता है ताकि शुक्राणु और अंडे का इस्तेमाल आईसीएसआई या आईवीएफ प्रक्रिया के लिए किया जा सके। प्रक्रिया के चरण इस प्रकार हैं :-

  • रोगी अपनी पीठ के बल लेट जाता है और उसकी अंडकोश की त्वचा कीटाणु नाशक / एंटीसेप्टिक दवा से निष्फल की जाती है।
  • रोगी को स्थानीय एनेस्थेसिया (general anesthesia) के लिए इंजेक्शन दिया जाता है।
  • सर्जन एपिडीडिमिस से एक सुई का उपयोग करके शुक्राणु को निकालता है।
  • एकत्रित शुक्राणु को तब शुक्राणु कोशिकाओं की खोज के लिए एक प्रयोगशाला में भेज दिया जाता है।
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पेसा के लाभ

Benefits of PESA in hindi

PESA ke kya fayde hain in hindi

पेसा पुरुष बांझपन के इलाज के लिए एक बहुत ही सफल शुक्राणु पुनर्प्राप्ति विधि है।

पेसा न्यूनतम दर्द और परेशानी वाला उपचार है।

जोखिम और जटिलताएँ बहुत सीमित हैं।

पेसा के लाभों में शामिल हैं :-

  • पेसा में ओपन सर्जरी शामिल नहीं है।
  • पेसा एक छोटी सी और तुरंत सम्पन्न होने वाली प्रक्रिया है।
    पेसा उपचार करने में 10 मिनट लगते हैं।
  • पर्याप्त संख्या में शुक्राणु प्राप्त करने के लिए पेसा को दो से चार बार दोहराया जा सकता है।
  • पेसा एक आसान और जटिलताओं से मुक्त सरल प्रक्रिया है।
और पढ़ें:आईएमएसआई आईवीएफ क्या है?
 

पेसा के जोखिम

PESA risks in hindi

PESA ke risks kya hain in hindi

इस सर्जरी के कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उनमें से कुछ हैं :-

  • हेमटोमा का गठन (थक्के वाली रक्त कोशिकाओं की सूजन) या भारी आंतरिक रक्तस्राव
  • चीरा लगाने की जगह पर संक्रमण (सूजन, खुजली, लालिमा / दाने आदि)

  • हाई फीवर 104 डिग्री फ़ारेनहाइट तक

  • अंडकोश या चीरा स्थल में गंभीर दर्द

  • अंडकोश में सूजन
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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

पुरुष बांझपन के उपचार के लिए सुझाया जाने वाला पहला इलाज है पेसा।

यदि आपकी बांझपन की समस्या गंभीर है, तो संभावना है कि आपका पेसा उपचार विफल हो जाए।

ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर पुरुष बांझपन के अन्य इलाज का सुझाव देते हैं जैसे कि मेसा, टेसा, टेसे आदि।

यदि इनमें से कोई भी उपाय आपके लिए काम नहीं करता है, तो आपके पास शुक्राणु दाता का उपयोग करने का एकमात्र विकल्प रह जाता है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 03 Jun 2020

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