Uchh jokhim wali garbhavastha kya hai in hindi

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था क्या है?

What is a high-risk pregnancy? in hindi

Uchh jokhim wali garbhavastha kya hai in hindi

एक नज़र

  • महिला के अधिक उम्र के कारण बढ़ती है हाई रिस्क प्रेगनेंसी की संभावना।
  • उच्च जोखिम गर्भवस्था का कारण अधिक वज़न और उच्च बीएमआई (BMI) भी है।
  • प्रीटर्म लेबर से भी बढ़ता है हाई रिस्क प्रेगनेंसी का ख़तरा।
  • अपनी दिनचर्या में उचित खान-पान और व्यायाम को करें शामिल।

अगर आपकी गर्भावस्था उच्च जोखिम वाली है, तो आपको या आपके बच्चे को प्रसव के पहले या बाद में स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

आमतौर पर, पूरे गर्भकाल में विशेष निगरानी और देखभाल की आवश्यकता होती है। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में यह और ज़रुरी हो जाती है क्योंकि समय के साथ-साथ हाई रिस्क प्रेगनेंसी अधिक जटिल होने लगती है।

प्रसवपूर्व देखभाल उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की संभावना को कम कर सकती है और साथ ही बिना किसी जटिलता के स्वस्थ गर्भधारण और प्रसव में भी मदद कर सकती हैं।

इस लेख की मदद से जानें कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के कारण या जोखिम कारक क्या होते हैं और इसका कैसे उपचार संभव है।

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इस लेख़ में/\

  1. हाई रिस्क प्रेगनेंसी की संभावना को बढ़ाने वाले कारक क्या हैं?
  2. हाई रिस्क प्रेगनेंसी का निदान कैसे किया जा सकता है?
  3. उच्च जोखिम गर्भावस्था के उपचार क्या हैं?
  4. निष्कर्ष
 

1.हाई रिस्क प्रेगनेंसी की संभावना को बढ़ाने वाले कारक क्या हैं?

What are the factors that increases the chances of high-risk pregnancy? in hindi

Karak jo uchh jokhim garbhavastha ko badhane waale karak in hindi

कभी-कभी उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, गर्भावस्था से पहले मौजूद चिकित्सीय स्थिति का परिणाम होती है। अन्य मामलों में गर्भावस्था के दौरान विकसित होने वाली चिकित्सीय स्थिति, उच्च जोखिम का कारण बन जाती है।

इसके अलावा भी उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाने वाले कई कारक हैं।

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था को बढ़ाने वाले कारक निम्नलिखित हैं :

  1. माँ की उम्र (Maternal age)

गर्भावस्था से जुड़े सामान्य जोखिमों को निर्धारित करने में माँ की उम्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आमतौर पर, 35-40 वर्षीय महिलाओं की तुलना में 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में उच्च जोखिम वाली प्रेगनेंसी का अधिक रिस्क होता है।

इतना ही नहीं जिन महिलाओं की उम्र गर्भवती होने के दौरान 18 वर्ष से कम होती है उनमें भी आगे चलकर हाई रिस्क प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है।

ऐसी महिलाओं के शिशुओं में आनुवंशिक दोष (genetic defect) या गर्भपात होने की संभावना अधिक होती है।

वहीं 35 से 40 वर्ष के बाद, महिलाओं में डाउंन सिंड्रोम (downs syndrome) वाले बच्चे को जन्म देने की संभावना भी अधिक होती है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर माता-पिता को एक जेनेटिक विशेषज्ञ (genetics specialist) से मिलने की सलाह दे सकते हैं, जो क्रोमोसोमल टेस्ट (chromosomal tests) के परिणामों का विस्तार से निदान और व्याख्या कर सकते हैं।

2. स्वास्थ्य समस्याएं (Health problems)

यदि गर्भावस्था से पहले या दौरान माँ को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, तो यह हाई रिस्क प्रेगनेंसी बन जाती है।

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की संभावना बढ़ाने वाली स्वास्थ्य समस्याएं निम्न हैं :

  • प्रीएक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia)

प्री-एक्लेमप्सिया एक सिंड्रोम है, जिसमें सूजन, उच्च रक्तचाप, रक्त के स्तर में बदलाव हो सकते हैं जो किडनी, लिवर, मस्तिष्क और यूरिन प्रोटीन को प्रभावित कर सकती हैं।

प्री-एक्लेम्पसिया से पीड़ित महिलाओं को प्रारंभिक उपचार की आवश्यकता होती है। अगर समय रहते इलाज नहीं किया जाता है तो स्थिति घातक हो सकती है जो भविष्य में गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती हैं।

हालांकि, अगर इस ओर समय रहते ध्यान दिया जाए तो प्री-एक्लेम्पसिया से पीड़ित महिलाएं भी स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

  • गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes)

गर्भावधि मधुमेह, एक प्रकार का मधुमेह है, जो केवल गर्भवती महिलाओं में होता है।

अगर किसी महिला को प्रेगनेंसी के पहले डायबिटीज़ नहीं थी और गर्भावस्था के दौरान हो जाती है, तो यह गर्भावधि मधुमेह की स्थिति होती है। हालांकि, डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रीटमेंट प्लान से गर्भावधि मधुमेह के बावजूद प्रसव आसानी से हो सकता है।

एक बार डिलीवरी हो जाने पर इस प्रकार की डायबिटीज़ ठीक हो जाती है। हालाँकि, गर्भावस्था के दौरान महिला को गर्भकालीन मधुमेह था तो उनमें टाइप 2 मधुमेह विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है या सही तरीके से उपचार नहीं किया जाता है, तो ये मां और बच्चे के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।

3. मोटापा और हाई बीएमआई (Maternal obesity and high BMI)

माँ का वज़न और बॉडी मास इंडेक्स अधिक होना (बीएमआई), हाई रिस्क प्रेगनेंसी का कारण बन सकता है।

यह जन्म से जुड़े जटिलताओं का कारण भी बन सकता है और बच्चे के विकास को प्रभावित भी कर सकता है।

बहुत उच्च बीएमआई वाली माँ में निम्नलिखित स्वास्थ्य से जुड़े ख़तरे हो सकते हैं :

  • गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes)
  • प्रीएक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia)
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension (high blood pressure)
  • समय से पहले जन्म (Premature birth)

शिशुओं से जुड़े निम्नलिखित सामान्य जोखिमों में से एक हो सकता है :

  • मैक्रोसोमिक (macrosomic)

मैक्रोसोमिक यानि बड़े आकार का शिशु जो प्रसव को कठिन बना सकता है।

कुछ मामलों में सिजेरियन की आवश्यकता हो सकती है।

  • मोटापा (obesity)

माँ का वज़न और बीएमआई (BMI) बहुत अधिक होना अंतर्गर्भाशयी विकास प्रतिबंध (intrauterine growth restriction - IUGR) नामक एक स्थिति को जन्म दे सकता है।

इस स्थिति में शिशु अपनी गर्भकालीन आयु की अपेक्षा आकार से छोटा होता है।

आईयूजीआर बेबी कई बार लेबर को सहन कर पाने में सक्षम नहीं होते हैं जिससे उनके मस्तिष्क में रक्तस्राव (bleeding) हो सकता है।

4. उच्च रक्तचाप (high blood pressure)

कई कारक, भ्रूण में रक्त के प्रवाह (blood flow) को नियंत्रित करते हैं, जिनमें से एक है रक्तचाप।

गर्भावस्था के दौरान माँ का ब्लड प्रेशर बहुत कम या बहुत अधिक होने से भ्रूण को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

रक्तचाप कम या अधिक होने से निम्न स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है :

  • ये किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, जो जन्म के समय बच्चे के कम वज़न का कारण बन सकता है।
  • ये बच्चे में अंतर्गर्भाशयी विकास प्रतिबंध (Intrauterine Growth Restriction) (बच्चे में असामान्य वृद्धि या विकास रूकने) का कारण बन सकता है।
  • बच्चे को हाइपोक्सिक-इस्केमिक एन्सेफैलोपैथी (hypoxic-ischemic encephalopathy) का ख़तरा (ऑक्सीजन की कमी के कारण मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ना) हो सकता है।

आमतौर पर, इस स्थिति में गर्भवती महिला को सिजेरियन डिलीवरी से गुज़रना पड़ता है क्योंकि वे लेबर को बर्दाश्त कर पाने में सक्षम नहीं होती है।

5. एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS)

अगर मां को एचआईवी या एड्स है, तो यह इम्युनिटी सिस्टम के सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और शरीर में संक्रमण और कुछ बीमारियों से लड़ने की क्षमता को नष्ट कर सकता है।

माँ से बच्चे में एचआईवी होने की संभावना जन्म देने के दौरान या स्तनपान के माध्यम से होती है।

हालांकि, माँ से शिशु को एचआईवी/एड्स के प्रसार को रोकने के लिए कई प्रभावी तरीके हैं।

6. प्रीटर्म लेबर (Preterm labor)

गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले प्रीटर्म लेबर शुरू हो जाता है।

चूंकि बच्चा इस समय तक पूरी तरह से विकसित नहीं होता है, इसलिए वह गर्भ के बाहर जीवित रह पाने में असक्षम होता है।

ऐसे समय में, चिकित्सक 37 सप्ताह से पहले प्रसव को रोकने की कोशिश करते हैं।

हालाँकि कई महिलाओं के लिए प्रीटरम लेबर अनिश्चित है, लेकिन कुछ ऐसे कारक हैं जो महिलाओं को अधिक जोखिम में डाल सकते हैं।

गर्भवती महिला में प्री-टर्म की संभावना बढ़ाने वाले कारक :

  • पहले बच्चे का जन्म भी अगर समय से पहले हुआ हो
  • संक्रमण
  • गर्भाशय ग्रीवा का छोटा होना

और पढ़ें:गर्भावस्था में नॉर्मल डिलीवरी के उपाय

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2.हाई रिस्क प्रेगनेंसी का निदान कैसे किया जा सकता है?

How high risk pregnancy is diagnosed? in hindi

High risk pregnancy ka nidan kaise kiya ja sakta hai in hindi

गर्भवती महिलाओं में उच्च जोखिम का जल्द निदान माँ और शिशु के स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है।

हाई रिस्क प्रेगनेंसी का निदान निम्न रूप से किया जा सकता है :

  • बार-बार डॉक्टर से मिलने जाना
  • चिकित्सा समस्या की निगरानी के लिए कुछ परीक्षण
  • दवा के स्तर की जांच के लिए रक्त परीक्षण
  • एम्निओसेंटेसिस (Amniocentesis)
  • भ्रूण को मॉनिटर करना

और पढ़ें:गर्भाशय संकुचन

 

3.उच्च जोखिम गर्भावस्था के उपचार क्या हैं?

What are the treatment for high risk pregnancy? in hindi

High risk pregnancy ke liye upchar kya hain in hindi

हाई रिस्क प्रेगनेंसी के लिए उपचार, रोग के प्रकार और रोग का गर्भावस्था पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण व्यापक रूप से भिन्न हो सकता है।

निम्न तरीकों से उच्च जोखिम गर्भावस्था का उपचार किया जा सकता है :

  • बच्चे को मॉनिटर करने के लिए या असामान्यताओं का पता लगाने के लिए सीरियल अल्ट्रासाउंड किए जा सकते हैं।
  • शिशु को गंभीर समस्या होने पर उसकी हृदय गति पर नज़र रखना आवश्यक हो सकता है या एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis) करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
  • प्रसवपूर्व परीक्षण डॉक्टर को मां के रक्त में भ्रूण की कोशिकाओं का पता लगाकर, आनुवंशिक असामान्यता के जोखिम का आकलन करके, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है।
  • उच्च जोखिम वाले प्रसव की योजना बनाने के पहले चरण में रोगी का इलाज करना डॉक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
    कभी-कभी प्रसव के दौरान एनेस्थिसिया (anesthesia) दिया जाता है, जिससे आमतौर पर युवा महिलाओं को परेशानी नहीं होती है।
  • एक बार जोखिम की पहचान हो जाने के बाद, सभी आवश्यक दवाएँ व अन्य उपयुक्त उपचार की ओर रूख किया जाता है ताकि समय से पहले बच्चे के जन्म को रोकने में मदद मिल सके।

और पढ़ें:डिलीवरी के बाद पीरियड लाने के उपाय

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4.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

अगर आप भी गर्भवती होने के बारे में सोच रही हैं या आपकी हाई रिस्क प्रेगनेंसी है तो इससे बचने के लिए या समय रहते इसे ठीक करने के लिए आपको रोज़ाना कम से कम 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड का सेवन करना चाहिए।

इसके साथ ही आपको व्यायाम भी करना चाहिए। डॉक्टर से मिलकर इसके बारे में विस्तार से बात करने से आपको इसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 02 Jun 2020

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