Natural ways to improve poor sperm motility | Zealthy

स्पर्म की खराब गतिशीलता को बढ़ाने के 5 सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक उपाय

Top 5 natural effective ways to improve poor sperm motility in hindi

Sperm ki poor motility increase karne ke 5 natural tarike in hindi

एक नज़र


  • पुरुष के शरीर में स्पर्म की गतिशीलता गर्भधारण में महत्व रखती है।

  • खराब जीवनशैली से स्पर्म की सेहत को नुकसान हो सकता है।

  • तनाव प्रबंधन से शुक्राणु की गति को सरलता से बढ़ाया जा सकता है।

कुछ समय पहले तक गर्भधारण के लिए महिलाओं की ही प्रजनन क्षमता को मुख्य रूप से केंद्र बिंदु के रूप में माना जाता था।

लेकिन आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने पुरुष प्रजनन क्षमता को भी समान रूप से महत्वपूर्ण मान लिया है।

इस अर्थ में एक स्त्री के गर्भ न धारण करने के पीछे एक पुरुष की प्रजनन क्षमता भी समान रूप से उत्तरदायी हो सकती है।

सामान्य रूप से गर्भधारण के लिए महिला के अंडाणु व पुरुष के शुक्राणु का मिलन होना जरूरी होता है।

इसके लिए पुरुष के शुक्राणु की पर्याप्त संख्या व उनमें सही गतिशीलता (motility) का होना जरूरी है।

इनमें से एक भी तत्व की अनुपस्थिति से पुरुष बांझपन के शिकार हो जाते हैं।

लेकिन इस लेख में स्पर्म की खराब गतिशीलता को बढ़ाने के 5 सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक उपाय के माध्यम से आपको एक बड़ी समस्या का हल दिया गया है।

 

1.स्पर्म की उत्तम मोटेलिटी क्या होती है?

What is an ideal sperm motility in men? in hindi

purushon mein sperm ki motility kya hoti hai in hindi

सरल शब्दों में स्पर्म मोटिलिटी स्पर्म या शुक्राणु की वह गति है जिसके आधार पर वे वीर्य (semen) में तैरते हैं और सेक्स के समय प्रवाहित होते हुए महिला की योनि के माध्यम से उसके शरीर में प्रवेश करते हैं।

एक हेल्दी पुरुष के वीर्य में लगभग 120-350 लाख प्रति घंटे सेंटीमीटर की दर से शुक्राणु या स्पर्म पाये जाते हैं।

यही स्पर्म स्खलन के समय या सेक्स के समय जब शरीर से बाहर निकलते हैं तब इनमें से लगभग 40% स्पर्म जीवित अवस्था में होते हैं।

इनमें से 32% स्पर्म गतिशील होते हुए आगे बढ़ते हैं।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि सामान्य स्पर्म संख्या का 32% भाग गतिशील होता है जो एक सामान्य व उत्तम स्पर्म मोटेलिटी माना जा सकता है।

लेकिन अगर सीमन विश्लेषण में यह प्रतिशत कम आता है तब उस स्थिति में पुरुष के स्पर्म की मोटेलिटी को खराब माना जा सकता है।

चिकित्सीय भाषा में इस स्थिति को एस्थेनोज़ूस्पर्मिया (asthenozoosparmia) कहा जाता है।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार यह स्थिति पुरुष बांझपन का एक अन्य मुख्य कारण माना जाती है।

 

2.स्पर्म की गतिशीलता प्राकृतिक रूप से कैसे बढ़ाएँ?

Ways to increase the sperm motility naturally? in hindi

Sperm ki motility ko naturally kaise badhaa sakte hain in hindi

स्पर्म की गतिशीलता को प्रभावित करने वाले तत्व मुख्य रूप से खराब जीवनशैली और पर्यावरण संबंधी ही होते हैं।

इसके अतिरिक्त कभी-कभी अंडकोश में लगी चोट या सर्जरी, इन्फेक्शन आदि भी स्पर्म की गतिशीलता पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।

इसलिए जब जांच में स्पर्म की गतिशीलता के कम होने का पता लग जाता है जब यह प्रश्न मुख्य हो जाता है कि स्पर्म की गतिशीलता कैसे बढ़ाएँ ?

इसके उत्तर के रूप में जो सुझाव दिये जा सकते हैं वो इस प्रकार हैं :

  • स्वस्थ व पौष्टिक भोजन (Healthy and nutritious food)

    सामान्य रूप से स्वच्छ व पौष्टिक भोजन हर व्यक्ति के जीवन के लिए अनिवार्य होता है।

    लेकिन मेल इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के रूप में जो भोजन करना चाहिए जिससे स्पर्म की सेहत और गतिशीलता पर अच्छा प्रभाव पड़े।

    इस प्रकार स्पर्म मोटेलिटी को बढ़ाने के उपाय के रूप में सभी फल और सब्जी के साथ वह सभी भोजन लें जिसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण, पोषक तत्व और एंटीओक्सीडेंट्स का समुचित मिश्रण मिला हो।

    साथ ही बाज़ार में बना प्रोसेस्ड फूड जैसे पास्ता, बर्गर और कोलड्रिंक आदि का सेवन न्यूनतम रखना चाहिए।

    अपने दैनिक भोजन में साबुत अनाज को अधिकतम मात्रा में शामिल करें।

    इससे स्पर्म की सेहत पर अच्छा प्रभाव होगा।

    इसके साथ अंडे, पालक, केला, डार्क चॉकलेट, ब्रोकली, अनार के साथ ही आयुर्वेदिक हर्ब शतावरी का सेवन अच्छा रहता है।

    यदि आप अखरोट, लहसुन, ज़िंक आधारित खाद्य पदार्थ जैसे कस्तुरी, बीन्स, कद्दू, गाजर आदि तो ये भी आपके लिए फ़ायदेमंद हैं।

    इनके अलावा पपीते के बीज, जिनसिंग और माका आदि भी स्पर्म की मोटेलिटी के लिए अच्छे माने जाते हैं।

  • रसायनों व प्लास्टिक का न्यूनतम प्रयोग (Do not use chemicals)

    अपने जीवन में आप उन सभी वस्तुओं का प्रयोग न्यूनतम कर दें जिनमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।

    अनेक रसायन जैसे फिथालेट्स का पुरुष प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव होता है।

    इसका प्रयोग अधिकतर बालों को रंगने, खुशबू , परफ्यूम, नेल पोलिश आदि के काम के लिए किया जाता है।

    इसके अतिरिक्त सॉफ्ट प्लास्टिक जो अधिकतर वालपेपर, सेंडल, फ्लोर कार्पेट आदि में किया जाता है, का भी प्रयोग न्यूनतम कर दें।

    इसके अलावा प्लास्टिक के बर्तन का भी इस्तेमाल कम करना अच्छा रहता है।

    साथ ही ब्लीच किया हुआ कागज़ जैसे टॉइलेट पेपरक, नैपकिन, क्लोरीन वाले नल का पानी, कीटाणुनाशक इस्तेमाल किए हुए खाने, सिंथेटिक कोसमेटिक और बाथरूम में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजों का भी प्रयोग न्यूनतम करना चाहिए।

    साथ ही पशु मांस जिसमें सिंथेटिक हॉरमोन हो जैसे चिकन, बीफ, पोर्क या पारंपरिक डेयरी प्रोडक्ट जैसे गाय के दूध आदि चीजों का भी प्रयोग न्यूनतम करना चाहिए।

    शराब, तंबाकू और सिगरेट के साथ सोडा भी स्पर्म की गतिशीलता को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व माने जाते हैं।

  • स्वस्थ व प्रसन्न गतिशील जीवनशैली (Healthy and active lifestyle)

    तनावपूर्ण स्थिति किसी भी व्यक्ति के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।

    यही नियम स्पर्म की संख्या व गतिशीलता पर भी लागू होता है।

    जब व्यक्ति तनाव में होता है तब उसके शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन असंतुलित हो जाते हैं।

    लंबे समय तक चलने वाली यह स्थिति जीवन को दर्द के समुद्र में ले जाती है।

    इसलिए कुछ उपायों को अपना कर दैनिक तनाव को कम किया जा सकता है जिससे सम्पूर्ण स्वास्थ्य के साथ ही स्पर्म की मोटेलिटी पर भी अच्छा प्रभाव पड़े।

    इसके लिए निम्न सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं :-

  1. नियमित व्यायाम के माध्यम से अन्य लाभों के साथ शरीर में हार्मोन भी संतुलित रहते है।
  2. ध्यान व योग से तनाव कम होता है जिससे स्पर्म की संख्या व मोटेलिटी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  3. शराब व धूम्रपान और मादक दवाएं बिलकुल नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इससे स्पर्म की गतिशीलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  4. शारीरिक वजन का नियंत्रण रखें नहीं तो हार्मोन असंतुलन होने से पुरुष प्रजनन क्षमता पर बुरा असर होता है।
  5. लेपटोप या किसी भी गरम चीज़ को जांघ पर न रखें क्योंकि ऐसा करने से स्पर्म पर सीधा बुरा असर होता है।
  • स्पर्म बढ़ाने वाली दवाओं का प्रयोग नहीं (Avoid medicines to increase sperm health)

    कुछ लोगों का मानना है कि स्पर्म की सेहत बढ़ाने के लिए दवाइयों का सेवन अपनी मर्ज़ी से करना ठीक रहता है।

    लेकिन अब यह सिद्ध हो चुका है कि कुछ दवाइयाँ जो अवसाद को दूर करने हेतु, कुछ स्टेरोइड किमोथेरेपी संबंधी दवाइयाँ और रेडिएशन का उपचार प्रत्यक्ष रूप से स्पर्म की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

    इसलिए जब भी पुरुष मरीज़ को स्पर्म की मोटेलिटी कम होने का संकेत मिले, उन्हें तुरंत चिकित्सक से मिलकर अगर कोई दवा चल रही है तब इसकी सूचना उन्हें देनी होगी।

  • सुरक्षित सेक्स और कंडोम का प्रयोग (Safe sex and use condoms)

    असुरक्षित सेक्स संबंध के कारण होने वाले यौन जनित रोग स्पर्म की गतिशीलता और प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।

    इसलिए यही अच्छा होता है कि जब भी सेक्स संबंध स्थापित किए जाएँ उसके लिए पूर्ण सुरक्षा के उपाय को अपनाते हुए कंडोम व अन्य गर्भनिरोधकों का समुचित उपयोग किया जाये।

 

3.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarshin hindi

पुरुष प्रजनन क्षमता में शुक्राणु के स्वास्थ्य का बहुत महत्व होता है।

इसमें शुक्राणु की संख्या और गतिशीलता, दोनों का ही पूरा महत्व होता है।

स्वस्थ व पौष्टिक भोजन विशेषकर जिंक आधारित, प्रोटीन और लहसुन जैसी वस्तुओं का भोजन स्पर्म की मोटेलिटी के लिए लाभदायक हो सकता है।

इसके साथ ही शारीरिक वजन को नियंत्रित रखते हुए प्रसन्न व गतिशील जीवनशैली के द्वारा स्पर्म की मोटेलिटी को बढ़ाया जा सकता है।

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