Symptoms of Embryo Implantation after IUI | Zealthy

आईयूआई के बाद भ्रूण प्रत्यारोपण के लक्षण

Symptoms of embryo implantation after IUI in hindi

IUI ke baad bhrun pratyaropan ke lakshan in hindi

एक नज़र


  • जब कोई महिला गर्भधारण करने असफल होती है तो आईयूआई का सहारा लिया जाता है।

  • इसमें शुक्राणुओं को कृत्रिम तरीके से महिला के गर्भ तक पहुंचाया जाता है।

  • 35 की उम्र के पहले आईयूआई की सफलता (IUI success rate) की संभावना ज़्यादा होती है, उसके बाद ये कम हो जाती है।

गर्भधारण की समस्या से जूझ रहीं महिलाओं को गर्भधारण के लिए आईयूआई की तकनीक का सहारा लेना पड़ता है।

आईयूआई में भ्रूण को कृत्रिम तरीके से स्थानांतरित किया जाता है, ऐसे में इस प्रक्रिया के बाद भ्रूण सही से स्थानांतरित हुआ है या नहीं यह पता लगाना बहुत ज़रूरी होता है।

इस लेख में हम एम्ब्र्यो इंप्लानटेशन के जुड़ी जानकारियों के बारे में विस्तारपूर्वक बात करेंगे।

 

1.आईयूआई यानी इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन क्या है?

What is IUI? in hindi

IUI Kya Haiin hindi

आईयूआई तकनीक का इस्तेमाल तब किया जाता है जब पुरुषों में फर्टिलिटी की समस्या हो या फ़िर महिला सिंगल हो।

इस तकनीक में पुरुष के स्पर्म को महिला के ओव्यूलेशन के दौरान प्लास्टिक की पतली कैथेटर ट्यूब (cathetor tube) के द्वारा गर्भाशय में अंडों के पास डाला जाता है।

यह तकनीक कुदरती प्रजनन की तरह ही है। फ़र्क बस इतना है कि इस तकनीक की मदद से स्पर्म (शुक्राणुओं) को अंडे तक पहुंचाने के लिए कृत्रिम तरीकों का सहारा लिया जाता है।

कुछ मामलों में गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए उन्हें दवाइयां भी दी जाती हैं।

आईयूआई तकनीक का इस्तेमाल वही महिला कर सकती हैं जिनका फैलोपियन ट्यूब सामान्य हो।

 

2.आईयूआई के बाद किन बातों का रखें ध्यान

Precautions after IUI Treatment in hindi

IUI ke baad kin baaton ka rakhe dhyanin hindi

आईयूआई प्रक्रिया के बाद गर्भधारण की सफलता सुनिश्चित करने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कई तरह के बदलाव लाने होंगें

आइये जानते हैं आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए :-

  • शुक्राणुओं को गर्भाशय में ट्रांसफर करने के बाद करीब 20-30 मिनट तक आराम करें।

  • आईयूआई प्रक्रिया या भ्रूण ट्रांसफर के बाद करीब 48 घंटे तक शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए।

  • करीब 48 घंटे तक स्विमिंग भी न करें। साथ ही भारी सामान न उठाएं। बहुत ज़्यादा शारीरिक श्रम से बचें।

  • यदि पेट में दर्द होता है, तो अपनी तरफ से कोई भी दवा न लें, डॉक्टर से सलाह के बाद ही दवा लें।

  • इस प्रक्रिया के तुरंत बाद गर्भधारण नहीं हो सकता। इसमें करीब 15 दिनों का समय लगता है इसलिए गर्भधारण के बारे में ज्यादा न सोचें।

  • आईयूआई के बाद ओव्यूलेशन की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है और भ्रूण को विकसित होने में थोड़ा समय लगता है।

    इसके अलावा शरीर में हार्मोन के बदलाव में भी समय लगता है।

    इसके बाद ही जांच करने पर प्रेगनेंसी के बारे में पता चलेगा। तकरीबन दो हफ्ते के बाद ही परीक्षण कराने पर सही नतीजा आएगा।

  • भ्रूण को विकसित होकर गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने के लिए डॉक्टर हार्मोंस की दवा दे सकते हैं।

 

3.आईयूआई के बाद कैसा महसूस होता है?

How does it feel like after IUI Treatment? in hindi

IUI ke baad kaisa mehsoos hota haiin hindi

आईयूआई प्रक्रिया के बाद महसूस होने वाले कुछ लक्षण : -

  • इस प्रक्रिया के बाद महिलाओं को वजाइनल डिस्चार्ज (योनि से स्राव) होता है, लेकिन इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि यह आईयूआई प्रक्रिया के कारण होने वाला रिसाव नहीं है।

    यह स्राव गर्भाशय ग्रीवा बलगम है, जो आईयूआई प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्थित हो गया है।

  • मामूली स्पॉटिंग का अनुभव होता है, जो सामान्य है।

  • कुछ महिलाओं को आईयूआई के बाद कुछ दिनों तक हल्की ऐंठन और बेचैनी का अनुभव होता है।

    इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, बस आपको थोड़ा आराम की ज़रूरत है और ऐंठन से राहत के लिए आप दर्द निवारक दवा भी ले सकती हैं।

  • सूजन, रक्तस्राव या ज़्यादा दर्द होने पर अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें, क्योंकि यह संक्रमण या किसी अन्य गंभीर समस्या की वजह से हो सकता है।

 

4.आईयूआई के बाद क्या खाना चाहिए?

What Should you eat after IUI? in hindi

IUI ke baad kya khana chahiyein hindi

आईयूआई के बाद अपने खान-पान में ये बदलाव लायें :-

  • खूब अधिक मात्रा में पानी पिएं ( रोज़ाना लगभग तीन से चार लीटर)

  • फलों के जूस और सब्जियों के सूप का सेवन करें।

  • रोज़ाना दूध का सेवन करें, यदि आपको दूध से एलर्जी है तो डॉक्टर की सलाह लें।

  • हरी सब्जियां जैसे कि पालक, मेथी, तोरी आदि खाएं।

  • रोज़ाना दो से तीन फलों का सेवन करें।

 

5.आईयूआई के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण

Pregnancy Symptoms after IUI Treatment in hindi

IUI ke baad Pregnancy ke lakshanin hindi

आईयूआई प्रक्रिया के बाद प्रेग्नेंसी के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं :-

  • ब्लीडिंग (Bleeding)

    जब भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित हो जाता है, तो ब्लीडिंग हो सकती है, यह बिल्कुल सामान्य है इसमें घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।

    ऐसा आमतौर पर आईयूआई प्रक्रिया के करीब दो हफ्ते बाद होता है।

  • माहवारी का रूकना (Missed periods)

    प्राकृतिक रूप से गर्भधारण होने पर जैसे माहवारी आना बंद हो जाता है ठीक उसी तरह इसमें भी माहवारी आना बंद हो जाता है और शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं।

    पीरियड्स न आने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

  • स्तनों का संवेदनशील होना (Sensitive breasts)

    ब्रेस्ट नरम और संवेदनशील हो जाते हैं, आपको हल्का-हल्का दर्द भी हो सकता है।

  • थकान महसूस होना (Tiredness)

    इस दौरान शारीरिक बदलावों के साथ ही आपको थकान और कमज़ोरी भी महसूस हो सकती है।

  • जी-मिचलाना (Nausea)

    नॉर्मल गर्भावास्था की तरह इसमें भी मॉर्निंग सिकनेस होती है, ऐसा एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने की वजह से होता है।

    नोट: हालांकि ऐसा ज़रूरी नहीं कि गर्भावस्था के ये सारे लक्षण सभी महिलाओं में नज़र आएं।

 

6.आईयूआई में शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने में कितना समय लगता है?

How much time do sperm take to reach egg during IUI treatment? in hindi

IUI me shukranu ko ande tak pahuchne me kitna samay lgta hai ?in hindi

गर्भधारण की शुरुआत ही ओव्यूलेशन प्रक्रिया के साथ शुरू होती है।

इसके बाद अंडा अगले 12 से 24 घंटों तक निषेचन (फर्टिलाइज़) के लिए सक्रिय रहता है।

निषेचन के लिए अंडे और शुक्राणुओं (स्पर्म) को इसी दौरान मिलना जरूरी है।

इसके बाद तो एग फर्टिलाइज़ होकर गर्भाशय के साथ जाकर जुड़ जाता है।

 

7.क्या आईयूआई में गर्भपात की आशंका रहती है?

Is there any possibility of abortion in IUI? in hindi

kya IUI me garbhpat ki aashanka rahti haiin hindi

कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या इस प्रक्रिया में भी गर्भपात की संभावना रहती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपको पहले से ही प्रजनन से जुड़ी कोई समस्या है, तो डॉक्टर आपको ओव्यूलेशन की प्रक्रिया तेज़ करने की दवा दे सकते हैं।

इस वजह से कई बार गर्भ में एक से अधिक भ्रूण ठहरने का ख़तरा रहता है, जो आगे चलकर गर्भपात का कारण बन सकता है।

 

8.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarshin hindi

कोई भी वैज्ञानिक तकनीक गर्भधारण की 100 फीसदी गारंटी नहीं देती।

दरअसल, इन प्रक्रियाओं के बाद कुछ सावधानियां बरतनी होती है और डॉक्टर की सलाह पर अमल करना होता उसके बाद परीक्षण के ज़रिए पता चलता है कि भ्रूण को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया सफल हुई है या नहीं।

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