Sperm donor IUI procedure procedure | Zealthy

शुक्राणु डोनर अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रक्रिया, फ़ायदे व नुकसान

Sperm donor intrauterine insemination (IUI) procedure, benefits and drawbacks in hindi

Shukranu data antargarbhashayi garbhadhan - prakriya, fayde, nuksaan

एक नज़र

  • शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रणाली गर्भ धारण करने का तरीका है।
  • पुराने दिनों में बिना किसी तैयारी के पुरुष का वीर्य गर्भाशय में डाल दिया जाता था जिसकी वजह से कई परेशानियां उत्पन्न हो जाती थीं।
  • शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान एवं अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान में मूलभूत अंतर होता है।
  • हाल ही में समलैंगिक जोड़ों द्वारा इस तकनीक का काफी प्रयोग किया जा रहा है।

स्पर्म डोनर (sperm donor) अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान एक प्रकार की असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक (assisted reproductive technique) है जो कि इनफर्टिलिटी (infertility) के उपचार के तौर पर काफी प्रचलित एवं मददगार है।

इस प्रक्रिया में काम आने वाले शुक्राणु या तो नए होते हैं या फिर स्पर्म बैंक (sperm bank) से लिए जाते हैं।

जिस तरह से एग डोनेशन किया जाता है उसी प्रकार से स्पर्म डोनेशन (sperm donation) भी किया जाता है।

ऐसी महिलाएं जो शादी नहीं करना चाहतीं लेकिन बच्चे पालना चाहती हैं उनके लिए यह तकनीक बेहद कारगर है।

यहाँ यह बताना आवश्यक है कि शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान और अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान में अंतर होता है।

शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान में ऐसे व्यक्ति के शुक्राणु लिए जाते हैं जो महिला का सेक्सुअल पार्टनर नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान में महिला के पति या सेक्सुअल पार्टनर से ही शुक्राणु लिए जाते हैं।

इस प्रक्रिया में शुक्राणुओं को लैब में साफ़ किया जाता है जिससे मरे हुए व कम गुणवत्ता के शुक्राणु बाहर निकल जाएँ और सिर्फ स्वस्थ और गतिशील शुक्राणु ही प्राप्त हों।

इन शुक्राणुओं को कैथिटर (cathetor) के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है। इंट्रा-उटेरिन इनसेमिनेशन (intrauterine insemination) फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के विकल्प (fertility treatment options) के अंतर्गत आता है।

इस प्रक्रिया में भ्रूण का विकास शुरुआत से ही गर्भाशय में होता है और एमब्र्यो ट्रान्सफर (embryo transfer) भी नहीं किया जाता।

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इस लेख़ में/\

  1. स्पर्म डोनर अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान करने की क्या प्रक्रिया है?
  2. शुक्राणु डोनरअंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के क्या फ़ायदे है?
  3. शुक्राणु दाता (स्पर्म डोनर) अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के क्या नुक्सान हैं?
  4. निष्कर्ष
 

1.स्पर्म डोनर अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान करने की क्या प्रक्रिया है?

What is the procedure of intrauterine insemination? in hindi

Shukranu data antargarbhashayi garbhadhan karne ki kya prakriya hai

शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान निम्न चरणों में पूरी होती है :-

  • अंडाशय को उत्तेजित करना (Stimulation of ovaries)
    अंडाशय को उत्तेजित करना शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान का पहला चरण है।
    अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए कुछ दवाइयों का उपयोग किया जाता है।
    अंडाशय को उत्तेजित करने से शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सक्सेस रेट (success rate) बढ़ जाती है।
    अगर महिला फर्टाइल विंडो (fertile window) में है तो अंडाशय को उत्तेजित करना आसान होता है।
    फर्टाइल विंडो (fertile window) का पता लगाने के लिए डॉक्टर ओवूलेशन पीरियड कैलकुलेटर (ovulation period calculator) का इस्तेमाल कर सकता है।
  • अंडे को अंडाशय से बाहर निकलना (Release of egg from ovaries)
    इस चरण में अंडे को अंडाशय से बहार निकला जाता है | इस चरण में कुछ ट्रिगर्स (triggers) जैसे एचसीजी (HCG) इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
    इस चरण में यह ध्यान रखना चाहिए की ट्रिगर (trigger) का उपयोग करने के 36 से 40 घंटे बाद अंडा अंडाशय से बहार निकल जाता है।
    डॉक्टर को इसी दौरान शुक्राणुओं को गर्भाशय में डालना चाहिए |
  • फ्रीज़ में से निकाले गए शुक्राणुओं को पिघलाना (Sperm thawing procedure)
    अगर महिला ताज़ा शुक्राणुओं को चुनती है तो यह प्रक्रिया नहीं की जाएगी।
    ज्यादातर मामलों में फ्रीज़ किये गए शुक्राणुओं का ही उपयोग किया जाता है।
    उपयोग से पहले उन्हें कमरे के सामान्य तापमान में रखा जाता है ताकि वे पिघल जाएँ।
    यह ध्यान रखने योग्य बात है की एक बार विघ्लन के बाद उन्हें दोबारा नहीं जमाया जा सकता इसलिए इन्हें तभी पिघलाया जाएँ जब इनकी ज़रुरत हो |
  • शुक्राणुओं को गर्भाशय में डालना (Insemination of sperms in Uterus)
    यह शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान का अंतिम चरण है। इसमें शुक्राणुओं को सिरिंज या कैथिटर (catheter) की मदद से योनि के रास्ते गर्भाशय में डाला जाता है।
    इस प्रक्रिया में वैसा ही अनुभव होता है जैसा की पेप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test) के समय होता है |
    पेप स्मीयर टेस्ट गर्भाशय के कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है।

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2.शुक्राणु डोनरअंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के क्या फ़ायदे है?

What are the benefits of Intrauterine Insemination? in hindi

Shukranu Data Antargarbhashayi Garbhadhan ke kya fayde hai

शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के निम्न फायदे है :-

  • अकेली औरत एवं समलैंगिक जोड़े जो बच्चा चाहते हैं (Single woman and lesbians who want to have child)
    शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान का सबसे अधिक फायदा उन औरतों को होता है जो शादी नहीं करना चाहती मगर स्वयं का बच्चा चाहती है।
    हाल ही में शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान लेस्बियन्स (lesbians) में भी काफी प्रचलित हुआ है |
  • ऐसे जोड़े जो माता-पिता नहीं बन सकते (Infertile couple)
    गर्भधारण न करने की वजह माता या पिता दोनों ही हो सकते हैं। कई बार बाँझपन का कारण पता नहीं चल पता और इसका इलाज भी नहीं हो पाता।
    शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान तकनीक ऐसे लोगों के लिए वरदान है।
    सिर्फ महिला ही बाँझपन का कारण नहीं होती। पुरुषों में कम या अस्वस्थ शुक्राणु भी बाँझपन का कारण है।
    इस तकनीक में सिर्फ स्वस्थ शुक्राणुओं का उपयोग किया जाता है।
    इसके अलावा शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान तकनीक उन औरतों में उपयोग की जाती है जो सेक्सुअल पार्टनर के सीमन (semen) में पाए जाने वाले प्रोटीन से एलर्जिक होती हैं।
    इस तकनीक में केवल साफ़ किए गए व उच्च गुणवत्ता के शुक्राणुओं का इस्तेमाल किया जाता है।
  • अपेक्षाकृत सुरक्षित एवं सुविधाजनक (Relatively safe and easy)
    बाँझपन में बहुत तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
    शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान तकनीक उन सब तकनीकों से अपेक्षाकृत सुरक्षित एवं सरल तकनीक है क्योंकि इसमें अंडे को शरीर से बहार नहीं निकला जाता।
    आईवीएफ़ (IVF) की तुलना में आईयूआई (IUI) में कम ख़र्च आता है।

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3.शुक्राणु दाता (स्पर्म डोनर) अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के क्या नुक्सान हैं?

What are the drawbacks of intrauterine insemination? in hindi

Shukranu Data Antargarbhashayi Garbhadhan ke kya nuksan hai in hindi

शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के नुक्सान निम्न हैं :-

  • कानूनी अड़चनें (Legal problems)
    शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की प्रक्रिया में कई दिक्कतें आती है।
    शुक्राणु दाता को सबसे पहले विभिन्न बीमारियों जैसे की एचआईवी (HIV) की जांच से गुजरना पड़ता है।
    सभी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की मंजूरी मिलती है।
  • तकनीकी शर्तें (Technical requirements)
    अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान का तरीका कुछ तकनीकी शर्तों के अंतर्गत ही काम करता है।
    जो महिला इस प्रक्रिया का उपयोग कर रही है उसके अंडाशय में अंडे बनने चाहिए, एवं उसकी फेलोपियन नलिका (fallopian tube) में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।
    इसके अलावा शुक्राणु भी स्वस्थ होने चाहिए।
    इस तकनीक की सफलता के लिए स्पर्म मोटीलिटी (sperm motility) भी आवश्यक है।

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4.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

शुक्राणु दाता अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान तकनीक न सिर्फ बाँझपन के इलाज में काम आती है बल्कि यह तकनीक उन औरतों में भी उपयुक्त है जो शादी नहीं करना चाहती किंतु खुद के बच्चे चाहती

है।

आईयूआई (IUI) का सबसे बड़ा फायदा इसका सरल एवं सुविधाजनक होना है।

इस तकनीक के नुक्सान भी है किंतु कुछ बातों का ध्यान रखकर नुकसानों को दूर किया जा सकता है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 03 Jun 2020

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