Reasons of late period without pregnancy | Zealthy

गर्भवती ना होने पर भी मासिक धर्म के देरी से आने के कारण

Reasons of late period without pregnancy in hindi

Garbhvati na hone par bhi masik dharm mein deri hone ke kaaran in hindi

एक नज़र

  • महिला में गर्भवती ना होने पर भी मासिक चक्र में बदलाव आ सकता है।
  • अत्यधिक तनाव एवं अनियमित जीवनशैली से माहवारी पर असर पड़ता है।
  • डायबिटीज़ एवं थाइराइड जैसी बिमारियों के कारण मासिक धर्म में अनियमितता आ सकती है।

महिलाओं में होने वाले मासिक धर्म को पीरियड (period), माहवारी, महीना और एमसी (MC) आदि नामों से जाना जाता है।

हर महीने और सही समय पर माहवारी आना हर महिला के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी होता है।

कई बार नियमित चल रहा मासिक धर्म अचानक से अनियमित या बंद हो जाता है। चिकित्सीय भाषा में इसे एमेनोरीआ (amenorrhea) कहा जाता है।

पीरियड्स आने में देरी होने पर या ना आने पर महिला को चिंता तो होती ही है साथ ही सबसे पहले गर्भ धारण का विचार आता है।

लेकिन यह जानना आवश्यक है कि मासिक चक्र में बदलाव का कारण सिर्फ गर्भवती होना ही नहीं होता बल्कि इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।

इस लेख में ऐसे ही कुछ अहम कारणों के बारे में बात कि गयी है जिनकी वजह से महिला की माहवारी अनियमित हो सकती है।

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इस लेख़ में/\

  1. गर्भवती ना होने पर भी क्यों होते हैं मासिक धर्म अनियमित?
  2. गर्भवती न होने पर भी पीरियड्स ना आएँ तो कब जाना चाहिए डॉक्टर के पास?
  3. निष्कर्ष
 

1.गर्भवती ना होने पर भी क्यों होते हैं मासिक धर्म अनियमित?

Why do periods get irregular even when a woman is not pregnant? in hindi

Pregnant na hone par bhi kyon hote hain periods irregular in hindi

गर्भवती न होने पर भी मासिक धर्म निम्न कारणों से नहीं होते हैं :

  • समय से पहले रजोनिवृति (Early perimenopause)

एक सामान्य महिला में रजोनिवृति 45 साल से 55 साल की उम्र में आती है लेकिन कई महिलाओं में 40 की उम्र से पहले ही मेनोपॉज (menopause) हो जाता है।

इसके कारण उनके शरीर में (ovulation) नियमित समय पर नहीं होता है जिसके चलते उनके पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और कुछ समय बाद बिलकुल बंद हो जाते हैं।

  • मानसिक तनाव और चिंता (Stress)

तनाव जीवन का एक हिस्सा है जो हर किसी को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है।

तनाव बालों का झड़ना, नींद न आना, त्वचा की अनेक समस्याओं के साथ- साथ पीरियड्स में देरी होने का कारण हो सकता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे मस्तिष्क का हिस्सा जो प्रजनन (reproduction) के लिए महत्वपूर्ण हार्मोन पैदा करता है उस हार्मोन का उत्पादन तनाव के कारण कम हो जाता है।

  • दवाईयाँ (Medications)

एंटीबायोटिक्स (antibiotics), कीमोथेरेपी (chemotherapy), एलर्जी (allergy) की दवाइयाँ और एंटीड्रिप्रेसेंट्स दवाएं (antidepressants), रक्तचाप (bloodpressure) की दवाई आदि के सेवन के कारण भी मासिक चक्र प्रभावित होता है।

इसलिए यदि कोई महिला ऐसी कोई दवा ले रही है तो पीरियड आने में देरी हो सकती है या पीरियड आने बंद भी हो सकते हैं।

  • गर्भनिरोधक दवाई का असर (Birth control pills)

जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग कर रही हैं उनके मासिक चक्र में बदलाव आना स्वाभाविक है।

इसके पीछे के कारण की बात की जाये तो, इन गोलियों का सीधा असर ओव्यूलेशन (ovulation) पर होता है, इसलिए माहवारी के चक्र अनियमित हो सकते हैं या पीरियड्स आना बंद हो सकता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार काफी समय तक गर्भनिरोधक गोलियां लेने पर पीरियड्स बंद हो जाते हैं लेकिन ओव्यूलेशन के नियमित हो जाने पर मासिक धर्म खुद शुरू भी हो जाता है।

  • अधिक व्यायाम (Extra workout)

बहुत अधिक व्यायाम करने से भी मासिक धर्म में देरी हो जाती है।

मैराथन या ट्रायथलॉन आदि जैसी क्रिया के लिए प्रशिक्षण लेते वक़्त अत्यधिक शक्ति और फिटनेस की जरूरत होती है इसलिए शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है।

ऐसे में शरीर अन्य काम बंद कर ऊर्जा बचाने लग जाता है।

इसके कारण कई बार महिलाओं में इसका असर मासिक चक्र पर पड़ने लगता है।

वैसे तो समय के साथ यह खुद सही हो जाता है परन्तु ज्यादा समस्या होने पर व्यायाम को थोड़ा कम कर दें और डॉक्टर से परामर्श लें।

  • नींद के चक्र में परिवर्तन (Change in sleeping patterns)

नींद के समय में बदलाव आने पर भी पीरियड्स पर प्रभाव पड़ता है।

उदाहरण के लिए किसी यात्रा पर जाते हुए या सोने का समय निश्चित ना होने पर मासिक चक्र अनियमित होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • वजन का कम ज्यादा होना

वजन का कम या ज्यादा होना भी हॉर्मोन्स को प्रभावित करता है क्योंकि शरीर के फैटी टिशूज़ (fatty tissues) भी हॉर्मोन पर असर डालते हैं।

इसके साथ-साथ वजन में बदलाव होने पर हाइपोथेलेमस (hypothalamus) पर भी असर पड़ता है।

चूँकि हाइपोथेलेमस एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा को नियंत्रित करता है, इसलिए एस्ट्रोजन की मात्रा में बदलाव आने पर पीरियड पर असर पड़ना आम बात है।

  • स्तनपान कराने के कारण (Breastfeeding)

प्रसव के बाद महिलाओं को स्तनपान के समय मासिक धर्म में अनियमितता होने की शिकायत होती है।

इसके पीछे का कारण है गर्भधारण के कारण आया हॉर्मोन्स में बदलाव।

महिला जब स्तनपान कराना बंद कर देती है तो माहवारी स्वयं नियमित हो जाती है।

अगर ऐसा न हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

  • पॉलिसिसिस्टक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome)

PCOD के नाम से जानी जाने वाली यह शारीरिक स्थिति आजकल बहुत ही आम रूप से देखी जा रही है।

पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम होने पर चेहरे व शरीर के अन्य भागों पर बाल बढ़ना, मुहांसे होना, सिरदर्द, नींद ना आना और कमर व पेट के आसपास वजन बढ़ना आदि लक्षण दिखने लगते हैं।

ऐसा शरीर में एण्ड्रोजन (androgen) नामक हार्मोंन के अधिक बनने के कारण होता है जो पुरूष हार्मोन है।

ऐसे कुछ विशिष्ट हॉर्मोनों के स्तर बढ़ जाने पर अंडाशय (ovary) अत्यधिक फॉलिकल्स (follicles) पैदा करने लगते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी इतना परिपक्व नहीं हो पाता है कि डिंब (ovum) जारी कर सकें।

इसके कारण ओवुलेशन नहीं होता है इसलिए माहवारी भी नहीं आती।

  • डायबिटीज (diabetes), थायराइड (thyroid) आदि जैसी बीमारियाँ भी मासिक चक्र को प्रभावित करती हैं।
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2.गर्भवती न होने पर भी पीरियड्स ना आएँ तो कब जाना चाहिए डॉक्टर के पास?

When to visit a doctor for late periods with no pregnancy? in hindi

Kab jana chahiye doctor ke pass

यदि इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि महिला गर्भवती नहीं है पर फिर भी उसकी माहवारी अनियमित है तो कुछ लक्षणों को ध्यान में रखते हुए उसे डॉक्टर से मिलना चाहिए।

निम्न लक्षणों में से कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें :

  • असहनीय पीड़ा
  • उल्टी और चक्कर आना
  • बुखार
  • पेट के निचले हिस्से में भारीपन

पीरियड न होने का इलाज पीरियड न होने के कारण के अनुसार ही किया जाता है।

इसलिए सबसे पहले इसके पीछे का कारण जानना और समझना ज़रूरी है।

इसके लिए डॉक्टर या एक्सपर्ट से परामर्श और सलाह लेनी चाहिए।

उदाहरण के लिए, कुछ मामलों में डॉक्टर हॉर्मोन थेरेपी (hormone therapy) की सलाह दे सकते हैं और कुछ महिलाओं में अत्यधिक व्यायाम करने और पौष्टिक खाना न खाने के कारण मासिक धर्म में होने वाली गड़बड़ी को अपनी जीवनशैली में कुछ परिवर्तन व सही पौष्टिक डाइट से ठीक किया जा सकता है।

 

3.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

नियमित मासिक धर्म आना हर महिला के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है।

ऐसा ना होने पर महिला के शरीर के साथ-साथ उसके आम जीवन पर भी असर पड़ने लगता है।

गर्भवती ना होने पर भी पीरियड ना आना चिंता का विषय है जिसके पीछे अन्य कारण होते हैं जिनका पता करके जल्द से जल्द उनका हल निकालना चाहिए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 22 Nov 2019

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