गर्भावस्था के दौरान एमिनो टेस्ट की प्रक्रिया, परिणाम और जोखिम

Procedure, result and risk of amniocentesis or amnio test during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran amniocentesis aur amnio test ki prakriya, parinam aur jokhim kya hai in hindi


एक नज़र

  • ट्रिपल मार्कर परीक्षण के असामान्य परिणाम आने के बाद एमनियोसेंटेसिस (एमिनो) टेस्ट किया जाता हैं।
  • एएफपी - अल्फा-भ्रूण प्रोटीन (AFP - alpha foetus protein) एक प्रकार का प्रोटीन है जो भ्रूण द्वारा निर्मित होता है।
  • जांच के दौरान यदि भ्रूण में कई तरह की जटिलताएं सामने आती हैं तो डॉक्टर्स को निर्णय लेना आसान होता है कि गर्भपात करवाना है या नहीं।
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Introduction

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एमनियोसेंटेसिस या एमिनो टेस्ट एक डायग्नोस्टिक (diagnostic) परीक्षण है, जिसके द्वारा भ्रूण की असामान्यताओं का पता लगाया जाता है। अगर आपके ट्रिपल मार्कर परीक्षण (गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं व हॉरमोन के स्तर को मापने के लिए किया जाने वाला टेस्ट) के परिणाम गलत या असामान्य होते हैं तो डॉक्टर एमनियोसेंटेसिस टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। कुछ माता-पिता को अपने आने वाले बच्चे में अनुवांशिक या जेनेटिक (genetic) बीमारी के होने का डर रहता है, इस वजह से भी वो एमनियोसेंटेसिस टेस्ट करवाते हैं। इस टेस्ट के द्वारा भ्रूण में किसी प्रकार के आनुवंशिक विकार के मौजूद होने का पता चलता है।

एमनियोसेंटेसिस या एमिनो टेस्ट के द्वारा डॉक्टर को भ्रूण के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। एमनियोसेंटेसिस उन महिलाओं का भी करवाया जाता है जिनके अल्ट्रासाउंड या लैब स्क्रीन टेस्ट के परिणाम असामान्य आएं हों। वहीं जिन महिलाओं के परिवार में जन्मदोष का कोई इतिहास है या पहली गर्भावस्था व बच्चे में बर्थ डिफ़ेक्ट रहा हो, उन्हें भी अमीनो टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा एब्नॉर्मल जेनेटिक टेस्ट रिपोर्ट आने पर भी ये टेस्ट किया जाता है।

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इस लेख़ में

 

एमनियोसेंटेसिस कैसे किया जाता है ?

How amniocentesis or amnio test is performed in hindi

Amniocentesis test kaise kiya jata hai in hindi

एमनियोसेंटेसिस करने से पहले भ्रूण की पोजीशन को एक अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिये देखा जाता है।

इसके बाद एक सुई का उपयोग करके एमनियोटिक थैली से एमनियोटिक द्रव का सैंपल निकाला जाता है।

एमनियोटिक द्रव, उन कोशिकाओं में होता है जो भ्रूण को सुरक्षित रखती हैं।

इस प्रक्रिया में लगभग 45 मिनट का समय लगता है, हालांकि द्रव का सैंपल लेने में पांच मिनट से कम समय लगता है।

एमनियोटिक द्रव के सैंपल को विश्लेषण के लिए लैब में भेजा जाता है।

हालांकि, इसके परिणाम आने का समय निश्चित नहीं होता है।

कुछ मामलों में कुछ दिन तो कुछ मामलों में कुछ हफ़्ते तक का समय लग जाता है।

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एमनियोसेंटेसिस टेस्ट कब किया जाता है?

When is amniocentesis performed in hindi

amniocentesis test kab kiya jata hai in hindi

आमतौर पर एमनियोसेंटेसिस टेस्ट 15वें से 18वें हफ्ते के बीच किया जाता है।

एमनियोसेंटेसिस की सटीकता लगभग 99.4% है।

कुछ मामलों में डॉक्टर एमनियोसेंटेसिस टेस्ट को तीसरी तिमाही में भी करवाने की सलाह देते हैं।

एमनियोसेंटेसिस टेस्ट से यह निर्धारित किया जा सकता है कि बच्चे के फेफड़े प्रसव के लिए पर्याप्त परिपक्व हैं या नहीं।

यह टेस्ट एमनियोटिक द्रव का मूल्यांकन करने के लिए भी किया जाता है।

अगर किसी महिला की मेम्ब्रेनस (membranes) समय से पहले टूट जाती है तो गर्भाशय संक्रमण की जांच के लिए भी अमीनो टेस्ट की सलाह दी जाती है।

कुछ मामलों में भ्रूण में आरएच रोग (Rh disease) और फेटल एनीमिया (fetal anemia) जांचने के लिए भी यह टेस्ट किया जाता है।

इस टेस्ट के जरिये डॉक्टर यह निर्धारित करते हैं कि क्या भ्रूण को लाइफ सेविंग ब्लड ट्रांस फ्यूज़न (lifesaving blood transfusions) की आवश्यकता है।

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?
 

एमनियोसेंटेसिस टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

What do the results of amniocentesis test indicate ?in hindi

amniocentesis test ke parinam kya batate hai in hindi

एमनियोसेंटेसिस एक डायग्नोस्टिक टेस्ट होता है जो उच्च स्तर की सटीकता के साथ, क्रोमोसोम असामान्यताओं, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स (neural tube defects) और आनुवंशिक विकारों का पता लगाता है।

एमनियोसेंटेसिस टेस्ट सिकल सेल रोग (sickle cell disease), मांसपेशी दुर्विकास (muscular dystrophy), टे-सैक्च (tay-sachs) जैसी बीमारियां और कुछ न्यूरल ट्यूब दोषों (neural tube defects) का पता लगा सकता है (ऐसे रोग जहां मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी ठीक से विकसित नहीं होती है) जैसे - स्पाइना बिफिडा (spina bifida) और एनेस्थली (anencephaly)।

एमनियोसेंटेसिस के समय अल्ट्रासाउंड किया जाता है, इससे उन जन्म दोषों का पता लग सकता है जो एमनियोसेंटेसिस टेस्ट के द्वारा पता नहीं किए जा सकते हैं।

जैसे - क्लैफ्ट पैलेट (cleft palate) क्लैफ्ट लिप (cleft lip), क्लब फूट (club foot) या हृदय दोष।

हालांकि इस टेस्ट से जन्म के दोषों की गंभीरता को माप पाना आसान नहीं है।

अल्फा-फेटोप्रोटीन स्तर अल्ट्रा साउंड्स (Alpha-fetoprotein level ultrasounds) हाई लेवल अल्ट्रासाउंड होते हैं , इनके द्वारा जन्म के दोषों की गंभीरता को मापा जा सकता हैं।

एमनियोसेंटेसिस टेस्ट के जरिये कई तरह के परिणाम आते हैं :

  • क्रोमोसोम असामान्यता (Chromosome abnormalities)

क्रोमोसोम असामान्यताओं में डाउन सिंड्रोम (down syndrome) या ट्राईसोमी 21 (trisomy 21) सबसे आम असामान्यता है।

  • न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स (Neural tube defects)

न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स में स्पाइना बिफिडा (spina bifida) जैसे विकार शामिल हैं।

  • आनुवंशिक विकार (Genetic disorders)

आनुवंशिक विकारों में सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) जैसे विकार शामिल हैं।

  • पेटर्निटी टेस्ट (Paternity test)

पेटर्निटी टेस्ट करने के लिए यानि बच्चे के डीएनए का पता लगाने के लिए लिए भी इस टेस्ट के परिणाम उपयोगी होते हैं।

  • अन्य परिणाम (Other results)

प्रेगनेंसी के आख़िरी स्टेज में बच्चे के फेफड़े की स्थिति।

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माँ या बच्चे के लिए एमनियोसेंटेसिस टेस्ट के जोखिम और दुष्प्रभाव

Risks and side effects of amniocentesis test for mother and baby in hindi

Maa ya bachche ke liye amniocentesis test ke jokhim aur dushparinam in hindi

डॉक्टर्स के अनुसार, एमनियोसेंटेसिस एक सुरक्षित प्रक्रिया होती है क्योंकि यह एक इनवेसिव डायग्नोस्टिक टेस्ट (invasive diagnostic test) हैं जो भ्रूण में होने वाले संभावित जोखिमों की जानकारी देकर होने वाले खतरे को कम करता है।

एक शोध के अनुसार, एमनियोसेंटेसिस का सबसे बड़ा ख़तरा गर्भपात से संबंधित जोखिम होता है।

हांलाकि गर्भपात का ख़तरा 400 में से 1 महिला को होने का रहता है।

एमनियोसेंटेसिस टेस्ट के जोखिम और दुष्प्रभाव निम्न हैं :

  • गर्भपात के होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे गर्भाशय में संक्रमण, वाटर ब्रेकिंग (water breaking), एक्सेसिव ब्लीडिंग (excessive bleeding) या समय से पहले प्रसव पीड़ा होना आदि।
  • बच्चे का सुई के संपर्क में आना एक जोखिम है, जो लगभग असंभव है क्योंकि डॉक्टर लगातार सोनोग्राम का उपयोग करते हुए इस टेस्ट के लिए द्रव लेते हैं।
    लेकिन इस दौरान जब सुई गर्भवती महिला की त्वचा में प्रवेश करती है तो महिला को तेज दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • शोध से पता चला है कि कुछ बच्चे जन्म के समय से ही सांस की तकलीफ़ से पीड़ित होते हैं।
    यह उन बच्चों में होता है जिनकी माँ का एमनियोसेंटेसिस टेस्ट हुआ होता है।
    उनमें जन्म के समय सांस की तकलीफ़ के होने का लगभग 1% आसार होते हैं।
    बच्चे के जन्म के बाद सांस की तकलीफ़ का इलाज किया जा सकता है लेकिन इसके लिए बच्चे को नर्सरी में रखने की आवश्यकता होती है, ताकि बच्चे की उचित देखभाल हो सके।
  • इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद महिला को कुछ अन्य दुष्प्रभावों का भी अनुभव हो सकता है जिनमें शामिल हैं - ऐंठन होना, द्रव का रिसाव होना, सुई से प्रभावित जगह पर जलन होना।
और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

एमनियोसेंटेसिस एक सुरक्षित प्रक्रिया होती है, लेकिन इस टेस्ट को करवाने से पहले डॉक्टर से इसके जोखिम और फ़ायदों के बारे में चर्चा करना आवश्यक है।

एमनियोसेंटेसिस टेस्ट के जरिए आपके बच्चे में किसी भी प्रकार के विकार के बार में पता लगाकर उससे होने वाले जोखिम से बचा जा सकता है।

इसके साथ ही सही समय पर जटिलताओं का इलाज भी किया जा सकता है।

आपके डॉक्टर आपको इसके परिणाम, लाभ, प्रक्रिया और होने वाले जोखिम के बारे में बता सकते हैं।

टेस्ट के बाद अगर आपको कोई भी स्वास्थ्य समस्या आती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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