योनि जांच की प्रक्रिया

Procedure of vaginal examination in hindi

yoni ke andruni bhag jane


एक नज़र

  • योनि की जांच करवाने में प्रत्येक महिला को डर लगता है।
  • यह एक भ्रांति मात्र है कि विशेष स्थिति में ही योनि की जांच की जानी चाहिए।
  • जननांगों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योनि की जांच जरूरी होती है।
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Introduction

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महिला शरीर में जननांग का स्वास्थ्य जिन भागों पर निर्भर करता है, उनमें योनि-क्षेत्र का बहुत महत्व माना जाता है। योनि क्षेत्र वास्तव में कुछ छोटे-छोटे अंगों का एक समूह होता है जिनकी बनावट मांसपेशियों से मिलकर बनी होती है। योनि संबंधी परेशानियाँ होने पर योनि की जांच अनिवार्य हो जाती है। लेकिन, महिलाएं इस जांच की प्रक्रिया से अंजान होने के कारण डॉक्टर के पास जाने से डरती हैं। महिला अंगों के बारे में जानने की उत्सुकता होने के बावजूद, इस बारे में खुलकर बात करने में महिलाओं को संकोच होता है। इस कारण कई बार महिलाएं इस प्रकार की परेशानी का सामना करती हैं, जिनसे आसानी से बचा जा सकता है।

ऐसी ही स्थिति तब उत्पन्न होती है जब महिला को अपने शरीर के निचले भाग में जलन, खुजली या दर्द महसूस होता है, लेकिन डर और शर्म के कारण डॉक्टर के पास वो नहीं जाती हैं। इस लेख के माध्यम से योनि की जांच (yoni ke andruni bhag) प्रक्रिया की जानकारी देकर, आपके इस डर और भय को कम करके, सही समय पर इलाज के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया है।

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इस लेख़ में

 

योनि या वजाइना क्या है

What is Vagina in hindi

योनि कितने प्रकार की होती है जाने

सामान्य रूप से महिला शरीर के निचले अंगों के समूह को ही योनि-क्षेत्र या योनि (vagina) मान लिया जाता है। जबकि वास्तविकता में योनि, महिला जननांगों के समूह (yoni ka andruni bhag) का एक भाग होता है। महिला जननांग जिसे वल्वा (vulva) कहा जाता है, इसमें जिन छोटे-छोटे अंगों का समूह होता है, वह है यूरेथरा (urethera), लेबिया (labia), गर्भाशय का मुख (cervical head) और क्लाइटोरिस (clittoris)आदि। योनि, मांसपेशियों का समूह है, जो गर्भाशय से लेकर गर्भाशय की ग्रीवा तक एक गोल लचीली नाली के रूप में बनी होती है।

इस प्रकार यह भी कह सकते हैं कि गर्भाशय के मुख से लेकर गर्भाशय ग्रीवा तक का लचीला और गोल नली के आकार का भाग योनि कहलाता है। यह भाग शेष शरीर की भांति, हर महिला का अलग-अलग रूप और आकार में होता है। क्या आप जानती हैं कि योनि, नारी के शरीर का वह हिस्सा होता है जहां से मासिक धर्म होने पर रक्त, शरीर से बाहर निकलता है। इसके अतिरिक्त प्रसव के समय शिशु जन्म भी शरीर के इसी भाग के द्वारा होता है। आइए विस्तार से योनि संबंधित जानकारी को देखते हैं।

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योनि की जांच कब जरूरी है

When vaginal examination is required in hindi

योनि कितने प्रकार की होती है जानें

जब भी आपको इनमें से कोई भी परेशानी महसूस हो, तो समझ जाएँ कि आपको अपने महिला चिकित्सक के पास जाकर योनि की जांच का समय आ गया है।

  • इन स्थितियों में योनि की जांच जरूरी है : -
  • पेट के निचले हिस्से या गुप्तांगों के पास बिना किसी कारण के दर्द होना
  • अंतःवस्त्रों में सफ़ेद पानी जैसा दिखाई देना और उसके कारण गुप्तांगों में जलन, खुजली या बदबू महसूस होना
  • 15 वर्ष की आयु हो जाने पर भी मासिक धर्म का शुरू न होना
  • मासिक धर्म होने पर 10 दिन से अधिक हो जाने पर भी खून का आना
  • संभोग करने के बाद नियत समय पर मासिक धर्म का न आना
  • मासिक धर्म के समय असहनीय पेट में दर्द होना

अगर आपको इनमें से किसी भी एक या एक से अधिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है तब बिना देर किए, चिकित्सक से मिलना चाहिए।

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योनि के रोग क्या हैं

Vaginal disease in hindi

yoni kise kahte hai hindi jane

योनि से जुड़े कई प्रकार के रोग होते हैं, जिसकी जानकरी हर महिला को होना आवश्यक है। इसलिए अब हम आपको योनि से जुड़े रोग की जानकारी देने जा रहे हैं।

योनि से जुड़े रोग :-

1. वेजिनोसिस (Bacterial vaginosis) - बैक्टीरियल वेजिनोसिस एक आम योनि संक्रमण है, जो डिस्चार्ज, गंध और जलन का कारण बनता है।[1] यह महिलाओं को एचआईवी सहित यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) का शिकार बना सकता है। ये रोग योनि में बैक्टीरिया के अतिवृद्धि के कारण होता है।

2. (vaginitis) - ये एक वायरस जैसे हर्पीज सिम्पलेक्स वायरस (एचएसवी) या ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के कारण होने वाली सूजन है, जो सेक्स के माध्यम से फैलता है। जननांगों पर घाव या मस्से दर्दनाक हो सकते हैं। इस तरह का योनि संक्रमण, प्रोटोजोन पारासाइट के कारण होता है, जो शारीरिक संबंध स्थापित करने के दौरान फैलता है। ट्राइकोमोनिएसिस एक व्यापक, वैश्विक स्वास्थ्य चिंता है और लगातार इसमें वृद्धि हो रही है। महिला जननांग पथ के संक्रमण से वैजिनाइटिस और सर्वीसाइटिस सहित कई लक्षण हो सकते हैं।[2]

3. इन्फेक्शन (Yeast infection) - यीस्ट इन्फेक्शन, आमतौर पर कैंडिडा अल्बिकंस (Candida albicans) नामक फंगस के कारण होता है। ईस्ट कैंडिडा अल्बिकन्स पिछले दो दशकों के दौरान एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरा है। इस प्रजाति के कारण होने वाली बीमारियों का स्पेक्ट्रम योनि संक्रमण से होता है, जो कि अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार 75% महिलाओं को प्रभावित करता है।[3]

4.क्लैमाइडिया (Chlamydia) - क्लैमाइडिया महिलाओं में होने वाला सबसे आम यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) है। जो आमतौर पर 18 से 35 की उम्र की उन महिलाओं की प्रभावित करता है, जिनके एक से अधिक सेक्स पार्टनर्स होते हैं। महिलाओं में जननांग प्रणाली का क्लैमाइडियल संक्रमण पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज़, फैलोपियन ट्यूब इनफर्टिलिटी, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, क्रोनिक पेल्विक पेन जैसी गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है।[4]

5.गोनोरिया (Gonorrhea) - गोनोरिया एक और आम संक्रमण है, जो सेक्स के माध्यम से फैलता है। यह अक्सर क्लैमाइडिया के साथ आता है।

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योनि की जांच कैसे होती है

How Vaginal Examination is done in hindi

योनि की जानकारी प्राप्त करें

भारत देश में छोटे शहरों की अधिकतर महिलाएं अनजाने डर के कारण योनि की जांच करवाना पसंद नहीं करती हैं। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि योनि की जांच प्रक्रिया से पूरी तरह से अंजान होने के कारण उन्हें इस जांच में डर लगता है।

आपके इस डर को कम करने के लिए एक सामान्य योनि जांच की प्रक्रिया को यहाँ संक्षेप में बता रहे हैं : -

योनि जांच की तैयारी - अधिकतर चिकित्सक महिलाओं की योनि जांच के लिए उन्हें उस समय आने के लिए कहते हैं, जब वो मासिक धर्म से मुक्त हो चुकी होती हैं। मासिक धर्म की स्थिति में योनि की जांच करना असंभव होता है।

योनि की जांच प्रक्रिया - महिला चिकित्सक आपको योनि की जांच करने के लिए जांच टेबल/बेड पर इस प्रकार सीधे लेटने को कहेगी जिसमें आपके पैर मुड़े होते हैं। इसके अलावा यह भी हो सकता है कि आपको इस प्रकार लेटने के लिए कहा जाये जिसमें आपके पैर टेबल/बेड से बाहर निकल कर दोनों तरफ लगे छोटे स्टैंड पर टिके हों। इससे चिकित्सक को आपके योनि की जांच करने में आसानी होती है।

इसके बाद चिकित्सक जरूरत के अनुसार निम्न प्रकार से योनि की जांच कर सकते हैं : -

बाहरी जांच - महिला चिकित्सक आपकी योनि को टॉर्च की सहायता से बाहर से देखकर किसी परेशानी का अंदाज़ा लगाने का प्रयत्न कर सकती है। इस जांच के द्वारा आपकी योनि में किसी प्रकार की लाली, डिस्चार्ज, फोड़ा, खुजली के निशान या कुछ भी ऐसा जो नहीं होना चाहिए, देखने की कोशिश की जाती है।

उपकरण जांच - इसके बाद चिकित्सक एक उपकरण (speculum) की सहायता से आपकी योनि की जांच कर सकती हैं। इसके लिए वो एक उपकरण की सहायता से आपकी योनि को थोड़ा फैलाने का प्रयास करती हैं। इस समय आपको बिना डर के चिकित्सक के साथ सहयोग करना चाहिए।

पैप स्मियर जांच - इसके लिए चिकित्सक आपकी योनि में से एक कॉटन बड (cotton bud) से थोड़ा सा अंश लेकर उसे लैब जांच के लिए भेज सकते हैं।

अन्य जांच - अगर चिकित्सक इस जांच को आगे बढ़ाना चाहती हैं तब वे अपने दस्ताने वाले हाथ की दो उँगलियों से योनि की अंदरूनी जांच करती हैं। यह जांच वह तब करती हैं जब उन्हें गर्भाशय और अंडाशय में आने वाली किसी परेशानी की जांच करना चाहती हैं।

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क्या योनि की जांच न करवाना हानिकारक है

Is avoiding vaginal examination harmful in hindi

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जी हाँ, अगर आपको गुप्तांग में किसी प्रकार की कोई परेशानी हो रही है और आप अपनी योनि की जांच नहीं करवाती हैं, तब इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए बिना किसी भय और शर्म के आपको योनि की जांच के लिए जाना चाहिए। योनि की परेशानी को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से ये बाँझपन की स्थिति का कारण भी बन सकती है।

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योनि की जांच से डर क्यों

Fear of vaginal examination in hindi

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पहली बार योनि की जांच के लिए जाते समय डर लगना स्वाभाविक है। इसलिए आप जब भी चिकित्सक के पास अपनी योनि जांच के लिए जाएँ, तब प्राणायाम और गहरी सांस जैसे हल्के व्यायाम की मदद से स्वयं को तनाव मुक्त रखने का प्रयास करें। तनाव युक्त शरीर में मांसपेशयों में कठोरता आ जाती है और ऐसे में आपको सामान्य से अधिक दर्द होने की संभावना हो सकती है।

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निष्कर्ष

Conclusion in hindi

योनि कितने प्रकार की होती है जाने

महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को मजबूत रखने और हमेशा हेल्दी रहने के लिए शरीर के किसी भी अंग में होने वाली परेशानी को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर आपको अपने गुप्तांगों में किसी प्रकार की असुविधा महसूस हो रही है तब अविलंब योनि-जांच के लिए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। ऐसा करके आप भविष्य में आने वाली विभिन्न जानलेवा परेशानियों से बच सकती हैं। इसके अलावा साफ-सफाई रखकर भी आप योनि के परेशानियों से दूर रह सकती हैं।

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references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

Bagnall P, Rizzolo D.“Bacterial vaginosis: A practical review.” JAAPA. PMID: 29135564.

2 .

Edwards T, Burke P, et al.”Trichomonas vaginalis: Clinical relevance, pathogenicity and diagnosis.” Crit Rev Microbiol. PMID: 25383648.

3 .

Poulain D. “Candida albicans, plasticity and pathogenesis.” Crit Rev Microbiol.PMID: 23962107.

4 .

Frej-Mądrzak M, Gryboś A, et al.“PCR diagnostics of Chlamydia trachomatis in asymptomatic infection by women.” Ginekol Pol.PMID: 29664545.

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 23 Sep 2020

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